“नगरीय प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र और हनुमान प्रसाद पोद्दार कैंसर अस्पताल में हुआ आयोजन”
गोरखपुर। अन्तर्राष्ट्रीय नर्स डे पर विभिन्न चिकित्सा इकाइयों ने अलग अलग आयोजन कर नर्सेज को सम्मानित किया। इस अवसर पर नगरीय प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र इलाहीबाग और हनुमान प्रसाद पोद्दार कैंसर अस्पताल में विशेष आयोजन किये गये। वक्ताओं ने नर्सेज की भूमिका को सराहा और उन्हें स्वास्थ्य क्षेत्र की रीढ़ की हड्डी बताया।
इलाहीबाग नगरीय प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र पर प्रभारी चिकित्सा अधिकारी डॉ एके वर्मा के दिशा निर्देशन में आयोजन किया गया। इस अवसर पर नर्सेज के सम्मान में दो मिनट तक ताली बजाई गई। साथ ही प्रत्येक नर्स को पुष्प गुच्छ देकर सम्मानित किया गया। इस अवसर पर स्टॉफ नर्स नुजहत परवीन, फार्मासिस्ट हरेंद्र कुमार पाल, स्वास्थ्यकर्मी रमेश कुमार, नौशाद आलम, सुमन सिंह, रेनू यादव और सभी आशा कार्यकर्ता मौजूद रहीं।
हनुमान प्रसाद पोद्दार कैंसर अस्पताल में केक काट कर नर्सेज डे मनाया गया। इस अवसर पर जिला अस्पताल की स्टॉफ नर्स साफिया ने वहां के नर्सेज के बीच पहुंच कर उन्हें सम्मानित किया। उन्होंने कहा कि सरकारी क्षेत्र के साथ साथ निजी क्षेत्र की नर्सेज स्वास्थ्य सेवा के क्षेत्र में दिन रात समर्पित भाव से काम करके लोगों का जीवन बचा रही हैं। इस अवसर पर अस्पताल के चीफ मैनेजर डॉ मुस्तफा खान और अन्य स्टॉफ भी मौजूद रहे।
“डिजिटल हेल्थ मास्टर क्लास में शामिल हुए गोरखपुर के सदर सांसद रवि किशन”
“आयुष्मान भारत डिजिटल मिशन को गति देने के लिए हॉस्पिटल लीडर्स से की गई चर्चा”
“एक ही मंच पर बैठे सरकारी और गैर सरकारी क्षेत्र के प्रतिनिधिगण”
“एएचपीआई के यूपी चैप्टर और रिजेन्सी हेल्थ ग्रुप की मदद से हुआ आयोजन”
गोरखपुर। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व वाली डबल इंजन सरकार जनस्वास्थ्य के प्रति बेहद संवेदनशील और सतर्क है। लोगों को सही से और सम्पूर्ण इलाज मिल सके, इसके लिए प्रधानमंत्री और मुख्यमंत्री की मदद से करोड़ो रुपये लोगों को अकेले गोरखपुर संसदीय क्षेत्र में मिले हैं। प्रधानमंत्री जन आरोग्य आयुष्मान भारत योजना, मुख्यमंत्री जन आरोग्य अभियान और आयुष्मान भारत डिजिटल मिशन को निजी क्षेत्र का भी भरपूर सहयोग मिलने से डबल इंजन सरकार के स्वस्थ भारत के सपने को साकार करना और भी आसान हो जाएगा। यह बातें गोरखपुर जिले के सदर सीट से सांसद रवि किशन शुक्ल ने रविवार को एक निजी होटल में आयोजित डिजिटल हेल्थ मास्टर क्लास को संबोधित करते हुए कहीं।
एसोसिएशन ऑफ हेल्थकेयर प्रोवाइडर्स इंडिया-एएचपीआई के यूपी चैप्टर और रिजेन्सी हेल्थ ग्रुप के सहयोग से हुए इस आयोजन में आयुष्मान भारत डिजिटल मिशन को गति देने के लिए हॉस्पिटल लीडर्स से चर्चा की गई। डिजिटल हेल्थ मास्टर क्लास को कोइटा फाउंडेशन और एएचपीआई ने मिल कर तैयार किया है। सरकारी और गैर सरकारी क्षेत्र के प्रतिनिधिगण पहली बार इस मुद्दे पर एक साथ बैठे और डिजिटल मिशन को सफल बनाने के लिए भावी रणनीति को लेकर संवाद किया।
