Category: हेल्थ
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एम्स गोरखपुर में पहली बार सूजनयुक्त आंत्र रोग या आंतों का सूजन संबंधी रोग (IBD) के इलाज में बड़ी उपलब्धि
सादा, सुपाच्य भोजन लें
1. पहले चरण में बड़ी आंत को निकाल दिया जाता है।
मरीज की कहानी :
IBD क्या है ?
इस सर्जरी का महत्व :
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इनर व्हील क्लब के संवाद में गूंजी नारी आत्म-स्वीकृति की पुकार
“किशोरियों से स्वास्थ्य पर नहीं रही चुप्पी, संवाद से टूटीं वर्जनाएँ”

गोरखपुर। इनर व्हील क्लब, गोरखपुर द्वारा सेवा वर्ष के प्रमुख सेवा प्रकल्प के अंतर्गत शुक्रवार को गंगोत्री देवी महिला महाविद्यालय एवं स्कूल ऑफ नर्सिंग, अलहदादपुर में “किशोरियों हेतु स्वास्थ्य संवाद” विषयक जन-जागरूकता कार्यक्रम अत्यंत गरिमामई एवं प्रेरणास्पद वातावरण में संपन्न हुआ। यह आयोजन क्लब की संकल्पबद्धता, समाज के प्रति उसकी जागरूकता और किशोरियों के स्वास्थ्य तथा मानसिक सशक्तिकरण के प्रति गहन संवेदना का प्रत्यक्ष उदाहरण बनकर सामने आया। कार्यक्रम में शहर की अनेक प्रतिष्ठित महिलाओं, छात्राओं एवं शिक्षिकाओं की सक्रिय सहभागिता रही, जिन्होंने इस संवादमयी आयोजन को व्याख्यान व आत्मिक यात्रा के रूप में अनुभव किया। कार्यक्रम में प्रमुख वक्ता के रूप में आमंत्रित वरिष्ठ स्त्री रोग विशेषज्ञ डॉ. सुरहीता करीम ने अपने अनुभवों की सघनता और मानवीय संवेदना के साथ किशोरियों से संवाद करते हुए कहा कि यह आयु जीवन की वह संवेदनशील अवस्था है जहाँ शरीर परिवर्तन के साथ मानसिक द्वंद्व भी जन्म लेते हैं। यदि इन्हें समय रहते मार्गदर्शन, स्वास्थ्य ज्ञान और आत्मविश्वास न मिले तो ये असमंजस भविष्य की बाधा बन सकता है। उन्होंने मासिक चक्र, हार्मोनल असंतुलन, पीसीओएस जैसी समस्याओं पर स्पष्ट वैज्ञानिक दृष्टिकोण रखते हुए किशोरियों को अपने शरीर से प्रेम करने, संवाद करने और सामाजिक वर्जनाओं से ऊपर उठने की प्रेरणा दी। उन्होंने कहा कि किशोरियाँ केवल भावी माताएँ नहीं, समाज की मूलधारा की रचनाकार हैं। वहीं उर्वरता एवं महिला स्वास्थ्य विशेषज्ञ डॉ. अमृता जयपुरियार ने अपने विचार प्रकट करते हुए ‘ए.बी.सी.डी.’ – अर्थात् जागरूकता, शरीर संबंधी साक्षरता, संवाद एवं निर्णय – को स्त्री स्वास्थ्य और आत्मबल के चार स्तंभ बताया। उन्होंने कहा कि फर्टिलिटी कोई गूढ़ जैविक प्रक्रिया मात्र नहीं, यह आत्मचेतना, निर्णय की स्वतंत्रता और संपूर्ण स्त्री अस्मिता का प्रतीक है। उन्होंने किशोरियों को आह्वान किया कि वे अपने मन में उठते प्रश्नों को दबाएँ नहीं, बल्कि उन्हें प्रकट करें, समाधान खोजें और अपने जीवन के प्रति सजग बनें। उन्होंने फर्टिलिटी को मातृत्व से पहले आत्मबोध की अवस्था कहा और स्वास्थ्य को जीवन की प्राथमिकता बनाने का संदेश दिया।
