Category: हेल्थ

  • लकड़ी का लेती थी बच्ची, डॉक्टरों ने निकाला सबसे लंबा ट्राइकोबेजोअर

    लकड़ी का लेती थी बच्ची, डॉक्टरों ने निकाला सबसे लंबा ट्राइकोबेजोअर

    मेडिकल सर्जरी के क्षेत्र में एक महत्वपूर्ण उपलब्धि के रूप में जयपुर के सवाई मान सिंह (एसएमएस) अस्पताल के डॉक्टरों ने एक बड़ी कामयाबी हासिल की. डॉक्टरों ने 14 वर्षीय लड़की के पेट से संभवतः दुनिया का सबसे लंबा ट्राइकोबेज़ोअर (गांठ) निकालने में कामयाबी हासिल की.

    जानकारी के मुताबिक ​​उत्तर प्रदेश के आगरा के बरारा गांव की रहने वाली यह लड़की 10वीं कक्षा की छात्रा है और वह ऐसी बीमारी से पीड़ित थी, जिसमें वह चाक, धागा, मिट्टी, लकड़ी के टुकड़े निगल जाती थी या खा लेती थी. यह आदत उसने दूसरों को देखकर सीखी थी. चिकित्सकीय रूप से इस मनोवैज्ञानिक स्थिति को पिका कहा जाता है. जिसमें व्यक्ति गैर-खाद्य पदार्थों का सेवन करता है. लड़की को सवाई मान सिंह अस्पताल लाए जाने से पहले, उसे एक महीने से अधिक समय से पेट में काफी दर्द और उल्टी हो रही थी. उसकी जांच की गई और उसके बाद डॉक्टरों ने उसके पेट में पेट से लेकर नाभि और पेट के ऊपरी दाहिने हिस्से तक फैला एक सख्त द्रव्यमान पाया.

  • दुर्लभ आनुवांशिक रोग ‘एंजियोडेमा’ से जूझती 28 वर्षीय युवती की AIIMS गोरखपुर में जान बचाई गई

    दुर्लभ आनुवांशिक रोग ‘एंजियोडेमा’ से जूझती 28 वर्षीय युवती की AIIMS गोरखपुर में जान बचाई गई

    “इमरजेंसी विभाग की तत्परता और विशेष उपचार पद्धति से चार दिन में मरीज हुई पूर्णतः स्वस्थ; “

    गोरखपुर। AIIMS गोरखपुर की ट्रॉमा एवं इमरजेंसी मेडिसिन विभाग की टीम ने एक अत्यंत दुर्लभ और जानलेवा आनुवांशिक बीमारी हेरिडिटरी एंजियोडेमा (Hereditary Angioedema) से ग्रसित 28 वर्षीय महिला की जान बचाकर चिकित्सकीय उत्कृष्टता का एक और उदाहरण प्रस्तुत किया है।

    मरीज अत्यधिक चेहरे की सूजन और सांस लेने में गंभीर तकलीफ के साथ इमरजेंसी विभाग में लाई गई थी। तत्काल जांच के बाद स्पष्ट हुआ कि मरीज को आनुवांशिक एंजियोडेमा का तीव्र दौरा पड़ा है — एक ऐसी स्थिति जो जीवन के लिए खतरनाक हो सकती है, खासकर तब जब समय रहते उचित उपचार न मिले।

    गौरतलब है कि इस बीमारी से मरीज पहले भी परेशान रही है और इस बीमारी के चलते उन्होंने अपनी माता को भी खो दिया था, जिससे उनका मानसिक तनाव और बढ़ गया था। लेकिन AIIMS गोरखपुर की इमरजेंसी टीम ने स्थिति की गंभीरता को समझते हुए बिना समय गंवाए तुरंत विशेष उपचार शुरू किया।

    क्या होता है हेरिडिटरी एंजियोडेमा?

    हेरिडिटरी एंजियोडेमा एक दुर्लभ आनुवांशिक बीमारी है, जो शरीर में C1 इनहिबिटर नामक प्रोटीन की कमी या दोषपूर्ण कार्यप्रणाली के कारण होती है। यह स्थिति जीन्स में परिवर्तन के चलते उत्पन्न होती है और अनुमानतः 50,000 में से केवल एक व्यक्ति इससे प्रभावित होता है।

    क्यों खतरनाक है यह बीमारी:

    इसमें श्वसन तंत्र (airway) में सूजन आ जाने के कारण मरीज को सांस लेने में कठिनाई होती है। समय पर इलाज न मिले तो यह जानलेवा हो सकता है।

    चेहरे, गले और शरीर के अन्य हिस्सों में असामान्य सूजन हो सकती है।

    कभी-कभी पूरे शरीर में दाने भी हो सकते हैं, जो खुजली वाले या बिना खुजली के हो सकते हैं।

