Category: हेल्थ

  • विश्व स्तनपान दिवस: निकाली गई जागरूकता रैली,मां के दूध को बताया अमृत

    विश्व स्तनपान दिवस: निकाली गई जागरूकता रैली,मां के दूध को बताया अमृत

    गोला। विश्व स्तनपान दिवस पर माताओं को स्तनपान कराने के प्रति प्रेरित करने के लिए मंगलवार को गोला ब्लाक सब सेंटर गोपालपुर में एक जागरूकता रैली निकाली गयी।

    रैली में बीपीएम अविनेश दूबे(प्रोगेसिव फाउंडेशन एसआर सीएन एआईआईएमएस गोरखपुर) ने सबको शपथ दिलाई और नवप्रसूता को स्तनपान के बारे में जानकारी देते हुए बताया कि छ: माह तक केवल अपना दूध ही बच्चे को पिलाये तथा साथ ही उनको ये भी अवगत कराया गया कि शिशु के जन्म के 1 घंटे के अंदर मां का पीला गाढ़ा दूध शिशु के लिए वरदान होता है।उन्होने कहा 6 माह तक बच्चों को केवल सतत् स्तनपान जरूरी है। मां को सही पोजीशन,जुड़ाव के लिए जरूर जागरूक करे। हर 2 घंटे के अंतराल पर स्तनपान जरूरी है।
    इस दौरान सीएचओ नीलम यादव,एएनएम किरन देवी,आशा संगनी ममता गुप्ता और आशा कार्यकत्री तथा आंगनबाड़ी उपस्थिति रही।

  • जटिल-दुर्लभ कैंसर का इलाज और गोरखपुर में भी संभव

    जटिल-दुर्लभ कैंसर का इलाज और गोरखपुर में भी संभव

    “कन्याकुमारी से आया मरीज, एमजीयूजी के हॉस्पिटल में हुई दुर्लभ कैंसर की सफल सर्जरी”

    “जटिल थी बीमारी, 76 साल के मरीज के रेयर पैरोटिड ग्लैंड कैंसर को हटाने में मिली सफलता”

    “विश्व प्रसिद्ध कैंसर सर्जन डॉ. संजय माहेश्वरी के नेतृत्व में हुआ ऑपरेशन”

    गोरखपुर, 5 अगस्त। कैंसर पीड़ितों को अब दुरूह सर्जरी के लिए मुंबई या अन्य बड़े महानगरों की भागदौड़ नहीं करनी पड़ेगी। जटिल और दुर्लभ कैंसर का इलाज अब गोरखपुर के महायोगी गोरखनाथ विश्वविद्यालय गोरखपुर (एमजीयूजी) के महायोगी गोरखनाथ चिकित्सालय में ही हो जाएगा। कम समय में ही एक के बाद कैंसर की सफल सर्जरी करने वाले इस चिकित्सालय में कन्याकुमारी से आए बुजुर्ग मरीज का विश्व प्रसिद्ध कैंसर सर्जन डॉ. संजय माहेश्वरी के नेतृत्व वाली मेडिकल टीम ने ऑपरेशन कर रेयर पैरोटिड ग्लैंड कैंसर को सफलतापूर्वक हटाया है। यह चिकित्सालय जटिल कैंसर सर्जरी करने वाले देश के चुनिंदा संस्थानों में शामिल हो गया है।

    एमजीयूजी के परिसर में पिछले साल इसके संबद्ध मेडिकल कॉलेज को एमबीबीएस की 100 सीटों की मान्यता मिलने के साथ ही परिसर में महायोगी गोरखनाथ चिकित्सालय भी पूर्ण रूप से क्रियाशील है। अनेक अत्याधुनिक चिकित्सा सुविधाओं से युक्त इस चिकित्सालय में दुनिया के जाने-माने कैंसर सर्जन और एमपी बिरला ग्रुप ऑफ हॉस्पिटल्स के मेडिकल डायरेक्टर डॉ. संजय माहेश्वरी की सेवा भी मिलती है। बकौल डॉ. माहेश्वरी महायोगी गोरखनाथ चिकित्सालय में पिछले कुछ महीनों से हो रहे कैंसर के इलाज की जानकारी सुदूर दक्षिण भारत के कन्याकुमारी निवासी 76 वर्षीय एक मरीज को भी हुई थी। (निजता के कारण मरीज के नाम का उल्लेख नहीं किया जा रहा है)। उसकी लार ग्रंथि में जटिल और दुर्लभ रूप से पाए जाने वाले कैंसर की बीमारी थी। वह कई जगह इलाज कराने के बाद एक नया विश्वास लेकर एमजीयूजी परिसर के महायोगी गोरखनाथ चिकित्सालय आया था।

