Category: हेल्थ
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मेडिकल कॉलेज में छत का प्लास्टर गिरा, डॉक्टर गंभीर रूप से घायल
गोरखपुर। बीआरडी मेडिकल कॉलेज में एक गंभीर हादसा सामने आया, जब नेहरू अस्पताल के रैंप के पास जर्जर छत का प्लास्टर गिरने से स्त्री एवं प्रसूति रोग विभाग की पूर्व विभागाध्यक्ष डॉ. वाणी आदित्य गंभीर रूप से घायल हो गईं। हादसे में उनका सिर फट गया, और गहरे घाव के कारण उन्हें आठ टांके लगाए गए।
यह घटना तब हुई जब डॉ. वाणी लेबर कांप्लेक्स की ओर जा रही थीं। प्लास्टर गिरने के बाद, खून से लथपथ हालत में उन्होंने तुरंत प्रिंसिपल कार्यालय पहुंचकर घटना की जानकारी दी। इसके बाद डॉक्टरों की टीम ने सर्जरी कर उन्हें प्राथमिक चिकित्सा प्रदान की।
प्रिंसिपल डॉ. रामकुमार जायसवाल ने हादसे पर खेद जताते हुए कहा कि जर्जर भवनों की मरम्मत के लिए जल्द कदम उठाए जाएंगे। हालांकि, यह घटना मेडिकल कॉलेज की इमारतों की जर्जर हालत और सुरक्षा उपायों की अनदेखी को उजागर करती है।
कर्मचारियों और छात्रों ने प्रशासन पर लापरवाही का आरोप लगाते हुए तुरंत मरम्मत कार्य शुरू करने और सुरक्षा मानकों को लागू करने की मांग की है। यह हादसा एक चेतावनी है कि यदि समय पर कदम नहीं उठाए गए तो भविष्य में और भी गंभीर घटनाएं हो सकती हैं।
https://youtu.be/We_pV0n4KwY?si=5uwMwI21ZFbgGGAu
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जटिलताओं का प्रबन्धन कर मां और शिशु को जीवनदान दे रही हैं सीएचसी
जटिलताओं का प्रबन्धन कर मां और शिशु को जीवनदान दे रही है पिपराईच सीएचसी,
कुशल चिकित्सकों और प्रशिक्षित स्टॉफ की वजह से संभव है सुरक्षित प्रसव,
प्राथमिक हस्तक्षेप कर आवश्यकतानुसार मेडिकल कॉलेज में रेफर किये जा रहे जच्चा बच्चा,
गोरखपुर, 12 दिसम्बर 2024,
समय रहते सही हस्तक्षेप से जटिलताओं का प्रबन्धन कर मां और नवजात शिशु की जान बचाई जा सकती है। पिपराईच सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र (सीएचसी) इस मामले में मिसाल बनने लगा है। बीते तीन माह के दौरान यहां कई जटिल प्रसव के कुशल प्रबन्धन किये गये, जिससे मां और बच्चे दोनों खुशहाल जीवन जी रहे हैं । यह सीएचसी एक प्रथम संदर्भन इकाई भी है । सरकार की पहल पर कुशल चिकित्सकों की तैनाती और स्टॉफ के निरंतर प्रशिक्षण के कारण यहां सुरक्षित प्रसव संभव हो रहा है। सीएचसी पर जटिल प्रसव के मामलों में प्राथमिक हस्तक्षेप और प्रबंधन कर आवश्यकतानुसार जच्चा बच्चा मेडिकल कॉलेज रेफर किये जा रहे हैं।
पिपराईच ब्लॉक के महमूदाबाद उर्फ मोगलापुर से आई चंदा (22) के पहले बच्चे का जन्म सीएचसी पर पांच अक्टूबर को हुआ। यह एक पोस्ट डेटेड डिलेवरी थी, जिसकी वजह से बच्चे के पेट में गंदगी चली गई थी। बच्चे ने जब जन्म लिया तो उसके शरीर में कोई हरकत नहीं थी। चंदा बताती हैं कि अस्पताल के स्टॉफ ने तुरंत बच्चे का इलाज शुरू कर दिया । थोड़ी देर में शरीर में हरकत आ गई लेकिन बच्चा रो नहीं रहा था। एम्बुलेंस की मदद से उन्हें और उनके बच्चे को मेडिकल कॉलेज भेज दिया गया जहां दो दिन के इलाज से बच्चा ठीक हो गया। उनका बेटा आदित्य (दो माह) अब पूरी तरह से स्वस्थ है।
