Category: हेल्थ

  • काशी हिंदू विश्वविद्यालय के पूर्व छात्रों ने करवाया निःशुल्क आंख का ऑपरेशन

    काशी हिंदू विश्वविद्यालय के पूर्व छात्रों ने करवाया निःशुल्क आंख का ऑपरेशन

    कहाँ बंधा हैं जीवन किसी से ?
    अगर बंधी है तो…वो बस है,

    आशाएँ, उम्मीदें, भावनाएँ और विश्वास।

    वाराणसी। शुक्रवार, 4 अप्रैल को काशी हिन्दू विश्वविद्यालय के पूर्व छात्रों द्वारा संचालित मातृभूमि सेवा ट्रस्ट के तत्वावधान में आर. के. नेत्रालय, महमूरगंज, वाराणसी द्वारा कुल 11 मरीजों का अद्यतन फेंकों विधि से निःशुल्क आपरेशन हुआ एवं फोल्डेबल लेन्स प्रत्यारोपित किया गया।

    पुनः एक बार हृदय की गहराइयों से डाॅ आर के ओझा को आभार..।
    इस पावन ऑपरेशन यज्ञ में शामिल आर.के.नेत्रालय, वाराणसी के महान चिकित्सक टीम को धन्यवाद..।

    News courtesy : सुरेन्द्र द्विवेदी, मातृभूमि सेवा ट्रस्ट।

  • एम्स गोरखपुर में विश्व ऑटिज़्म दिवस पर जागरूकता व्याख्यान का आयोजन

    एम्स गोरखपुर में विश्व ऑटिज़्म दिवस पर जागरूकता व्याख्यान का आयोजन

    गोरखपुर। 4 अप्रैल 2025, अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान (एम्स), गोरखपुर में विश्व ऑटिज़्म दिवस 2025 के अवसर पर एक जन-जागरूकता व्याख्यान का आयोजन किया गया। इस कार्यक्रम का उद्देश्य ऑटिज़्म स्पेक्ट्रम विकार (ASD) के प्रति आम जनता, अभिभावकों और स्वास्थ्य कर्मियों को जागरूक करना था।

    ऑटिज़्म: एक न्यूरो-विकासात्मक विकार

    कार्यक्रम में बाल रोग विभाग की विभागाध्यक्ष प्रोफेसर महिमा मित्तल ने ऑटिज़्म की प्रस्तुति दी, जिसमें इसके प्रारंभिक लक्षणों एवं सामाजिक-व्यवहारिक संकेतों के बारे में विस्तार से बताया गया। उन्होंने कहा कि समय पर पहचान और उचित हस्तक्षेप से ऑटिज़्म से पीड़ित बच्चों को एक बेहतर जीवन देने में मदद मिल सकती है।

    कार्यक्रम में बाल रोग विभाग की सीनियर रेजिडेंट डॉ. गरिमा ने ऑटिज़्म पर एक विस्तृत प्रस्तुति दी, जिसमें निदान, उपचार, और अभिभावकों की भूमिका पर प्रकाश डाला गया। उन्होंने वीडियो क्लिप्स और केस स्टडीज़ के माध्यम से प्रतिभागियों को ऑटिज़्म के व्यवहारिक लक्षणों को समझने में मदद की।

    इस अवसर पर डॉ. मनीष कुमार, डॉ. अंचला भारद्वाज, डॉ. ममता गुप्ता सहित कई फैकल्टी सदस्य, मेडिकल छात्र, नर्सिंग स्टाफ और अभिभावक उपस्थित रहे।

    इंटरेक्टिव सत्र और जागरूकता बढ़ाने की पहल

    कार्यक्रम के अंत में प्रश्नोत्तर सत्र का आयोजन किया गया, जिसमें उपस्थित लोगों ने ऑटिज़्म से जुड़ी अपनी शंकाएँ और समस्याएँ विशेषज्ञों से साझा कीं। विशेषज्ञों ने इन प्रश्नों के उत्तर देकर ऑटिज़्म को लेकर समाज में फैली भ्रांतियों को दूर करने का प्रयास किया।

    ऑटिज़्म स्पेक्ट्रम डिसऑर्डर (ASD) क्या है?

    ऑटिज़्म स्पेक्ट्रम डिसऑर्डर (ASD) एक जटिल न्यूरो-विकासात्मक विकार है, जो व्यक्ति के सामाजिक संपर्क, संचार कौशल और व्यवहार को प्रभावित करता है। यह समस्या जीवनभर बनी रह सकती है, और इसके लक्षण बचपन में ही प्रकट हो जाते हैं।

    ऑटिज़्म से पीड़ित बच्चों की दुनिया बाकी बच्चों से अलग होती है। वे अक्सर लोगों से नज़रें नहीं मिलाते, नाम पुकारने पर प्रतिक्रिया नहीं देते और अपनी दुनिया में ही खोए रहते हैं। कई मामलों में वे बोलने में देरी करते हैं, दोहराव वाले व्यवहार प्रदर्शित करते हैं, या कुछ विशेष रुचियों में असामान्य रूप से गहराई से डूबे रहते हैं।

    ऑटिज़्म का कोई निश्चित कारण नहीं है, लेकिन शोधकर्ताओं का मानना है कि इसमें आनुवंशिक और पर्यावरणीय कारक महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। हालांकि, समय पर पहचान और सही हस्तक्षेप से स्थिति को नियंत्रित किया जा सकता है, जिससे बच्चे का विकास बेहतर हो सकता है।

    एम्स गोरखपुर द्वारा आयोजित यह व्याख्यान समाज में ऑटिज़्म के प्रति समझ, सहानुभूति और समावेशी सोच को बढ़ावा देने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम साबित हुआ। विशेषज्ञों ने इस बात पर जोर दिया कि समाज में ऑटिज़्म से ग्रसित बच्चों और उनके परिवारों को सहयोग और संवेदनशीलता की जरूरत है, जिससे वे बेहतर जीवन जी सकें।

    इस महत्वपूर्ण आयोजन की प्रशंसा एम्स गोरखपुर की कार्यकारी निदेशक मेजर जनरल डॉ. विभा दत्ता द्वारा की गई, जिन्होंने स्वयं सत्र को सुविधाजनक और प्रेरणादायक बनाने में योगदान दिया।

  • एम्स गोरखपुर में केंद्र सरकार की प्रधान मंत्री आयुष्मान योजना के तहत पैंक्रियास के कैंसर का हुआ मुफ्त व्हिप्पल्स ऑपरेशन !

    एम्स गोरखपुर में केंद्र सरकार की प्रधान मंत्री आयुष्मान योजना के तहत पैंक्रियास के कैंसर का हुआ मुफ्त व्हिप्पल्स ऑपरेशन !

    गोरखपुर एम्स के सर्जरी विभाग ने जटिल ऑपरेशन्स की श्रंखला में एक और सफलता अर्जित की !