    कन्याकुमारी से आए इस मरीज का गत दिनों सुप्राहायॉइड ब्लॉक विच्छेदन के साथ आरटी साइडेड रेयर पैरोटिड ग्लैंड कैंसर को हटाने के लिए एक जटिल कैंसर की सफल सर्जरी की गई। सर्जरी करने वाली टीम का नेतृत्व डॉ. संजय माहेश्वरी ने किया जबकि इस मेडिकल टीम में डॉ. सीएम सिन्हा, डॉ. तिवारी, डॉ. नेहा, ओटी व अन्य स्टाफ शुभ, दीपक, रवि, रघुराम आदि शामिल रहे। महायोगी गोरखनाथ चिकित्सालय में दुर्लभ किस्म के जटिल कैंसर की सफल सर्जरी पर एमजीयूजी के कुलपति डॉ. सुरिंदर सिंह, कुलसचिव डॉ. प्रदीप कुमार राव ने प्रसन्नता की है। कुलपति ने कहा है कि कन्याकुमारी से आए मरीज का सफल इलाज यह दर्शाता है कि इस चिकित्सालय की ख्याति पूरे देश में विस्तारित हो रही है। गौरतलब हो कि पूर्व में इस चिकित्सालय में कैंसर की मॉडिफाइड रेडिकल मास्टेक्टॉमी (एमआरएम) सर्जरी भी सफलतापूर्वक हो चुकी है।

    देश के पूर्वी और दक्षिणी क्षेत्र तक के मरीजों का ससम्मान इलाज

    महायोगी गोरखनाथ चिकित्सालय उत्तर प्रदेश के साथ ही देश के अन्य राज्यों के मरीजों के लिए भी विश्वास का बड़ा केंद्र बन रहा है। यहां देश के पूर्वी और दक्षिणी क्षेत्र तक के मरीजों का भावपूर्ण स्वागत और ससम्मान इलाज हो रहा है। कन्याकुमारी से आए मरीज के इलाज से पहले गुवाहाटी के एक आईआईटी छात्र का भी सफल इलाज हो चुका है।

    सीएम योगी के विजन से मेडिकल हब बन रहा गोरखपुर : डॉ. माहेश्वरी

    सुविख्यात कैंसर सर्जन डॉ. संजय माहेश्वरी का कहना है कि मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के विजन से गोरखपुर देश का ऐसा मेडिकल हब बनने की ओर अग्रसर है जहां भौगौलिक सीमाओं से परे लोगों का विश्वास बढ़ रहा है। सीएम योगी की देखरेख में सरकारी क्षेत्र के साथ ही महायोगी गोरखनाथ चिकित्सालय में चिकित्सा की विश्व स्तरीय सुविधाएं उपलब्ध हैं।

  • एम्स गोरखपुर में किडनी के कैंसर के मरीज की हुई सफल सर्जरी

    एम्स गोरखपुर में किडनी के कैंसर के मरीज की हुई सफल सर्जरी

    गोरखपुर। दीपिका कुमारी 33 वर्ष, पत्नी चंपू राय, रहवासी अमलेरी, गोरखपुर अपने पेट में दर्द से 3 महीने से परेशान थी । कई अस्पताल के चक्कर लगाने पर उसे किसी डॉक्टर ने कहा कि पेट में गांठ है । उसे पेट दर्द के साथ ही बुखार तथा कमजोरी भी आने लगी थी । थक हार के वो एम्स गोरखपुर की सर्जरी opd में पहुंची । उसे भर्ती कर सीटी स्कैन किया गया जिसमें बायीं किडनी में बड़ा सा ट्यूमर है ऐसा पता चला । यह ट्यूमर लगभग एक फुटबॉल के साइज का था , तथा यह इन्फीरियर वेना केवा ( पेट की प्रमुख खून की नली ) से चिपका हुआ था । इसका किडनी से ब्लड के जाने वाली नाली ( रीनल वेन ) में भी फैलने का अंदेशा था । इस बड़े किडनी ट्यूमर ( रीनल सेल कार्सिनोमा ) का ऑपरेशन खतरे से भरा हुआ था । इसे सर्जरी के विभागाध्यक्ष डॉ गौरव गुप्ता ने भर्ती कर और भी कई जांचे करायी । इसे अन्य सभी कंसलटेंट डॉक्टर्स के साथ डिस्कस किया गया तथा ऑपरेशन की प्लानिंग की गई । एनेस्थेटिया विभाग के डॉक्टर्स से भी इस रिस्की केस को डिस्कस किया गया तथा ३ ब्लड के साथ शुक्रवार को ऑपरेशन रखा गया ।