    सामान्य एलर्जी या सूजन की दवाएं इसमें असर नहीं करतीं। इसके लिए विशेष प्रकार की दवाओं और खून के विशेष अवयवों से इलाज आवश्यक होता है।

    उपचार की विशेषता:

    AIIMS गोरखपुर की ट्रॉमा एवं इमरजेंसी टीम ने मरीज को 24 घंटे निगरानी में रखते हुए उच्च स्तरीय चिकित्सा सुविधा प्रदान की। बीमारी की जटिलता को देखते हुए अन्य विभागों के विशेषज्ञों की भी सहायता ली गई। मरीज को चार दिनों तक गहन निगरानी और उपचार के बाद पूरी तरह स्वस्थ कर घर भेज दिया गया।

    संस्थान के *कार्यकारी निदेशक मेजर जनरल डॉ विभा दत्ता* की सराहना:

    AIIMS गोरखपुर के कार्यकारी निदेशक ने इस दुर्लभ और जटिल बीमारी की समय रहते सफल पहचान और प्रभावी इलाज के लिए पूरी चिकित्सकीय टीम की सराहना की। उन्होंने टीम के समर्पण, क्लिनिकल कौशल और तालमेल की विशेष प्रशंसा करते हुए कहा कि “इस प्रकार के दुर्लभ मामलों में त्वरित निर्णय और समन्वित प्रयास ही मरीज की जान बचाने में निर्णायक भूमिका निभाते हैं।”

    उपचार टीम:

    डॉ. सुहास – ट्रॉमा एवं इमरजेंसी मेडिसिन विभाग

    डॉ. सुनील गुप्ता – चर्म रोग विशेषज्ञ

    डॉ. अखिलेश कुमार – रेजिडेंट डॉक्टर

    डॉ. रजत – रेजिडेंट डॉक्टर

    AIIMS गोरखपुर की यह उपलब्धि न केवल दुर्लभ रोगों की चिकित्सा में संस्थान की क्षमता को दर्शाती है, बल्कि यह भी प्रमाणित करती है कि तत्परता, टीम वर्क और विशेषज्ञता के बल पर किसी भी जटिल परिस्थिति को सफलतापूर्वक संभाला जा सकता है।

  • सीएमओ के निरीक्षण में पीएचसी से गायब मिले डॉक्टर से लेकर स्वीपर तक

    सीएमओ के निरीक्षण में पीएचसी से गायब मिले डॉक्टर से लेकर स्वीपर तक

    कुशीनगर। जिले के तरया सुजान प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र का सीएमओ द्वारा किए गए निरीक्षण में डाक्टर से लेकर स्वीपर तक कुल 11 लोग नदारद मिले।

    मौजमस्ती के साथ लाखों तनख्वाह उठाने वाले प्राइवेट प्रैक्टिस करने में लगे हैं, जनता बेचारी परेशान ।

    जिले में कुछ दिन पहले ही आए मुख्य चिकित्सा अधिकारी बिना किसी औपचारिक सूचना के अपने स्वास्थ्य केंद्रों का निरीक्षण कर हकीकत देख रहे हैं। प्रशंसनीय कदम इसे माना जाना चाहिए और जो हकीकत में उन्हें मौके पर दिखा, उसे पूरी पारदर्शिता के साथ मीडिया को बता दिया। अब डाक्टरों का एनपीए भत्ता बंद कर दिया जाना चाहिए ।

  • फिर डरा रहा कोरोना, दिल्ली से केरल तक बढ़े Covid-19 के मामले; अब तक सामने आए इतने केस

    फिर डरा रहा कोरोना, दिल्ली से केरल तक बढ़े Covid-19 के मामले; अब तक सामने आए इतने केस

    देश में कोरोना के मामले फिर से बढ़ने लगे हैं। दिल्ली हरियाणा गुजरात केरल समेत कई राज्यों में कोविड-19 के मामले सामने आए हैं जिनमें दिल्ली में 23 मामले शामिल हैं। सरकार अस्पतालों में बेड और दवाओं की व्यवस्था सुनिश्चित करने में जुटी है। स्वास्थ्य विभाग ने लोगों को घबराने की आवश्यकता नहीं है सरकार स्थिति से निपटने के लिए तैयार है।

  • एम्स गोरखपुर में मेडिकोलीगल ऑटोप्सी सेवाओं की शुरुआत हेतु शवगृह परिसर का निरीक्षण

    एम्स गोरखपुर में मेडिकोलीगल ऑटोप्सी सेवाओं की शुरुआत हेतु शवगृह परिसर का निरीक्षण

    दिनांक 23 मई 2025 को अपराह्न 1 बजे एम्स गोरखपुर के शवगृह परिसर का निरीक्षण एक समिति द्वारा किया गया, जिसे मुख्य चिकित्साधिकारी (CMO) गोरखपुर द्वारा मेडिकोलीगल ऑटोप्सी सेवाएं प्रारंभ करने के लिए गठित किया गया था।

