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  • गंगोत्री देवी महिला स्नातकोत्तर महाविद्यालय और नर्सिंग कॉलेज की ऐतिहासिक पहल

    गंगोत्री देवी महिला स्नातकोत्तर महाविद्यालय और नर्सिंग कॉलेज की ऐतिहासिक पहल

    गंगोत्री देवी महिला स्नातकोत्तर महाविद्यालय और नर्सिंग कॉलेज की ऐतिहासिक पहल,

    `”सर्वाइकल कैंसर मुक्त भारत” के संकल्प के साथ भव्य जागरूकता अभियान एवं पोषण स्तर मापन कार्यक्रम का आयोजन`

    गोरखपुर |

    गोरखपुर की प्रतिष्ठित शिक्षण संस्थाएँ *गंगोत्री देवी महिला स्नातकोत्तर महाविद्यालय* और *गंगोत्री देवी स्कूल ऑफ नर्सिंग* ने *”सर्वाइकल कैंसर जागरूकता अभियान एवं पोषण स्तर मापन कार्यक्रम”* का भव्य आयोजन कर महिलाओं के स्वास्थ्य की दिशा में एक ऐतिहासिक कदम उठाया।

    इस कार्यक्रम में *सैकड़ों छात्राओं, शिक्षकों, स्वास्थ्य विशेषज्ञों और समाजसेवियों* ने भाग लिया। इसका उद्देश्य था *महिलाओं को सर्वाइकल कैंसर (गर्भाशय ग्रीवा कैंसर) के प्रति जागरूक करना, उसके लक्षणों और रोकथाम के तरीकों को समझाना, और उचित पोषण के महत्व को उजागर करना।*

    *महाविद्यालय और नर्सिंग कॉलेज ने निभाई अग्रणी भूमिका*

    गंगोत्री देवी महिला स्नातकोत्तर महाविद्यालय और गंगोत्री देवी स्कूल ऑफ नर्सिंग न केवल *शैक्षिक उत्कृष्टता के लिए प्रसिद्ध हैं, बल्कि महिलाओं के स्वास्थ्य और सुरक्षा को लेकर भी अग्रणी भूमिका निभा रहे हैं।*

    महाविद्यालय के व्यवस्थापक *आशुतोष मिश्रा,* प्राचार्य *डॉ. पूनम शुक्ला* और नर्सिंग कॉलेज की पूर्व प्राचार्य *लोरिटा याकूब* ने इस आयोजन का नेतृत्व किया। उन्होंने छात्राओं को *जागरूकता, स्वास्थ्य जांच, सही पोषण और टीकाकरण के महत्व* पर बल दिया।

    *भव्य शुभारंभ: दीप प्रज्वलन और प्रेरणादायक उद्घाटन भाषण*

    कार्यक्रम की शुरुआत *इंजी. आशुतोष मिश्र, डॉ. पूनम शुक्ला और लोरिटा याकूब द्वारा दीप प्रज्वलन और माँ सरस्वती वंदना* के साथ हुई।

    *महाविद्यालय की प्राचार्य डॉ. पूनम शुक्ला ने कहा—*

    `”गंगोत्री देवी महिला महाविद्यालय केवल शिक्षा का केंद्र नहीं, बल्कि सामाजिक जागरूकता और महिलाओं के स्वास्थ्य की सुरक्षा का एक मजबूत स्तंभ भी है। हमारा उद्देश्य हर छात्रा को सशक्त बनाना है, ताकि वह अपने परिवार और समाज में स्वास्थ्य को लेकर एक बदलाव ला सके।”`

    *नर्सिंग की पूर्व प्राचार्य श्रीमती लोरिटा याकूब ने कहा—*

    `”नर्सिंग छात्राएँ न केवल मरीजों की देखभाल करती हैं, बल्कि स्वास्थ्य जागरूकता में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाती हैं। यह कार्यक्रम उनकी जिम्मेदारी को और मजबूत करता है।”`

    *डॉ. दीप्ति चतुर्वेदी, डॉ. बबीता शुक्ला और डॉ. शर्मिला पोद्दार का मार्गदर्शन*

    कार्यक्रम के दौरान *वरिष्ठ स्त्री एवं प्रसूति रोग विशेषज्ञ डॉ. दीप्ति चतुर्वेदी, डॉ. बबीता शुक्ला और डॉ. शर्मिला पोद्दार ने सर्वाइकल कैंसर के कारण, लक्षण, बचाव और आधुनिक चिकित्सा पद्धतियों* पर विस्तार से जानकारी दी।

    *वरिष्ठ चिकित्सिका डॉ. दीप्ति चतुर्वेदी ने बताया—*

    ✅ *”सर्वाइकल कैंसर मुख्य रूप से ‘ह्यूमन पैपिलोमा वायरस’ (HPV) के संक्रमण के कारण होता है। यह एकमात्र ऐसा कैंसर है, जिसे पूरी तरह से रोका जा सकता है।”*
    ✅ *”अगर समय पर HPV वैक्सीन और नियमित स्वास्थ्य परीक्षण कराया जाए, तो इसे 100% रोका जा सकता है।”*
    ✅ *”हमारा लक्ष्य 2030 तक भारत को सर्वाइकल कैंसर मुक्त बनाना है।”*

    *वरिष्ठ चिकित्सिका डॉ. बबीता शुक्ला ने कहा—*

    वरिष्ठ स्त्री एवं प्रसूति रोग विशेषज्ञ डॉ. बबीता शुक्ला ने सर्वाइकल कैंसर के बढ़ते मामलों पर चिंता व्यक्त करते हुए कहा कि यदि इस बीमारी का समय पर पता चल जाए, तो इसे पूरी तरह से रोका और ठीक किया जा सकता है।

    उन्होंने बताया कि भारत में सर्वाइकल कैंसर महिलाओं में होने वाले कैंसर का दूसरा सबसे बड़ा कारण है, लेकिन जागरूकता की कमी के कारण कई महिलाएँ समय पर इसका निदान और उपचार नहीं करवा पातीं।