अस्पताल की स्टॉफ नर्स संध्या मधई का कहना है कि प्रभारी चिकित्सा अधिकारी डॉ मणि शेखर की देखरेख में अस्पताल के सभी स्टॉफ का निरंतर क्षमता संवर्धन किया जाता है। हमे प्रशिक्षित किया गया है कि रेफरल करने से पहले वह सभी हस्तक्षेप करने हैं जो जीवन बचाने के लिए जरूरी हैं। चंदा के बच्चे ने जब जन्म लिया तो उन्होंने एनबीएसयू की स्टॉफ नर्स रविना के साथ मिल कर रिसेसिटेशन की प्रक्रिया पूरी की। मुंह और नाक के जरिये बच्चे के भीतर की गंदगी को साफ किया गया । यह हस्तक्षेप जन्म के तीस मिनट के अंदर होना चाहिए।
इसी ब्लॉक की गढ़वा से आईं सीमा देवी का प्रसव तीन अक्टूबर को हुआ। प्रसव के बाद ब्लीडिंग शुरू हो गई और झटके आने लगे। निर्धारित प्रोटोकॉल के अनुसार अधीक्षक डॉ मणि शेखर को सूचना दी गई। पूरी टीम ने पीपीएच किट के जरिये इस जटिलता का प्रबंधन किया और महिला की स्थिति सामान्य होने पर उसे मेडिकल कॉलेज रेफर कर दिया गया। अधीक्षक डॉ मणि शेखर बताते हैं कि मां को इस खतरे से बचाने के लिए ही प्रसव के बाद 48 घंटे तक अस्पताल में रहने की ही सलाह दी जाती है। अस्पताल पर प्रसव पूर्व, प्रसवकालीन और प्रसव के बाद की जटिलताओं से निपटने के मुकम्मल इंतजाम हैं।एनीमिया प्रबंधन कर कराया सुरक्षित प्रसव,
पिपराईच ब्लॉक के भगवानपुर भैंसहा गांव की ज्योति इसी वर्ष जनवरी के दूसरे पखवाड़े में गर्भवती हुईं। आशा कार्यकर्ता द्रोपदी की मदद से जब वह प्रसव पूर्व जांच के लिए आईं तो उनका हीमोग्लोबिन 2.16 ग्राम था। उन्हें प्राथमिक इलाज कर तुरंत मेडिकल कॉलेज भेजा गया जहां ब्लड चढ़वाने के बाद वह वापस लौंटी। आशा कार्यकर्ता और सीएचसी ने उनका लगातार फॉलो अप किया। उन्हें अस्पताल से पोषण पोटली दी गयी और आयरन कैल्शियम भी मुहैय्या कराया गया । बीच बीच में हीमोग्लोबिन के स्तर की जांच की गई और आवश्यकतानुसार आयरन सुक्रोज भी चढ़ाया गया। अक्टूबर तक उनमें खून की मात्रा 9.7 ग्राम हो गई। इसके बाद विशेषज्ञ चिकित्सकों की मौजूदगी में सीएचसी पर ही उनकी सुरक्षित प्रसव कराया गया।
हर माह होता है प्रबंधन,
सीएचसी के अधीक्षक डॉ मणि शेखर बताते हैं कि उनके यहां औसतन 150-200 संस्थागत प्रसव प्रति माह होते हैं। इनमें से तीस से पैंतिस प्रसव ऑपरेशन से किये जाते हैं। प्रत्येक माह एक से दो प्रसूताओं और दो से तीन शिशुओं में जटिलताओं का प्रबंधन किया जा रहा है। इस कार्य में जिला मातृ स्वास्थ्य परामर्शदाता डॉ सूर्य प्रकाश का भी निरंतर सहयोग मिल रहा है।
दस फीसदी प्रसव जटिल,
मुख्य चिकित्सा अधिकारी डॉ आशुतोष कुमार दूबे ने बताया कि जिले में करीब 4500 प्रसव हर माह सिर्फ सरकारी अस्पतालों में हो रहे हैं। इनमें से दस फीसदी प्रसव जटिल होते हैं, लेकिन अगर 102 नंबर एम्बुलेंस की मदद से समय से प्रसूता को अस्पताल लाया जाए तो शीघ्र हस्तक्षेप से इनका प्रबन्धन हो सकता है। मां और बच्चे को खतरे से बचाने के लिए प्रसव पूर्व जांचें अवश्य कराएं और निरंतर आशा कार्यकर्ता के सम्पर्क में रहें। जिले की पिपराईच, सहजनवां, बांसगांव, कैम्पियरगंज, बड़हलगंज और चौरीचौरा प्रथम संदर्भन इकाई में विशेषज्ञ चिकित्सकों और बाल रोग विशेषज्ञों की मदद से मां और नवजात शिशु को नया जीवन दिया जा रहा है।
