Category: हेल्थ
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एम्स गोरखपुर में प्रथम पोस्टग्रेजुएट एंडो-ट्रेनर स्किल लैब का उद्घाटन
गोरखपुर, 16 मई 2026। एम्स गोरखपुर के सर्जरी विभाग में आज सर्जिकल शिक्षा एवं प्रशिक्षण के क्षेत्र में एक नई उपलब्धि जुड़ गई, जब विभाग में प्रथम पोस्टग्रेजुएट एंडो-ट्रेनर स्किल लैब का उद्घाटन किया गया। इस अत्याधुनिक स्किल लैब का उद्घाटन संस्थान की कार्यकारी निदेशक रिटायर्ड मेजर जनरल प्रोफेसर डॉ. विभा दत्ता द्वारा मेल सर्जरी वार्ड में किया गया।
इस अवसर पर सामान्य शल्य चिकित्सा विभाग के अध्यक्ष डॉ. गौरव गुप्ता सहित विभाग के वरिष्ठ संकाय सदस्य डॉ. धर्मेंद्र पिपल, डॉ. रवि गुप्ता, डॉ. मुकुल सिंह, डॉ. हरिकेश यादव, डॉ. रजनीश, डॉ. शहनवाज एवं डॉ. मनीष उपस्थित रहे। इसके अतिरिक्त प्रसूति एवं स्त्री रोग विभाग से डॉ. शिखा सेठ तथा न्यूरोसर्जरी विभाग से डॉ. नीरज कनौजिया सहित अन्य विभागों के संकाय सदस्य भी कार्यक्रम में उपस्थित रहे। कार्यक्रम में नर्सिंग स्टाफ तथा अन्य सहयोगी कर्मचारियों की भी सक्रिय सहभागिता रही।
यह पीजी स्किल लैब सर्जिकल स्पेशियलिटी के स्नातकोत्तर विद्यार्थियों को लेप्रोस्कोपिक एवं मिनिमली इनवेसिव सर्जरी की आधुनिक तकनीकों का प्रशिक्षण प्रदान करेगी। एंडो-ट्रेनर आधारित इस सुविधा में छात्र वास्तविक ऑपरेशन से पूर्व सिमुलेशन के माध्यम से सर्जिकल उपकरणों का सुरक्षित एवं व्यावहारिक अनुभव प्राप्त कर सकेंगे। उद्घाटन समारोह के दौरान विद्यार्थियों को उपकरणों का लाइव प्रदर्शन दिखाया गया तथा एंडो-ट्रेनर पर अभ्यास भी कराया गया। सामान्य शल्य चिकित्सा विभाग के पीजी विद्यार्थियों ने कार्यक्रम में उत्साहपूर्वक भाग लिया।
विशेषज्ञों के अनुसार यह स्किल लैब भविष्य के सर्जनों में हाथों की दक्षता, सटीकता, समन्वय तथा आत्मविश्वास विकसित करने में अत्यंत महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी। इससे ऑपरेशन के दौरान संभावित त्रुटियों में कमी आएगी, मरीजों की सुरक्षा बेहतर होगी तथा प्रशिक्षुओं को आधुनिक सर्जिकल तकनीकों का वास्तविक अनुभव प्राप्त होगा।
इसके अतिरिक्त यह सुविधा शोध, अकादमिक प्रशिक्षण तथा विभिन्न सर्जिकल शाखाओं के बीच समन्वित शिक्षण को भी बढ़ावा देगी। एंडो-ट्रेनर आधारित प्रशिक्षण से विद्यार्थियों को बार-बार अभ्यास का अवसर मिलेगा, जिससे वे बिना मरीज पर जोखिम डाले जटिल प्रक्रियाओं में दक्षता प्राप्त कर सकेंगे।
एम्स गोरखपुर की यह पहल स्नातकोत्तर चिकित्सा शिक्षा में आधुनिक तकनीकों को शामिल करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम मानी जा रही है तथा भविष्य में मिनिमली इनवेसिव सर्जरी के क्षेत्र में बेहतर एवं सुरक्षित स्वास्थ्य सेवाएं प्रदान करने में सहायक सिद्ध होगी।
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शाही ग्लोबल हॉस्पिटल में गर्भस्थ शिशु के हृदय रोग का सफल उपचार, जन्म के बाद पूरी तरह स्वस्थ मिला बच्चा
•एडवांस पीडियाट्रिक कार्डियोलॉजी कैंप ने गोरखपुर में आधुनिक चिकित्सा की नई उम्मीद जगाई
•डॉ. नीरज अवस्थी की देखरेख में 18 माह तक नियमित जांच और उपचार से मिली बड़ी सफलता