    *”90-70-90 मॉडल अपनाकर हम भारत को सर्वाइकल कैंसर मुक्त बना सकते हैं”*

    डॉ. बबीता शुक्ला ने बताया कि भारत में सर्वाइकल कैंसर को समाप्त करने के लिए “90-70-90” मॉडल को अपनाना जरूरी है—
    ✅ 90% महिलाओं को HPV वैक्सीन देना।
    ✅ 70% महिलाओं की समय-समय पर स्क्रीनिंग सुनिश्चित करना।
    ✅ 90% मरीजों को उचित इलाज उपलब्ध कराना।

    *डॉ. शर्मिला पोद्दार ने कहा—*

    “कैंसर से बचाव की शुरुआत जागरूकता से होती है। यदि महिलाओं को सही समय पर इसकी पहचान और रोकथाम के उपायों की जानकारी हो, तो इस बीमारी को पूरी तरह से समाप्त किया जा सकता है।”

    उन्होंने बताया कि यदि किसी महिला को—
    ✅ अनियमित मासिक धर्म
    ✅ योनि से असामान्य रक्तस्राव
    ✅ कमर दर्द या कमजोरी

    जैसे लक्षण महसूस हों, तो तुरंत डॉक्टर से परामर्श लेना चाहिए।

    *HPV वैक्सीन: “हर लड़की के लिए सुरक्षा कवच”*

    विशेषज्ञों ने HPV वैक्सीन की महत्ता पर जोर देते हुए बताया कि—
    *9 से 14 वर्ष की उम्र में* – 2 डोज़ (पहली डोज़ 0 महीने पर, दूसरी 6 महीने पर)
    *15 से 26 वर्ष की उम्र में* – 3 डोज़ (पहली 0 महीने पर, दूसरी 2 महीने पर, तीसरी 6 महीने पर)
    *30 वर्ष के बाद* – हर 3 साल में एक बार *गर्भाशय ग्रीवा की जांच* ( *पैप स्मीयर टेस्ट*) करानी चाहिए।

    भविष्य में भी जारी रहेंगे ऐसे स्वास्थ्य जागरूकता अभियान,

    महाविद्यालय प्रशासक श्री आशुतोष मिश्रा ने घोषणा की कि—
    “गंगोत्री देवी महिला महाविद्यालय और नर्सिंग कॉलेज महिलाओं के स्वास्थ्य और सुरक्षा के लिए निरंतर कार्य करते रहेंगे। भविष्य में भी ऐसे जागरूकता अभियान चलाए जाएंगे।”

    “स्वस्थ नारी, सशक्त नारी” – महाविद्यालय और नर्सिंग कॉलेज का संकल्प,

    यह कार्यक्रम महिलाओं में *स्वास्थ्य जागरूकता को नया आयाम देने वाला साबित हुआ।* यह संदेश दिया कि *”जहाँ शिक्षा, वहाँ स्वास्थ्य, और जहाँ स्वास्थ्य, वहाँ उज्जवल भविष्य!”*

    `गंगोत्री देवी महिला महाविद्यालय और नर्सिंग कॉलेज ने फिर किया साबित – “स्वास्थ्य और शिक्षा से ही बनेगा सशक्त समाज!”`

  • समय से कुष्ठ की पहचान और उपचार से रुकता है प्रसार, दिव्यांगता से भी होता है बचाव

    समय से कुष्ठ की पहचान और उपचार से रुकता है प्रसार, दिव्यांगता से भी होता है बचाव

    ‘‘समय से कुष्ठ की पहचान और उपचार से रुकता है प्रसार, दिव्यांगता से भी होता है बचाव’’,

    महात्मा गांधी की पुण्यतिथि से जिले में स्पर्श कुष्ठ जागरूकता अभियान का शुभारंभ,

    जिला विधिक सेवा प्राधिकरण सहित अन्य संगठनों ने भी लिया हिस्सा,

    गोरखपुर । अगर समय से कुष्ठ की पहचान कर उपचार शुरू कर दिया जाए तो इसके संक्रमण की आशंका कम हो जाती है। साथ ही मरीज के दिव्यांग होने का खतरा भी नहीं रहता है । इसके विपरीत गैर उपचाराधीन कुष्ठ रोगी खुद के लिए और समाज के लिए जटिलताएं बढ़ा सकता है। ऐसे में आवश्यक है कि हम किसी भी कुष्ठ रोगी से भेदभाव न करें और कुष्ठ के लक्षण वाले लोगों को शीघ्र जांच और इलाज के लिए प्रेरित करें। यह संदेश जिला कुष्ठ उन्मूलन कार्यक्रम की तरफ से स्पर्श कुष्ठ जागरूकता अभियान के शुभारंभ के मौके पर गुरूवार को दिया गया।

    मुख्य चिकित्सा अधिकारी डॉ आशुतोष कुमार दूबे और जिला कुष्ठ निवारण अधिकारी डॉ गणेश यादव की देखरेख में महात्मा गांधी की पुण्यतिथि पर हुए इस कार्यक्रम में जिला विधिक सेवा प्राधिकरण सहित कई अन्य सामाजिक संगठनों ने भी हिस्सा लिया। सभी लोगों को जिलाधिकारी का संदेश पढ़ कर सुनाया गया और एक स्वर से नारा दिया गया-कुष्ठ पूर्व जन्म का पाप नहीं, यह कोई अभिशाप नहीं।

    इस मौके पर जिला विधिक सेवा प्राधिकरण के सचिव विकास सिंह ने कुष्ठ रोगियों को सहयोगी सामग्री का वितरण किया । सिद्धांत चौधरी के मैजिक शो के जरिये भी कुष्ठ के प्रति जागरूकता का संदेश दिया गया और बताया गया कि शरीर पर कोई भी सुन्न दाग धब्बा जो चमड़ी के रंग से हल्का हो, कुष्ठ भी हो सकता है। ऐसा लक्षण दिखने पर नजदीकी स्वास्थ्य केंद्र पर तुरंत जांच कराएं। जांच और सम्पूर्ण इलाज की सुविधा निःशुल्क उपलब्ध है। इस मौके पर सीआरसी और प्रधानमंत्री दिव्य आशा केंद्र की टीम के सहयोग से कुष्ठ रोगियों को एडीएल किट और बटन वाला फोन भी वितरित किया गया। लेप्रोसी चैंपियन जय प्रकाश ने भी अपना अनुभव साझा किया।