    एनेस्थेटिया डिपार्टमेंट्स से डॉ संतोष कुमार, विभागाध्यक्ष की अगुवाई में डॉ भूपेंद्र कुमार , डॉ प्रियंका यादव, डॉ विजेता बाजपेयी , डॉ गणेश निमजे तथा डॉ रवि कुमार की टीम ने इसे एनेस्थेटिया दिया ।

    डॉ गौरव गुप्ता के साथ डॉ धर्मेन्द्र पीपल , डॉ मुकुल सिंह , डॉ रवि गुप्ता एवम जूनियर रेजिडेंट्स डॉ ऐश्वर्या , डॉ आदित्य , डॉ रज़ा ने इस जोखिम भरी सर्जरी को सफलता पूर्वक पूर्ण किया। किडनी का ये ट्यूमर पेट की प्रमुख नली इन्फीरियर वेना कावा से चिपका हुआ था तथा थोड़ा भी इधर उधर होने पर मरीज की ऑपरेशन टेबल पर ही रक्त स्राव से जान जाने का खतरा था । लेकिन इस सर्जरी को सर्जरी की टीम ने दक्षता से पूर्ण किया । इस किडनी ट्यूमर का साइज लगभग 30 cm था तथा वजन लगभग ३.५ किलो था ।

    मरीज को ऑपरेशन के बाद एनेस्थेटिया आईसीयू में रखा गया है तथा 2 बॉटल खून चढ़ाया गया है । अभी मरीज की हालत स्थिर है , तथा उसे जल्द ही सर्जरी वार्ड में शिफ्ट कर दिया जाएगा ।

    इस किडनी कैंसर के सफल ऑपरेशन ( रेडिकल नेफ़्रेक्टमी ) पर एम्स की एग्जीक्यूटिव डायरेक्टार मेजर विभा दत्ता ने डॉ गौरव गुप्ता की सर्जरी टीम तथा एनेस्थतिया की टीम को बधाई दी है । इस तरह के मेजर ऑपरेशन्स अब एम्स गोरखपुर में सफलतापूर्वक होने लगे है जिससे पूर्वांचल की जनता को बहुत फायदा होगा ।

  •  अंगदान जागरूकता अभियान : एम्स गोरखपुर

     अंगदान जागरूकता अभियान : एम्स गोरखपुर

    “कार्यकारी निदेशक डॉ. विभा दत्ता के मार्गदर्शन में आयोजित अभियान”

    एम्स गोरखपुर द्वारा कार्यकारी निदेशक डॉ. विभा दत्ता के प्रेरणादायक मार्गदर्शन में 1 से 3 अगस्त 2025 तक अंगदान जीवन संजीवनी अभियान” के अंतर्गत 15वाँ भारतीय अंगदान दिवस मनाया गया। इस विशेष अवसर पर संस्थान ने आम जनता, मरीजों, विद्यार्थियों और स्टॉफ के बीच अंग और ऊतक दान* के महत्व को उजागर करने हेतु कई जागरूकता गतिविधियों का आयोजन किया।

    अभियान के प्रमुख बिंदु:

    – 1 अगस्त को स्त्री रोग, मेडिसिन और सर्जरी ओपीडी में डॉ. मनीष कुमार, डॉ. शैलजा शर्मा और डॉ. सौरभ मूर्ति ने जागरूकता व्याख्यान दिए। इन सत्रों में अंगदान से जुड़ी भ्रांतियों को दूर करते हुए उसके वैज्ञानिक और मानवीय पक्षों को समझाया गया।

    – एम्स के विद्यार्थियों द्वारा प्रभावशाली नुक्कड़ नाटक “एक निर्णय – कई ज़िंदगियाँ” का मंचन किया गया, जिसने यह दर्शाया कि एक अंगदाता कई ज़िंदगियों को बचा सकता है।

    – सामुदायिक चिकित्सा विभाग द्वारा झरना टोला और गोनर में अंगदान शपथ कार्यक्रम आयोजित किए गए, जिसमें स्थानीय समुदाय के लोगों को प्रेरित किया गया।

    – 2 अगस्त को RHTC (ग्रामीण स्वास्थ्य प्रशिक्षण केन्द्र) में भी अंगदान शपथ कार्यक्रम आयोजित किया गया।

    अभियान का समापन: जागरूकता वॉकथॉन

    3 अगस्त 2025 को अंगदान :जीवन संजीवनी अभियान के तहत एक भव्य जागरूकता वॉकथॉन का आयोजन किया गया, जो सुबह 7:00 बजे गेट नंबर 1 से शुरू हुआ। इस वॉकथॉन में संस्थान के संकाय सदस्य, छात्र, स्टाफ और स्वयंसेवक सम्मिलित हुए। सभी ने हाथों में बैनर लिए जनमानस को संदेश दिया कि “अंगदान जीवनदान है।

