Category: हेल्थ

  • ठंड में टीबी मरीज रखें विशेष सतर्कता, संक्रमण के प्रसार की भी बढ़ जाती है आशंका

    ठंड में टीबी मरीज रखें विशेष सतर्कता, संक्रमण के प्रसार की भी बढ़ जाती है आशंका

    ठंड में टीबी मरीज रखें विशेष सतर्कता, संक्रमण के प्रसार की भी बढ़ जाती है आशंका,

    बदलते मौसम में स्वास्थ्य विभाग ने टीबी के उपचाराधीन मरीजों को किया सतर्क,

    जिले में करीब नौ हजार टीबी मरीजों का चल रहा है उपचार,

    गोरखपुर, 22 नवम्बर 2024,

    बढ़ती हुई ठंड के बीच स्वास्थ्य विभाग ने टीबी के उपचाराधीन मरीजों को सतर्क किया है। मुख्य चिकित्सा अधिकारी और चेस्ट फीजिशियन डॉ आशुतोष कुमार दूबे ने कहा है कि ठंड से बचाव न करने पर टीबी मरीजों में जटिलताएं बढ़ सकती हैं। अत्यधिक खांसी आ सकती है और इस खांसी के कारण संक्रमण के प्रसार की भी आशंका बढ़ जाती है। हांलाकि जिन टीबी मरीजों ने तीन से चार हफ्ते तक टीबी की दवा का नियमित सेवन कर लिया है, उनसे संक्रमण नहीं फैलता है। इस मौसम में जिले के उपचाराधीन करीब नौ हजार टीबी रोगियों को विशेष तौर पर सतर्क रहने की सलाह दी गई है।

    मुख्य चिकित्सा अधिकारी ने कहा कि टीबी मरीजों को ठंड और प्रदूषण से बचाव के लिए इस मौसम में मास्क का प्रयोग करना चाहिए। इससे वह खुद भी जटिलताओं से बचेंगे, साथ ही बीमारी के प्रसार की आशंका भी कम रहेगी। नियमित दवा सेवन के साथ साथ मरीजों को गर्म कपड़े पहनने चाहिए। खांसी के साथ आने वाले बलगम को मिट्टी से ढक देना है। मौसमी फल व सब्जियों के साथ प्रोटीनयुक्त आहार जैसे दूध, पनीर, सोयाबीन, मांस और अंडे आदि का सेवन जारी रखना है। ठंड के मौसम में असावधानी फेफड़ों के टीबी के मरीजों में जटिलताएं बढ़ा सकता है, इसलिए मरीज पूरे शरीर को ढक कर रखें। घर से बाहर कम से कम निकलें।

    डॉ दूबे ने बताया कि इस मौसम में सर्दी और खांसी की समस्या सामान्य है। ऐसे में अगर किसी को दो सप्ताह से अधिक की लगातार खांसी आ रही है तो उसे टीबी जांच भी अवश्य करवानी चाहिए। इस जांच की सुविधा सरकारी खर्चे पर सभी सरकारी अस्पतालों में उपलब्ध है। रात में पसीने के साथ बुखार, बलगम में खून आना, लगातार वजन गिरना, सांस फूलना और सीने में दर्द भी टीबी के लक्षण हैं। लगातार खांसी के साथ ये लक्षण दिखें तो जांच जरूर कराएं। टीबी के शीघ्र जांच और इलाज से जहां मरीज पूरी तरह से ठीक हो जाता है, वहीं संक्रमण का प्रसार भी रुक जाता है।

    मधुमेह ग्रसित टीबी मरीज रखें ध्यान,

    ठंड के मौसम में मधुमेह को नियंत्रित रखना भी एक अहम चुनौती है। जिन मरीजों को टीबी के साथ मधुमेह है उन्हें संयमित खानपान रखना चाहिए। मधुमेह को नियंत्रित रखे बिना टीबी की दवा कारगर नहीं होती है। आहार परामर्शदाता के सुझाव के अनुसार रोटी, दाल और हरी साग सब्जियों का सेवन करना चाहिए। दूध से मलाई हटा कर पीना चाहिए। मधुमेह और टीबी दोनों दवाओं का सेवन जारी रखना चाहिए। लक्षण दिखने पर मधुमेह के मरीजों को टीबी की जांच भी अवश्य करवानी चाहिए।

  • पुरुष नसबंदी पखवाड़ा शुरू, 28 नवम्बर से होगा सेवा प्रदायगी चरण का आगाज

    पुरुष नसबंदी पखवाड़ा शुरू, 28 नवम्बर से होगा सेवा प्रदायगी चरण का आगाज

     

    मोबिलाईजेशन चरण में 27 नवम्बर तक प्रेरित किये जाएंगे योग्य दंपति,

    ’’आज ही शुरूआत करें, पति-पत्नी मिल कर परिवार नियोजन की बात करें ’’ स्लोगन से कर रहे जागरूक