    जिला कुष्ठ निवारण अधिकारी डॉ गणेश यादव ने बताया कि कुष्ठ रोग माइक्रो बैक्टीरियम लेप्रे नामक जीवाणु के कारण होता है । यह अनुवांशिक रोग नहीं है और न ही पूर्व जन्म के पापों का फल, न कोई भूत-पिशाच व टोना – टोटका । कुष्ठ रोगी से भेदभाव करने की बजाय उसे प्रेरित करें कि वह इलाज कराए । नया कुष्ठ रोगी मिलने पर आसपास के दस घरों में बचाव की दवा खिलाई जाती है । नया बाल कुष्ठ व दिव्यांग कुष्ठ रोगी मिलने पर शहरी क्षेत्र में तीन सौ घरों में जबकि ग्रामीण क्षेत्र में पूरे गांव को बचाव की दवा खिलाने का प्रावधान है।

    इस मौके पर जिला कुष्ठ रोग परामर्शदाता डॉ भोला गुप्ता ने बताया कि पिछले पांच वर्षों में कुष्ठ के 1234 नये रोगी खोजे गए । इनमें से 1195 लोग इलाज के बाद इस बीमारी से मुक्त हो चुके हैं। इस समय 325 दिव्यांग कुष्ठ रोगियों को पेंशन मिल रहा है। पिछले पांच वर्षों के भीतर पच्चीस कुष्ठ रोगियों की रिकंस्ट्रक्टिव सर्जरी कराई गई, 210 को फिंगर स्प्लिंट लगे, 368 सेल्फ केयर किट और 1076 एमसीआर किट बांटे गए हैं।

    इस अवसर पर जिला कुष्ठ कार्यालय समेत सभी अस्पतालों और सरकारी कार्यालयों में कुष्ठ उन्मूलन की शपथ दिलाई गई।

    सभी प्रतिभागियों ने महात्मा गांधी की फोटो पर पुष्प अर्पित कर श्रद्धांजलि दी। कार्यक्रम में सीआरसी निदेशक जितेंद्र यादव, प्रधानमंत्री दिव्य आशा केंद्र की कंचन चौधरी, डीप्टी सीएमओ डॉ अनिल कुमार सिंह, मंडलीय कीट विशेषज्ञ वीके श्रीवास्तव, पीपीएम समन्वयक एएन मिश्रा, जिला कुष्ठ कार्यालय से डॉ आसिफ, महेंद्र चौहान, पवन श्रीवास्तव, रतनलाल, सुजीत कुमार सिंह, विनय समेत जिला कुष्ठ कार्यालय समेत अन्य अधिकारी और कर्मचारी मौजूद रहे। कार्यक्रम का संचालन राजेश सिंह ने किया।

  • 2.22 लाख लोगों की बनी प्रिजेम्पटिव टीबी आईडी, 2225 नये टीबी रोगी मिले

    2.22 लाख लोगों की बनी प्रिजेम्पटिव टीबी आईडी, 2225 नये टीबी रोगी मिले

    2.22 लाख लोगों की बनी प्रिजेम्पटिव टीबी आईडी, 2225 नये टीबी रोगी मिले,

    100 दिवसीय टीबी उन्मूलन अभियान के तहत जनजागरूकता के साथ खोजे जा रहे हैं नये रोगी

    जिला क्षय रोग केंद्र की टीम ने फर्टिलाइजर पहुंच कर अभियान के बारे में जागरूक किया

    *गोरखपुर।* जिले में चल रहे 100 दिवसीय टीबी उन्मूलन अभियान में जनजागरूकता के साथ साथ टीबी के नये रोगी खोजे जा रहे हैं। अभी तक उच्च जोखिम श्रेणी के लोगों की स्क्रीनिंग कर करीब 2.22 लाख लोगों की प्रिजेम्पटिव टीबी आईडी बनाई गई है और 2225 नये टीबी रोगी खोजे गए हैं। यह जानकारी मुख्य चिकित्सा अधिकारी डॉ आशुतोष कुमार दूबे ने दी। उन्होंने बताया कि जिला क्षय अधिकारी डॉ गणेश यादव के नेतृत्व में जिला क्षय रोग केंद्र की टीम ने फर्टिलाइजर पहुंच कर अभियान के बारे में अधिकारियों और कर्मचारियों को जागरूक किया।

    मुख्य चिकित्सा अधिकारी ने बताया कि अभियान के दौरान साठ साल से अधिक उम्र के लोग, कुपोषित या कमजोर, मधुमेही रोगी, धुम्रपान व नशा करने वाले, उपचाराधीन टीबी रोगियों के निकट सम्पर्कियों, इलाज पूरा कर चुके टीबी रोगी, एचआईवी रोगी और मलिन बस्तियों के लोगों की खासतौर से स्क्रीनिंग कराई जा रही है। यह सभी लोग उच्च जोखिम श्रेणी में आते हैं। इनकी स्क्रीनिंग के बाद प्रिजेम्पटिव टीबी आईडी बनाई जा रही है। जांच के बाद जो नये टीबी रोगी मिल रहे हैं उनका सम्पूर्ण इलाज निःशुल्क होगा। साथ ही इलाज चलने तक एक हजार रुपये प्रति माह की दर से उन्हें निक्षय पोषण योजना की सहायता राशि भी दी जाती है। यह रकम पोषण से भरपूर खानपान लेने के लिए मरीजों के खाते में दी जाती है।