कार्यक्रम को सम्बोधित करते हुए सदर सांसद ने कहा कि यह बेहद सकारात्मक सोच है कि भारत सरकार द्वारा स्वास्थ्य क्षेत्र में डिजिटल क्रांति लाने का जो स्वप्न देखा गया उसे पूरा करने के लिए निजी क्षेत्र खुद आगे आ रहा है। इसके लिए आयोजक संगठन और सभी चिकित्सक बधाई के पात्र है। सदर सांसद ने आश्वस्त किया कि इस मुहिम में वह हरसंभव सहयोग प्रदान करेंगे। साथ ही अपील की कि ज्यादा से ज्यादा अस्पताल आयुष्मान भारत योजना से सूचीबद्ध होकर आमजन को गुणवत्तापूर्ण स्वास्थ्य सेवा उपलब्ध कराएं और डबल इंजन सरकार के लोकहित के अभियान को मजबूती दें।
कार्यशाला को राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन के मंडलीय कार्यक्रम प्रबंधक अरविंद पांडेय, बीआरडी मेडिकल कॉलेज के चिकित्सा अधीक्षक डॉ गगन गुप्ता, एएचपीआई के निदेशक डॉ सुनील खेत्रपाल, विषय विशेषज्ञ और सैनिक हॉस्पिटल नई दिल्ली के वरिष्ठ परामर्शदाता लेफ्टिनेंट कर्नल डॉ एमएम रामशंकर, एएचपीआई की सचिव डॉ जैनब जैदी, रिजेन्सी हेल्थ ग्रुप से डॉ विजय लक्ष्मी गोपाकुमार, डॉ.संदीप शर्मा और संजीव सिंह आदि ने संबोधित किया और अपनी प्रस्तुति भी दी। कार्यक्रम का कोऑडिˈनेश्न् एवं संचालन डॉ मुस्तफा खान और वेद प्रकाश पाठक ने किया। इस अवसर पर फरहान आलम, साफिया खान, पुष्पेश पाठक, चंदन जोशी समेत सैकड़ों हेल्थकेयर प्रोवाइडर्स के प्रतिनिधिगण मौजूद रहे।
*एबीडीएम, ईएमआर और एचएमआईएस पर हुई चर्चा*
कार्यशाला के दौरान एबीडीएम, इलेक्ट्रॉनिक मेडिकल रिकॉर्ड (ईएमआर) और एचएमआईएस के बारे में विस्तार से चर्चा हुई। एबीडीएम के बारे में बताया गया कि एक बार जब यह मिशन अपनी पूर्णता को प्राप्त कर लेगा तो मरीज कागज रहित रिकॉर्ड्स और पर्चियों से सेवाएं प्राप्त कर सकेंगे। प्रत्येक नागरिक के पास चौदह अंकों का एक यूनिक हेल्थ आईडी होगा जिसके जरिये वह सेवाएं प्राप्त कर पाएगा।
आयुष्मान भारत डिजिटल मिशन के तहत मिलने वाला आयुष्मान भारत हेल्थ एकाउंट डिजिटल मेडिकल रिकॉर्ड का सुरक्षित और सहमति आधारित उपयोग सुनिश्चित करता है। यह आजीवन मान्य, स्वैच्छिक एवं निःशुल्क है। यह अस्पतालों, लैब्स और क्लिनिक्स के बीच इंटरऑपरेबिलिटी को बढ़ावा देता है। यह बेहतर डॉयग्नोसिस और उपचार में सहायक है। इसके जरिये स्वास्थ्य बीमा से सीमलेस इंटीग्रेशन भी हो रहा है।
वक्ताओं ने कहा कि यह मिशन स्वास्थ्य सेवाओं के लिए एकीकृत मंच प्रदान कर रहा है। यह भारत सरकार की एक ऐसी पहल है जो स्वास्थ्य प्रणाली के डिजिटलीकरण का लक्ष्य रखती है। इसमें हेल्थ आईडी, हेल्थ फैसिलिसिटी रजिस्ट्री और हेल्थ प्रोफेशनल रजिस्ट्री जैसे घटक शामिल हैं।
यह भी बताया गया कि आने वाला समय इलेक्ट्रॉनिक रिकॉर्ड और मैनेजमेंट का है। ऐसे में ईएमआर और एचएमआईएस न सिर्फ मरीज के लिए उपयोगी है, बल्कि यह अस्पताल के व्यवसाय को गुणवत्ता से परिपूर्ण बनाएंगे और संस्थानों के प्रति लोगों में विश्वसनीयता भी बढ़ाने का काम करेंगे।
“बीएमजीएफ और जपाइगो की दो सदस्यीय टीम के साथ सीएमओ ने किया दौरा”
“सहीं संदर्भन और गुणवत्तापूर्ण आवश्यक जांचों के लिए होगा काम”