    अंगदान का महत्त्व – क्यों यह जनआंदोलन बनना चाहिए:

    भारत में हर वर्ष लाखों लोग अंग प्रत्यारोपण की प्रतीक्षा में जान गंवा देते हैं, जबकि अनजाने में हज़ारों स्वस्थ अंग उपयोग नहीं हो पाते। यह स्थिति केवल कम जानकारी, सामाजिक भ्रांतियों और पारिवारिक संकोच के कारण उत्पन्न होती है।

    अंगदान का व्यापक प्रचार-प्रसार आवश्यक है क्योंकि यह:

    – गंभीर बीमारियों से जूझ रहे रोगियों को नया जीवन देता है,
    – लंबी प्रतिक्षा सूचियों को कम करता है,
    – समाज में “मरने के बाद भी जीवन देने” की भावना को प्रोत्साहित करता है,
    – और देश को एक संवेदनशील व जागरूक राष्ट्र की ओर अग्रसर करता है।

    एम्स गोरखपुर के इस प्रयास ने यह सिद्ध किया कि अंगदान केवल एक चिकित्सीय प्रक्रिया नहीं, बल्कि एक मानवीय जिम्मेदारी है। संस्थान सभी नागरिकों, मीडिया, और नीति-निर्माताओं से आह्वान करता है कि वें अंगदान को जीवनदायिनी परम्परा के रूप में अपनाएं और दूसरों को भी प्रेरित करें।

  • पिपरौली में चला नि:शुल्क कैंसर जागरूकता अभियान

    पिपरौली में चला नि:शुल्क कैंसर जागरूकता अभियान

    संवाददाता– एस.पी. सिंह
    सहजनवा, (गोरखपुर)।

    शुक्रवार को हनुमान प्रसाद पोद्दार कैंसर अस्पताल की ओर से नि:शुल्क कैंसर जागरूकता अभियान कार्यक्रम का आयोजन किया गया। इस कार्यक्रम का उद्देश्य लोगों को कैंसर के प्रति जागरूक करना और इससे जुड़ी भ्रांतियों को दूर करना रहा।
    कार्यक्रम में उपस्थित विधायक प्रदीप शुक्ला ने कहा कि कैंसर एक जानलेवा बीमारी जरूर है, लेकिन यदि इसका पता शुरुआती चरण में लग जाए, तो इसका इलाज संभव है। इसलिए लोगों में इसके प्रति जागरूकता जरूरी है।

    विशेषज्ञ डॉक्टरों ने कैंसर के लक्षण, कारण और इलाज के बारे में जानकारी दी। साथ ही आमजन के लिए नि:शुल्क जांच एवं परामर्श की सुविधा भी उपलब्ध कराई गई, जिससे लोगों को अपने स्वास्थ्य के बारे में जानकारी प्राप्त करने का अवसर मिला।

    इस अवसर पर ब्लॉक प्रमुख दिलीप कुमार यादव, मंडल अध्यक्ष रवि प्रताप सिंह, सीएचसी अधीक्षक डॉ. शिवानंद मिश्रा, मोहन सिंह, सुनील निगम, संजय सिंह, शिव बहादुर यादव, अजय श्रीवास्तव, संदीप उपाध्याय सहित कई स्वास्थ्यकर्मी व अन्य गणमान्य लोग उपस्थित रहे।

  • जिले को कैंसर से बचाने के लिए चलेगा वृहद अभियान, एम्स गोरखपुर में विशेषज्ञों का हुआ अभिमुखीकरण

    जिले को कैंसर से बचाने के लिए चलेगा वृहद अभियान, एम्स गोरखपुर में विशेषज्ञों का हुआ अभिमुखीकरण

    “एम्स गोरखपुर, स्वास्थ्य विभाग, बीआरडी मेडिकल कॉलेज व श्री गोरक्षनाथ मेडिकल कॉलेज मिल कर करेंगे प्रयास”

    “हनुमान प्रसाद पोद्दार कैंसर अस्पताल और गोरखपुर विश्वविद्यालय भी बने सहयोगी”