    चार दिसम्बर तक अभियान चला कर की जाएगी पुरुष नसबंदी

    गोरखपुर, 21 नवम्बर 2024,

    जिले में पुरुष नसबंदी पखवाड़े का गुरुवार से आगाज हो गया और यह चार दिसम्बर तक चलेगा। इसका मोबिलाईजेशन चरण 27 नवम्बर तक चलाया जाएगा और इस दौरान योग्य दंपति को परिवार नियोजन के सभी साधनों की जानकारी देकर इच्छुक पुरुष को नसबंदी के लिए तैयार किया जाएगा। इसके बाद 28 नवम्बर से सेवा प्रदायगी चरण शुरू होगा, जिसमें अभियान चला कर पुरुष नसबंदी की सुविधा प्रदान की जाएगी। प्रथम चरण में ’’आज ही शुरूआत करें, पति-पत्नी मिल कर परिवार नियोजन की बात करें ’’ जैसे स्लोगन की मदद से लोगों को परिवार नियोजन की महत्ता समझाई जा रही है।

    अपर मुख्य चिकित्सा अधिकारी परिवार कल्याण डॉ एके चौधरी ने बताया कि सारथी वाहन, सास बहू बेटा सम्मेलन और घर घर सम्पर्क कर मोबिलाईजेशन चरण के दौरान दंपति को परिवार नियोजन की महत्ता बताई जाएगी। खासतौर से पुरुष नसबंदी के बारे में विस्तार से जानकारी देने का निर्देश है। स्वास्थ्य कार्यकर्ता द्वारा दंपति को संदेश दिया जा रहा है कि पुरुष नसबंदी एक स्थायी गर्भनिरोधक साधन है। यह बिना चीरा और टांके के होने वाली दस मिनट की सरल प्रक्रिया है। इसे करवाने के आधे घंटे बाद व्यक्ति घर जा सकता है। पुरुष नसबंदी आसान और सुरक्षित है और इसे करवाने के बाद सब कुछ पहले जैसा ही हो जाता है।

    डॉ चौधरी ने बताया कि वर्ष 2020 से 2023 तक पखवाड़े के दौरान 50 पुरुषों ने नसबंदी को अपनाया। इस दौरान ढेर सारे पुरुषों ने परिवार नियोजन के लिए कंडोम का विकल्प चुना और करीब साढ़े बारह लाख कंडोम सरकारी खर्चे पर वितरित किये गये। परिवार नियोजन में पुरुषों की भागीदारी की महत्वपूर्ण भूमिका है और इसे सुनिश्चित करवाने के लिए ही यह पखवाड़ा मनाया जाता है। इस बार भी ‘’स्वस्थ मां स्वस्थ बच्चा, जब पति का हो परिवार नियोजन में योगदान अच्छा’’ और ‘’पति होने का फर्ज निभाऊंगा, स्वस्थ, सुखी परिवार के लिए परिवार नियोजन की जिम्मेदारी मैं भी उठाऊंगा’’ जैसे स्लोगन्स के जरिये पुरुषों की भागीदारी की महत्ता समझाई जा रही है। नसबंदी की सुविधा प्राप्त करने के लिए नजदीकी स्वास्थ्य कार्यकर्ता से सम्पर्क कर सकते है।

    मिलती है प्रोत्साहन राशि,

    एसीएमओ आरसीएच डॉ चौधरी ने बताया कि नसबंदी करवाने वाले पुरुषों को तीन हजार रुपये की प्रोत्साहन राशि उनके खाते में दी जाती है। साथ ही उन्हें कुछ सावधानियों के बारे में भी बताया जाता है। जैसे पुरुष नसबंदी के बाद भी कंडोम का इस्तेमाल तब तक करना है, जब तक कि जांच द्वारा स्पष्ट न हो जाए कि पहले के शुक्राणु समाप्त हो गये हैं। नसबंदी के तीन माह बाद सरकारी अस्पताल से शुक्राणु जांच करवाने के बाद इसका प्रमाण पत्र प्राप्त किया जा सकता है।

  • कैंसर सर्जरी के साथ पहली बार लाइव चली एनाटोमी की क्लास

    कैंसर सर्जरी के साथ पहली बार लाइव चली एनाटोमी की क्लास

    कैंसर सर्जरी के साथ पहली बार लाइव चली एनाटोमी की क्लास,

    कैंसर की मॉडिफाइड रेडिकल मास्टेक्टॉमी सर्जरी करने वाले देश के चुनिंदा इंस्टिट्यूट में शामिल हुआ गुरु गोरक्षनाथ इंस्टिट्यूट ऑफ मेडिकल साइंसेज,

    दुनिया के जाने-माने कैंसर सर्जन डॉ. संजय माहेश्वरी और रेखा माहेश्वरी ने की कैंसर पीड़ित महिला की सर्जरी,

    गोरखपुर, 21नवंबर। महायोगी गोरखनाथ विश्वविद्यालय में संचालित गुरु गोरक्षनाथ इंस्टिट्यूट ऑफ मेडिकल साइंसेज देश के उन चुनिंदा इंस्टिट्यूट में शामिल हो गया है जहां कैंसर की मॉडिफाइड रेडिकल मास्टेक्टॉमी (एमआरएम) सर्जरी सफलतापूर्वक की गई। यही नहीं, इस इंस्टिट्यूट में कैंसर की एमआरएम सर्जरी के साथ विश्व प्रसिद्ध कैंसर सर्जन डॉ. संजय माहेश्वरी द्वारा एमबीबीएस विद्यार्थियों के लिए एनाटोमी की लाइव क्लास भी चलाई गई और उनकी जिज्ञासाओं का समाधान किया गया। जटिल सर्जरी के साथ एनाटोमी की लाइव क्लास का संचालन विश्व में संभवतः पहली बार किया गया।