    एक 55 वर्षिय वृद्ध पीलिया की शिकायत एवं शरीर में खुजली की समस्या से कई दिनों से पीड़ित था। कई जगह इलाज़ लेने के बाद जब समस्या का हल नहीं मिल पाया तो उसने एम्स के सर्जरी विभाग के सह आचार्य डॉ धर्मेंद्र पिपल को दिखाया। डॉ पिपल ने जांचों के पाया की मरीज़ एमपूलरी कैंसर से पीडत है ,जो की एक तरह का पैंक्रिअटिक कैंसर होता है। एम्स के गैस्ट्रोएंटरोलॉजी विभाग के डॉ सौरभ केड़िया ने मरीज़ की एंडोस्कोपी कर जांच में पता लगाया की मरीज़ को एम्पुला के पास एक गाँठ है जिसकी वज़ह से मरीज़ की कॉमन बाइल डक्ट में रुकावट की वजह से पीलिया बढ़ता जा रहा है |

    इस कैंसर का इलाज़ व्हिप्प्ल्स ऑपरेशन के द्वारा ही सम्भव है और वो भी अगर समय पर नहीं हो तो कैंसर फ़ैल सकता है और तब ऑपरेशन करना संभव नहीं होता | यह व्हिप्प्ल्स आपरेशन बहुत जटिल ऑपेऱशनों में से एक है, जिसमे आमाशय का दूरस्थ भाग, कॉमन बाइल डक्ट , ड्योडेनाम, जेजुनम, पैंक्रिअटिक हैड एवं कई लिम्फ नोड्स को निकाला जाता है| तत्पश्चात अमाशय, पैंक्रियास एवं कॉमन बाइल डक्ट के बचे हुए भागों को जेजुनम से जोड़ना पड़ता है| कई तरह के आंतों में जोड़ होने की वजह से बाइल, पैंक्रिअटिक जूस और कभी कभी मल का लीक होने की भी समस्या खड़ी हो सकती है, जिसकी वजस से मरीज़ की जान भी जा सकती है |

    मरीज़ और उसके परिजनों को बीमारी एवं उसके उपचार केबारे में पूरी तरह बताया गया! ऑपरेशन के दौरान एवं बाद में होने वाले सभी परिणामों एवं दुश्परिणाममों के बारे में विस्तारपूर्वक सम्पूर्ण जानकारी देने के बाद सहमति ली गई एवं ऑपरेशन का निर्णय लिया गया! मरीज़ और परिजनों ने एम्स के सर्जरी विभाग पर भरोसा जताया और आयुष्मान योजना के आर्थिक सहयोग से उसके स्वस्थ्य लाभ मिल सका !

    मरीज़ के ऑपरेशन को आज 15 दिन हो चुके हैं। ऑपरेशन में करीब 7 से 8 घंटे तक का समय लगा, तत्पश्चात मरीज को अनेस्थेसिस विभाग के नवनिर्मित क्रिटिकल केयर यूनिट में रखा गया, जहाँ क्रिटिकल केयर टीम ने मरीज की दिन रात देखभाल कर ऑपरेशन को सफल बनाया। अब मरीज की सेहत में तीव्र गति से सुधार हो रहा है। उसने खाना पीना भी शुरू कर दिया है, और जल्द ही उसे छुट्टी भी दे दी जायेगी।

    चूँकि, इस ऑपरेशन में बहुत खर्चा आता है, गरीब मरीज़ों के लिए यह ऑपरेशन करा पाना बहुत ही असंभव है! गोरखपुर एम्स में केंद्र सरकार की आयुष्मान योजना इस मरीज़ के लिए काफी लाभदायक एवं जीवनदायक सिद्ध हुई! इस योजना की वजह से मरीज के ऑपरेशन में उपयोग में आने वाले महँगे उपकरण एवं दवाएं जैसे की स्टैप्लरस, हायर एंटीबायोटिक्स, एल्ब्युमिन, टीपीएन इत्यादि मुफ्त में एम्स की अमृत फार्मेसी द्वारा उपलब्ध कराये गए!

    ऑपरेशन करने वाली टीम : डॉ धर्मेंद्र कुमार पीपल ( सह आचार्य ), डॉ रजनीश ( सहायक आचार्य ), डॉ गौरव गुप्ता (एडिशनल प्रोफेसर एंड हेड ), डॉ रवि गुप्ता ( सह आचार्य ) डॉ रवि प्रकाश ( सीनियर रेजिडेंट ) , डॉ आदित्य , डॉ स्वाति , डॉ ऐश्वर्या डॉ राजेश , डॉ हर्षा , डॉ दर्शन , डॉ राजा मुर्तज़ा , डॉ शशिकांत, एनेस्थीसिया एवं क्रिटिकल केयर टीम: डॉ सोनम पटेल, डॉ संतोष , डॉ विक्रम वर्धन , डॉ भूपेंद्र सिंह , डॉ सीमा यादव, डॉ प्रियंका , डॉ विजयेता , डॉ गणेश निमजे , डॉ रविशंकर , डॉ अंकिता काबी, डॉ गौरव , डॉ अजय ,डॉ अरुंधति, डॉ रिया , डॉ आशुतोष, डॉ उर्वशी, सिस्टर संगीथा।

    एम्स गोरखपुर की कार्यकारी निदेशक मेजर डॉ विभा दत्ता ने सर्जरी विभाग को उत्कर्ष कार्य की सराहना कर भविष्य में और ऐसे कार्य करने के लिए प्रेरित किया।

  • हैंड्स ऑन सुचरिंग एंड नॉटिंग वर्कशॉप इन स्पेशली डिजाइंड JJIW बस

    हैंड्स ऑन सुचरिंग एंड नॉटिंग वर्कशॉप इन स्पेशली डिजाइंड JJIW बस

    डिपार्टमेंट ऑफ़ सर्जरी एम्स गोरखपुर द्वारा एक सर्जिकल हैंड्स ऑन वर्कशॉप का आयोजन १-३ अप्रैल किया गया। इस वर्कशॉप की ख़ास बात यह रही कि यह जॉनसन एंड जॉनसन कंपनी द्वारा स्पेशली डिजाइंड, फुल्ली एसी बस में है। जॉनसन एंड जॉनसन कंपनी ने इस बस को “ जॉनसन एंड जॉनसन इंस्टिट्यूट ऑन व्हील्स “ का नाम दिया है (JJIW)। इसमें मेडिकल स्टूडेंट्स सुचरिंग तथा नॉटिंग की बेसिक ट्रेनिंग के सकते है ( टाँके मारने के तरीकों को सीख सकते है )।

    बस में स्पेशली डिजाइंड सुचरिंग पैड्स रखे गए है , इसमें ट्रेनर्स भी है, जो वीडियो डेमन्स्ट्रेशन के द्वारा आर्टिफीसियल इंटेलिजेंस (AI) की मदद से ये ट्रेनिंग में मदद करते है । इस फुल्ली एसी बस में एक बार में १५-२० स्टूडेंट्स की बैच बैठ कर टेबल चेयर पे ट्रेनिंग कर सकती है ।