    गोरखपुर। जिले को कैंसर की महामारी से बचाने के लिए वृहद अभियान चलने जा रहा है। इसकी शुरुआत एम्स गोरखपुर में जिले की स्त्री एवं प्रसूति रोग विशेषज्ञों के अभिमुखीकरण के साथ हो गई। इन विशेषज्ञों का सर्वाइकल कैंसर और ब्रेस्ट कैंसर को लेकर बुधवार को अभिमुखीकरण किया गया। इसी क्रम में जिले की सभी महिला चिकित्सा अधिकारियों का सर्वाइकल कैंसर, ब्रेस्ट कैंसर और ओरल कैंसर के साथ साथ मधुमेह और उच्च रक्तचाप को लेकर अभिमुखीकरण दो दिनों तक एम्स गोरखपुर में ही किया जाएगा। गोरखपुर के मुख्य चिकित्सा अधिकारी डॉ राजेश झा ने बताया कि जिले को कैंसर से बचाने के लिए एम्स गोरखपुर, स्वास्थ्य विभाग, बीआरडी मेडिकल कॉलेज, श्री गोरक्षनाथ मेडिकल कॉलेज, हनुमान प्रसाद पोद्दार कैंसर अस्पताल और गोरखपुर विश्वविद्यालय साथ-साथ मिल कर काम करेंगे।

    एम्स गोरखपुर में वहां के स्त्री एवं प्रसूति रोग विभाग की अध्यक्ष डॉ शिखा सेठ, विषय विशेषज्ञ डॉ अनुपमा और श्री गोरक्षनाथ मेडिकल कॉलेज व एम्स दिल्ली के वरिष्ठ सर्जन डॉ अनुराग श्रीवास्तव ने जिले की गाइनकॉलजिस्ट को प्रशिक्षित किया।

    सीएमओ डॉ झा ने बताया कि चिकित्सा अधिकारियों को शीघ्र ही कैंसर स्क्रिनिंग को लेकर हैंड्स ऑन ट्रेनिंग भी दी जाएगी। आवश्यकतानुसार प्रशिक्षण सीएचओ और एएनएम स्तर तक भी दिया जाएगा। इसके बाद समुदाय स्तर पर ब्रेस्ट और ओरल कैंसर की स्क्रिनिंग होगी। सर्वाइकल कैंसर की जांच की भी व्यवस्था की जा रही है। स्क्रिनिंग में जो भी संभावित मरीज निकलेंगे उनका आवश्यकतानुसार उच्च चिकित्सा केंद्र में इलाज होगा। उद्देश्य यह है कि कैंसर का प्राथमिक अवस्था में ही पता चल जाए ताकि बिना जटिलता बढ़े समय रहते उसे ठीक किया जा सके। अभी यह प्रवृत्ति देखी जा रही है कि कैंसर के मरीज काफी देरी के बाद अस्पताल आते हैं जिसकी वजह से मृत्यु का जोखिम बढ़ जाता है और तमाम जटिलताएं भी पैदा हो जाती हैं।

    डॉ झा ने बताया कि स्वास्थ्य विभाग ने एक पिंक कार्ड तैयार किया है। जिन महिलाओं की हेल्थ स्क्रिनिंग होगी उनके स्वास्थ्य का प्राथमिक विवरण और कैंसर स्क्रिनिंग सम्बन्धित विवरण भी इस कार्ड में दर्ज किया जाएगा ताकि संदर्भन की स्थिति में इलाज में सुविधा हो । कैंसर स्क्रिनिंग के साथ साथ स्वास्थ्य विभाग का जोर लोगों को इस बीमारी के प्रति जागरूक करने में है। इसी कड़ी में चार सदस्यों वाली दस टीमें भी बनाई गई हैं जिनमें चिकित्सक, शिक्षक व अन्य सदस्य होंगे। यह टीमें जिले के सभी कॉलेज में कैंसर सहित विभिन्न स्वास्थ्य मुद्दों के प्रति लोगों को जागरूक करेंगी। हमारा लक्ष्य जागरूकता का ऐसा वातावरण पैदा करना है कि एक तरफ लोग बीमारी से बच सकें और दूसरी तरफ बीमारी के शुरुआती लक्षण दिखते ही लोग इलाज के लिए खुद आगे आ जाएं।

    इस अवसर पर एसीएमओ आरसीएच डॉ एके चौधरी और जिला कार्यक्रम प्रबंधक पंकज आनंद मौजूद रहे।

    “हो चुकी हैं कई बैठकें”

    सीएमओ ने बताया कि कैंसर के मुद्दे पर काम करने वाले संस्थानों के वरिष्ठ पदाधिकारियों की कई चरणों में बैठकें हो चुकी हैं। इन बैठकों के जरिये बनी रणनीति के क्रम में विशेषज्ञों के अभिमुखीकरण से शुरुआत हो चुकी है। शीघ्र ही ग्राउंड लेवल की गतिविधियां भी शुरू कर दी जाएंगी।

  • एम्स गोरखपुर में पहली बार हुआ सफल कॉर्निया प्रत्यारोपण, दृष्टिहीन महिला को मिली नई रोशनी

