Category: हेल्थ

  • उत्तर प्रदेश ऑर्थोपेडिक्स एसोसिएशन द्वारा “ऑर्थोएज 2025” सम्मेलन का आयोजन

    उत्तर प्रदेश ऑर्थोपेडिक्स एसोसिएशन द्वारा “ऑर्थोएज 2025” सम्मेलन का आयोजन

    उत्तर प्रदेश ऑर्थोपेडिक्स एसोसिएशन द्वारा “ऑर्थोएज 2025” सम्मेलन का सफलतापूर्वक आयोजन 13-14 सितंबर, 2025 को कोर्टयार्ड मैरियट होटल, गोरखपुर में किया गया। इस सम्मेलन में भारत के विभिन्न हिस्सों से लगभग 450 डॉक्टरों ने भाग लिया, जो 12 राज्यों से आए थे। सम्मेलन का मुख्य केन्द्रबिंदु हिप आर्थ्रोप्लास्टी और जटिल आघात प्रबंधन पर था, और इसमें ऑर्थोपेडिक्स के क्षेत्र के कई प्रमुख विशेषज्ञों ने अपने अनुभव और ज्ञान साझा किया।

    सम्मेलन के प्रमुख वक्ताओं में डॉ. ए. एस. प्रसाद, डॉ. प्रोफेसर अजय भारती, डॉ. एस. एस. मोहंती, संजय श्रीवास्तव जैसे प्रतिष्ठित ऑर्थोपेडिक विशेषज्ञ शामिल थे। इन डॉक्टरों ने ऑर्थोपेडिक्स में नवीनतम प्रगति , सर्जरी के नए दृष्टिकोण और जटिल उपचार पद्धतियों पर चर्चा की।

    डॉ. कुमार केशव, जो हिप रिप्लेसमेंट में एक अग्रणी विशेषज्ञ हैं, ने डायरेक्ट एंटीयर एप्रोच (DAA) पर एक महत्वपूर्ण व्याख्यान दिया। इस विधि के लाभों में न्यूनतम चोट, त्वरित रिकवरी, और बेहतर सर्जिकल परिणाम शामिल हैं। उनके द्वारा दी गई जानकारी ने सम्मेलन में उपस्थित चिकित्सकों को हिप रिप्लेसमेंट के क्षेत्र में एक नया दृष्टिकोण प्रदान किया।

    इसके अलावा, आल इंडिया इंस्टीट्यूट ऑफ मेडिकल साइंसेज (AIIMS), गोरखपुर के डॉ. प्रोफेसर अजय भारती ने “ऑर्थोपेडिक्स में कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI) और इसके उपयोग” पर एक बेहद रुचिकर और जानकारीपूर्ण व्याख्यान दिया। उन्होंने बताया कि कैसे कृत्रिम बुद्धिमत्ता ऑर्थोपेडिक उपचार में सटीकता और प्रभावशीलता को बढ़ा सकती है, विशेषकर हिप आर्थ्रोप्लास्टी और आघात प्रबंधन में।

    सम्मेलन के दौरान डॉ. ज्ञानेंद्र (ऑर्थोपेडिक्स विभाग, AIIMS गोरखपुर) को पीजी गोल्ड मेडल सत्र में सर्वश्रेष्ठ पेपर प्रस्तुति के लिए स्वर्ण पदक से नवाजा गया, जो उनके उच्च गुणवत्ता वाले शोध को मान्यता प्रदान करने का एक प्रमाण था।

    उत्तर प्रदेश ऑर्थोपेडिक्स एसोसिएशन ने इस सम्मेलन के आयोजन से यह साबित कर दिया कि गोरखपुर ऑर्थोपेडिक्स के क्षेत्र में एक प्रमुख चिकित्सा केंद्र के रूप में उभर रहा है। आयोजकों ने इस सफलता के लिए सभी उपस्थित चिकित्सकों और विशेषज्ञों का आभार व्यक्त किया और भविष्य में इस प्रकार के और भी बड़े आयोजनों के आयोजन की योजना बनाई है।

  • एम्स गोरखपुर में मेडिकल एवं क्लीनिकल उपयोग में आर्टिफ़िशियल इंटेलिजेंस विषय पर राष्ट्रीय कार्यशाला सम्पन्न