गोरखपुर।बाबा गुरु गोरखनाथ की पावन नगरी गोरखपुर अब आधुनिक चिकित्सा सुविधाओं के क्षेत्र में तेजी से नई पहचान बना रही है। शाही ग्लोबल हॉस्पिटल में आयोजित एडवांस पीडियाट्रिक कार्डियोलॉजी कैंप के माध्यम से गर्भ में पल रहे बच्चे के हृदय रोग का सफल उपचार शुरू किया गया। जन्म के बाद लगातार निगरानी और आधुनिक जांचों के परिणामस्वरूप आज बच्चा पूरी तरह स्वस्थ है।
पीपीगंज निवासी गर्भवती महिला प्रियंका सिंह के गर्भ में पल रहे शिशु की जांच के दौरान हृदय की मुख्य धमनी एओर्टिक आर्च में गंभीर समस्या का पता चला था। इस जानकारी के बाद परिजन अत्यंत चिंतित हो उठे। ऐसे कठिन समय में शाही ग्लोबल हॉस्पिटल में उपलब्ध उन्नत सुविधाओं और विशेषज्ञ चिकित्सकीय परामर्श ने परिवार को नई आशा दी।
मामले की देखरेख *डॉ. नीरज अवस्थी* ने की, जो स्कॉट फोर्टिस इंस्टीट्यूट में कार्डियोलॉजी डायरेक्टर एवं *पीडियाट्रिक कार्डियोलॉजिस्ट* हैं। डॉ. अवस्थी वर्ष 2017 से प्रत्येक माह शाही ग्लोबल हॉस्पिटल में अपनी सेवाएं दे रहे हैं। उन्होंने परिजनों को भरोसा दिलाया कि नियमित निगरानी, समयबद्ध जांच और उचित उपचार से बच्चे को सुरक्षित रखा जा सकता है।
जन्म के बाद बच्चे की प्रत्येक छह माह पर *इकोकार्डियोग्राफी* द्वारा जांच की गई। वर्तमान में बच्चा लगभग 18 माह का हो चुका है। नवीनतम जांच में उसकी हृदय संबंधी समस्या लगभग पूरी तरह ठीक पाई गई है। यह सफलता न केवल परिजनों के लिए राहत का संदेश है, बल्कि पूर्वांचल में बाल हृदय रोग उपचार के क्षेत्र में एक महत्वपूर्ण उपलब्धि भी है।
शाही ग्लोबल हॉस्पिटल के अनुसार डॉ. नीरज अवस्थी के मार्गदर्शन में *अब तक लगभग 650 बच्चों के हृदय का निःशुल्क ऑपरेशन* सफलतापूर्वक कराया जा चुका है और सभी बच्चे स्वस्थ जीवन जी रहे हैं। यह सेवा उन परिवारों के लिए वरदान सिद्ध हो रही है, जो बड़े शहरों में महंगा उपचार कराने में असमर्थ होते हैं।
अस्पताल में अब लेज़र तकनीक, रेडियो फ्रीक्वेंसी एब्लेशन, इंटरवेंशनल रेडियोलॉजी और उन्नत कार्डियक सेवाओं जैसी आधुनिक सुविधाएं स्थानीय मरीजों को उपलब्ध कराई जा रही हैं। इससे गोरखपुर और आसपास के जिलों के मरीजों को बड़े महानगरों की ओर जाने की मजबूरी काफी हद तक कम हो रही है।
अस्पताल प्रबंधन ने बताया कि इंटरवेंशनल रेडियोलॉजी के माध्यम से अब ब्रेन स्ट्रोक, फेफड़ों और किडनी की जटिल समस्याओं, अत्यधिक ब्लीडिंग तथा ऐसे कैंसर जिनका ऑपरेशन संभव नहीं होता, उनके उपचार की सुविधा भी उपलब्ध है। यह चिकित्सा व्यवस्था गंभीर बीमारियों से जूझ रहे मरीजों के लिए नई उम्मीद बनकर सामने आई है।
शाही ग्लोबल हॉस्पिटल में गर्भस्थ शिशु के हृदय रोग की पहचान, समय रहते उपचार की शुरुआत और जन्म के बाद बच्चे का स्वस्थ होना यह साबित करता है कि सही समय पर जांच, विशेषज्ञ चिकित्सक और आधुनिक तकनीक मिलकर असंभव प्रतीत होने वाली स्थितियों को भी आशा में बदल सकते हैं।
आज के कार्डियोलॉजी कैंप में कुल 86 बच्चों का परीक्षण हुआ। इतने बच्चे देखे गए जिसमें 19 बच्चों को हृदय के आपरेशन की आवश्यकता है जिनका निश्शुल्क आपरेशन कराने के लिए प्रयास चालू कर दिया गया है। अगले कुछ महीनों में इन सभी बच्चों का आपरेशन करा दिया जाएगा। -

