Category: हेल्थ

  • उच्च जोखिम श्रेणी के लाखों संभावित टीबी रोगियों की बनेगी प्रिजेंप्टिव आईडी

    उच्च जोखिम श्रेणी के लाखों संभावित टीबी रोगियों की बनेगी प्रिजेंप्टिव आईडी

    उच्च जोखिम श्रेणी के लाखों संभावित टीबी रोगियों की बनेगी प्रिजेंप्टिव आईडी

    जिले में चौबीस मार्च तक चलेगा सौ दिवसीय सघन टीबी उन्मूलन अभियान

    मुख्य चिकित्सा अधिकारी ने टीबी रोगी खोजी वैन को हरी झंडी दिखा कर रवाना किया

    गोरखपुर, 02 जनवरी 2025

    जिले में चल रहे सौ दिवसीय सघन टीबी उन्मूलन अभियान के दौरान उच्च जोखिम श्रेणी के लाखों संभावित टीबी रोगियों की स्क्रीनिंग की जाएगी। साथ ही उनकी निक्षय पोर्टल पर प्रिजेंप्टिव आईडी बनाई जाएगी। इन रोगियों में से जांच के बाद जो टीबी के मरीज निकलेंगे उनका उपचार शुरू होगा और बाकी लोगों की आईडी क्लोज की जाएगी। टीबी मरीजों के निकट सम्पर्कियों की भी जांच होगी और टीबी की पुष्टि न होने पर भी उन्हें बचाव की दवा खिलाई जाएगी। यह जानकारी मुख्य चिकित्सा अधिकारी डॉ आशुतोष कुमार दूबे ने दी,

    उन्होंने अपने कार्यालय से टीबी रोगी खोजी वैन को गुरूवार को हरी झंडी दिखा कर रवाना किया । यह वैन पोर्टेबल एक्स रे मशीन के माध्यम से प्रतिदिन सैकड़ों संभावित टीबी रोगियों की जांच करेगी,

    मुख्य चिकित्सा अधिकारी ने बताया कि 07 दिसम्बर से शुरू हुए इस अभियान के दौरान अभी तक करीब 12000 से अधिक प्रिजेम्पटिव आईडी बनाई जा चुकी है। शासन से प्राप्त दिशा निर्देशों के अनुसार साठ साल से अधिक उम्र के लोग, कुपोषित या कमजोर लोग, मधुमेह रोगी, धुम्रपान व नशा करने वाले, इलाज प्राप्त कर रहे टीबी रोगियों को निकट सम्पर्कियों, इलाज पूरा कर चुके टीबी रोगी, एचआईवी रोगी और मलिन बस्तियों में रहने वाले लोग उच्च जोखिम श्रेणी में आते हैं और उनमें टीबी की आशंका कहीं अधिक है । ऐसे लोगों की समय से जांच कर टीबी की पहचान होने पर सही से पूरा इलाज करवाया जाए तो यह पूरी तरह से ठीक हो सकती है, लेकिन अगर एक मरीज का समय से इलाज न हो तो वह साल भर में पंद्रह नये टीबी मरीज बना सकता है। इसके विपरीत उपचाराधीन टीबी रोगी से संक्रमण की आशंका कम होती है,

    सीएमओ डॉ दूबे ने बताया कि उच्च जोखिम वाले संभावित टीबी रोगियों को एक्स रे केंद्र और सीबीनॉट मशीन तक ले जाने के लिए 108 नंबर एम्बुलेस सेवा की भी सुविधा सरकारी खर्चे पर दी जाएगी। अलग अलग स्थानों पर भी कैम्प लगा कर जांच किये जाएंगे। अभियान के दौरान समाज के प्रभावशाली लोगों और धर्मगुरूओं की तरफ से जनसमुदाय से अपील की जा रही है। जिला क्षय उन्मूलन अधिकारी डॉ गणेश यादव और उनकी टीम की देखरेख में प्रचार प्रसार का भी व्यापक अभियान चलाया जा रहा है,

    इस मौके पर डिप्टी सीएमओ डॉ अनिल सिंह, डिप्टी डीटीओ डॉ विराट स्वरूप श्रीवास्तव, डीएचईआईओ केएन बरनवाल, पीपीएम समन्वयक अभय नारायण मिश्रा, मिर्जा आफताब बेग, डीपीसी धर्मवीर प्रताप सिंह, डब्ल्यूएचओ कंसल्टेंट नाविल, एआरओ एसएन शुक्ला, इंद्रनील आदि प्रमुख तौर पर मौजूद रहे,

