Category: हेल्थ

  • मेडिकल कॉलेज में दवा संकट: मरीज बाहर से खरीदने को मजबूर

    मेडिकल कॉलेज में दवा संकट: मरीज बाहर से खरीदने को मजबूर

    गोरखपुर के बीआरडी मेडिकल कॉलेज के नेहरू चिकित्सालय में नेपाल और बिहार से लेकर पूर्वांचल के मरीज इलाज कराने आते हैं। यहां रोजाना करीब चार हजार  ओपीडी में परामर्श लेते हैं, लेकिन इलाज के लिए जरूरी दवाएं अस्पताल से उपलब्ध नहीं हो पा रही हैं।

    मरीजों को मजबूरन बाहर की मेडिकल दुकानों से महंगे दामों पर दवाएं खरीदनी पड़ रही हैं। सबसे अधिक परेशानी त्वचा रोग के मरीजों को हो रही है, क्योंकि सफेद दाग जैसे रोगों में उपयोग होने वाली टैक्रोलिम्नस क्रीम अस्पताल में उपलब्ध नहीं है।

    बदलते मौसम के चलते खांसी के मरीजों की संख्या में भी इजाफा हुआ है, लेकिन खांसी के सिरप की कमी से मरीज बाहर से दवाएं खरीदने को विवश हैं। मरीजों ने अस्पताल प्रशासन से इस समस्या के समाधान की मांग की है।

  • सर्जरी में एआई का बढ़ता उपयोग, छात्रों को दी जा रही जानकारी

    सर्जरी में एआई का बढ़ता उपयोग, छात्रों को दी जा रही जानकारी

    एम्स गोरखपुर में एमबीबीएस और पीजी के छात्रों को सर्जरी के क्षेत्र में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई) के उपयोग के बारे में प्रशिक्षण दिया जा रहा है। जल्द ही इसे पाठ्यक्रम में शामिल करने की योजना बनाई जा रही है। एम्स के सर्जरी विभाग के अनुसार, एआई का सर्जरी में उपयोग बढ़ने से ऑपरेशन की प्रक्रिया में सुधार होगा और मरीजों के उपचार में नई संभावनाएं खुलेंगी।

    एआई की मदद से एम्स में हाल ही में दंत रोग विभाग ने बिना चीरे और टांका लगाए एक बच्ची की सर्जरी सफलतापूर्वक की है। इसके अलावा, स्त्री एवं प्रसूति रोग विभाग भी एआई की मदद से गर्भावस्था के दौरान शुगर का पता लगाने पर काम कर रहा है।

    सर्जरी में एआई के इस्तेमाल के कई फायदे हैं। यह ऑपरेशन के लिए सही उपकरणों और तकनीकों की सलाह देता है, साथ ही सीटी स्कैन, एमआरआई या एक्स-रे से मेडिकल इमेज तैयार कर ऑपरेशन की योजना को और अधिक सटीक बनाता है। एआई सर्जरी में मशीन लर्निंग आधारित एल्गोरिदम का उपयोग कर सर्जनों को ऑपरेशन के दौरान मदद करता है।

    एम्स गोरखपुर के सर्जरी विभागाध्यक्ष डॉ. गौरव गुप्ता ने कहा कि एआई के इस प्रयोग से सर्जरी की प्रक्रिया में क्रांतिकारी बदलाव आने की संभावना है। इसके माध्यम से न केवल सर्जरी की सटीकता बढ़ेगी, बल्कि मरीजों के इलाज में भी सुधार होगा।

     

    https://youtu.be/uNms6UNSRPM?si=dwCfG9ZyQHSVHPhB

  • पूर्वी यूपी के अंधेरे में जी रहे मरीजों को मिल रही नई रोशनी, बनारस से आ रहा है कॉर्निया

    पूर्वी यूपी के अंधेरे में जी रहे मरीजों को मिल रही नई रोशनी, बनारस से आ रहा है कॉर्निया

    पूर्वी उत्तर प्रदेश में बड़ी संख्या में लोग खराब कार्निया के कारण अंधेरे में जीने को मजबूर हैं। गोरखपुर और बस्ती मंडल के बीआरडी मेडिकल कॉलेज और एम्स में करीब 1400 मरीज कार्निया के इंतजार में हैं, जबकि निजी अस्पतालों में भी कई मरीज पंजीकृत हैं।

