Category: हेल्थ
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बीमारियों के इलाज में आनुवंशिकी की भूमिका: एम्स गोरखपुर
“एम्स गोरखपुर में डीएनए दिवस पर आयोजित कार्यशाला में विशेषज्ञों ने साझा की महत्त्वपूर्ण जानकारी”

गोरखपुर, 25 अप्रैल, 2025। एम्स गोरखपुर में आज डीएनए दिवस के उपलक्ष्य में आयोजित सीएमई सह कार्यशाला के माध्यम से यह स्पष्ट किया गया कि आधुनिक चिकित्सा में आनुवंशिकी यानी जेनेटिक्स की भूमिका अब पहले से कहीं अधिक महत्वपूर्ण हो चुकी है।
डीएनए दिवस, 1953 में डीएनए डबल हेलिक्स की खोज और 2003 में मानव जीनोम परियोजना के पूरा होने की स्मृति में मनाया जाता है। इस दिन का उद्देश्य आम जनता और चिकित्सा समुदाय में आनुवंशिकी की भूमिका को लेकर जागरूकता फैलाना होता है।
इस विशेष अवसर पर एम्स गोरखपुर की बहुविषयक अनुसंधान इकाई (MRU) द्वारा आयोजित कार्यशाला का विषय था — “मानव स्वास्थ्य और रोग में आणविक अंतर्दृष्टि”। कार्यशाला का आयोजन *कार्यकारी निदेशक मेजर जनरल (डॉ.) विभा दत्ता, एसएम (सेवानिवृत्त) तथा प्रोफेसर डॉ. आनंद मोहन दीक्षित,* डीन रिसर्च एवं नोडल अधिकारी, एमआरयू के निर्देशन में किया गया।
कार्यक्रम के आरंभ में डॉ. शैलेंद्र द्विवेदी (एसोसिएट प्रोफेसर, बायोकेमिस्ट्री) ने आणविक जीवविज्ञान की भूमिका और उपयोग पर प्रकाश डाला। उन्होंने समझाया कि डीएनए एक “जीवित निर्देश पुस्तिका” की तरह है जो शरीर की सभी गतिविधियों को नियंत्रित करता है। इसके अध्ययन से हम बीमारी के मूल कारण तक पहुँच सकते हैं।
डॉ. चारुशिला रुकादिकर (सहायक प्रोफेसर, फिजियोलॉजी) ने जीनोमिक्स के शारीरिक अनुप्रयोगों पर व्याख्यान देते हुए बताया कि कैसे जीन में मौजूद सूचनाएं हमारे अंगों और शरीर की कार्यप्रणाली को प्रभावित करती हैं।
डॉ. मोहन राज पीएस (एसोसिएट प्रोफेसर, बायोकेमिस्ट्री) ने चिकित्सा में डीएनए की भूमिका पर चर्चा की और बताया कि आनुवंशिक जानकारी के आधार पर हम प्रत्येक रोगी के लिए व्यक्तिगत उपचार (Personalized Medicine) का रास्ता खोल सकते हैं, जिससे इलाज अधिक प्रभावशाली और कम दुष्प्रभावों वाला हो सकता है।
कार्यशाला में शामिल प्रतिभागियों को पीसीआर (PCR), न्यूक्लिक एसिड निष्कर्षण, और जेल इमेजिंग जैसी तकनीकों का हैंड्स-ऑन अनुभव भी कराया गया, जिससे उनकी प्रयोगात्मक समझ में वृद्धि हुई।
कार्यक्रम का समापन डॉ. अतुल रुकादिकर (एसोसिएट प्रोफेसर, माइक्रोबायोलॉजी) द्वारा धन्यवाद ज्ञापन के साथ हुआ। उन्होंने सभी विशेषज्ञ वक्ताओं, आयोजकों, तकनीकी टीम और भागीदारों के योगदान की सराहना की।
क्यों है आनुवंशिकी इतनी जरूरी?
आज की चिकित्सा सिर्फ लक्षणों के इलाज से आगे बढ़कर बीमारी की जड़ तक पहुँचने की दिशा में बढ़ रही है। कैंसर, हृदय रोग, डायबिटीज़ जैसी कई बीमारियों का संबंध अब आनुवंशिक कारणों से जोड़ा जा रहा है। जेनेटिक परीक्षणों से इन रोगों का जल्दी पता लगाकर समय रहते रोकथाम और इलाज संभव हो पा रहा है।इस कार्यशाला ने यह संदेश स्पष्ट रूप से दिया कि स्वास्थ्य की कुंजी अब सिर्फ दवाओं में नहीं, बल्कि हमारे डीएनए की गहराइयों में छुपी है।
“भविष्य की चिकित्सा अब और अधिक व्यक्तिगत, सटीक और आनुवंशिक ज्ञान पर आधारित होगी।”
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कवियित्री ने किया प्रेरित तो ग्यारह टीबी मरीजों को गोद लेकर टीबी उन्मूलन का संकल्प लिया
“जिले में 3736 निक्षय मित्र 5405 टीबी रोगियों को गोद लेकर कर रहे हैं देखभाल”
“नवागत सीएमओ डॉ राजेश झा की प्राथमिकता में शामिल है राष्ट्रीय टीबी उन्मूलन कार्यक्रम”
गोरखपुर। कवियित्री और समाजसेवा डॉ सरिता सिंह की प्रेरणा से तीन लोगों ने संयुक्त तौर से ग्यारह टीबी मरीजों को गोद लेकर टीबी उन्मूलन का संकल्प लिया है। जिले में इस समय 3736 निक्षय मित्र 5405 टीबी उपचाराधीन रोगियों को गोद लेकर उनकी देखभाल कर रहे हैं। यह जानकारी जिला क्षय उन्मूलन अधिकारी (डीटीओ) डॉ गणेश यादव ने दी। उन्होंने बताया कि राष्ट्रीय टीबी उन्मूलन कार्यक्रम नवागत सीएमओ डॉ राजेश झा की प्राथमिकताओं में भी शामिल है। उनके नेतृत्व में इस कार्यक्रम की सफलता सुनिश्चित की जाएगी।