गोरखपुर। जिले की चिकित्सा इकाइयों में लोगों को गुणवत्तापूर्ण स्वास्थ्य सेवाएं देने के लिए दो दिनों में आधा दर्जन से अधिक इकाइयों का निरीक्षण किया गया है। इस कार्य में तकनीकी सहयोग मिल सके, इसके लिए बिल एंड मिलिंडा गेट्स फाउंडेशन (बीएमजीएफ) और जपाइगो की दो सदस्यीय टीम को भी इन इकाइयों को दिखाया गया। टीम के साथ ही मुख्य चिकित्सा अधिकारी डॉ राजेश झा ने भी इन इकाइयों का दौरा किया। उन्होंने बताया कि इन संस्थाओं के तकनीकी सहयोग से सही संदर्भन और गुणवत्तापूर्ण आवश्यक जांचों (डाइग्नोसिस) की दिशा में काम किया जाएगा।
सीएमओ ने बताया कि डॉ गरिमा और डॉ संजय की टीम को साथ लेकर बुधवार को उन्होंने नगरीय प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र बसंतपुर, आयुष्मान आरोग्य मंदिर कालेपुर, पिपराईच सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र और पिपराईच ब्लॉक के अगया आयुष्मान आरोग्य मंदिर का दौरा किया। टीम के दोनों सदस्य पिपराईच ब्लॉक के महराजी आयुष्मान आरोग्य केंद्र भी गये। टीम ने वहां पर ओपीडी, मातृ शिशु स्वास्थ्य सेवाओं, नियमित टीकाकरण समेत सभी सेवाओं की स्थिति को देखा और मौजूद लाभार्थियों के रिकॉर्ड को भी समझा। इसी क्रम में, गुरूवार को टीम ने जिला अस्पताल और भटहट ब्लॉक के कर्महा बुजुर्ग गांव के आयुष्मान आरोग्य मंदिर को देखा। इस दौरान स्वास्थ्य विभाग के साथ टीम ने बैठक भी की है। दो दिन के निरीक्षण के निष्कर्षों के आधार पर प्रभावी कार्ययोजना बनाई जाएगी।
सीएमओ डॉ झा ने बताया कि इस निरीक्षण और भावी कार्ययोजना का उद्देश्य है कि स्वास्थ्य सेवाओं में मनपसंद चुनाव का अधिकार लाभार्थी को प्राप्त हो सके। उन्हें नजदीकी केंद्र पर इलाज मिले और पास में उपलब्ध सेवाओं के लिए भीड़भाड़ में भटकने की जरूरत न पड़े। लाभार्थी के लिए अपेक्षित सेवा और जांच हेतु सही स्थान पर उनका संदर्भन हो और उन्हें समस्त सेवाएं सुविधाजनक माहौल में मिल सकें।
जिला अस्पताल में प्रमुख चिकित्सा अधीक्षक डॉ संजय, आयुष्मान आरोग्य मंदिर पर डीसीपीएम रिपुंजय पांडेय और संबंधित चिकित्सा इकाइयों पर उनके प्रभारी चिकित्सा अधिकारियों की मदद से टीम की विजिट सफल हुई। डॉ झा ने बताया कि यथाशीघ्र प्रभावी कार्ययोजना को अंतिम रूप देकर काम शुरू कर दिया जाएगा।
गोरखपुर। अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान (एम्स) गोरखपुर के दंत शल्य चिकित्सा विभाग ने एक महत्वपूर्ण उपलब्धि हासिल की है। मैक्सिलोफेशियल सर्जन डॉ. शैलेश कुमार और उनकी टीम ने दो घंटे की जटिल सर्जरी कर एक दो वर्षीय बच्चे को फिर से देखने की रोशनी दी। यह बच्चा बिहार के सिवान जिले के खुर्द दरोगा हाता गांव से है, जो एक किसान का पुत्र है।
बच्चे की परेशानी छह महीने की उम्र में शुरू हुई थी, जब बिस्तर से गिरने के बाद उसकी दाहिनी आंख के पास सूजन और हेमेटोमा बन गया। धीरे-धीरे आंख के चारों ओर हड्डी का असामान्य विकास (बोनी एक्सोस्टोसिस) होता गया, जिससे उसकी आंखें बंद होने लगीं और दृष्टि पर असर पड़ा। परिजनों ने कई डॉक्टरों और होम्योपैथिक चिकित्सकों से इलाज करवाया, लेकिन राहत नहीं मिली।