इस सशक्त आयोजन की सूत्रधार रही इनर व्हील क्लब गोरखपुर की सचिव श्रीमती रीना त्रिपाठी, जिनका संयोजन, मंच संचालन एवं समन्वय अत्यंत प्रभावशाली, सशक्त और संवेदनशील रहा। उनके द्वारा तैयार किए गए इस आयोजन की प्रत्येक रचना, प्रत्येक संवाद और प्रत्येक क्षण में संगठनात्मक दक्षता एवं मानवीय जुड़ाव झलकता रहा। उन्होंने न केवल अतिथियों का भावनापूर्ण स्वागत किया, बल्कि छात्राओं के साथ गहन भावनात्मक संवाद भी स्थापित किया, जिससे संपूर्ण कार्यक्रम में जीवंतता और आत्मीयता का संचार हुआ। कार्यक्रम की अध्यक्षता करते हुए इनर व्हील क्लब गोरखपुर की अध्यक्षा श्रीमती कविता त्रिपाठी ने अपने उद्घाटन वक्तव्य में कहा कि आज के बदलते सामाजिक परिप्रेक्ष्य में किशोरियों को केवल अकादमिक शिक्षा नहीं, वरन् जीवन और शरीर की भाषा समझने की आवश्यकता है। उन्होंने कहा कि यह संवाद केवल स्वास्थ्य जागरूकता का नहीं, बल्कि भावी नारी को उसकी आत्मचेतना से जोड़ने का सेतु है। श्रीमती त्रिपाठी ने नारी स्वास्थ्य के सामाजिक पक्ष, मानसिक सशक्तिकरण एवं संवाद के अभाव पर विचार प्रकट करते हुए भविष्य में ऐसे और आयोजन करने की प्रतिबद्धता दोहराई।
इस गरिमामयी अवसर पर श्रीमती हनी श्रीवास्तव, श्रीमती ऋचा त्रिपाठी, श्रीमती पल्लवी शुक्ला, श्रीमती आभा भगत, परम् प्रीत जी सहित कई शिक्षिकाएँ और समाजसेविकाएँ सादर उपस्थित रहीं, जिन्होंने आयोजन को अपनी गरिमामयी उपस्थिति एवं सार्थक विचारों से समृद्ध किया। छात्राओं ने भी प्रश्नोत्तर सत्र में उत्साहपूर्वक सहभागिता निभाई और डॉक्टरों से खुलकर संवाद कर उन विषयों पर प्रश्न पूछे, जिन पर सामान्यतः चुप्पी रहती है।
इस अवसर पर महाविद्यालय के प्राचार्य डॉक्टर पूनम शुक्ला ने बताया यह आयोजन उत्तर प्रदेश इसार संस्था द्वारा मनाए जा रहे विश्व कृत्रिम गर्भाधान दिवस की एक सामाजिक, शैक्षिक और संवेदनशील कड़ी के रूप में प्रस्तुत हुआ, जो “स्वस्थ तन, सजग मन और निर्भीक आत्मा की ओर बढ़ता एक सामाजिक संकल्प” बन गया। इनर व्हील क्लब, गोरखपुर की यह पहल निश्चित ही नारी सशक्तिकरण, स्वास्थ्य संवेदना और समाज जागरूकता के क्षेत्र में एक अनुकरणीय उदाहरण के रूप में याद की जाएगी।
कार्यक्रम मे महाविद्यालय के व्यवस्थापक आशुतोष मिश्र, नर्सिंग विभाग के प्राचार्य प्रकाश सिंह चौधरी, डॉ प्रियंका त्रिपाठी, डॉ आभा गुप्ता, डॉ रेनू गौड़, डॉ कुमुद त्रिपाठी, डॉ अजिता श्रीवास्तव, डॉ शिवांगी त्रिपाठी, डॉ आमना खातून, मधु भट्ट,अमिरुन निशा, डॉ शीला त्रिपाठी, ममता मौर्या,डॉ प्रत्या उपाध्याय, विकास गुप्ता, अलका चौधरी, अर्पिता शर्मा, श्वेता जोशवा समेत सभी शिक्षिकाएं वह स्टाफ मौजूद रहीं।
