Category: हेल्थ

  • नशा मुक्त भारत अभियान के अंतर्गत 78वें स्वतंत्रता दिवस समारोह के दूसरे दिन कार्यशाला का आयोजन

    नशा मुक्त भारत अभियान के अंतर्गत 78वें स्वतंत्रता दिवस समारोह के दूसरे दिन कार्यशाला का आयोजन

    नशा मुक्त भारत अभियान” के अंतर्गत 78वें स्वतंत्रता दिवस समारोह के दूसरे दिन कार्यशाला का आयोजन
    बासुदेव तिवारी सेवा संस्थान द्वारा संचालित ‘पुनर्जन्म ‘ नशा मुक्ति केंद्र ने सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता मंत्रालय, भारत सरकार द्वारा चलाए जा रहे “नशामुक्त भारत अभियान” के अन्तर्गत 78 वें स्वतंत्रता दिवस के अवसर पर विभिन्न समारोह का आयोजन किया जाना है। समारोह के दूसरे दिन 11 अगस्त 2024 को “विकसित भारत का मंत्र, भारत हो नशे से स्वतंत्र” विषय पर एक दिवसीय कार्यशाला का आयोजन किया गया। कार्यक्रम के मुख्य अतिथि नेताजी सुभाष चंद्र बोस अस्पताल, गोरखपुर के जिला कार्यक्रम प्रबंधक धर्मवीर सिंह जी थे। आपने अपने संबोधन में युवाओं को किसी भी प्रकार के नशे से बचने के लिए आह्वान किया एवं नशे से होने वाले बीमारियों के प्रति भी लोगों को जागरूक किया। आपने कहा कि सतर्क रहकर नशे की विभीषिका से बचा जा सकता है। आपने युवाओं से आवाह्न करते हुए बताया कि अपना चरित्र ऐसा बनाइए कि नशा हेतु आपको कोई आपको बहका न सके। कार्यक्रम के मुख्य वक्ता डॉ. उमाशंकर तिवारी ने उपस्थित लोगों को सम्बोधित करते हुए कहा कि नशा हमें शारीरिक रूप से तो खत्म करती ही है साथ ही देश को भी खोखला करती है। युवा किसी भी देश की तस्वीर बदलने की ताकत रखते है लेकिन जिस प्रकार से नशा हमारे समाज में फैल रहा है वो बहुत ही खतरनाक स्थिति की ओर संकेत कर रहा है। जरूरत है हमें समाज से इस बुराई को पूरी तरह से खत्म करने की तभी हमारा भारत देश विकसित देश बन पाएगा और सही अर्थ में हमारा देश तभी स्वतंत्र होगा। कार्यक्रम का संचालन केंद्र के परामर्शदाता संतोष राय ने किया एवं अतिथियों का स्वागत अकबर अली ने किया। आउट रीच एंड ड्रॉप-इन सेंटर के इंचार्ज संजय कुमार ने सभी के प्रति आभार ज्ञापन किया।
    कार्यक्रम में नर्स जितेन्द्र एवं राम प्रकाश दुबे इत्यादि उपस्थित रहे।

  • फाइलेरिया से बचाव की दवा का सेवन कर महापौर ने एमडीए अभियान का किया शुभारंभ

    फाइलेरिया से बचाव की दवा का सेवन कर महापौर ने एमडीए अभियान का किया शुभारंभ

    गोरखपुर:शहर के महापौर डॉ मंगलेश श्रीवास्तव ने जिला अस्पताल परिसर में बने बूथ पर फाइलेरिया से बचाव की दवा का सेवन कर शनिवार को सर्वजन दवा सेवन (एमडीए) अभियान का शुभारंभ किया । यह अभियान दो सितम्बर तक चलेगा। मुख्य चिकित्सा अधिकारी डॉ आशुतोष कुमार दूबे ने महापौर को दवा का सेवन कराया । उन्होंने बताया कि सोमवार से सप्ताह में चार दिन बचाव की दवा खिलाने के लिए स्वास्थ्य विभाग की टीम घर घर जाएंगी। विभाग की टीम के सामने ही दवा का सेवन करना है। इस मौके पर सभी लोगों ने फाइलेरिया उन्मूलन की शपथ ली और जनजागरूकता वाहन को हरी झंडी दिखा कर रवाना किया गया।

    दवा सेवन के उपरांत महापौर ने जनपदवासियों से अपील की कि वह फाइलेरिया से बचाव की दवा का सेवन अवश्य करें। वह खुद विगत कई वर्षों से दवा का सेवन कर रहे हैं। यह पूरी तरह से सुरक्षित है। यह दवा खाली पेट नहीं खानी है । उन्होंने इस बात पर प्रसन्नता जाहिर की कि महानगर के लोगों की जागरूकता के कारण सोलह शहरी क्षेत्र फाइलेरिया से मुक्ति की ओर अग्रसर हैं। इस बार शहर के सिर्फ सात क्षेत्रों में यह अभियान चलाया जाएगा। उन्होंने आश्वासन दिया कि नगर निगम इस अभियान में हरसंभव सहयोग करेगा ताकि पूरे शहर को फाइलेरिया मुक्त किया जा सके।