    इन लक्षणों के साथ कराएं जांच

    सीएमओ ने बताया कि टीबी आमतौर पर फेफड़ों में होती है लेकिन यह शरीर के अन्य अंगों में भी हो सकती है। दो हफ्ते से अधिक की खांसी, बुखार, रात में पसीना आना, मुहं से खून आना, सीने में दर्द, सांस लेने में तकलीफ, वजन कम होना, भूख न लगना, थकान और गर्दन में गिलटी या गांठें टीबी के प्रमुख लक्षण हैं। इस बीमारी की जांच और इलाज की सुविधा सरकारी खर्चे पर मौजूद है,

    दी जा रही हैं सुविधाएं

    सीएमओ ने बताया कि टीबी के उपचाराधीन मरीजों को अच्छा पोषण व खुराक मिल सके, इसके लिए नवम्बर 2024 से निक्षय पोषण योजना के तहत प्रति माह 1000 रुपये की दर से खाते में सहायता राशि दी जा रही है। इससे पहले यह रकम पांच सौ रुपये प्रति माह की दर से थी। इसे इलाज चलने तक दिया जाता है। जरूरतमंद टीबी मरीजों को निक्षय मित्र गोद लेकर इलाज व पोषण में सहयोग प्रदान कर रहे हैं। अभियान के दौरान अधिकाधिक निक्षय मित्रों से टीबी मरीजों की मदद करवाई जाएगी,

  • एनक्वास के लिए तैयार हुईं मंडल की 466 चिकित्सा इकाइयां

    एनक्वास के लिए तैयार हुईं मंडल की 466 चिकित्सा इकाइयां

    अभी तक 27 चिकित्सा इकाइयों को मिल चुका है एनक्वास

    पीएचसी, यूपीएचसी और आयुष्मान आरोग्य मंदिर श्रेणी में मंडल ने प्रदेश में सबसे पहले जीता पुरस्कार

    गोरखपुर मंडल की 466 चिकित्सा इकाइयों को नेशनल क्वालिटी एश्योरेंस सर्टिफिकेशन (एनक्वास) के लिए तैयार किया गया है। इन इकाइयों का राज्य स्तरीय मूल्यांकन हो चुका है और नेशनल टीम के मूल्यांकन के बाद इन्हें सर्टिफिकेशन मिल सकेगा । एडी हेल्थ डॉ नरेंद्र प्रसाद गुप्ता के दिशा निर्देशन में मंडलीय क्वालिटी एश्योरेंस टीम सभी जिलों की क्वालिटी टीम से कोआर्डिनेट कर निरंतर इन इकाइयों के गैप्स को दूर करवाने में जुटी है। मंडल में अभी तक 27 चिकित्सा इकाइयों को एनक्वास मिल चुका है। पीएचसी, यूपीएचसी और आयुष्मान आरोग्य मंदिर श्रेणी में गोरखपुर मंडल की स्वास्थ्य इकाइयां पूरे प्रदेश में सबसे पहले यह पुरस्कार जीत चुकी हैं।

    मंडलीय क्वालिटी एश्योरेंस प्रोग्राम के प्रभारी डॉ जसवंत मल्ल ने बताया कि पीएचसी श्रेणी में प्रदेश में सबसे पहले गोरखपुर की डेरवा पीएचसी, यूपीएचसी श्रेणी में गोरखपुर की बसंतपुर यूपीएचसी और आयुष्मान आरोग्य मंदिर श्रेणी में महराजगंज जिले के पिपरा रसूलपुर केंद्र को यह पुरस्कार मिला है। इसके तहत जिला स्तरीय अस्पतालों और सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों (सीएचसी) को प्रति बेड 10000 रुपये का पुरस्कार तीन वर्षों तक मिलता है। पीएचसी को तीन लाख और अर्बन पीएचसी को दो लाख रुपये तीन वर्षों तक पुरस्कार के तौर पर मिलते हैं। सात पैकेज में सर्टिफिकेशन होने पर आयुष्मान आरोग्य मंदिर को 1.26 लाख और बारह पैकेज में 2.16 लाख रुपये का पुरस्कार तीन वर्षों तक दिया जाता है।

    डॉ मल्ल ने बताया कि एनक्वास सर्टिफाइड होने के बाद मिलने वाली पुरस्कार की रकम से स्वास्थ्य इकाइयों में गुणात्मक सुधार संबंधित कार्य कराए जाते हैं। इससे मरीजों को और गुणवत्तापूर्ण सेवा मिलती है। गैप्स दूर करने में भी पुरस्कार की रकम मददगार होती है। पुरस्कार से कर्मचारियों को भी प्रोत्साहन राशि और गिफ्ट दिये जाते हैं और कुछ स्थानों पर उनका एक्सपोजर विजिट भी कराया जाता है। गोरखपुर जिले में 11 इकाइयां, देवरिया जिले में पांच इकाइयां, कुशीनगर जिले में चार इकाइयां और महराजगंज जिले में सात इकाइयां यह सर्टिफिकेशन हासिल कर चुकी हैं।