    इस बस में लैप्रोस्कोपी द्वारा पिक एंड होल्ड, इंडो सुचरिंग एंड इंडो नॉटिंग भी उपलब्ध है । इसके लिए स्पेशली डिजाइंड एंडोट्रेनर्स बस में उपलब्ध है , जो सर्जिकल रेजिडेंट्स एंड जूनियर रेजिडेंट्स के लिए भी बहुत लाभदायक है ।

    १ अप्रैल से यह बस एम्स गोरखपुर के ऑडिटोरियम के सामने पार्क की गई थी ताकि स्टूडेंट्स १५-२० की बैचेस में आकर प्रैक्टिस कर सकें । बहुत से स्टूडेंट्स इसमें प्रैक्टिस कर चुके है तथा ट्रेनिंग का लाभ लें चुके है । विभिन्न सर्जिकल विभागों के लगभग बहुत से सीनियर व जूनियर रेजीडेंट्स भी इसका लाभ ले चुके है । देवरिया, बस्ती , महाराजगंज के मेडिकल कॉलेजों से भी स्टूडेंट्स यहां आए। इस बस में ठंडा पानी, चाय कॉफ़ी व कुकीज़ का भी अरेंजमेंट है। बस के बाहर स्टूडेंट्स की वेटिंग लिस्ट भी रहीं, हर मेडिकल स्टूडेंट इसमें जाकर सुचरिंग न नोटिंग की ट्रेनिंग लेना चाहता था। इसमें वेट टिश्यू का अरेंजमेंट भी किया गया, जिससें ट्रेनिंग लेने वाले स्टूडेंट्स को टांके लगाने पर प्रत्यक्ष मरीज पे टाँके लगाने जैसा अनुभव प्राप्त हुआ।

    उम्मीद है कि ४०० से अधिक मेडिकल स्टूडेंट्स, इंटर्न्स, जूनियर रेजिडेंट्स, सीनियर रेजिडेंट्स तथा नर्सिंग ऑफिसर्स इसमें ट्रेनिंग लें चुके हैं।

    डिपार्टमेंट ऑफ़ सर्जरी से विभागाध्यक्ष डॉ गौरव गुप्ता के साथ एसोसिएट प्रोफेसर्स डॉ रवि गुप्ता , डॉ धर्मेंद्र पीपल, डॉ मुकुल सिंह, डॉ हरिकेश यादव तथा असिस्टेंट प्रोफेसर्स डॉ रजनीश, डॉ शाहनवाज, डॉ मनीष कुमार ने स्टूडेंट्स को सुचरिंग नोटिंग की ट्रेनिंग दी।

    एग्जीक्यूटिव डायरेक्टर मेजर जनरल डॉ विभा दत्ता ने डॉ गौरव गुप्ता एवं सर्जरी की पूरी टीम को इस हैंड्स ऑन ट्रेनिंग के लिए बधाई दी है तथा कहा की इस तरह की हैंड्स ऑन ट्रेनिंग मेडिकल स्टूडेंट्स के लिए बहुत ही फायदेमंद ट्रेनिंग है। एग्जीक्यूटिव डायरेक्टर मैडम द्वारा बुधवार, २ अप्रैल को ११.३० बजे इस हैंड्स ऑन कार्यशाला का उदघाटन किया गया था । मैडम ने जॉनसन एंड जॉनसन की टीम का भी आभार व्यक्त किया।

  • शाही ग्लोबल हॉस्पिटल में एडवांस पेडियाट्रिक कार्डियोलॉजी का कैंप

    शाही ग्लोबल हॉस्पिटल में एडवांस पेडियाट्रिक कार्डियोलॉजी का कैंप

    गोरखपुर। हर बार की तरह इस बार भी दिल्ली फोर्टिस एस्कॉर्ट हार्ट इंस्टिट्यूट के डायरेक्टर तथा पेडियाट्रिक कार्डियोलॉजी के विभाग अध्यक्ष डॉ नीरज अवस्थी ने 93 बच्चों का विधिवत ह्रदय जांच किया जिसमें 19 बच्चे ऐसे पाए गए, जिन्हें ऑपरेशन की आवश्यकता है. ज्यादातर बच्चे जिनका ऑपरेशन हो चुका है वह अपना चेकअप कराने आए थे और सभी बच्चे स्वस्थ पाए गए हैं.

    इन सभी बच्चों का जो आज हृदय संबंधित चिकित्सा की परामर्श लेने के लिए आए थे इनका इकोकार्डियोग्राफी के साथ हृदय से संबंधित अन्य जांचे भी की गई . जिन बच्चों की बीमारी केवल दवा से ठीक हो सकती थी उन्हें दवा लेकर दे दिया गया जिन बच्चों को ऑपरेशन की आवश्यकता है उनके ऑपरेशन की तैयारी चालू हो गई है .

    इस समय नवरात्र चल रहा है मां दुर्गा किसी भी रूप में कब आ जाएं यह कहा नहीं जा सकता है इसलिए कुछ बच्चियों का ऑपरेशन की तिथि दे दी गई है इन बच्चियों का निशुल्क ऑपरेशन किया जाएगा शाही ग्लोबल हॉस्पिटल की तरफ से नवरात्र के समय इन बच्चियों के माता-पिता तथा इन बच्चों को भी निशुल्क ऑपरेशन का गिफ्ट दिया गया है.

    बच्चों में हृदय की बीमारी का ऑपरेशन काफी महंगा पड़ता है अतः इसकी मदद के लिए मुख्यमंत्री निधि ,संसध निधि ,के साथ अन्य सामाजिक संगठन के सहयोग से किया जाता है . पुज्य योगी आदित्य नाथ जी महाराज माननीय मुख्यमंत्री उत्तर प्रदेश के जनता दरबार में अभी तक जो भी गया है उसे कुछ न कुछ सहायता मिला है , पैसे के अभाव मे अभी तक किसी का इलाज नहीं रुका है.

    अभी तक 626 से ज्यादा बच्चों के हृदय का ऑपरेशन हो चुका है. सबसे आश्चर्य की बात है की बाबा गोरखनाथ के आशीर्वाद से अभी तक सभी बच्चे ठीक रहे, 100% इलाज सफल रहा .एक भी कैजुअल्टी या मृत्यु नहीं हुई .बच्चों के हृदय का ऑपरेशन इतना जटिल होने के बाद भी इस तरह के सफलता मिली .
    जिसमें जो गरीब, निर्धन असहाय हैं उनकी मदद शाही ग्लोबल हॉस्पिटल किसी न किसी के सहयोग से खुद करता है .शाही ग्लोबल अस्पताल के निदेशक डॉ शिव शंकर शाही का मानना है कि जब तक संभव है बच्चों को दिल का दर्द नहीं होने दिया जाएगा बच्चों में दिल की बीमारी उनके खान-पान या रहन सहन से नहीं होता है यह बीमारी माता-पिता के द्वारा या तो अनुसांगिक के रूप में आता है या जब बच्चा मां के गर्भ होता है तब कुछ कुदरत का करिश्मा, गलत दवा के सेवन या माता पिता के गलत खानपान से होता है .इस बीमारी में बच्चों का कोई दोष नहीं है. इन नन्हे मुन्ने बच्चों को यह दिल का दर्द गिफ्ट के रूप में प्राकृतिक या समाज द्वारा दिया जाता है आज समाज में प्रदूषण इतना फैल चुका है कि हमको फ्री में मिलने वाला पानी और हवा भी दूषित है खान-पान की किसी भी वस्तु पर विश्वास नहीं किया जा सकता है लोग आगे बढ़ाने तथा समाज में अच्छा दिखने के चक्कर में समय से शादी विवाह नहीं करते हैं स्वास्थ पर ध्यान नहीं देते हैं जिसका प्रतिफल कई बार इन बच्चों को भुगतना पड़ता है.

