Category: हेल्थ

  • नेत्र कुंभ 2025 – सेवा, संकल्प और समर्पण का ऐतिहासिक संगम

    नेत्र कुंभ 2025 – सेवा, संकल्प और समर्पण का ऐतिहासिक संगम

    नेत्र कुंभ 2025 – सेवा, संकल्प और समर्पण का ऐतिहासिक संगम,

    महाकुंभ 2025 में अद्वितीय नेत्र सेवा महायज्ञ,

    प्रयागराज के महाकुंभ 2025 में विश्व इतिहास के सबसे बड़े नेत्र चिकित्सा अभियान का आयोजन किया जा रहा है। इस भव्य नेत्र कुंभ में 5 लाख लोगों की नेत्र जांच, 3 लाख जरूरतमंदों को निशुल्क चश्मा वितरण, और 50,000 मरीजों के मुफ्त नेत्र ऑपरेशन का लक्ष्य रखा गया है।

    यह दिव्य आयोजन नागवासुकी, सेक्टर-5 में 10 एकड़ भूमि पर किया जा रहा है, जिसमें राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) और सक्षम संगठन की महत्वपूर्ण भूमिका है।

    इस अभियान का संचालन प्रख्यात नेत्र रोग विशेषज्ञ डॉ. वाई. सिंह जी द्वारा संचालित विमला सेवा संस्थान के सहयोग से किया जा रहा है। यहां श्रद्धालुओं को प्रतिदिन निशुल्क नेत्र जांच, औषधि वितरण और चश्मा वितरण की सुविधा उपलब्ध कराई जा रही है।

    नेत्र कुंभ 2025: विश्व के सबसे बड़े नेत्र चिकित्सा अभियान की झलक

    उद्घाटन: 5 जनवरी 2025
    अवधि : 12 जनवरी 2025 से 26 फरवरी 2025 (50 दिवसीय सेवा महायज्ञ)

    प्रमुख सेवाएं :

    • *5 लाख से अधिक लोगों की नेत्र जांच*

    • *3 लाख मरीजों को निशुल्क चश्मा वितरण*

    • *50,000 मरीजों के सफल निशुल्क नेत्र ऑपरेशन*

    • *500 से अधिक नेत्र विशेषज्ञ डॉक्टरों की सेवा*

    • *1,000 से अधिक नेत्र सहायक कर्मियों द्वारा सहयोग*

    • *नेत्र चिकित्सा के क्षेत्र में विश्व रिकॉर्ड बनाने की दिशा में ऐतिहासिक प्रयास*

    *डॉ. शिव शंकर शाही – नेत्र कुंभ के आधार स्तंभ और समाज सेवा के महायोद्धा*

    *समाज सेवा के सच्चे साधक, सक्षम गोरक्ष प्रांत के यशस्वी प्रांत अध्यक्ष*

    महाकुंभ 2025 में आयोजित *नेत्र कुंभ* को साकार करने में *सक्षम गोरक्ष प्रांत के प्रांत अध्यक्ष, डॉ. शिव शंकर शाही की महान सेवा भावना और दृढ़ संकल्प* का अमूल्य योगदान है। उनके *दूरदर्शी नेतृत्व, अतुलनीय समर्पण और अनुकरणीय संगठन क्षमता* के बिना यह *दिव्य सेवा अभियान संभव नहीं था।*

    *मानवता के लिए प्रकाश स्तंभ*

    डॉ. शिव शंकर शाही केवल एक नाम नहीं, बल्कि समाज सेवा के लिए अनंत ऊर्जा और प्रेरणा का प्रतीक हैं। उनकी अथक मेहनत और सेवाभावना ने नेत्र कुंभ 2025 को एक ऐतिहासिक अभियान बना दिया है।

    उनका मानना है कि सच्ची सेवा वही है, जो बिना किसी स्वार्थ के की जाए और इसी विचारधारा को आत्मसात करते हुए उन्होंने नेत्र कुंभ को केवल एक चिकित्सा शिविर नहीं, बल्कि एक सामाजिक परिवर्तन का आंदोलन बना दिया है।

    *विशेषताएं*

    • *नेत्र कुंभ की कल्पना को धरातल पर साकार करने में निर्णायक भूमिका*

    • *सैकड़ों डॉक्टरों, स्वयंसेवकों और सेवा संगठनों को एक मंच पर लाना*

    • *नेत्र चिकित्सा सेवा को जन-जन तक पहुंचाने के लिए तकनीकी और आधुनिक साधनों का उपयोग*

    • *समाज के सबसे जरूरतमंद और वंचित वर्गों को इस सेवा से जोड़ने का संकल्प*

    • *सक्षम संगठन के माध्यम से भारत को दृष्टिहीनता मुक्त बनाने की दिशा में प्रयास*

    डॉ. शिव शंकर शाही का व्यक्तित्व त्याग, सेवा, और नेतृत्व का उत्कृष्ट उदाहरण है। उन्होंने न केवल नेत्र कुंभ को सफल बनाने में अपना योगदान दिया है, बल्कि समाज में स्वास्थ्य और जागरूकता अभियान को नई ऊंचाइयों तक पहुंचाया है।

    उनके अथक प्रयासों से नेत्र कुंभ 2025, भारत के चिकित्सा इतिहास में स्वर्णिम अक्षरों में लिखा जाएगा।