गोरखपुर जर्नलिस्ट्स प्रेस क्लब में निःशुल्क डेंटल कैंप, 100 पत्रकारों के दांतों की हुई जांच
गोरखपुर ब्यूरो निष्पक्ष टुडे :-
संस्थापक सदस्य श्रीकृष्ण त्रिपाठी व पूर्व अध्यक्ष एसपी सिंह ने फीता काटकर किया उद्घाटन, आधुनिक मशीनों से हुई जांच।
गोरखपुर जर्नलिस्ट्स प्रेस क्लब सभागार में शुक्रवार को निःशुल्क दंत चिकित्सा शिविर का आयोजन किया गया।
लगभग चार घंटे तक चले इस कैंप में करीब 100 पत्रकारों एवं उनके परिजनों के दांतों की जांच कर उन्हें उचित इलाज और देखभाल संबंधी सलाह दी गई। शिविर का मुख्य उद्देश्य पत्रकारों और उनके परिवारों को दांतों की सफाई और मौखिक स्वास्थ्य के प्रति जागरूक करना रहा।
गोरखपुर जर्नलिस्ट्स प्रेस क्लब एवं विकास डेंटल क्लिनिक के संयुक्त तत्वावधान में आयोजित इस शिविर का उद्घाटन संस्थापक सदस्य श्रीकृष्ण त्रिपाठी एवं पूर्व अध्यक्ष एसपी सिंह ने फीता काटकर किया।

कैंप में डॉ. विकास और उनकी टीम ने अत्याधुनिक मशीनों के माध्यम से दांतों का एक्स-रे, जांच एवं आवश्यक दवाओं का निःशुल्क वितरण किया। जांच टीम में मुख्य रूप से डॉ. अंशिता, डॉ. कृति, डॉ. जागृति, डॉ. रोमा, डॉ. अपूर्वा एवं डॉ. आकृति शामिल रहीं। डॉक्टरों ने उपस्थित लोगों को दांतों की सही देखभाल, सफाई और समय पर उपचार के महत्व के बारे में विस्तार से जानकारी दी।
इस अवसर पर डॉ. विकास ने कहा कि यदि दांतों की समस्याओं का समय रहते इलाज हो जाए तो कई गंभीर बीमारियों से बचा जा सकता है। उन्होंने कहा कि स्वस्थ दांत बेहतर स्वास्थ्य का आधार होते हैं और दांतों की अनदेखी कई अन्य बीमारियों को जन्म दे सकती है।

कार्यक्रम में प्रेस क्लब के अध्यक्ष ओंकार धर द्विवेदी, उपाध्यक्ष धनेश निषाद, मंत्री पंकज श्रीवास्तव, कोषाध्यक्ष दुर्गेश यादव, पुस्तकालय मंत्री संजय कुमार, कार्यकारिणी सदस्य डॉ. मनोज मिश्र, अजित सिंह, रजनीश त्रिपाठी, पूर्व अध्यक्ष अरविंद राय, पूर्व उपाध्यक्ष अजीत यादव,गजेंद्र त्रिपाठी,अनुराग त्रिपाठी सहित बड़ी संख्या में वरिष्ठ पत्रकार उपस्थित रहे।

प्रेस क्लब अध्यक्ष ओंकार धर द्विवेदी ने कहा कि भविष्य में भी इस तरह के स्वास्थ्य शिविरों का आयोजन किया जाएगा ताकि पत्रकारों और उनके परिवारों को स्वास्थ्य संबंधी सुविधाओं का लाभ मिल सके।
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एम्स गोरखपुर में हिप जॉइंट सर्जरी पर उन्नत वैज्ञानिक कार्यक्रम एवं कार्यशाला का आयोजन
गोरखपुर। एम्स गोरखपुर के अस्थि रोग विभाग (Department of Orthopaedics) द्वारा, शरीर रचना विभाग (Department of Anatomy) के सहयोग से, हिप जॉइंट सर्जरी एवं पुनर्निर्माण पर एक दिवसीय उन्नत वैज्ञानिक कार्यक्रम का सफल आयोजन किया गया। इस कार्यक्रम में देश के विभिन्न प्रतिष्ठित संस्थानों—एम्स रायबरेली, एम्स रायपुर, केजीएमसी लखनऊ, जीएसवीएम कानपुर एवं बीआरडी मेडिकल कॉलेज गोरखपुर—से आए विशेषज्ञों, संकाय सदस्यों, वरिष्ठ रेजिडेंट्स एवं पीजी छात्रों ने सक्रिय भागीदारी की।