    लेकिन, बनारस से मिल रही मदद से इन मरीजों को उम्मीद की किरण मिल रही है। पिछले दो साल में लायंस क्लब की मदद से पूर्वी यूपी के 28 मरीजों को कार्निया का प्रत्यारोपण किया गया है। हाल ही में तीन मरीजों को कार्निया प्रत्यारोपण की सुविधा मिली है। इनमें से संगीता (31) और बिंदावती (51) को अपनी आंखों में नई रोशनी मिली है, जबकि आलोक कुमार राय (52) के लिए भी यह ऑपरेशन सफल रहा।

    बीआरडी मेडिकल कॉलेज में 2018 से कार्निया प्रत्यारोपण और आई बैंक की शुरुआत हुई थी। अब तक 46 मरीजों को कार्निया लगाया जा चुका है, जिसमें से 28 मरीजों को कार्निया बनारस से प्राप्त हुआ है। विभागाध्यक्ष प्रो. रामयश यादव ने बताया कि इन ऑपरेशनों में लायंस क्लब की महत्वपूर्ण भूमिका रही है, जो गोरखपुर के मरीजों के लिए बनारस से कार्निया उपलब्ध करा रहा है।

    इस तरह से गोरखपुर के लोग बनारस की मदद से अपनी खोई हुई रोशनी को फिर से पा रहे हैं।

  • टाइटेनियम अस्पताल को फर्जी कागजात पर हड़पने का मामला, पुलिस ने दर्ज किया केस

    टाइटेनियम अस्पताल को फर्जी कागजात पर हड़पने का मामला, पुलिस ने दर्ज किया केस

    तारामंडल स्थित टाइटेनियम अस्पताल को फर्जी कागजात पर अपना बताकर हड़पने का मामला सामने आया है। कोर्ट के आदेश पर रामगढ़ताल पुलिस ने बिहार निवासी उमेश कुमार चौधरी और शशि शेखर के खिलाफ केस दर्ज कर मामले की जांच शुरू कर दी है।

    अस्पताल के संचालक डॉ. विवेक शर्मा ने आरोप लगाया कि शुरुआत में इन लोगों ने अस्पताल में निवेश किया था, लेकिन 10 लाख रुपये वापस लेने के बाद इन दोनों ने 50 लाख रुपये और मांगे और फिर फर्जी तरीके से अस्पताल को अपना बताने लगे।

    डॉ. विवेक शर्मा ने बताया कि अस्पताल की शुरुआत में उन्होंने 50-60 लाख रुपये लगाए थे। इसके अलावा, बिहार के गोपालगंज निवासी उमेश कुमार चौधरी ने 20 लाख रुपये और अंबिका नगर मोतिहारी के शशि शेखर ने ढाई लाख रुपये का निवेश किया था। लेकिन बाद में इन लोगों ने अस्पताल के बारे में कभी कोई सवाल नहीं पूछा और तय शेयर के अनुसार उन्हें समय-समय पर रुपये भी दिए गए थे।

    पुलिस ने केस दर्ज कर आरोपियों के खिलाफ जांच शुरू कर दी है और मामले की छानबीन जारी है।

     

  • एम्स में शुरू हुई प्रोस्टेट सर्जरी की दूरबीन विधि

    एम्स में शुरू हुई प्रोस्टेट सर्जरी की दूरबीन विधि

    गोरखपुर : एम्स में शुरू हुई प्रोस्टेट सर्जरी की दूरबीन विधि,

    एम्स के सर्जरी विभाग में प्रोस्टेट के मरीजों के लिए दूरबीन विधि से सर्जरी की प्रक्रिया की शुरुआत की गई है। इस विधि को “टीयूआरपी” (ट्रांस यूरेथ्रल रिसेक्शन ऑफ प्रोस्टेट) कहा जाता है।

    सर्जरी विभाग के विभागाध्यक्ष डॉ. गौरव गुप्ता ने बिना चीरे के इस ऑपरेशन की शुरुआत की है, जिससे मरीजों को कम दर्द और जल्दी रिकवरी का लाभ मिलेगा। इस सर्जरी का मुख्य उद्देश्य प्रोस्टेट में बिनाइन प्रोस्टैटिक हाइपरट्रो़फी (बीपीएच) के मरीजों की समस्या का समाधान करना है, जिनमें यूरिन करने में गंभीर परेशानी होती है।

    यह नई विधि मरीजों के लिए एक राहत साबित हो सकती है, क्योंकि इसमें सर्जरी के दौरान कोई बड़ा चीरा नहीं लगाया जाता और प्रक्रिया कम invasive होती है।

