एनवीएचसीपी द्वारा वायरल हेपेटाइटिस उन्मूलन हेतु सफल प्रशिक्षण सम्पन्न

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गोरखपुर, 5 मार्च 2025। राष्ट्रीय वायरल हेपेटाइटिस नियंत्रण कार्यक्रम (NVHCP) के तहत एम्स गोरखपुर में नोडल/मेडिकल अधिकारियों के लिए तीन दिवसीय व्यापक प्रशिक्षण कार्यक्रम (3-5 मार्च) का सफल आयोजन किया गया। सामुदायिक एवं परिवार चिकित्सा विभाग और गैस्ट्रोएंटेरोलॉजी विभाग द्वारा आयोजित इस कार्यक्रम का उद्देश्य  हेपेटाइटिस बी और सी के प्रभावी निदान, उपचार, और प्रबंधन में चिकित्सा अधिकारियों की क्षमता विकसित करना था। यह प्रशिक्षण राष्ट्रीय स्तर पर वायरल हेपेटाइटिस के बोझ को कम करने और 2030 तक इसके उन्मूलन की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम था।

“कार्यक्रम का उद्घाटन एवं प्रारंभिक सत्र”

कार्यक्रम की शुरुआत डॉ. अनिल कोपारकर (अतिरिक्त प्रोफेसर, सामुदायिक एवं परिवार चिकित्सा विभाग) और डॉ. सौरभ केडिया (अतिरिक्त प्रोफेसर, गैस्ट्रोएंटेरोलॉजी विभाग) द्वारा उद्घाटन संबोधन से हुई। डॉ. विकासेंदु अग्रवाल, राज्य नोडल अधिकारी, एनवीएचसीपी उत्तर प्रदेश ने वर्चुअल माध्यम से जुड़कर प्रशिक्षण के उद्देश्यों को स्पष्ट किया, जबकि एम्स गोरखपुर के चिकित्सा अधीक्षक प्रो. अजय भारती और डीन (अकादमिक) डॉ. महिमा मित्तल ने कार्यक्रम की महत्ता पर प्रकाश डाला।

इसके बाद, परिचय एवं आइस-ब्रेकिंग सत्र आयोजित किया गया, जिसमें प्रतिभागियों ने एक-दूसरे से परिचय प्राप्त किया और प्रशिक्षण के नियम निर्धारित किए।

“प्रशिक्षण के प्रमुख विषय”

तीन दिवसीय प्रशिक्षण में हेपेटाइटिस बी और सी के व्यापक पहलुओं को कवर किया गया:
– पहले दिन एनवीएचसीपी की रूपरेखा, वायरल हेपेटाइटिस की वैश्विक और राष्ट्रीय स्थिति, लिवर की संरचना एवं कार्यप्रणाली, संक्रमण और रोकथाम रणनीतियाँ, तथा हेपेटाइटिस बी टीकाकरण पर गहन चर्चा हुई।

– दूसरे दिन हेपेटाइटिस बी और सी के परीक्षण,

सीरोलॉजिकल मार्कर्स की व्याख्या, तीव्र (acute) एवं दीर्घकालिक (chronic) हेपेटाइटिस के बीच अंतर, नैदानिक प्रबंधन एवं उपचार रणनीतियाँ पर विशेषज्ञ सत्र हुए।

– तीसरे दिन विशेष परिस्थितियों में हेपेटाइटिस का

प्रबंधन, MIS-NVHCP पोर्टल पर डेटा प्रबंधन, उपचार स्थलों का चयन, सेवाओं का संगठन, वित्तीय योजना, और कार्यक्रम की निगरानी एवं मूल्यांकन (M&E) रूपरेखा जैसे महत्वपूर्ण विषयों पर चर्चा हुई।

विशेषज्ञों द्वारा सत्र

प्रशिक्षण के दौरान कई प्रतिष्ठित विशेषज्ञों ने अपने व्याख्यान दिए:
– डॉ. प्रशांत ठाकुर, डॉ. आलोक सिंह, डॉ. दावेश यादव और डॉ. सौरभ केडिया ने हेपेटाइटिस बी और सी के परीक्षण, निदान, और उपचार पर गहन चर्चा की।
– डॉ प्रो. राजकिशोर सिंह ने गर्भावस्था, किडनी फेल्योर, HIV और HCV सह-संक्रमण, सिरोसिस और लिवर कैंसर से पीड़ित मरीजों में हेपेटाइटिस बी के उपचार की रणनीतियाँ प्रस्तुत कीं।

– डॉ. विकासेंदु अग्रवाल और डॉ. अभिषेक यादव ने वर्चुअल सत्र के माध्यम से एनवीएचसीपी के वित्तीय प्रबंधन और निगरानी प्रणाली को विस्तार से समझाया।

सत्रों की व्यावहारिकता और समापन समारोह

प्रशिक्षण को ऑनलाइन एवं ऑफलाइन इंटरैक्टिव सत्रों, केस स्टडीज और लाइव डेमोंस्ट्रेशन के माध्यम से अधिक प्रभावी बनाया गया। अंत में प्रश्नोत्तर सत्र, पोस्ट-टेस्ट, और फीडबैक सत्र आयोजित किए गए। समापन समारोह में प्रतिभागियों को प्रमाणपत्र वितरित किए गए।

कार्यक्रम की सराहना एवं बधाई

एम्स गोरखपुर की कार्यकारी निदेशक मेजर जनरल प्रो. डॉ. विभा दत्ता ने इस सफल प्रशिक्षण कार्यक्रम के लिए आयोजन समिति, संकाय सदस्यों और प्रतिभागियों को बधाई दी। उन्होंने एनवीएचसीपी के लक्ष्य को साकार करने में ऐसे प्रशिक्षण कार्यक्रमों की भूमिका को रेखांकित किया और प्रशिक्षित मेडिकल अधिकारियों से अपने-अपने क्षेत्रों में ज्ञान का प्रसार कर हेपेटाइटिस उन्मूलन में योगदान देने का आह्वान किया।

हेपेटाइटिस उन्मूलन की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम

यह प्रशिक्षण NVHCP के लक्ष्य – “2030 तक वायरल हेपेटाइटिस को सार्वजनिक स्वास्थ्य समस्या के रूप में समाप्त करने” की दिशा में एक महत्वपूर्ण प्रयास था। यह न केवल स्वास्थ्य सेवा प्रदाताओं की क्षमता निर्माण में सहायक होगा, बल्कि सामुदायिक स्तर पर जागरूकता बढ़ाने, प्रारंभिक पहचान, और समय पर उपचार को भी प्रोत्साहित करेगा।

एनवीएचसीपी का यह मिशन सस्ती और सुलभ चिकित्सा सेवाओं के माध्यम से वायरल हेपेटाइटिस के बोझ को कम करने और स्वस्थ भारत की दिशा में कदम बढ़ाने का संकल्प है।

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