कार्यक्रम का आयोजन मेजर जनरल (डॉ.) विभा दत्ता, एसएम (सेवानिवृत्त), कार्यकारी निदेशक एवं मुख्य कार्यपालक अधिकारी, एम्स गोरखपुर के संरक्षण में किया गया। अपने संबोधन में उन्होंने कहा कि उत्कृष्ट सर्जिकल परिणामों के लिए सटीकता, स्पष्ट निर्णय क्षमता और मजबूत बुनियादी ज्ञान अत्यंत आवश्यक हैं। उन्होंने इस प्रकार के शैक्षणिक कार्यक्रमों को चिकित्सा शिक्षा एवं मरीजों की देखभाल की गुणवत्ता सुधारने के लिए महत्वपूर्ण बताया।
कार्यक्रम की सह-अध्यक्षता प्रो. (डॉ.) महिमा मित्तल, डीन (अकादमिक्स), एम्स गोरखपुर द्वारा की गई।
कार्यक्रम के आयोजन का नेतृत्व प्रो. (डॉ.) अजय भारती, आयोजन अध्यक्ष एवं कोर्स निदेशक, तथा प्रो. (डॉ.) विवेक मिश्रा, सह-आयोजन अध्यक्ष द्वारा किया गया। आयोजन में डॉ. नितीश कुमार (आयोजन सचिव), डॉ. विवेक कुमार (सह-आयोजन सचिव), डॉ. राजनंद कुमार (कोर्स समन्वयक), डॉ. सुधीर श्याम कुशवाहा एवं डॉ. राजेंद्र कुमार पिप्पल का महत्वपूर्ण योगदान रहा।
वैज्ञानिक सत्रों में हिप जॉइंट की एप्लाइड एनाटॉमी, मरीजों का चयन, प्री-ऑपरेटिव प्लानिंग, इम्प्लांट चयन तथा विभिन्न सर्जिकल अप्रोच जैसे महत्वपूर्ण विषयों पर विस्तार से चर्चा की गई। इस अवसर पर प्रो. (डॉ.) ए.सी. अग्रवाल, प्रो. (डॉ.) अजय भारती, प्रो. (डॉ.) पवन प्रधान, प्रो. (डॉ.) विनीत मल्होत्रा, प्रो. (डॉ.) संजय कुमार, प्रो. (डॉ.) नरेंद्र कुशवाहा, डॉ. सूर्यकांत सेठ, डॉ. शुभांकर शेखर एवं डॉ. गौरव उपाध्याय ने अपने अनुभव एवं विशेषज्ञता साझा की।
कार्यक्रम की प्रमुख विशेषता कैडेवरिक एवं सॉ बोन हैंड्स-ऑन वर्कशॉप रही, जिसमें प्रतिभागियों को विशेषज्ञों के मार्गदर्शन में विभिन्न सर्जिकल तकनीकों का व्यावहारिक प्रशिक्षण दिया गया। इन इंटरैक्टिव सत्रों को प्रतिभागियों द्वारा अत्यंत सराहा गया।
कार्यक्रम में विभिन्न संस्थानों से आए पीजी छात्र, सीनियर रेजिडेंट्स एवं अस्थि रोग विशेषज्ञों ने उत्साहपूर्वक भाग लिया।
कार्यक्रम का समापन धन्यवाद ज्ञापन एवं प्रमाण-पत्र वितरण के साथ हुआ। आयोजकों ने भविष्य में भी ऐसे शैक्षणिक कार्यक्रमों के आयोजन की प्रतिबद्धता व्यक्त की, जिससे क्षेत्र में सर्जिकल प्रशिक्षण एवं मरीजों की देखभाल के स्तर को और बेहतर बनाया जा सके। -

एम्स गोरखपुर के डॉक्टरों की उपलब्धि: 5 सेमी किडनी स्टोन का लेप्रोस्कोपी सर्जरी से इलाज
गोरखपुर। All India Institute of Medical Sciences Gorakhpur के सामान्य शल्य चिकित्सा विभाग ने एक और उल्लेखनीय उपलब्धि हासिल करते हुए 65 वर्षीय पुरुष मरीज के 5 सेमी के बड़े किडनी स्टोन को लेप्रोस्कोपी तकनीक से सफलतापूर्वक निकाल दिया। यह जटिल सर्जरी न केवल तकनीकी दृष्टि से चुनौतीपूर्ण थी, बल्कि इसने संस्थान में उन्नत सर्जिकल क्षमताओं को भी प्रदर्शित किया। मरीज वर्तमान में स्वस्थ है और तेजी से रिकवरी कर रहा है।
मरीज OPD में Dr Dharmendra Kumar Pipal (एसोसिएट प्रोफेसर, सामान्य शल्य चिकित्सा) के पास बाईं ओर कमर (flank) में रुक-रुक कर दर्द तथा बीच-बीच में पेशाब में खून (hematuria) की शिकायत लेकर आया था। विस्तृत मूल्यांकन के बाद CT urography एवं अल्ट्रासाउंड जांच में बाईं किडनी के रीनल पेल्विस में लगभग 5 सेमी का बड़ा स्टोन पाया गया। सौभाग्य से किडनी कार्यरत थी, इसलिए भविष्य में संभावित नुकसान को रोकने हेतु समय पर सर्जरी आवश्यक थी।