अंततः बच्चा एम्स गोरखपुर की डेंटल ओपीडी में लाया गया, जहां जांच के बाद उसे भर्ती कर लिया गया। डॉ. शैलेश कुमार, जो ओरल एंड मैक्सिलोफेशियल सर्जन और सहायक प्राध्यापक हैं, ने अपनी टीम के साथ दो घंटे की सर्जरी कर आंख के पास बढ़ चुकी हड्डी को सफलतापूर्वक निकाल दिया। ऑपरेशन के बाद बच्चा अब सामान्य रूप से देख पा रहा है और पूरी तरह स्वस्थ है।
इस सर्जरी में डॉ. शैलेश कुमार के साथ सीनियर रेजीडेंट डॉ. प्रवीण सिंह, जूनियर रेजीडेंट डॉ. प्रियंका त्रिपाठी और डॉ. सौरभ सिंह शामिल रहे। एनेस्थीसिया विभाग से प्रोफेसर एवं विभागाध्यक्ष डॉ. विक्रम वर्धन और एकेडमिक जूनियर रेजीडेंट डॉ. अरुंधति ने भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।
एम्स गोरखपुर की कार्यकारी निदेशक प्रो. विभा दत्ता ने इस सफलता पर टीम को बधाई दी और कहा कि अब ऐसे जटिल मामलों के इलाज के लिए मरीजों को दिल्ली या लखनऊ जैसे बड़े शहरों की ओर रुख नहीं करना पड़ेगा।
डॉ. शैलेश कुमार ने बताया कि चेहरे पर किसी भी प्रकार की चोट या असामान्य सूजन को नजरअंदाज नहीं करना चाहिए और तुरंत किसी ओरल एंड मैक्सिलोफेशियल सर्जन से संपर्क करना चाहिए। ये विशेषज्ञ चेहरे, जबड़े और मुंह से संबंधित जटिल सर्जरी के लिए प्रशिक्षित होते हैं।
यह सर्जरी न केवल चिकित्सा क्षेत्र में एम्स गोरखपुर की दक्षता को दर्शाती है, बल्कि क्षेत्रीय मरीजों के लिए भी आशा की किरण है।
“एडी हेल्थ गोरखपुर और सीएमओ गोरखपुर ने किया प्रशिक्षण कार्यशाला का शुभारंभ”
“डेढ़ सौ के बैच में एनेक्सी भवन में प्रशिक्षित किये जा रहे हैं सीएचओ”
गोरखपुर। समुदाय के समग्र स्वास्थ्य देखभाल एवं गुणवत्तापूर्ण स्वास्थ्य सेवाएं सुनिश्चित करने के लिए जिले भर के सामुदायिक स्वास्थ्य अधिकारी (सीएचओ) का प्रशिक्षण एनेक्सी भवन सभागार में सोमवार से शुरू हो गया। एडी हेल्थ गोरखपुर डॉ जयंत कुमार और सीएमओ गोरखपुर डॉ राजेश झा ने कार्यशाला का शुभारंभ किया। इस मौके पर उत्कृष्ट कार्य करने वाले दर्जनों सीएचओ को सम्मानित भी किया गया। डेढ़ डेढ़ सौ सीएचओ का बैच बना कर जिले भर के सभी सीएचओ को प्रशिक्षित किया जाएगा।
इस अवसर पर एडी हेल्थ डॉ जयंत कुमार ने कहा कि बीमारियों की प्राथमिक जांच और स्थानीय स्तर पर उपचार उपलब्ध कराने के मामले में सीएचओ स्वास्थ्य सेवा की रीढ़ हैं। उनके जरिये बारह प्रकार की बीमारियों की स्क्रिनिंग कर विशेषज्ञों से परामर्श दिलवाया जा रहा है। स्वास्थ्य कार्यक्रमों को आगे बढ़ाने में उनकी महत्वपूर्ण भूमिका है। ऐसे में सीएचओ के लिए शुरू हुए प्रशिक्षण कार्यक्रम का समुदाय को सबसे अधिक लाभ मिलेगा और गुणवत्तापूर्ण स्वास्थ्य सेवाएं सुनिश्चित की जा सकेंगी।
सीएमओ डॉ राजेश झा ने बताया कि सीएचओ के स्तर से समुदाय के बीच निरंतर सेवाएं दी जा रही हैं। उन सेवाओं में गुणवत्ता सुनिश्चित हो और उनका अधिकाधिक लाभ समुदाय स्तर पर मिल सके, इसके लिए यह प्रशिक्षण आयोजित किया जा रहा है। इस दौरान मातृ शिशु स्वास्थ्य सेवा, राष्ट्रीय कार्यक्रम, रिपोर्टिंग और गुणवत्ता कार्यक्रम आदि के संबंध में राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन के स्थानीय और लखनऊ से आए विषय विशेषज्ञ उन्हें प्रशिक्षित कर रहे हैं। प्रशिक्षण के पहले दिन जिले में उत्कृष्ट योगदान दे रहे सीएचओ को सम्मानित भी किया गया।