    एमपी बिरला ग्रुप ऑफ हॉस्पिटल्स के मेडिकल डायरेक्टर और दुनिया के जाने-माने कैंसर सर्जन डॉ. संजय माहेश्वरी और उनकी पत्नी कैंसर सर्जन डॉ. रेखा माहेश्वरी की चिकित्सकीय सेवाएं गुरु गोरक्षनाथ इंस्टिट्यूट ऑफ मेडिकल साइंसेज के जरिये प्रतिमाह पूर्वी उत्तर प्रदेश के कैंसर रोगियों को मिलने लगी हैं। गत दिवस डॉ. संजय माहेश्वरी और रेखा माहेश्वरी ने इस इंस्टिट्यूट में रोगियों की जांच और परामर्श देने के साथ एक 52 वर्षीय कैंसर पीड़ित महिला की सफल मॉडिफाइड रेडिकल मास्टेक्टॉमी सर्जरी की। यह सर्जरी तीन घंटे से अधिक समय तक चली।

    डॉ. संजय माहेश्वरी ने बताया कि मॉडिफाइड रेडिकल मास्टेक्टॉमी में स्तन का पूरा भाग जिसमें एरियल (निप्पल के चारों तरफ की डार्क त्वचा), निप्पल नोड एवं अंडर आर्म के नीचे के कुछ हिस्सों को काट कर निकल जाता है। यह पद्धति कैंसर के व्यापक चिकित्सकीय प्रबंधन में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है। यह विधि क्लासिकल रेडिकल मास्टेक्टॉमी, जिसे कभी कैंसर का इलाज माना जाता था की तुलना में कम कठोर आपरेशन है। सर्जरी के बाद मरीज को दो-तीन दिन तक दर्द या बांह के नीचे खिंचाव व उस क्षेत्र में झुनझुनी की शिकायत रहती है। यह दिक्कत कुछ दिनो में ही ठीक हो जाती है।

    डॉ. संजय माहेश्वरी ने बताया कि महायोगी गोरखनाथ विश्वविद्यालय में संचालित गुरु गोरक्षनाथ इंस्टिट्यूट ऑफ मेडिकल साइंसेज के शानदार इंफ्रास्ट्रक्चर के चलते उन्होंने एमबीबीएस फर्स्ट बैच के विद्यार्थियों के लिए एनाटोमी की क्लास भी लाइव चलाई। संभवतः पूरी दुनिया में एनाटोमी की लाइव क्लास कैंसर की इस तरह की सर्जरी के साथ चलाई गई है। इस दौरान एमबीबीएस फर्स्ट बैच के विद्यार्थियों को कैंसर प्रभावित अंग की संरचना की बारीकियों को समझाया गया और पढ़ाई के शुरुआती दौर में ही उन्हें सर्जरी से जुड़ी गहन जानकारी भी दी गई। डॉ. माहेश्वरी सर्जरी करने के दौरान विद्यार्थियों से लगातार संवाद करते रहे और उनके सभी सवालों का भी जवाब दिया।

  • लिटिल बुद्धा के छात्रों का हुआ दंत परीक्षण

    लिटिल बुद्धा के छात्रों का हुआ दंत परीक्षण

    संवाददाता– एस. पी. सिंह

    गोरखपुर/सहजनवा ।

    लिटिल बुद्धा स्कूल में दंत समस्या एवं साफ सफाई के प्रति जागरुकता के उद्देश्य से छात्र-छात्राओं के लिए दंत चिकित्सा शिविर का आयोजन हुआ । जिसमें शहर की प्रसिद्ध दंत चिकित्सक डॉ० ईशा जैन गुलाटी एवं उनकी टीम द्वारा 69 छात्र-छात्राओं का दंत परीक्षण किया गया । दांत स्वस्थ एवं मजबूत रहे इसके लिए क्या खाना चाहिए एवं क्या नहीं खाना चाहिए इससे अवगत कराया गया । छात्र-छात्राओं के साथ आये सभ्रान्त अभिभावकों को संबोधित करते हुए डॉ० गुलाटी ने कहा कि आप अपने दांत का ख्याल अगर शुरुआत से ही करते हैं तो यह आपका लम्बे समय तक साथ देंगे और अगर आपने अत्यधिक चॉकलेट, फास्ट फास्ट फूड, कोल्ड ड्रिंक, पैकेट बंद फूड का सेवन किया और अपने दांत की समुचित रूप से साफ सफाई नहीं की तो कम आयु में आपके दांत आपका साथ छोड़ देंगे ।
    संस्था प्रबंधक डॉ० संगीता अग्रवाल ने कहा कि आप अपनी सेहत के प्रति सदैव जागरूक एंव सजग रहे । नियमित दिनचर्या व्यायाम सही खान-पान का उपयोग करें और कम से कम टी०वी० एवं मोबाइल का प्रयोग करें । अगर आप अपनी ऊर्जा एवं समय टी०वी० एवं मोबाइल में ही लगा देंगे तो आपके जीवन में निर्धारित लक्ष्य अधूरे रह जाएंगे । संस्था की प्राचार्य साहिस्ता खान ने उपस्थित अतिथि एवं अभिभावकों का स्वागत कर धन्यवाद ज्ञापित किया । कार्यक्रम में ममता मिश्रा, नजमा, नेहा यादव, सबा, प्रिया भारती, इत्यादि लोगो कि अहम भूमिका रही ।