    *सक्षम भारत – समर्थ भारत के सच्चे संवाहक*

    डॉ. शिव शंकर शाही के मार्गदर्शन में सक्षम भारत – समर्थ भारत का संकल्प साकार हो रहा है। उनका कुशल नेतृत्व नेत्र कुंभ 2025 को सिर्फ एक चिकित्सा आयोजन नहीं, बल्कि एक युग परिवर्तन का प्रतीक बना रहा है।

    यह आयोजन केवल वैज्ञानिक और चिकित्सा सेवा का संगम ही नहीं है, बल्कि आध्यात्मिक और मानवीय सेवा की गाथा भी लिख रहा है।

    मानवता के सच्चे सेवक

    डॉ. शिव शंकर शाही का मानना है कि समाज सेवा ही जीवन का सबसे बड़ा धर्म है। उन्होंने अपने प्रयासों से लाखों लोगों को नई रोशनी देने का संकल्प लिया है और यह अभियान उनकी अटूट इच्छाशक्ति का प्रतीक बन चुका है।

    सक्षम भारत – समर्थ भारत

    *डॉ. शिव शंकर शाही*
    *प्रांत अध्यक्ष, सक्षम गोरक्ष प्रांत*

  • मेडिकल विद्यार्थियों का पहला गुरु होता है कैडेवर : प्रो. भावतोष

    मेडिकल विद्यार्थियों का पहला गुरु होता है कैडेवर : प्रो. भावतोष

    मेडिकल विद्यार्थियों का पहला गुरु होता है कैडेवर : प्रो. भावतोष,

    श्री गोरखनाथ मेडिकल कॉलेज हॉस्पिटल एंड रिसर्च सेंटर में एमबीबीएस प्रथम वर्ष के विद्यार्थियों के लिए कैडेवरिक ओथ का आयोजन,

    मानवता की सेवा का मार्ग प्रशस्त करेगा कैडेवर का अध्ययन : डॉ. भावतोष,

    चिकित्सकीय ज्ञान प्राप्त करने का महत्वपूर्ण माध्यम है कैडेवर : डॉ. जीएन सिंह,

    श्री गोरखनाथ मेडिकल कॉलेज हॉस्पिटल एंड रिसर्च सेंटर में उपलब्ध हैं सात कैडेवर : प्रो. सुरिंदर सिंह

    गोरखपुर, 8 फरवरी। द वेस्ट बंगाल यूनिवर्सिटी ऑफ़ हेल्थ साइंसेज कोलकाता के पूर्व कुलपति और सिस्टर निवेदिता विश्वविद्यालय कोलकाता के एमिरेट्स प्रोफेसर, सीनियर हार्ट सर्जन डॉ. भावतोष विश्वास ने कहा कि कैडेवर (शव या मृत मानव शरीर) मेडिकल विद्यार्थियों का प्रथम गुरु होता है। इस गुरु के सामने ही शपथ लेकर चिकित्सा विज्ञान के विद्यार्थी चिकित्सा क्षेत्र की अपनी ज्ञान यात्रा शुरू करते हैं।

    प्रो. भावतोष विश्वास शनिवार को महायोगी गोरखनाथ विश्वविद्यालय के श्री गोरखनाथ मेडिकल कॉलेज हॉस्पिटल एंड रिसर्च सेंटर में एमबीबीएस प्रथम वर्ष के विद्यार्थियों के लिए आयोजित कैडेवरिक ओथ सेरेमनी को बतौर मुख्य अतिथि संबोधित कर रहे थे। इस अवसर पर एमबीबीएस प्रथम वर्ष के विद्यार्थियों को मेडिकल कॉलेज के शरीर रचना विभाग के विच्छेदन कक्ष में मानव शरीर (कैडेवर) को प्रथम गुरु मानने की पारंपरिक शपथ दिलाई गई। विद्यार्थियों को संबोधित करते हुए प्रो. भावतोष ने कहा कि कैडेवरिक ओथ के साथ ही चिकित्सा विज्ञान के नए छात्रों की प्रायोगात्मक कक्षाएं भी प्रारंभ हो गई हैं। उन्होंने कहा कि कैडेवर की आपने पूजा की है इसलिए इस गुरु के प्रति सदैव सम्मान का भाव रखें। इस कैडेवर से आपको मानव शरीर की रचना के वैज्ञानिक अध्ययन का अवसर मिल रहा है। यह अध्ययन आपको भविष्य में मानवता की सेवा करने वाला सुयोग्य चिकित्सक बनाएगा।

    विशिष्ट अतिथि के रूप में उपस्थित भारत सरकार के पूर्व औषधि महानियंत्रक एवं यूपी के मुख्यमंत्री के सलाहकार डॉ. जीएन सिंह ने कहा कि मेडिकल कॉलेज को मिले कैडेवर को शव मात्र समझने की भूल नहीं होनी चाहिए। ये कैडेवर चिकित्सकीय ज्ञान प्राप्त करने महत्वपूर्ण माध्यम हैं। इनके अध्ययन का अनुभव हासिल करना चिकित्सा विज्ञान के छात्रों के लिए अनिवार्य और अपरिहार्य है। महायोगी गोरखनाथ विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. सुरिंदर सिंह ने एमबीबीएस छात्रों को उज्ज्वल भविष्य की शुभकामनाएं देते हुए कहा कि आज से आपकी व्यवहारिक शिक्षा भी प्रारंभ हो रही है। उन्होंने बताया कि मेडिकल कॉलेजों को जहां एक कैडेवर हासिल करना कठिन होता है वहीं इस मेडिकल कॉलेज के एमबीबीएस स्टूडेंट्स को व्यवहारिक अध्ययन के लिए सात कैडेवर उपलब्ध हैं।