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महिला अस्पताल परिसर में जल्द खुलेगी कैंटीन, तीमारदारों को मिलेगी भोजन सुविधा
गोरखपुर: महिला अस्पताल परिसर में अब तीमारदारों को ताजा भोजन और नाश्ता मिलने की सुविधा जल्द ही उपलब्ध होगी। बुधवार को कैंटीन के निर्माण का कार्य पूरा कर लिया गया है, और माना जा रहा है कि अगले सप्ताह में ही इसका उद्घाटन कर दिया जाएगा।
महिला अस्पताल में मरीजों के लिए भोजन की व्यवस्था पहले से ही है, लेकिन तीमारदारों को अस्पताल के बाहर स्थित होटल और दुकानों पर भोजन के लिए निर्भर रहना पड़ता था। अब इस नई कैंटीन के खुलने से तीमारदारों को अस्पताल के अंदर ही ताजा और सस्ता भोजन मिल सकेगा।
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दक्षिणांचल में अवैध दवा और जांच के धंधे पर प्रशासन का दबाव
गोरखपुर: जिले के दक्षिणांचल में अवैध दवा और जांच के धंधे की जड़ें गहरी होती जा रही हैं, और प्रशासन का इन पर प्रहार करने का प्रयास असफल हो रहा है। बुधवार को डीएम कृष्णा करुणेश के निर्देश पर ड्रग इंस्पेक्टर राहुल कुमार की अगुवाई में एक टीम का गठन किया गया।
टीम के पहुंचने से पहले ही अवैध दवा की दुकानों, पैथोलॉजी सेंटर और जांच केंद्रों के शटर गिरा दिए गए थे। कागजी कार्रवाई पूरी करने के लिए टीम ने एक दवा की दुकान से दो एंटीबायोटिक के नमूने जांच के लिए लिए। अब इन सभी को आवश्यक वस्तु अधिनियम के तहत नोटिस जारी किया जाएगा और पूछा जाएगा कि बिना सूचना के दुकान क्यों बंद की गई।
उरुवा में छापेमारी की सूचना मिलते ही अन्य प्रमुख बाजारों जैसे माल्हनपार, सिकरीगंज, कुईं, बेलघाट, गोला आदि में दुकानों और पैथोलॉजी सेंटर के शटर गिरा दिए गए थे। यहां पर अवैध पैथोलॉजी सेंटर खोलने, गलत जांच रिपोर्ट देने और बिना डॉक्टर के पर्चे पर दवाएं बेचने की शिकायतें सामने आई हैं।
टीम ने बताया कि सभी पैथोलॉजी सेंटर और ज्यादातर मेडिकल स्टोर बंद मिले। टीम ने इन दुकानों और सेंटर का वीडियो बनाया है और अब सभी को नोटिस भेजकर जवाब मांगा जाएगा। जल्द ही एक और औचक जांच की जाएगी।
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सावधानियों से करें सर्दियों का सामना:डॉ अरुण कुमार वर्मा
सावधानियों से करें सर्दियों का सामना:डॉ अरुण कुमार वर्मा,
तनाव,अवसाद,थकान हैं प्रमुख लक्षण,
मूड स्विंग और सीजनल इफेक्टिव डिसऑर्डर हैं ज़िम्मेदार,
डॉ. वर्मा ने दिए सर्दियों से बचने के टिप्स,
गोरखपुर 10 दिसंबर,मंगलवार,
प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र सिविल लाइन्स गोरखपुर प्रभारी चिकित्साधिकारी डॉ.अरुण कुमार वर्मा ने सर्दियों के दौरान होने वाली तकलीफें और उनसे बचने के उपायों पर चर्चा की।
उन्होंने बताया कि सर्दियों के दिनों में थकान,तनाव,बेचैनी,उदासीनता,अवसाद,चिंता,मूड स्विंग आदि प्रमुखता से उभर कर आते हैं।जिन्हें थोड़े उपायों एवं सावधानियों को अपना कर दूर किया जा सकता है।