  • शिविर में चयनित हुए दिव्यांग

    शिविर में चयनित हुए दिव्यांग

     

    ब्यूरो प्रभारी —-विनय तिवारी
    बड़हलगंज/ गोरखपुर (निष्पक्ष टुडे) : प्रदेश के दिव्यांगों को सहायक उपकरण प्रदान कर उनके जीवन को सुगम और आसान बनाने हेतु सोमवार को शासन के निर्देश पर बड़हलगंज के अंबेडकर तिराहे पर एक शिविर का आयोजन किया गया जिसमें उपकरण हेतु 49 लाभार्थी चयनित किए गए। शिविर को संबोधित करते हुए चेयरमैन प्रतिनिधि महेश उमर ने मुख्यमंत्री का धन्यवाद देते हुए सभी को शिविर में किए जाने वाले कार्यों और योजनाओं से अवगत कराया। उन्होंने कहा कि मानवता के नाते हम सभी का कर्तव्य है कि हम अपने आसपास किसी पात्र व्यक्ति को सरकार की योजना का लाभ दिलाएं।पुनर्वास अधिकारी राजेश कुमार यादव तथा विशेष शिक्षक नागेन्द्र पांडेय ने कहा कि सरकार के द्वारा दिव्यांगजनों को सहायक उपकरण उपलब्ध करवाने को लेकर शिविर में चिह्नीकरण किया गया है। इन्हें इनकी आवश्यकता के अनुसार सहायक उपकरण प्रदान किए जाएंगे। उन्होंने विभाग द्वारा दिव्यांग जनों से संबंधित अन्य महत्वपूर्ण योजनाओं की विस्तार से जानकारी दी। शिविर में 49 दिव्यांगों का योजनाओं के लिए पंजीकरण किया गया। इस अवसर पर विधायक चिल्लूपार प्रतिनिधि आचार्य वेदप्रकाश त्रिपाठी, प्रशांत शाही, बनवारी प्रसाद,मानस मणि त्रिपाठी, दीपक शर्मा, दीपक गौंड, राकेश राय, रमेश शाही, सुग्रीव यादव, अखण्ड प्रताप शाही, गंगा सागर शाही, सुरेश उमर आदि उपस्थित रहे।

  • सशस्त्र सीमा बल द्वारा रक्तदान शिविर का आयोजन

    सशस्त्र सीमा बल द्वारा रक्तदान शिविर का आयोजन

    गोरखपुर: सशस्त्र सीमा बल (एसएसबी) के प्रशिक्षु प्रशिक्षण केंद्र एवं संयुक्त चिकित्सालय द्वारा दिनांक 18 नवंबर 2024, दिन सोमवार को Composite Hospital SSB, गोरखपुर में एक रक्तदान शिविर का सफलतापूर्वक आयोजन बाबा राघवदास मेडिकल कॉलेज के सहयोग से किया गया।

    इस शिविर में एसएसबी के कार्मिकों और प्रशिक्षुओं ने उत्साहपूर्वक भाग लिया तथा स्वेच्छा से रक्तदान किया। इस आयोजन का उद्देश्य जरूरतमंद मरीजों को समय पर रक्त उपलब्ध कराना और समाज में रक्तदान के प्रति जागरूकता फैलाना था।

    कार्यक्रम के दौरान एसएसबी के वरिष्ठ अधिकारियों ने उपस्थित होकर रक्तदान करने वाले जवानों का उत्साहवर्धन किया और इस नेक कार्य को समाज सेवा का उत्तम उदाहरण बताया। बाबा रघवदास मेडिकल कॉलेज के डॉक्टरों और स्टाफ ने इस शिविर के आयोजन में सहयोग प्रदान किया और रक्त संग्रह का कार्य सुचारू रूप से संपन्न किया।

    सशस्त्र सीमा बल की यह पहल समाज के प्रति उसकी जिम्मेदारी और सेवाभाव को दर्शाती है। इस अवसर पर उपस्थित सभी लोगों ने रक्तदान के महत्व को समझा और भविष्य में इस कार्य में अपना योगदान देने की प्रेरणा प्राप्त की।

    शिविर के अंत में एसएसबी अधिकारियों ने भविष्य में भी इस प्रकार के सामाजिक कार्यों में सक्रिय भागीदारी का आश्वासन दिया। कार्यक्रम का सफल समापन सभी के सहयोग और सेवाभाव के साथ हुआ।