    जिला क्षय अधिकारी डॉ गणेश यादव ने बताया कि स्कूल, कॉलेज, धर्मगुरुओं और समाज के प्रतिष्ठित लोगों को अभियान के बारे में बताया जा रहा है और उनसे संभावितों मरीजों को जांच के लिए प्रेरित करने की अपील की जा रही है। दो हफ्ते से अधिक की खांसी, बुखार, रात में पसीना, मुंह से खून, सीने में दर्द, सांस में तकलीफ, वजन घटना, भूख न लगना, थकान और गर्दन में गिलटी या गांठ टीबी के प्रमुख लक्षण है। इन लक्षणों के बारे में कल एचयूआरएल (फर्टिलाइजर) के वरिष्ठ उपाध्यक्ष दीपेन रॉय, उनके सहयोगी डॉ एके सिन्हा, सर्वेश गुप्ता और एलएन पांडेय समेत कई अधिकारियों और कर्मचारियों को जागरूक किया गया। संस्था की तरफ से आश्वासन मिला है कि वह परिसर के बाहर भी लोगों को जागरूक करेंगे और नये मरीजों को ढूंढने में मददगार बनेंगे। सभी लोगों ने टीबी उन्मूलन की शपथ भी ली।

    इस अवसर पर पीपीएम समन्यवक अभय नारायण मिश्र और मिर्जा आफताब बेग समेत जिला क्षय रोग केंद्र की पूरी टीम मौजूद रही।

    जिले में टीबी की स्थिति

    जिला क्षय अधिकारी ने बताया कि जिले में ड्रग रेसिस्टेंट टीबी के 394 मरीज और ड्रग सेंसिटिव टीबी के 10756 मरीज उपचाराधीन है। अभियान के दौरान करीब 8.34 लाख जोखिम श्रेणी लोगों की स्क्रीनिंग की जाएगी।

  • कार्यकारी निदेशक ने आपातकालीन विभाग का किया औचक निरीक्षण

    कार्यकारी निदेशक ने आपातकालीन विभाग का किया औचक निरीक्षण

    गोरखपुर, 14 जनवरी 2025: एम्स गोरखपुर के कार्यकारी निदेशक डॉ. अजय सिंह ने आज आपातकालीन विभाग का औचक निरीक्षण किया। निरीक्षण के दौरान उन्होंने पाया कि विभाग में कोई वरिष्ठ डॉक्टर मौजूद नहीं थे, जिसे उन्होंने एक गंभीर मुद्दा बताया।

    डॉ. सिंह ने उपस्थित स्टाफ से बातचीत की और आपातकालीन विभाग की स्थिति का व्यक्तिगत रूप से जायजा लिया। उन्होंने वरिष्ठ डॉक्टरों की अनुपस्थिति पर असंतोष व्यक्त करते हुए यह कहा कि आपातकालीन सेवाओं में उच्च स्तर की निगरानी सुनिश्चित करने के लिए वरिष्ठ डॉक्टरों की उपस्थिति अत्यंत महत्वपूर्ण है।

    इस समस्या के समाधान के लिए, डॉ. सिंह ने घोषणा की कि जल्द ही एक आधिकारिक परामर्श जारी किया जाएगा, जिसमें यह सुनिश्चित करने के लिए सख्त दिशानिर्देश होंगे कि आपातकालीन विभाग में हर समय वरिष्ठ चिकित्सक उपलब्ध रहें।

    एम्स गोरखपुर उच्च गुणवत्ता वाली स्वास्थ्य सेवाएं प्रदान करने के प्रति समर्पित है और मरीजों की देखभाल के मानकों को बनाए रखने और सुधारने के लिए सभी आवश्यक कदम उठाएगा।

  • मानव की आरोग्यता के लिए आयुर्वेद और योग वरदान : लेविन

    मानव की आरोग्यता के लिए आयुर्वेद और योग वरदान : लेविन

    मानव की आरोग्यता के लिए आयुर्वेद और योग वरदान : लेविन,

    महायोगी गोरखनाथ विवि में आयुर्वेद, योग और नाथपंथ पर तीन दिवसीय अंतरराष्ट्रीय संगोष्ठी का शुभारंभ,

    आयुर्वेद और योग के प्रसार व विस्तार में नाथ पंथ की अग्रणी भूमिका : लेविन,

    अंतरराष्ट्रीय संगोष्ठी के वैज्ञानिक सत्रों में हुई योग और आयुर्वेद के विविध आयामों पर चर्चा,

    गोरखपुर, 12 जनवरी। महायोगी गोरखनाथ विश्वविद्यालय, आरोग्यधाम के गुरु गोरक्षनाथ इंस्टिट्यूट ऑफ मेडिकल साइंसेज (आयुर्वेद कॉलेज) की तरफ से आयुर्वेद, योग और नाथपंथ के पारस्परिक अंतरसंबंधों को समझने के लिए आयोजित तीन दिवसीय अंतरराष्ट्रीय संगोष्ठी का शुभारंभ रविवार को हुआ। इस अवसर मुख्य अतिथि के रूप में उपस्थित इजराइल के आयुर्वेद औषधि विशेषज्ञ एवं आयुर्वेद प्रगति संस्था के निदेशक वैद्य गुई लेविन ने कहा कि मानव की आरोग्यता के लिए आयुर्वेद और योग वरदान हैं और नाथपंथ इन दोनों के प्रसार और विस्तार में सतत अग्रणी भूमिका का निर्वहन करता रहा है।