    शव शपथ कार्यक्रम में शरीर रचना विभाग की एसोसिएट प्रोफेसर डॉ. प्रियंका सिंह ने कहा कि कैडेवरिक ओथ देहदान के पश्चात देह को गुरु मानकर उनके सम्मान में एमबीबीएस छात्रों द्वारा ली जाने वाली पारम्परिक शपथ को कहते हैं। उन्होंने मेडिकल के छात्रों को देहदान करने वाले व्यक्ति के पार्थिव शरीर को सर्वोच्च सम्मान के साथ व्यवहार करने, मृतक व उनके परिवार के प्रति जीवन पर्यन्त आभार की अनुभूति रखने तथा इस महान बलिदान से अर्जित ज्ञान से समाज की सेवा करने की शपथ दिलाई। उन्होंने, शव को विच्छेदित करते समय क्या-क्या सावधानियां रखनी है, इससे भी अवगत कराया।
    इस अवसर पर महायोगी गोरखनाथ विश्वविद्यालय के कुलसचिव डॉ. प्रदीप कुमार राव, श्री गोरखनाथ मेडिकल कॉलेज हॉस्पिटल एंड रिसर्च सेंटर के प्राचार्य डॉ. अरविंद सिंह कुशवाहा, नर्सिंग संकाय की प्राचार्या एवं हॉस्पिटल इंचार्ज डॉ. डीएस अजीथा समेत कई विभागों के प्रमुख, शिक्षक और एमबीबीएस के सभी विद्यार्थी उपस्थित रहे।

  • निःशुल्क सेवा देने का पर्व है कुम्भ : डॉ सुनील विश्वकर्मा

    निःशुल्क सेवा देने का पर्व है कुम्भ : डॉ सुनील विश्वकर्मा

    निःशुल्क सेवा देने का पर्व है कुम्भ- डॉ सुनील विश्वकर्मा, प्रबंध निदेशक, कमला मल्टीस्पेशलिटी हॉस्पिटल,

    महाकुंभ में मेदांता हॉस्पिटल व कमला मल्टीस्पेशलिटी हॉस्पिटल ने किया विशाल स्वास्थ्य शिविर का आयोजन,

    आज दिनांक 7 फरवरी 2025 को शाम 3 बजे, स्थान: सेक्टर 9, बजरंगदास मार्ग में मेला प्रशासन अधिकारी जेपी यादव जी की उपस्थिति में आम जनमानस के लिए स्वास्थ्य शिविर का आयोजन किया गया..,

    जिसका उद्घाटन देश विदेश में अपनी कुशल क्षमता से पहचान बनाने वाले *डॉ नरेश त्रेहान, प्रबंध निदेशक, मेदांता हॉस्पिटल वरिष्ठ हृदय रोग विशेषज्ञ* जी ने किया..!!

    कार्यक्रम संयोजक निखिल श्रीवास्तव ने बताया कि डॉ. नरेश त्रेहान जी द्वारा आयोजन की सराहना की गई और दिल्ली, लखनऊ से मदद की बात कही..!!

    डॉ. सुनील विश्वकर्मा ने हृदयाघात के लक्षण एवम त्वरित जीवन रक्षक उपायों को डॉ त्रेहान के साथ साझा किया..!!
    डॉ. नरेश त्रेहान जी द्वारा सभी डॉक्टरों व नर्सिंग स्टाफ को धन्यवाद ज्ञापित किया गया..!!

    कार्यक्रम आयोजक अलका प्रकाश जी ने महाकुंभ से संबंधित सनातन पर्व की किताबें व मोन्यूमेंट देकर सभी का धन्यवाद दिया..!!

    कार्यक्रम मेंटरिंग भारत द्वारा आयोजित किया गया था, जिसमें कमला मल्टीस्पेशलिटी हॉस्पिटल व सैक्टेम फॉउंडेशन के कुशल डॉक्टरों की टीम में डॉ. सुनील विश्वकर्मा(जनरल एवं लेप्रोस्कोपिक सर्जन, प्रबंध निदेशक,कमला मल्टीस्पेशलिटी हॉस्पिटल), डॉ. लोकेन्द्र गुप्ता(सह निदेशक, इमरजेंसी मेडिसिन व ट्रामा केअर, मेदांता लखनऊ), डॉ. प्रियंका यादव(दंत रोग विशेषज्ञ,केजीएमयू,लखनऊ) डॉ. प्रगति यादव, डॉ. सुरेंद्र सिंह(सुयश हॉस्पिटल,कानपुर), डॉ. अविनाश विश्वकर्मा(शिशु एवं बाल रोग विशेषज्ञ), डॉ. विनीत सिंह(सामान्य रोग विशेषज्ञ), डॉ. संगीता मौर्य(स्त्री रोग विशेषज्ञ) समेत सभी रोगों के इलाज के डॉक्टर्स उपस्थित रहे।

    पैथोलॉजी पर प्रकृति पैथोलॉजी के राधिका मौर्य, प्रबंधन स्टाफ़ में खुशबू तिवारी, रोहित सिंह, हितेश श्रीवास्तव, कमलेश कुमार, फार्मेसी पर शुभम कुमार, बबिता, नर्सिंग स्टाफ में दीपाली, विपिन, कौशल, इमरजेंसी एम्बुलेंस में शुभम कुमार उपस्थित रहे।

    शिविर लगातार चलता रहेगा, यह घोषणा मेदांता हॉस्पिटल की ओर से की गई..!!