डीटीओ डॉ यादव ने बताया कि महायोगी गुरू गोरखनाथ विश्वविद्यालय के वरिष्ठ लाइब्रेरियन डॉ भारतेंदु सिंह, पूर्वांचल फिजियोवेलफेयर से डॉ राकेश कुमार सिंह और अधिवक्ता पूजा गुप्ता ने ग्यारह टीबी मरीजों के बीच शनिवार शाम पोषण पोटली वितरित की। इन लोगों को डॉ सरिता सिंह द्वारा टीबी मरीजों को गोद लेने के लिए प्रेरित किया गया था। डॉ सिंह कुष्ठ रोग विभाग में कर्मचारी भी हैं, जिसकी वजह से वह राष्ट्रीय टीबी उन्मूलन कार्यक्रम को करीब से जानती हैं।
डॉ सरिता सिंह ने बताया कि उन्हें डॉ गणेश यादव और विभिन्न संचार माध्यमों से टीबी मरीजों के एडॉप्शन का महत्व पता चला । उन्होंने अपने परिचितों में इस बात का प्रचार प्रसार किया कि उपचाराधीन टीबी मरीजों को गोद लेकर उन्हें इलाज चलने तक हर माह पोषण पोटली व मानसिक संबल एवं यथासंभव अन्य आवश्यक सहयोग देने से वह जल्दी ठीक हो जाते हैं। उनकी दवा नियमित रहती है तो जटिलताएं भी नहीं बढ़ती है। इससे संक्रमण की चेन भी टूट जाती है और समाज का टीबी से बचाव होता है। मरीजों को गोद लेने वाले तीनों निक्षयमित्रों ने बताया कि वह इलाज चलने तक सभी मरीजों की यथासंभव मदद करेंगे। साथ ही अन्य लोगों और गैर सरकारी संगठनों को भी निक्षय मित्र बन कर टीबी उन्मूलन में योगदान देने के लिए प्रेरित करेंगे।
इस अवसर पर पीपीएम समन्वयक अभय नारायण मिश्र, एसटीएस मयंक, गोबिंद और जिला क्षय रोग केंद्र के कई कर्मचारीगण मौजूद रहें।
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चिकित्सक की सबसे बड़ी पहचान उसकी संवेदना: मुख्यमंत्री
एम्स गोरखपुर में 500 बेड की क्षमता वाले विश्राम सदन का शिलान्यास किया सीएम योगी ने,
चिकित्सक की संवेदना से दूर हो जाती है मरीज की आधी बीमारी : मुख्यमंत्री,
विश्राम सदन के रूप में गोरखपुर एम्स को प्राप्त हुई नई उपलब्धि: मुख्यमंत्री,
रेफर करने की प्रवृत्ति से बचें चिकित्सक, क्रिटिकल केयर उपलब्ध कराने को रिस्क लेने की डालें आदत : सीएम योगी
गोरखपुर, 18 अप्रैल। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कहा कि एक चिकित्सक की सबसे बड़ी पहचान उसकी संवेदना होती है। यदि किसी डॉक्टर के मन में संवेदना नहीं है तो वह डॉक्टर कहलाने का अधिकारी है या नहीं, इस पर विचार होना चाहिए। उसकी पहचान ही संवेदना से है। चिकित्सक की संवेदना गंभीर से गंभीर मरीज की आधी बीमारी को दूर कर सकती है। मुख्यमंत्री ने चिकित्सा संस्थानों के डॉक्टरों को यह नसीहत भी दी की वे बेवजह मरीजों को हायर सेंटर रेफर करने की प्रवृत्ति से बचें और मरीज को क्रिटिकल केयर उपलब्ध कराने में रिस्क लेने की आदत डालें।
सीएम योगी शुक्रवार दोपहर बाद अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान (एम्स) गोरखपुर के परिसर में 500 लोगों की क्षमता वाले विश्राम सदन (रैन बसेरे) का भूमि पूजन-शिलान्यास करने के बाद उपस्थित जनसमूह को संबोधित कर रहे थे। 44.34 करोड़ रुपये की लागत से बनने वाला यह विश्राम सदन पूर्वी उत्तर प्रदेश का सबसे बड़ा विश्राम सदन होगा। इसका निर्माण पावरग्रिड कॉर्पोरेशन ऑफ इंडिया लिमिटेड के सीएसआर निधि से कराया जा रहा। शिलान्यास समारोह में मुख्यमंत्री ने कहा कि कोई भी चिकित्सा संस्थान डॉक्टर के व्यवहार के माध्यम से संवेदना का केंद्र भी होता है। संवेदना के इस केंद्र में अगर एक मरीज भर्ती होने आता है तो उसके साथ कम से कम 3 या 4 अटेंडेंट होते हैं। पूर्वी उत्तर प्रदेश में तो कई बार अटेंडेंट की संख्या 10 तक हो जाती है। ऐसे में मरीज के साथ आने वाले अटेंडेंट को आश्रय की अच्छी व्यवस्था होनी चाहिए। उन्होंने कहा कि 500 बेड के विश्राम सदन के शिलान्यास के साथ ही गोरखपुर एम्स को एक नई उपलब्धि प्राप्त हुई है।