  • टीबी से बचाव के लिए निकट सम्पर्की जरूर खाएं बचाव की दवा

    टीबी से बचाव के लिए निकट सम्पर्की जरूर खाएं बचाव की दवा

    ‘‘टीबी से बचाव के लिए निकट सम्पर्की जरूर खाएं बचाव की दवा’’

    जिले में 34011 छह वर्ष से अधिक आयु के लोग और 3593 छह वर्ष तक के बच्चे खा रहे हैं दवा,

    441 एचआईवी मरीजों को भी खिलाई जा रही है टीबी से बचाव की दवा,

    गोरखपुर, 21 दिसम्बर 2024: टीबी का उपचार शुरू होने के तीन से चार सप्ताह बाद उसके संक्रमण की आशंका समाप्त हो जाती है, लेकिन गैर उपचारित अवस्था में टीबी का संक्रमण निकट सम्पर्कियों में हो सकता है । यही वजह है कि जिन घरों में टीबी के मरीज निकल रहे हैं उनमें मरीजों को निकट सम्पर्कियों की भी जांच कराई जा रही है। जांच के बाद जिन निकट सम्पर्कियों में टीबी की बीमारी निकलती है उनकी दवा शुरू की जाती है। जिन निकट सम्पर्कियों में इस बीमारी की पुष्टि नहीं होती है उन्हें भी छह माह तक टीबी से बचाव की दवा खिलाई जाती है। जिला क्षय उन्मूलन अधिकारी (डीटीओ) डॉ गणेश यादव ने बताया कि जिले में छह वर्ष से अधिक आयु के 34011 लोगों और छह वर्ष तक के 3593 बच्चों को यह दवा खिलाई जा रही है। साथ ही 441 एचआईवी मरीजों को भी यह दवा खिलाई जा रही है।

    डीटीओ ने बताया कि जिले में ड्रग रेसिस्टेंट (डीआर) टीबी के 390 और ड्रग सेंसिटिव (डीएस) टीबी के 9827 मरीज उपचाराधीन हैं। टीबी का जब भी कोई नया मरीज मिलता है तो उसके निकट सम्पर्की की भी टीबी जांच अनिवार्य तौर पर कराई जाती है। जांच के बाद टीबी न निकलने पर भी बचाव की दवा आवश्यक तौर पर खिलाई जाती है। एचआईवी मरीज में टीबी की आशंका अधिक होती है इसलिए नया एचआईवी मरीज मिलने पर उसको भी छह माह तक टीबी से बचाव की दवा खाना अनिवार्य है।

    डॉ यादव ने बताया कि अगर दो सप्ताह तक लगातार खांसी आए, सीने में दर्द हो, सांस फूल रही हो, तेजी से वजन घट रहा हो, बलगम में खून आता हो और रात में पसीने के साथ बुखार होता हो तो यह टीबी भी हो सकती है। इन लक्षणों के दिखने पर टीबी की जांच जरूर कराई जानी चाहिए। समय से जांच और उपचार न होने पर एक टीबी मरीज दस से बारह लोगों को संक्रमित कर सकता है, जबकि उपचाराधीन मरीज से संक्रमण का खतरा कम हो जाता है।

    94 फीसदी लोग हुए स्वस्थ,

    डीटीओ ने बताया कि टीबी का सम्पूर्ण उपचार ले कर मरीज पूरी तरह से ठीक हो जाते हैं। जिले में पिछले वर्ष उपचार सफतला दर 94 फीसदी रही है। अगर मरीज नियमित दवा का सेवन करें तो वह जल्दी ठीक हो जाएंगे। बीच में दवा बंद करने से डीएस टीबी के डीआर टीबी में बदलने की आशंका बढ़ जाती है और ऐसे मरीजों का उपचार जटिल होता है।

     