सामान्यतः इस आकार के स्टोन का उपचार ओपन सर्जरी द्वारा किया जाता है, जिसमें बड़े चीरे की आवश्यकता होती है और इससे अधिक दर्द, रक्तस्राव, संक्रमण का खतरा तथा लंबे समय तक अस्पताल में भर्ती रहना पड़ सकता है। PCNL भी एक विकल्प है, लेकिन इतने बड़े स्टोन के मामलों में यह कई चरणों (multiple sittings) में करना पड़ता है और इसमें bleeding तथा residual stone का जोखिम भी बना रहता है।
इन सभी पहलुओं पर गहन विचार-विमर्श और योजना के बाद यह निर्णय लिया गया कि मरीज का उपचार लेप्रोस्कोपी सर्जरी द्वारा किया जाएगा, जिससे एक ही सिटिंग में स्टोन को पूर्ण रूप से निकाला जा सके और ओपन सर्जरी से जुड़ी जटिलताओं से बचा जा सके।
यह सर्जरी अत्याधुनिक लेप्रोस्कोपिक तकनीक से केवल 5–10 मिमी के छोटे-छोटे छिद्रों के माध्यम से की गई, जिससे मरीज को कम दर्द, न्यूनतम रक्तस्राव, शीघ्र रिकवरी तथा कम अस्पताल प्रवास का लाभ मिला।
इस जटिल सर्जरी का सफल नेतृत्व Dr Dharmendra Kumar Pipal ने किया। उनके साथ Dr Salman Khan (सीनियर रेजिडेंट) एवं Dr Alan Philip (जूनियर रेजिडेंट) ने सहयोग किया। यह सर्जरी विभागाध्यक्ष Dr Gaurav Gupta के मार्गदर्शन में संपन्न हुई।
एनेस्थीसिया टीम में Dr Seema Yadav (एसोसिएट प्रोफेसर), सीनियर रेजिडेंट Dr Arshiya तथा जूनियर रेजिडेंट Dr Fasil का महत्वपूर्ण योगदान रहा। नर्सिंग स्टाफ में सुष्मिता, प्रीति एवं नेहा ने उत्कृष्ट सहयोग प्रदान किया, जबकि ओटी टेक्नीशियन मनोज ने तकनीकी सहायता सुनिश्चित की।
इस अवसर पर संस्थान की कार्यकारी निदेशक Retired Major General Prof. (Dr.) Vibha Dutta ने पूरी टीम को बधाई देते हुए कहा कि इस प्रकार की जटिल सर्जरी को लेप्रोस्कोपी तकनीक से सफलतापूर्वक करना संस्थान की उन्नत चिकित्सा सेवाओं और उत्कृष्ट टीमवर्क का प्रतीक है। उन्होंने यह भी कहा कि एम्स गोरखपुर आधुनिक, सुरक्षित और मरीज-केंद्रित उपचार प्रदान करने के लिए निरंतर प्रतिबद्ध है।
यह सफलता एम्स गोरखपुर में उन्नत लेप्रोस्कोपी सर्जरी की बढ़ती क्षमताओं को दर्शाती है और यह साबित करती है कि जटिल सर्जरी भी अब कम से कम चीरे के साथ सुरक्षित और प्रभावी ढंग से की जा सकती है।
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एम्स के चिकित्सकों ने हासिल की एक और महत्वपूर्ण उपलब्धि
गोरखपुर: एम्स गोरखपुर के चिकित्सकों ने एक महत्वपूर्ण उपलब्धि हासिल करते हुए सर्वाइकल वर्टिब्रा से उत्पन्न एंटीरियर सर्वाइकल ऑस्टियोफाइट का ऑपरेशन सफलतापूर्वक किया। ऐसे मामलों की घटनाएं लगभग 1% पाई जाती हैं। सामान्यतः यह हड्डी का उभार छोटा होता है और अधिकांश मामलों में कोई लक्षण उत्पन्न नहीं करता, लेकिन कुछ मामलों में यह बढ़कर गंभीर समस्याएं पैदा कर सकता है।
यह 68 वर्षीय मरीज़ को लगभग 1 वर्ष से खाने में दिक्कत थी
जो धीरे-धीरे बढ़ती गयी। हाल के समय में मरीज को सांस लेने में भी परेशानी होने लगी। स्थिति गंभीर होने पर मरीज की सांस की नली में ट्यूब डालकर ट्रेकियोस्टॉमी की गई, ताकि श्वसन मार्ग सुरक्षित रखा जा सके।ऑपरेशन के दौरान विशेषज्ञों ने गर्दन के सामने के हिस्से से पहुंच बनाकर बढ़ी हुई हड्डी को सुरक्षित रूप से हटाया। यह जटिल ऑपरेशन ईएनटी और न्यूरोसर्जरी विभाग की संयुक्त टीम द्वारा सफलतापूर्वक किया गया।