वटवृक्ष वन चुका है 2016 में एम्स के रूप में रोपा गया बीज,
मुख्यमंत्री ने कहा कि एम्स गोरखपुर का शिलान्यास प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने जुलाई 2016 में किया था। 2019 में एम्स गोरखपुर का पहला मैच एडमिशन लिया था और 2021 में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने इस एम्स का लोकार्पण किया था। 2016 में जो बीज एम्स के रूप में गोरखपुर में रोपा गया था, आज वह एक वटवृक्ष बनकर हजारों पीड़ितों को आरोग्यता के लक्ष्य को प्राप्त करने के लिए, एक नया जीवनदान देने का केंद्र बन गया है। उन्होंने कहा कि एम्स गोरखपुर में होगा, यह एक कल्पना मात्र लगती थी। हम लोग 2003 से इस आवाज को उठा रहे थे। उस समय अटल बिहारी वाजपेयी देश के प्रधानमंत्री थे। एम्स दिल्ली के बाहर भी स्थापित होंगे, इसके लिए उन्होंने छह एम्स की घोषणा की थी। पर, उसके बाद यह क्रम थम सा गया। मुख्यमंत्री ने कहा कि 2014 में नरेंद्र मोदी के प्रधानमंत्री बनने के बाद बिना भेदभाव, सबका साथ, सबका विकास के मंत्र का साकार रूप स्वास्थ्य सेवाओं के क्षेत्र में भी देखने को मिल रहा है। देश के अंदर 22 नए एम्स पीएम मोदी के कार्यकाल में, 10 वर्षों में बने हैं या बन रहे हैं। उनमें से गोरखपुर एम्स भी एक है। गोरखपुर में एम्स बने, इसके लिए 2003 में उठाई गई आवाज को 2016 में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने आकार दिया।
कोई गर्मी, सर्दी, बारिश में खुले में रहे, यह अमानवीय,
सीएम योगी ने कहा कि वर्तमान में एम्स गोरखपुर की ऑक्युपेंसी 75 से 80 प्रतिशत है। आईसीयू, क्रिटिकल केयर और ट्रॉमा सेंटर में भर्ती होने वाले मरीज के परिजन उनके साथ नहीं रह सकते। उन्हें बाहर ही रहना पड़ता है। इस कैम्पस में कम से कम 1200 लोग ऐसे होंगे जिनको बाहर जहां-तहां सिर छुपाने के लिए पटरी पर, सड़कों के किनारे या फिर किसी अन्य जगह पर जाकर रहने के लिए मजबूर होना पड़ता है। उन्होंने कहा कि कोई व्यक्ति खुले में गर्मी, सर्दी या बारिश झेलने को मजबूर हो तो यब अमानवीय लगता है। ऐसे में यह आवश्यक है कि हम अपना मानवीय स्वरूप बनाएं और उन लोगों के बारे में सोचा जो अपने मरीज की पीड़ा के साथ यहां पर जुड़े हुए हैं। विश्राम सदन के रूप में हम ऐसी व्यवस्था बनाएं जहां पर अटेंडेंट को मिनिमम यूजर चार्ज पर रहने और सस्ते कैंटीन की सुविधा हो।
चिकित्सा संस्थानों में अटेंडेंट के लिए व्यवस्था होनी ही चाहिए,
मुख्यमंत्री ने करीब डेढ़ वर्ष पहले लखनऊ में एसजीपीजीआई के अपने दौरे के दौरान सड़कों पर बड़ी संख्या में लोगों को देख उनकी व्यवस्था के लिए अटेंडेंट शेल्टर होम बनाने के निर्देश दिए थे। मन में आया कि एसजीपीजीआई, केजीएमयू, बीएचयू में और एम्स गोरखपुर में पेशेंट अटेंडेंट के लिए कोई केंद्र बनने चाहिए। इसकी जिम्मेदारी अवनीश अवस्थी को दी गई। उन्होंने प्रयास शुरू किए तो पेट्रोलियम मिनिस्ट्री ने एसजीपीजीआई, केजीएमयू और आरएमएल के लिए तीन रैन बसेरे दिए। पावर मिनिस्ट्री के सहयोग से एम्स गोरखपुर के लिए रैन बसेरा स्वीकृत हुआ।
याद दिलाया तीमारदारों के भोजन के लिए रियायती मॉडल,
अपने संबोधन के दौरान मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने बीआरडी मेडिकल कॉलेज में 20 साल पहले इंसेफेलाइटिस के पीक समय में शुरू किए गए तीमारदारों के भोजन के लिए रियायती मॉडल का भी उल्लेख किया। कहा कि एक समय बीआरडी मेडिकल कॉलेज इंसेफेलाइटिस हॉटस्पॉट था। वहां पर समूचे पूर्वी उत्तर प्रदेश के पेशेंट आते थे। वहां पर बड़ी अव्यवस्था देखने को मिलती थी। लोगों के पास खाने के लिए भोजन नहीं होता था। उस समय हम लोगों ने एक स्वयंसेवी संस्था से मिलकर व्यवस्था कराई थी। उस समय आठ रुपये में तीमारदारों के लिए दाल, चावल, रोटी, सब्जी की व्यवस्था शुरू की गई। उन्होंने कहा कि आज भी पेशेंट के अटेंडेंट को बीआरडी मेडिकल कॉलेज और गुरु गोरखनाथ चिकित्सालय में भी दस रुपये में भरपेट दाल, चावल, सब्जी, रोटी की सुविधा आज भी प्राप्त हो रही है।