    तैयार हुईं इकाइयां

    जिला इकाइयों की संख्या
    देवरिया 75
    गोरखपुर 217
    कुशीनगर 94
    महराजगंज 80

    इन इकाइयों को मिल चुका है पुरस्कार

    गोरखपुर में जिला अस्पताल, जिला महिला अस्पताल, भटहट सीएचसी, डेरवा पीएचसी, बसंतपुर अर्बन पीएचसी, गोरखनाथ अर्बन पीएचसी, आयुष्मान आरोग्य मंदिर जैनपुर, राजधानी, राघोपट्टी,कालेसरऔर लहसड़ी का सर्टिफिकेशन हो चुका है। इनमें जिला महिला अस्पताल को लक्ष्य और मुस्कान, जबकि भटहट सीएचसी को लक्ष्य का सर्टिफिकेशन भी प्राप्त हुआ है। देवरिया जिले में सीएचसी लार को लक्ष्य और एनक्वास, पीएचसी भागलपुर को एनक्वास और आयुष्मान आरोग्य मंदिर बंझरिया, लवकनी और बरियारपुर को एनक्वास का सर्टिफिकेट मिला है। कुशीनगर जिले में अर्बन पीएचसी गायत्रीनगर और आयुष्मान आरोग्य मंदिर डांडोपुर, बलकुड़िया और चकदेइया को यह सर्टिफिकेट प्राप्त हुआ है। महराजगंज जिले में जिला संयुक्त अस्पताल को एनक्वास, लक्ष्य और मुस्कान का सर्टिफिकेशन मिल चुका है। सीएचसी फरेंदा को एनक्वास और लक्ष्य का सर्टिफिकेशन मिला है। सीएचसी परतावल को सिर्फ लक्ष्य का सर्टिफिकेशन मिला है । वहीं आयुष्मान आरोग्य मंदिर पिपरा रसूलपुर, गिरगिटिया, चिउटहा, सिंदुरिया और बौलियाराजा को भी एनक्वास सर्टिफिकेट प्राप्त हो चुका है।

    https://youtu.be/TfMTAK9Yg68?si=ASkKeSoe3GWe74my

  • प्रति लाख की आबादी पर 2000 लोगों की टीबी जांच करें

    प्रति लाख की आबादी पर 2000 लोगों की टीबी जांच करें

    प्रति लाख की आबादी पर 2000 लोगों की टीबी जांच करें, हाई रिस्क जनसंख्या पर रहे जोर,

    जिला स्वास्थ्य समिति की बैठक में राष्ट्रीय टीबी उन्मूलन कार्यक्रम पर हुई विस्तार से चर्चा

    एड्स दिवस पर पोस्टर बनाने वाले विद्यार्थी भी हुए सम्मानित

    गोरखपुर, 28 दिसम्बर 2024,

    जिला स्वास्थ्य समिति की बैठक मुख्य विकास अधिकारी संजय कुमार मीना की अध्यक्षता में विकास भवन सभागार में शुक्रवार की शाम सम्पन्न हुई । इस मौके राष्ट्रीय क्षय उन्मूलन कार्यक्रम पर विस्तार से चर्चा हुई और निर्देश दिया गया कि जिले में प्रति एक लाख की आबादी पर कम से कम 2000 संभावित मरीजों की टीबी जांच अवश्य कराएं। यह लक्ष्य पूरा करने के लिए हाई रिस्क जनसंख्या जैसे बुजुर्गों, मधुमेह मरीजों, एचआईवी मरीजों, पूर्व के टीबी मरीजों और अति कुपोषित लोगों की टीबी जांच अवश्य कराई जाए । साथ ही ओपीडी में आने वाले मरीजों में से टीबी के दस फीसदी संभावित मरीजों की जांच अवश्य हो। बैठक के दौरान, एड्स दिवस पर पोस्टर बना कर जनजागरूकता का संदेश देने वाले विद्यार्थियों को सम्मानित भी किया गया।