  • शाही ग्लोबल हॉस्पिटल 11 बच्चों का निशुल्क हार्ट सर्जरी कराएगा

    शाही ग्लोबल हॉस्पिटल 11 बच्चों का निशुल्क हार्ट सर्जरी कराएगा

    शाही ग्लोबल हॉस्पिटल 11 बच्चों का निशुल्क हार्ट सर्जरी कराएगा,

    आज, दिनाँक 6 फरवरी को शाही ग्लोबल हॉस्पिटल में एडवांस पेडियाट्रिक कार्डियोलॉजी का कैंप लगा था, जिसमें दिल्ली फोर्टिस एस्कॉर्ट हार्ट इंस्टिट्यूट के डायरेक्टर तथा पेडियाट्रिक कार्डियोलॉजी के विभाग अध्यक्ष डॉ नीरज अवस्थी आए थे आज कूल 97 बच्चों के हृदय का चेकअप हुआ. इकोकार्डियोग्राफी के साथ हृदय से संबंधित अन्य जांचे हुई . 97 बच्चों में 11 बच्चे ऐसे पाए गए हैं जिन्हें हृदय के ऑपरेशन की आवश्यकता है .
    बच्चों में हृदय की बीमारी का ऑपरेशन काफी महंगा पड़ता है, अतः इसकी मदद के लिए मुख्यमंत्री निधि ,संसध निधि ,के साथ अन्य सामाजिक संगठन के सहयोग से किया जाता है .

    पुज्य योगी आदित्य नाथ जी महाराज माननीय मुख्यमंत्री उत्तर प्रदेश के जनता दरबार में अभी तक जो भी गया है, उसे कुछ न कुछ सहायता मिला है , पैसे के अभाव मे अभी तक किसी का इलाज नहीं रुका है.
    अभी तक 642 से ज्यादा बच्चों के हृदय का ऑपरेशन हो चुका है. सबसे आश्चर्य की बात है की बाबा गोरखनाथ के आशीर्वाद से अभी तक सभी बच्चे ठीक रहे, 100% इलाज सफल रहा है. एक भी कैजुअल्टी या मृत्यु नहीं हुई . बच्चों के हृदय का ऑपरेशन इतना जटिल होने के बाद भी इस तरह के सफलता मिली .
    इसमें जो गरीब, निर्धन असहाय हैं , उनकी मदद शाही ग्लोबल हॉस्पिटल किसी न किसी के सहयोग से खुद करता है .शाही ग्लोबल अस्पताल के निदेशक डॉ शिव शंकर शाही का मानना है कि जब तक संभव है बच्चों को दिल का दर्द नहीं होने दिया जाएगा. बच्चों में दिल की बीमारी उनके खान-पान या रहन सहन से नहीं होता है. यह बीमारी माता-पिता के द्वारा या तो अनुसांगिक के रूप में आता है या जब बच्चा मां के गर्भ होता है, तब कुछ गलत दवा के सेवन या माता पिता के गलत खानपान से होता है .इस बीमारी में बच्चों का कोई दोष नहीं है. इन नन्हे मुन्ने बच्चों को यह दिल का दर्द गिफ्ट के रूप में प्राकृतिक या समाज द्वारा दिया जाता है.

    आज समाज में प्रदूषण इतना फैल चुका है कि हमको फ्री में मिलने वाला पानी और हवा भी दूषित है. खान-पान की किसी भी वस्तु पर विश्वास नहीं किया जा सकता है. लोग आगे बढ़ने तथा समाज में अच्छा दिखने के चक्कर में समय से शादी विवाह नहीं करते हैं. स्वास्थ पर ध्यान नहीं देते हैं, जिसका प्रतिफल कई बार इन मासूम बच्चों को भुगतना पड़ता है.

  • प्रदेश के इकलौते आयुष विश्वविद्यालय का बढ़ा क्रेज ओपीडी से अब तक करीब एक लाख मरीज हो चुके हैं लाभान्वित

    प्रदेश के इकलौते आयुष विश्वविद्यालय का बढ़ा क्रेज ओपीडी से अब तक करीब एक लाख मरीज हो चुके हैं लाभान्वित

    प्रदेश के इकलौते आयुष विश्वविद्यालय का बढ़ा क्रेज ओपीडी से अब तक करीब एक लाख मरीज हो चुके हैं लाभान्वित,

    मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के ड्रीम प्रोजेक्ट में से एक है आयुष विश्वविद्यालय,

    जल्द ही आईपीडी में भी रोगियों को मिलने लगेगी चिकित्सा सुविधा,

    गोरखपुर, 6 फरवरी। चिकित्सा क्षेत्र को लेकर मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के ड्रीम प्रोजेक्ट में से एक और प्रदेश के पहले आयुष विश्वविद्यालय की ओपीडी का क्रेज बढ़ रहा है। लोग आयुर्वेद, होम्योपैथी और यूनानी जैसी हानिरहित चिकित्सा पद्धति के विशेषज्ञों के परामर्श और यहां मिल रही मुफ्त दवाओं से लाभान्वित हो रहे हैं। विश्वविद्यालय का निर्माण फिनिशिंग लेवल पर है और इसके पूर्ण होते ही यहां आईपीडी की सुविधा मिलने लगेगी।