  • महापौर ने जागरूकता रैली को दिखाई हरी झंडी, संचारी रोग नियंत्रण अभियान का आगाज

    महापौर ने जागरूकता रैली को दिखाई हरी झंडी, संचारी रोग नियंत्रण अभियान का आगाज

    “एक माह तक ग्यारह विभाग मिल कर चलाएंगे अभियान, दस अप्रैल से घर घर होगी दस्तक”

     

    गोरखपुर। जिले में संचारी रोग नियंत्रण अभियान का मंगलवार से आगाज हो गया। महापौर डॉ मंगलेश श्रीवास्तव ने जागरूकता रैली को हरी झंडी दिखा कर इस अभियान का शुभारंभ किया। एक माह तक चलने वाले इस अभियान के दौरान ग्यारह विभाग आपस में मिल कर संचारी रोगों की रोकथाम संबंधी गतिविधियों करेंगे। वहीं, दस अप्रैल से तीस अप्रैल तक स्वास्थ्य टीमें घर घर जाकर दस्तक देंगी और बीमारियों के प्रति जागरूकता के साथ साथ बुखार, टीबी, कुष्ठ, फाइलेरिया आदि के संभावित मरीजों को सूचीबद्ध करेंगी। जिले में हर साल चल रहे इस अभियान के कारण वर्ष दो हजार इक्कीस से लेकर अब तक जापानीज इंसेफेलाइटिस से कोई भी मौत नहीं हुई है।

    महापौर ने उपस्थित चिकित्सा अधिकारियों, नर्सिंग स्टॉफ और अन्य कर्मियों को संचारी रोगों से लड़ने में योगदान देने की शपथ भी दिलाई। पत्रकारों से बातचीत में उन्होंने कहा कि शासन की मंशा के अनुरूप पूरे जिले में एक माह तक संचारी रोगों से बचाव की गतिविधियां चलाई जाएंगी। साथ ही बीमारियों के प्रति लोगों को जागरूक करते हुए संभावित मरीजों को ढूंढा जाएगा। उनकी जांच होगी और बीमारियों का इलाज भी किया जाएगा। एक माह के अभियान में चिकित्सा एवं स्वास्थ्य, नगर विकास, पंचायती राज व ग्राम्य विकास, पशुपालन, बाल विकास सेवा एवं पुष्टाहार, शिक्षा, चिकित्सा शिक्षा, दिव्यांगजन सशक्तिकरण, कृषि एवं सिंचाई, सूचना और उद्यान विभाग संचारी रोगों के नियंत्रण की गतिविधियां चलाएंगे।

    इस अवसर पर मुख्य चिकित्सा अधिकारी डॉ एके चौधरी ने बताया कि अभियान के दौरान आभा आईडी भी बनाई जाएगी। हीट रिलेटेड इलनेस के बारे में जागरूकता लाई जाएगी और मच्छरों के घनत्व का पता लगा कर प्रभावी नियंत्रण के उपाय किये जाएंगे। नाले नालियों की सफाई, स्कूलों में जागरूकता, झाड़ियों की सफाई, चूहा व छछुंदर और सुकरबाड़ों का प्रबंधन, फॉगिंग, मच्छर विकर्षी पौधों का रोपण और कुपोषित बच्चों की पहचान जैसे अलग अलग कार्य शासनादेश के अनुसार अलग अलग विभाग समन्वय बना कर करेंगे।

    सीएमओ ने बताया कि जिला सर्विलांस अधिकारी डॉ राजेश, जिला मलेरिया अधिकारी अंगद सिंह और जेई एईएस कंसल्टेंट सिद्धेश्वरी सिंह समेत जिला मलेरिया विभाग की टीम व अन्य अधिकारीकरण स्वास्थ्य विभाग की तरफ से समन्वय स्थापित करेंगे। सभी विभागों को प्रतिदिन की गतिविधियों का चित्र व वीडियो आदि साझा करने के लिए कहा गया है। स्वास्थ्य विभाग नोडल की भूमिका में है।

    इस मौके पर एसीएमओ डॉ नंदलाल कुशवाहा, डॉ विनय पांडेय, डीटीओ डॉ गणेश यादव, डिप्टी सीएमओ डॉ अनिल सिंह, डीएचईआईओ केएन बरनवाल, विश्व स्वास्थ्य संगठन से डॉ विनय, यूनिसेफ से संदीप श्रीवास्तव, डॉ हसन फहीम, मलेरिया निरीक्षक प्रभात, राहुल, नगर निगम के अधिकारी व कर्मचारीगण, राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन से उपेंद्र मणि त्रिपाठी, धर्मवीर प्रताप, एएन मिश्रा, आदिल, अरविंद, रत्नाकर आदि प्रमुख तौर पर मौजूद रहे।

    “नियंत्रित हुईं बीमारियां”

    सीएमओ डॉ चौधरी ने बताया कि इस वर्ष जिले में एईएस के छह मामले मिले हैं। जापानीज इंसेफेलाइटिस का कोई केस नहीं मिला है। डेंगू के अठारह मरीज सामने आए और सभी ठीक हो चुके हैं। मलेरिया, फाइलेरिया और कालाजार जैसी बीमारियों के एक भी रोगी नहीं मिले हैं। संचारी रोगों के कारण इस वर्ष अभी तक किसी की मृत्यु नहीं हुई है।

     

  • ग्यारह विभागों की मदद से चलेगा संचारी रोग नियंत्रण अभियान, दस अप्रैल से होगी घर घर दस्तक

    ग्यारह विभागों की मदद से चलेगा संचारी रोग नियंत्रण अभियान, दस अप्रैल से होगी घर घर दस्तक

    “महापौर डॉ मंगलेश श्रीवास्तव करेंगे अभियान का शुभारंभ, सभी ब्लॉकों पर जनप्रतिनिधि होंगे शामिल”

    “दिमागी बुखार से बचाव के साथ साथ सभी प्रकार के संचारी रोगों की रोकथाम के होंगे प्रयास”