  • गोरखनाथ मेडिकल कॉलेज को मिलेगा एम्स भोपाल और गोरखपुर का साथ

    गोरखनाथ मेडिकल कॉलेज को मिलेगा एम्स भोपाल और गोरखपुर का साथ

    गोरखनाथ मेडिकल कॉलेज को मिलेगा एम्स भोपाल और गोरखपुर का साथ,

    एम्स के निदेशक प्रो. अजय सिंह ने किया महायोगी गोरखनाथ विवि का दौरा,

    गोरखनाथ मेडिकल कॉलेज को एम्स भोपाल और गोरखपुर से मिलेगी लाइव आसीयू सेवा,

    गोरखपुर, 19 दिसंबर। अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान (एम्स) भोपाल के निदेशक एवं एम्स गोरखपुर के कार्यवाहक निदेशक प्रो. अजय सिंह ने गुरुवार को महायोगी गोरखनाथ विश्वविद्यालय, आरोग्यधाम गोरखपुर का भ्रमण एवं निरीक्षण किया। इस दौरान उन्होंने खास तौर पर गुरु गोरक्षनाथ मेडिकल कॉलेज हॉस्पिटल एंड रिसर्च सेंटर (गोरखनाथ मेडिकल कॉलेज) की व्यवस्थाओं का अवलोकन किया और उपलब्ध सुविधाओं को उत्कृष्ट बताया। प्रो. अजय सिंह ने कहा कि एम्स भोपाल और गोरखपुर इस मेडिकल कॉलेज के साथ मिलकर पूर्वांचल के मरीजों को बेहतरीन चिकित्सा सुविधाएं उपलब्ध कराएंगे।

    एम्स भोपाल के निदेशक महायोगी गोरखनाथ विश्वविद्यालय के परिसर और कार्य संस्कृति को देखकर काफी प्रभावित हुए और मुक्त कंठ से इसकी सराहना की। उन्होंने कहा कि इस विश्वविद्यालय के साथ मिलकर काम करना नई उपलब्धियों को प्राप्त करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम होगा। उन्होंने कहा कि एम्स भोपाल और गोरखपुर के द्वारा गोरखनाथ मेडिकल कॉलेज को लाइव आसीयू सेवाएं दी जाएंगी। गोरखनाथ मेडिकल कॉलेज के हॉस्पिटल में अत्याधुनिक चिकित्सा सुविधाओं को देखकर प्रो. सिंह ने खुशी जताते हुए कहा कि एम्स भोपाल, गोरखपुर और इस मेडिकल कॉलेज के हॉस्पिटल के साझा प्रयास से मरीजों को और भी उत्कृष्ट सुविधाएं दी जा सकती हैं।
    प्रो. सिंह ने कहा कि आने वाले समय में एम्स भोपाल व गोरखपुर गोरखनाथ मेडिकल कॉलेज के मेडिकल, नर्सिंग और पैरामेडिकल स्टाफ व विद्यार्थियों को नई तकनीकों का प्रशिक्षण उपलब्ध कराएंगे। प्रशिक्षण के बाद इसका लाभ सीधे तौर ओर मरीजों को मिलेगा।

    एम्स निदेशक के निरीक्षण के दौरान महायोगी गोरखनाथ विश्वविद्यालय के कुलपति डॉ. सुरिंदर सिंह ने उन्हें बताया कि लाइव आसीयू सेवा के लिए मेदांता हॉस्पिटल भी गोरखनाथ मेडिकल कॉलेज से जुड़ चुका है। इस मेडिकल कालेज में क्रिटिकल मरीजों के उपचार प्रारंभ है। साथ ही 24 घंटे सर्जरी इमरजेंसी भी संचालित है। कुलपति ने बताया कि बीते कुछ दिनों में यहां जटिल कैंसर की दो सर्जरी भी सफलतापूर्वक की जा चुकी है। इसके साथ ही यहां 18 बेड की डायलिसिस यूनिट भी संचालित है।

    एम्स निदेशक प्रो. सिंह के आगमन पर महायोगी गोरखनाथ विश्वविद्यालय के कुलसचिव डॉ. प्रदीप कुमार राव, मेडिकल कॉलेज के प्रिंसिपल डॉ. अरविंद सिंह कुशवाहा और आयुर्वेद कॉलेज के प्रिंसिपल डॉ. गिरिधर वेदांतम ने उनका स्वागत किया। इस अवसर पर नर्सिंग व पैरामेडिकल संकाय की अधिष्ठाता डॉ. डीएस अजीथा, संबद्ध स्वास्थ विज्ञान संकाय के अधिष्ठाता डॉ. सुनील कुमार सिंह, कृषि विज्ञान संकाय के अधिष्ठाता डॉ. विमल कुमार दुबे, पैरामेडिकल के विभागाध्यक्ष डॉ. रोहित कुमार श्रीवास्तव, फार्मेसी विभाग के हेड डॉ. शशिकांत सिंह, कॉमर्स के विभागाध्यक्ष डॉ. तरुण श्याम आदि मौजूद रहे।