    मुख्य विकास अधिकारी ने बिना सूचना बैठक से अनुपस्थित रहने वाले अधिकारियों के प्रति नाराजगी जताई और उनसे स्पष्टीकरण मांगने का निर्देश दिया । मुख्य विकास अधिकारी ने कहा कि स्वास्थ्य कार्यक्रमों का संचालन पूरी गंभीरता से किया जाना चाहिए । ब्लॉक स्तर पर भी नियमित कार्यक्रमों की समीक्षा की जाए। जिन कार्यक्रमों के सूचकांकों में कोई सुधार नहीं दिख रहा है, वहां जवाबदेही तय कर संदेशात्मक कार्रवाई हो। उन्होंने जननी सुरक्षा योजना, नियमित टीकाकरण कार्यक्रम, जिला क्वालिटी एश्योरेंस कार्यक्रम और बाल स्वास्थ्य कार्यक्रम की विस्तार से समीक्षा की । साथ ही जिले में शासन की मंशा के अनुरूप टीबी जांच दर को बढ़ाने पर विशेष ध्यान देने के लिए कहा ।

    मुख्य चिकित्सा अधिकारी डॉ आशुतोष कुमार दूबे ने बताया कि देश को वर्ष 2025 तक टीबी मुक्त करने के लक्ष्य का आशय इसके मृत्यु दर को न्यूतनम करना है और रोग की दर को भी अस्सी फीसदी से नीचे रखना है। यह तभी संभव है जबकि ज्यादा से ज्यादा नये मरीज खोजे जाएं और उनका समय से इलाज हो। आशा, आंगनबाड़ी, एएनएम और सीएचओ के सम्मिलित प्रयासों से नये टीबी मरीज खोजे जा सकते हैं। जिन लोगों को भी दो सप्ताह से अधिक की खांसी आ रही हो उनकी टीबी जांच जरूर कराई जाए। नजदीकी स्वास्थ्य केंद्र पर बलगम के जरिये जांच की सुविधा उपलब्ध है। इस बारे में फ्रंटलाइन कार्यकर्ताओं का निरंतर संवेदीकरण किया जाए। मोबाइल मेडिकल वैन के माध्यम से दूरस्थ क्षेत्रों में टीबी की जांच कराई जाए।

    इस अवसर पर जिला अस्पताल के अधीक्षक डॉ बीके सुमन, एसीएमओ डॉ एके चौधरी, डॉ नंदलाल कुशवाहा, डॉ गणेश यादव, डीएमओ अंगद सिंह, डिप्टी डीएचईआईओ सुनीता पटेल, डीपीएम पंकज आनंद, डीडीएम पवन गुप्ता, डैम पवन कुमार, क्वालिटी एश्योरेंस प्रभारी विजय श्रीवास्तव, डीईआईसी मैनेजर डॉ अर्चना समेत जिले भर के अधिकारीगण मौजूद रहे। विश्व स्वास्थ्य संगठन, यूनिसेफ, डब्ल्यूएचओ, यूएनडीपी और सीफार के प्रतिनिधिगण ने भी बैठक के दौरान फीडबैक प्रस्तुत किये।

    इन विद्यार्थियों को मिला सम्मान,

    एचआईवी एड्स के प्रति जनजागरूकता में योगदान देने के लिए डीएवी डिग्री कॉलेज की छात्रा नीतू सिंह, दृष्टि गुप्ता और आदित्य श्रीवास्तव को सीडीओ ने प्रशस्ति पत्र देकर सम्मानित किया। कॉलेज के प्रोफेसर डॉ मनोज कुमार श्रीवास्तव ने बच्चों के योगदान के बारे में जानकारी दी। मुख्य चिकित्सा अधिकारी डॉ दूबे ने एडी गर्ल्स इंटर कॉलेज की छात्रा फलक खान, शीतल भारती, पल्लवी और पूजा शाही को प्रशस्ति पत्र देकर सम्मानित किया। इस मौके पर शिक्षिका बिंदु पांडेय, डिप्टी डीटीओ डॉ विराट स्वरूप श्रीवास्तव, पीपीएम समन्वयक अभय नारायण मिश्रा, मिर्जा आफताब बेग और डीपीसी धर्मवीर प्रताप सिंह भी मौजूद रहे।

     

  • क्वालिटी पर खरी नहीं उतरीं 111 दवाएं

    क्वालिटी पर खरी नहीं उतरीं 111 दवाएं

    क्वालिटी पर खरी नहीं उतरीं 111 दवाएं, इनमें से 70 के सैंपल फेल; दो तो नकली ही निकली,

    देश भर में मानक से कम गुणवत्ता वाली दवाओं के खिलाफ जारी अभियान के तहत नवंबर में 111 दवाओं की गुणवत्ता कम पाई गई। इसके अलावा जांच में दो दवाएं नकली पाई गई। नकली दवाओं के सैंपल में एक गाजियाबाद और दूसरा बिहार से मिला है।