    समिति में शामिल सदस्य डॉ. राजेश झा, मुख्य चिकित्साधिकारी, गोरखपुर; श्री संजय कुमार पांडे, उप निदेशक, क्षेत्रीय फोरेंसिक विज्ञान प्रयोगशाला, गोरखपुर; श्री योगेन्द्र सिंह, क्षेत्राधिकारी, कैंट; डॉ. मनोज पर्चके, अतिरिक्त प्रोफेसर एवं विभागाध्यक्ष, फोरेंसिक मेडिसिन विभाग, एम्स गोरखपुर थे। निरीक्षण के समय डॉ. अश्विनी चौरसिया, उप मुख्य चिकित्साधिकारी, गोरखपुर तथा डॉ. आशीष सराफ, एसोसिएट प्रोफेसर एवं शवगृह सेवाओं के प्रभारी, फोरेंसिक मेडिसिन विभाग, एम्स गोरखपुर भी उपस्थित रहे।

    समिति ने निरीक्षण के उपरांत एम्स गोरखपुर के शवगृह परिसर में उपलब्ध सुविधाओं पर संतोष व्यक्त किया तथा मेडिकोलीगल ऑटोप्सी सेवाएं आरंभ करने हेतु अनुमति प्रदान करने की संस्तुति की।

    यह उल्लेखनीय है कि यह उपलब्धि मेजर जनरल डॉ. विभा दत्ता, कार्यकारी निदेशक एवं मुख्य कार्यकारी अधिकारी, एम्स गोरखपुर के कुशल मार्गदर्शन, निरंतर प्रयास एवं सहयोग के कारण संभव हो सकी है।

    एम्स गोरखपुर अब शीघ्र ही मेडिकोलीगल ऑटोप्सी सेवाएं प्रारंभ करने की दिशा में अग्रसर होगा, जिससे क्षेत्र में न्यायिक प्रक्रियाओं में सहूलियत और पारदर्शिता सुनिश्चित हो सकेग

  • स्वास्थ्य सेवाओं को सुदृढ़ करने में जन आरोग्य समितियों की अहम भूमिका

    स्वास्थ्य सेवाओं को सुदृढ़ करने में जन आरोग्य समितियों की अहम भूमिका

    “जिले भर की जन आरोग्य समितियों के लिए स्वास्थ्य विभाग ने आयोजित की अभिमुखीकरण कार्यशाला”

    “सीएमओ ने शासन से प्राप्त दिशा निर्देशों के अनुसार गुणवत्तापूर्ण स्वास्थ्य सेवा सुनिश्चित करने के लिए धन खर्च करने को कहा”

    “समिति के पदाधिकारियों ने आसपास के ग्राम पंचायतों के सहयोग से चिकित्सा इकाइयों के विकास आश्वासन दिया”

    “तीन माह बाद फिर से होगी बैठक”

    गोरखपुर। जिले की अट्ठावन जन आरोग्य समितियों के पदाधिकारियों के लिए स्वास्थ्य विभाग ने शुक्रवार को अभिमुखीकरण कार्यशाला का आयोजन किया। बैठक की अध्यक्षता करते हुए मुख्य चिकित्सा अधिकारी डॉ राजेश झा ने कहा कि समितियों को शासन से प्राप्त दिशा निर्देशों के अनुसार गुणवत्तापूर्ण स्वास्थ्य सेवा सुनिश्चित करने के लिए ही धन खर्च करना है। स्वास्थ्य सेवाओं को सुदृढ़ करने में जन आरोग्य समितियों की अहम भूमिका है। समिति के माध्यम से न केवल स्वास्थ्य इकाइयों के आधारभूत संरचना में आमूलचूल परिवर्तन संभव है, बल्कि जनजागरूकता का स्तर बढ़ा कर स्वस्थ समाज का निर्माण भी किया जा सकता है।

    इस मौके पर समिति के पदाधिकारियों ने आसपास के ग्राम पंचायतों के सहयोग से चिकित्सा इकाइयों के विकास आश्वासन दिया। कार्यशाला का स्वागत करते हुए पदाधिकारियों ने हरसंभव सहयोग का आश्वासन दिया। तय हुआ कि तीन माह बाद पुन: बैठक कर सकारात्मक प्रयासों को बढ़ाया जाएगा।