सीएमओ डॉ राजेश झा, अरविंद पांडेय, पंकज आनंद, राजीव रंजन वर्मा, विमल कुमार पांडेय, मनीष कलवानिया, डॉ कुसुम भारती, डॉ जसवंत मल्ल और रिपुंजय पांडेय ने अलग अलग सत्रों में सीएचओ को प्रशिक्षित किया।
*इन्हें मिला सम्मान*
अपने आयुष्मान आरोग्य मंदिर को एनक्वास सर्टिफिकेशन दिलवाने में योगदान के लिए सीएचओ कालेसर कीर्ति लता, सीएचओ लहसड़ी रेनू पांडेय, सीएचओ राजधानी अर्चना सिंह, सीएचओ राघोपट्टी अंशु मिश्रा, सीएचओ बघराई रितु, सीएचओ डोमिनगढ़ शीतल गुप्ता, सीएचओ गौनर रुचिका यादव, सीएचओ लक्ष्मणपुर रीतिका चौधरी, सीएचओ भरतपुर अंजू गौतम, सीएचओ जमुआर मंजू प्रजापति, सीएचओ शेरपुर रवि किरण, सीएचओ बुदैली अमृता गुप्ता, सीएचओ नुरुद्दीन चक दिव्या मिश्रा, सीएचओ मदरिया गीता गिरी, सीएचओ अहिरौली कीर्ति राणा और सीएचओ फुलवरिया अनिल कुमार को सम्मानित किया गया । इसके अलावा सभी कार्यक्रम में उत्कृष्ट योगदान के लिए महराजी की सीएचओ सुषमा सिंह, एनसीडी में बेहतर कार्य के लिए सीएचओ विशुनपुरा अल्पना सिंह, सीएचओ खरखुटा मुकेश जाखड़ और सीएचओ मोहनाग कुमारी नीलम को सम्मानित किया गया। ई संजीवनी के क्षेत्र में उत्कृष्ट योगदान के लिए सीएचओ जोतबगही आबिद अली, सीएचओ भखरा दिव्यांशी यादव और सीएचओ पकड़ी बरौली उज्जवल दूबे को सम्मानित किया गया। डेली रिपोर्टिंग एंट्री में बेहतर कार्य के लिए सीएचओ मऊ खुर्द रितुजा पाल, सीएचओ गुलरिहा ज्योति प्रजापति और सीएचओ बराठा कविता सिंह को सम्मानित किया गया।
“सीएमओ के निरीक्षण में इस्लामचक नगरीय स्वास्थ्य केंद्र पर समय से उपस्थित नहीं मिले चिकित्सक और कर्मचारी, वेतन रोका गया”
“बसंतपुर में सबकुछ ठीकठाक मिला, तुर्कमानपुर नगरीय स्वास्थ्य केंद्र के लिए नया भवन खोजने का सुझाव”
“बेतियाहाता में चिकित्सक की होगी नियुक्ति”
गोरखपुर। मुख्य चिकित्सा अधिकारी डॉ राजेश झा ने रविवार को नगरीय स्वास्थ्य केंद्र इस्लामचक, बसंतपुर, बेतियाहाता और तुर्कमानपुर का निरीक्षण किया। निरीक्षण के दौरान इस्लामचक के मुख्यमंत्री आरोग्य मेले में चिकित्सक और कई स्टॉफ समय से नहीं पहुंचे। सीएमओ ने नाराजगी जताते हुए कड़ी कार्रवाई का निर्देश दिया। उन्होंने संतोषजनक उत्तर मिलने तक सभी संबंधित का वेतन रोकने का भी निर्देश दिया। सीएमओ को बसंतपुर और तुर्कमानपुर मेले में सभी स्टॉफ मौजूद मिले। तुर्कमानपुर में भवन की खराब स्थिति को देखते हुए नया भवन खोजने का सीएमओ द्वारा सुझाव दिया गया। बेतियाहाता नगरीय स्वास्थ्य केंद्र के निरीक्षण में चिकित्सक का पद खाली मिलने पर सीएमओ ने भर्ती का आश्वासन दिया। उन्होंने बताया कि यथाशीघ्र नगरीय स्वास्थ्य केंद्रों पर भी बायोमैट्रिक हाजिरी शुरू होगी। जो लोग इस हाजिरी और काम में लापरवाही करेंगे उनके खिलाफ कार्रवाई की जाएगी।
सीएमओं ने बताया कि सीएमओ कार्यालय और ब्लॉक स्तरीय अस्पतालों में बायोमैट्रिक हाजिरी शुरू कर दी गई है। इसकी निगरानी वरिष्ठ अधिकारी और वह स्वयं कर रहे हैं। इस व्यवस्था को नगरीय स्वास्थ्य केंद्रों पर भी लागू किया जाएगी। सभी केंद्रों पर सुबह नौ बजे से शाम चार बजे तक उपस्थिति अनिवार्य है। इस्लामचक के समय से न पहुंचने वाले चिकित्सक और कर्मियों से जवाब मांगा गया है और उत्तर मिलने तक वेतन रोक दिया गया है। बसंतपुर में सभी व्यवस्थाएं मुकम्मल मिलीं। मरीजों से अच्छा फीडबैक मिला। तुर्कमानपुर में सेवाएं अच्छी मिलीं, लेकिन भवन बदलने की आवश्यकता है। नया भवन खोजा जाएगा। बेतियाहाता में चिकित्सक के खाली पद पर नियमानुसार आवेदन कर भर्ती होगी।