  • फ्रैक्चर था बाएं पैर में ऑपरेशन कर दिया दाएं का

    फ्रैक्चर था बाएं पैर में ऑपरेशन कर दिया दाएं का

    यूपी के सुल्तानपुर में एक हड्डी रोग विशेषज्ञ की बड़ी लापरवाही सामने आई है. डॉक्टर पर आरोप है कि उन्होंने एक वृद्ध महिला के टूटे पैर का ऑपरेशन करने के बजाय दूसरे पैर का ऑपरेशन कर दिया. ऑपरेशन रूम से जब महिला बाहर निकली तो उसे देखकर परिजनों के होश उड़ गए. जिसके बाद डॉक्टर ने दूसरे टूटे हुए पैर का ऑपरेशन किया. मामला उजागर होने के बाद अस्पताल प्रशासन इसमें अलग ही सफाई दे रहा है.

    वहीं, डॉक्टर के इस कारनामे की खबर जंगल में आग की तरह फैल गई. ऑपरेशन करने वाले डॉक्टर पी.के पांडेय मौके से गायब हो गए. फिलहाल अस्पताल प्रशासन अब इस मामले में अपनी कुछ अलग ही सफाई दे रहा है. अस्पताल संचालक डॉ आशुतोष श्रीवास्तव की माने तो मरीज के बाएं पैर की कटोरी टूटी हुई थी, जिसका ऑपरेशन किया गया जबकि दाहिने पैर में सूजन थी और खून जमा हुआ था, उसे निकाला गया है. गलत ऑपरेशन की बात फर्जी है.

  • ललित नारायण मिश्र रेलवे चिकित्सालय पर गंभीर मरीजों को भर्ती करने का आरोप, रेलवे कर्मी की पत्नी ने की शिकायत

    ललित नारायण मिश्र रेलवे चिकित्सालय पर गंभीर मरीजों को भर्ती करने का आरोप, रेलवे कर्मी की पत्नी ने की शिकायत,

    गोरखपुर। ललित नारायण मिश्र रेलवे चिकित्सालय पर गंभीर मरीजों को रेफर करने की बजाय भर्ती कर इलाज करने का आरोप लगाया गया है। इस मुद्दे को लेकर रेलवे कर्मी की पत्नी शशि सिंह ने सांसद रवि किशन, केंद्रीय राज्य मंत्री कमलेश पासवान और पूर्वोत्तर रेलवे के जीएम से शिकायत की है।

    शशि सिंह ने बताया कि उनके पति अजय कुमार सिंह, जो रेल दावा अधिकरण गोरखपुर में कोर्ट मास्टर के पद पर कार्यरत हैं, करीब 13 माह से मुख कैंसर से पीड़ित हैं। इलाज गाजियाबाद के एक निजी अस्पताल में चल रहा है, जहां चार कीमोथेरेपी और 33 रेडियोथेरेपी की जा चुकी हैं। रेलवे अस्पताल ने ही उनके पति को इलाज के लिए गाजियाबाद रेफर किया था।

    शशि सिंह ने आरोप लगाया कि अब ललित नारायण मिश्र अस्पताल के चिकित्सक गंभीर मरीजों को रेफर करने की बजाय उन्हें भर्ती कर इलाज करने का दबाव बना रहे हैं, जो मरीज के स्वास्थ्य के लिए खतरनाक हो सकता है। उन्होंने संबंधित अधिकारियों से इस मामले में जांच की मांग की है।

     

     

  • सीएमओ की पहल से जिले में शुरू हुआ ‘‘हर सुबह गुणवत्ता के नाम’’ नवाचार

    सीएमओ की पहल से जिले में शुरू हुआ ‘‘हर सुबह गुणवत्ता के नाम’’ नवाचार

    नवाचार : गोरखपुर की हर सुबह होगी स्वास्थ्य सेवाओं में गुणवत्ता के नाम

    सीएमओ की पहल से जिले में शुरू हुआ ‘‘हर सुबह गुणवत्ता के नाम’’ नवाचार

    स्वास्थ्य इकाई स्तर से लेकर जिला स्तर तक प्रतिदिन पंद्रह मिनट क्वालिटी चेकलिस्ट पर होगा काम

    गोरखपुर, 24 दिसम्बर 2024,

    भारत सरकार और प्रदेश सरकार का प्रयास है कि वर्ष 2026 के अंत तक सभी स्वास्थ्य इकाइयों का नेशनल क्वालिटी एश्योरेंस सर्टिफिकेशन (एनक्वास) हो जाए। जिले में सरकार का यह लक्ष्य पूरा करने के लिए सीएमओ डॉ आशुतोष कुमार दूबे की पहल पर ‘‘हर सुबह गुणवत्ता के नाम’’ नवाचार शुरू किया गया है। इस नवाचार के जरिये स्वास्थ्य इकाई से लेकर जिला स्तर तक की सभी इकाइयों पर प्रतिदिन पंद्रह मिनट क्वालिटी चेकलिस्ट पर कार्य करने को कहा गया है।