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15 वर्षों से चलने में असमर्थ व्यक्ति को एम्स गोरखपुर ने दी नई ज़िंदगी
गोरखपुर: जुलाई 2025। एम्स गोरखपुर ने एक असाधारण उपलब्धि हासिल करते हुए पिछले 15 वर्षों से चलने और खड़े होने में असमर्थ एक मरीज को सफल कूल्हा प्रत्यारोपण (Hip Replacement Surgery) के ज़रिए नई ज़िंदगी दी है। यह जटिल ऑपरेशन एम्स की कार्यकारी निदेशक मेजर जनरल (कार्यान्वित) डॉ. विभा दत्ता के कुशल नेतृत्व और हड्डी रोग विभाग के समर्पित प्रयासों से संभव हो पाया।
मामले का विवरण:
उत्तर प्रदेश के महाराजगंज निवासी 46 वर्षीय यह मरीज वर्ष 2002 में ऊँचाई से गिरकर ‘नेक ऑफ फीमर’ फ्रैक्चर (कूल्हे की हड्डी में गंभीर टूट) का शिकार हुआ था। स्थानीय निजी अस्पताल में प्राथमिक ऑपरेशन के बावजूद, अगले कुछ वर्षों में उसे दोबारा तेज़ दर्द और चलने-फिरने में असुविधा शुरू हो गई। होम्योपैथिक इलाज और अनेक डॉक्टरों से परामर्श लेने के बावजूद समस्या बनी रही। अंततः जब पिछले छह माह से पीड़ा असहनीय हो गई, तब वे एम्स गोरखपुर की हड्डी रोग ओपीडी में पहुँचे।
जांच में पता चला कि कूल्हे के जोड़ की दोनों सतहें पूरी तरह खराब हो चुकी थीं, मांसपेशियां सिकुड़ चुकी थीं, और उनका बायां पैर छोटा हो गया था — जिससे खड़ा होना और चलना लगभग असंभव हो गया था।
सफल सर्जरी:
हड्डी रोग विभागाध्यक्ष प्रो. डॉ. अजय भारती के नेतृत्व में, एनेस्थीसिया विभाग के सहयोग से जटिल कूल्हा प्रत्यारोपण सर्जरी की गई, जो करीब 3.5 घंटे तक चली। ऑपरेशन पूर्णतः सफल रहा और मरीज अब बेहतर रिकवरी की ओर अग्रसर है।
ऑपरेशन टीम में शामिल रहे
हड्डी विभाग से: प्रो. डॉ. अजय भारती, सह-प्रो. डॉ. विवेक कुमार, डॉ. आशुतोष, डॉ. दिलीप, डॉ. दीपक
एनेस्थीसिया विभाग से: विभागाध्यक्ष प्रो. डॉ. संतोष शर्मा, सह-प्रो. डॉ. गणेश निमजेनिदेशक की सराहना:
एम्स की कार्यकारी निदेशक मेजर जनरल डॉ. विभा दत्ता ने इस सराहनीय उपलब्धि पर दोनों विभागों को बधाई दी और कहा,
“इस तरह की जटिल सर्जरी एम्स गोरखपुर की चिकित्सकीय उत्कृष्टता और टीम भावना का प्रमाण है। हम निरंतर ऐसे ही कार्यों से पूर्वांचल के लोगों को जीवन की नई आशा देते रहेंगे।” -

एम्स गोरखपुर में नवजात शिशु की दुर्लभ जन्मजात विकृति की सफल सर्जरी
गोरखपुर, जुलाई 2025। एम्स गोरखपुर में एक दिन के नवजात शिशु की दुर्लभ जन्मजात विकृति की सफल सर्जरी की गई, जो संस्थान के लिए एक उल्लेखनीय उपलब्धि है। यह शिशु एक निजी अस्पताल में जन्मा था, परंतु जन्म से ही उसे मल त्याग का प्राकृतिक छिद्र नहीं था , जिसे चिकित्सकीय भाषा में इम्परफोरेट एनस (Imperforate Anus) कहा जाता है। साथ ही, उसका मूत्रमार्ग अंडकोष के मध्य खुल रहा था और शिश्न छोटा व नीचे की ओर मुड़ा हुआ था, जिसे स्क्रोटल हाइपोस्पेडियस (Scrotal Hypospadias) कहा जाता है।
