जहां प्राकृतिक सौंदर्य और रोमांच का मिलन होता है, में मंगलवार को गोलियों की गूंज के साथ चारों तरफ खून बिखरा

धरती के स्वर्ग में शर्मसार हो गई इंसानियत, चारों तरफ बिखरा खून, सिर्फ इंसान का ही नहीं बल्कि इंसानियत और कश्मीरियत का भी हैं।

आतंकियों ने चुन-चुन कर गैर मुस्लिमों पर ऐसे गोलियां बरसाई, जैसे कोई बच्चा अपने आंगन में खेलता है। किसी से नाम पूछा, किसी से उसका पहचानपत्र मांगा। अगर किसी को जिंदा छोड़ा तो सिर्फ अपनी आपबीती की कहानी सुनाने के लिए।

एक नवविवाहिता मैदान में खून से लथपथ पड़े अपने पति के सिर को अपनी गोद मे लिए बैठी थी। उसने जब स्थानीय लोगों को अपनी तरफ आते देखा तो एक उम्मीद में उनकी तरफ भागी। पास जाकर बोली, मेरे पति को बचा लो। उसने कहा कि मैं और मेरे पति यहां पर बैठकर भेल खा रहे थे।

इस बीच आतंकी आते हैं और कहते हैं ये मुस्लिम नहीं लग रहे, इन्हें मार दो और मेरे पति को गोली मार दी। स्थानीय लोगों ने उसे दिलासा देते हुए कहा कि घबराओ मत, अब हम आ गए हैं। यह सुनने के बाद वह फिर अपने पति के पास जा पहुंची और उसे उठाने का प्रयास करने लगी।

एक अन्य महिला ने रोते हुए कहा कि मेरे पति को बचा लो…वो वहां पर पड़े हैं। वहीं एक अन्य महिला अपने घायल पति को कुर्सी पर बैठाए हुए थी। उसने घोड़े वालों को देखते ही प्लीज से बचा लों।

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