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एम्स गोरखपुर के संकाय सदस्य को श्रीलंका में आयोजित अंतरराष्ट्रीय बाल संरक्षण सम्मेलन में सम्मान
“बाल तस्करी की पहचान और रोकथाम में फॉरेंसिक विशेषज्ञ की भूमिका” विषय पर प्रस्तुति के लिए
“डिजिटल फॉरेंसिक और ऑनलाइन बाल शोषण: डिजिटल युग में बच्चों की सुरक्षा” विषय पर शोध के लिए
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एम्स गोरखपुर में स्वच्छता पखवाड़ा के अंतर्गत स्वच्छता अभियान
“मरीजों के लिए स्वच्छ और सुरक्षित वातावरण की दिशा में अहम कदम”

गोरखपुर, 5 अप्रैल 2025: एम्स गोरखपुर में कार्यकारी निदेशक मेजर जनरल (डॉ.) विभा दत्ता के नेतृत्व में चल रहे स्वच्छता पखवाड़ा के अंतर्गत एक विशेष स्वच्छता अभियान का सफल आयोजन किया गया। यह पखवाड़ा 1 अप्रैल से प्रारंभ हुआ है और इसके तहत संस्थान में विविध गतिविधियाँ आयोजित की जा रही हैं, जिनका उद्देश्य स्वच्छता, संक्रमण नियंत्रण और जन-जागरूकता को बढ़ावा देना है।
अस्पताल परिसर में आयोजित इस विशेष अभियान में संस्थान के स्टाफ, छात्र, स्वास्थ्यकर्मी और प्रशासनिक अधिकारियों ने सक्रिय भागीदारी की। इस पहल का उद्देश्य न केवल परिसर की सफाई सुनिश्चित करना था, बल्कि कचरा निस्तारण, स्वच्छता और संक्रमण नियंत्रण के महत्व को रेखांकित करना भी था। यह अभियान स्वच्छ भारत मिशन के प्रति संस्थान की प्रतिबद्धता का प्रतीक है और मरीजों के समग्र कल्याण की दिशा में एक ठोस प्रयास है।
अभियान की विशेष बात यह रही कि कार्यकारी निदेशक मेजर जनरल (डॉ.) विभा दत्ता ने स्वयं अस्पताल के मुख्य द्वार नंबर 2 पर झाड़ू लगाकर स्वच्छता का संदेश दिया। उन्होंने कहा, “आसपास की स्वच्छता हमारी अपनी जिम्मेदारी है। हमें न केवल स्वयं इस पर ध्यान देना चाहिए, बल्कि दूसरों को भी इसके लिए प्रेरित करना चाहिए। स्वच्छ समाज से ही स्वस्थ भारत का सपना साकार होगा।”
इस आयोजन को सफल बनाने में डीन स्टूडेंट वेलफेयर डॉ. शिखा सेठ, डॉ. गौरव गुप्ता, डॉ. प्रेरणा चंद्रा, श्री अरुण, श्रीमती देविका तथा प्रशासनिक अधिकारी ने महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।
स्वच्छता पखवाड़ा के इस भाग के रूप में आयोजित यह अभियान न केवल मरीजों के लिए एक स्वच्छ वातावरण सुनिश्चित करने की दिशा में कारगर सिद्ध हुआ, बल्कि संस्थान की सामाजिक प्रतिबद्धता को भी दर्शाता है। यह पहल निश्चित रूप से अन्य संस्थानों को भी प्रेरित करेगी।
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हैंड्स ऑन सुचरिंग एंड नॉटिंग वर्कशॉप इन स्पेशली डिजाइंड JJIW बस
डिपार्टमेंट ऑफ़ सर्जरी एम्स गोरखपुर द्वारा एक सर्जिकल हैंड्स ऑन वर्कशॉप का आयोजन १-३ अप्रैल किया गया। इस वर्कशॉप की ख़ास बात यह रही कि यह जॉनसन एंड जॉनसन कंपनी द्वारा स्पेशली डिजाइंड, फुल्ली एसी बस में है। जॉनसन एंड जॉनसन कंपनी ने इस बस को “ जॉनसन एंड जॉनसन इंस्टिट्यूट ऑन व्हील्स “ का नाम दिया है (JJIW)। इसमें मेडिकल स्टूडेंट्स सुचरिंग तथा नॉटिंग की बेसिक ट्रेनिंग के सकते है ( टाँके मारने के तरीकों को सीख सकते है )।