    पंचकर्म और काय चिकित्सा के विशेषज्ञ वैद्य लेविन ने मानवता की स्वास्थ्य रक्षा के लिए आयुर्वेद, योग और नाथपंथ की भूमिका का उल्लेख करते हुए कहा कि आयुर्वेद न केवल अत्यंत प्राचीन बल्कि पूरी तरह हानिरहित चिकित्सा पद्धति है। प्राचीनकाल में यह जीवनशैली का हिस्सा था, बीच के कालखंड में कुछ विस्मृत करने की कोशिश हुई लेकिन वैश्विक महामारी कोरोना के आने के बाद पूरी दुनिया ने दोबारा इसके महत्व को अंगीकार किया है। उन्होंने योग की चर्चा करते हुए कहा कि यह मानव को निरोग रखने का पूर्णतः निशुल्क उपहार है। यदि कोई भी व्यक्ति योग करते हुए आयुर्वेद सम्मत जीवन अपनाए तो उसे किसी व्याधि होने की आशंका न्यूनतम हो जाती है। श्री लेविन ने कहा कि नाथपंथ से जुड़े योगियों और सिद्धों ने योग और आयुर्वेद को हमेशा ही न केवल स्वयं अपनाया बल्कि आमजन को भी इसके लिए प्रेरित किया। उन्होंने कहा कि गोरखनाथ की भूमि दिव्यता में येरुशलम जैसा प्रतीत होता है। यहां आयुर्वेद के लोग अंतराष्ट्रीय संगोष्ठी कर रहे हैं इसका दिव्यता अद्भुत है। अपनी वृत्ति को छोड़कर भारत में आकर योग और अध्यात्म को सीखकर मेरा जन्म धन्य हुआ। उसी का प्रचार प्रसार इजरायल मैं कर रहा हूं।

    विशिष्ट अतिथि के रूप में उपस्थित प्रोविंशियल आयुर्वेद हास्पिटल श्रीलंका की पूर्व निदेशक डॉ. अनुला इल्लु कुम्बरी ने कहा कि प्राचीन सांस्कृतिक और आयुर्वेद चिकित्सा पद्धति को लेकर श्रीलंका और भारत दोनों देशों की अपनी साझा विरासत है। दूसरे विशिष्ट अतिथि श्रीलंका से आए वनौषधि वाचस्पति डॉ.. मायाराम उनियाल ने कहा कि वैद्य शब्द गुरु गोरखनाथ ने दिया है। नाथ संप्रदाय के प्रवर्तक भगवान शिव ही पारद ज्ञान के ज्ञाता हैं। वे रसशास्त्र के ज्ञाता और ज्ञान प्रदाता हैं। इस अवसर पर उन्होंने अपनी दो पुस्तकों को महायोगी गुरु गोरक्षनाथ विश्वविद्यालय, गोरखपुर के कुलपति डॉ. सुरिंदर सिंह को भेंट की।

    उद्घाटन सत्र की अध्यक्षता करते हुए उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री के सलाहकार एवं भारत सरकार के पूर्व औषधि महानियंत्रक डॉ. जीएन सिंह ने कहा कि नाथपंथ ने योग और आयुर्वेद को आगे बढ़ाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। आयुर्वेद, योग और नाथपंथ को समाहित करते हुए आयोजित यह अंतरराष्ट्रीय संगोष्ठी मानव जीवन की आरोग्यता में मिल का पत्थर साबित होगी। उन्होंने कहा कि आयुर्वेद, योग और नाथपंथ की आपस में एक साझा विरासत है। इस विरासत को लेकर मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ का सपना इस महायोगी गोरखनाथ विश्वविद्यालय में साकार होता दिख रहा है।

    इस अवसर पर बनारस हिंदू विश्वविद्यालय के रसायनशास्त्र और भैषज्य कल्पना विभाग के वरिष्ठ आचार्य डॉ. के. राम चंद्र रेड्डी ने सम्मेलन के विषय और इसकी प्रासंगिकता पर चर्चा की और आयुर्वेद के महत्व को रेखांकित किया। कार्यक्रम का शुभारंभ धन्वंतरि वंदना, सरस्वती वंदना और कुलगीत से हुआ। अतिथियों के सम्मान के बाद स्वागत संबोधन आयुर्वेद कॉलेज के प्राचार्य डॉ. गिरिधर वेदांतम ने किया। इस अंताराष्ट्रीय संगोष्ठी में चार सौ अधिक प्रतिनिधियों की सहभागिता है। संगोष्ठी के पहले दिन उद्घाटन सत्र में कुलपति डॉ. सुरिंदर सिंह, कुलसचिव डॉ प्रदीप राव, आयुर्वेद कालेज के डॉ नवीन, डॉ दीपू मनोहर, डॉ विनम्र शर्मा, डॉ साध्वी नन्दन पाण्डेय, डॉ देवी और डॉ प्रिया और विभिन्न देशों से आए प्रतिनिधियों की उपस्थिति रही ।

    विश्व बाजार में आयुर्वेद उत्पादों की मांग में अभूतपूर्व वृद्धि : डॉ. जीएस तोमर,
    संगोष्ठी के प्रथम वैज्ञानिक सत्र में ‘वर्तमान स्वास्थ्य देखभाल की चुनौतियां एवं आयुर्वेद’ विषय पर जानकारी देते हुए विश्व आयुर्वेद मिशन के संस्थापक अध्यक्ष प्रो. (डॉ.) जीएस तोमर ने कहा कि कोरोना कालखण्ड में आयुर्वेद की लोकप्रियता में अभूतपूर्व वृद्धि हुई है । आयुर्वेद उत्पादों की मांग यकायक विश्व बाज़ार में कई गुना हो गई है । एक ओर एण्टीबायोटिक औषधियों की मांग में कमी दर्ज की गई है वहीं दूसरी ओर व्याधिक्षमत्व या इम्युनिटी वर्धक औषधियों की मांग में बेतहाशा वृद्धि ने दवा बाज़ार को नई दिशा की ओर मोड़ दिया है । यह स्थिति केवल हमारे देश की चारदीवारी तक ही सीमित न रहकर सम्पूर्ण भूमण्डल तक व्याप्त है। उन्होंने कहा कि आयुर्वेदीय उत्पादों की बढ़ती लोकप्रियता के दृष्टिगत आयुर्वेद विधा से जुड़े चिकित्सकों के साथ साथ औषधि निर्माण शालाओं का दायित्व भी चुनौतीपूर्ण हो गया है । ऐसी स्थिति में हमें सर्वप्रथम औषधियों की गुणवत्ता पर ध्यान देना होगा जिससे बढ़ती हुई जन आकांक्षाओं का सम्यक समाधान हो सके। डॉ. तोमर ने कई गंभीर बीमारियों के इलाज में आयुर्वेदिक दवाओं के कारगर होने की भी विस्तार से जानकारी दी।