उन्होंने बताया कि हाल ही में हुए सर्वे में पता चला है कि महिलाओं को सर्दियां आते ही डिप्रेशन महसूस होने लगता है।इस मौसमी डिप्रेशन को सिजनल इफेक्टिव डिसऑर्डर (S.A.D) कहते हैं।धूप और सूर्य की रोशनी के अभाव में यह समस्या उत्पन्न होती है।जबकि इस मौसम में थकान का कारण छोटे दिन और बड़ी रातों की वजह से दिनचर्या पर होने वाला दुष्प्रभाव है।सर्दियों में सूरज की रोशनी कम होने का अर्थ है कि मस्तिष्क ज्यादा मात्रा में मेलटोनिन हार्मोन्स बनाता है जिसके कारण व्यक्ति को ज्यादा नींद आती है, क्योंकि इसका सीधा संबंध स्लिप हार्मोन्स से होता है। जब सूरज जल्दी छुप जाता है तो हमारा मष्तिष्क उपरोक्त हार्मोन्स बनाने लगता है जिससे शाम होते ही हमारा मन सोने को करता है।शारीरिक सक्रियता कम होने के कारण विंटर डिप्रेशन भी हो सकता है। सर्दियों में मस्तिष्क में सेरोटोनिन केमिकल का निर्माण कम होने के कारण मूड स्विंग होना भी आम है।जिसका मुख्य कारण सूरज की पर्याप्त रोशनी ना मिलना है।यह केमिकल हमारे मूड पर सीधा प्रभाव छोड़ता है।
डॉ. वर्मा ने बताया कि कुछ छोटे उपायों एवं सावधानियों को अपना कर इनसे बचा जा सकता है।इसके लिए हमें ज्यादा से ज्यादा धूप में रहना चाहिए।भोजन में न्यूट्रिशंस को शामिल करना चाहिए।मूड ठीक रखने के लिए संगीत सुनें,किताब पढ़े,सिनेमा देखें और व्यायाम करें।परिवार और दोस्तों के साथ समय बिताएं।एकांत में न रहे तथा नकारात्मक विचारों को मन मे जगह न बनाने दें।
इसके अतिरिक्त आनंद के हर छोटे बड़े मौकों को तलाश कर भरपूर जिंदादिली के साथ जियें।
उन्होंने कहा कि सकारात्मक विचारों के साथ आगे बढ़ना तमाम अवसादों की सबसे कारगर औषधि है।उपरोक्त उपाय कर के सर्दियों में होने वाली परेशानियों से बचा जा सकता है। -

निक्षय मित्र बन मनाया पिता की पुण्यतिथि
निक्षय मित्र बन मनाया पिता की पुण्यतिथि,
एसटीएस के प्रयासों से स्वस्थ हो चुके हैं चार टीबी मरीज,
हर साल माता और पिता की स्मृति में दो-दो टीबी मरीजों को गोद लेने का संकल्प
गोरखपुर, 10 दिसम्बर 2024,
पिता की चौथी पुण्यतिथि के मौके पर दो टीबी मरीजों को गोद लेकर बीआरडी मेडिकल कॉलेज में वरिष्ठ उपचार पर्यवेक्षक (एसटीएस) अमित नारायण मिश्र पुनः निक्षय मित्र बन गये हैं। उन्होंने संकल्प लिया है कि वह प्रति वर्ष माता पिता की पुण्यतिथि पर दो दो टीबी मरीजों को गोद लेकर स्वस्थ होने में उनके मददगार बनेंगे। अमित ने इसी वर्ष फरवरी माह में मां की पुण्यतिथि पर दो टीबी मरीजों को गोद लिया था, जो पूरी तरह से स्वस्थ हो चुके हैं। उनके द्वारा गोद लिये गये कुल चार टीबी मरीज अब तक टीबी मुक्त हो चुके हैं।
मुख्य चिकित्सा अधिकारी डॉ आशुतोष कुमार दूबे ने बताया कि कोई भी व्यक्ति या संस्था स्वेच्छा से निक्षय मित्र बन सकते हैं। निक्षय मित्र बनने के बाद गोद लिये गये टीबी मरीज को यथा सामर्थ्य पोषक सामग्री देनी होती है। समय समय पर मरीज का फॉलो अप करना होता है ताकि बीच में दवा बंद न हो। टीबी मरीज की दवा बंद होने से जटिलताएं बढ़ जाती हैं और वह ड्रग रेसिस्टेंट (डीआर) टीबी मरीज बन सकता है, जिसका इलाज कठिन है। अगर निक्षय मित्र नियमित हालचाल लेते हैं तो टीबी मरीज का मनोबल बढ़ता है और समाज से उसके प्रति भेदभाव का भाव भी खत्म होता है। बेहतर कार्य करने वाले निक्षय मित्रों को स्वास्थ्य विभाग सम्मानित करता है।