जिलों के मेडिकल कॉलेजों और जिला अस्पतालों को टेली कंसल्टेशन की सुविधा दे एम्स,
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने अपेक्षा जताई कि एम्स को आसपास के जिलों के मेडिकल कॉलेजों और जिला अस्पतालों में टेली कंसल्टेशन के जरिए विशेषज्ञ चिकित्सकों की सुविधा उपलब्ध करानी चाहिए। उन्होंने इसके लिए कोरोना काल में एसजीपीजीआई, केजीएमयू और आरएमएल के जरिये प्रशिक्षण देकर बनाए गए सिस्टम मॉडल का भी उल्लेख किया और बताया कि बाद में इससे हर जिले में आइसीयू और वेंटिलेटर की सुविधा मिली थी। उन्होंने कहा कि टेली कंसल्टेशन जैसी टेक्नोलॉजी का उपयोग कर अधिक से अधिक लोगों को राहत दी जा सकती है। कहा कि एम्स जैसे संस्थान आज जिनकी ओपीडी 4000 तक पहुंच चुकी है, अगर यहां पर सभी सुपर स्पेशलिटी की फैकल्टी आ जाएं तो यही ओपीडी जा 10000 पर चली जाएगी। ऐसे में एसजीपीजीआई की तर्ज पर एम्स गोरखपुर पूर्वी उत्तर प्रदेश का चिकित्सा हब बने और यहां से अन्य मेडिकल कॉलेजों को जोड़ते हुए यहां से टेली कंसल्टेशन दी जाए। इससे सामान्य मरीज को भागदौड़ नहीं करनी पड़ेगी।
हर मरीज ज्ञान और अनुभव का आधार, रेफर करने की प्रवृत्ति से बचें,
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने सरकारी चिकित्सा संस्थानों के डॉक्टरों को नसीहत दी कि वह अनावश्यक रूप से मरीजों को लखनऊ रेफर करने की प्रवृत्ति से बचें। उन्होंने कहा कि जिन जिलों में मेडिकल कॉलेज बन गए हैं, उनमे से कई में अभी भी मरीज को क्रिटिकल केयर या ट्रॉमा की सुविधा देने के लिए कोई रिस्क नहीं लिया जाता। पेशेंट को लखनऊ के लिए रेफर दिया जाता है। यह सब बंद होना चाहिए। क्रिटिकल केयर उपलब्ध कराते हुए रिस्क लेने की आदत डालनी होगी। मुख्यमंत्री ने कहा कि हर मरीज डॉक्टर के लिए नए अनुभव और ज्ञान का आधार होता है। ऐसे में उन्हें मरीज को समय देना होगा। हम दस या पन्द्रह मरीज तक खुद को सीमित न कर लें। याद रखना चाहिए कि दुनिया के अंदर जितने भी अच्छे रिसर्च हुए हैं वह उन लोगों ने किए हैं जिनमें अधिक से अधिक डाटा कलेक्ट करने का सामर्थ्य रहा है।
एम्स गोरखपुर की स्थापना के लिए सीएम योगी ने बहाया खून-पसीना : रविकिशन,
सांसद रविकिशन शुक्ल ने कहा कि एम्स गोरखपुर की स्थापना का श्रेय मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ को है। उन्होंने इस संस्थान के लिए अपना खून-पसीना बहाया है। जनता को बेहतरीन स्वास्थ्य सेवा उपलब्ध कराना हमेशा से उनकी उच्च प्राथमिकता रहा है। पूर्वी उत्तर प्रदेश के नौनिहालों के लिए त्रासदी रही इंसेफेलाइटिस पर पूर्ण नियंत्रण इसका प्रमाण है।
सीएम योगी के मार्गदर्शन में कम समय में ही एम्स गोरखपुर की उपलब्धियां मौन क्रांति की तरह : देशदीपक वर्मा
शिलान्यास समारोह में एम्स गोरखपुर की गवर्निंग काउंसिल के चेयरमैन देशदीपक वर्मा ने कहा कि मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के मार्गदर्शन और सहयोग से कम समय में ही गोरखपुर एम्स की उपलब्धियां मौन क्रांति की तरह है। वर्तमान में यहां पांच सुपर स्पेशलिटी डिपार्टमेंट संचालित हो चुके हैं। उन्होंने कहा कि गोरखपुर का एम्स प्रथम श्रेणी वाले संस्थानों की कतार में तेजी से शामिल हो रहा है।इस अवसर पर एम्स गोरखपुर की कार्यकारी निदेशक डॉ. विभा दत्ता ने कहा कि विश्राम सदन सिर्फ एक भवन नहीं है बल्कि रोगियों के परिजनों को आश्रय और बुनियादी सुविधाएं सुविधा दिलाने का संवेदनशील कदम है। उन्होंने कहा कि एम्स गोरखपुर चिकित्सा सुविधाओं के क्षेत्र में धीरे-धीरे नई ऊंचाइयों को छू रहा है। स्वागत संबोधन में पावरग्रिड के निदेशक (कार्मिक) यतींद्र द्विवेदी ने मुख्यमंत्री के स्वागत करते हुए बताया कि विश्राम सदन के निर्माण को 31 मार्च 2027 तक पूर्ण किए जाने का लक्ष्य है ।