    सीएमओ डॉ झा ने समिति के पदाधिकारियों को विभिन्न स्वास्थ्य कार्यक्रमों के बारे में भी विस्तार से जानकारी दी। उन्होंने बताया कि शीघ्र जांच और इलाज से किसी भी बीमारी को जटिल होने से बचाया जा सकता है। खासतौर से कैंसर की चर्चा करते हुए सीएमओ ने कहा कि समय से पहचान कर इस बीमारी का भी इलाज संभव है। इस दिशा में आयुष्मान आरोग्य मंदिर श्रेणी के अतिरिक्त प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों की अहम भूमिका है। इन केंद्रों पर सभी प्रमुख बीमारियों की जांच और इलाज की सुविधा उपलब्ध है। जन जन तक यह संदेश पहुंचाना होगा कि किसी भी प्रकार की बीमारी होने पर निकटतम स्वास्थ्य केंद्र पर जांच व परामर्श के लिए पहुंच सकते हैं।

    सीएमओ ने बताया कि जन आरोग्य समिति में जिला पंचायत सदस्य या ब्लॉक पंचायत सदस्य अध्यक्ष होते हैं, जबकि प्रभारी चिकित्सा अधिकारी सचिव होते हैं। स्वास्थ्य इकाई पर आधारभूत विकास कार्य व अन्य आवश्यक काम के लिए दोनों लोगों के हस्ताक्षर से पैसे खर्च किये जा सकते हैं। जिले में इस समय क्रियाशील अट्ठावन समिति में से प्रत्येक समिति को करीब सतासी हजार रूपये जारी किये जा रहे हैं। समितियों से कहा गया है कि वह इस धन से मानकों का पालन करते हुए चिकित्सा इकाइयों पर मरीजों की प्राथमिक सुविधा के लिए काम कराएं।

    कार्यक्रम में डीसीपीएम रिपुंजय पांडेय और मंडलीय कम्युनिटी प्रासेस कंसल्टेंट राजीव रंजन ने विशेष सहयोग किया। इस अवसर पर मंडलीय क्वालिटी कंसल्टेंट डॉ जसवंत मल्ल और डीपीएम पंकज आनंद भी मौजूद रहे।

  • ‘‘टीबी की सही समय पर पहचान और शीघ्र इलाज जरूरी’’

    ‘‘टीबी की सही समय पर पहचान और शीघ्र इलाज जरूरी’’

    “राष्ट्रीय क्षय उन्मूलन कार्यक्रम के प्रति जिला क्षय रोग केंद्र गोरखपुर की तरफ से जनजागरूकता की पहल”

    “श्री गोरक्षनाथ मेडिकल कॉलेज हॉस्पिटल एंड रिसर्च सेंटर में एमबीबीएस के विद्यार्थियों का हुआ संवेदीकरण”

    गोरखपुर। टीबी के लक्षणों के आधार पर अगर समय रहते इसकी पहचान और इलाज हो जाए तो देश और समाज को टीबी मुक्त बनाना आसान हो जाएगा। देश के यशस्वी प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अपील पर इस दिशा में लगातार प्रयास किये जा रहे हैं। यह बातें जिला क्षय रोग अधिकारी (डीटीओ) डॉ गणेश यादव ने कहीं। वह महायोगी गोरखनाथ विश्विद्यालय के श्री गोरक्षनाथ मेडिकल कॉलेज हॉस्पिटल एंड रिसर्च सेंटर के एमबीबीएस प्रथम बैच के विद्यार्थियों को सम्बोधित कर रहे थे। मुख्य चिकित्सा अधिकारी डॉ राजेश झा के दिशा निर्देशन में राष्ट्रीय टीबी उन्मूलन कार्यक्रम के प्रति जिला क्षय रोग केंद्र की तरफ से जनजागरूकता की पहल को आगे बढ़ाते हुए विद्यार्थियों का संवेदीकरण किया गया। साथ ही साथ उनसे संवाद करते हुए उनके सवालों का जवाब भी दिया गया।

    डीटीओ डॉ गणेश यादव ने कहा कि टीबी की पहचान कुछ मामलों में जटिल है लेकिन एक बार पहचान हो जाने पर इसका इलाज सरल है। पूरे जनपद में टीबी के जांच व इलाज की सुविधा निःशुल्क उपलब्ध है। अगर किसी को दो सप्ताह से अधिक की खांसी हो, तेजी से वजन गिर रहा हो, भूख न लगती हो, बलगम में खून आ रहा हो या फिर लगातार कमजोरी महसूस हो रही हो तो वह टीबी का भी मरीज हो सकता है। एक अच्छे चिकित्सक को सबसे पहले ऐसे मरीजों की क्लिनिकल डायग्नोसिस करनी चाहिए। डायग्नोसिस के आधार पर माइक्रोस्कोपिक जांच, एक्स रे जांच या फिर सीबीनॉट जांच से टीबी का पता लगाया जा सकता है। सीबीनॉट जांच के जरिये यह भी पता किया जा सकता है कि मरीज ड्रग सेंसिटिव टीबी से पीड़ित है या फिर ड्रग रेसिस्टेंट टीबी से। इस जांच के आधार पर ही इलाज की उपयुक्त अवधि और दवाएं तय की जाती हैं।