    एम्स गोरखपुर में मेडिकल एवं क्लीनिकल उपयोग में आर्टिफ़िशियल इंटेलिजेंस विषय पर राष्ट्रीय कार्यशाला सम्पन्न

    एम्स गोरखपुर के मल्टीडिसिप्लिनरी रिसर्च यूनिट (एमआरयू) द्वारा 14 सितम्बर 2025 को “मेडिकल एवं क्लीनिकल उपयोग में आर्टिफ़िशियल इंटेलिजेंस” विषय पर एक दिवसीय राष्ट्रीय कार्यशाला का आयोजन बहुउद्देश्यीय हॉल, ऑडिटोरियम में किया गया। इस महत्वपूर्ण शैक्षणिक पहल की नींव एम्स गोरखपुर की कार्यकारी निदेशक एवं मुख्य कार्यकारी अधिकारी मेजर जनरल (डॉ.) विभा दत्ता द्वारा रखी गई।

    इस कार्यशाला का मुख्य उद्देश्य चिकित्सा शिक्षा, रोग-निदान, रोगी-देखभाल तथा अनुसंधान में आर्टिफ़िशियल इंटेलिजेंस (एआई) की भूमिका और संभावनाओं पर प्रकाश डालना था, ताकि स्वास्थ्य सेवाओं में उभरती हुई तकनीकों का बेहतर उपयोग सुनिश्चित किया जा सके।

    कार्यशाला में देश के प्रमुख संस्थानों से आए विशेषज्ञ वक्ताओं ने भाग लिया, जिनमें डॉ. पार्था हलदार (एम्स नई दिल्ली), डॉ. अमित मेहंदीरत्ता (आईआईटी दिल्ली), डॉ. तवप्रीतेश सेठी (आईआईआईटी दिल्ली), डॉ. देवासेनाथिपति के (एम्स नई दिल्ली), डॉ. प्रियंका बगाड़े (आईआईटी कानपुर), डॉ. तनु आनंद (स्वास्थ्य अनुसंधान विभाग), डॉ. राम शंकर रथ तथा डॉ. मोहन राज (एम्स गोरखपुर) शामिल थे।

    दिनभर चले तकनीकी सत्रों में एआई की बुनियादी अवधारणाओं, चिकित्सा इमेजिंग, हॉस्पिटल रिसोर्स मैनेजमेंट, एथिकल गवर्नेंस तथा एआई-आधारित शोध प्रोटोकॉल डिजाइन जैसे महत्वपूर्ण विषयों पर विस्तार से चर्चा हुई। दोपहर बाद आयोजित पैनल चर्चा “AI in Health Care Service and Research: Opportunities, Challenges, and Ethical Concerns” में विशेषज्ञ पैनलिस्टों ने चिकित्सा क्षेत्र में एआई के अवसरों तथा चुनौतियों पर अपने विचार साझा किए।

    इस कार्यशाला का सफल आयोजन एमआरयू टीम के सहयोग से हुआ, जिसमें विशेष योगदान डॉ. आनंद मोहन दीक्षित (नोडल अधिकारी, एमआरयू), डॉ. चारुशीला रुकड़िकर (सह-नोडल अधिकारी, एमआरयू) तथा कार्यकारी सदस्य डॉ. सौरभ केडिया, डॉ. अतुल आर. रुकड़िकर और डॉ. मोहन राज पी.एस. का रहा।

    यह आयोजन चिकित्सा शिक्षा और अनुसंधान में अत्याधुनिक तकनीक को समाहित करने की दिशा में एम्स गोरखपुर की एक ऐतिहासिक पहल साबित हुआ।

  • खबर का असर स्वास्थ्य विभाग ने प्राइवेट अस्पतालों का किया जांच

    खबर का असर स्वास्थ्य विभाग ने प्राइवेट अस्पतालों का किया जांच

    गोरखपुर ब्रेकिंग। खोराबार में प्राइवेट अस्पतालों पर कई डॉक्टरों के नाम चस्पा के बावजूद डॉक्टर नहीं रहते थे मौजूद।

    अस्पताल मानक के विपरीत संचालित होने की चली थी खबर।

    जग उठा स्वास्थ्य विभाग प्राइवेट अस्पतालों को दिया अल्टीमेटम।

    प्राइवेट अस्पतालों का मामला संज्ञान में आया था जांच की गई है जो कमी मिली है उसके लिए अस्पताल संचालकों को स्वास्थ्य विभाग ने अल्टीमेटम दिया है।