बस में स्पेशली डिजाइंड सुचरिंग पैड्स रखे गए है , इसमें ट्रेनर्स भी है, जो वीडियो डेमन्स्ट्रेशन के द्वारा आर्टिफीसियल इंटेलिजेंस (AI) की मदद से ये ट्रेनिंग में मदद करते है । इस फुल्ली एसी बस में एक बार में १५-२० स्टूडेंट्स की बैच बैठ कर टेबल चेयर पे ट्रेनिंग कर सकती है ।
इस बस में लैप्रोस्कोपी द्वारा पिक एंड होल्ड, इंडो सुचरिंग एंड इंडो नॉटिंग भी उपलब्ध है । इसके लिए स्पेशली डिजाइंड एंडोट्रेनर्स बस में उपलब्ध है , जो सर्जिकल रेजिडेंट्स एंड जूनियर रेजिडेंट्स के लिए भी बहुत लाभदायक है ।
१ अप्रैल से यह बस एम्स गोरखपुर के ऑडिटोरियम के सामने पार्क की गई थी ताकि स्टूडेंट्स १५-२० की बैचेस में आकर प्रैक्टिस कर सकें । बहुत से स्टूडेंट्स इसमें प्रैक्टिस कर चुके है तथा ट्रेनिंग का लाभ लें चुके है । विभिन्न सर्जिकल विभागों के लगभग बहुत से सीनियर व जूनियर रेजीडेंट्स भी इसका लाभ ले चुके है । देवरिया, बस्ती , महाराजगंज के मेडिकल कॉलेजों से भी स्टूडेंट्स यहां आए। इस बस में ठंडा पानी, चाय कॉफ़ी व कुकीज़ का भी अरेंजमेंट है। बस के बाहर स्टूडेंट्स की वेटिंग लिस्ट भी रहीं, हर मेडिकल स्टूडेंट इसमें जाकर सुचरिंग न नोटिंग की ट्रेनिंग लेना चाहता था। इसमें वेट टिश्यू का अरेंजमेंट भी किया गया, जिससें ट्रेनिंग लेने वाले स्टूडेंट्स को टांके लगाने पर प्रत्यक्ष मरीज पे टाँके लगाने जैसा अनुभव प्राप्त हुआ।
उम्मीद है कि ४०० से अधिक मेडिकल स्टूडेंट्स, इंटर्न्स, जूनियर रेजिडेंट्स, सीनियर रेजिडेंट्स तथा नर्सिंग ऑफिसर्स इसमें ट्रेनिंग लें चुके हैं।
डिपार्टमेंट ऑफ़ सर्जरी से विभागाध्यक्ष डॉ गौरव गुप्ता के साथ एसोसिएट प्रोफेसर्स डॉ रवि गुप्ता , डॉ धर्मेंद्र पीपल, डॉ मुकुल सिंह, डॉ हरिकेश यादव तथा असिस्टेंट प्रोफेसर्स डॉ रजनीश, डॉ शाहनवाज, डॉ मनीष कुमार ने स्टूडेंट्स को सुचरिंग नोटिंग की ट्रेनिंग दी।
एग्जीक्यूटिव डायरेक्टर मेजर जनरल डॉ विभा दत्ता ने डॉ गौरव गुप्ता एवं सर्जरी की पूरी टीम को इस हैंड्स ऑन ट्रेनिंग के लिए बधाई दी है तथा कहा की इस तरह की हैंड्स ऑन ट्रेनिंग मेडिकल स्टूडेंट्स के लिए बहुत ही फायदेमंद ट्रेनिंग है। एग्जीक्यूटिव डायरेक्टर मैडम द्वारा बुधवार, २ अप्रैल को ११.३० बजे इस हैंड्स ऑन कार्यशाला का उदघाटन किया गया था । मैडम ने जॉनसन एंड जॉनसन की टीम का भी आभार व्यक्त किया।
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एम्स गोरखपुर में रेडियोफ्रीक्वेंसी एब्लेशन पर सीएमई का आयोजन, मरीजों को मिलेगा दर्द से राहत का नया तरीका
गोरखपुर। 22 मार्च 2025, एम्स गोरखपुर के एनेस्थीसिया विभाग ने “क्रॉनिक पेन के लिए रेडियोफ्रीक्वेंसी एब्लेशन” विषय पर एक मेडिकल शिक्षा कार्यक्रम (CME) का आयोजन किया। इस कार्यक्रम में इंटरवेंशनल पेन मैनेजमेंट तकनीकों पर चर्चा की गई, जो पुराने और गंभीर दर्द से राहत देने में मदद करती हैं।
क्या है रेडियोफ्रीक्वेंसी एब्लेशन (RFA)?