शिशु की स्थिति गंभीर हो रही थी क्योंकि वह मल विसर्जन नहीं कर पा रहा था और पेट फूल रहा था। बच्चे को रात 11 बजे एम्स की आपातकालीन सेवाओं में लाया गया। आर्थिक रूप से कमजोर परिजनों की सहायता हेतु एम्स ने तत्परता से कार्रवाई की। सर्जरी विभागाध्यक्ष डॉ. गौरव गुप्ता के निर्देशन में शिशु को भर्ती किया गया। नियोनेटल आईसीयू की प्रभारी डॉ. अंचला भारद्वाज ने बाल रोग विभाग की प्रमुख से समन्वय कर नवजात को एनआईसीयू में भर्ती कराया।
12 घंटे के भीतर ही आवश्यक जाँचें और प्रारंभिक चिकित्सा के पश्चात शिशु को ऑपरेशन थिएटर में ले जाया गया। 1500 ग्राम के इस नाजुक शिशु को सुरक्षित रूप से बेहोश करना अत्यंत चुनौतीपूर्ण था, जिसे एनेस्थीसिया विभाग की एसोसिएट प्रोफेसर डॉ. प्रियंका द्विवेदी की अगुवाई में विभागाध्यक्ष डॉ. संतोष कुमार शर्मा, डॉ. भूपेंद्र कुमार, डॉ. विजेता बाजपेयी और डॉ. रविशंकर की टीम ने सफलता से अंजाम दिया।
सर्जरी डॉ. गौरव गुप्ता ने अपनी टीम डॉ. धर्मेंद्र पीपल, डॉ. रजनीश कुमार, डॉ. संदीप कुमार, डॉ. ऐश्वर्या और डॉ. रज़ा के साथ मिलकर की। शिशु के पेट में एक नया मार्ग बनाते हुए कोलोस्टॉमी की गई, ताकि मल निष्कासन संभव हो सके। आगे चलकर, जब शिशु 3–4 महीने का होगा, तब इस स्थिति के लिए दूसरी चरण की सर्जरी की जाएगी।
यह सर्जरी एम्स गोरखपुर में इस प्रकार की जन्मजात विकृति की पहली सर्जरी है, जो संस्थान की नवजात देखभाल एवं सर्जिकल विशेषज्ञता का प्रमाण है।
एम्स गोरखपुर की कार्यकारी निदेशक मेजर जनरल (सेवानिवृत्त) डॉ. विभा दत्ता ने इस सफल सर्जरी के लिए डॉ. गौरव गुप्ता एवं उनकी टीम को हार्दिक बधाई दी है। साथ ही, एनेस्थीसिया एवं पीडियाट्रिक विभाग को भी नवजात की देखभाल व प्रबंधन के लिए सराहना प्रदान की है।
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AIIMS गोरखपुर के अध्ययन से खुलासा , मोटापा और कुपोषण दोनों ही बुजुर्गों की याददाश्त को कर सकते हैं कमजोर
गोरखपुर, जुलाई 2025। AIIMS गोरखपुर के डॉक्टरों ने एक बड़े और अहम अध्ययन में पाया है कि बुजुर्गों में कुपोषण (कम मांसपेशियां) और मोटापा (खासतौर पर पेट के आसपास की चर्बी) – दोनों ही उनकी याददाश्त, ध्यान और सोचने की क्षमता को नुकसान पहुंचा सकते हैं।
यह अध्ययन 60 वर्ष या उससे अधिक उम्र के 1013 बुजुर्गों पर किया गया। सभी की मानसिक क्षमताओं की जांच खास ICMR-MUDRA टूलबॉक्स के जरिए की गई।
डॉक्टरों ने पाया कि जिन बुजुर्गों की बांहें पतली थीं (MUAC कम था), उनमें याददाश्त और भाषा की क्षमता कमजोर मिली। वहीं, जिनके पेट और कमर के आसपास ज्यादा चर्बी थी (WHR अधिक था), उनमें ध्यान, सोचने की ताकत, भाषा और स्मृति – सभी में गिरावट देखी गई।
MUAC और WHR क्या होते हैं?