निक्षय मित्र अमित नारायण मिश्र (36) ने बताया कि एक 72 वर्षीय टीबी मरीज उनके टीबी यूनिट से ही इलाज करवा रहे थे जिनकी आर्थिक स्थिति काफी खराब है। मरीज का परिवार उनके इलाज में बीआरडी मेडिकल कॉलेज आने से पहले ही लाखों रुपये कर्ज लेकर खर्च कर चुका था । मां की पुण्यतिथि पर उस मरीज को गोद लेकर उन्होंने खुद तो सहयोग किया ही,उसे सरकार की तरफ उपलब्ध कराई जाने वाली सभी सुविधाएं दिलवाईं। अब वह स्वस्थ हो चुका है। इससे काफी आत्म संतोष मिला और पिता की पुण्यतिथि पर भी मरीज गोद लेने का निर्णय लिया। उनके पिता स्वर्गीय दिग्विजय नारायण मिश्र समाज के प्रति समर्पित थे और अमित का निक्षय मित्र बनना उनके पिता के लिए सबसे श्रेष्ठ श्रद्धांजलि है।
*पोषक सामग्री के साथ दी सलाह*
गोद लिये गये पचास वर्षीय मरीज रामउग्रह (काल्पनिक नाम) चरगांवा ब्लॉक के एक गांव के रहने वाले हैं। उनका इलाज चार दिसम्बर को शुरू हुआ है। उन्होंने बताया कि एसटीएस ने उन्हें मूंगफली, गुड़., भुना चना, केला और सेब की पोटली बना कर दिया और सलाह दी है कि इलाज के दौरान हरसंभव मदद करेंगे। ठंड से बचने के लिए कंबल भी दिया है। गुलरिहा बाजार की चालीस वर्षीय टीबी मरीज रुबी (काल्पनिक नाम) ने बताया कि कंबल और पोषक सामग्री देते हुए एसटीएस ने बताया है कि बीमारी का इलाज चलने तक प्रति माह 1000 रुपये की दर से पोषण के लिए सरकारी सहायता भी प्राप्त होगी।
*लक्षण दिखें तो कराएं जांच*
सीएमओ ने बताया कि अगर लगातार दो सप्ताह तक खांसी आए, शाम को पसीने के साथ बुखार हो, सांस फूल रही हो, सीने में दर्द हो या बलगम में खून आए तो टीबी की जांच अवश्य करवानी चाहिए। अगर समय से फेफड़े की टीबी (पल्मनरी टीबी) की पहचान कर इलाज शुरू कर दिया जाए तो उपचाराधीन मरीज से दूसरे लोगों के संक्रमित होने की आशंका भी कम हो जाती है। जिले में इस समय करीब दस हजार टीबी मरीजों का उपचार चल रहा है।
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बुजुर्गों की स्वास्थ्य रक्षा को डबल इंजन सरकार ने बढ़ाए हाथ
बुजुर्गों की स्वास्थ्य रक्षा को डबल इंजन सरकार ने बढ़ाए हाथ,
गोरखपुर में 70 वर्ष से अधिक उम्र के 8325 लाभार्थियों के बने हैं वय वंदन आयुष्मान कार्ड,
गोरखपुर में 9 दिसंबर को सीएम योगी के हाथों होगा आयुष्मान वय वंदन कार्ड का वितरण,
आयुष्मान योजना के तहत जिले में दो लाख से अधिक लाभार्थी करा चुके हैं इलाज,
गोरखपुर, 7 दिसंबर। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की सरकार जन स्वास्थ्य की रक्षा के लिए हेल्थ इंफ्रास्ट्रक्चर डेवलपमेंट से लेकर निशुल्क इलाज की व्यवस्था करने तक अभियान चलाकर सतत काम कर रही है। इसी क्रम में पीएम मोदी की घोषणा के मुताबिक आयुष्मान स्वास्थ्य योजना के तहत 70 वर्ष से सभी नागरिकों को पांच लाख रुपये की मुफ्त इलाज की सुविधा देने की शुरुआत डबल इंजन की सरकार कर चुकी है। इसके लिए बुजुर्गों के आयुष्मान वय वंदन कार्ड बनाए जा रहे हैं। गोरखपुर में 9 दिसंबर को आयुष्मान वय वंदन कार्ड के वितरण का शुभारंभ मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ करेंगे।