इस सर्जरी का नेतृत्व ईएनटी विभाग की डॉ. रुचिका अग्रवाल (एसोसिएट प्रोफेसर), डॉ. पंखुरी मित्तल (असिस्टेंट प्रोफेसर) तथा डॉ. अश्वनी चौधरी (एसोसिएट प्रोफेसर) और न्यूरोसर्जरी विभाग के डॉ. निनाद आनंद सावंत (एसोसिएट प्रोफेसर) तथा डॉ. सार्थक मेहता (असिस्टेंट प्रोफेसर) ने किया।
सर्जरी में ईएनटी विभाग की टीम के साथ सहायक के रूप में डॉ. नैंसी गुप्ता, डॉ.श्वेता सिंह और डॉ. नंधिनी एस. प्रिया ने महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।
संस्थान प्रशासन ने इस सर्जरी को उन्नत बहु-विभागीय चिकित्सा सहयोग (मल्टी-डिसिप्लिनरी अप्रोच) का एक महत्वपूर्ण उदाहरण बताया और कहा कि इस तरह की जटिल सर्जरी मरीजों को उन्नत चिकित्सा सुविधाएं उपलब्ध कराने की दिशा में संस्थान की प्रतिबद्धता को दर्शाती है।
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सर्दियों में बच्चों के स्वास्थ्य को लेकर विशेष सतर्कता जरूरी: एम्स गोरखपुर के बाल रोग विशेषज्ञ की सलाह
गोरखपुर: सर्दियों का मौसम बच्चों, विशेषकर नवजात शिशुओं के लिए स्वास्थ्य की दृष्टि से अधिक जोखिमपूर्ण होता है। एम्स गोरखपुर के बाल रोग विभाग के प्रोफेसर एवं विभागाध्यक्ष डॉ महिमा मित्तल के अनुसार, कम तापमान के कारण बच्चों की रोग प्रतिरोधक क्षमता कमजोर हो जाती है, जिससे वे संक्रमण और बीमारियों के प्रति अधिक संवेदनशील हो जाते हैं।
ठंड के मौसम में बच्चों में सर्दी, खांसी, बुखार, दस्त और डिहाइड्रेशन जैसी समस्याएं आम हैं। कुछ मामलों में स्थिति गंभीर होकर निमोनिया जैसी जानलेवा बीमारी का रूप भी ले सकती है। नवजात शिशुओं के लिए यह समय और भी नाज़ुक होता है, क्योंकि जन्म के बाद पहले 28 दिन उनके जीवन के सबसे संवेदनशील दिन होते हैं। इस दौरान शिशु की शरीर-तापमान नियंत्रित करने की क्षमता पूरी तरह विकसित नहीं होती, इसलिए थोड़ी सी लापरवाही भी गंभीर असर डाल सकती है।
नवजात शिशुओं को विशेष सुरक्षा की आवश्यकता
बाल रोग विशेषज्ञ ने बताया कि नवजात शिशु अपने शरीर की गर्मी स्वयं बनाए रखने में सक्षम नहीं होते। इसलिए सर्दियों में उन्हें पर्याप्त गर्माहट देना और लगातार निगरानी रखना अत्यंत आवश्यक है। सही देखभाल से ठंड से जुड़ी जटिलताओं को आसानी से रोका जा सकता है।
सर्दियों में बच्चों की सुरक्षा के लिए जरूरी उपाय
1. परतों में कपड़े पहनाएं
बच्चों को एक भारी कपड़े की बजाय हल्के लेकिन कई परतों वाले कपड़े पहनाना अधिक सुरक्षित होता है। टोपी, दस्ताने और मोज़े अवश्य पहनाएं, क्योंकि शरीर की अधिकांश गर्मी सिर और पैरों से निकलती है।
नवजात शिशुओं के लिए माँ के साथ त्वचा-से-त्वचा संपर्क, यानी कंगारू मदर केयर , अत्यंत लाभकारी है।2. पौष्टिक और गर्म भोजन दें
प्रोटीन और विटामिन ए युक्त गर्म व पौष्टिक आहार बच्चों की प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाता है। विटामिन C से भरपूर फल जैसे संतरा, नींबू और पपीता इम्यूनिटी को मजबूत करते हैं।