MUAC (Mid Upper Arm Circumference)
इसका मतलब है – **बांह के बीच वाले हिस्से का घेरा।
यह माप शरीर में मांसपेशियों की मात्रा का संकेत देता है। MUAC कम होना शरीर में कमजोरी या कुपोषण को दर्शाता है। यह माप कंधे और कोहनी के बीच की बांह के बीचों-बीच लिया जाता है।WHR (Waist-Hip Ratio)
इसका मतलब है – कमर और कुल्हे के घेरे का अनुपात।
यह माप शरीर में पेट के आसपास जमा चर्बी (केन्द्रीय मोटापा) का पता लगाने में मदद करता है। कमर का घेरा नापकर उसे कुल्हे के घेरे से भाग दिया जाता है। WHR अधिक होना यह दर्शाता है कि व्यक्ति को भविष्य में शारीरिक और मानसिक बीमारियों का खतरा अधिक हो सकता है।ये दोनों माप साधारण टेप (measuring tape) से आसानी से लिए जा सकते हैं और किसी मशीन की ज़रूरत नहीं होती।
AIIMS गोरखपुर की कार्यकारी निदेशक डॉ. विभा दत्ता ने कहा: “यह शोध बुजुर्गों की जिंदगी को बेहतर बनाने में मददगार हो सकता है। अगर हम ऐसे सरल और सस्ते उपायों को अपनाएं, तो हम समय रहते मानसिक समस्याओं को पहचान सकते हैं। AIIMS गोरखपुर इस तरह के समाज-हितैषी शोधों को हमेशा बढ़ावा देता रहेगा।”अध्ययनकर्ता डॉ. यू. वेंकटेश ने बताया:
“बुजुर्गों में पोषण और व्यायाम का बड़ा महत्व है। अगर हम समय पर कुपोषण या पेट की चर्बी को पहचान लें, तो बुढ़ापे में दिमागी कमजोरी को काफी हद तक रोका जा सकता है। MUAC और WHR जैसे उपाय गांवों में भी आसानी से इस्तेमाल किए जा सकते हैं।”
बुजुर्गों की मानसिक सेहत के लिए पोषण और शरीर की बनावट दोनों जरूरी हैं।
डॉक्टरों और स्वास्थ्यकर्मियों को चाहिए कि वे MUAC और WHR जैसे सरल तरीकों से बुजुर्गों की जांच करें।
इससे समय रहते दिमागी गिरावट को रोका जा सकता है और बुजुर्गों की जिंदगी को बेहतर बनाया जा सकता है।AIIMS गोरखपुर का यह प्रयास न केवल एक बड़ी वैज्ञानिक उपलब्धि है, बल्कि बुजुर्गों की बेहतर देखभाल की दिशा में एक ठोस कदम भी है।
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हम सबके प्रिय डॉ. अभिषो को श्रद्धांजलि : एक अपूरणीय क्षति
गोरखपुर। बी.आर.डी. मेडिकल कॉलेज, गोरखपुर, एनेस्थीसिया विभाग के जूनियर रेजिडेंट डॉ. अभिषो के असमय निधन की दुःखद सूचना से पूरा चिकित्सा समुदाय शोक में डूबा हुआ है। वह न सिर्फ एक कुशल डॉक्टर थे, बल्कि एक सच्चे इंसान, जिम्मेदार सहयोगी और सभी के प्रिय मित्र भी थे।
डॉ. अभिषो की मुस्कुराहट, विनम्रता और अपने कार्य के प्रति उनकी निष्ठा ने उन्हें सभी के दिलों में एक विशेष स्थान दिलाया था। मरीजों की सेवा के प्रति उनका समर्पण और टीम के प्रति उनकी प्रतिबद्धता हमेशा याद रखी जाएगी। उनका जाना हमारे विभाग और पूरे संस्थान के लिए एक ऐसी क्षति है जिसकी भरपाई संभव नहीं।
उनकी स्मृति को नमन करने हेतु 13 जुलाई को शाम 6 बजे ऑडिटोरियम के सामने एक श्रद्धांजलि सभा का आयोजन किया गया, जिसमें कॉलेज के समस्त संकाय सदस्य, रेजिडेंट्स, कर्मचारी एवं छात्रगण उपस्थित रहे। सभी ने नम आँखों से उन्हें अंतिम विदाई दी और उनके साथ बिताए गए पलों को याद किया।