आयुष्मान वय वंदन कार्ड, बुजुर्गों की स्वास्थ्य सेवा के लिए एक नई सौगात है। इसके तहत 70 वर्ष और उससे अधिक आयु के प्रत्येक वरिष्ठ नागरिक को अस्पतालों में मुफ्त इलाज मिलेगा। वय वंदना कार्ड, आयुष्मान भारत-प्रधानमंत्री जन आरोग्य योजना का एक महत्वपूर्ण पहलू है। आयुष्मान वय वंदन कार्ड बनवाने के लिए आय सीमा की भी कोई बाध्यता नहीं है। 70 वर्ष से अधिक उम्र के नागरिक सिर्फ अपने आधार कार्ड के जरिये योजना से लाभान्वित होने के लिए नामांकन करा सकते हैं।
इस समय पूरे प्रदेश में बुजुर्गों के आयुष्मान वय वंदन कार्ड बनाए जा रहे हैं। गोरखपुर के मुख्य चिकित्सा अधिकारी डॉ. आशुतोष दूबे बताते हैं कि जिले में अब तक 8325 बुजुर्गों के वय वंदन कार्ड बनाए जा चुके हैं। गोरखपुर में सीएम योगी 9 दिसंबर को अपराह्न चंपा देवी पार्क मैदान में वय वंदन कार्ड के वितरण का शुभारंभ करेंगे। कुछ लाभार्थियों को यह कार्ड मुख्यमंत्री के हाथों प्राप्त होगा।
*आयुष्मान योजना पर गोरखपुर में 320 करोड़ रुपये खर्च कर चुकी है सरकार*
सीएमओ ने बताया कि समग्र रूप से देखें तो आयुष्मान योजना मुफ्त इलाज की व्यवस्था कराने में बड़ी कारगर साबित हुई है। अभी तक जिले में 432894 लाभार्थी परिवारों के 1120347 लोगों के आयुष्मान कार्ड बनाए जा चुके हैं। इस योजना में मुफ्त इलाज की व्यवस्था करने के लिए जनपद में 91 राजकीय और 189 निजी चिकित्सालयों (कुल 280) को संबद्ध किया गया है। अब तक आयुष्मान योजना से आच्छादित 209666 लाभार्थियों ने मुफ्त चिकित्सा सुविधा का लाभ प्राप्त किया है। इसके लिए सरकार द्वारा करीब 320 करोड़ रुपये का खर्च उठाया गया है। -

केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री जेपी नड्डा ने सांसद रवि किशन से कहां गोरखपुर एम्स में जल्द तैनात होंगे स्थाई कार्यकारी निदेशक
केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री जेपी नड्डा ने सांसद रवि किशन से कहां गोरखपुर एम्स में जल्द तैनात होंगे स्थाई कार्यकारी निदेशक,
सदर सांसद श्री रविकिशन शुक्ल ने दिल्ली में केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री श्री जेपी नड्डा से की मुलाकात,
गोरखपुर। सदर सांसद श्री रविकिशन शुक्ल ने शुक्रवार को नई दिल्ली में केंद्रीय स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्री श्री जेपी नड्डा से मुलाकात की। उन्होंने स्वास्थ्य के क्षेत्र में देश में किए जा रहे कार्यों के लिए प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी और स्वास्थ्य मंत्री श्री जेपी नड्डा का आभार जताया। सांसद ने एम्स गोरखपुर के लिए स्थाई कार्यकारी निदेशक देने का अनुरोध किया। इस पर स्वास्थ्य मंत्री ने जल्द ही कार्यकारी निदेशक की तैनाती का आश्वासन दिया।