    पूरी दुनिया दे रही आयुर्वेद के प्रयोग पर जोर : डॉ. शेखर,
    एक अन्य वैज्ञानिक सत्र में एसोसिएशन ऑफ आयुर्वेदा प्रोफेशनल्स ऑफ नॉर्थ अमेरिका के अध्यक्ष डॉ. शेखर अन्नमबाटला ने विश्व स्वास्थ्य संगठन द्वारा निर्धारित प्रमुख स्वास्थ्य पहलुओं पर चर्चा की। उन्होंने बताया कि रोगों के निदान में आयुर्वेद और आधुनिक चिकित्सा पद्धति, दोनों की अपनी विशेषताएं हैं। उन्होंने बताया कि बदलते दौर में आज पूरी दुनिया में आयुर्वेदिक दृष्टिकोण से जटिल बीमारियों के इलाज पर जोर दिया जा रहा है। डॉ. शेखर आयुर्वेदिक उपचारों और पश्चिमी चिकित्सा पद्धतियों के बीच तुलना प्रस्तुत करते हुए कहा कि दोनों पद्धतियों को एक-दूसरे के पूरक के रूप में इस्तेमाल किया जा सकता है। उन्होंने अपने व्याख्यान में आयुर्वेद के महत्व को रेखांकित किया और आयुर्वेद को लोकप्रिय बनाने के लिए प्रयास करने का आह्वान किया।

    संपूर्ण आरोग्यता के लिए लाभकारी है भृगु योग परंपरा : डॉ. भदौरिया,
    संगोष्ठी के एक महत्वपूर्ण सत्र में डॉ. जयंत कुमार भदौरिया भृगु योग परंपरा का सविस्तार परिचय कराया। उन्होंने कहा कि यह योग परंपरा संपूर्ण आरोग्यता के लिए हितकारी है। डॉ. भदौरिया ने कहा कि भृगु योग परंपरा वैदिक काल के महान सप्तर्षियों में से एक भृगु ऋषि के नाम पर आधारित है। इसका लक्ष्य शरीर, मन और आत्मा का समन्वय कर ऊर्जा को जागृत करना है। इसमें शारीरिक शक्ति को बढ़ाने, मन को शांत करने, वाणी को शुद्ध और सार्थक बनाने के आयाम सम्मिलित हैं। उन्होंने कहा कि भृगु योग का अभ्यास व्यक्ति को शारीरिक, मानसिक और आत्मिक रूप से स्वस्थ बना सकता है।

    पुरुष बांझपन के इलाज में योग और होलिस्टिक चिकित्सा कारगर: डॉ. चेतन शाही,
    संगोष्ठी के एक अन्य वैज्ञानिक सत्र में एम्स गोरखपुर के शरीर रचना विभाग के डॉ. चेतन शाहनी ने अपने व्याख्यान में पुरुष बांझपन में योग और होलिस्टिक उपचार की भूमिका पर प्रकाश डाला। उन्होंने पुरुष बांझपन के कारणों पर चर्चा की, जिसमें टेस्टिकुलर डिस्जेनेसिस सिंड्रोम (टीडीएस) शामिल है। बताया कि टीडीएस एक जटिल विकार है जो पुरुष प्रजनन प्रणाली के विकारों का समूह है। इसमें बांझपन, क्रिप्टोर्किडिज्म और टेस्टिकुलर कैंसर शामिल हो सकते हैं। डॉ. चेतन शाहनी ने कहा कि इसके निदान में योग और होलिस्टिक उपचार प्रभावी साबित हुए हैं। उन्होंने कहा कि अनुलोम-विलोम और कपालभाति जैसे प्राणायाम तनाव को कम करने और हार्मोनल संतुलन को बनाए रखने में मदद कर सकते हैं।

    शारीरिक व मानसिक विकास को बढ़ावा देता है स्वर्णप्राशन : डॉ. बीएम सिंह
    एक महत्वपूर्ण वैज्ञानिक सत्र में बीएचयू में शिशु रोग विभाग के अध्यक्ष डॉ. बीएम सिंह ने शिशुओं की प्रतिरक्षा को बढ़ाने में स्वर्णप्राशन की भूमिका पर प्रकाश डाला। उन्होंने बताया कि स्वर्णप्राशन स्वर्ण भस्म, शहद और घी को मिलाकर जन्म संस्कार के दौरान दिया जाता है। शुद्ध स्वर्ण भस्म का कोई साइड इफेक्ट नहीं पाया गया है। शहद में प्रोटीन, शर्करा और एंटीऑक्सीडेंट गुण होते हैं। घी में प्रतिरक्षा-मॉड्युलेटरी और रोगाणुरोधी गुण होते हैं। उन्होंने बताया कि स्वर्णप्राशन शारीरिक और मानसिक विकास को बढ़ावा देता है।

    दूसरे दिन होगा मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ का विशेष व्याख्यान,
    कई देशों के डेलीगेट्स की सहभागिता वाली अंतरराष्ट्रीय संगोष्ठी के दूसरे दिन सोमवार (13 जनवरी) को मुख्यमंत्री एवं महायोगी गोरखनाथ विश्वविद्यालय के कुलाधिपति योगी आदित्यनाथ का विशेष व्याख्यान होगा। सीएम योगी नाथपंथ की दुनिया की सर्वोच्च पीठ, गोरक्षपीठ के महंत होने के साथ योग के मर्मज्ञ भी हैं और आयुर्वेद के प्रति रुझान उन्हें नाथपंथ की विरासत में मिला है। संगोष्ठी में ‘आयुर्वेद, योग और नाथपंथ का मानवता के प्रति योगदान’ विषय पर विशेष व्याख्यान देंगे।

  • हरनहीं सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र पर उपलब्ध है एंटी रेबीज वैक्सीन