  • एम्स में प्रो. (डॉ.) मनोज कुमार सिंह का विशेष व्याख्यान विषयों के एकीकरण और मानवीय मूल्यों पर जोर

    एम्स में प्रो. (डॉ.) मनोज कुमार सिंह का विशेष व्याख्यान विषयों के एकीकरण और मानवीय मूल्यों पर जोर

    गोरखपुर, 6 सितम्बर 2025: आज एम्स गोरखपुर के सभागार में एक विशेष शैक्षणिक सत्र आयोजित किया गया, जिसमें प्रो. (डॉ.) मनोज कुमार सिंह, पूर्व प्रोफेसर एवं विभागाध्यक्ष, पैथोलॉजी विभाग, एम्स नई दिल्ली ने एमबीबीएस छात्रों, नर्सिंग स्टाफ और संकाय सदस्यों को संबोधित किया।

    कार्यक्रम की शुरुआत एम्स गोरखपुर की कार्यकारी निदेशक एवं मुख्य कार्यकारी अधिकारी, मेजर जनरल (डॉ.) विभा दत्ता एस.एम. (सेवानिवृत्त) द्वारा प्रो. सिंह के परिचय और स्वागत से हुई। उन्होंने प्रो. सिंह के डर्माटोपैथोलॉजी के क्षेत्र में अग्रणी योगदान को रेखांकित किया। उन्होंने यह भी जोर दिया कि चिकित्सा विज्ञान जितना महत्त्वपूर्ण है, उतना ही महत्त्वपूर्ण है मानवता और सहानुभूति। डॉक्टरों और नर्सों को हमेशा मरीजों के साथ करुणा, सम्मान और संवेदनशीलता से व्यवहार करना चाहिए।

    प्रो. सिंह ने छात्रों को निरंतर जिज्ञासा, नवाचार और परिश्रम की भावना बनाए रखने के लिए प्रेरित किया और कहा कि यही दृष्टिकोण उन्हें उत्कृष्ट चिकित्सक और संवेदनशील इंसान बनाएगा। व्याख्यान के अंत में छात्रों ने उत्साहपूर्वक प्रश्नोत्तर सत्र में भाग लिया और इसे अत्यंत प्रेरणादायी व उपयोगी बताया।

    एम्स गोरखपुर प्रशासन ने प्रो. सिंह का आभार व्यक्त किया और कहा कि ऐसे अतिथि व्याख्यान छात्रों की शैक्षणिक यात्रा को और समृद्ध बनाते हैं तथा उन्हें बेहतर चिकित्सक और बेहतर इंसान बनने की दिशा में मार्गदर्शन देते हैं।

    अपने प्रेरणादायी व्याख्यान में प्रो. सिंह ने कहा कि एमबीबीएस पाठ्यक्रम के प्रत्येक विषय का महत्व है और छात्रों को पहले सेमेस्टर से लेकर इंटर्नशिप और आगे एमडी/एमएस तक हर विषय का गहन अध्ययन करना चाहिए। उन्होंने बताया कि यही ज्ञान भविष्य में मरीजों की रोज़मर्रा की देखभाल और उपचार का आधार बनता है।

  • रक्तदान महाअभियान का गोरखपुर के दुसरे दिन एम्म गोरखपुर में 42 यूनिट ब्लड एकत्रित किया गया

    रक्तदान महाअभियान का गोरखपुर के दुसरे दिन एम्म गोरखपुर में 42 यूनिट ब्लड एकत्रित किया गया

    “ब्रह्माकुमारीज की पूर्व मुख्य प्रशासिका राजयोगिनी दादी प्रकाशमणि जी की 18वीं पुण्यतिथि के उपलक्ष्य में रक्तदान अभियान का आयोजन”

    एम्स की ई०डी० डॉ विभा दत्ता, विधायक सहजनवां प्रदीप शुक्ला, पूर्व महापौर गोरखपुर, सत्या पाण्डेय डी०आई०जी०, अर.पी.एस.एफ, रजही सहायक कमाण्डेन्ट सुरेंद्र शर्मा ने दीप प्रज्जवलित कर रक्तदान अभियान का एम्स में किया शुभारंभ।