रेडियोफ्रीक्वेंसी एब्लेशन (RFA) एक आधुनिक तकनीक है, जो न्यूनतम सर्जरी के जरिए मरीजों के दर्द को कम करने में मदद करती है। यह तकनीक खासतौर पर नसों से जुड़े दर्द, ट्राइजेमिनल न्यूराल्जिया, कैंसर दर्द और जोड़ों के दर्द के लिए उपयोगी होती है।
विशेषज्ञों ने दिए महत्वपूर्ण व्याख्यान
सीएमई में देशभर से आए विशेषज्ञों ने विभिन्न प्रकार के दर्द और उनके इलाज पर चर्चा की। इस दौरान कन्वेंशनल, पल्स्ड और कूल्ड आरएफए जैसी उन्नत तकनीकों के बारे में बताया गया। कार्यक्रम में मौजूद डॉक्टरों को ऑपरेशन थिएटर में लाइव केस डेमोंस्ट्रेशन देखने का भी अवसर मिला।
कार्यक्रम के मुख्य वक्ता:
प्रो. (डॉ.) विक्रम वर्धन (आयोजन अध्यक्ष, एम्स गोरखपुर) – “RFA तकनीक दर्द से राहत के लिए एक क्रांतिकारी बदलाव है। यह मरीजों को लंबे समय तक दवाइयों या बड़ी सर्जरी से बचने में मदद कर सकती है।”
प्रो. (डॉ.) अजीत कुमार (एम्स ऋषिकेश) – “यह तकनीक पीठ दर्द, घुटनों के ऑस्टियोआर्थराइटिस और कैंसर दर्द के लिए बहुत फायदेमंद है।”
अन्य विशेषज्ञों ने भी अपने अनुभव साझा किए:
प्रो. (डॉ.) संतोष कुमार शर्मा (एम्स गोरखपुर) – न्यूरोपैथिक पेन और गसेरियन गैंग्लियन आरएफए
डॉ. रोहित लाहौरी (जम्मू) – कैंसर पेन और हिप पेन के लिए कूल्ड आरएफए
डॉ. प्रतिभा सिंह – घुटने के दर्द के लिए कूल्ड आरएफए
डॉ. दलजीत सिंह – कमर दर्द के लिए आरएफए
डॉ. बैभव भंडारी (बरेली) – आरएफए के विभिन्न प्रकार (कन्वेंशनल, PRFA, कूल्ड)
प्रो. (डॉ.) अनुराग अग्रवाल (आरएमएलआईएमएस, लखनऊ) – ट्राइजेमिनल न्यूराल्जिया के लिए इंटरवेंशनल तकनीकें
एम्स गोरखपुर का बड़ा कदम
सीएमई में शामिल डॉक्टरों और विशेषज्ञों ने इस बात पर जोर दिया कि एम्स गोरखपुर उन्नत दर्द प्रबंधन सेवाओं को आम लोगों तक पहुंचाने के लिए प्रतिबद्ध है।
एम्स गोरखपुर के डॉ. रवि शंकर शर्मा ने बताया कि अस्पताल क्रॉनिक पेन मैनेजमेंट को नियमित चिकित्सा प्रक्रिया में शामिल कर रहा है, जिससे मरीजों को बेहतर और किफायती इलाज मिल सके।
क्या मिलेगा मरीजों को फायदा?