सीएमओं ने कहा कि पर्यवेक्षण से जुड़े सभी संबंधित अधिकारीगण से कहा गया है कि मुख्यमंत्री आरोग्य मेले में चिकित्सक, स्टॉफ और दवाओं की कोई कमी नहीं रहनी चाहिए। समय पर सभी स्वास्थ्य केंद्रों पर चिकित्सक और स्टॉफ मौजूद रहें। केंद्र पर आते और ड्यूटी पूरी कर जाते समय बायोमैट्रिक हाजिरी अवश्य लगाएं।
इस अवसर पर एसीएमओ आरसीएच डॉ एके चौधरी और शहरी स्वास्थ्य मिशन समन्वयक सुरेश सिंह चौहान भी मौजूद रहें।
11 गांवों में एम्स गोरखपुर और सहयोगियों द्वारा सामुदायिक स्वास्थ्य के विभिन्न आयामों पर होगा अध्ययन
तीन महीने का डेटा इकट्ठा इकट्ठा करने के लिए लगाए गए हैं पंद्रह डेटा इन्यूमरेटर
गोरखपुर। अतिरिक्त प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र डुमारी खास से शुक्रवार को हेल्थ एंड डेमोग्राफिक सर्विलांस सिस्टम (एचडीएसएस) का शुभारंभ कर दिया गया। मुख्य चिकित्सा अधिकारी डॉ राजेश झा और राज्य सर्विलांस अधिकारी डॉ विकासेंदु अग्रवाल ने एचडीएसएस का उद्घाटन किया। इसके तहत अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान (एम्स) गोरखपुर, राज्य स्वास्थ्य विभाग और येल यूनिवर्सिटी द्वारा सामुदायिक स्वास्थ्य के विभिन्न आयामों पर अध्ययन किया जाना है। इसके लिए क्षेत्र के ग्यारह गांवों और शहर के झरना टोला स्थित गिरधरगंज में तीन महीने का डेटा इकट्ठा किया जाएगा। गांवों में डेटा इकट्ठा करने के लिए पंद्रह डेटा इन्यूमरेटर रखे गए हैं। सीएमओ ने डुमरी खास अतिरिक्त पीएचसी और सरदारनगर पीएचसी का निरीक्षण भी किया।
मुख्य चिकित्सा अधिकारी ने बताया कि इस अध्ययन के माध्यम से कई उपयोगी निष्कर्ष निकलने की संभावना है, जो सामुदायिक हित में कारगर साबित होंगे। राज्य स्वास्थ्य विभाग इस अध्ययन में महत्वपूर्ण सहयोगी की भूमिका निभाएगा। एचडीएसएस के उद्घाटन कार्यक्रम में ग्यारह गांवों के प्रधान, आशा, एएनएम और संबंधित सीएचओ भी मौजूद रहे और उन्हें अध्ययन में हरसंभव सहयोग का निर्देश दिया गया है। इस अवसर पर आरएमआरसी के निदेशक डॉ हरिशंकर जोशी और अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान एम्स के कम्युनिटी मेडिसिन डिपार्टमेंट के विभागाध्यक्ष डॉ आनंद मोहन दीक्षित ने भी अध्ययन की महत्ता पर प्रकाश डाला।
सरदारनगर पीएचसी के प्रभारी चिकित्सा अधिकारी डॉ हरिओम पांडेय ने बताया कि फिलहाल के लिए तीन महीने के डेटा पर काम होने जा रहा है। आगे भी अतिरिक्त शोध और अध्ययन होंगे। मुख्य चिकित्सा अधिकारी के दिशा निर्देशन में प्रत्येक अध्ययन और शोध कार्य को पूरा सहयोग प्रदान किया जाएगा। मातृ शिशु मृत्यु, प्रवास, लिंगानुपात, स्वास्थ्य सेवाओं समेत कई पक्षों को लेकर अध्ययन होने जा रहा है। डुमरी खास का यह अध्ययन इस मामले में भी महत्वपूर्ण है कि यहां राज्य का स्वास्थ्य महकमा भी प्रमुख साझीदार है। गांव में उच्चाधिकारियों द्वारा शिलापट्ट का अनावरण कर इस कार्य का शुभारंभ किया गया है।