    आकस्मिक समय में रक्तदान के लिए संपर्क करें:
    सशस्त्र सीमा बल,
    प्रशिक्षु प्रशिक्षण केंद्र एवं संयुक्त चिकित्सालय,
    गोरखपुर।

  • नवजात शिशु में चार लक्षणों के प्रति रहें सतर्क, घरेलू उपचार में समय न गवाएं

    नवजात शिशु में चार लक्षणों के प्रति रहें सतर्क, घरेलू उपचार में समय न गवाएं

     

    जिले में 12 नवम्बर से शुरू हुए निमोनिया नियंत्रण अभियान के तहत दिया जा रहा संदेश,

    स्वास्थ्य विभाग नजदीकी अस्पताल पहुंचने की दे रहा है सलाह,

    गोरखपुर, 16 नवम्बर 2024

    बच्चे के जन्म से लेकर 28 दिन तक की अवस्था उसके सेहत के दृष्टि से अति संवेदनशील होती है। इस अवधि में बच्चे को नवजात शिशु कहते हैं। इस अवस्था में चार लक्षणों के प्रति अपेक्षाकृत अधिक सतर्क रहना है। अगर यह लक्षण दिखें तो घरेलू उपचार में समय बर्बाद मत करें। तत्काल स्थानीय आशा कार्यकर्ता से सम्पर्क करना है और बिना समय गवाएं नवजात शिशु को नजदीकी सरकारी अस्पताल ले जाना है।

    यह संदेश स्वास्थ्य विभाग द्वारा जन जन को निमोनिया नियंत्रण अभियान के तहत दिया जा रहा है। जनजागरूकता संबंधी यह विशेष अभियान 12 नवम्बर से शुरू हुआ है और 28 फरवरी तक चलेगा। लोगों को बताया जा रहा है कि निमोनिया का यह खतरा नवजात शिशुओं के साथ साथ बच्चों पर भी होता है। उनकी सेहत के प्रति खासा सतर्कता बरतनी होगी, अन्यथा जटिलताएं बढ़ सकती हैं।

    मुख्य चिकित्सा अधिकारी डॉ आशुतोष कुमार दूबे ने बताया कि अगर किसी नवजात शिशु या बच्चे को तेज बुखार आ रहा हो, पसली चल रही हो या छाती नीचे धंस रही हो, तेजी से सांस चल रही हो और खांसी जुकाम बढ़ रहा हो तो सतर्क हो जाएं। यह संभावित निमोनिया का लक्षण हो सकता है । इन लक्षणों के प्रति लोगों को जागरूक करने के लिए प्रचार प्रसार हो रहा है। समुदाय को बताया जा रहा है कि पांच साल तक के बच्चों के मृत्यु की सबसे बड़े कारणों में से एक निमोनिया है। ‘’निमोनिया नहीं, तो बचपन सही’’ और ‘‘चैन की सांस लेगा बचपन जब आप तुरंत पहचानेंगे निमोनिया के लक्षण’’ जैसे नारों की मदद से लोगों को स्वस्थ व सुरक्षित बचपन की राह दिखाई जा रही है।

    डॉ दूबे ने बताया कि जन्म के समय बच्चे का वजन कम होने पर और समय से पहले बच्चे का जन्म होने पर उसे निमोनिया होने की आशंका अधिक है। बच्चों में रोग प्रतिरोधक क्षमता पूरी तरह से विकसित नहीं होती है और उनकी श्वसन नली भी छोटी होती है, इसलिए बच्चों के निमोनिया के प्रति अपेक्षाकृत ज्यादा सतर्क रहने की आवश्यकता है। विश्व में हर 43 सैकेंड में निमोनिया के कारण एक बच्चे की मौत हो जाती है। यूनिसेफ संस्था द्वारा नवम्बर 2023 में सार्वजनिक की गई एक रिपोर्ट के मुताबिक विश्व के प्रति एक लाख बच्चों पर निमोनिया के 1400 मामले देखे गये हैं।

    *ऐसे कर सकते हैं बचाव*

    सीएमओ ने बताया कि नियमित टीकाकरण के जरिये बच्चों में निमोनिया के मामले नियंत्रित किये जा रहे हैं। बच्चे के जन्म के छह हफ्ते और चौदह हफ्ते पर एवं इसके बाद नौ माह पर निमोनिया से बचाव के लिए उन्हें निमोकॉकल वैक्सीन (पीसीवी) लगाई जाती है। हेमोफिलस इन्फ्लुएंजा टाइप बी निमोनिया से बचाव में पेंटावेलेंट टीका भी मददगार है। यह टीका बच्चे के जन्म के छह, दस और चौदहवें सप्ताह में सरकारी खर्चे पर लगाया जा रहा है। नवजात को शीघ्र स्तनपान, बच्चों को छह माह तक सिर्फ स्तनपान और छह माह बाद स्तनपान के साथ साथ दो वर्ष की उम्र तक पोषणयुक्त घरेलू पूरक आहार भी निमोनिया से बचाने में मददगार है। बच्चों में दस्त के कारण भी निमोनिया की आशंका अधिक होती है । दस्त से बचाव के लिए ओआरएस के पैकेट और जिंक की गोलियां स्वास्थ्य विभाग द्वारा दी जाती हैं।