     ब्रह्माकुमारीज द्वारा भारत एवं नेपाल में रक्तदान अभियान का हो रहा आयोजन।

     ब्रह्माकुमारीज संस्थान के समाज सेवा प्रभाग के अन्तर्गत देशव्यापी रक्तदान अभियान में गोरखपुर में दूसरे दिन तक 136 यूनिट ब्लड एकत्रित हुए।

    गोरखपुर। ब्रह्माकुमारीज संस्थान की पूर्व मुख्य प्रशासिका राजयोगिनी दादी प्रकाशमणि जी की 18वीं पुण्यतिथि (25 अगस्त 2025), जिसे विश्व बंधुत्व दिवस के रूप में मनाया जाता है, के उपलक्ष्य में संस्थान द्वारा भारत एवं नेपाल में एक विशाल रक्तदान महाअभियान चलाया जा रहा है, जिसके क्रम में आज यहाँ गोरखपुर में दूसरे दिन, अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान, एम्स, गोरखपुर में रक्त दान शिविर का आयोजन किया गया।

    ब्रह्माकुमारी मोहद्दीपुर केन्द्र प्रभारी बी०के० पुष्पा, एम्स की ई०डी० डॉ विभा दत्ता, विधायक सहजनवां प्रदीप शुक्ला, पूर्व महापौर गोरखपुर, सत्या पाण्डेय डी०आई०जी०, अर.पी. एस.एफ, रजही सहायक कमाण्डेन्ट सुरेंद्र शर्मा ने एम्म में शिविर का शुभारंभ दादी प्रकाशमणि जी की तस्वीर पर माल्यार्पण कर एवं दीप प्रज्जवलित कर किया ।

    एम्स में चले रक्त दान अभियान में ब्रह्मामुमारीज संस्थान के भाई-बहनों ने रोडवेज से आये कर्मियों ने आर०पी०एस०एफ० के जवानों ने, एम्स के डाक्टरों एवं अन्य स्थानों से आये हुए लोगों ने उत्साहपूर्वक रक्तदान अभियान में हिस्सा लिया। ब्रह्माकुमारी संस्थान की समर्पित बहनों ने आज विशेष रूप से रक्तदान अभियान में हिस्सा लिया। बी० के० पारूल, बी०के०अंजू बी० के०अंकिता सहित कई बहनों ने आज रक्त दान किया। आज कार्यक्रम में बी०के० बहादुर, अनुज, अजीत, नारायण, सोनी बहन, सहित, एम्स के डाक्टर्स एवं नसें मौजूद रहे।

  • नई तकनीकी राफेलो द्वारा शाही ग्लोबल हॉस्पिटल में सर्जरी की कार्यशाला हुई

    नई तकनीकी राफेलो द्वारा शाही ग्लोबल हॉस्पिटल में सर्जरी की कार्यशाला हुई

    राफेलो मतलब रेडियो फ्रीक्वेंसी अबलेजन , रेडियो फ्रीक्वेंसी का उपयोग अभी तक दुश्मन के रडार तथा फाइटर जेट को गिराने का काम करता था। लेकिन युद्ध के मैदान से यह विधि चिकित्सा के क्षेत्र में प्रवेश करके तहलका मचाई हुई है . डेढ़ साल पहले यूरोपियन देश तथा यूके द्वारा इस विधि का उपयोग चिकित्सा क्षेत्र में विकसित करके किया गया था। धीरे धीरे यह नई एडवांस और सफल तकनीकी भारत वर्ष में आई और आज उत्तर प्रदेश में अपना कद्म रख दिया है। पूर्वांचल के सुप्रसिद्ध चिकित्सालय शाही ग्लोबल हॉस्पिटल जो हमेशा नई तकनीकी, नई विधाओं द्वारा आम जन मानस को लाभ दिलाने में मदद करता है में आज इस विधि द्वारा 10 ऑपरेशन किए गए. इस कार्यशाला में उत्तर प्रदेश एसोसिएशन ऑफ़ सर्जन ऑफ़ इंडिया गोरखपुर के वरिष्ठ चिकित्सकों ने बढ़ चढ़कर भाग लिया . मुख्य रूप से डॉ एके सिंह, डॉ जेपी जायसवाल (लाइफ केयर हॉस्पिटल के निदेशक) डॉक्टर आशीष खेतान (फातिमा हॉस्पिटल के सर्जन) डॉ॰ नीलम यादव (प्लास्टिक सर्जन समीक्षा हेयर ट्रांसप्लांट , कॉस्मेटिक एंड इनफर्टिलिटी सेन्टर)
    के साथ शहर के सम्भ्रांत विशिष्ट तथा अति विशिष्ट चिकित्सक उपस्थित थे। रेडियो फ्रीक्वेंसी अवलेजन द्वारा बवासीर के साथ-साथ भकंदर, फिशुला, फिसर बेरिकोज़ बेन व अन्य ऑपरेशन अच्छी और सफलतापूर्वक किए जाते हैं। चिकित्सा के क्षेत्र में गोरखपुर के चिकित्सक एक अहम भूमिका निभाते हैं इसलिए यहाँ के चिकित्सक हमेशा नई नई विधाओं नई नई तकनीकों से अवगत रहते हैं और यहां के मरीजों का सस्ते से सस्ता और अच्छा से अच्छा इलाज करने में सफल रहते हैं।