इस अवसर पर महापौर डॉ. मंगलेश श्रीवास्तव समेत कई जनप्रतिनिधि, मुख्यमंत्री के सलाहकार अवनीश अवस्थी, पावरग्रिड के कार्यपालक निदेशक (सीएसआर) जसवीर सिंह, उत्तरी क्षेत्र-3 के कार्यपालक निदेशक वाई.के. दीक्षित, उत्तरी क्षेत्र-3 के मानव संसाधन प्रमुख रमन सहित पावरग्रिड तथा एम्स, गोरखपुर के वरिष्ठ अधिकारी आदि प्रमुख रूप से उपस्थित रहे। एम्स गोरखपुर की गवर्निंग काउंसिल के चेयरमैन देशदीपक वर्मा और पावरग्रिड के निदेशक (कार्मिक) यतीन्द्र द्विवेदी ने मुख्यमंत्री को अंगवस्त्र, स्मृतिचिन्ह आदि भेंटकर उनका अभिनंदन किया। शिलान्यास के बाद और अपने सम्बोधन से पूर्व सीएम योगी ने विश्राम सदन के मैप, ले आउट का अवलोकन कर प्रोजेक्ट की जानकारी ली और जरूरी निर्देश दिए।
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मरीजों के साथ किया जाए अच्छा व्यवहार: सीएमओ
सीएमओ ने भटहट, चरगांवा और पिपरौली सीएचसी का किया निरीक्षण
गोरखपुर। मुख्य चिकित्सा अधिकारी डॉ राजेश झा ने शुक्रवार को तीन सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों (सीएचसी) भटहट, चरगांवा और पिपरौली का निरीक्षण किया।साथ ही अस्पताल में मरीजों से चिकित्सकों के बारे में फीडबैक भी लिया। उन्होंने अस्पताल में आने वाले मरीजों के साथ अच्छा व्यवहार करने एवं बाहर से दवाई ना लिखने को लेकर दिशा-निर्देश दिया।
सीएमओ डॉ राजेश झा सबसे पहले सीएचसी भटहट पहुंचे। अस्पताल परिसर, प्रसव कक्ष, लैब कक्ष का हाल जाना और आवश्यक दिशा निर्देश दिया सीएमओ ने सीएचसी पर मौजूद सुविधाओं के बारे में विस्तार से जानकारी ली और मरीजों-तीमारदारों से अस्पताल में मिलने वाली सुविधाओं के बारे में हाल जाना। उन्होंने चिकित्सा अधिकारी व स्टाफ को मरीजों के साथ बेहतर व्यवहार करने और किसी भी आवश्यकता पर तुरंत सूचित करने के निर्देश दिए।
इसके बाद सीएमओ सीएचसी चरगांवा पहुंचे। वहां उन्होंने सीएचसी के प्रसव कक्ष, स्टोर रूम, दवा कक्ष, वार्ड का हाल जाना और संतुष्ट दिखे । इसके बाद शौचालय की साफ सफाई व ओपीडी में आए मरीजों को मिलने वाली स्वास्थ्य व्यवस्था का जायजा लेकर प्रसव वार्ड में पहुंचे। वहां उन्होंने मरीजों से विभाग की ओर से मिलने वाली सुविधाओं के बारे में पूछताछ किया ।
इसी क्रम में सीएमओ सीएचसी पिपरौली पहुंचे। वहां भी उन्होंने प्रसव कक्ष, स्टोर रूम, दवा कक्ष, वार्ड, डेंटल कक्ष का हाल जाना और जरूरी जानकारी लिया। औषधि भंडार में दवाओं की उपलब्धता, लैब में हो रही जांच के बारे में जाना। सीएमओ ने सीएचसी अधीक्षक और उपस्थित अन्य स्वास्थ्य कर्मियों से कहा कि लोगों में सरकारी स्वास्थ्य सेवाओं के प्रति विश्वास जगाना बहुत आवश्यक है । इसके लिए जरूरी है कि एक तो उन्हें स्वास्थ्य सेवाओं की जानकारी हो और दूसरा उनके साथ स्वास्थ्य कर्मियों का व्यवहार सरल और दोस्ताना हो। उन्हें यह विश्वास हो कि सीएचसी पर उनकी स्वास्थ्य समस्या का निदान हो जायेगा और उनके साथ किसी भी तरह का दुर्व्यवहार नहीं किया जायेगा।
इस दौरान एसीएमओ डॉ एके चौधरी, डिप्टी सीएमओ डॉ अश्विनी चौरसिया सहित अन्य अधिकारी मौजूद रहे।
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सांसद निधि से चल रहे ओपीडी का लाभ ले रहे ग्रामीण
संवाददाता– एस. पी. सिंह
सहजनवा, ( गोरखपुर ) ।सांसद निधि (MPLADS) से ग्रामीण क्षेत्रों में ओपीडी (आउट पेशेंट डिपार्टमेंट) चलाने की योजनाओ का लाभ क्षेत्रीय ग्रामीणों के लिए वरदान साबित हो रहा है। उक्त बाते शनिवार को पिपरौली ब्लॉक के नगवा गांव में सांसद निधि द्वारा आयोजित निःशुल्क ओपीडी एम्बुलेंस सेवा एवं दवा वितरण कार्यक्रम में भाजपा के ब्लॉक उपाध्यक्ष शैलेन्द्र पाल उर्फ गुड्डू ने कहीं।
उन्होंने बताया कि सहजनवा विधायक प्रदीप शुक्ला के सौजन्य से सदर सांसद रवि किशन अपने क्षेत्र में विकास कार्य के लिए यह योजना लगातार चला रहे है, जिसमें स्वास्थ्य सेवा भी शामिल है।