    मुख्य चिकित्सा अधिकारी डॉ आशुतोष कुमार दूबे ने बताया कि जिले में 4133 टीम द्वारा करीब 46 लाख लोगों को घर घर जाकर दवा खिलाई जाएगी। प्रत्येक सोमवार, मंगलवार, गुरूवार और शुक्रवार को टीम घर घर जाएंगी। टीम में आशा कार्यकर्ता के साथ एक पुरुष सदस्य होंगे। टीम के लोग दवा खिलाने के साथ साथ नये फाइलेरिया रोगियों को भी ढूंढेंगे। इस अभियान में स्वयंसेवी संस्था डब्ल्यूएचओ, पाथ, पीसीआई, सीफार और फाइलेरिया रोगी नेटवर्क भी सहयोग प्रदान कर रहे हैं।

    इस मौके पर जिला अस्पताल के प्रमुख चिकित्सा अधीक्षक डॉ जय कुमार, महिला अस्पताल के प्रमुख चिकित्सा अधीक्षक डॉ जय कुमार, अपर मुख्य चिकित्सा अधिकारी डॉ एके चौधरी, डॉ एनएल कुशवाहा, जिला सर्विलांस अधिकारी व नगर स्वास्थ्य अधिकारी डॉ राजेश कुमार, जिला मलेरिया अधिकारी अंगद सिंह, सहायक मलेरिया अधिकारी राजेश चौबे, जेई एईएस कंसल्टेंट सिद्धेश्वरी सिंह, समस्त मलेरिया और फाइलेरिया निरीक्षक समेत सहयोगी संगठनों के प्रतिनिधिगण भी मौजूद रहे।

    *लगातार पांच साल तक खानी है दवा*

    जिला मलेरिया अधिकारी ने बताया कि फाइलेरिया जिसे आमतौर पर हाथीपांव भी कहते हैं, एक लाइलाज बीमारी है। इस बीमारी से खुद को, परिवार को और समाज को बचाने के लिए दवा का सेवन बेहद जरूरी है। लगातार पांच साल तक साल में एक बार अगर फाइलेरिया से बचाव की दवा का सेवन किया जाए तो इस बीमारी से पूरे समाज को मुक्ति मिल सकती है। वर्ष में एक बार दवा खा लेने के बाद वर्ष भर के अव्यस्क कृमि मर जाते हैं और लगातार पांच साल तक दवा खाई जाती है तो हर साल इन अव्यस्क कृमि का सफाया तो होता ही है, साथ में वयस्क कृमि भी समाप्त हो जाता है। इस तरह से दवा का सेवन करने वाला व्यक्ति फाइलेरिया से बच जाता है। फाइलेरिया के प्रमुख लक्षणों में हाथ, पैर, स्तन व अंडकोष में सूजन हैं। यह लक्षण संक्रमित मच्छर के काटने के पांच से पंद्रह साल बाद प्रकट होते हैं।

    *मिथक बनती है बाधा*

    श्री सिंह ने बताया कि कुछ लोग इस मिथक के कारण दवा का सेवन नहीं करते हैं कि दवा खुली हुई है और इसकी सुरक्षा में संशय है। ऐसे लोगों को यह संदेश दिया जा रहा है कि दवा विश्व स्वास्थ्य संगठन के मानकों के अनुसार प्रमाणित है। इसे तभी खोला जाता है जब लाभार्थी को सेवन करवाना होता है। दवा का कोई भी दुष्प्रभाव नहीं होता है। जिन लोगों के भीतर पहले से माइक्रोफाइलेरी मौजूद होते हैं उन्हें दवा के सेवन के बाद मतली, चक्कर आना, सिरदर्द जैसे लक्षण आते हैं जो कुछ समय बाद स्वतः समाप्त हो जाते हैं। ये पूरी तरह से सामान्य लक्षण हैं और इनसे घबराने की आवश्यकता नहीं है। शुभारंभ कार्यक्रम के दौरान सभी ने दवा का सेवन किया है और किसी को किसी भी प्रकार की दिक्कत नहीं हुई।

  • फाइलेरिया से बचाव की दवा सुरक्षित और असरदार, लाइलाज बीमारी से सुरक्षा में है मददगार’

    फाइलेरिया से बचाव की दवा सुरक्षित और असरदार, लाइलाज बीमारी से सुरक्षा में है मददगार’