    News Courtesy: डॉ शिव शंकर शाही, शाही ग्लोबल हॉस्पिटल, तारामंडल गोरखपुर.

  • एम्स गोरखपुर के एमबीबीएस छात्र डीएचआर–एसटीएस 2025 के लिए चयनित

    एम्स गोरखपुर के एमबीबीएस छात्र डीएचआर–एसटीएस 2025 के लिए चयनित

    “हर वर्ष छात्र हासिल कर रहे हैं सफलता, संस्थान में अनुसंधान संस्कृति को मिल रहा बढ़ावा”

    गोरखपुर। 16 अगस्त 2025; एआईआईएमएस गोरखपुर ने एक बार फिर गौरव हासिल किया है। संस्थान के चार एमबीबीएस छात्रों का चयन इस वर्ष डीएचआर (स्वास्थ्य अनुसंधान विभाग) की मानव संसाधन विकास योजना अंतर्गत प्रतिष्ठित “शॉर्ट-टर्म स्टूडेंटशिप (STS–2025)” में हुआ है। यह उपलब्धि संस्थान की उस निरंतर परंपरा को दर्शाती है जिसमें हर वर्ष एआईआईएमएस गोरखपुर के छात्र इस राष्ट्रीय स्तर की प्रतिस्पर्धात्मक योजना में चयनित होकर संस्थान का नाम रोशन करते हैं।

    इस वर्ष चयनित छात्र और उनके शोध विषय इस प्रकार हैं:
    1. सुश्री दिशा शर्मा (द्वितीय वर्ष, बैच 2023)
    – मार्गदर्शक: डॉ. तेजस पटेल, अतिरिक्त प्रोफेसर, फार्माकोलॉजी विभाग
    – विषय: भारत में स्व-चिकित्सा (Self-Medication) की व्यापकता और धारणा का सिस्टमैटिक रिव्यू व मेटा-विश्लेषण।

    2. श्री सक्षम रावत (द्वितीय वर्ष, बैच 2023)
    – मार्गदर्शक: डॉ. मौसुमी पाणिग्राही, सहायक प्रोफेसर, फार्माकोलॉजी विभाग
    – विषय: एसीएल रिकन्स्ट्रक्शन सर्जरी मरीजों में नींद की गुणवत्ता और दर्द उपचार के बीच संबंध का अध्ययन।

    3. सुश्री श्रुतिप्रज्ञा महापात्र (द्वितीय वर्ष, बैच 2023)
    – lमार्गदर्शक: डॉ. राम शंकर रथ, सह-प्रोफेसर, सामुदायिक एवं परिवार चिकित्सा विभाग
    – विषय: मातृ-शिशु जोड़ी में एनीमिया की व्यापकता एवं उसका पोषण और संक्रमण से संबंध।

    4. श्री अभिनव त्रिपाठी (प्रथम वर्ष, बैच 2024)
    – मार्गदर्शक: डॉ. अमर प्रीत कौर, सह-प्रोफेसर, बायोकैमिस्ट्री विभाग
    – विषय: सोरायसिस में सर्केडियन रिद्म जीन (BMAL1 और PER1) की अभिव्यक्ति का अध्ययन।