  • निक्षय मित्र योजना में भटहट सीएचसी ने पूरे जिले में पेश की मिसाल

    निक्षय मित्र योजना में भटहट सीएचसी ने पूरे जिले में पेश की मिसाल

     

    सीएचसी के चिकित्सकों, स्टॉफ और सीएचओ ने 71 मरीजों को एक साथ गोद लिया,

    अन्य स्वास्थ्य इकाइयों को भी भटहट मॉडल अपनाने के लिए किया जाएगा प्रेरित,

    गोरखपुर, 15 नवम्बर 2024

    टीबी के उपचाराधीन मरीजों को गोद लेकर पोषण में सहयोग, मानसिक संबल देने और योजनाओं का लाभ दिलवाने से संबंधित निक्षय मित्र योजना में लगातार अभिनव प्रयास सामने आ रहे हैं। इसी कड़ी में भटहट सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र (सीएचसी) ने पूरे जिले में मिसाल पेश की है। इस केंद्र के चिकित्सकों, स्टॉफ और सत्रह सामुदायिक स्वास्थ्य अधिकारियों (सीएचओ) ने 71 टीबी उपचाराधीन मरीजों को एक साथ गोद लिया है। जिला क्षय उन्मूलन अधिकारी (डीटीओ) डॉ गणेश यादव ने बताया कि जिले की अन्य स्वास्थ्य इकाइयों को भी एडॉप्शन का भटहट मॉडल अपनाने के लिए प्रेरित किया जाएगा ।

    डीटीओ डॉ यादव ने बताया कि मुख्य चिकित्सा अधिकारी डॉ आशुतोष कुमार दूबे के दिशा निर्देशन में निक्षय मित्र योजना से सरकारी व गैर सरकारी संगठनों, जनप्रतिनिधियों और समाज के अलग अलग वर्गों के लोगों को जुड़ने के लिए प्रेरित किया जा रहा है। विभिन्न वर्गों के लोग और कई संस्थाएं जन्मदिन, पुण्यतिथि और स्थापना दिवस जैसे मौकों पर नये उपचाराधीन टीबी मरीजों को गोद ले रही हैं। गोद लेने वाले मरीज को इलाज चलने तक प्रति माह पोषण संबंधी सहयोग देने के साथ साथ लगातार फॉलो अप करना है ताकि उसकी दवा नियमित तौर पर चलती रहे । टीबी मरीज की दवा बीच में बंद होने पर जटिलताएं बढ़ जाती हैं। टीबी उपचारीधीन मरीजों को यह विश्वास भी दिलाना है कि नियमित दवा सेवन से वह ठीक हो जाएंगे। पात्र मरीजों और उनके परिजनों को सरकार की महत्वपूर्ण सामाजिक योजनाओं जैसे पीएम आवास, पेंशन, आयुष्मान भारत योजना आदि से जोड़ने में भी निक्षय मित्र मदद कर करते हैं। इसी कड़ी में भटहट सीएचसी पर 71 लोगों ने कुल 71 टीबी मरीजों को गोद लिया है।

    भटहट सीएचसी के वरिष्ठ उपचार पर्यवेक्षक (एसटीएस) सद्दाम हुसैन ने बताया कि टीबी उपचाराधीन 53 पुरुष और 18 महिलाएं गोद ली गयी हैं। यह सभी कमजोर आय वर्ग के हैं और ज्यादातर छोटे किसान या मजदूर परिवारों से ताल्लुक रखते हैं। इनमें पांच मरीज बाल श्रेणी के हैं। सीएचसी के अधीक्षक डॉ अविनाश सिंह के नेतृत्व में पूरे एक माह तक पूरी सीएचसी का संवेदीकरण किया गया, जिससे लोगों ने निक्षय मित्र बनने के प्रति उत्साह दिखाया। गुरूवार को आयोजित एक कार्यक्रम के दौरान ब्लॉक प्रमुख प्रतिनिधि राघवेंद्र सिंह, एसीएमओ आरसीएच डॉ एके चौधरी, डिप्टी सीएमओ डॉ अश्वनी चौरसिया, भाजपा नेता संजय सिंह और चिकित्सा अधिकारी डॉ प्रशांत ने सीएचसी की तरफ से टीबी उपचाराधीन मरीजों को पोषण पोटली सौंपा।

    प्रत्येक मरीज का रखेंगे ध्यान

    निक्षय मित्र और भटहट सीएचसी के डेंटल हाइजिनिस्ट प्रकाश श्रीवास्तव ने बताया कि सीएचसी के सभी निक्षय मित्रों ने संकल्प लिया है कि वह ठीक होने तक गोद लिये गये मरीजों का फॉलो अप करेंगे। सभी मरीजों को पोषण पोटली में भुना चना, सोयाबीन, अरहर दाल, मूंगफली दाना, गुड़, कच्चा चना, किसमिस, सेब और केला दिया गया है। आगे भी यथासंभव पोषण सामग्री प्रदान की जाएगी।

