गोरखपुर, 5 अप्रैल 2025: एम्स गोरखपुर ने चिकित्सा के क्षेत्र में एक महत्वपूर्ण उपलब्धि हासिल करते हुए दो जटिल सर्जरी सफलतापूर्वक सम्पन्न की हैं। इनमें एक लेफ्ट एड्रेनलेक्टोमी (Left Adrenalectomy) और दूसरी CUSA तकनीक (Cavitron Ultrasonic Surgical Aspirator) की मदद से की गई लिवर रिसेक्शन शामिल है। यह दोनों सर्जरी संस्थान में पहली बार की गई हैं, जो न केवल तकनीकी दृष्टि से चुनौतीपूर्ण थीं, बल्कि मरीजों की दशा भी लंबे समय से जटिल बनी हुई थी।
“पहला मामला: वर्षों से दर्द झेल रही महिला में एड्रेनल ट्यूमर की पहचान”
सिकंदराबाद निवासी 36 वर्षीय महिला को पेट में लंबे समय से लगातार दर्द की शिकायत थी, जिसका कहीं सटीक निदान नहीं हो पाया था। वे एम्स गोरखपुर की ओपीडी में एसोसिएट प्रोफेसर डॉ. रवि गुप्ता के पास पहुंचीं। विस्तृत जांच (सीटी स्कैन, एमआरआई) और हार्मोनल परीक्षणों के बाद यह स्पष्ट हुआ कि मरीज को बाईं ओर एक बड़ा नॉन-फंक्शनल एड्रेनल ट्यूमर है।
एड्रेनल ग्लैंड, जो किडनी के ऊपर स्थित होता है, वहां की गई यह सर्जरी अत्यधिक जटिल थी क्योंकि यह हिस्सा आसपास की नाजुक नसों और अंगों के बहुत पास होता है। एम्स गोरखपुर की सर्जरी टीम ने बेहद सावधानी से यह लेफ्ट एड्रेनलेक्टोमी सफलतापूर्वक की।
“दूसरा मामला: बाहर गैल ब्लैडर स्टोन समझा गया, एम्स में निकला कैंसर”
76 वर्षीय महिला, जो पेट के ऊपरी दाहिने हिस्से में दर्द की शिकायत के साथ एम्स गोरखपुर आई थीं, उन्हें पहले किसी अन्य अस्पताल में गैल ब्लैडर स्टोन का मरीज बताया गया था। लेकिन एम्स में किए गए सीटी स्कैन और एमआरआई से पता चला कि उन्हें गैल ब्लैडर कैंसर है। इसके बाद रैडिकल कोलेसिस्टेक्टॉमी की योजना बनाई गई, जिसमें गैल ब्लैडर और लिवर का प्रभावित भाग हटा दिया गया।
इस सर्जरी में पहली बार एम्स गोरखपुर में आधुनिक CUSA तकनीक का प्रयोग किया गया। यह तकनीक अल्ट्रासोनिक तरंगों की मदद से लिवर से कैंसरग्रस्त ऊतक को इस प्रकार हटाती है कि आसपास के स्वस्थ ऊतक प्रभावित न हों। इससे रक्तस्राव बहुत कम होता है और मरीज की रिकवरी तेज हो जाती है।
“विशेषज्ञ टीम और समर्पित सहयोग”
दोनों सर्जरी कार्यकारी निदेशक मेजर जनरल (डॉ.) विभा दत्ता और सर्जरी विभागाध्यक्ष डॉ. गौरव गुप्ता के मार्गदर्शन में की गईं। ऑपरेशन टीम का नेतृत्व डॉ. रवि गुप्ता, डॉ. शानवाज अहमद, डॉ. धर्मेंद्र, डॉ. मुकुल ने किया।
वरिष्ठ रेजिडेंट्स डॉ. रवि और डॉ. शालिनी तथा जूनियर रेजिडेंट्स डॉ. ऐश्वर्या, डॉ. दर्शन, डॉ. शांतोष, और डॉ. एलेन ने सर्जरी में अहम भूमिका निभाई।
एनेस्थीसिया और क्रिटिकल केयर मॉनिटरिंग का नेतृत्व डॉ. विक्रम वर्धन ने किया, जिसमें डॉ. भूपेंद्र, डॉ. सोनम, डॉ. संतोष, डॉ. गणेश नेमजे और डॉ. प्रियंका के साथ रेजिडेंट्स ने सक्रिय भागीदारी निभाई।
“एम्स गोरखपुर का विस्तार और भविष्य की दिशा”
इन दोनों जटिल सर्जरी की सफलता यह दर्शाती है कि एम्स गोरखपुर अब न केवल गंभीर और जटिल मामलों की सटीक पहचान कर रहा है, बल्कि अत्याधुनिक तकनीकों के उपयोग से सुरक्षित और प्रभावशाली इलाज भी उपलब्ध करा रहा है। यह उपलब्धि पूर्वांचल क्षेत्र के लाखों मरीजों के लिए आशा की किरण बनकर उभरी है।
Leave a Reply