    डॉ यादव ने कहा कि अगर टीबी का कोई मरीज प्राइवेट चिकित्सक के यहां भी इलाज करवा रहा है तो उसे निःशुल्क दवाओं और निःशुल्क महंगी जांचों की सुविधा निजी चिकित्सक की सहमति पर स्वास्थ्य विभाग उपलब्ध करवाता है। साथ ही प्रत्येक टीबी मरीज को इलाज की अवधि तक 1000 रुपये प्रति माह की दर से निर्धारित समयावधि पर पोषण के लिए सरकार आर्थिक सहायता देती है। टीबी मरीजों को नोटिफाई करने और उनका इलाज पूरा करवाने पर निजी क्षेत्र के चिकित्सकों को भी 1000 रुपये देने का प्रावधान है। उन्होंने कहा कि इस संवेदीकरण कार्यक्रम के बाद सभी एमबीबीएस के विद्यार्थियों का दायित्व है कि वह अपने आसपास के लोगों का संवेदीकरण करें। टीबी मरीजों की समय से और सटीक पहचान करना सीखें और उनके समय से उपचार के जरिये टीबी का संक्रमण चक्र तोड़ने में अपना योगदान दें।

    इस अवसर पर सेंटर के प्रधानाचार्य डॉ अनुराग श्रीवास्तव और शिक्षकगण ने जिला क्षय रोग केंद्र की टीम का स्वागत किया। संवेदीकरण कार्यक्रम में शिक्षक डॉ राम कुमार, डॉ नीतीश कुमार, डॉ पूजा मिश्रा, जिला पब्लिक प्राइवेट मिक्स समन्वयक अभय नारायण मिश्र, मिर्जा आफताब बेग और स्वास्थ्य संचार विशेषज्ञ वेद प्रकाश पाठक भी मौजूद रहे।

  • मुख्यमंत्री ने की कोविड संक्रमण स्थिति की समीक्षा

    मुख्यमंत्री ने की कोविड संक्रमण स्थिति की समीक्षा

    देश और विदेश में कोविड-19 के नए उपवेरिएंट JN.1 के बढ़़ते मामलों के बीच योगी सरकार ने भी सतर्कता बरतनी शुरू कर दी है. मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने एक उच्च स्तरीय बैठक कर राज्य में कोविड संक्रमण की स्थिति की समीक्षा की. उन्होंने स्वास्थ्य विभाग, चिकित्सा शिक्षा विभाग, जिला प्रशासन और अन्य संबंधित अधिकारियों को अलर्ट मोड में काम करने के निर्देश दिए.

    मुख्यमंत्री ने बैठक में स्पष्ट किया कि भले ही वर्तमान में उत्तर प्रदेश में कोविड संक्रमण को लेकर कोई विशेष चिंता की बात नहीं है, लेकिन विदेशों में बढ़ते मामलों को देखते हुए पूरी सतर्कता और सावधानी बेहद आवश्यक है. मुख्यमंत्री ने कहा कि सावधानी ही सुरक्षा है, इसलिए किसी भी तरह की लापरवाही राज्य हित में नहीं होगी.

  • फिर लौट रहा है कोरोना

    फिर लौट रहा है कोरोना

    कोरोना ने एक बार फिर दुनिया में दस्तक दे दी है. लंबे समय तक शांति के बाद अब एशिया में कोविड के मामले दोबारा तेजी से बढ़ने लगे हैं, खासकर हांगकांग और सिंगापुर जैसे घनी आबादी वाले क्षेत्रों में. इन दोनों देशों में नए मामलों की संख्या बढ़ने पर स्वास्थ्य अधिकारियों ने चेतावनी जारी की है.

    हांगकांग में स्थिति ज्यादा गंभीर नजर आ रही है. शहर के स्वास्थ्य सुरक्षा केंद्र की संचारी रोग शाखा के प्रमुख अल्बर्ट औ ने इस सप्ताह स्थानीय मीडिया को बताया कि कोविड-19 के पॉजिटिव मामलों का प्रतिशत एक साल के उच्चतम स्तर पर पहुंच गया है. केंद्र के आंकड़ों के अनुसार, 3 मई को समाप्त सप्ताह में 31 गंभीर मामले दर्ज किए गए, जो पिछले एक साल में सबसे अधिक हैं.

    वहीं, सिंगापुर में भी हालात चिंताजनक हैं। देश के स्वास्थ्य मंत्रालय ने लगभग एक साल बाद इस महीने संक्रमण के आंकड़ों पर पहला अपडेट जारी किया है. रिपोर्ट के अनुसार, 3 मई तक के सप्ताह में मामलों की अनुमानित संख्या 28% बढ़कर 14,200 हो गई है, जो पिछले सात दिनों की तुलना में काफी अधिक है। सिंगापुर फिलहाल हाई अलर्ट पर है.