“सीएमओ ने गांव में एम्स गोरखपुर और चरगांवा पीएचसी के संयुक्त स्वास्थ्य शिविर में दी जानकारी”
गोरखपुर। अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान (एम्स) गोरखपुर और चरगांवा प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र की तरफ से जंगल तिकोनिया नंबर तीन (वनटांगिया गांव) में बुधवार को स्वास्थ्य शिविर का आयोजन किया गया। शिविर का निरीक्षण करने पहुंचे जनपद के सीएमओ डॉ राजेश झा ने बताया कि गांव में शीघ्र ही एक स्वास्थ्य उपकेंद्र खोला जाएगा। आगे चल कर इस उपकेंद्र को आयुष्मान आरोग्य मंदिर में भी अपग्रेड किया जाएगा। सीएमओ ने कहा कि किराये का भवन मिलते ही गांव में स्वास्थ्य उपकेंद्र शुरू करा दिया जाएगा। गांव के प्रधान ने केंद्र के लिए किराये का भवन दिलवाने में मदद का आश्वासन दिया है।
मुख्य चिकित्सा अधिकारी डॉ राजेश झा ने बताया कि स्वास्थ्य उपकेंद्र खुलने से वनटांगिया समुदाय को अपने नजदीक ही प्राथमिक स्वास्थ्य सेवाएं मिलने लगेंगी। केंद्र के जरिये बीमारियों की स्क्रिनिंग, दवाएं, नियमित टीकाकरण और अन्य कई सेवाएं वनटांगिया समुदाय को मिलेंगी। गांव में उपकेंद्र खुल जाने से एम्स गोरखपुर और स्वास्थ्य विभाग द्वारा समय समय पर लगाए जाने वाले स्वास्थ्य शिविर को भी मजबूती मिलेगी।
सीएमओ ने बताया कि एम्स गोरखपुर के साथ मिल कर स्वास्थ्य सेवाओं को समाज के अंतिम पायदान पर खड़े व्यक्ति तक पहुंचाने की कोशिश की जा रही है। इसी कड़ी में वनटांगिया गांव में स्वास्थ्य शिविर लगाया गया। शिविर के जरिये जहां एम्स के विशेषज्ञ चिकित्सकों का परामर्श मिला वहीं जांच व दवाओं में चरगांवा प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र ने सहयोग दिया। शिविर में स्वास्थ्य से जुड़े मुद्दों पर चर्चा के दौरान वनटांगिया गांव के मुखिया रामगनेश द्वारा मिनी स्वास्थ्य केंद्र की मांग की गई थी।
इस अवसर पर एम्स के चिकित्सक डॉ आनंद मोहन दीक्षित, डॉ प्रदीप खारया, डॉ यू वैंकेटश, डॉ लालमणि सिंह, डॉ दिव्यांशु कुमार, डॉ फैसल अंसारी, डॉ सुरभि नेगी और डॉ घोष ने सेवाएं दीं। शिविर में डीसीपीएम रिपुंजय पांडेय, प्रभारी चिकित्सा अधिकारी डॉ धनंजय कुशवाहा, एचईओ मनोज कुमार, बीसीपीएम चंद्रशेखर यादव, अजीत रमन और सीएचओ यशवंत सिंह मौजूद रहे।
*लोगों को किया गया जागरूक*
शिविर के माध्यम से वनटांगियां गांव में संदेश दिया गया कि किसी भी प्रकार का बुखार होने पर चिकित्सक से ही इलाज कराएं। नजदीकी स्वास्थ्य केंद्र पर हर प्रकार के बुखार के जांच और इलाज की सुविधा निःशुल्क उपलब्ध है। बुखार के रोगी सरकारी अस्पताल जाने के लिए 108 नंबर एम्बुलेंस का इस्तेमाल कर सकते हैं। गर्भवती और धात्री महिलाओं के लिए भी सभी अस्पतालों पर निःशुल्क स्वास्थ्य सेवाएं दी जाती हैं। वह अस्पताल जाने और वापस घर लौटने के लिए 102 नंबर एम्बुलेंस की सुविधा का इस्तेमाल कर सकती हैं।
दिल्ली फोर्टिस एस्कॉर्ट हार्ट इंस्टिट्यूट के डायरेक्टर तथा पेडियाट्रिक कार्डियोलॉजी के विभाग अध्यक्ष डॉ नीरज अवस्थी आयेंगे .