    एम्स गोरखपुर में पहली बार हुआ सफल कॉर्निया प्रत्यारोपण, दृष्टिहीन महिला को मिली नई रोशनी

    गोरखपुर, 30 जुलाई 2025। अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान (एम्स), गोरखपुर में चिकित्सा क्षेत्र की एक महत्वपूर्ण उपलब्धि दर्ज की गई है। कार्यकारी निदेशक मेजर जनरल (डॉ.) विभा दत्ता, एसएम (सेवानिवृत्त) के कुशल मार्गदर्शन में संस्थान में पहली बार कॉर्निया प्रत्यारोपण (Penetrating Keratoplasty) की सफल सर्जरी की गई।

    इस सर्जरी से लाभान्वित होने वाली 75 वर्षीय महिला मरीज विगत पांच वर्षों से एक आंख की कॉर्नियल ब्लाइंडनेस से पीड़ित थीं, जो मोतियाबिंद सर्जरी के जटिल परिणामस्वरूप उत्पन्न हुई थी। सर्जरी के बाद अब उन्हें 5 से 7 दिनों में दृष्टि लौटने की संभावना है, जिससे उनके जीवन की गुणवत्ता में उल्लेखनीय सुधार होगा।

    इस जटिल प्रक्रिया को नेत्र रोग विशेषज्ञों की एक समर्पित टीम ने अंजाम दिया, जिसमें डॉ. अलका त्रिपाठी, डॉ. नेहा सिंह, डॉ. ऋचा अग्रवाल, डॉ. अमित सिंह तथा रेज़िडेंट डॉक्टर साक्षी, डॉ. निवेदिता, डॉ. शगुन और डॉ. मैत्रेयी शामिल थीं। इस ऑपरेशन में नर्सिंग ऑफिसर प्राची और दिव्या ने भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।

    इस प्रत्यारोपण के लिए कॉर्निया वारणसी स्थित ‘लायंस आई बैंक’ से प्राप्त किया गया, जो कि नेत्रदान के क्षेत्र में एक प्रमुख संस्था है।

    भारत में वर्तमान में लगभग 11 लाख लोग कॉर्नियल अंधत्व से ग्रसित हैं और प्रतिवर्ष 25,000 से अधिक नए मामले सामने आते हैं। दुर्भाग्यवश, कॉर्निया प्रत्यारोपण के लिए आवश्यक दान की संख्या अभी भी बहुत कम है। नेत्रदान मृत्यु उपरांत किया जाने वाला एक पूर्णतः स्वैच्छिक, निःस्वार्थ और सामाजिक कल्याणकारी कार्य है। मृत व्यक्ति के परिजन उनकी इच्छा के बिना भी नेत्रदान की अनुमति दे सकते हैं।

    एम्स गोरखपुर द्वारा की गई यह पहली कॉर्निया सर्जरी केवल एक चिकित्सा उपलब्धि नहीं, बल्कि समाज में नेत्रदान के प्रति जागरूकता फैलाने की दिशा में एक प्रेरणादायक पहल है। यह सफलता आने वाले समय में अनेक दृष्टिहीनों के जीवन में उजाला लाने की दिशा में एक मजबूत आधार बनेगी।

  • गर्भाशय की जगह लीवर में पल रहा था बच्चा

    गर्भाशय की जगह लीवर में पल रहा था बच्चा

    यूपी के बुलंदशहर में प्रेग्नेंसी का एक ऐसा मामला सामने आया है जिसे देखकर आम लोग तो ही नहीं डॉक्टर्स भी हैरान रह गए हैं. इस जिले की एक 30 साल की महिला को पिछले दो महीने से पेट में लगातार दर्द और उल्टी की शिकायत थी. जब वह इस दर्द की शिकायत लेकर डॉक्टर के पास पहुंची और तमाम इलाजों के बाद भी राहत नहीं मिली, तो उसे एमआरआई जांच के लिए एक निजी सेंटर भेजा गया.

    एमआरआई रिपोर्ट में पता चला की महिला प्रग्नेंट तो हैं लेकिन उसका गर्भाशय यानी यूट्रस खाली है. हैरानी की बात ये थी कि 12 हफ्ते का गर्भ उसके गर्भाशय में नहीं, बल्कि लीवर के दाहिने हिस्से में पल रहा था. गर्भ में धड़कन भी थी, यानी भ्रूण पूरी तरह से ज़िंदा था.

    इस मामले की पुष्टि करने वाले डॉक्टर के.के. गुप्ता, जो एक रेडियोलॉजिस्ट हैं ने कहा कि इतने सालों के वो इस काम को कर रहे हैं लेकिन उनके करियर में ऐसा केस पहली बार आया है. पूरी दुनिया में अभी तक ऐसे सिर्फ 18 केस ही सामने आए हैं और भारत में यह पहला मामला हो सकता है.