    ‘फाइलेरिया से बचाव की दवा सुरक्षित और असरदार, लाइलाज बीमारी से सुरक्षा में है मददगार’
    फाइलेरिया उन्मूलन संबंधित एमडीए अभियान को लेकर मीडिया कार्यशाला का हुआ आयोजन
    जिले में 10 अगस्त से दो सितम्बर तक करीब 45.98 लाख लोगों को खिलाई जानी है दवा
    गोरखपुर,
    फाइलेरिया जिसे हाथीपांव के नाम से भी जानते हैं, ऐसी बीमारी है जो एक बार हो जाए तो पूरी तरह से ठीक नहीं होती है । इस लाइलाज बीमारी से बचने के लिए साल में एक बार पांच साल तक लगातार बचाव की दवा का सेवन करना अनिवार्य है। इस साल भी 10 अगस्त से दो सितम्बर तक जिले के करीब 45.98 लाख लोगों को स्वास्थ्य विभाग की टीम घर घर जाकर दवा खिलाएंगी। यह दवा अन्तर्राष्ट्रीय मानकों पर परखी हुई है। यह पूरी तरह से सुरक्षित और असरदार है ।
    यह जानकारी मुख्य चिकित्सा अधिकारी डॉ आशुतोष कुमार दूबे ने सेंटर फॉर एडवोकेसी एंड रिसर्च (सीफार) संस्था के सहयोग से शहर के निजी होटल में आयोजित मीडिया कार्यशाला में दी। इस कार्यशाला का आयोजन एडी हेल्थ डॉ एनपी गुप्ता की अध्यक्षता में फाइलेरिया उन्मूलन संबंधित सर्वजन दवा सेवन (एमडीए) अभियान को लेकर मंगलवार को किया गया। कार्यशाला में विश्व स्वास्थ्य संगठन, पाथ और पीसीआई संस्थाओं के प्रतिनिधिगण ने भी तकनीकी जानकारियां साझा कीं।
    कार्यशाला को संबोधित करते हुए एडी हेल्थ डॉ एनपी गुप्ता ने कहा कि लोगों तक यह संदेश जरूर पहुंचना चाहिए कि फाइलेरिया रोधी दवा की एक खुराक उनको और उनके परिवार के भविष्य को हमेशा के लिए सुरक्षित कर देती है। सभी लोग दवा का सेवन करें, यह सुनिश्चित करना समाज के सभी वर्गों की सामूहिक जिम्मेवारी है।   इस मौके पर मुख्य चिकित्सा अधिकारी ने बताया कि क्यूलेक्स मादा मच्छर के काटने से होने वाली फाइलेरिया बीमारी से बचाव के लिए एक वर्ष से अधिक उम्र के सभी लोगों को दवा खानी है। एक वर्ष से दो वर्ष तक के बच्चे सिर्फ पेट से कीड़े निकालने की दवा खाएंगे। इससे अधिक उम्र के लोग दो प्रकार की दवा खाएंगे। दवा का सेवन एक वर्ष से कम उम्र के बच्चों, गर्भवती माताओं और बिस्तर पकड़ चुके अति गंभीर बीमार लोगों को नहीं करना है। दवा को खाली पेट नहीं खाना है और इसे स्वास्थ्य विभाग की टीम के सामने ही खाना है। स्वास्थ्य विभाग की दो सदस्यीय टीम जिले के 9.19 लाख घरों पर जाएगी और पात्र लाभार्थियों को उनके आयु वर्ग के अनुसार निर्धारित मात्रा में दवा खिलाएगी। इसके लिए कुल 4198 टीम का गठन किया गया है।
    जिला मलेरिया अधिकारी अंगद सिंह ने बताया कि फाइलेरिया से हाथ, पैर, स्तन और अंडकोष में सूजन (हाइड्रोसील) जैसे लक्षण संक्रमित मच्छर के काटने के पांच से पंद्रह वर्ष बाद नजर आते हैं। एक बार हाथीपांव हो जाने के बाद उसे सिर्फ नियंत्रित किया जा सकता है, ठीक नहीं । इस बीमारी से ग्रसित व्यक्ति और उसका परिवार सामाजिक और आर्थिक तौर पर काफी पीछे चला जाता है। इस बीमारी से बचाने के लिए शहर के सात प्लानिंग यूनिट और ग्रामीण क्षेत्र के सभी ब्लॉक में इस साल अभियान चलेगा।