    इस अवसर पर मेजर जनरल (डॉ.) विभा दत्ता, कार्यकारी निदेशक, एआईआईएमएस गोरखपुर ने छात्रों एवं उनके मार्गदर्शकों को बधाई दी। उन्होंने कहा,“एसटीएस–2025 में चयन हमारे लिए गर्व का क्षण है। यह उपलब्धि दर्शाती है कि एआईआईएमएस गोरखपुर न केवल उत्कृष्ट चिकित्सा शिक्षा प्रदान कर रहा है, बल्कि अनुसंधान संस्कृति को भी प्रोत्साहित कर रहा है। हमारे छात्र हर वर्ष इस योजना में चयनित होते रहे हैं, जो संस्थान की गुणवत्ता और प्रतिबद्धता का प्रमाण है।”

    एआईआईएमएस गोरखपुर ने चयनित छात्रों और उनके मार्गदर्शकों को शुभकामनाएँ दीं और आशा व्यक्त की कि उनका शोध चिकित्सा विज्ञान और जनस्वास्थ्य को नई दिशा प्रदान करेगा।

  • एम्स गोरखपुर मे पाथ एवं उत्तर प्रदेश स्वास्थ्य निदेशालय के सहयोग से वेक्टर जनित रोग प्रबंधन कार्यशाला का सफल आयोजन

    एम्स गोरखपुर मे पाथ एवं उत्तर प्रदेश स्वास्थ्य निदेशालय के सहयोग से वेक्टर जनित रोग प्रबंधन कार्यशाला का सफल आयोजन

    गोरखपुर। जनस्वास्थ्य क्षमता को सुदृढ़ बनाने एवं वेक्टर जनित रोगों (Vector-Borne Diseases – VBDs) के प्रति क्षेत्रीय प्रतिक्रिया को बेहतर करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम उठाते हुए अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान (AIIMS) गोरखपुर ने PATH एवं उत्तर प्रदेश शासन के चिकित्सा एवं स्वास्थ्य निदेशालय के सहयोग से एक दिवसीय वेक्टर जनित रोग केस मैनेजमेंट कार्यशाला का सफल आयोजन किया।
    PATH (Programme for Appropriate Technologies in Health) एक अंतरराष्ट्रीय गैर-लाभकारी संगठन है, जो विज्ञान, तकनीक और साझेदारी के माध्यम से स्वास्थ्य सेवाओं को अधिक सुलभ, प्रभावी और न्यायसंगत बनाने के लिए कार्य करता है।

    कार्यशाला का उद्देश्य एवं दायरा :
    इस कार्यशाला का उद्देश्य चिकित्सकों, सामुदायिक स्वास्थ्य विशेषज्ञों एवं जनस्वास्थ्य पेशेवरों को मलेरिया, डेंगू, चिकनगुनिया, लिम्फैटिक फाइलेरिया एवं विसरल लीशमैनियासिस (काला आजार ) जैसे रोगों के निदान, प्रबंधन एवं रोकथाम में उन्नत ज्ञान और व्यावहारिक कौशल प्रदान करना था। प्रतिभागियों ने विशेषज्ञ व्याख्यान, इंटरैक्टिव केस डिस्कशन और कौशल-आधारित डेमोंस्ट्रेशन सत्रों में भाग लिया।