    1000 रुपये मिलेगी प्रोत्साहन राशि

    एसीएमओ आरसीएच ने उपस्थित लोगों को बताया कि टीबी के इलाज में पोषण की महत्ता को देखते हुए ही निक्षय मित्र योजना चलाई जा रही है। पोषण से भरपूर खानपान से मरीज जल्दी ठीक हो जाते हैं। सरकार ने भी एक नवम्बर से पोषण के लिए प्रति माह 500 की दर से मिलने वाली धनराशि बढ़ा कर 1000 रुपये कर दिया है।

    इन्होंने किया विशेष सहयोग

    एसटीएस ने बताया कि डब्ल्यूएचओ कंसल्टेंट डॉ नॉविल रोज, चिकित्सा अधिकारी डॉ शिप्रा राज, डॉ सीबी शर्मा, डॉ एजाज अहमद, डॉ दिनेश साहनी, पीपीएम समन्वयक एएन मिश्रा, मिर्जा आफताब बेग, एचईओ कमलेश्वर सिंह, प्रकाश श्रीवास्तव, रतनलाल श्रीवास्तव, डीडी भारतीय, मुरलीश्याम, संजय कुशवाहा, मनोज, संदीप सिंह, राकेश चौधरी, आरती त्रिपाठी, राकेश गौंड, सौम्या श्रीवास्तव, सुख सागर, पिंटू और अमीरुन्निशा का इस पहल में विशेष योगदान रहा है।

  • एम्स विश्राम सदन के निर्माण हेतु ओएमयू साइन

    एम्स विश्राम सदन के निर्माण हेतु ओएमयू साइन

    संवाददाता: शिशिर श्रीवास्तव, गोरखपुर

    गोरखपुर:आज दिनांक 15 नवम्बर 2024 को एम्स गोरखपुर में पावरग्रिड द्वारा निगमित सामाजिक दायित्व (CSR) के अंतर्गत 500 बेड के विश्राम सदन के निर्माण कार्य हेतु समझौता ज्ञापन हस्ताक्षर समारोह आयोजित किया गया।

    कार्यपालक निदेशक एवं मुख्य कार्यकारी अधिकारी (एम्स गोरखपुर) प्रोफेसर (डॉ.) अजय सिंह, उप निदेशक, (एम्स – गोरखपुर), श्री अरुण कुमार सिंह, मुख्य विकास अधिकारी, गोरखपुर, श्री संजय कुमार मीणा, ए.डी. एम., गोरखपुर तथा कार्यपालक निदेशक, पावरग्रिड (उत्तरी क्षेत्र-3) श्री वाई. के. दीक्षित, कार्यपालक निदेशक-सी.एस. आर, पावरग्रिड (केंद्रीय कार्यालय), श्री ए. नागराजु, महाप्रबंधक गोरखपुर, श्री डी.पी. सिंह, उपमहा प्रबंधक-सी.एस. आर. श्री सबाहत उमर की गरिमामयी उपस्थिति में दोनों पक्षों द्वारा समझौता ज्ञापन पर हस्ताक्षर किए गये।

    पावर ग्रिड कॉर्पोरेशन ऑफ इंडिया लिमिटेड तथा अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान (एम्स) – गोरखपुर के मध्य पावरग्रिड की सी. एस. आर. पहल के तहत रु 44.49 करोड़ की लागत से एम्स गोरखपुर में इलाज के लिए आने वाले मरीजों एवं उनके परिचारकों के लिए 500 बेड के विश्राम सदन के निर्माण हेतु वित्तीय सहायता प्रदान किए जाने के लिए समझौता ज्ञापन पर हस्ताक्षर किये गये।


    इस अवसर पर एम्स गोरखपुर के मुख्य कार्यकारी अधिकारी प्रो० डॉक्टर अजय सिंह ने पत्रकारों से वार्ता करते हुए बताया कि “न केवल गोरखपुर और आसपास के लोग बल्कि दूर दूर से जो बहुत सारे आने वाले लोग हैं, सम्मानजनक स्थिति में पहुंचाने के लिए, और जब उनको वेट करना पड़ रहा है, रुकने के लिए 500 बेड के विश्राम सदन के लिए ओएमयू साइन किया है और हमें उम्मीद है यह जल्द ही बनकर तैयार हो जाएगा ,मुझे ऐसा लगता है कि यह न केवल एम्स गोरखपुर के लिए सुखद क्षण है बल्कि पूरी उत्तर प्रदेश की जो स्वास्थ्य सेवा है, जो हमारे माननीय मुख्यमंत्री जी के संरक्षण में दिन प्रतिदिन, हम लोग कोशिश कर रहे हैं, बहुत बड़ा स्टेप है, मरीजों के लिए उनके परिजनों के लिए, इसमें किचन भी होगा, इसमें स्नानगृह भी होगें, और मेल और फीमेल अलग-अलग टॉयलेटस भी होंगे।”
    विश्राम सदन के बारे में आगे बताते हुए कार्यपालक निदेशक पावर ग्रिड-3 वाई० के० दीक्षित ने भी इस संबंध में वार्ता करते हुए आगे बताया कि “पावर ग्रीड कॉरपोरेशन ने पिछले 10 वर्षों में लगभग 1500 करोड़ रुपए CSR ने खर्च किए है और इसमें से लगभग 60% पैसा मेडिकल के क्षेत्र में खर्च किया गया हैं,आगे बोलते हुए उन्होंने कहा कि “इनकी टीम ने यह देखा है कि जो बड़े बड़े हॉस्पिटल है जहां मरीज आते है और उनके साथ जो तीमारदार आते है,उनको हमने देखा वो सम्मानजनक स्थिति में नहीं रहते है,उनको सड़को पर रहना पड़ता है और उनको खाना बनाने की भी समस्या रहती है,देखते हुए हम लोगो ने निर्णय लिया कि जो बड़े बड़े हॉस्पिटल हैं, में विश्राम स्थल बनाएंगे,उसी कड़ी में एम्स गोरखपुर के साथ हम लोगों का समझौता ज्ञापन हुआ है, लगभग 45 करोड़ के अनुमानित लागत से 500 बेड का विश्राम स्थल बना रहे है,यह निश्चित तौर पर पावर ग्रीड कॉरपोरेशन के लिए सुखद पल है।”