    हरनहीं सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र पर उपलब्ध है एंटी रेबीज वैक्सीन

    हरनहीं सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र पर उपलब्ध है एंटी रेबीज वैक्सीन,

    हरनही सामुदायिक स्वास्थ्यकेंद्र पर शाम चार बजे तक चलती है ओपीडी,

    मरीज का लगा रहता है ताता, रोजाना लगती है लगभग 50 से अधिक एंटी रेबीज वैक्सीन,

    संवाददाता :शक्ति ओम सिंह,
    खजनी, गोरखपुर

    सरकारी स्वास्थ्य केंद्र में अब ओपीडी सुबह 10 से शाम बजे बजे तक खुलेगी। मार्च 2025 तक नए समय के अनुसार ही सभी प्रभारी चिकित्साधिकारी, चिकित्सक और स्वास्थ्यकर्मी ओपीडी में बैठेंगे। इसका सीधा फायदा रोगियों को मिलेगा।

    प्रभारी चिकित्सा अधीक्षक हर नहीं विवेक प्रताप सिंह। ने बताया कि शीतकालीन सत्र अवधि एक अक्टूबर से 31 मार्च तक सरकारी चिकित्सालयों में ओपीडी का समय सुबह 10 से शाम चार बजे तक शासन से निर्धारित है। अन्य दिनों में सरकारी स्वास्थ्य केंद्र सुबह 10 से दोपहर 2 बजे तक ही ओपीडी की जाती है। जबकि चौबीस घंटे इमरजेंसी सुविधा प्रदान की जाती है। इसके बावजूद ग्रामीण क्षेत्रों के सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र, एवं गैर जनपद से यहां पर लोग आते हैं पिछले वर्षलगभग 50 हजार से अधिक ओपीडी की गई है और देखा जाए तो पिछले कई वर्षों का रिकॉर्ड तोड़ दिया।
    वहीं गैर जनपद के लोग भी यहां पर एंटी रेबीज लगवाने आते हैं और एंटी रेबीज की सुविधा हमारे यहां उपलब्ध है
    और हफ्ते के सातों दिन यहां पर लगाते हैं

    स्वास्थ्य विभाग की तरफ से हर नहीं सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र पर एंटी रेबीज वैक्सीन उपलब्ध करवाई गई है जिस जानवर के काटने पर जल्द उपचार हो सकेंगे और लोगों को सहुलियत मिलेगी ।

    इस मौके पर डॉ नित्या सिंह, डॉ लोकेश पाण्डेय, डा विवेक कुमार चौधरी,फार्मासिस्ट संतोष सिंह,
    चीफ फार्मासिस्ट अनिल कुमार सिंह, फार्मासिस्ट शरद श्रीवास्तव,फार्मासिस्ट अनिल कुमार वर्मा, लैब टेक्नीशियन विमला , वार्ड बॉय सहित तमाम लोग उपस्थित रहे।

  • एचएमपीवी वायरस पर स्वास्थ्य मंत्री ने कहा घबराने की कोई बात नहीं है

    एचएमपीवी वायरस पर स्वास्थ्य मंत्री ने कहा घबराने की कोई बात नहीं है

    स्वास्थ्य मंत्री जेपी नड्डा ने एचएमपीवी वायरस को लेकर कहा है कि घबराने की बात नहीं है और हम इसकी मॉनिटरिंग कर रहे हैं,

    उन्होंने बताया कि ये कोई नया वायरस नहीं है और इसकी पहचान सबसे पहले 2001 में की गई थी,

    एचएमपीवी के मामलों में बढ़ोतरी के बीच, भारत कोविड-19 जैसे प्रकोप से निपटने के लिए पूरी तरह तैयार हैं।

  • महाकुंभ के पावन शुभ अवसर पर “नेत्र कुंभ 2025” का उद्घाटन किया गया

    महाकुंभ के पावन शुभ अवसर पर “नेत्र कुंभ 2025” का उद्घाटन किया गया

    प्रयागराज : आज 5 जनवरी को प्रयागराज की पावन धरती पर महाकुंभ के पावन शुभ अवसर पर “नेत्र कुंभ 2025” का उद्घाटन किया गया .इस नेत्र कुम्भ में जो 12 जनवरी 2025 से लेकर 26 फरवरी 2025 तक चलेगा लेकिन आज से ही मरीज देखने चालू हो गया है . इस नेत्र कुंभ में 5 लाख से ज्यादा मरीज देखने का लक्ष्य तथा 3 लाख मरीजों को निःशुल्क चश्मा वितरण किया जाएगा. 50000 मरीज का निशुल्क ऑपरेशन होगा तथा 500 नेत्र चिकित्सक और 1000 नेत्र असिस्टेंट 50 दिन तक अपनी सेवा देंगे .
    यहां पर 11 एकड़ क्षेत्र में फैले नेत्र कुम्भ परिसर में विश्वविख्यात इस्कॉन संस्था द्वारा निशुल्क भोजन की व्यवस्था किया गया है. जिसमें खाना, पीना, नाश्ता मरीज के साथ-साथ सभी लोगों को निशुल्क रहेगा. जो मरीज अपना नेत्र परीक्षा कराने के बाद चश्मा चाहता है तो उसे दो से तीन घंटे के अंदर मिल जाएगा तब तक जलपान और भोजन का आनंद ले . अगर किसी कारण बस वह ले जा पाये तो उसका चश्मा कोरियर द्वारा उसके घर पहुंचा दिया जाएगा. ऑपरेशन या तो प्रयागराज मेडिकल कॉलेज में किया जाएगा नहीं तो उसके गृह जनपद मे ही ऑपरेशन की व्यवस्था की गई है .पूरे भारतवर्ष से 250 से ज्यादा सरकारी तथा प्राइवेट हॉस्पिटलों ने निशुल्क ऑपरेशन करने का वादा किया है. गोरखपुर के चिकित्सक इसमें बहुत अग्रणी भूमिका में है तथा उन्होंने कहा है की “नेत्र कुम्भ के मरीजों का ऑपरेशन की संख्या मैं लिख नहीं सकता हूं जितना भी आए सारा ऑपरेशन हम लोग निशुल्क करेंगे”.
    आज के दिन बाबा राघव दास मेडिकल कॉलेज से दो आई असिस्टेंट श्री अभिजीत प्रजापति अंकित कुमार ठाकुर तथा साई नेत्रालय गोरखनाथ की तरफ से मृत्युंजय राय ने अपना काम आज से चालू कर दिया हैं .आने वाले दिनों में हो सकता है गोरखपुर से और चिकित्सक अपनी टीम लेकर आए तथा नेत्र कुम्भ को सफल बनाने में अपनी भूमिका निभाएं.
    आपको बता दें इस तरह का इतना बड़ा नेत्र कुम्भ और स्वास्थ्य शिविर का आयोजन विश्व में पहली बार हो रहा है जो अपने में एक सनातन धर्म की आस्था, एकता और मानव के प्रति समर्पण दिखता है.
    हम वसुदेव कुटुंबकम का का भाव रखते हुए मानव सेवा के लिए सदैव तत्पर हैं.