  • बच्चों के दिलों को मिलेगी नई धड़कन: शाही ग्लोबल हॉस्पिटल में होगा उन्नत हृदय शिविर

    बच्चों के दिलों को मिलेगी नई धड़कन: शाही ग्लोबल हॉस्पिटल में होगा उन्नत हृदय शिविर

    “शिविर में दिल्ली फोर्टिस एस्कॉर्ट्स हॉस्पिटल के वरिष्ठ हृदय रोग विशेषज्ञ डॉ. नीरज अवस्थी स्वयं करेंगे परामर्श”

    गोरखपुर, 28 जुलाई। पूर्वांचल के हृदय रोगियों, विशेषकर बच्चों के लिए अवसर लेकर आ रहा है शाही ग्लोबल हॉस्पिटल, तारामंडल। आगामी 30 जुलाई 2025 (बुधवार) को यहां प्रातः 11 बजे से अपराह्न 3 बजे तक एक विशेष एडवांस पीडियाट्रिक कार्डियोलॉजी कैम्प का आयोजन किया जा रहा है, जो न केवल चिकित्सकीय दृष्टि से अत्यंत महत्वपूर्ण है, बल्कि सामाजिक उत्तरदायित्व की दृष्टि से भी प्रेरक उदाहरण है।

    इस शिविर की विशेषता यह है कि इसमें दिल्ली के सुप्रसिद्ध फोर्टिस एस्कॉर्ट हार्ट इंस्टीट्यूट से डॉ. नीरज अवस्थी, जो संस्थान के पेडियाट्रिक कार्डियोलॉजी विभाग के अध्यक्ष एवं निदेशक हैं, स्वयं गोरखपुर पधार रहे हैं। वे बच्चों के हृदय संबंधी रोगों की सीधी जांच, परामर्श एवं निदान करेंगे।

    शिविर की मुख्य विशेषताएँ :

    इकोकार्डियोग्राफी सहित सभी हृदय संबंधी जाँचें 50% रियायत पर की जाएंगी।

    जिन बच्चों को हृदय शल्य चिकित्सा (ऑपरेशन) की आवश्यकता होगी, उनका इलाज पूर्णतः निःशुल्क कराया जाएगा।

    मुख्यमंत्री राहत कोष, सांसद निधि एवं सामाजिक संगठनों के सहयोग से आर्थिक रूप से कमज़ोर परिवारों की संपूर्ण सहायता सुनिश्चित की जाएगी।

    इस शिविर के संयोजक एवं शाही ग्लोबल हॉस्पिटल के निदेशक डॉ. शिवशंकर शाही ने बताया  “ यह हम सभी के लिए हर्ष और सेवा का विषय है कि हृदय रोगों की अत्यंत जटिल श्रेणी में देश के शीर्ष विशेषज्ञों में शुमार डॉ. नीरज अवस्थी जी गोरखपुर आकर परामर्श देंगे। बच्चों में हृदय रोग के इलाज की लागत अत्यधिक होती है, परंतु सरकार द्वारा संचालित योजनाओं एवं मुख्यमंत्री राहत कोष के माध्यम से अभी तक किसी बच्चे का इलाज धनाभाव में रुका नहीं है। ऐसे में यह शिविर विशेष रूप से जनकल्याण हेतु समर्पित है।”

    Dr. S.S. Shahi
    Dr. S.S.Shahi

    डॉ. शाही ने बताया कि “उत्तर प्रदेश के माननीय मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ जी महाराज के नेतृत्व में चल रही जनता दरबार योजना के माध्यम से हज़ारों रोगियों को राहत मिली है। उन्होंने विश्वास जताया कि जरूरतमंद बच्चों को इस शिविर से बड़ी राहत मिलेगी।”

    अपील :

    इस अवसर पर डॉ. शाही ने समाज के प्रत्येक नागरिक, सामाजिक संगठन एवं जनप्रतिनिधियों से अपील की है कि वे अपने क्षेत्र में हृदय रोग से पीड़ित किसी भी बच्चे की जानकारी अस्पताल को दें, अथवा उन्हें स्वयं शिविर में भेजें। यह पहल न केवल जीवनरक्षक है, बल्कि मानवता की सच्ची सेवा भी है।

    स्थान: शाही ग्लोबल हॉस्पिटल, तारामंडल रोड, गोरखपुर
    तिथि: 30 जुलाई 2025, बुधवार
    समय: प्रातः 11 बजे से अपराह्न 3 बजे तक
    संपर्क: 8795032888, 9935067894