  • कैंसर के खिलाफ टीका विकसित करने का दावा

    कैंसर के खिलाफ टीका विकसित करने का दावा

    आज पूरी दुनिया कैंसर जैसी गंभीर बीमारी से परेशान है. ऐसे में रूस ने एक ऐसा दावा किया है जो पूरी दुनिया के लिए राहत की खबर है. रूस ने कहा कि उसने एक कैंसर वैक्सीन बना ली है जो सभी नागरिकों के लिए निःशुल्क उपलब्ध होगी. रूसी स्वास्थ्य मंत्रालय ने घोषणा की कि उसने कैंसर के खिलाफ एक टीका विकसित किया है जिसे 2025 की शुरुआत से रूस के कैंसर रोगियों को मुफ्त में लगाया जाएगा. रूसी राज्य के स्वामित्व वाली समाचार एजेंसी TASS के अनुसार, रूसी स्वास्थ्य मंत्रालय के रेडियोलॉजी मेडिकल रिसर्च सेंटर के जनरल डायरेक्टर एंड्री काप्रिन ने रूसी रेडियो चैनल पर इस वैक्सीन को लेकर जानकारी दी.

  • पित्त के ऑपरेशन के नाम पर 5000 की अवैध वसूली

    पित्त के ऑपरेशन के नाम पर 5000 की अवैध वसूली

    अमरोहा: योगी सरकार में भ्रष्टाचारी चरम पर,

    जिला अस्पताल में भ्रष्टाचारी का बोलबाला,ऑपरेशन के नाम पर की जा रही अवैध वसूली,

    पित्त के ऑपरेशन के नाम पर 5000 की अवैध वसूली,पिछले 1 महीने से लगातार अस्पताल के चक्कर काट रही महिला,5000 न देने पर लगातार चक्कर कटवा रहे डॉक्टर,

    जिला अस्पताल में डॉक्टर परवेज अंसारी कर रहा वसूली

    अमरोहा जनपद के जिला अस्पताल परिसर का मामला

  • बस्ती मेडिकल कालेज में डॉक्टरों की नहीं सुनते एक्सरे टेक्नीशियन जिससे मरीज हो रहे परेशान

    बस्ती मेडिकल कालेज में डॉक्टरों की नहीं सुनते एक्सरे टेक्नीशियन जिससे मरीज हो रहे परेशान

    बस्ती मेडिकल कालेज में डॉक्टरों की नहीं सुनते एक्सरे टेक्नीशियन जिससे मरीज हो रहे परेशान,

    जिसकी शिकायत मुख्यमंत्री से लेकर उच्चाधिकारियों से भी किया – पीड़ित धर्मवीर,

    “डॉक्टर के लिखने से नहीं होगा एक्सरे जब हम नहीं लिखेंगे”- एक्सरे टेक्निशियन मेडिकल कालेज बस्ती,