    भटहट के पिपरी में 52 एकड़ क्षेत्रफल में निर्माणाधीन महायोगी गुरु गोरखनाथ आयुष विश्वविद्यालय का शिलान्यास 28 अगस्त 2021 को तत्कालीन राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद ने किया था। शिलान्यास के बाद मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ यहां आकर कई बार निर्माण कार्य का जायजा ले चुके हैं। अब इसका निर्माण लगभग पूरा हो चुका है। फिनिशिंग से संबंधित जो कुछ कार्य शेष हैं, वह भी जल्द पूर्ण हो जाएंगे। विश्वविद्यालय के औपचारिक उद्घाटन से पूर्व ही ओपीडी की सेवाएं मिल रही हैं।

    आयुष विश्वविद्यालय में आयुष ओपीडी का शुभारंभ 15 फरवरी 2023 को मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने किया था। तब से प्रतिदिन यहां आयुर्वेद, होम्योपैथी और यूनानी की ओपीडी में बड़ी संख्या में मरीज परामर्श लेते हैं। काय चिकित्सा, शल्य चिकित्सा के विशेषज्ञों के परामर्श के साथ ही मरीजों को पंचकर्म चिकित्सा की भी महत्वपूर्ण सुविधा प्राप्त हो रही है। ओपीडी शुभारंभ के बाद अब तक करीब एक लाख आयुष चिकित्सकों से परामर्श लाभ ले चुके हैं।

    आयुष विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. एके सिंह बताते हैं कि आयुष विश्वविद्यालय में आयुर्वेद, होम्योपैथी और यूनानी विधाओं की पर्याप्त गुणवत्तापूर्ण औषधियां उपलब्ध हैं जिनका भंडारण व्यवस्थित तरीके से किया जाता है। सभी रोगियों को चिकित्सकों के परामर्श के अनुरूप ये दवाएं मुफ्त उपलब्ध कराई जाती हैं। यह ध्यान दिया जाता है कि एक भी रोगी मुफ्त दवा पाने से वंचित न रहे। कुलपति के अनुसार आयुष विश्वविद्यालय में अंतरंग रोगियों की सेवा के लिए भी युद्ध स्तरीय प्रयास किया जा रहा है। जल्द ही अंतरंग रोगियों को भी गुणवत्तापूर्ण चिकित्सा सुविधा मिलने लगेगी।

    आयुष कॉलेजों का नियमन भी करता है आयुष विश्वविद्यालय,

    प्रदेश के पहले आयुष विश्वविद्यालय के अस्तित्व में आने से पहले आयुर्वेद, यूनानी, होम्योपैथी, प्राकृतिक चिकित्सा, योग, सिद्धा की चिकित्सा पद्धति, जिन्हें समन्वित रूप में आयुष कहा जाता है, के लिए अलग-अलग संस्थाएं रही हैं। पर, सत्र 2021-22 से प्रदेश के सभी राजकीय और निजी आयुष कॉलेजों का नियमन अब आयुष विश्वविद्यालय से ही होता है। वर्तमान सत्र 2024-25 में प्रदेश के 97 आयुष शिक्षण (आयुर्वेद, होम्योपैथी और यूनानी) के कॉलेज/संस्थान इस विश्वविद्यालय से संबद्ध हैं।

    सृजित होंगे रोजगार के नए अवसर,

    आयुष चिकित्सा पद्धति को बढ़ावा देने से आयुष हेल्थ टूरिज्म में रोजगार की संभावनाएं भी सृजित होंगी। इस पर गंभीरता से काम किया गया तो प्रदेश के इस पहले आयुष विश्वविद्यालय के आसपास के गांवों के लोगों को रोजगार के किसी न किसी स्वरूप से जोड़ा जा सकता है। आयुष विश्वविद्यालय के पूर्णतः क्रियाशील होने से किसानों की खुशहाली और नौजवानों के लिए नौकरी-रोजगार का मार्ग भी प्रशस्त होगा। लोग आसपास उगने वाली जड़ी बूटियों का संग्रह कर अतिरिक्त आय अर्जित कर सकेंगे। किसानों को औषधीय खेती से ज्यादा फायदा मिलेगा। आयुष विश्वविद्यालय व्यापक पैमाने पर रोजगार और सकारात्मक परिवर्तन का कारक बन सकता है।

  • एमजीयूजी में अंतरराष्ट्रीय संगोष्ठी के लिए भारत सरकार से मिला अनुदान

    एमजीयूजी में अंतरराष्ट्रीय संगोष्ठी के लिए भारत सरकार से मिला अनुदान

    एमजीयूजी में अंतरराष्ट्रीय संगोष्ठी के लिए भारत सरकार से मिला अनुदान,

    आयुर्वेद और बॉयोमेडिकल विज्ञान में जैव प्रौद्योगिकी के अनुप्रयोग विषय पर 30 मार्च से होगी संगोष्ठी,