    कार्यशाला की मुख्य विशेषताएं :
    • साक्ष्य-आधारित प्रोटोकॉल: राष्ट्रीय दिशा-निर्देशों एवं डब्ल्यूएचओ-अनुरूप उपचार प्रोटोकॉल के साथ नवीनतम निगरानी रणनीतियों की समीक्षा।
    • व्यावहारिक प्रशिक्षण: निदान तकनीक, रोगी ट्रायेज मॉडल और प्रकोप प्रबंधन उपकरणों पर अभ्यास।
    • सहयोगात्मक दृष्टिकोण: जिला स्वास्थ्य प्राधिकरण, अग्रिम पंक्ति के स्वास्थ्यकर्मी (आशा, एएनएम) और एआईआईएमएस गोरखपुर की क्लीनिकल टीमों के बीच समन्वित प्रतिक्रिया पर जोर।
    • रणनीतिक योजना: रेफरल सिस्टम, जन-जागरूकता अभियानों एवं डाटा-आधारित निर्णय प्रक्रिया को मजबूत करने के ढांचे पर चर्चा।
    इस मौके पर
    • मेजर जनरल (डॉ.) विभा दत्ता, कार्यकारी निदेशक, एआईआईएमएस गोरखपुर ने कहा: “यह कार्यशाला जनस्वास्थ्य क्षमता निर्माण और सामुदायिक लचीलापन बढ़ाने के प्रति हमारे संस्थान की प्रतिबद्धता का उत्कृष्ट उदाहरण है। मैं सभी चिकित्सकों से आग्रह करती हूँ कि इन रोगों के उन्मूलन के लिए सक्रिय योगदान दें। एआईआईएमएस इस क्षेत्र में उत्कृष्टता के लिए प्रतिबद्ध है।”
    • डॉ. सत्यब्रत, एनटीडी निदेशक, पीएटीएच ने कहा: “स्थानीय चिकित्सकों एवं जनस्वास्थ्य कर्मियों को सशक्त बनाना, इस क्षेत्र में वेक्टर जनित रोगों के खतरे को नियंत्रित करने और कम करने के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण है।”
    • उत्तर प्रदेश चिकित्सा एवं स्वास्थ्य निदेशालय के प्रतिनिधि ने कहा: “हम ऐसे साझेदारी प्रयासों के लिए प्रतिबद्ध हैं जो हमारी अग्रिम पंक्ति की स्वास्थ्य संरचना को मजबूत बनाते हैं।”
    • डॉ. अनिल कोपरकर, एआईआईएमएस गोरखपुर ने कहा: “शीघ्र निदान और त्वरित उपचार इन रोगों के नियंत्रण की कुंजी है। सामूहिक औषधि सेवन (MDA) की सफलता ही फाइलेरिया उन्मूलन की सफलता होगी। राज्य स्वास्थ्य प्राधिकरण के सहयोग से एआईआईएमएस वेक्टर जनित रोगों के निदान और उपचार के लिए उत्कृष्ट केंद्र बन सकता है।”
    विशेषज्ञ योगदान

    कार्यशाला में डॉ. जया चक्रवर्ती (बीएचयू), डॉ. शहवार काज़मी (WHO), डॉ. शोएब अनवर, राज्य एनटीडी लीड (PATH), तथा डॉ. कनिष्क एवं डॉ. बृजेश (एआईआईएमएस गोरखपुर) ने तकनीकी सत्र लिए।

    आयोजन में योगदान :
    इस आयोजन को सफल बनाने में डॉ. आनंद दीक्षित के नेतृत्व में डॉ. अनिल कोपरकर एवं डॉ. प्रदीप खार्या (सामुदायिक एवं परिवार चिकित्सा विभाग, एआईआईएमएस गोरखपुर) के साथ डॉ. सिद्धार्थ चक्रवर्ती एवं उनकी पाथ टीम का विशेष योगदान रहा।

    भविष्य की दिशा:
    यह कार्यशाला क्लीनिकल तत्परता एवं सामुदायिक प्रतिक्रिया तंत्र को और मजबूत करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है। प्रतिभागियों से प्राप्त फीडबैक के आधार पर आगामी प्रशिक्षण मॉड्यूल, कैस्केडिंग वर्कशॉप्स और क्षेत्रीय वेक्टर जनित रोग निगरानी एवं प्रबंधन टास्क फोर्स के गठन की योजना बनाई जाएगी।

    एम्स गोरखपुर पाथ, डब्ल्यूएचओ और उत्तर प्रदेश सरकार के साथ मिलकर पूर्वी उत्तर प्रदेश में जनस्वास्थ्य प्रणाली को मजबूत करने और वेक्टर जनित रोगों से बेहतर तैयारी सुनिश्चित करने के लिए सतत प्रयासरत है।

  • एम्स गोरखपुर में मनाया गया “राष्ट्रीय अस्थि एवं जोड़ दिवस”

    एम्स गोरखपुर में मनाया गया “राष्ट्रीय अस्थि एवं जोड़ दिवस”

    “बुजुर्गों की 360° देखभाल थी इस वर्ष की थीम”

    गोरखपुर, 4 अगस्त 2025: अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान (एम्स) गोरखपुर में हड्डी रोग विभाग द्वारा “राष्ट्रीय अस्थि एवं जोड़ दिवस” (National Bone and Joint Day) पर एक विशेष जन-जागरूकता कार्यक्रम का आयोजन किया गया। हर वर्ष 4 अगस्त को मनाया जाने वाला यह दिवस मस्कुलोस्केलेटल (हड्डियों एवं मांसपेशियों से जुड़ी) बीमारियों, उनके निदान, रोकथाम और प्रबंधन को लेकर लोगों में जागरूकता फैलाने के उद्देश्य से मनाया जाता है।