    गोरखपुर। जिले में एक अप्रैल से लेकर तीस अप्रैल तक ग्यारह विभागों की मदद से संचारी रोग नियंत्रण अभियान चलाया जाएगा । इस दौरान दिमागी बुखार से बचाव के साथ साथ सभी प्रकार के संचारी रोगों जैसे मलेरिया, डेंगू, फाइलेरिया, टीबी, कुष्ठ आदि से बचाव के प्रयास होंगे। दस अप्रैल से स्वास्थ्य विभाग की टीम घर घर दस्तक देकर लोगों को बीमारियों के प्रति जागरूक करेंगी और संभावित लक्षण वाले रोगियों की सूची भी तैयार करेंगे। यह जानकारी मुख्य चिकित्सा अधिकारी डॉ आशुतोष कुमार दूबे ने दी। उन्होंने बताया कि जनपद स्तरीय अभियान का शुभारंभ महापौर डॉ मंगलेश श्रीवास्तव, मुख्य चिकित्सा अधिकारी कार्यालय से करेंगे। सभी ब्लॉकों पर अभियान के शुभारंभ कार्यक्रम में जनप्रतिनिधिगण शामिल होंगे।

    मुख्य चिकित्सा अधिकारी ने बताया कि एक माह तक चलने वाले संचारी रोग नियंत्रण अभियान के दौरान चिकित्सा एवं स्वास्थ्य विभाग, नगर विकास विभाग, पंचायती राज विभाग या ग्राम विकास विभाग, पशुपालन विभाग, बाल विकास सेवा एवं पुष्टाहार विभाग, शिक्षा विभाग, चिकित्सा शिक्षा विभाग, दिव्यांगजन सशक्तिकरण विभाग, कृषि एवं सिंचाई विभाग, सूचना विभाग और उद्यान विभाग समन्वय बना कर काम करेंगे। इस दौरान संचारी रोगों के वाहक नियंत्रण गतिविधियों, जनजागरूकता, साफ सफाई, शुद्ध पेयजल के इंतजाम, हीट वेव के प्रबंधन की गतिविधियां आदि संचालित की जाएंगी। इस संबंध में जिलाधिकारी कृष्णा करूणेश और सीडीओ संजय कुमार मीणा के दिशा निर्देशन में आवश्यक बैठकें सम्पन्न हो चुकी हैं। पूरे माह अग्रिपंक्ति कार्यकर्ता आभा आईडी भी बनाएंगी।

    डॉ दूबे ने बताया कि दस अप्रैल से तीस अप्रैल के बीच दस्तक अभियान के दौरान स्वास्थ्य टीमे घर घर जाएंगी और लोगों को बीमारियों से बचाव के लिए जागरूक करेंगी। साथ ही बुखार के रोगियों, इंफ्लुएंजा लाइक इलनेस, संभावित क्षय रोगियों, कुष्ठ, फाइलेरिया एवं कालाजार के संभावित रोगियों और कुपोषित रोगियों की सूची तैयार करेंगी। साथ ही क्षेत्रवार ऐसे मकानों की सूची भी तैयार की जाएगी जहां घरों के भीतर मच्छरों का प्रजनन अधिक पाया गया हो। इस कार्य में आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं द्वारा आशा कार्यकर्ताओं को पूरा सहयोग करने का दिशा निर्देश है।

    *लगाए जाएंगे स्टीकर*

    सीएमओ ने बताया कि जिला सर्विलांस अधिकारी डॉ राजेश और डीएमओ अंगद सिंह स्वास्थ्य विभाग के तरफ से अभियान का नेतृत्व करेंगे। स्वास्थ्य टीमों को निर्देश दिया गया है कि जिन घरों में पंद्रह वर्ष से कम आयु के बच्चे हों या फिर संभावित क्षय रोगी हों, वहां घर के बाहर स्टीकर अवश्य लगाएं। ऐसे परिवारों के सदस्यों को प्रेरित करना है कि किसी भी प्रकार का बुखार होने पर नजदीकी स्वास्थ्य केंद्र ले जाएं।

    *ये गतिविधियां होंगी प्रमुख*

    • नालियों की साफ सफाई और एंट लार्वल का छिड़काव।
    • छिछले हैंडपम्पों का चिन्हीकरण और शुद्ध पेयजल की उपलब्धता।
    • स्कूलों में जनजागरूकता की गतिविधियां।
    • मच्छररोधी गतिविधियां।
    • चूहा और छछूंदर एवं अन्य कृतक नियंत्रण गतिविधियां
    • बुखार के रोगियों को एम्बुलेंस की मदद से अस्पताल भिजवाना।
    • सार्वजनिक उद्यानों और विद्यालयों में मच्छर विकर्षी पौधों का रोपण।
    • इंसेफेलाइटिस से दिव्यांग बच्चों का चिन्हीकरण और सरकारी सहयोग।
    • स्कूली बच्चों को पूरी बांह के कपड़े पहनने के लिए प्रेरित करना।
    • कुपोषित बच्चों का चिन्हीकरण और समुदाय को हीट रिलेटेड बीमारियों के प्रति जागरूक करना।
    • पशुओं के मल मूत्र की साफ सफाई के लिए जागरूकता और सुकरबाड़ों को आबादी से दूर ले जाना।

  • आयुर्वेद और बायोटेक्नोलॉजी से चिकित्सा के क्षेत्र में हो रहा वैश्विक नवाचार : प्रो. भार्गव

    आयुर्वेद और बायोटेक्नोलॉजी से चिकित्सा के क्षेत्र में हो रहा वैश्विक नवाचार : प्रो. भार्गव

    *एमजीयूजी में ‘आयुर्वेद एवं बायोमेडिकल विज्ञान में जैव प्रौद्योगिकी के अनुप्रयोग’ विषय पर अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन का शुभारंभ*

     

    *नई वैश्विक चुनौतियों को संकल्पों के साथ स्वीकार करना होगा : प्रो. डीपी सिंह*

    *प्रो. सुभाष चंद्र लखोटिया लाइफ टाइम अचीवमेंट अवॉर्ड और प्रो. रमेश शर्मा डीएस पाउले ओरेशन अवार्ड से हुए सम्मानित*

    *कुलसचिव डॉ. प्रदीप कुमार राव के महाकुंभ पुस्तक और अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन की शोध संदर्भ पुस्तिका का हुआ विमोचन*

    गोरखपुर। महायोगी गोरखनाथ विश्वविद्यालय गोरखपुर (एमजीयूजी) के अंतर्गत संचालित संबद्ध स्वास्थ्य विज्ञान संकाय के तत्वावधान में सोसाइटी फॉर बायोटेक्नोलॉजिस्ट इंडिया (एसबीटीआई) के सहयोग से ‘आयुर्वेद एवं बायोमेडिकल विज्ञान में जैव प्रौद्योगिकी के अनुप्रयोग’ विषय पर तीन दिवसीय अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन का शुभारंभ रविवार, 30 मार्च को हुआ। उद्घाटन सत्र में मुख्य अतिथि के रूप में आईसीएमआर के पूर्व महानिदेशक और राष्ट्रीय विज्ञान अकादमी के अध्यक्ष पद्मश्री प्रो. बलराम भार्गव का मार्गदर्शन प्राप्त हुआ जबकि अध्यक्षता यूपी के मुख्यमंत्री के शिक्षा सलाहकार एवं विश्वविद्यालय अनुदान आयोग के पूर्व चेयरमैन प्रो डीपी सिंह ने की।