  • उत्तर प्रदेश स्वास्थ्य क्षेत्र में उत्कृष्टता की ओर प्रगति करता AIIMS गोरखपुर

    उत्तर प्रदेश स्वास्थ्य क्षेत्र में उत्कृष्टता की ओर प्रगति करता AIIMS गोरखपुर

    संवाददाता: शिशिर श्रीवास्तव

    गोरखपुर, 14 मई 2025। आज पत्रकारों से वार्ता करते हुए एम्स की निदेशक और सीईओ मेजर जनरल (डॉ.) विभा दत्ता ने बताया कि AIIMS गोरखपुर को प्रधानमंत्री स्वास्थ्य सुरक्षा योजना (PMSSY) के तहत 2016 में प्रस्तावित किया गया था, और चौथे चरण AIIMS के तहत 22 जुलाई 2016 को माननीय प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी जी द्वारा इसकी नींव रखी गई थी। तब से यह संस्थान पूर्वी उत्तर प्रदेश में स्वास्थ्य क्षेत्र में उत्कृष्टता की ओर प्रयासरत है। यह संस्थान 112 एकड़ भूमि पर स्थित है, जिसमे ओपीडी सेवाओं की शुरुआत फरवरी 2019 में हुई , और पहला MBBS बैच 50 छात्रों के साथ AIIMS जोधपुर के मार्गदर्शन में शुरू हुआ।

    अस्पताल और रोगी देखभाल:

    संस्थान में 750 बिस्तरों वाला अस्पताल है, जिसमें 500 सामान्य विशेषज्ञता और 250 सुपर-स्पेशलिटी बेड्स हैं। वर्तमान में 550 बिस्तर और 12 मॉड्यूलर ऑपरेशन थिएटर (OTs) पूरी तरह से कार्यात्मक हैं। ओपीडी में आने वाले मरीजों की संख्या 2019 में कुछ सौं से बढ़कर अब लगभग 3500-4000 प्रतिदिन हो गई है, जो 1st फेज के AIIMS में सबसे बेहतरीन है और यह न केवल पूर्वी यूपी बल्कि बिहार और नेपाल के लोगों को भी सेवा प्रदान करता है।
    गंभीर मामलों के लिए डायलिसिस यूनिट, NICU, PICU, MICU, SICU, ACCU और ट्रॉमा ICU जैसी सुविधाएं पूरी तरह से कार्यात्मक हो चुकी हैं।
    कैंसर सर्जरी, जोड़ प्रतिस्थापन (हिप/ घुटना), कोक्लियर इम्प्लांट, फाको, और मैक्सिलो-फेशियल सर्जरी जैसे उन्नत सर्जरी नियमित रूप से की जा रही हैं।

    हाल ही में 4 नए सुपर-स्पेशलिटी ओपीडी शुरू किए गए हैं –
    1. कार्डियोलॉजी,
    2. गैस्ट्रोएंटरोलॉजी,
    3. पेन मेडिसिन,
    4. न्यूरोलॉजी।

    शैक्षिक उपलब्धियां:
    • MBBS पाठ्यक्रम 2019 में 50 सीटों के साथ शुरू हुआ, जिसे अब 125 सीटों तक बढ़ा दिया गया है। पहले बैच (2019) ने मार्च 2025 में अपनी इंटर्नशिप पूरी की। – अगले महीने में उनका दीक्षांत समारोह प्रस्तावित है।
    • 2023 में क्लिनिकल ब्रॉड स्पेशलिटी में पोस्ट-ग्रेजुएट (MD/MS) पाठ्यक्रम की शुरुआत हुई, और वर्तमान में 120 अकादमिक जूनियर रेजिडेंट्स विभिन्न विभागों में काम कर रहे हैं।
    • सुपर स्पेशलिटी DM पाठ्यक्रम 2024 में 4 विषयों में शुरू किए गए हैं:
    o 1. न्यूनाटोलॉजी,
    o 2. पल्मोनरी मेडिसिन,
    o 3. साइकीयाट्री और
    o 4. पेन मेडिसिन।
    • B.Sc. नर्सिंग (60 सीटें/वर्ष) और M.Sc. नर्सिंग (10 सीटें/वर्ष) कार्यक्रम अच्छे से चल रहे हैं।
    • Allied Health Sciences के तहत OT, लैब, रेडियोलॉजी तकनीशियनों के प्रशिक्षण कार्यक्रम को 30 सीटों के लिए स्वीकृति मिल चुकी है, और यह 2025 से शुरू होंगे।
    • कुछ विभागों द्वारा संक्षिप्त प्रमाणपत्र और फैलोशिप पाठ्यक्रमों को Standing Academic Committee द्वारा स्वीकृति मिल चुकी है।
    वर्तमान में कुल 725 मेडिकल छात्र, 120 पोस्ट-ग्रेजुएट रेजिडेंट्स, 212 नर्सिंग छात्र, 86 सीनियर रेजिडेंट्स और 60 नॉन-अकादमिक जूनियर रेजिडेंट्स AIIMS गोरखपुर में किसी न किसी रूप में प्रशिक्षण प्राप्त कर रहे हैं।
    उन्नत चिकित्सा सेवाओं और प्रशिक्षण विधियों के जोड़ने के साथ, संस्थान में NEET (MBBS और MD/MS के प्रवेश परीक्षा) का ओपनिंग रैंक स्तर अब क्रमशः 1000 और 150 के भीतर आ चुका है।
    संस्थान में 29 कार्यात्मक विभाग हैं, जिनमें 115 चिकित्सा और 20 नर्सिंग फैकल्टी सदस्य नियुक्त हैं, जो पूरे भारत से आकर सेवाएं प्रदान कर रहे हैं।
    आज, रोग रोकथाम और तकनीकी शिक्षा के अलावा, AIIMS बहुत से लोगों को रोजगार भी प्रदान कर रहा है।