इस अवसर डॉ बृज किशोर सिंह, फार्मासिस्ट सूरज यादव, रामपाल, विरु शर्मा, अनिल गौड़, राहुल पाल, रामचन्द्र पाल, समीर गौड़ समेत अन्य लोग उपस्थित रहें।
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सीएमओ ने सीएचसी का किया निरीक्षण, दिया निर्देश
ब्यूरो प्रभारी — विनय तिवारी
बड़हलगंज/गोरखपुर(निष्पक्ष टुडे) : बड़हलगंज सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र का सीएमओ डा. राजेश झा ने निरीक्षण कर सुधार संबंधित निर्देश दिया। इस दौरान अस्पताल में रोगियों को मिलने वाली सुविधाओं की जानकारी लिया। उन्होंने हेल्थ एटीएम से होने वाले रोगियों की जांच की जानकारी लिया। इसके बाद उन्होंने ओपीडी, प्रसव कक्ष, आपरेशन थिएटर, पैथालाजी, एक्सरे कक्ष का निरीक्षण किया।
उन्होंने अस्पताल पहुंचने वाले रोगियों को मिलने वाली सुविधाओं पर बल देने के साथ ही परिसर की साफ सफाई कराने का निर्देश दिया। उन्होंने आपरेशन थिएटर को ऊपर शिफ्ट करने व वार्डों को व्यवस्थित करने को कहा। उन्होंने कहा कि पैथालाजी में बड़ी मशीन आ गई है। अब यहां पर सभी जांचें हो जाएंगे। इसके लिए एक और टेक्निशियन को तैनात कराया जाएगा। वहीं डिजिटल एक्सरे लगाने की बात कही। उन्होंने कहा कि इंजिनियर भेजकर शौचालय निर्माण हेतु प्रयास किया जाएगा। अस्पताल में जो भी छोटी समस्या है उसे दूर किया जाएगा। आपरेशन थिएटर बंद क्यों है इसके लिए अधीक्षक डा. अतुल गुप्ता से जानकारी लिया। अधीक्षक ने बताया कि बेहोशी वाले डाक्टर पीजी की पढ़ाई करने चले गए हैं जबकि सर्जन डाक्टर लीव पर हैं। उन्होंने कहा कि इसको शुरू करने के लिए व्यवस्था किया जाएगा। एडिशनल सीएमओ डा. ए के चौधरी, अधीक्षक डा. अतुल कुमार गुप्ता, डा. एजाज अंसारी, डा. भानूप्रकाश सिंह, डा. शैलेश पांडेय, सतीश यादव, एस एन राय, प्रेम कुमार, दीपक आदि मौजूद रहे।
*टीबी के रोगियों में बंटा पोषक आहार , बीमारी से बचने के बताए गए तरीके*
बड़हलगंज : सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र के परिसर में टीबी के रोगियों को पोषक आहार का वितरण सीएमओ द्वारा किया गया। रेड क्रास सोसाइटी द्वारा चालीस लोगों में पोषण वितरित किया गया। रेड क्रास सोसायटी द्वारा गोंद लिए गए मरीजों में चना , गुड़ , सत्तू , मूंगफली दाना , गजक आदि की टोकरी वितरित की गई। इस दौरान टीबी के मरीजों को बीमारी से लड़ने एवं दैनिक जीवन में स्वस्थ्य रहने के तरीके भी बताए गए। रेडक्रास गोरखपुर के सचिव अजय प्रताप सिंह ने कहा कि 4400 मरीजों को उनके स्वस्थ होने तक उन्हें पौष्टिक अहार दिया जाएगा। अब 700 मरीजों को पोषण पोटली का वितरण किया गया है।
सीएमओ को दिया पत्रक : सीएचसी पर आए सीएमओ को चिल्लूपार संघर्ष समिति के अध्यक्ष बबलू राय ने पत्रक देकर सुविधाओं को सुधार की मांग किया है।
पत्र में उन्होंने मरीजों को पेयजल की व्यवस्था की व्यवस्था, शौचालय, मूत्रालय, बंद पड़ा प्रसव आपरेशन चालू कराने, सभी डाक्टरों की उपस्थिति सुनिश्चित कराने व जो कर्मचारी कई वर्षों से कार्यरत हैं उनको हटाया जाने की मांग किया है। -

एम्स गोरखपुर में चिकित्सा की नई उपलब्धि: पहली बार सफल लेफ्ट एड्रेनलेक्टोमी और CUSA तकनीक से लिवर रिसेक्शन सर्जरी
गोरखपुर, 5 अप्रैल 2025: एम्स गोरखपुर ने चिकित्सा के क्षेत्र में एक महत्वपूर्ण उपलब्धि हासिल करते हुए दो जटिल सर्जरी सफलतापूर्वक सम्पन्न की हैं। इनमें एक लेफ्ट एड्रेनलेक्टोमी (Left Adrenalectomy) और दूसरी CUSA तकनीक (Cavitron Ultrasonic Surgical Aspirator) की मदद से की गई लिवर रिसेक्शन शामिल है। यह दोनों सर्जरी संस्थान में पहली बार की गई हैं, जो न केवल तकनीकी दृष्टि से चुनौतीपूर्ण थीं, बल्कि मरीजों की दशा भी लंबे समय से जटिल बनी हुई थी।
“पहला मामला: वर्षों से दर्द झेल रही महिला में एड्रेनल ट्यूमर की पहचान”