    इस कार्य को पावरग्रिड की सी.एस आर निधि से 31 मार्च 2027 तक पूर्ण किए जाने का लक्ष्य है।

    विश्राम सदन के निर्माण से अस्पताल में इलाज के लिए दूर दराज से आने वाले लोगों को अस्पताल परिसर में प्रवास हेतु उचित व्यवस्था उपलब्ध होगी जिससे कि पुर्वांचल क्षेत्र के कई जिले, बिहार राज्य तथा पड़ोसी देश नेपाल की लगभग 50 लाख की जनसंख्या लाभान्वित होगी।

  • मधुमेह वाले टीबी मरीज रखें विशेष सतर्कता, दोनों दवाओं का करें नियमित सेवन

    मधुमेह वाले टीबी मरीज रखें विशेष सतर्कता, दोनों दवाओं का करें नियमित सेवन

     

    पिछले पांच वर्षों में चार फीसदी मरीजों में टीबी और मधुमेह दोनों की समस्या मिली,

    गोरखपुर, 14 नवम्बर 2024

    जिन टीबी मरीजों में मधुमेह की भी दिक्कत है उन्हें विशेष सतर्कता रखनी चाहिए। अगर मधुमेह नियंत्रित नहीं रहेगा तो टीबी मरीज को ठीक होने में दिक्कत होगी। ऐसे मरीजों को दोनों बीमारियों की दवा का सेवन नियमित रूप से करना होगा । यह अपील जिला क्षय उन्मूलन अधिकारी डॉ गणेश यादव ने विश्व मधुमेह दिवस पर की । उन्होंने बताया कि जिले में पिछले पांच वर्षों में चार फीसदी ऐसे टीबी मरीज निकले हैं, जो मधुमेह से भी ग्रसित थे।

    जिला क्षय उन्मूलन अधिकारी डॉ यादव ने बताया कि प्रत्येक टीबी मरीज की मधुमेह जांच अनिवार्य तौर पर कराई जाती है। जांच में जिन मरीजों में मधुमेह की भी पुष्टि होती है उन्हें इसके चिकित्सक को दिखा कर दवा शुरू करने की सलाह दी जाती है । लापरवाही करने पर मधुमेह की सहरूग्णता वाले टीबी मरीज अपेक्षाकृत धीरे धीरे ठीक होते हैं और उनमें जटिलताओं की आशंका भी कहीं अधिक होती है, जबकि यह मरीज अच्छी दिनचर्या, संयमित खानपान और समय से टीबी और मधुमेह की दवा खाकर स्वस्थ हो सकते हैं।

    विश्व स्वास्थ्य संगठन द्वारा वर्ष 2021 में प्रकाशित ग्लोबल टीबी रिपोर्ट के अनुसार मधुमेह, टीबी के मामलों और टीबी की मृत्यु दर को प्रभावित करने वाले एक प्रमुख कारक है। यह टीबी की बीमारी के खतरे को दो से तीन गुना, इलाज के दौरान मौत की आशंका को दोगुना, इलाज पूरा होने के बाद दोबारा टीबी होने की आशंका को चार गुना और ड्रग रेसिस्टेंट (डीआर) टीबी होने की आशंका को दोगुना बढ़ा देता है ।

    जटिलता से होता है बचाव

    डॉ गणेश यादव ने बताया कि अगर मधुमेह मरीज में दो सप्ताह से अधिक की खांसी, रात में पसीने के साथ बुखार, बलगम में खून आना और सीने में दर्द जैसे टीबी के लक्षण दिखें तो तुरंत जांच कराई जानी चाहिए ।

    मधुमेह मरीज कराएं जांच

    डीटीओ ने बताया कि मधुमेह मरीजों की रोग प्रतिरोधक क्षमता कम होने के कारण उन्हें टीबी होने का जोखिम अधिक होता है। अगर उनमें टीबी का लक्षण दिखे तो त्वरित जांच करानी चाहिए। जिले में वर्ष 2019 से लेकर वर्ष 2023 तक 56604 टीबी मरीज निकले, जिनमें से 2448 मधुमेह से भी ग्रसित मिले।