    गोरखपुर, 6 फरवरी। महायोगी गोरखनाथ विश्वविद्यालय गोरखपुर (एमजीयूजी) के संबद्ध स्वास्थ्य विज्ञान संकाय में सोसाइटी फॉर बायोटेक्नोलॉजिस्ट इंडिया (एसबीटीआई) के सहयोग से होने वाली अंतरराष्ट्रीय संगोष्ठी के लिए भारत सरकार के जैव प्रौद्योगिकी विभाग ने 4 लाख रुपये का अनुदान प्रदान किया है। यह तीन दिवसीय संगोष्ठी 30 मार्च से 1 अप्रैल तक आयोजित होगी।

    एमजीयूजी में संबद्ध स्वास्थ्य विज्ञान संकाय के अधिष्ठाता प्रो. सुनील कुमार सिंह ने बताया कि अंतरराष्ट्रीय संगोष्ठी के जरिये प्राचीन आयुर्वेद के सिद्धांतों को जैव प्रौद्योगिकी के माध्यम से आधुनिक चिकित्सा क्षेत्र में बहुउपयोगी बनाने का प्रयास किया जाएगा। संगोष्ठी आयोजक समिति के सचिव डॉ. अमित दुबे और डॉ. अनुपमा ओझा ने बताया कि अंतरराष्ट्रीय संगोष्ठी के लिए इजरायल, नेपाल, श्रीलंका, कोरिया, अमेरिका, इंग्लैंड, जर्मनी से भी विषय विशेषज्ञ प्रतिभाग कर रहे हैं। महायोगी गोरखनाथ विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. सुरिंदर सिंह और कुलसचिव डॉ. प्रदीप कुमार राव ने बधाई देते हुए कहा कि अंतरराष्ट्रीय संगोष्ठी के लिए मिलने वाले अनुदान से विश्वविद्यालय गौरवान्वित हुआ है।

  • एम्स गोरखपुर में हुआ 8 किलो के दुर्लभ ट्यूमर (सारकोमा) का सफल ऑपरेशन

    एम्स गोरखपुर में हुआ 8 किलो के दुर्लभ ट्यूमर (सारकोमा) का सफल ऑपरेशन

    गोरखपुर,  एम्स गोरखपुर के सर्जरी विभाग ने एक और जटिल और हाई-रिस्क सर्जरी को सफलतापूर्वक अंजाम देकर अपनी चिकित्सीय दक्षता साबित की है। 75 वर्षीय मरीज, जिसकी पीठ पर 8 किलो का विशालकाय ट्यूमर (सारकोमा) था, का सफल ऑपरेशन किया गया। यह ट्यूमर पहले 2022 में लखनऊ में हटाया जा चुका था, लेकिन तीन वर्षों में यह फिर से उभर आया और अत्यधिक बड़ा हो गया। मरीज को कई अस्पतालों ने ऑपरेशन के लिए अस्वीकार कर दिया था, क्योंकि उसकी उम्र, हृदय रोग और संभावित रक्तस्राव के चलते यह एक अत्यंत जोखिम भरा मामला था।

    एम्स गोरखपुर बना मरीज की आखिरी उम्मीद,

    जब अन्य अस्पतालों में ऑपरेशन संभव नहीं हो पाया, तो मरीज एम्स गोरखपुर के सर्जरी विभाग में पहुंचा, जहां विभागाध्यक्ष प्रो. डॉ. गौरव गुप्ता ने स्थिति की गंभीरता को देखते हुए उसे भर्ती कर लिया और हाई-रिस्क सर्जरी की योजना बनाई। मरीज की आयु और चिकित्सीय जटिलताओं को ध्यान में रखते हुए, पहले एनेस्थीसिया विभाग की टीम से व्यापक परामर्श किया गया।

    तीन घंटे चले ऑपरेशन में चिकित्सकों ने रचा नया कीर्तिमान,

    बीते कल सर्जरी विभाग के विशेषज्ञों की टीम—प्रो. डॉ. गौरव गुप्ता, एसोसिएट प्रोफेसर डॉ. धर्मेंद्र पीपल, असिस्टेंट प्रोफेसर डॉ. रजनीश, सीनियर रेसिडेंट डॉ. शालिनी, तथा जूनियर रेसिडेंट डॉ. आदित्य और डॉ. तनुश्री—ने मिलकर इस जटिल ऑपरेशन को सफलतापूर्वक अंजाम दिया। सर्जरी के दौरान मरीज को अत्यधिक रक्तस्राव की संभावना थी, इसलिए उसे सेंट्रल लाइन डालकर 2 यूनिट रक्त चढ़ाया गया।
    इस ऑपरेशन में एनेस्थीसिया विभाग की भूमिका भी अत्यंत महत्वपूर्ण रही, क्योंकि मरीज की उम्र और हृदय संबंधी समस्याओं के कारण एनेस्थीसिया देना बेहद चुनौतीपूर्ण था। एचओडी प्रो. डॉ. विक्रम वर्धन, प्रो. डॉ. संतोष शर्मा, एसोसिएट प्रोफेसर डॉ. सीमा यादव, असिस्टेंट प्रोफेसर डॉ. सोनल और जूनियर रेसिडेंट डॉ. अरुंधति ने पूरी सावधानी और विशेषज्ञता के साथ मरीज को एनेस्थीसिया दिया।

    मरीज की हालत स्थिर, शीघ्र स्वस्थ होने की उम्मीद,

    करीब तीन घंटे चले इस ऑपरेशन के बाद मरीज को पोस्ट-ऑपरेटिव एनेस्थीसिया आईसीयू में रखा गया, जहां उसकी स्थिति पर लगातार निगरानी रखी जा रही है। पूरी तरह होश में आने के बाद उसे सर्जिकल आईसीयू में शिफ्ट किया जाएगा।