    हृदय की धड़कनें पैसे की मोहताज न हों, इसी संकल्प को साकार करने की ओर एक मील का पत्थर साबित होगा यह शिविर।

  • एम्स गोरखपुर के संकाय सदस्य को श्रीलंका में आयोजित अंतरराष्ट्रीय बाल संरक्षण सम्मेलन में सम्मान

    एम्स गोरखपुर के संकाय सदस्य को श्रीलंका में आयोजित अंतरराष्ट्रीय बाल संरक्षण सम्मेलन में सम्मान

    गोरखपुर , 28 जुलाई 2025। मेजर जनरल (डॉ.) विभा दत्ता, एसएम (सेवानिवृत्त), कार्यकारी निदेशक एवं सीईओ, एम्स गोरखपुर के दूरदर्शी नेतृत्व में संस्थान अंतरराष्ट्रीय मंचों पर निरंतर प्रतिष्ठा प्राप्त कर रहा है। इसी श्रृंखला में, डॉ. नवनीत अटेरिया , एसोसिएट प्रोफेसर, फोरेंसिक मेडिसिन एवं टॉक्सिकोलॉजी विभाग, एम्स गोरखपुर को अंतरराष्ट्रीय बाल संरक्षण सम्मेलन (ICCP’25) में दो प्रतिष्ठित पुरस्कार प्राप्त हुए। यह सम्मेलन 25 से 27 जुलाई 2025 तक यूनिवर्सिटी ऑफ केलानिया, कोलंबो, श्रीलंका में आयोजित किया गया।

    यह सम्मेलन Centre for Gender Studies द्वारा यूरोपीय संघ (EU) और यूनिसेफ श्रीलंका के सहयोग से JURE प्रोजेक्ट के अंतर्गत आयोजित किया गया था। यह श्रीलंका का पहला अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन था जो पूर्ण रूप से बाल संरक्षण पर केंद्रित था। इसमें 250 से अधिक प्रतिनिधियों ने भाग लिया और दुनियाभर के विशेषज्ञों द्वारा 300 से अधिक मौखिक प्रस्तुतियाँ दी गईं।

    डॉ. नवनीत अटेरीया को निम्नलिखित पुरस्कार प्रदान किए गए:

    “बाल तस्करी की पहचान और रोकथाम में फॉरेंसिक विशेषज्ञ की भूमिका” विषय पर प्रस्तुति के लिए
    सत्र में सर्वश्रेष्ठ प्रस्तुति प्रमाणपत्र।

    “डिजिटल फॉरेंसिक और ऑनलाइन बाल शोषण: डिजिटल युग में बच्चों की सुरक्षा” विषय पर शोध के लिए
    सर्वश्रेष्ठ अनुसंधान संकल्पना प्रस्तुति में तृतीय स्थान।

    यह सम्मान न केवल डॉ. अटेरिया की अनुसंधान क्षमता और अकादमिक उत्कृष्टता को दर्शाता है, बल्कि एम्स गोरखपुर के शिक्षकों की वैश्विक पहचान को भी सुदृढ़ करता है। उनके इस वैश्विक मंच पर सम्मानित होने से यह प्रमाणित होता है कि संस्थान सामाजिक महत्व के विषयों पर अनुसंधान को प्रोत्साहित कर रहा है।

    इस उपलब्धि के पीछे मेजर जनरल (डॉ.) विभा दत्ता का प्रेरणादायक मार्गदर्शन, रणनीतिक समर्थन एवं संकाय के विकास हेतु निरंतर प्रयास प्रमुख भूमिका में रहे हैं। उनके नेतृत्व में एम्स गोरखपुर एक अंतरराष्ट्रीय स्तर का अनुसंधान एवं शिक्षण केंद्र बनता जा रहा है।

    ICCP’25 सम्मेलन में डिजिटल सुरक्षा, बाल-अनुकूल न्याय प्रणाली, लिंग आधारित हिंसा, शिक्षा और आपदा प्रबंधन जैसे समसामयिक विषयों पर चर्चाएं हुईं। उद्घाटन समारोह में श्रीलंका की संसद के माननीय अध्यक्ष, यूरोपीय संघ, यूनिसेफ और संयुक्त राष्ट्र के वरिष्ठ प्रतिनिधियों ने भी भाग लिया।

    यह उपलब्धि एम्स गोरखपुर की वैश्विक छवि को और अधिक सशक्त बनाती है तथा संस्थान को अनुसंधान, शिक्षा और सार्वजनिक सेवा के क्षेत्र में अग्रणी संस्थानों की पंक्ति में प्रतिष्ठित करती है।