    अनुसंधान और नवाचार:
    • 42 बाहरी वित्त पोषित अनुसंधान परियोजनाएं (ICMR, UNICEF, BMGF आदि) चल रही हैं।
    • एक अच्छी तरह से सुसज्जित मल्टी-डिसिप्लिनरी रिसर्च यूनिट (MRU) कार्यात्मक है, जो आणविक जीवविज्ञान पर ध्यान केंद्रित करता है।
    सामुदायिक सेवाएं:
    • नियमित स्वास्थ्य कैंप और गांवों में ओपीडी सेवाएं, विशेष रूप से वंचित और जनजातीय क्षेत्रों में, जैसे वंतंगिया समुदायों, शिवपुर और डुमरी खास PHC में आयोजित की जा रही हैं।
    • महिलाओं के स्वास्थ्य कैंप फरवरी 2025 से प्रति शनिवार को आकांक्षी जिलों की विभिन्न PHCs में शुरू किए गए हैं, जिसका उद्देश्य चिकित्सा सेवा प्रदान करना, गर्भाशय ग्रीवा कैंसर स्क्रीनिंग और उच्च जोखिम गर्भावस्था की पहचान करना है।
    • जिला स्वास्थ्य प्रणाली को राष्ट्रीय स्वास्थ्य कार्यक्रमों जैसे परिवार कल्याण, टीकाकरण और U-win पोर्टल, हेपेटाइटिस B और C, तपेदिक उन्मूलन कार्यक्रम, अंधता नियंत्रण कार्यक्रम, एनीमिया मुक्त भारत, नशा मुक्ति, जन्म-मृत्यु रजिस्ट्रियों के उच्च जोखिम मामलों को रेफर करना आदि के माध्यम से समर्थन प्रदान किया जा रहा है।
    प्रशिक्षण के बाद पांच रेजिडेंट्स को उत्तरकाशी में चारधाम यात्रा चिकित्सा स्वास्थ्य आवश्यकताओं के लिए भेजा गया है।

    अन्य सार्वजनिक स्वास्थ्य सेवाएं:
    • आयुष्मान भारत योजना सक्रिय है और 5000 से अधिक लोगों ने AIIMS गोरखपुर से मुफ्त सेवाएं प्राप्त की हैं।
    • पंजीकरण, बिलिंग, फार्मेसी और स्टोर के लिए डिजिटल सिस्टम लागू किया गया है।
    • AMRIT और जन औषधि की दवाइयों के लिए कैंपस में फार्मेसियां।

    हाल की महत्वपूर्ण घटनाएं:
    • Electro-convulsive therapy (ECT) 12 फरवरी 2025 से शुरू की गई।
    • 500-बिस्तरों वाला रात्रि विश्राम स्थल, पावर ग्रिड कॉर्पोरेशन की CSR पहल के तहत भर्ती मरीजों के रिश्तेदारों के लिए शुरू किया गया है, और 18 अप्रैल 2025 को इसका भूमि पूजन माननीय मुख्यमंत्री श्री योगी आदित्यनाथ जी द्वारा किया गया। इसे दो वर्षों के भीतर पूरा होने की उम्मीद है।
    • 18 मार्च 2025 को येलो फीवर वैक्सीनेशन सेंटर का उद्घाटन किया गया—अब यात्रियों को वैक्सीन के लिए लखनऊ जाने की आवश्यकता नहीं है।
    • डेंटल X-ray (OPG) यूनिट 6 मई 2025 को उद्घाटित की गई।
    • एयरफोर्स अस्पताल के साथ MoU (साझेदारी समझौता) हुआ है, ताकि सार्वजनिक स्वास्थ्य सेवाओं का आपसी आदान-प्रदान किया जा सके।
    • कैंसर पर चूहों और कोशिका मॉडल पर उन्नत अनुसंधान और ग्रामीण क्षेत्रों में ‘आयुर्वेद मंदिरों’ की शुरुआत।
    • 30 नए फैकल्टी पदों को स्वीकृति मिल चुकी है और जल्द ही विज्ञापन जारी किया जाएगा।
    • 19 फरवरी 2025 को पहला प्लाज्मा एक्सचेंज किया गया।
    • 3 अप्रैल 2025 को पहला कोक्लियर इम्प्लांट किया गया।