    श्री सिंह ने बताया कि कुछ लोग इस मिथक के कारण दवा का सेवन नहीं करते हैं कि दवा खुली हुई है और इसकी सुरक्षा में संशय है। ऐसे लोगों को यह संदेश दिया जा रहा है कि दवा विश्व स्वास्थ्य संगठन के मानकों के अनुसार प्रमाणित है। इसे तभी खोला जाता है जब लाभार्थी को सेवन करवाना होता है। दवा का कोई भी दुष्प्रभाव नहीं होता है। जिन लोगों के भीतर पहले से माइक्रोफाइलेरी मौजूद होते हैं उन्हें दवा के सेवन के बाद मतली, चक्कर आना, सिरदर्द जैसे लक्षण आते हैं जो कुछ समय बाद स्वतः समाप्त हो जाते हैं। ये पूरी तरह से सामान्य लक्षण हैं और इनसे घबराने की आवश्यकता नहीं है।
    इस अवसर पर एसीएमओ डॉ एके चौधरी, डॉ गणेश यादव, डॉ वीपी पांडेय, सहायक निदेशक सूचना प्रशांत श्रीवास्तव, जिला सर्विलांस अधिकारी डॉ राजेश, अधीक्षक डॉ मणि शेखर, चिकित्सा अधिकारी डॉ आनंद, मंडलीय शहरी स्वास्थ्य समन्वयक डॉ प्रीति सिंह, उप जिला स्वास्थ्य शिक्षा एवं सूचना अधिकारी सुनीता पटेल, डीपीएम पंकज आनंद, सहायक मलेरिया अधिकारी राजेश चौबे, मलेरिया इंस्पेक्टर प्रभात रंजन सिंह, जेई एईएस कंसल्टेंट सिद्धेश्वरी सिंह, आरआरटी प्रभारी डॉ अर्चना समेत विभिन्न सहयोगी संगठनों के प्रतिनिधिगण प्रमुख तौर पर मौजूद रहे।
    फाइलेरिया चैंपियन ने सुनाई अपनी कहानी.
    इस मौके पर पिपराईच ब्लॉक के सरंडा गांव से पहुंचे फाइलेरिया चैंपियन संतराज (65) ने अपनी कहानी सुनाई। उन्होंने बताया कि फाइलेरिया ने न केवल उन्हें शारीरिक तौर पर कमजोर बनाया, बल्कि आर्थिक तौर पर भी पीछे किया । पहले यह बीमारी उनके पिता को थी और फिर उन्हें हुई। बीमारी की पहचान भी बड़ी मुश्किल से होती है। उनके गांव में फाइलेरिया रोगी नेटवर्क बना तो उससे जुड़ने के बाद इस बीमारी के बारे में काफी कुछ जानने का मौका मिला। अब वह समूह के माध्यम से गांव के दूसरे लोगों को भी बीमारी के बारे में बताते हैं और साल भर में एक बार दवा खाने के लिए प्रेरित करते हैं। समूह के सभी लोगों को फाइलेरिया प्रभावित अंग के रूग्णता प्रबंधन और व्यायाम की जानकारी भी मिली है जिसके जरिये वह पहले की अपेक्षा बेहतर जीवन जी रहे हैं।
    सभी ने ली शपथ
    मीडिया कार्यशाला में उपस्थित सभी अधिकारियों और मीडिया कर्मियों ने फाइलेरिया उन्मूलन में सक्रिय सहयोग के लिए शपथ ली। सभी ने आश्वासन दिया कि वह न सिर्फ खुद दवा का सेवन करेंगे, बल्कि अपने आसपास के अधिकाधिक लोगों को दवा सेवन करवाने का प्रयास करेंगे। कार्यशाला के दौरान खुले सत्र का भी आयोजन हुआ जिसमें मीडिया के प्रतिनिधियों ने फाइलेरिया से संबंधित विभिन्न प्रकार के सवाल पूछे।