    एम्स गोरखपुर में उच्चस्तरीय जटिल सर्जरी संभव,

    इस सफल ऑपरेशन के बाद एम्स गोरखपुर में उन्नत और जटिल सर्जरी के लिए विश्वास और आशा की एक नई किरण जगी है। इस उपलब्धि पर एग्जीक्यूटिव डायरेक्टर मेजर जनरल प्रो. विभा दत्ता ने सर्जरी और एनेस्थीसिया विभागों की टीम को बधाई दी और इसे संस्थान के लिए एक महत्वपूर्ण उपलब्धि बताया।

    मरीज के परिजन भी इस सफलता से अत्यंत खुश और आभारी हैं, क्योंकि यह ऑपरेशन उनके लिए उम्मीद की आखिरी किरण था। एम्स गोरखपुर अब न केवल पूर्वांचल बल्कि पूरे उत्तर भारत के मरीजों के लिए जटिल सर्जरी का एक विश्वसनीय केंद्र बनता जा रहा है।

  • दवाओं के अन्वेषण में हो रहे हैं नए प्रयोग : डॉ. रामा द्विवेदी

    दवाओं के अन्वेषण में हो रहे हैं नए प्रयोग : डॉ. रामा द्विवेदी

    दवाओं के अन्वेषण में हो रहे हैं नए प्रयोग : डॉ. रामा द्विवेदी

    महायोगी गोरखनाथ विवि में दवा अनुमोदन प्रक्रिया और कैंसर के बचाव पर हुआ विशेष व्याख्यान,

    जेनेरिक और ब्रांडेड दवाओं में होते हैं समान तत्व : डॉ. रामा द्विवेदी,

    गोरखपुर। जॉर्ज वाशिंगटन विश्वविद्यालय, वाशिंगटन डीसी, यूएसए के प्रो. (डॉ.) रामा एस. द्विवेदी ने कहा कि वर्तमान दौर में दवाओं के अन्वेषण में नए प्रयोग हो रहे हैं। फूड एंड ड्रग एडमिनिस्ट्रेशन (एफडीए) की तरफ से इस पर खासा जोर दिया जा रहा है।

    डॉ. रामा गत बुधवार को महायोगी गोरखनाथ विश्वविद्यालय के पंचकर्म सभागार में ‘दवा अनुमोदन प्रक्रिया और कैंसर’ विषय पर आयोजित विशेष व्याख्यान को बतौर मुख्य वक्ता संबोधित कर रहे थे। दवा अनुमोदन प्रकिया पर अपना अनुभव साझा करते हुए उन्होंने कहा कि फूड एंड ड्रग एडमिनिस्ट्रेशन में अन्वेषकीय दृष्टि से अनंत चुनौतियां और संभावनाएं हैं। उच्च स्तरीय गुणवत्ता के लिए अंतरराष्ट्रीय स्तर पर नोबेल पुरस्कार से सम्मानित वैज्ञानिकों के मार्गदर्शन में दवाओं पर शोध कार्य किया गया है जिससे दवाओं और वैक्सीन के अच्छे परिणाम आए हैं। यूएस एफडीए के कार्यों पर प्रकाश डालते हुए डॉ. रामा ने दवा विकास के विभिन्न पहलुओं की जानकारी दी। उन्होंने जेनेरिक और ब्रांडेड दवाओं के बारे महत्वपूर्ण जानकारी साझा करते हुए बताया कि दोनों प्रकार की दवाओं में समान तत्व होते हैं और वे समान औषधीय प्रभाव दिखाते हैं। हालांकि, जेनेरिक दवाएं ब्रांड नाम वाली दवाओं की तुलना में सस्ती होती हैं।

    डॉ. रामा ने एफडीए द्वारा दवा अनुमोदन की प्रक्रिया को भी विस्तार से समझाया। उन्होंने बताया कि एफडीए कर्मचारी दवाओं की सुरक्षा और प्रभावशीलता का मूल्यांकन करते हैं। उन्होंने विद्यार्थियों की जिज्ञासाओं का भी समाधान किया। व्याख्यान में डॉ. अनुराग श्रीवास्तव ने सामान्य कैंसर, स्तन कैंसर, मुंह के कैंसर और ह्यूमन पैपिलोमावायरस (एचपीवी) का परिचय दिया। डॉ. अनुराग ने कैंसर के प्रभाव उसके उपचार और रोकधाम पर सभी का मार्गदर्शन किया। अतिथि स्वागत फार्मेसी संकाय के प्राचार्य डॉ. शशिकांत सिंह, संचालन सहायक आचार्य पीयूष आनंद व धन्यवाद ज्ञापन आयुर्वेद कॉलेज के प्राचार्य डॉ. गिरिधर वेदान्तम ने किया।