    सौजन्य :- डा० शिव शंकर शाही, गोरखपुर

  • ‘निःशुल्क नेत्र परीक्षण एवं मोतियाबिन्द चयन शिविर’ का आयोजन

    ‘निःशुल्क नेत्र परीक्षण एवं मोतियाबिन्द चयन शिविर’ का आयोजन

    5 जनवरी 2025, गोरखपुर : श्री गोरक्षनाथ मेडिकल कालेज हास्पिटल एवं रिसर्च सेन्टर एवं गुरु श्री गोरक्षनाथ चिकित्सालय, गोरखनाथ के संयुक्त तत्वावधान में ‘निःशुल्क नेत्र परीक्षण एवं मोतियाबिन्द चयन शिविर’ का आयोजन ब्लाक मुख्यालय पिपरौली गोरखपुर में किया गया।

    आज के नेत्र शिविर में लगभग 167 रोगियों का रजिस्ट्रेशन किया गया । नेत्र रोगियों को परामर्श के उपरान्त निःशुल्क दवाएं भी दी गयी। चिकित्सालय के उच्चीकृत नेत्र विभाग द्वारा निःशुल्क नेत्र परीक्षण बीमारी जैसे- मोतियाबिन्द काला मोतिया, भैगापन तथा आंख की अन्य रोगों की निःशुल्क जांच भी हुई। नेत्र परीक्षण के बाद 22 रोगियों को नेत्र विभाग द्वारा चिन्हित किया गया है जिन्हे आपरेशन की तारीख दी गयी है । वह रोगी दिए गए तारीख को गोरक्षनाथ चिकित्सालय में आयेंगे और उनका निःशुल्क आपरेशन होगा।
    शिविर में नेत्र रोग विशेषज्ञ डॉ. संतोष तिवारी, डॉ. एम.एल. जायसवाल, डॉ. नवेन्दू राय ने रोगियों का परीक्षण किया। रोगियो का फिटनेस डॉ. अंशु सिंह वरिष्ठ फिजिशियन ने किया । आपरेशन के पूर्व जांचकर आपरेशन की तारीख दी गयी । मोतियाबिन्द का निःशुल्क आपरेशन बिना टांका विधि से गुरू श्री गोरक्षनाथ चिकित्सालय के नेत्र विशेषज्ञों द्वारा किया जायेगा।
    कार्यक्रम में मुख्य रूप से चिकित्सालय के निदेशक कर्नल (डॉ) हिमांशु दीक्षित, डॉ. अनिल श्रीवास्तव, विनोद सिंह नेगी, उदयभान सिंह, प्रेमपाल गुप्ता, रामपाल सिंह, दिलीप यादव, प्रेम नारायण शाही, रूपक शर्मा, प्रवीण कुमार गुप्ता, अवध विकास, भक्त भूषण, अूमल्य श्रीवास्तव, कृष्णा यादव, दीपक चौधरी, अनूप चार्ल्स, रवि कुमार सहित चिकित्सालय के वरिष्ठ अधिकारी एवं कर्मचारी उपस्थित थे।

  • स्वास्थ्य को लेकर संवेदनशील है मोदी योगी सरकार : महेश

    स्वास्थ्य को लेकर संवेदनशील है मोदी योगी सरकार : महेश

    ब्यूरो प्रभारी —-विनय तिवारी

    बड़हलगंज/ गोरखपुर (निष्पक्ष टुडे) : बड़हलगंज केंद्र की मोदी और प्रदेश की योगी आदित्यनाथ की सरकार जनता के स्वास्थ्य को लेकर काफी संवेदनशील है, एक तरफ जहां स्वास्थ्य सेवाओं में तेजी से काम हो रहा है तो वहीं आयुष्मान कॉर्ड जैसी योजनाओं का लाभ देकर सरकार हर तबके के लोगों को पांच लाख रुपए तक की मुफ्त स्वास्थ्य सुविधाएं प्रदान कर रही है।

    उक्त बातें चेयरमैन प्रतिनिधि महेश उमर ने शुक्रवार को नगर पंचायत बड़हलगंज के कैम्प कार्यालय में आयोजित निःशुल्क आयुष्मान भारत शिविर में सत्तर वर्ष से अधिक आयु के लोगों को आयुष्मान कॉर्ड पंजीकरण के दौरान कही। इस दौरान सैकड़ों लोगों का आयुष्मान कॉर्ड पंजीकरण कर उनका कॉर्ड बनाया गया। इस दौरान ईओ राम समुझ, सभासद दीपक शर्मा, सूरज सोनकर, राकेश राय, सुनील यादव, रामदास मद्धेशिया, नियाज़ कुरैशी, सुनील कुमार, कृष्णा गुप्ता, अभिषेक श्रीवास्तव, सुरेश उमर, अमलेश कुमार सहित अन्य संख्या में लोग मौजूद रहें।