  • ‘फाइलेरिया से बचाव की दवा सुरक्षित और असरदार, लाइलाज बीमारी से सुरक्षा में है मददगार’

    ‘फाइलेरिया से बचाव की दवा सुरक्षित और असरदार, लाइलाज बीमारी से सुरक्षा में है मददगार’

    ‘फाइलेरिया से बचाव की दवा सुरक्षित और असरदार, लाइलाज बीमारी से सुरक्षा में है मददगार’
    फाइलेरिया उन्मूलन संबंधित एमडीए अभियान को लेकर मीडिया कार्यशाला का हुआ आयोजन
    जिले में 10 अगस्त से दो सितम्बर तक करीब 45.98 लाख लोगों को खिलाई जानी है दवा
    गोरखपुर,
    फाइलेरिया जिसे हाथीपांव के नाम से भी जानते हैं, ऐसी बीमारी है जो एक बार हो जाए तो पूरी तरह से ठीक नहीं होती है । इस लाइलाज बीमारी से बचने के लिए साल में एक बार पांच साल तक लगातार बचाव की दवा का सेवन करना अनिवार्य है। इस साल भी 10 अगस्त से दो सितम्बर तक जिले के करीब 45.98 लाख लोगों को स्वास्थ्य विभाग की टीम घर घर जाकर दवा खिलाएंगी। यह दवा अन्तर्राष्ट्रीय मानकों पर परखी हुई है। यह पूरी तरह से सुरक्षित और असरदार है ।
    यह जानकारी मुख्य चिकित्सा अधिकारी डॉ आशुतोष कुमार दूबे ने सेंटर फॉर एडवोकेसी एंड रिसर्च (सीफार) संस्था के सहयोग से शहर के निजी होटल में आयोजित मीडिया कार्यशाला में दी। इस कार्यशाला का आयोजन एडी हेल्थ डॉ एनपी गुप्ता की अध्यक्षता में फाइलेरिया उन्मूलन संबंधित सर्वजन दवा सेवन (एमडीए) अभियान को लेकर मंगलवार को किया गया। कार्यशाला में विश्व स्वास्थ्य संगठन, पाथ और पीसीआई संस्थाओं के प्रतिनिधिगण ने भी तकनीकी जानकारियां साझा कीं।
    कार्यशाला को संबोधित करते हुए एडी हेल्थ डॉ एनपी गुप्ता ने कहा कि लोगों तक यह संदेश जरूर पहुंचना चाहिए कि फाइलेरिया रोधी दवा की एक खुराक उनको और उनके परिवार के भविष्य को हमेशा के लिए सुरक्षित कर देती है। सभी लोग दवा का सेवन करें, यह सुनिश्चित करना समाज के सभी वर्गों की सामूहिक जिम्मेवारी है।   इस मौके पर मुख्य चिकित्सा अधिकारी ने बताया कि क्यूलेक्स मादा मच्छर के काटने से होने वाली फाइलेरिया बीमारी से बचाव के लिए एक वर्ष से अधिक उम्र के सभी लोगों को दवा खानी है। एक वर्ष से दो वर्ष तक के बच्चे सिर्फ पेट से कीड़े निकालने की दवा खाएंगे। इससे अधिक उम्र के लोग दो प्रकार की दवा खाएंगे। दवा का सेवन एक वर्ष से कम उम्र के बच्चों, गर्भवती माताओं और बिस्तर पकड़ चुके अति गंभीर बीमार लोगों को नहीं करना है। दवा को खाली पेट नहीं खाना है और इसे स्वास्थ्य विभाग की टीम के सामने ही खाना है। स्वास्थ्य विभाग की दो सदस्यीय टीम जिले के 9.19 लाख घरों पर जाएगी और पात्र लाभार्थियों को उनके आयु वर्ग के अनुसार निर्धारित मात्रा में दवा खिलाएगी। इसके लिए कुल 4198 टीम का गठन किया गया है।
    जिला मलेरिया अधिकारी अंगद सिंह ने बताया कि फाइलेरिया से हाथ, पैर, स्तन और अंडकोष में सूजन (हाइड्रोसील) जैसे लक्षण संक्रमित मच्छर के काटने के पांच से पंद्रह वर्ष बाद नजर आते हैं। एक बार हाथीपांव हो जाने के बाद उसे सिर्फ नियंत्रित किया जा सकता है, ठीक नहीं । इस बीमारी से ग्रसित व्यक्ति और उसका परिवार सामाजिक और आर्थिक तौर पर काफी पीछे चला जाता है। इस बीमारी से बचाने के लिए शहर के सात प्लानिंग यूनिट और ग्रामीण क्षेत्र के सभी ब्लॉक में इस साल अभियान चलेगा।
    श्री सिंह ने बताया कि कुछ लोग इस मिथक के कारण दवा का सेवन नहीं करते हैं कि दवा खुली हुई है और इसकी सुरक्षा में संशय है। ऐसे लोगों को यह संदेश दिया जा रहा है कि दवा विश्व स्वास्थ्य संगठन के मानकों के अनुसार प्रमाणित है। इसे तभी खोला जाता है जब लाभार्थी को सेवन करवाना होता है। दवा का कोई भी दुष्प्रभाव नहीं होता है। जिन लोगों के भीतर पहले से माइक्रोफाइलेरी मौजूद होते हैं उन्हें दवा के सेवन के बाद मतली, चक्कर आना, सिरदर्द जैसे लक्षण आते हैं जो कुछ समय बाद स्वतः समाप्त हो जाते हैं। ये पूरी तरह से सामान्य लक्षण हैं और इनसे घबराने की आवश्यकता नहीं है।
    इस अवसर पर एसीएमओ डॉ एके चौधरी, डॉ गणेश यादव, डॉ वीपी पांडेय, सहायक निदेशक सूचना प्रशांत श्रीवास्तव, जिला सर्विलांस अधिकारी डॉ राजेश, अधीक्षक डॉ मणि शेखर, चिकित्सा अधिकारी डॉ आनंद, मंडलीय शहरी स्वास्थ्य समन्वयक डॉ प्रीति सिंह, उप जिला स्वास्थ्य शिक्षा एवं सूचना अधिकारी सुनीता पटेल, डीपीएम पंकज आनंद, सहायक मलेरिया अधिकारी राजेश चौबे, मलेरिया इंस्पेक्टर प्रभात रंजन सिंह, जेई एईएस कंसल्टेंट सिद्धेश्वरी सिंह, आरआरटी प्रभारी डॉ अर्चना समेत विभिन्न सहयोगी संगठनों के प्रतिनिधिगण प्रमुख तौर पर मौजूद रहे।