    इस अवसर पर मेडिकल कॉलेज के प्राचार्य डॉ. अरविंद सिंह कुशवाहा, संबद्ध स्वास्थ्य विज्ञान संकाय के अधिष्ठाता प्रो . सुनील कुमार सिंह, कृषि विज्ञान के अधिष्ठाता डाॅ. विमल कुमार दुबे, पैरामेडिकल संकाय के प्राचार्य डॉ रोहित श्रीवास्तव, बीबीए लॉजिस्टिक विभाग के विभागाध्यक्ष डॉ. तरुण श्याम, डॉ अमित दुबे, डॉ अनुपमा ओझा, डॉ संदीप कुमार श्रीवास्तव, डॉ.आशुतोष श्रीवास्तव, धनंजय पाण्डेय, डॉ अमित उपाध्याय, डॉ अभिषेक कुमार सिंह, प्रवीण कुमार सिंह समेत सभी शिक्षक एवं विद्यार्थी उपस्थित रहे।

  • अवैध रूप से संचालित हास्पिटल पर छापा, संचालक फरार

    अवैध रूप से संचालित हास्पिटल पर छापा, संचालक फरार

    अवैध रूप से संचालित हास्पिटल पर छापा, संचालक फरार,

    निरीक्षण के दौरान संचालक ने डाक्टर को बंधक बनाने का किया प्रयास,

    ब्यूरो प्रभारी —-विनय तिवारी

    बड़हलगंज/गोरखपुर+निष्पक्ष टुडे):बड़हलगंज विकास खंड क्षेत्र के पिड़हनी चौराहे पर बुधवार को अबैध रुप से संचालित हास्पिटल को सील कर दिया गया है। निरीक्षण में गये डाक्टर व जांच टीम ने उच्चाधिकारीयो को सुचना दे दी है।
    प्रभारी निरीक्षक डेरवा डा.श्रवन तिवारी ने बताया की अबैध रुप से संचालित हास्पिटल का निरीक्षण के क्रम में पिड़हनी में संचालित राज हास्पिटल का निरीक्षण किया गया। कागजात न मिलने पर डा. ने उपजिलाधिकारी गोला को फोन से सुचना दी। एसडीएम के निर्देश पर टीम ने जांच शुरु कि तो संचालक गणेश गुप्ता के पास हास्पिटल चलाने का कोई वैध कागजात नही था, न ही कोई स्पेशलिस्ट डाक्टर मौजुद थे। कागजात मांगने पर संचालक ने जांच टीम से उलझ कर सड़क जाम करने की धमकी देते हुए टीम को बंधक बनाने का प्रयास करने लगा। जांच प्रभारी डा. श्रवन तिवारी ने एसडीएम के निर्देश पर बड़हलगंज पुलिस को बुलाया। पुलिस के पहुंचते ही संचालक फरार हो गया। अस्पताल में चार मरीज भर्ती थे। सिधेगौर की भर्ती महीला मरीज ने डाक्टर को बताया की दो दिन पुर्व डाक्टर से दवा लेकर गई थी। दवा खाने के बाद दो माह का गर्भ नुकसान हो गया है। ईलाज के लिए डाक्टर ने एम्बुलेंस से मरीज को सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र बड़हलगंज भेज अस्पताल को सील कर दिया। डाक्टर ने उच्चाधिकारीयो को सूचना देते हुए संचालक के खिलाफ स्थानीय पुलिस को तहरीर दे दी है।

  • सर्जन क्लब ने निकाली कैंसर जागरूकता रैली

    सर्जन क्लब ने निकाली कैंसर जागरूकता रैली

    गोरखपुर। कैंसर की बीमारी समाज में दिन प्रतिदिन बढ़ती जा रही है चिकित्सकों के अनुसार अगर कैंसर को समय से पहचान लिया जाए तो उसका सत प्रतिशत इलाज संभव है .ऐसा कहा गया है की प्रिवेंशन इस बेटर दैन क्योर बीमारी को होने के पहले ही उसे रोक देना या उससे पैदा न होने देना कैंसर के लिए बहुत जरूरी है इस रैली में आम जनमानस को कैंसर के बारे में जागरूक किया गया तथा किस तरह के कैंसर को पैदा होने से रोका जाए बताया गया. अगर किसी को कैंसर हो गया तो उसके लक्षण को पहचाना और उसका समय से इलाज करके उसे जड़ से खत्म कर देना भी बताया गया .आज के परिवेश में जहां प्रदूषण खान-पान दिनचर्या मानसिक तनाव आदि इतना ज्यादा बढ़ गया है की तरह-तरह की बीमारियां पैदा हो रही है जिसमें कैंसर एक प्रमुख रूप से उभर कर सामने आया है ,इसलिए सभी लोगों को समय से सुबह जागना ,समय से खाना ,खाने-पीने में स्वास्थ्यवर्धक चीज तथा प्रदूषण को कम करने और उससे बचने का सलाह दिया गया .आज की इस रैली में एसोसिएशन ऑफ सर्जन ऑफ इंडिया के सचिव तथा सक्षम गोरक्ष प्रांत के प्रांत अध्यक्ष डॉ शिव शंकर शाही ,सीनियर न्यूरोलॉजिस्ट डॉक्टर राजू केथावत ,सीनियर कार्डियोलॉजिस्ट डॉक्टर बाल गोविंद सिंह शाही ग्लोबल हॉस्पिटल की निदेशक डॉक्टर सीमा शाही शाहिद शहर के बहुत सारे गणमान्य चिकित्सा मौजूद थे. सबने यही कहा कि कैंसर को पैदा होने ही न दिया यही सबसे अच्छा है. इसके लिए आम जनमानस को कैंसर के प्रति जागरूक करना तथा इसे पैदा होने से रोकने की विधि को बताना और जानना बहुत जरूरी है.