    मुख्य चिकित्सा अधिकारी डॉ आशुतोष कुमार दूबे ने बताया कि मंडलीय क्वालिटी एश्योरेंस कंसल्टेंट डॉ जसवंत कुमार मल्ल के सहयोग से यह पहल गोरखपुर जिले में हुई है । सभी ब्लॉकों से कहा गया है कि मरीजों व लाभार्थियों को गुणवत्तापूर्ण सुरक्षित चिकित्सकीय उपचार देना सुनिश्चित करें, क्योंकि यह उनका अधिकार है। उन्हें गुणवत्तायुक्त चिकित्सकीय सेवा पाने का भी अधिकार है। साथ ही सभी मरीजों व लाभार्थियों को गुणवत्तापूर्ण तरीके से आईईसी, वेलनेस एक्टिविटी, वीएचएनडी, छाया वीएचएसएनडी, एचबीएनसी आदि सेवाएं और चिकित्सकीय कार्यक्रमों की जानकारी और लाभ मिलना चाहिए। साथ ही प्रत्येक स्वास्थ्यकर्मी को संक्रमण मुक्त गुणवत्तायुक्त सुरक्षित वातावरण में कार्य करने का अधिकार है। यह तभी संभव है, जबकि शत प्रतिशत स्वास्थ्य इकाइयों का एनक्वास करा लिया जाए। इसके लिए प्रतिदिन प्रयास करना होगा ।

    सीएमओ डॉ दूबे ने बताया कि प्रमुख सचिव स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण पार्थ सारथी सेन शर्मा के स्तर से क्वालिटी कार्यक्रम को सुदृढ़ बना कर एनक्वास सर्टिफिकेशन के लक्ष्य को पूरा करने का निर्देश मिला है। उनके निर्देशों के क्रम में ही ‘‘हर सुबह गुणवत्ता के नाम’’ पहल की गई है।

    मंडलीय क्वालिटी एश्योरेंस कंसल्टेंट डॉ जसवंत कुमार मल्ल का कहना है कि इस नवाचार के जरिये चार माह में एनक्वास कराना संभव है। इसके तहत रोज अपने कार्यों की मॉनीटरिंग कर कमियों को डायरी में लिखना है और कार्ययोजना बना कर संबंधित अधिकारी और कर्मचारी से चर्चा करनी है। नियमित मॉनीटरिंग, चर्चा और गैप को दूर करके प्रत्येक सेवा को क्वालिटी के मानकों तक लाया जा सकता है। इसके लिए टीम भावना के साथ कार्य करना होगा। इस नवाचार में जिला स्तर पर डीपीएम व डीसीपीएम, ब्लॉक स्तर पर बीपीएम व बीसीपीएम और चिकित्सा इकाई स्तर पर विभागीय नोडल व सीएचओ की जिम्मेदारी तय की गई है ।

    ऐसे हो रहा है काम,

    जिला क्वालिटी एश्योरेंस प्रोग्राम के गोरखपुर प्रभारी विजय कुमार श्रीवास्तव ने बताया कि सीएमओ से प्राप्त दिशा निर्देशों के अनुसार डीपीएम और डीसीपीएम को प्रतिदिन दो ब्लॉक का अनुश्रवण कर संबंधित अधिकारी और क्वालिटी कंसल्टेंट से चर्चा करनी है। ब्लॉक स्तर पर बीपीएम किसी भी एक चिकित्सा इकाई और बीसीपीएम दो सीएचओ के कार्यों का अनुश्रवण कर गैप्स दूर कराएंगे। चिकित्सा इकाई स्तर पर विभागीय नोडल और सीएचओ को कम से कम 20 चेकप्वाइंट पर काम करना है। उन्हें आउटकम इंडीकेटर या केआईपी डेटा भी एचएमआईएस से पूरा करना है । साथ ही गैप्स के बारे में संबंधित अधिकारियों और क्वालिटी कंसल्टेंट से चर्चा भी करनी है।

  • सांसद रवि किशन ने बच्चों से किया स्वास्थ्य संवाद, टीबी उपचाराधीन बच्चों को दी पोषण पोटली

    सांसद रवि किशन ने बच्चों से किया स्वास्थ्य संवाद, टीबी उपचाराधीन बच्चों को दी पोषण पोटली

    सांसद रवि किशन ने बच्चों से किया स्वास्थ्य संवाद, टीबी उपचाराधीन बच्चों को दी पोषण पोटली,