    उद्घाटन सत्र को संबोधित करते हुए प्रो. भार्गव ने कहा कि आयुर्वेद और बायोटेक्नोलॉजी से चिकित्सा के क्षेत्र में वैश्विक नवाचार हो रहा है। आयुर्वेद की प्राचीन वैदिक चिकित्सा पद्धति और जैव चिकित्सा के समन्वय से स्वास्थ सेवा समृद्ध और सशक्त हो रहा है। इससे मानवता के लिए एक उज्जवल भविष्य का मार्गदर्शन प्रशस्त हुआ है। उन्होंने कहा कि आधुनिक चिकित्सा विज्ञान के विकास में जैव प्रौद्योगिकी का योगदान बहुत महत्वपूर्ण रहा है। जैव प्रौद्योगिकी ने न केवल स्वास्थ्य देखभाल प्रणाली में क्रांतिकारी बदलाव किए हैं, बल्कि आयुर्वेद में भी इसके अनुप्रयोग ने नई संभावनाओं का द्वार खोला है। आयुर्वेद जीवन और स्वास्थ्य के लिए एक व्यापक दृष्टिकोण प्रदान करता है, अपनी जड़ों से जुड़े हुए प्राकृतिक उपचारों को महत्वपूर्ण मानता है। वहीं, जैव प्रौद्योगिकी, जीवों और उनके घटकों का उपयोग करके विभिन्न चिकित्सा उत्पादों का विकास करती है।
    प्रो. भार्गव ने युवाओं का आह्वान करते हुए कहा कि भारत ने अन्न उत्पादन, दूध उत्पादन, आईटी, मोबाइल, हेल्थकेयर और अंतरिक्ष के क्षेत्र में अभूतपूर्व विकास हुआ है। अब बारी जैव प्रौद्योगिकी एवं आयुर्वेद को नई ऊंचाई पर ले जाने की है। उन्होंने कहा कि दुनिया में कोविड 19 के प्रकोप के दौरान भारत ने इंडीजिनस वैक्सीन बनाकर दुनिया की स्वास्थ सेवा को संजीवनी दी।

    सम्मेलन की अध्यक्षता करते हुए प्रो. डीपी सिंह ने कहा कि भारतीय ज्ञान परंपरा से संस्कार और राष्ट्र सेवा का भाव जागृत होता है। 21वीं सदी में स्वास्थ सेवा में प्राचीन आयुर्वेद, यूनानी और जैव प्रौद्योगिकी ने पुरातन और नए नवाचारों से मानव सेवा का पवित्र संकल्प पूरा किया है। उन्होंने कहा कि पुरातन स्वास्थ्य सेवा का अध्ययन कर नई चिकित्सा पद्धति में आयुर्वेद, योग, यूनानी का गहन अध्ययन कर भारतीय शिक्षा पद्धति को समृद्ध करने का प्रयास होना चाहिए। प्रो. सिंह ने कहा कि बाटेक्नोलॉजी में नए शोध, नवाचार और सृजन से अन्वेषकीय कार्य हो रहे है। इस सम्मलेन में जैव प्रौद्योगिकी चिकित्सा और आयुर्वेद के संभावनाओं को तलाशने का अवसर मिलेगा। पर, वैश्विक समय में जो नई चुनौतियां हमारे सामने आएंगी, उन्हें नए संकल्पों के साथ स्वीकार करना होगा। उन्होंने बताया कि राष्ट्रीय शिक्षा नीति व्यक्तित्व विकास के संकल्पों को विकसित करता है।

    सम्मेलन को संबोधित करते हुए महायोगी गोरखनाथ विश्वविद्यालय गोरखपुर के कुलपति प्रो. (डॉ.) सुरिंदर सिंह ने कहा कि यह सम्मेलन उभरते वैज्ञानिक रुझानों और नवाचारों को समझने तथा शोधकर्ताओं को आपस में संवाद का मंच प्रदान करने का एक महत्वपूर्ण अवसर है। यह सम्मेलन जैव प्रौद्योगिकी, औद्योगिक सूक्ष्म जीवविज्ञान, पर्यावरणीय जैव प्रौद्योगिकी, नैनो बायोटेक्नोलॉजी और बायोइन्फॉर्मेटिक्स जैसे विषयों पर केंद्रित रहेगा। उन्होंने उम्मीद जताई कि यह आयोजन जैव प्रौद्योगिकी और सूक्ष्म जीवविज्ञान अनुसंधान में नए आयाम स्थापित करेगा। उद्घाटन सत्र में प्रो. सुभाष चंद्र लखोटिया, प्रो. चंचाई बूनला, प्रो. एडाथिल विजयन ने भी प्रतिभागियों को शुभकामनाएं दीं।

    सम्मेलन में अतिथियों ने महायोगी गोरखनाथ विश्वविद्यालय गोरखपुर के कुलसचिव डॉ. प्रदीप कुमार राव के महाकुंभपर केंद्रित पुस्तक और प्रो. सुनील कुमार सिंह द्वारा संपादित अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन की शोध संदर्भ पुस्तिका का विमोचन किया। महायोगी गुरु गोरखनाथ आयुष विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. के रामचंद्र रेड्डी ने पुस्तकों के सार को व्याख्यायित किया ।

    अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन के उद्घाटन सत्र में जैव प्रौद्योगिकी के क्षेत्र में उत्कृष्ट योगदान देने के लिए सोसाइटी फॉर बायोटेक्नोलॉजिस्ट इंडिया की तरफ से बनारस हिन्दू विश्वविद्यालय में डिपार्टमेंट ऑफ जूलोजी के एमेरिटस प्रो. सुभाष चंद्र लखोटिया को लाइफ टाइम अचीवमेंट अवॉर्ड और स्कूल ऑफ लाइफ साइंस नार्थ ईस्टर्न हिल यूनिवर्सिटी शिलांग के पूर्व अधिष्ठाता प्रो .रमेश शर्मा को पद्मश्री बलराम भार्गव और प्रो. (डॉ.) धीरेंद्र पाल सिंह ने डीएस पाउले ओरेशन अवार्ड से सम्मानित किया। सोसाइटी अवॉर्ड की घोषणा एसबीटीआई के अध्यक्ष प्रो. एडथिल विजयन ने ने किया। स्वागत संबोधन सम्मेलन के संयोजक प्रो सुनील कुमार सिंह और आभार ज्ञापन आयोजन सचिव अमित कुमार दुबे ने किया।