घर का ताज़ा भोजन—सब्ज़ी का सूप, दाल, उबले अंडे, खिचड़ी, घी, गर्म दूध, सूखे मेवों का पाउडर, गुड़, हल्दी और मौसमी फल—बच्चों के लिए विशेष रूप से लाभकारी हैं। शिशुओं के लिए माँ का दूध सर्वोत्तम आहार है और नियमित स्तनपान जारी रखना चाहिए।3. पर्याप्त तरल पदार्थ दें
सर्दियों में प्यास कम लगने के कारण बच्चों में डिहाइड्रेशन का खतरा बढ़ जाता है। माता-पिता को चाहिए कि वे बच्चों को नियमित रूप से पानी पीने के लिए प्रेरित करें, भले ही प्यास न लगे।
गर्म दूध और सूप जैसे पेय भी लाभकारी हैं। सामान्यतः 8 वर्ष से कम उम्र के बच्चों को 4–5 गिलास और 9 वर्ष से अधिक उम्र के बच्चों को कम से कम 6 गिलास पानी प्रतिदिन पीना चाहिए।4. पूरी नींद सुनिश्चित करें
पर्याप्त और अच्छी नींद बच्चों की रोग प्रतिरोधक क्षमता को मजबूत करती है और उन्हें बीमारियों से लड़ने में मदद करती है।5. बच्चों को सक्रिय रखें
सर्दियों में भी शारीरिक गतिविधि उतनी ही जरूरी है। दिन के समय, जब मौसम अपेक्षाकृत गर्म हो, बच्चों को बाहर खेलने के लिए प्रोत्साहित करें। इसके अलावा योग, नृत्य और स्ट्रेचिंग जैसी इनडोर गतिविधियाँ भी उपयोगी हैं।6. सुबह और शाम अनावश्यक बाहर जाने से बचाएं
सुबह और शाम के समय ठंड अधिक होती है, जो बच्चों के लिए सबसे जोखिम भरा समय माना जाता है।7. गलत तरीकों से गर्म रखने से बचें
गर्म पानी की बोतल, हीटर या अंगीठी का गलत उपयोग जलने या दम घुटने का कारण बन सकता है। कमरे को सुरक्षित और हवादार तरीके से गर्म रखें।8. सुरक्षित स्नान कराएं
बच्चों को गुनगुने पानी से और हल्के, मॉइस्चराइजिंग साबुन से नहलाएं। नहाने का समय दिन में 11 बजे से 3 बजे के बीच रखें।9. स्वच्छता का ध्यान रखें
बच्चों को साबुन और गर्म पानी से बार-बार हाथ धोने की आदत डालें, खासकर खाने से पहले और खेलने के बाद। खांसते या छींकते समय मुंह ढकने के लिए भी प्रेरित करें।10. समय पर टीकाकरण कराएं
सर्दियों में फ्लू और अन्य श्वसन संक्रमण अधिक होते हैं। फ्लू, रोटावायरस और अन्य अनुशंसित टीकों के लिए बाल रोग विशेषज्ञ से सलाह लेकर समय पर टीकाकरण सुनिश्चित करें।11. स्क्रीन टाइम सीमित करें
सर्दियों में बच्चों का झुकाव मोबाइल और टीवी की ओर बढ़ जाता है। अधिक स्क्रीन टाइम से आंखों पर असर पड़ता है और अस्वस्थ आदतें विकसित हो सकती हैं। पढ़ाई, पहेलियाँ और रचनात्मक गतिविधियों को बढ़ावा दें।12. शुरुआती लक्षणों को नज़रअंदाज़ न करें
किसी भी बीमारी के शुरुआती लक्षण दिखने पर स्वयं इलाज करने के बजाय तुरंत डॉक्टर से परामर्श लेना चाहिए।सतर्कता से ही संभव है सुरक्षा
एम्स गोरखपुर के बाल रोग विभाग के प्रोफेसर एवं विभागाध्यक्ष ने कहा कि सर्दियों में नवजात शिशुओं और बच्चों की देखभाल में अतिरिक्त सावधानी अत्यंत आवश्यक है। यदि माता-पिता गर्म कपड़े, पौष्टिक भोजन, स्वच्छता और समय पर चिकित्सा सलाह—इन चार बातों पर ध्यान दें, तो बच्चे सर्दियों के मौसम में भी पूरी तरह सुरक्षित और स्वस्थ रह सकते हैं।
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ऊंची बिल्डिंग देखकर न घबराएं, यहां इलाज सस्ता है : रीजेंसी हॉस्पिटल
संवाददाता : शिशिर श्रीवास्तव, गोरखपुर।
गोरखपुर स्थित रीजेंसी हॉस्पिटल में भटहट एवं चरगांवा ब्लॉक के ग्राम प्रधानों के लिए प्रधान सम्मान समारोह का आयोजन किया गया। इस अवसर पर कुल 52 ग्राम प्रधानों को सम्मानित किया गया।