सिकंदराबाद निवासी 36 वर्षीय महिला को पेट में लंबे समय से लगातार दर्द की शिकायत थी, जिसका कहीं सटीक निदान नहीं हो पाया था। वे एम्स गोरखपुर की ओपीडी में एसोसिएट प्रोफेसर डॉ. रवि गुप्ता के पास पहुंचीं। विस्तृत जांच (सीटी स्कैन, एमआरआई) और हार्मोनल परीक्षणों के बाद यह स्पष्ट हुआ कि मरीज को बाईं ओर एक बड़ा नॉन-फंक्शनल एड्रेनल ट्यूमर है।
एड्रेनल ग्लैंड, जो किडनी के ऊपर स्थित होता है, वहां की गई यह सर्जरी अत्यधिक जटिल थी क्योंकि यह हिस्सा आसपास की नाजुक नसों और अंगों के बहुत पास होता है। एम्स गोरखपुर की सर्जरी टीम ने बेहद सावधानी से यह लेफ्ट एड्रेनलेक्टोमी सफलतापूर्वक की।
“दूसरा मामला: बाहर गैल ब्लैडर स्टोन समझा गया, एम्स में निकला कैंसर”
76 वर्षीय महिला, जो पेट के ऊपरी दाहिने हिस्से में दर्द की शिकायत के साथ एम्स गोरखपुर आई थीं, उन्हें पहले किसी अन्य अस्पताल में गैल ब्लैडर स्टोन का मरीज बताया गया था। लेकिन एम्स में किए गए सीटी स्कैन और एमआरआई से पता चला कि उन्हें गैल ब्लैडर कैंसर है। इसके बाद रैडिकल कोलेसिस्टेक्टॉमी की योजना बनाई गई, जिसमें गैल ब्लैडर और लिवर का प्रभावित भाग हटा दिया गया।
इस सर्जरी में पहली बार एम्स गोरखपुर में आधुनिक CUSA तकनीक का प्रयोग किया गया। यह तकनीक अल्ट्रासोनिक तरंगों की मदद से लिवर से कैंसरग्रस्त ऊतक को इस प्रकार हटाती है कि आसपास के स्वस्थ ऊतक प्रभावित न हों। इससे रक्तस्राव बहुत कम होता है और मरीज की रिकवरी तेज हो जाती है।
“विशेषज्ञ टीम और समर्पित सहयोग”
दोनों सर्जरी कार्यकारी निदेशक मेजर जनरल (डॉ.) विभा दत्ता और सर्जरी विभागाध्यक्ष डॉ. गौरव गुप्ता के मार्गदर्शन में की गईं। ऑपरेशन टीम का नेतृत्व डॉ. रवि गुप्ता, डॉ. शानवाज अहमद, डॉ. धर्मेंद्र, डॉ. मुकुल ने किया।
वरिष्ठ रेजिडेंट्स डॉ. रवि और डॉ. शालिनी तथा जूनियर रेजिडेंट्स डॉ. ऐश्वर्या, डॉ. दर्शन, डॉ. शांतोष, और डॉ. एलेन ने सर्जरी में अहम भूमिका निभाई।एनेस्थीसिया और क्रिटिकल केयर मॉनिटरिंग का नेतृत्व डॉ. विक्रम वर्धन ने किया, जिसमें डॉ. भूपेंद्र, डॉ. सोनम, डॉ. संतोष, डॉ. गणेश नेमजे और डॉ. प्रियंका के साथ रेजिडेंट्स ने सक्रिय भागीदारी निभाई।
“एम्स गोरखपुर का विस्तार और भविष्य की दिशा”
इन दोनों जटिल सर्जरी की सफलता यह दर्शाती है कि एम्स गोरखपुर अब न केवल गंभीर और जटिल मामलों की सटीक पहचान कर रहा है, बल्कि अत्याधुनिक तकनीकों के उपयोग से सुरक्षित और प्रभावशाली इलाज भी उपलब्ध करा रहा है। यह उपलब्धि पूर्वांचल क्षेत्र के लाखों मरीजों के लिए आशा की किरण बनकर उभरी है।
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बेहतरीन सुविधाओं से मजबूत होती है शहर की पहचान : मुख्यमंत्री
“सीएम योगी ने किया तिलक पैथोलॉजी के नवीन प्रकल्प स्किन, लेजर एंड हेयर क्लिनिक का उद्घाटन”
“जीरो टॉलरेंस की नीति से विकास की नई ऊंचाइयों को छू रहा उत्तर प्रदेश : मुख्यमंत्री”
गोरखपुर, 5 अप्रैल। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने शनिवार शाम जुबिली कॉलेज रोड स्थित तिलक पैथोलॉजी के नवीन प्रकल्प स्किन, लेजर एंड हेयर क्लिनिक का उद्घाटन किया। इस अवसर पर आयोजित समारोह को संबोधित करते हुए उन्होंने कहा कि शिक्षा और स्वास्थ्य विकास के दो महत्वपूर्ण आयाम हैं। इन दोनों से जुड़ी बेहतरीन सुविधाएं किसी भी शहर की पहचान को मजबूत करती हैं।
सीएम योगी ने इस स्वास्थ्य सेवा संस्थान के सूत्रधार महापौर डॉ. मंगलेश श्रीवास्तव और संचालकद्वय डॉ. हिमांशु श्रीवास्तव (पैथोलॉजिस्ट) व डॉ. दिव्यांशु श्रीवास्तव (डर्मेटोलॉजिस्ट) को बधाई एवं शुभकामनाएं देते हुए कहा कि जब विकास और नई सेवा सुविधाओं का शुभारंभ होता है तो उसके माध्यम से निवेश और रोजगार सृजन भी होता है। उन्होंने कहा कि आज उत्तर प्रदेश विकास के पथ पर तेजी से आगे बढ़ रहा है। पूर्व की सरकारों में न तो सुरक्षा का माहौल था और न ही लोगों को कुछ अच्छा और नया करने के लिए प्रोत्साहन था। गौरवशाली इतिहास वाले इस प्रदेश की पहचान पर ही संकट खड़ा हो गया था। पर, 2017 के बाद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व और मार्गदर्शन वाली डबल इंजन सरकार के आने के बाद यूपी में सुरक्षा का उत्कृष्ट वातावरण बन चुका है तो साथ ही लोगों को आगे बढ़ने के लिए भरपूर प्रोत्साहन भी दिया जा रहा है।