    राष्ट्रीय टीबी उन्मूलन कार्यक्रम के ब्रांड अम्बेस्डर के तौर पर उपचाराधीन बच्चों का मनोबल भी बढ़ाया

    चरगांवा में हुए बाल स्वास्थ्य मेले में मनोरंजक कार्यक्रमों के बीच बच्चों को मिला सेहत का वरदान

    गोरखपुर, 23 दिसम्बर 2024,

    चरगांवा के जनता इंटर कॉलेज में सोमवार को लगे बाल स्वास्थ्य मेले में बच्चों को मनोरंजक कार्यक्रमों के बीच सेहत का वरदान मिला । मेले का शुभारंभ सदर सांसद और फिल्म स्टार रवि किशन शुक्ल ने किया । उन्होंने मेले में आए बच्चों के साथ स्वास्थ्य संवाद किया और उन्हें सेहतमंद बने रहने की टिप्स दी । राष्ट्रीय टीबी उन्मूलन कार्यक्रम के ब्रांड अम्बेस्डर के तौर पर उन्होंने टीबी उपचाराधीन पांच बच्चों का मनोबल बढ़ाया और इन सभी बच्चों को स्वयंसेवी संस्था सेफ सोसाइटी की तरफ से पोषण पोटली दी। संस्था ने इन बच्चों को इसी वर्ष अक्टूबर माह में गोद लिया है ।

    सदर सांसद ने इस मौके पर कहा कि देश के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने वर्ष दो हजार पच्चीस में ही भारत को टीबी से मुक्त करवाने का संकल्प लिया है । इस मुहिम में निक्षय मित्रों की अहम भूमिका है। निक्षय मित्र टीबी मरीजों को गोद लेकर उन्हें पोषण सामग्री के साथ साथ यथासंभव हर प्रकार की मदद करते हैं। इससे मरीजों के ठीक होने में की राह और आसान हो जाती है । साथ ही समाज से मरीजों के प्रति भेदभाव समाप्त होता है। इस दिशा में संस्था द्वारा निक्षय मित्र बनने का प्रयास सराहनीय है।
    सांसद ने बच्चों से कहा कि उन्हें पढ़ाई लिखाई के साथ साथ स्वच्छता और व्यायाम का विशेष ध्यान रखना चाहिए। उन्होंने अपना उदाहरण देते हुए कहा कि नियमित व्यायाम के जरिये उनके जैसा ही फिट रह सकते हैं।

    उन्होंने मेले में लगे स्टॉल्स का निरीक्षण किया और बच्चों के सांस्कृतिक कार्यक्रम भी देखे। श्री शुक्ल ने खुद भी बच्चों के लिए प्रस्तुतियां दीं और उनके बीच जाकर संवाद किया। दर्जा प्राप्त राज्य मंत्री पुष्प दंत जैन, राष्ट्रीय महिला आयोग की उपाध्यक्ष चारू चौधरी, भाजपा के महानगर उपाध्यक्ष बृजेश मणि मिश्र, जिला क्षय उन्मूलन अधिकारी डॉ गणेश यादव, एसपी ट्रैफिक संजय कुमार और अन्तर्राष्ट्रीय गायक मनोज मिहिर ने भी बच्चों को संबोधित किया और उनका मनोबल बढ़ाया।

    इस मौके पर सेफ सोसाइटी संस्था के निदेशक विश्व वैभव शर्मा ने कहा कि संस्था के स्थापना दिवस पर टीबी उपचाराधीन बच्चों को गोद लिया गया था। स्वस्थ बचपन के संकल्प के साथ कार्य कर रही संस्था ने देसाई फाउंडेशन के सहयोग से इस मेले का आयोजन करवाया ताकि बच्चों को स्वास्थ्य लाभ और सेहतमंद रहने का ज्ञान मिल सके । बच्चों को टीबी बीमारी के बारे में जागरूक करने और इसके प्रति भेदभाव की भावना को समाप्त करने के लिए ही गोद लिये गये बच्चों को सभी के बीच पोषण पोटली दिलवाई गई।

    इस मौके पर संस्था के वरिष्ठ कार्यकारी शैलेंद्र चतुर्वेदी, सोनिका खरवार, बृजेश चतुर्वेदी, वरिष्ठ उपचार पर्यवेक्षक मनीष तिवारी, जिला मलेरिया विभाग के प्रतिनिधियों समेत संस्था के कई पदाधिकारी और देसाई फाउंडेशन के प्रतिनिधिगण मौजूद रहे।