    *फाइलेरिया चैंपियन ने सुनाई अपनी कहानी.
    इस मौके पर पिपराईच ब्लॉक के सरंडा गांव से पहुंचे फाइलेरिया चैंपियन संतराज (65) ने अपनी कहानी सुनाई। उन्होंने बताया कि फाइलेरिया ने न केवल उन्हें शारीरिक तौर पर कमजोर बनाया, बल्कि आर्थिक तौर पर भी पीछे किया । पहले यह बीमारी उनके पिता को थी और फिर उन्हें हुई। बीमारी की पहचान भी बड़ी मुश्किल से होती है। उनके गांव में फाइलेरिया रोगी नेटवर्क बना तो उससे जुड़ने के बाद इस बीमारी के बारे में काफी कुछ जानने का मौका मिला। अब वह समूह के माध्यम से गांव के दूसरे लोगों को भी बीमारी के बारे में बताते हैं और साल भर में एक बार दवा खाने के लिए प्रेरित करते हैं। समूह के सभी लोगों को फाइलेरिया प्रभावित अंग के रूग्णता प्रबंधन और व्यायाम की जानकारी भी मिली है जिसके जरिये वह पहले की अपेक्षा बेहतर जीवन जी रहे हैं।
    सभी ने ली शपथ
    मीडिया कार्यशाला में उपस्थित सभी अधिकारियों और मीडिया कर्मियों ने फाइलेरिया उन्मूलन में सक्रिय सहयोग के लिए शपथ ली। सभी ने आश्वासन दिया कि वह न सिर्फ खुद दवा का सेवन करेंगे, बल्कि अपने आसपास के अधिकाधिक लोगों को दवा सेवन करवाने का प्रयास करेंगे। कार्यशाला के दौरान खुले सत्र का भी आयोजन हुआ जिसमें मीडिया के प्रतिनिधियों ने फाइलेरिया से संबंधित विभिन्न प्रकार के सवाल पूछे।

  • एक पेड़ मां के नाम के अंतर्गत तहत किया गया पौधारोपण

    एक पेड़ मां के नाम के अंतर्गत तहत किया गया पौधारोपण

    एक पेड़ मां के नाम के अंतर्गत तहत किया गया पौधारोपण
    गोला। नगर पंचायत गोला में सभी सभासद गणों ने यशस्वी प्रधानमंत्री एवं मुख्यमंत्री के दिशा निर्देश में शनिवार को एक पेड़ मां के नाम अभियान के अंतर्गत 51 पौधों का रोपण किया। तथा हरियाली बचाने के लिए सभी नागरिकों को इस अभियान मे शामिल होने का आह्वान किया।पर्यावरण को बचाने और हरियाली बढ़ाने के लिए एक पेड़ मां के नाम अभियान की शुरुआत की गई है। पूरे प्रदेश में आज के दिन में लाखों पेड़ लगाने का लक्ष्य रखा गया था। इसी क्रम में नगर पंचायत अध्यक्ष के प्रतिनिधि मुराली प्रसाद व जिला कोषाध्यक्ष शत्रुघ्न कसौधन ने कहा है कि एक पेड़ मां के नाम लगाकर अपनी मां की याद को चिर स्थायी बनाये एंव धरती मां को भी सवारें। जिला कोषाध्यक्ष ने नगरवासियों से अपने अपने क्षेत्र में अपनी मां की स्मृति में बड़ी संख्या में पौधारोपण करने का आह्वान किया।इस दौरान सभासद सच्चिदानंद राय भीम यादव दिनेश सिंह रमाशंकर संदीप सोनकर डाॅ राजेश जयसवाल रविंद्र मौर्य नगर पंचायत कर्मचारियों संग आदि लोग भी शामिल रहें।