दर्द से दीर्घकालिक राहत
सर्जरी की जरूरत नहीं
न्यूनतम दवाई पर निर्भरता
कम खर्च में प्रभावी इलाज
*एम्स गोरखपुर के कार्यकारी निदेशक मेजर जनरल प्रो. (डॉ.) विभा दत्ता* ने इस सीएमई की सराहना करते हुए कहा, “यह कार्यक्रम इंटरवेंशनल पेन मैनेजमेंट तकनीकों के लिए एक महत्वपूर्ण पहल है। इस सीएमई के जरिए एम्स गोरखपुर ने दर्द से जूझ रहे मरीजों के लिए एक नई उम्मीद जगाई है। एम्स गोरखपुर उन्नत चिकित्सा तकनीकों को आमजन तक पहुंचाने में अग्रणी भूमिका निभा रहा है।”
यह संस्थान आधुनिक इंटरवेंशनल पेन मैनेजमेंट तकनीकों को सभी के लिए सुलभ बनाने की दिशा में लगातार काम कर रहा है। -

एम्स गोरखपुर में पहली बार बड़ी सर्जरी, मरीज को मिला नया जीवन
गोरखपुर। एम्स गोरखपुर के डॉक्टरों ने पहली बार एक जटिल सर्जरी “D2 Radical Esophagogastrectomy” को सफलतापूर्वक अंजाम दिया। यह ऑपरेशन एक 67 वर्षिय खजनी निवासी मरीज पर किया गया, जो लंबे समय से खाने में परेशानी झेल रहा था।
“मरीज की समस्या और बीमारी की पहचान”
मरीज को खाना निगलने में दिक्कत हो रही थी, जो धीरे-धीरे इतनी बढ़ गई कि वह सिर्फ दूध और पानी पी सकते थे। कई अस्पतालों में इलाज कराने के बावजूद बीमारी का सही कारण नहीं पता चल पा रहा था।
एम्स गोरखपुर के डॉक्टरों ने एंडोस्कोपी की, जिससे पता चला कि मरीज को खाने की नली और पेट के जोड़ पर कैंसर है। बायोप्सी और सीटी स्कैन से इस बीमारी की पुष्टि हुई।
“सर्जरी का फैसला और प्रक्रिया”
सर्जरी से पहले इस केस पर पीजी मीटिंग में विस्तार से चर्चा की गई।
डॉ. गौरव गुप्ता के साथ डॉ. रवि गुप्ता, डॉ. धर्मेंद्र पीपल, डॉ. मुकुल सिंह, डॉ. हरिकेश यादव, डॉ. रजनीश, डॉ. शाहनवाज और डॉ. मनीष कुमार ने सर्जरी की योजना बनाई।कैंसर को पूरी तरह हटाने के लिए डॉक्टरों ने D2 Radical Esophagogastrectomy नामक सर्जरी करने का फैसला किया। इस सर्जरी में –
*मरीज का पूरा पेट और खाने की नली का निचला हिस्सा हटा दिया गया।
*नई खाने की नली बनाई गई और आंत से जोड़ा गया ताकि मरीज फिर से भोजन कर सकें।“5 घंटे चला ऑपरेशन, मरीज अब स्वस्थ”
– डॉ. गौरव गुप्ता (सर्जरी विभागाध्यक्ष) के नेतृत्व में डॉ. रजनीश, डॉ. रवि, डॉ. आदित्य, डॉ. तनुश्री, डॉ. राजेश और एनेस्थीसिया टीम के सहयोग से यह ऑपरेशन सफलतापूर्वक किया गया।
डॉ. विक्रम वर्धन, डॉ. संतोष कुमार और डॉ. गणेश निमजे (एनेस्थीसिया विभाग) ने मरीज को बेहोश करने में अहम भूमिका निभाई।
– सर्जरी में आधुनिक तकनीकों का इस्तेमाल हुआ, जिससे ऑपरेशन जल्दी और सुरक्षित हुआ।
– मरीज को **2 दिन आईसीयू में रखा गया**, अब वह स्वस्थ हैं और जल्द ही डिस्चार्ज किए जाएंगे।
अब मरीज पूरी तरह ठीक हैं और फिर से खाना खा सकते हैं, जिससे उनका और उनके परिवार का जीवन सामान्य हो गया है।
एम्स गोरखपुर की कार्यकारी निदेशक मेजर जनरल डॉ. विभा दत्ता ने सर्जरी विभाग की पूरी टीम को इस उपलब्धि के लिए बधाई दी और कहा कि यह संस्थान के लिए एक महत्वपूर्ण उपलब्धि है। उन्होंने एम्स गोरखपुर में इस तरह की जटिल सर्जरी की सफलता को मरीजों के लिए बड़ी राहत बताया। अब यहां कैंसर जैसी जटिल बीमारियों का इलाज भी कम खर्च में और सफलता के साथ किया जा सकता है।