    बस्ती। बस्ती जिला में मेडिकल कॉलेज ओपेक के चिकित्सालय कैली में एक्सरे विभाग बना शो पीस, आपको बता दें इस मेडिकल कालेज में डॉक्टर कि नहीं चलती टेक्नीशियन की चलती है। डॉक्टर अगर लिखता है एक्स-रे कराना है तो टेक्नीशियन डॉक्टर के आदेश को काटकर सीधे मरीजों को मना कर देता है की एक्स-रे नहीं होगा, मरीज एक्सरे के लिए परेशान होते हैं। बस्ती जिला में मेडिकल कालेज सिर्फ नाम का रह गया है।सरकार, स्वास्थ विभाग में मरीजों के लिए करोड़ों रुपए पानी की तरह खर्च कर रही है लेकिन इस मेडिकल कॉलेज के कर्मचारियों ने सरकार की व्यवस्था को मिटाने पर लगे हुए हैं। ताजा मामला बस्ती जिला के मेडिकल कॉलेज का है अगर डॉक्टर किसी मरीज को जांच के लिए एक्सरे कराने के लिए लिखता है और जब मरीज एक्सरे विभाग में पहुंचता है और अपनी पर्ची दिखाता है तो वहां पर बैठे टेक्नीशियन मरीज से एक्सरे करने को मना कर देता है। मरीज को यह कहकर वापस कर देता है की डॉक्टर के लिखने से एक्सरे नहीं होगा जबतक हम नहीं कहेंगे। अब इससे अंदाजा लगाया जा सकता है कि अब बस्ती मेडिकल कॉलेज में डॉक्टरों की कोई आवश्यकता ही नहीं, जहां एक तरफ सरकार जनता के स्वास्थ सुविधा के लिए करोड़ों रुपए खर्च कर रही है। मेडिकल कॉलेज बस्ती में डॉक्टरों की कमी है ही लेकिन डॉक्टर हैं तो उनके बाप बनकर बैठे हैं टेक्नीशियन जब डॉक्टर जांच के लिए कोई चीज लिखते है चाहे एक्सरे हो, खून जांच हो या फिर उससे संबंधित कोई और भी जांच की बात हो ,जब अस्पताल में मशीन हैं तो फिर इन टेक्नीशियन को जांच करने या फिर एक्सरे करने में क्यों दिक्कत होती है और मरीजों को वापस कर देते हैं वहीं जब पीड़ित धर्मवीर ने आरोप लगाया कि जब वह अपनी बीमार पुत्री को लेकर मेडिकल कॉलेज बस्ती पहुंचे तो डॉक्टर ने उसका एक्सरे करने के लिए लिखा, जब धर्मवीर अपनी 10 वर्षीय पुत्री को लेकर एक्सरे विभाग में गए तो वहां बैठे एक्स-रे टेक्नीशियन सीधे तौर पर मना कर देते हैं की एक्स-रे नहीं हो पाएगा , मरीज यह विनती करता रहता है कि सर बेटी की तबियत बहुत ज्यादा खराब है और डॉक्टर साहब ने जांच के लिए एक्सरे कराने के लिए भेजा है तो टेक्नीशियन यहां तक कहता हैं की “डॉक्टर को लिखने दीजिए यहां की व्यवस्था हम देखते हैं हम जानते हैं एक्स-रे किसका होना है किसका नहीं होना है”, इस बात को लेकर काफी मरीजों में काफी आक्रोश दिखा और वह टेक्निशियन ऐसे कई मरीजों को वापस कर देता है और मरीज निराश होकर चले जाते हैं।अभी हाल ही में रमेश नाम के मरीज के पैर का एक्सरे कराना था, उसको भी यही कहा गया की एक्स-रे नहीं हो पाएगा इसी तरीके से सैकड़ो मैरिज लाइन में लगे रहते हैं लेकिन उनका एक्सरे नहीं हो पता इससे पता चलता है कि यहां डॉक्टर की कोई जरूरत ही नहीं है यह मेडिकल कॉलेज एक्स-रे टेक्नीशियन के भरोसे चल रहा है अब मरीज डॉक्टर को दिखाएं या फिर एक्सरे टेक्निशियन को दिखाएं ।जब डॉक्टर का लिखा हुए जांच को टेक्निशियन नहीं मानता और मरीजों को वापस कर देता हैं। इसकी शिकायत लगातार मेडिकल कालेज प्रशासन से मरीज करते हैं लेकिन यह टेक्निशियन लगभग 10 साल से लगातार यहां अपना पांव जमाए बैठा है ,एक्स-रे टेक्नीशियन अपनी मनमानी के आगे किसी की नहीं सुनता और अभी तक इस पर प्रिंसिपल द्वारा कोई कार्यवायी नहीं किया गया है। एक्स-रे टेक्नीशियन के इस रवैयें से परेशान मरीजों में काफी आक्रोश दिखा, यहां तक की मरीजों ने यह भी आरोप लगाया की जिससे घूस ले लेते हैं उन्हीं का एक्सरे करते हैं। इसकी शिकायत पीड़ित धर्मवीर ने मुख्यमंत्री से लेकर सभी उच्च अधिकारियों को भी कर चुके हैं । अब देखना है की मेडिकल कॉलेज में लगभग 10 साल से पांव जमाए बैठें इस एक्सरे टेक्नीशियन पर कोई कार्यवायी होती है या सिर्फ हवा हवाई रह जाता है जहां एक तरफ सरकार स्वास्थ्य व्यवस्था को सुधारने के लिए लाखों करोड़ों रुपए की दवाई और मशीन की व्यवस्था करती है जिससे जनता को स्वास्थ्य सुविधा मिले लेकिन उन्हीं के इस तरह विभाग में बैठे कर्मचारियों द्वारा सरकार के सुविधा व्यवस्था को मिटाने पर लगे हैं ,जब मेडिकल कॉलेज में इस तरह की घूसखोरी और मरीजों के साथ गलत व्यवहार करते हैं कर्मचारी तो मरीजों में काफी आक्रोश होता है और वें इसकी शिकायत करते हैं लेकिन उसके बावजूद भी कोई कार्रवाई नहीं होती।