यह सिर्फ एक डॉक्टर की नहीं, एक परिवार के सदस्य की विदाई है। हम सभी उनकी आत्मा की शांति के लिए प्रार्थना करते हैं और उनके परिजनों के प्रति अपनी गहरी संवेदना व्यक्त करते हैं।
डॉ. अभिषो, आप हमारे दिलों में हमेशा जीवित रहेंगे। आपकी मुस्कान, आपकी सेवा और आपकी यादें अमर रहेंगी।
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6.75 लाख घरों तक जाएंगी स्वास्थ्य टीम, स्वस्थ व्यवहार से संचारी रोगों को हराने का देंगी संदेश
जिले में इकतीस जुलाई तक चलने वाले दस्तक अभियान का बसंतपुर यूपीएचसी से हुआ आगाज।
सीएमओ ने क्षेत्र भ्रमण कर आशा कार्यकर्ता का बढ़ाया मनोबल, किया संवाद।
गोरखपुर। जिले में विशेष संचारी रोग नियंत्रण माह के तहत शुक्रवार से दस्तक अभियान का भी आगाज हो गया। इकतीस जुलाई तक चलने वाले दस्तक अभियान में स्वास्थ्य विभाग की टीम गोरखपुर के 6.75 लाख घरों तक जाएंगी। टीम द्वारा स्वस्थ व्यवहार अपना कर संचारी रोगों को हराने का संदेश दिया जाएगा। मुख्य चिकित्सा अधिकारी (सीएमओ) डॉ राजेश झा ने बसंतपुर नगरीय स्वास्थ्य केंद्र (यूपीएचसी) से इस अभियान का आगाज किया। उन्होंने बताया कि दस्तक के दौरान संचारी रोगों के प्रति संवेदीकरण के साथ साथ स्वास्थ्य टीम मरीजों को सूचीबद्ध करेंगी और उन्हें इलाज के लिए नजदीकी अस्पताल भेजेंगी। लोगों की आभा आईडी बनाने के साथ साथ जिले के ग्रामीण क्षेत्रों में सत्तर वर्ष या इससे अधिक आयु वर्ग के आयुष्मान कार्ड के छूटे हुए लाभार्थियों की पहचान भी की जाएगी। सीएमओ ने बसंतपुर क्षेत्र का भ्रमण कर आशा कार्यकर्ता का मनोबल बढ़ाया। उन्होंने समुदाय के साथ संवाद किया। इससे पहले आशा कार्यकर्ताओं से बातचीत करते हुए सीएमओ ने कहा कि अभियान का गुणवत्तापूर्ण संचालन किया जाए।
सीएमओ डॉ झा ने बताया कि दस्तक अभियान के दौरान स्वास्थ्य कार्यकर्ता को घर घर भ्रमण के दौरान संचारी रोगों से बचाव, लक्षणों की पहचान और उपचार की सुविधाओं के बारे में लोगों का संवेदीकरण करना है। जिन घरों में पंद्रह वर्ष से कम आयु के बच्चे मिलेंगे, वहां स्टीकर भी लगाना है। साथ ही बुखार, इन्फ्लुएंजा लाइक इलनेस, क्षय रोग, कुष्ठ और फाइलेरिया के लक्षणयुक्त रोगियों की सूची तैयार करना है। इसके अलावा कुपोषित बच्चों और दस्त रोग से ग्रसित बच्चों की भी सूची तैयार करनी है। इन सूचीबद्ध लोगों को इलाज के लिए नजदीकी स्वास्थ्य केंद्र भेजना है ताकि संचारी रोगों का प्रसार रोका जा सके और बच्चों को इन बीमारियों से बचाया जा सके।
डॉ झा ने बताया कि ग्रामीण क्षेत्रों में 3775 टीम, जबकि शहरी क्षेत्रों में 338 टीम को दस्तक अभियान के लिए लगाया गया है। इस दौरान मानसूनी बारिश को देखते हुए मच्छरों से बचाव के संदेश पर विशेष जोर रहेगा। स्वास्थ्य टीम ‘‘हर परिवार करे मच्छरों पर वार’’ का नारा घर घर पहुंचाएंगी। लोगों को बताया जाएगा कि पुराने टायर, प्लास्टिक के कप, कबाड़, बोतल और गमला आदि में पानी इकट्ठा न होने दें। घर, विद्यालय और कार्यस्थल के आसपास पानी जमा न होने दें। नियमित अंतराल पर कूलर, गमले और फ्रीज ट्रे की साफ सफाई करते रहें। घरों में और आसपास गेंदा, तुलसी, नीम, गुलदाउदी और लेमन ग्रास जैसे मच्छर विकर्षी पौधे लगाएं।