    इस वर्ष की थीम “पुराना ही सोना है” , बुजुर्गों की 360° देखभाल: गतिशीलता, सम्मान और दीर्घायु सुनिश्चित करना* थी, जो वरिष्ठ नागरिकों के समग्र स्वास्थ्य और उनके सम्मानजनक जीवन की आवश्यकता को रेखांकित करती है।

    कार्यक्रम का आयोजन कार्यकारी निदेशक मेजर जनरल (डॉ.) विभा दत्ता (सेवानिवृत्त) के मार्गदर्शन में हड्डी रोग विभागाध्यक्ष प्रो. डॉ. अजय भारती एवं उनकी टीम द्वारा किया गया। इस अवसर पर विभाग द्वारा ओपीडी परिसर में मरीजों और उनके परिजनों के लिए निःशुल्क अस्थि घनत्व जांच (Bone Mineral Density Test) की सुविधा उपलब्ध कराई गई। इसके साथ ही ऑस्टियोपोरोसिस, जोड़ों के विकार, पीठ दर्द और बुजुर्गों में हड्डी कमजोर होने जैसी समस्याओं से बचाव के उपायों के बारे में भी परामर्श एवं जानकारी दी गई।

    डॉ. अजय भारती ने जानकारी दी कि भारत में 4 अगस्त को राष्ट्रीय अस्थि एवं जोड़ दिवस मनाने की परंपरा भारतीय अस्थि रोग संघ (Indian Orthopaedic Association) द्वारा आरंभ की गई थी। यह दिन न केवल हड्डियों के स्वास्थ्य के महत्व को रेखांकित करता है, बल्कि गठिया, फ्रैक्चर, ऑस्टियोपोरोसिस जैसी समस्याओं से जनमानस को सतर्क करने का भी अवसर है।

    उन्होंने कहा कि जैसे-जैसे जीवनशैली गतिहीन होती जा रही है और खानपान में असंतुलन बढ़ रहा है, वैसे-वैसे हड्डियों और जोड़ों की बीमारियाँ युवाओं को भी प्रभावित कर रही हैं। इसलिए आवश्यक है कि उपचार से अधिक बल निवारक देखभाल पर दिया जाए, जिससे एक स्वस्थ, सक्रिय और आत्मनिर्भर जीवन सुनिश्चित हो सकें ।

    कार्यक्रम में बड़ी संख्या में मरीजों, परिजनों व स्वास्थ्यकर्मियों ने भाग लिया और विशेषज्ञों से सलाह लेकर लाभान्वित हुए।

  • टिटेनस, डिप्थीरिया से बचाव के लिए लगवाएं टीका:डा अमरेंद्र

    टिटेनस, डिप्थीरिया से बचाव के लिए लगवाएं टीका:डा अमरेंद्र

    गोला। टिटेनस एवं डिप्थीरिया एक जानलेवा एवं संक्रमित बीमारी है, इसके बचाव के लिए पांच साल,10 साल एवं 16 साल की उम्र के बच्चों को टीडी का टीका लगाया जाना है। इसके लिए मंगलवार से टीकाकरण अभियान शुरू किया जा रहा है, जो 31 अगस्त तक चलेगा।

    अभियान का शुभारंभ अधीक्षक डा अमरेंद्र ठाकुर ने किया।उन्होने बताया कि सीएससी गोला में पिछली बार के टीडी वैक्सीन से छूटे बच्चो को प्रतिरक्षित करने के लिए क्षेत्र के विद्यालयों पर सत्र का आयोजन कर कक्षा 05 व 10 के बच्चो को प्रतिरक्षित किया गया।जो किशोर-किशोरियो में होने वाली बीमारी टिटनेस,गलाघोंटू की रोकथाम करता है।

    इस अवसर पर वैक्सीनेशन टीम की सदस्य बबिता राय,निशा राय, एफएम राकेश यादव,बीसीपीएम पूनम मौर्या,मनोज श्रीवास्तव आदि ने बच्चों को टीका लगाया।