    • 1-2 मार्च 2025 को AIIMS में भारतीय सोसाइटी ऑफ प्रिसीजन मेडिसिन एंड मॉलिक्यूलर मेडिसिन (ISPMMMCON) की पहली राष्ट्रीय सम्मेलन का आयोजन किया गया, जिसमें भारत भर के कई AIIMS और प्रतिष्ठित संस्थानों के विशेषज्ञों ने भाग लिया और जीनोमिक्स, प्रिसीजन मेडिसिन, माइक्रोबायोम, स्टेम सेल, नैनो टेक्नोलॉजी और बायोमार्कर्स पर अपने अनुभव साझा किए।

    • सभी सर्जिकल विभागों द्वारा Anatomy विभाग के सहयोग से Cadaveric Workshop Series का आयोजन (अप्रैल – मई)।
    • 2025 में मेडिकल एजुकेशन यूनिट द्वारा फैकल्टी डेवलपमेंट के लिए चार कार्यशालाएं आयोजित की गईं, जिसमें नजदीकी मेडिकल कॉलेजों BRD, कुशीनगर, देववोरिया के फैकल्टी सदस्य भी शामिल हुए:
    1. ग्रांट लेखन कार्यशाला,
    2. ह्यूमैनिटीज कार्यशाला,
    3. फैकल्टी, नर्सिंग और पोस्ट-ग्रेजुएट्स के लिए मैटरनिटी सिमुलेशन कार्यशाला,
    4. मेडिकल शिक्षा में डिजिटल इंटीग्रेशन कार्यशाला आदि।
     संस्थान ने अप्रैल 2025 में स्वच्छता पखवाड़ा मनाया और न केवल कर्मचारियों और छात्रों में, बल्कि जनता और स्कूलों में भी इस संबंध में जागरूकता फैलायी।
     अंतर-बैच खेल सप्ताह अप्रैल में मनाया गया, जिसमें MBBS और नर्सिंग छात्रों ने विभिन्न बाहरी और आंतरिक खेलों में भाग लिया।
     विश्व टीकाकरण सप्ताह (24 से 30 अप्रैल) मनाया गया और जनता, स्कूलों और शिविरों में विभिन्न तरीकों से जागरूकता पैदा की गई।

    जल्द ही शुरू होने वाली सेवाएं:
    1. रेडिएशन थेरेपी: टेली और ब्रैकीथेरेपी यूनिट और CT सिम्युलेटर 2025 में कार्यशील हो जाएंगे।
    2. DBT द्वारा समर्थित “निदान केंद्र” जनेटिक स्क्रीनिंग और काउंसलिंग के लिए स्वीकृत किया गया है और 2025 में अपनी सेवाएं शुरू करेगा।
    3. इंट्रा-यूटराइन इनसेमिनेशन (IUI) – बांझपन सेवाएं, प्रसूति और स्त्री रोग विभाग द्वारा शुरू की जाएंगी।
    4. सीनियर रेजिडेंट और अकादमिक जूनियर रेजिडेंट (150) पदों को स्वीकृति ।
    5. अल्ट्रासाउंड मशीनों की खरीद प्रक्रिया चल रही है और जल्द ही इसे स्थापित किया जाएगा, ताकि लंबी बुकिंग तिथियों को कम किया जा सके।
    6. संस्थान ने सुपर-स्पेशलिटी सेवाओं को शीघ्र शुरू करने का संकल्प लिया है, जैसे नेफ्रोलॉजी, न्यूरोसर्जरी, यूरोलॉजी, और इनके लिए सुपर-स्पेशलिस्ट नियुक्त कर उन्हें विभागों की स्थापना में सहयोग दिया जाएगा।

    भविष्य की दृष्टि:
    AIIMS गोरखपुर सुपर-स्पेशलिटी सेवाओं के विस्तार, प्रशिक्षण कार्यक्रमों के सुधार और सस्ती स्वास्थ्य सेवाओं के क्षेत्र में योगदान देने के लिए प्रतिबद्ध है। यह संस्थान केवल एक अस्पताल नहीं है, बल्कि सेवा, विज्ञान और मानवता का संगम है। संस्थान का लक्ष्य एक स्वस्थ भारत निर्माण के लिए काम करना है, ताकि प्रत्येक नागरिक को उच्च गुणवत्ता वाली स्वास्थ्य सेवाएं सुलभ हो सकें।