इस अवसर पर एसीएमओ आरसीएच डॉ एके चौधरी, एसीएमओ डॉ वीपी पांडेय, डिप्टी सीएमओ डॉ राजेश, जिला मलेरिया अधिकारी अंगद सिंह, जेई एईएस कंसल्टेंट सिद्धेश्वरी सिंह, प्रभारी चिकित्सा अधिकारी डॉ मेधा पांडेय, मलेरिया विभाग व टीबी डिपार्टमेंट सहित विभिन्न संस्थाओं के प्रतिनिधिगण प्रमुख तौर पर मौजूद रहे।
बुखार होने पर सही हस्तक्षेप जरूरी
दस्तक के दौरान बुखार होने पर सही हस्तक्षेप के बारे में खासतौर से जानकारी दी जाती है। लोगों को बताया जाता है कि किसी भी प्रकार का बुखार होने पर अपने मन से दवा लेने या झोलाछाप से इलाज करवाने से बचना है। अगर किसी भी प्रकार का बुखार है तो बिना किसी देरी के 108 नंबर एम्बुलेंस की निःशुल्क सेवा प्राप्त करते हुए निकटतम अस्पताल तक पहुंचे।
अच्छे नतीजे सामने आए
सीएमओ ने बताया कि विशेष संचारी रोग नियंत्रण अभियान और दस्तक अभियान के सकारात्मक नतीजे सामने आए हैं। अभियान के परिणाम स्वरूप जापानी इंसेफेलाइटिस से पिछले पांच वर्षों में कोई भी मृत्यु नहीं हुई है। इंसेफेलाइटिस के मामले भी नाम मात्र रह गए हैं।
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गोरखपुर में योग प्रशिक्षक तैयार कर रहे हैं योग गुरु डॉ० विनय मल्ल
रोइंग के बच्चों ने नौकायन पर किया योग
सूर्य प्रकाश ओझा
गोरखपुर। इंडियन योग फेडरेशन उत्तर प्रदेश चैप्टर एवं डिस्ट्रिक्ट योगासन स्पोर्टस एसोसिएशन, गोरखपुर उत्तर प्रदेश के संयुक्त तत्वाधान में जनपद गोरखपुर में योग ट्रेनर प्रशिक्षित किए रहे हैंlइंडियन योग फेडरेशन उत्तर प्रदेश चैप्टर के सचिव एवं डिस्ट्रिक्ट योगासन स्पोर्ट्स एसोसिएशन,गोरखपुर के अध्यक्ष योग गुरु डॉ0 विनय मल्ल की टीम एवं रोइंग कोच अशोक जी एवं विकास जी के नेतृत्व में रोइंग के बच्चों ने जेटी पर योग कियाl योगाचार्य सुनीता ने कहा कि प्राणायाम से हमें अद्भुत शक्ति मिलती है तथा योगाचार्य मोनिका रावत ने कहा योग को हमें नियमित दिनचर्या में अवश्य शामिल करना चाहिएl रोइंग कोच अशोक जी एवं विकास जी ने कहा प्रत्येक खिलाड़ी को योग को अपने दिनचर्या का हिस्सा बनना चाहिएl बाल योगी भूमि मल्ल, वेदाश्री मल्ल खुशी सिंह, अनन्या सिंह ,पीहू सहगल ने अद्भुत योग का प्रदर्शन कियाl योग गुरु डॉo विनय मल्ल ने कहा कि जिन्हें भी योग का प्रशिक्षण लेकर विभिन्न संस्थाओं में योग कराना है तो वह उनकी टीम से संपर्क कर सकते हैंl कार्यक्रम में योग प्रशिक्षकों में मुकेश साहनी, नीरज मणि त्रिपाठी, बबली मौर्य, पूजा निषाद, नितेश कुमार गुप्ता, अर्चना मद्धेशिया,नीतू जायसवाल,मधु निषाद, प्रियंका गुप्ता, सृष्टि सिंह विशेष योगदान रहाl उक्त सूचना मीडिया प्रभारी पंकज पांडेय ने दिया।