मुख्यमंत्री ने कहा कि जो उत्तर प्रदेश आजादी के बाद सात दशक तक विकास के पैमाने पर कहीं ठहरता नहीं था, वही प्रदेश बदले माहौल में विरासत का संरक्षण करते हुए, सुरक्षा का माहौल देकर, अपराध और भ्रष्टाचार पर जीरो टॉलरेंस की नीति अपनाकर विकास की नई ऊंचाइयों को छू रहा है। आज यूपी का नाम पूरे देश में सम्मान के साथ लिया जाता है। लोग आज के उत्तर प्रदेश पर गर्व की अनुभूति करते हैं। उन्होंने कहा कि पूरे प्रदेश के हेल्थ इंफ्रास्ट्रक्चर में अभूतपूर्व बदलाव आया है। स्वास्थ्य सुविधाओं हर व्यक्ति तक सुलभ हो रही हैं। सीएम ने कहा कि गोरखपुर ने आठ वर्षों में स्वास्थ्य सेवाओं के क्षेत्र में काफी प्रगति की है। इसमें निजी क्षेत्र की भी महत्वपूर्ण भागीदारी है।
संबोधन से पूर्व मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने क्लिनिक का निरीक्षण कर वहां उपलब्ध जांच और स्वास्थ्य सेवाओं की जानकारी भी ली। उन्होंने तिलक पैथोलॉजी के प्रमुख एवं महापौर डॉ. मंगलेश श्रीवास्तव की मंच से मुक्तकंठ सराहना की। उद्घाटन समारोह को सांसद रविकिशन ने भी संबोधित किया। स्वागत संबोधन महापौर डॉ. मंगलेश श्रीवास्तव और संचालन रूपेश श्रीवास्तव ने किया। इस अवसर पर भाजपा के प्रदेश उपाध्यक्ष एवं एमएलसी डॉ. धर्मेंद्र सिंह, भाजपा के क्षेत्रीय अध्यक्ष सहजानंद राय, विधायक फतेह बहादुर सिंह, राजेश त्रिपाठी विपिन सिंह, महेंद्रपाल सिंह, डॉ विमलेश पासवान, प्रदीप शुक्ल, सरवन निषाद, भाजपा के महानगर अध्यक्ष देवेश श्रीवास्तव आदि प्रमुख रूप से उपस्थित रहे।
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एम्स गोरखपुर में स्वच्छता पखवाड़ा के अंतर्गत स्वच्छता अभियान
“मरीजों के लिए स्वच्छ और सुरक्षित वातावरण की दिशा में अहम कदम”

गोरखपुर, 5 अप्रैल 2025: एम्स गोरखपुर में कार्यकारी निदेशक मेजर जनरल (डॉ.) विभा दत्ता के नेतृत्व में चल रहे स्वच्छता पखवाड़ा के अंतर्गत एक विशेष स्वच्छता अभियान का सफल आयोजन किया गया। यह पखवाड़ा 1 अप्रैल से प्रारंभ हुआ है और इसके तहत संस्थान में विविध गतिविधियाँ आयोजित की जा रही हैं, जिनका उद्देश्य स्वच्छता, संक्रमण नियंत्रण और जन-जागरूकता को बढ़ावा देना है।
अस्पताल परिसर में आयोजित इस विशेष अभियान में संस्थान के स्टाफ, छात्र, स्वास्थ्यकर्मी और प्रशासनिक अधिकारियों ने सक्रिय भागीदारी की। इस पहल का उद्देश्य न केवल परिसर की सफाई सुनिश्चित करना था, बल्कि कचरा निस्तारण, स्वच्छता और संक्रमण नियंत्रण के महत्व को रेखांकित करना भी था। यह अभियान स्वच्छ भारत मिशन के प्रति संस्थान की प्रतिबद्धता का प्रतीक है और मरीजों के समग्र कल्याण की दिशा में एक ठोस प्रयास है।
अभियान की विशेष बात यह रही कि कार्यकारी निदेशक मेजर जनरल (डॉ.) विभा दत्ता ने स्वयं अस्पताल के मुख्य द्वार नंबर 2 पर झाड़ू लगाकर स्वच्छता का संदेश दिया। उन्होंने कहा, “आसपास की स्वच्छता हमारी अपनी जिम्मेदारी है। हमें न केवल स्वयं इस पर ध्यान देना चाहिए, बल्कि दूसरों को भी इसके लिए प्रेरित करना चाहिए। स्वच्छ समाज से ही स्वस्थ भारत का सपना साकार होगा।”
इस आयोजन को सफल बनाने में डीन स्टूडेंट वेलफेयर डॉ. शिखा सेठ, डॉ. गौरव गुप्ता, डॉ. प्रेरणा चंद्रा, श्री अरुण, श्रीमती देविका तथा प्रशासनिक अधिकारी ने महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।
स्वच्छता पखवाड़ा के इस भाग के रूप में आयोजित यह अभियान न केवल मरीजों के लिए एक स्वच्छ वातावरण सुनिश्चित करने की दिशा में कारगर सिद्ध हुआ, बल्कि संस्थान की सामाजिक प्रतिबद्धता को भी दर्शाता है। यह पहल निश्चित रूप से अन्य संस्थानों को भी प्रेरित करेगी।