    *आयुर्वेद के प्रभावी पहलुओं को अपनाने की जरूरत : प्रो. लखोटिया*
    सम्मेलन के प्रथम तकनीकी सत्र से पूर्व मुख्य उद्बोधन में आयुर्वेद एवं जैव विज्ञान के अंतर्संबंधों पर मार्गदर्शन करते हुए प्रो. सुभाष चंद्र लखोटिया ने कहा कि आयुर्वेद को वैज्ञानिक पद्धति से सत्यापित करके इसके प्रभावी पहलुओं को अपनाना चाहिए। उन्होंने कहा कि पारंपरिक ज्ञान को वैज्ञानिक ढंग से समझने के लिए एक अग्रगामी, निष्पक्ष और समावेशी दृष्टिकोण आवश्यक है। सम्मेलन में उपस्थित शोधार्थियों और विशेषज्ञों ने इन महत्वपूर्ण विषयों पर अपने शोध पत्र भी प्रस्तुत किए और जैव प्रौद्योगिकी में नए अवसरों को लेकर गहन चर्चा की।

    *तकनीकी सत्रों में हुई विशद चर्चा*
    सम्मेलन के तकनीकी सत्र के पहले व्याख्यान में चुलालोंगकोर्न विश्वविद्यालय बैंकाक में चिकित्सा संकाय के प्रो. चांचाई बूनला ने आधुनिक जैव प्रौद्योगिकी के उपयोग से नई औषधियों के विकास की संभावनाओं को रेखांकित किया। इस सत्र की अध्यक्षता प्रो. दिनेश यादव, सह-अध्यक्षता डॉ. रामवंत गुप्ता ने की एवं प्रतिवेदन डॉ. अंकिता मिश्रा ने प्रस्तुत किया। द्वितीय व्याख्यान में कोलंबो विश्वविद्यालय की प्रो. सुमादी डी सिल्वा ने विज्ञान के रहस्य और उसके उपयोगिता पर जानकारी दी। तृतीय व्याख्यान आयुर्वेद और औषधीय पौधों के अनुसंधान के बीच अंतर प्रबंधन विषय पर केंद्रित रहा। इसमें काठमांडू विश्वविद्यालय के प्रो. जनार्दन लामिछाने ने अन्वेषकीय दृष्टि से अपनी बात रखी। चतुर्थ व्याख्यान आणविक जीव विज्ञान केंद्र, हैदराबाद के वरिष्ठ वैज्ञानिक डॉ. जनेश दुबे ने दिया। उन्होंने जैव प्रौद्योगिकी चिकित्सा पद्धति पर विस्तार से शोधार्थियों का मार्गदर्शन किया। द्वितीय तकनीकी सत्र की अध्यक्षता प्रो. एडाथिल विजयन, सह-अध्यक्षता डॉ. राजीव सिंह ने की जबकि प्रतिवेदन डॉ. पवन कुमार कन्नौजिया ने प्रस्तुत किया। आयोजन समिति की डॉ. अनुपमा ओझा ने बताया कि अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन में भारत के कई राज्यों के विशेषज्ञों के साथ इजरायल, नेपाल, श्रीलंका, कोरिया, अमेरिका, इंग्लैंड, जर्मनी आदि से भी विषय विशेषज्ञ प्रतिभाग कर रहे हैं। उद्घाटन सत्र का संचालन डॉ अनुकृति राज, और तकनीकी सत्र का संचालन जिज्ञासा सिंह एवं प्रशांत गुप्ता ने किया। आज के आयोजन में महायोगी गुरु गोरखनाथ आयुष विश्वविद्यालय गोरखपुर के पूर्व कुलपति प्रो. एके सिंह, प्रो शशिकांत सिंह, डॉ विमल दुबे, डॉ रोहित श्रीवास्तव, डाॅ. धीरेंद्रकुमार सिंह, डॉ. अवेधनाथ सिंह, डाॅ. संदीप कुमार श्रीवास्तव, डाॅ.अंकिता मिश्रा, डॉ.कीर्ति कुमार यादव, डाॅ. अखिलेश कुमार दूबे, डाॅ. प्रेरणा अदिती, डाॅ. किरन कुमार ए., डाॅ.आशुतोष श्रीवास्तव आदि की प्रमुख सहभागिता रही।

  • एम्स गोरखपुर में पहली बार सफलतापूर्वक कॉक्लियर इम्प्लांट सर्जरी संपन्न

    एम्स गोरखपुर में पहली बार सफलतापूर्वक कॉक्लियर इम्प्लांट सर्जरी संपन्न

    गोरखपुर। एम्स गोरखपुर के ईएनटी विभाग ने चिकित्सा के क्षेत्र में एक नया कीर्तिमान स्थापित करते हुए चार वर्षीय जन्मजात बधिर (श्रवण बाधित) बच्चे पर पहली बार कॉक्लियर इम्प्लांट सर्जरी सफलतापूर्वक संपन्न की। यह उपलब्धि पूर्वांचल में उन्नत श्रवण पुनर्वास की दिशा में एक बड़ा कदम है।

    इस जटिल सर्जरी का संचालन डॉ. पंखुरी मित्तल द्वारा किया गया, जो कि एसएमएस जयपुर के प्रो. मोहनिश ग्रोवर के मार्गदर्शन और मेंटरशिप में संपन्न हुआ। इस शल्य चिकित्सा दल में डॉ. नैन्सी (सीनियर रेजिडेंट) और नर्सिंग ऑफिसर आकांक्षा शामिल थीं, जिन्होंने इस प्रक्रिया को सफल बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। इसके अलावा, डॉ. विक्रम वर्धन के नेतृत्व में डॉ. सोनम, डॉ. रवि और डॉ. गौरव की एनेस्थीसिया टीम ने बच्चे की सुरक्षा और आराम सुनिश्चित किया।

    इस कॉक्लियर इम्प्लांट का आधा खर्च उत्तर प्रदेश सरकार द्वारा वहन किया गया, जिससे इस जीवन-परिवर्तनकारी सर्जरी को संभव बनाया जा सका। यह सरकार की ओर से श्रवण बाधित बच्चों के उपचार हेतु किए जा रहे प्रयासों का प्रमाण है।

    कॉक्लियर इम्प्लांट और नवजात श्रवण जांच के लाभ

    कॉक्लियर इम्प्लांट उन लोगों के लिए एक क्रांतिकारी तकनीक है, जो जन्म से ही सुनने में असमर्थ होते हैं। यह उपकरण सुनने और भाषा सीखने की क्षमता को विकसित करने में मदद करता है, जिससे बच्चे का सामाजिक और शैक्षिक विकास बेहतर होता है। इस सर्जरी से बच्चे सामान्य स्कूलों में पढ़ने और समाज के साथ घुलने-मिलने में सक्षम हो सकते हैं।

    इसके साथ ही, नवजात श्रवण जांच (Neonatal Hearing Screening) अत्यंत महत्वपूर्ण है, क्योंकि इससे जन्म के तुरंत बाद ही श्रवण दोष की पहचान की जा सकती है। यदि पहले छह महीनों में इस समस्या का निदान कर लिया जाए और उपचार शुरू किया जाए, तो बच्चे के भाषा और संचार कौशल में जबरदस्त सुधार हो सकता है। एम्स गोरखपुर इस दिशा में जागरूकता बढ़ाने और अधिक से अधिक बच्चों को समय पर उपचार प्रदान करने के लिए प्रतिबद्ध है।