  • 36.50 करोड़ पौधे रोपण कर नया कीर्तिमान रच दिया

    36.50 करोड़ पौधे रोपण कर नया कीर्तिमान रच दिया

    36.50 करोड़ पौधे रोपण कर नया कीर्तिमान रच दिया

    गोरखपुर।मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कहा कि कभी अत्यधिक गर्मी तो कभी अतिवृष्टि और कभी असमय बाढ़ भविष्य के प्रति आगाह करने वाली तथा ग्लोबल वार्मिंग की चेतावनी है। इस चेतावनी का संज्ञान लेकर हम धरती माता को फिर से हरा-भरा बनाने के संकल्प को पूरा करने में जुटे हैं। इस संकल्प की कड़ी में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के आह्वान पर सरकार ने व्यापक जनसहभागिता से उत्तर प्रदेश एक दिन में 36.50 करोड़ पौधरोपण का लक्ष्य हासिल कर नया कीर्तिमान रच दिया है। मुख्यमंत्री ने इस नए रिकॉर्ड के लिए सभी प्रदेशवासियों को बधाई दी है।

    सीएम योगी शनिवार शाम प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के आह्वान पर ‘एक पेड़ मां के नाम’ को समर्पित ‘पेड़ लगाओ-पेड़ बचाओ वृक्षारोपण जन अभियान-2024’ के अंतर्गत शनिवार शाम शहीद अशफाक उल्ला खां प्राणी उद्यान (गोरखपुर चिड़ियाघर) में पारिजात पौध का रोपण करने के बाद यहां आयोजित कार्यक्रम को संबोधित कर रहे थे। मुख्यमंत्री ने पर्यावरण में आ रहे परिवर्तन की चर्चा करते हुए कहा कि इस वर्ष की गर्मी लोगों को लंबे समय तक याद रहेगी। अमूमन गोरखपुर और आसपास के जिलों में 42-43 डिग्री तापमान रहता था लेकिन इस वर्ष तापमान 46-47 डिग्री तक पहुंच गया। अत्यधिक गर्मी, भीषण लू, अतिवृष्टि, असमय बाढ़, कभी सूखा पड़ जाना, ये सभी ग्लोबल वार्मिंग की तरफ ध्यान आकृष्ट करते हैं। गत वर्ष अक्टूबर में बाढ़ आई जबकि पहले अधिकतम 15 सितंबर तक बाढ़ आती थी।

    प्रकृति कर रही आगाह, समय रहते करना होगा सुधार
    सीएम योगी ने कहा कि कभी जुलाई के प्रथम सप्ताह में बाढ़ नहीं आती थी। पर, इस वर्ष जुलाई के प्रथम सप्ताह में बाढ़ आई और इससे प्रदेश के 24 जिले प्रभावित हुए। उन्होंने कहा कि मौसम में यह बदलाव भविष्य के प्रति आगाह करने वाला है। हमें समय रहते सुधार करना होगा अन्यथा प्रकृति अपने हिसाब से सुधार करेगी। प्रकृति की इस चेतावनी का संज्ञान लेकर आज पूरे प्रदेश में जनता जनार्दन की सहभागिता से रिकॉर्ड पौधरोपण किया गया है। पीएम मोदी के आह्वन पर एक पेड़ मां के नाम का अनुसरण करते हुए प्रदेश में हर व्यक्ति, संस्था, विभाग इस पवित्र कार्य से जुड़े हैं। राज्य में एक व्यक्ति की तरफ से मां के नाम तीन-तीन पेड़ लगाए गए हैं। हर तरफ एक ही आह्वान नजर आया, पेड़ लगाना है, पेड़ बचाना है और पर्यावरण को बचाना है।

    सात वर्ष में 168 करोड़ पौधरोपण का कीर्तिमान
    मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कहा कि विगत सात वर्ष में प्रदेश में 168 करोड़ पौधरोपण कर कीर्तिमान रचा गया है। इनमें से 75-80 प्रतिशत पेड़ सुरक्षित भी हैं। कहीं नक्षत्र वाटिका बनाई गई है तो कहीं नवग्रह वाटिका और हरिशंकरी वाटिका। मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रदेश में पौधों की कमी नहीं है। वन व उद्यान विभाग तथा निजी नर्सरियों के पास 50 करोड़ पौधे थे। इनमें से 36.50 करोड़ का इस्तेमाल आज के अभियान में हुआ है और शेष पौधों का भी क्रमिक रोपण किया जाएगा। उन्होंने कहा कि अब वैश्विक संस्थाएं भी उत्तर प्रदेश में पौधरोपण को मान्यता दे रही हैं। उन्होंने कहा कि कार्बन उत्सर्जन से पर्यावरण को क्षति हो रही है। उसके बचाव के लिए किसानों ने पेड़ लगाने के साथ ही कार्बन क्रेडिट अभियान के साथ अपना पंजीकरण कराया। सरकार के प्रयास से उत्तर प्रदेश के 25 हजार किसानों को कार्बन क्रेडिट के लिए 200 करोड़ का अनुदान प्राप्त हो रहा है।

