एम्स गोरखपुर के संकाय सदस्य को श्रीलंका में आयोजित अंतरराष्ट्रीय बाल संरक्षण सम्मेलन में सम्मान

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गोरखपुर , 28 जुलाई 2025। मेजर जनरल (डॉ.) विभा दत्ता, एसएम (सेवानिवृत्त), कार्यकारी निदेशक एवं सीईओ, एम्स गोरखपुर के दूरदर्शी नेतृत्व में संस्थान अंतरराष्ट्रीय मंचों पर निरंतर प्रतिष्ठा प्राप्त कर रहा है। इसी श्रृंखला में, डॉ. नवनीत अटेरिया , एसोसिएट प्रोफेसर, फोरेंसिक मेडिसिन एवं टॉक्सिकोलॉजी विभाग, एम्स गोरखपुर को अंतरराष्ट्रीय बाल संरक्षण सम्मेलन (ICCP’25) में दो प्रतिष्ठित पुरस्कार प्राप्त हुए। यह सम्मेलन 25 से 27 जुलाई 2025 तक यूनिवर्सिटी ऑफ केलानिया, कोलंबो, श्रीलंका में आयोजित किया गया।

यह सम्मेलन Centre for Gender Studies द्वारा यूरोपीय संघ (EU) और यूनिसेफ श्रीलंका के सहयोग से JURE प्रोजेक्ट के अंतर्गत आयोजित किया गया था। यह श्रीलंका का पहला अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन था जो पूर्ण रूप से बाल संरक्षण पर केंद्रित था। इसमें 250 से अधिक प्रतिनिधियों ने भाग लिया और दुनियाभर के विशेषज्ञों द्वारा 300 से अधिक मौखिक प्रस्तुतियाँ दी गईं।

डॉ. नवनीत अटेरीया को निम्नलिखित पुरस्कार प्रदान किए गए:

“बाल तस्करी की पहचान और रोकथाम में फॉरेंसिक विशेषज्ञ की भूमिका” विषय पर प्रस्तुति के लिए
सत्र में सर्वश्रेष्ठ प्रस्तुति प्रमाणपत्र।

“डिजिटल फॉरेंसिक और ऑनलाइन बाल शोषण: डिजिटल युग में बच्चों की सुरक्षा” विषय पर शोध के लिए
सर्वश्रेष्ठ अनुसंधान संकल्पना प्रस्तुति में तृतीय स्थान।

यह सम्मान न केवल डॉ. अटेरिया की अनुसंधान क्षमता और अकादमिक उत्कृष्टता को दर्शाता है, बल्कि एम्स गोरखपुर के शिक्षकों की वैश्विक पहचान को भी सुदृढ़ करता है। उनके इस वैश्विक मंच पर सम्मानित होने से यह प्रमाणित होता है कि संस्थान सामाजिक महत्व के विषयों पर अनुसंधान को प्रोत्साहित कर रहा है।

इस उपलब्धि के पीछे मेजर जनरल (डॉ.) विभा दत्ता का प्रेरणादायक मार्गदर्शन, रणनीतिक समर्थन एवं संकाय के विकास हेतु निरंतर प्रयास प्रमुख भूमिका में रहे हैं। उनके नेतृत्व में एम्स गोरखपुर एक अंतरराष्ट्रीय स्तर का अनुसंधान एवं शिक्षण केंद्र बनता जा रहा है।

ICCP’25 सम्मेलन में डिजिटल सुरक्षा, बाल-अनुकूल न्याय प्रणाली, लिंग आधारित हिंसा, शिक्षा और आपदा प्रबंधन जैसे समसामयिक विषयों पर चर्चाएं हुईं। उद्घाटन समारोह में श्रीलंका की संसद के माननीय अध्यक्ष, यूरोपीय संघ, यूनिसेफ और संयुक्त राष्ट्र के वरिष्ठ प्रतिनिधियों ने भी भाग लिया।

यह उपलब्धि एम्स गोरखपुर की वैश्विक छवि को और अधिक सशक्त बनाती है तथा संस्थान को अनुसंधान, शिक्षा और सार्वजनिक सेवा के क्षेत्र में अग्रणी संस्थानों की पंक्ति में प्रतिष्ठित करती है।

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