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विद्युत विभाग, गोरखपुर ने अंतर्राष्ट्रीय योग दिवस पर किया सामूहिक योगाभ्यास
गोरखपुर। 21 जून 2025 : विद्युत विभाग, गोरखपुर द्वारा आज 21 जून को 10वां अंतर्राष्ट्रीय योग दिवस उत्साहपूर्वक मनाया गया। इस अवसर पर विभागीय परिसर में सामूहिक योगाभ्यास का आयोजन किया गया, जिसमें अधिकारियों व कर्मचारियों ने बढ़-चढ़कर हिस्सा लिया।
इस योग सत्र का नेतृत्व मुख्य अभियंता व आशुतोष श्रीवास्तव ने किया। उनके साथ अधीक्षण अभियंता लोकेन्द्र बहादुर सिंह एवं अन्य वरिष्ठ अभियंता, तकनीकी स्टाफ तथा कार्यालय कर्मियों ने योगाभ्यास किया। योग प्रशिक्षकों के निर्देशन में सभी प्रतिभागियों ने विभिन्न योगासन, प्राणायाम तथा ध्यान का अभ्यास कर मानसिक और शारीरिक स्वास्थ्य के प्रति अपनी प्रतिबद्धता को दोहराया।
मुख्य अभियंता आशुतोष श्रीवास्तव ने इस अवसर पर कहा, “योग भारतीय संस्कृति की अमूल्य धरोहर है, जो न केवल शरीर को स्वस्थ रखता है, बल्कि मानसिक शांति भी प्रदान करता है। यह पहल विभागीय कर्मियों के स्वास्थ्य और कार्यक्षमता को बेहतर बनाने की दिशा में एक प्रेरणादायक कदम है।”
इस अवसर पर सभी अधिकारियों एवं कर्मचारियों को नियमित रूप से योग को जीवनशैली में अपनाने हेतु प्रोत्साहित किया गया। कार्यक्रम का समापन सकारात्मक ऊर्जा और उत्साह के साथ हुआ।
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एम्स गोरखपुर में अंतर्राष्ट्रीय योग दिवस 2025 के उपलक्ष्य में योग सप्ताह का शुभारंभ
गोरखपुर। 16 जून 2025 : अंतर्राष्ट्रीय योग दिवस के अवसर पर एम्स गोरखपुर में 15 जून से 21 जून 2025 तक चलने वाले योग सप्ताह की शुरुआत हुई। इस वर्ष की थीम ‘वन अर्थ, वन हेल्थ हेतु योग’ रही। यह आयोजन कार्यकारी निदेशक डॉ. विभा दत्ता की पहल पर किया गया है जिनका उद्देश्य योग के माध्यम से संस्थान में स्वास्थ्य, संतुलन एवं मानसिक शांति को बढ़ावा देना है।
16 जून को आयुष विभाग में आयोजित उद्घाटन सत्र में शिक्षकों एवं रेजिडेंट डॉक्टरों ने उत्साहपूर्वक भाग लिया। कार्यक्रम की शुरुआत कॉमन योगा प्रोटोकॉल (CYP) के अभ्यास एवं ध्यान सत्र से हुई, जिसका सभी प्रतिभागियों ने आनंद उठाया।
योग सप्ताह के अंतर्गत प्रतिदिन विभिन्न वर्गों एमबीबीएस छात्रों, नर्सिंग छात्रों, नर्सिंग अधिकारियों, प्रशासनिक कर्मचारियों तथा हाउसकीपिंग एवं सुरक्षा कर्मचारियों के लिए योग एवं ध्यान सत्र आयोजित किए जा रहे हैं। कार्यक्रम का समापन 21 जून 2025 को एक सामूहिक योग प्रदर्शन और रोगियों एवं आमजन हेतु जागरूकता सत्र के साथ होगा।
पूरे सप्ताह चलने वाले इस कार्यक्रम का संयोजन डॉ. एच.एल. भल्ला, डॉ. आराधना सिंह, डॉ. शशिकांत भार्गव एवं श्री अरुण कुमार पाठक द्वारा किया जा रहा है।
यह आयोजन न केवल स्वास्थ्य कर्मियों के बीच शारीरिक व मानसिक स्वास्थ्य के महत्व को रेखांकित करता है, बल्कि एम्स गोरखपुर की समग्र स्वास्थ्य सेवा की प्रतिबद्धता को भी दर्शाता है।