    एम्स गोरखपुर इस उपलब्धि को साकार करने में अमूल्य सहयोग के लिए कार्यकारी निर्देशिका मेजर डॉ. विभा दत्ता का विशेष धन्यवाद अर्पित करता है।

    यह ऐतिहासिक सफलता एम्स गोरखपुर की उन्नत चिकित्सा सेवा की प्रतिबद्धता को दर्शाती है और भविष्य में कई और बच्चों को सुनने और संवाद करने की क्षमता प्राप्त करने का अवसर प्रदान करेगी।

  • 299 ग्राम पंचायतें हुई टीबी मुक्त, जनप्रतिनिधियों से सम्मान पाकर निहाल हुए ग्राम प्रधान

    299 ग्राम पंचायतें हुई टीबी मुक्त, जनप्रतिनिधियों से सम्मान पाकर निहाल हुए ग्राम प्रधान

    “शासन के निर्देश पर एनेक्सी भवन सभागार में सम्पन्न हुआ विश्व टीबी दिवस का आयोजन”

    “महापौर, ग्रामीण विधायक और बांसगांव के विधायक हुए शामिल”

    गोरखपुर। जिले में 299 ग्राम पंचायतें टीबी मुक्त हो चुकी हैं। महापौर डॉ मंगलेश श्रीवास्तव, ग्रामीण विधायक विपिन सिंह और बांसगांव के विधायक डॉ विमलेश पासवान के हाथों सम्मान पाकर इन गांवों के प्रधान शनिवार को उत्साह से लवरेज दिखे। एडी हेल्थ डॉ बीएम राव, सीएमओ डॉ आशुतोष कुमार दूबे और डीटीओ डॉ गणेश यादव समेत राष्ट्रीय क्षय उन्मूलन कार्यक्रम से जुड़े उच्चाधिकारियों की मौजूदगी में ग्राम प्रधानों ने संकल्प लिया कि वह गोरखपुर को टीबी मुक्त बनाने में योगदान देंगे। शासन के निर्देश पर 24 मार्च को पड़ने वाले विश्व टीबी दिवस संबंधी यह आयोजन एनेक्सी भवन सभागार में शनिवार को आयोजित किया गया।

    इस मौके पर महापौर डॉ मंगलेश श्रीवास्तव ने कहा कि हमे यह सुनिश्चित करना होगा कि टीबी मरीज की दवा बीच में बंद न होने पाए। एक बार दवा बंद होने पर टीबी मरीजों में दवाओं के प्रति रेसिस्टेंट पैदा हो जाता है और उनका इलाज जटिल हो जाता है। हमारे आसपास कोई भी नया मरीज निकलता है तो उसे निरंतर दवा लेने के लिए प्रेरित करें, जब तक कि वह ठीक न हो जाए।

    गोरखपुर ग्रामीण विधायक विपिन सिंह ने कहा कि टीबी एक ऐसी बीमारी है जो किसी को भी हो सकती है। केंद्र और राज्य सरकार टीबी उन्मूलन के लिए प्रतिबद्ध है। इस मुहिम को सफल बनाने में ग्राम पंचायतों की अहम भूमिका है। हमे संकल्प लेना होगा कि जिले की सभी 1350 ग्राम पंचायतों को टीबी मुक्त बनाएंगे।

    बांसगांव के विधायक डॉ विमलेश पासवान ने कहा कि अगर किसी को लगातार खांसी आ रही है तो उसे टीबी जांच और पूरा इलाज करवाने के लिए प्रेरित करना होगा। जांच और इलाज की पूरी सुविधा निःशुल्क है। टीबी के बारे में लोगों तक सम्पूर्ण जानकारी पहुंच सके, इसके लिए सभी ग्राम सचिवालयों पर टोल फ्री नंबर अंकित कराया जाए।

    अतिथियों का स्वागत और विषय प्रवर्तन करते हुए मुख्य चिकित्सा अधिकारी डॉ आशुतोष कुमार दूबे ने बताया कि पिछले वर्ष नौ ग्राम पंचायतें टीबी मुक्त हुई थीं। उन्होंने ग्राम प्रधानों से अपील की कि इस वर्ष अधिकाधिक ग्राम पंचायतों को टीबी मुक्त करवाने में सहयोग करें। मरीजों तक यह जानकारी पहुंचाएं कि जांच के बाद बीमारी की पहचान होते ही मरीज को निक्षय पोर्टल पर पंजीकृत किया जाता है। पंजीकरण के पंद्रह दिनों के भीतर तीन हजार रुपये और उपचार के 84 दिन के पश्चात तीन हजार रुपये मरीज के खाते में दिये जाते हैं ताकि वह इलाज के दौरान सुपोषण से भरपूर खानपान रख सके। टीबी की जांच और इलाज निःशुल्क है।

    डीटीओ डॉ गणेश यादव ने बताया कि जिलाधिकारी, सीडीओ और सीएमओ के नेतृत्व में सौ दिवसीय टीबी उन्मूलन अभियान चलाया गया जिसके सकारात्मक परिणाम सामने आए हैं। इस दौरान करीब चार हजार से अधिक नये टीबी मरीज खोजे गये। उन्होंने अपील की कि लोग जरूरतमंद टीबी मरीजों को गोद लेने के लिए सामने आए। मरीजों को गोद लेकर पोषण में सहयोग और मानसिक संबल देने से वह जल्दी ठीक होते हैं । जांच और सम्पूर्ण उपचार से टीबी ठीक हो जाती है।

    *सम्मानित हुए कर्मचारी*

    इस मौके पर राष्ट्रीय टीबी उन्मलून कार्यक्रम से जुड़े कर्मियों को भी सम्मानित किया गया। जनप्रतिनिधिगण ने सेवानृत्त हो रहे मुख्य चिकित्सा अधिकारी की प्रशंसा की और उन्हें भी कार्यक्रम के दौरान सम्मानित भी किया गया। इस मौके पर ग्राम प्रधान संघ के अध्यक्ष, आरटीपीएयू प्रतिनिधि डॉ एनके द्विवेद्वी, डॉ एएन त्रिगुण, डीएमओ अंगद सिंह, एसटीडीसी की प्रतिनिधि डॉ अभिलाषा, डीडीटीओ डॉ विराट स्वरूप श्रीवास्तव, डीएचईआईओ केएन बरनवाल, पीपीएम समन्वयक अभय नारायण मिश्र, मिर्जा आफताब बेग, डीपीसी धर्मवीर प्रताप सिंह, वरिष्ठ कर्मी उपेंद्र, विनय, कवियित्री सरिता सिंह, विभाग से जुड़े राजेश सिंह, गोबिंद, मयंक, कमलेश गुप्ता, पवन, महेंद्र, इंद्रनील, अभिनंदन समेत टीबी और कुष्ठ विभाग के अधिकारी और कर्मचारीगण मौजूद रहे।