गोलाबाजार।गोला नगर पंचायत के विस्तारित क्षेत्रों में बने सार्वजनिक शौचालय बदहाली का शिकार है। कई शौचालय निर्माण के बाद से कभी खुले ही नहीं, जबकि कागजों में केयर टेकरों की नियुक्ति दर्शाई गई है। इससे स्वच्छता के दावे खोखले साबित हो रहे हैं और स्थानीय लोग खुले में शौच करने को मजबूर हैं।
एक ओर जहां कुछ शौचालयों का मल – मुत्र सीधे पवित्र सरयू नदी में गिराकर उसकी स्वच्छता से खिलवाड़।किया जा रहा है, वहीं दूसरी ओर स्वच्छता के प्रतीक के रूप में बनाए गए कई सार्वजनिक शौचालय खुद बदहाली का शिकार है। स्थिति यह है कि कई शौचालय निर्माण वर्ष से लेकर आज तक कभी उपयोग में नहीं लाए गए।
नगर पंचायत के विस्तारित क्षेत्रों में सबसे खराब हालात देखने को मिल रहे हैं। बार्ड नंबर 4 भवानिया में स्थित एक सार्वजनिक शौचालय का निर्माण लगभग चार वर्ष पूर्व ग्राम सभा के समय हुआ था। बाद में क्षेत्र के नगर पंचायत में शामिल होने पर लाखों रुपये खर्च कर इसमें टाइल्स आदि लगवाए गए, लेकिन यह आज तक शुरू नहीं हो सका। स्थानीय लोगों का कहना है कि मरम्मत और सौंदर्यी करण केवल कागजी साबित हुआ है।
इस सम्बन्ध में वार्ड सभासद संदीप सोनकर ने बताया कि उन्हें इस बारे में जानकारी नहीं है और मामले की जांच की जा रही है। वहीं, लोगों का आरोप है कि जन प्रतिनिधियों की उदासीनता के चलते यह समस्याएँ जस के तस बनी हुए हैं।
वार्ड नंबर 10 में स्थिति चिंताजनक है। यहां रानीपुर, अतरौरा सब्जी मंडी और सरकारी पशु चिकित्सालय के सामने तीन सार्वजनिक शौचालय मौजूद हैं, लेकिन तीनों पर हमेशा ताला लटका रहता है। इसी तरह वार्ड नंबर 11 ब्योरी में स्थित सार्वजनिक शौचालय भी बंद पड़ा है। ये सभी शौचालय हैं विस्तारित क्षेत्र में आते हैं, जो नगर पंचायत की अव्यवस्था का स्पष्ट उदाहरण बन चुके हैं।
यह स्थित पूरे विस्तारित क्षेत्र की है। स्थानीय नागरिकों का कहना है कि स्वच्छता के नाम पर लाखों- करोड़ों रुपए खर्च किए जा रहे हैं और योजनाओं का जोर- शोर से प्रचार हो रहा हैं, लेकिन धरातल पर कोई ठोस बदलाव नजर नहीं आ रहा है। सभासदों, चेयरमैन और अधिशासी अधिकारी के निष्क्रियता के कारण आमजन को खुले में शौच के लिए मजबूर होना पड़ रहा है, जिसका सीधा असर पर्यावरण और सरयू नदी पर पड़ रहा है। लोगों ने बंद पड़े शौचालयों को तत्काल चालू कराने की मांग की है।
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