सदर सांसद ने स्वास्थ्य मंत्री को एम्स गोरखपुर की अव्यवस्था की सिलसिलेवार जानकारी दी। उन्होंने कार्यकर्ताओं से मिली शिकायत के आधार पर कई महत्वपूर्ण बिंदुओं पर बात की। कहा कि परिसर में कुछ लोग माहौल खराब करने में जुटे हैं।
दिल्ली में सांसद श्री रवि किशन शुक्ल ने 15 मिनट स्वास्थ्य मंत्री से बात की। कहा कि एम्स पूर्वांचल के साथ ही बिहार और नेपाल के रोगियों की उम्मीद की किरण है। सरकार ने सुविधाएं सभी दी हैं उसका उपयोग मरीजों के लिए और भी बेहतर हो कुछ लोग परिसर का माहौल खराब कर रहे हैं। इन पर भी कार्रवाई होनी चाहिए। सांसद ने स्वास्थ्य मंत्री को छात्रों में हुई घटना की भी जानकारी दी। स्वास्थ्य मंत्री ने कहा कि एम्स गोरखपुर से मिल रही शिकायतों का संज्ञान लिया गया है। जो भी माहौल खराब कर रहे हैं उन्हें चिह्नित कर कार्रवाई की जाएगी। मैं खुद भी बहुत जल्द एम्स का दौरा करूंगा। सांसद ने बताया कि एम्स परिसर मे जो भी लोग माहौल खराब करने में भूमिका निभा रहे हैं। स्वास्थ्य मंत्री ने कहा कि बहुत जल्द एम्स गोरखपुर की व्यवस्था में बदलाव देखने को मिलेगा।केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री जे पी नड्डा ने गोरखपुर एम्स में जल्द ही स्थाई डायरेक्टर की नियुक्ति का आश्वासन सांसद रवि किशन को दिया दिया है। उन्होंने कहा कि एम्स की सेवाओं में किसी भी तरह की लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी। एम्स के संचालन में सुधार के लिए आवश्यक कदम उठाए जाएंगे और जो अधिकारी या कर्मचारी इसकी छवि को खराब करने के लिए जिम्मेदार होगा, उसके खिलाफ कठोर कार्रवाई की जाएगी।
**सांसद रवि किशन का आग्रह**
गोरखपुर के सांसद रवि किशन शुक्ला ने एम्स में मरीजों के लिए और बेहतर सुविधाओं को लेकर केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री से मुलाकात की और संस्थान की सेवाओं और बेहतर आवश्यकता पर जोर दिया। सांसद ने कहा कि एम्स को सरकार की प्राथमिकताओं के अनुसार कार्य करना होगा ताकि जनता को बेहतर चिकित्सा सेवाएं मिल सकें।
**केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री का जल्द गोरखपुर दौरा**
रवि किशन की पहल पर केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री जे पी नड्डा ने गोरखपुर एम्स का दौरा करने का आश्वासन दिया एम्स की व्यवस्थाओं का निरीक्षण करेंगे और एम्स मे और बेहतर मरीजों को सुविधा मिले उसके लिए निर्देश देंगे। इससे उम्मीद जताई जा रही है कि एम्स में चिकित्सा सेवाओं के स्तर को सुधारने के लिए ठोस कदम उठाए जाएंगे।
**जनता में बढ़ी उम्मीदें**
सांसद रवि किशन की इस पहल से गोरखपुर के नागरिकों में विश्वास और उम्मीद जगी है कि एम्स में सुधार के लिए जल्द ही प्रभावी कदम उठाए जाएंगे। सांसद ने जनता को भरोसा दिलाया कि एम्स को उच्च स्तर की चिकित्सा सेवाओं का केंद्र बनाने के लिए वे लगातार प्रयासरत रहेंगे।
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एक्सरसाइज वेल अवसाद से मुक्ति का मूलमंत्र– प्रो. मंजू मिश्र
एक्सरसाइज वेल अवसाद से मुक्ति का मूलमंत्र– प्रो. मंजू मिश्र,