इकोकार्डियोग्राफी के साथ हृदय से संबंधित अन्य जांचे होंगी, जो 50% डिस्काउंट पर होंगी. जिन बच्चे में हृदय के ऑपरेशन की आवश्यकता पड़ेगी उसे निशुल्क कराया जाएगा.
बच्चों में हृदय की बीमारी का ऑपरेशन काफी महंगा पड़ता है अतः इसकी मदद के लिए मुख्यमंत्री निधि ,संसध निधि ,के साथ अन्य सामाजिक संगठन के सहयोग से किया जाता है . पुज्य योगी आदित्य नाथ जी महाराज माननीय मुख्यमंत्री उत्तर प्रदेश के जनता दरबार में अभी तक जो भी गया है उसे कुछ न कुछ सहायता मिला है , पैसे के अभाव मे अभी तक किसी का इलाज नहीं रुका है .
अगर आपके आस पास कोई भी , बच्चा दिल की बीमारी से पीड़ित हो तो उसे शाही ग्लोबल हॉस्पिटल में जरूर भेजे।
“सीएमओ गोरखपुर से मिला एम्स गोरखपुर का प्रतिनिधिमंडल”
“एम्स गोरखपुर का दौरा कर विभिन्न कार्यक्रमों के बारे में चर्चा कर चुके हैं सीएमओ”
गोरखपुर। स्वास्थ्य विभाग, अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान (एम्स) गोरखपुर के साथ सामुदायिक स्वास्थ्य कार्यक्रमों पर काम करेगा। इसी क्रम में एम्स गोरखपुर के हेल्थ डेमोग्राफिक सर्विलांस सिस्टम स्थापित करने को लेकर मंगलवार को एम्स गोरखपुर के एक प्रतिनिधिमंडल ने मुख्य चिकित्सा अधिकारी (सीएमओ) डॉ राजेश झा से मुलाकात की। विभाग की तरफ से एम्स गोरखपुर को इस कार्य में हर तरह के सहयोग का आश्वासन दिया गया है। इससे पहले, सीएमओ गोरखपुर ने सोमवार को एम्स गोरखपुर का दौरा कर वहां राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन के विभिन्न कार्यक्रमों में संभावित सहयोग पर चर्चा की थी। उन्होंने एम्स में संचालित मॉडल टीकाकरण केंद्र को भी देखा था।
एम्स गोरखपुर के डिपार्टमेंट ऑफ कम्युनिटी मेडिसिन के हेड डॉ मधुसुदन और येल यूनिवर्सिटी के मिस्टर ब्रान ने मंगलवार को सीएमओ डॉ झा से मुलाकात की। उनके द्वारा अपेक्षा की गई कि स्वास्थ्य विभाग येल यूनिवर्सिटी के सहयोग से एम्स गोरखपुर द्वारा हेल्थ डेमोग्राफिक सर्विलांस सिस्टम के जरिये प्रस्तावित शोध में सहयोग करे। इसके तहत सरदारनगर ब्लॉक के डुमरी खास अतिरिक्त पीएचसी के तहत आने वाले ग्यारह राजस्व गांवों में अध्ययन किया जाएगा। इस अध्ययन में संचारी रोगों की रोकथाम, जलवायु परिवर्तन, मातृ शिशु स्वास्थ्य और जन्म मृत्यु समेत सामुदायिक स्वास्थ्य के विभिन्न आयाम शामिल हैं।
सीएमओ डॉ झा ने बताया कि स्वास्थ्य विभाग एम्स गोरखपुर के सभी शोध कार्यों में आवश्यक सहयोग प्रदान करेगा। इसी सिलसिले में उन्होंने सोमवार को एम्स गोरखपुर पहुंच कर वहां के अधिकारियों से मुलाकात की थी। एम्स के साथ कार्य करने से स्वास्थ्य कार्यक्रम सुदृढ़ होंगे और इसका सीधा लाभ समुदाय को प्राप्त होगा। एम्स गोरखपुर के साथ पहले से ही कई क्षेत्रों में काम किया जा रहा है। मसलन, झरना टोला नगरीय स्वास्थ्य केंद्र पर एम्स के विशेषज्ञ ओपीडी करते हैं जिसका सीधा लाभ वहां के लोगों को मिल रहा है। इसी प्रकार एम्स द्वारा गांव को गोद लेकर वहां विभिन्न सामुदायिक स्वास्थ्य कार्यक्रमों को लेकर कार्य किया जा रहा है। हमारा प्रयास है कि इस सहयोग को और बढ़ाया जाए ताकि समुदाय को अधिकाधिक लाभ मिल सके।