    स्वास्थ्य जांच के साथ जनजागरूकता,

    बाल स्वास्थ्य मेले में बच्चों को नेत्र जांच, दंत जांच, रक्त जांच और अन्य मौसमी बीमारियों के जांच की सुविधा दी गई । साथ ही उन्हें टीबी बीमारी के बारे में भी जागरूक किया गया। इस मौके पर मिशन शक्ति, दस अट्ठानबे, दस नब्बे, सेफ अंत्योदय, सेफ सोसाइटी और चरगांवा पीएचसी का स्टॉल लगाया गया। पीएचसी के स्टॉल के माध्यम से भी दवाइयां वितरित की गईं। स्टॉल पर प्रभारी चिकित्सा अधिकारी डॉ धनंजय कुशवाहा, चिकित्सा अधिकारी डॉ राजेश वैश्य और स्वास्थ्य शिक्षा एवं सूचना अधिकारी मनोज कुमार समेत उनकी टीम ने बच्चों के बीच स्वास्थ्य सेवाएं दीं।

     

  • शिविर में 300 मरीजों को हुई जांच

    शिविर में 300 मरीजों को हुई जांच

    संवाददाता– एस.पी. सिंह

    गोरखपुर/सहजनवा ।

    रविवार को हियुवा कैम्प कार्यालय पर नेत्र जांच शिविर लगाया गया । जिसमें गोरक्षनाथ मेडिकल कालेज रिसर्च सेंटर व चिकित्सालय के डा कर्नल हिमांशु दीक्षित, शशांक कुमार श्रीवास्तव,डा पवन कुमार पांडेय, डा देवेन्द्र द्विवेदी, डा जेके मिश्र ने 300 मरीजों के आखों की जांच कर दवा दी । साथ कुछ मरीजों को मोतियाबिंद की शिकायत पर आपरेशन की सलाह देकर चिन्हित किया गया । शिविर में विधायक प्रदीप कुमार शुक्ल, पूर्व दर्जा प्राप्त मंत्री अश्वनी त्रिपाठी, उदयभान सिंह, प्रेमपाल गुप्ता, ज्ञानेन्द्र मिश्र, ध्रुव गौङ, मयंक त्रिपाठी समेत अन्य मौजूद रहे ।

  • मिलेगा सेहत का वरदान, मेले में स्वास्थ्य जांच के साथ पाएंगे बीमारियों से बचाव का ज्ञान

    मिलेगा सेहत का वरदान, मेले में स्वास्थ्य जांच के साथ पाएंगे बीमारियों से बचाव का ज्ञान

    चरगांवा के जनता इंटर कॉलेज में सोमवार को लगेगा बाल स्वास्थ्य मेला

    गोरखपुर चरगांवा के जनता इंटर कॉलेज में तेईस दिसम्बर यानि सोमवार को बाल स्वास्थ्य मेले का आयोजन किया जाएगा । इसमें बच्चों के स्वास्थ्य की जांच के साथ साथ उन्हें विभिन्न बीमारियों से बचाव के उपायों की जानकारी दी जाएगी । जिले के कई जनप्रतिनिधि, गणमान्य लोग, स्वास्थ्य विभाग के आला अधिकारी और समाजसेवी संगठनों के लोग भी इस आयोजन का हिस्सा बनेंगे।

    बाल स्वास्थ्य मेले में छात्र छात्राओं समेत करीब एक हजार बच्चे प्रतिभाग करेंगे। आयोजक संस्था सेफ सोसाइटी के निदेशक विश्व वैभव शर्मा ने बताया कि मेला सुबह दस बजे से शाम साढ़े तीन बजे तक चलेगा। इसमें कुशल चिकित्सकों द्वारा बच्चों के खून की जांच, दांतों की जांच, आंखों की जांच, वजन, लम्बाई आदि की जांच कर मौके पर ही दवा भी दी जाएगी। साथ ही संचारी रोगों की पहचान और कुपोषण के बारे में बच्चों और उनके अभिभावकों को जागरूक किया जाएगा।

    संस्था के वरिष्ठ कार्यकारी शैलेंद्र चतुर्वेदी ने बताया कि इस मौके पर पहेली और मनोरंजन के माध्यम से खेलकूद व नियमित योगाभ्यास का महत्व बताया जाएगा। बाल सुरक्षा और संरक्षण संबंधी इकाइयां भी इसमें हिस्सा लेंगी। सदर सांसद रवि किशन शुक्ला, पिपराईच विधायक महेंद्र पाल सिंह, सहजनवां विधायक प्रदीप शुक्ला, राज्य महिला आयोग की उपाध्यक्ष चारु चौधरी और दर्जा प्राप्त राज्य मंत्री पुष्पदंत जैन की मौजूदगी में मेले का शुभारंभ किया जाएगा।