कार्यक्रम को संबोधित करते हुए रीजेंसी हॉस्पिटल के वाइस प्रेसिडेंट संदीप शर्मा ने कहा कि यह अस्पताल हर प्रकार की बीमारी के इलाज के लिए पूरी तरह सक्षम है। उन्होंने बताया कि यहां सभी प्रमुख सुपर-स्पेशियलिटी के अनुभवी डॉक्टर पूर्णकालिक रूप से उपलब्ध हैं तथा आमजन को किफायती दरों पर गुणवत्तापूर्ण इलाज प्रदान किया जाता है।

इस अवसर पर डीजीएम संजीव सिंह एवं उनकी टीम द्वारा सभी प्रधानों को अस्पताल के विभिन्न विभागों का भ्रमण कराया गया और अत्याधुनिक चिकित्सीय उपकरणों की विस्तृत जानकारी दी गई।

महाराजगंज के ग्राम प्रधान अरविन्द सिंह द्वारा कैंसर उपचार के संबंध में जानकारी मांगे जाने पर अस्पताल प्रबंधन ने बताया कि रीजेंसी हॉस्पिटल में पूर्वांचल की सबसे अत्याधुनिक सुविधाएं उपलब्ध हैं। इनमें रेडिएशन थेरेपी, PET स्कैन, गामा कैमरा एवं अन्य नवीनतम मशीनें शामिल हैं, जिनके माध्यम से कैंसर का संपूर्ण उपचार संभव है।

कार्यक्रम में हॉस्पिटल के कार्डियोलॉजिस्ट डॉ. मेजर अभिनव श्रीवास्तव ने हृदय रोग के लक्षण एवं बचाव के उपायों पर प्रकाश डाला, वहीं नेफ्रोलॉजिस्ट डॉ. अप्रीत श्रीवास्तव ने किडनी रोग से संबंधित महत्वपूर्ण जानकारी साझा की।
प्रधान संघ के अध्यक्ष ने रीजेंसी हॉस्पिटल का आभार व्यक्त करते हुए कहा कि यह पहला अवसर है जब किसी निजी चिकित्सालय द्वारा ग्राम प्रधानों को सम्मानित किया गया है, जिसके लिए सभी प्रधानगण आभारी हैं।
समारोह के दौरान हॉस्पिटल के महाप्रबंधक रोहित तिवारी, उप महाप्रबंधक एवं संजीव सिंह ने उपस्थित सभी ग्राम प्रधानों का धन्यवाद किया तथा भविष्य में सहयोग का आश्वासन देते हुए बताया कि अब रीजेंसी हॉस्पिटल में आयुष्मान भारत योजना के अंतर्गत कैंसर, कार्डियक एवं डायलिसिस सेवाएं उपलब्ध हैं।
इस अवसर पर गिरिजेश कुमार मिश्र, बिजेंद्र यादव सहित हॉस्पिटल के तकनीशियन एवं कर्मचारी भी उपस्थित रहे।
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रिपोर्ट में बच्चे के गले में मंगलसूत्र का पेंडेंट फंसा हुआ पाया गया
रिपोर्ट में बच्चे के गले में मंगलसूत्र का पेंडेंट फंसा हुआ पाया गया। नौ महीने के एक बच्चे की लगातार सर्दी-खांसी की शिकायत के बाद जब उसका एक्स-रे कराया गया, तो परिवार के होश उड़ गए। रिपोर्ट में बच्चे के गले में मंगलसूत्र का पेंडेंट फंसा हुआ पाया गया।
परिवार उसे गंभीर हालत में जिला अस्पताल लेकर पहुंचा, जहां नाक-कान-गला विशेषज्ञ डॉ. अनुपम बत्रा ने ऑपरेशन कर पेंडेंट को सुरक्षित बाहर निकाला। फिलहाल बच्चा खतरे से बाहर है।
यह मामला रविवार दोपहर का है। जानकारी के अनुसार, करी गांव के निवासी नरसिंह वास्कले के बेटे विवान को कई दिनों से खांसी और जुकाम की समस्या थी। इलाज के दौरान डॉक्टर ने एक्स-रे कराया, जिसमें धातु का टुकड़ा दिखाई दिया। जांच के बाद पता चला कि वह मंगलसूत्र का पेंडेंट था।
ऑपरेशन सफल होने के बाद बच्चा अब स्वस्थ है और डॉक्टरों की निगरानी में है।








कार्यक्रम की सह-अध्यक्षता प्रो. (डॉ.) महिमा मित्तल, डीन (अकादमिक्स), एम्स गोरखपुर द्वारा की गई।