अवसाद एवं चिन्ता कारण व निदान विषय पर संगोष्ठी का आयोजन हुआ,
ब्यूरो प्रभारी —-विनय तिवारी
बडहलगंज /गोरखपुर (निष्पक्ष टुडे):- स्थानीय महाविद्यालय नेशनल पोस्ट ग्रेजुएट कॉलेज बड़हलगंज में “मिशन शक्ति फेज 05” के अंतर्गत “*महिलाओं में अवसाद एवं चिन्ता :कारण एवं निदान”* विषयक संगोष्ठी का आयोजन हुआ।
इस संगोष्ठी की मुख्य वक्ता बापू पी जी कॉलेज पीपीगंज की प्राचार्या प्रो. मंजु मिश्रा ने यह बताया कि आज अवसाद एक गंभीर वैश्विक मानसिक समस्या बन चुकी हैं। जिसमें महिलाएं पुरुषों की तुलना में दुगनी संख्या में अवसादग्रस्त हैं। इसका कारण है कि महिलाओं का दायित्व बोध और ज्यादा संवेदनशील होना, शरीर और मन की स्थिति पर ध्यान नहीं देना है।
उदासी एक स्वाभाविक प्रक्रिया है पर यह उदासी यदि दो हफ्ते दिन से ज्यादा हो तो यह गंभीर स्थिति है। बार-बार रोना ,किसी काम में मन न लगना, आत्महत्या का विचार आना अवसाद के लक्षण है। इसके तुरंत इलाज की जरूरत है। हमारे देश में मानसिक बीमारी को छुपाने की एक बड़ी गलत आदत है। अवसाद से मुक्ति के लिए उन्होंने मूल मंत्र देते हुए कहा कि इट वेल, स्लीप वेल,थिंक वेल
एक्सरसाइज वेल पर हमें काम करना होगा।
कार्यक्रम की शुरुआत परंपरागत तरीके हुई। सबसे पहले माँ सरस्वती के चित्र पर माल्यार्पण और दीप प्रज्ज्वलन हुआ।
छात्रा मीरा यादव ने सरस्वती वंदना और अन्य छात्राओं ने स्वागत गीत से अतिथि का सत्कार किया। मिशन शक्ति कार्यक्रम की प्रभारी डॉ पूजा नायक ने मिशन शक्ति के उद्देश्यों पर प्रकाश डालते हुए यह बताया कि समाज की आर्थिक और सामाजिक रूप से कमजोर लड़कियों और महिलाओं को उनकी सुरक्षा और देखभाल के लिए सेवाएं उपलब्ध कराना साथ ही साथ दीर्घकालिक और अल्पकालिक योजनाओं के द्वारा उनका सशक्तिकरण करना है।
कार्यक्रम के एक अन्य वक्ता परितोष त्रिपाठी ने अपने उद्बोधन में यह बताया कि पूरी दुनिया बेहतर जीवन शैली अपनाने की बात कर रही है और हर हाल में खुश रहने की बात कर रही है। जबकि भारतीय ज्ञान परम्परा का मूलतत्व आनंद धर्मी, उत्सव धर्मी होना रहा है। एक अन्य वक्ता डॉ. योगेन्द्र तिवारी ने वागभट्ट की चर्चा करते हुए अवसाद के कारणों और निदान पर प्रकाश डाला। डॉ. रुचिका श्रीवास्तव ने अवसाद सहित मानसिक रोगों के इलाज में संगीत की महत्ता पर प्रकाश डालते हुए यमन राग को प्रस्तुत किया। कॉलेज के प्राचार्य प्रो.राकेश कुमार पांडेय ने अपने अध्यक्षीय उद्बोधन में कहा अवसाद सहित कई मानसिक रोगों की वजह पश्चिमी जीवन शैली का अंधाधुंध अनुकरण है। जबकि भारतीय संस्कृति, भारतीय ज्ञान परंपरा ,भारतीय संयुक्त परिवार की जीवन शैली अपनाने की जरूरत है। उन्होंने छात्राओं का उत्साहवर्धन करते हुए कहा कि आइए-‘हम अपने जड़ों की ओर लौटे, अपने मूल की ओर लौटे। कार्यक्रम में आभार ज्ञापान डॉ. अर्चना दुबे ने किया। मंच का संचालन डॉ. दिव्या शर्मा ने किया। इस अवसर पर अन्य आचार्य गण डॉ .अजय कुमार मिश्रा,डॉ. त्रिपुरेश कुमार त्रिपाठी, डॉ प्रीति श्रीवास्तव, डॉ प्रीति सिंह, डॉ, खुशबू राज, डॉ. सूफिया खातून,डॉ. सुषमा यादव सहित बड़ी संख्या में छात्राएं उपस्थित रहीं।