    इको टूरिज्म स्पॉट बनेगी कुकरैल नदी
    सीएम योगी ने कहा कि 50 साल पहले लखनऊ में कुकरैल नदी का गोमती नदी में संगम होता था। 50 सालों में इसे पाटकर भूमाफियाओं ने कब्जा कर लिया। वहां बांग्लादेशी और रोहिंग्या तक बस गए। कुकरैल नदी को उसका स्वरूप देने के लिए सरकार को बड़े पैमाने पर अभियान चलाना पड़ा। सुप्रीम कोर्ट तक जाना पड़ा। अब कुकरैल नदी को इको टूरिज्म के स्पॉट के रूप में निखारा जा रहा है। वहां भगवान श्रीराम के छोटे भाई लक्ष्मण जी के नाम पर सौमित्र वन बसाया जा रहा है।

    गलत को प्रश्रय नहीं देना है
    सीएम योगी ने गोरखपुर के गोड़धोइया नाला परियोजना का उल्लेख करते हुए कहा कि इससे जलनिकासी की समस्या का समाधान होगा। नालों से अतिक्रमण हटेगा तभी शहरों में जलभराव को दूर किया जा सकेगा। उन्होंने आमजन से अपील की कि कभी भी गलत को प्रश्रय नहीं देना है।

    चिड़ियाघर में होगा वन्यजीवों के अनुकूल पर्यावरण
    सीएम योगी ने कहा कि गोरखपुर के चिड़ियाघर को काकोरी कांड के नायकों में शामिल शहीद अशफाक उल्ला खान के नाम पर नामकृत किया गया है। यह चिड़ियाघर मनोरंजन और ज्ञानवर्धन का माध्यम है। यहां पौधरोपण कर चिड़ियाघर के पर्यावरण को वन्यजीवों के अनुकूल किया जा रहा है।

    जीव, जीवन और पर्यावरण की रक्षा के लिए सीएम योगी सदैव प्रयत्नशील : रविकिशन
    पौधरोपण कार्यक्रम में सांसद रविकिशन शुक्ल ने कहा कि सीएम योगी हमेशा जीव, जीवन और पर्यावरण की रक्षा के लिए प्रयत्नशील रहते हैं। पर्यावरण और धरा को सुरक्षित करने के लिए उनके नेतृत्व में उत्तर प्रदेश हर वर्ष पौधरोपण का नया कीर्तिमान बना रहा है। स्वागत संबोधन मुख्य वन संरक्षक भीमसेन ने किया। इस अवसर पर विधायक विपिन सिंह, श्रीराम चौहान, राजेश त्रिपाठी, महेंद्रपाल सिंह, प्रदीप शुक्ल, एमएलसी एवं भाजपा के प्रदेश उपाध्यक्ष डॉ. धर्मेंद्र सिंह, क्षेत्रीय अध्यक्ष सहजानंद राय, जिलाध्यक्ष युधिष्ठिर सिंह, महानगर अध्यक्ष राजेश गुप्ता आदि मौजूद रहे। कार्यक्रम के अंत मे मुख्य वन संरक्षक तथा प्रभागीय वन अधिकारी एवं चिड़ियाघर के निदेशक विकास यादव ने मुख्यमंत्री एवं जनप्रतिनिधियों को पौधे भेंट किए।

  • प्लास्टिक के कूड़े से जानवरों को कैसे सुरक्षित करें

    प्लास्टिक के कूड़े से जानवरों को कैसे सुरक्षित करें

    प्रत्येक घर में प्रतिदिन कम से कम 1 या 10 से अधिक प्लास्टिक की थैलियाँ आती हैं। (जैसे तेल की थैली, दूध की थैली, किराने की थैली, शैम्पू, साबुन, मैगी, कुरकुरे, बिस्कुट आदि) आपको यह करना है कि ये सभी थैलियां हमें रोज कूड़ेदान की जगह कोल्ड ड्रिंक की खाली बोतल में डालनी हैं। आप सप्ताह में एक बार बोतल को भर सकते हैं और उचित ढक्कन के साथ कूड़ेदान में फेंक दें। ऐसा करने से जानवर बिखरा हुआ प्लास्टिक नहीं खाएंगे। हवा चलने पर प्लास्टिक की थालियां इधर उधर नहीं उड़ेगी प्लास्टिक कचरे और प्लास्टिक की बोतलों का उचित निपटान होगा। नगर पालिका को कूड़ा जमा करने में भी सुविधा होगी।
    विनम्र निवेदन है कि प्रत्येक घर इस आवश्यकता को पहचानें और इस शुभ कार्य की शुरुआत करें..
    एक कदम स्वच्छता की ओर