“एसएसबी आईजी रतन संजय के दिशा निर्देश पर डीआईजी डीके मिश्रा ने नेत्र शिविर में आए 25 मरीज का राज आई हॉस्पिटल के सहयोग से कराया निशुल्क मोतियाबिंद का ऑपरेशन”
गोरखपुर। सरहदों की रक्षा जब जवान करते हैं तो हम सुकून के साथ अपने वतन में चैन की नींद सोते हैं यही जवान सरहदों की रक्षा के साथ आंखों की भी सुरक्षा के लिए ग्रामीण इलाकों में नेत्र शिविर लगाकर लोगों की आंखों की जांच की जा रही है। ऐसे ही शिविर में आए 25 लोगों को मोतियाबिंद की शिकायत मिली जिसको लेकर एसएसबी के आईजी रतन संजय के दिशा निर्देशन में कार्य करते हुए डी आई जी डी के मिश्रा ने नेत्र शिविर में मोतियाबिंद के मरीजों के ऑपरेशन के लिए राज आई हॉस्पिटल के सहयोग से आज उनका निशुल्क ऑपरेशन कराया गया। इस मौके पर राज आई हॉस्पिटल के डॉ अनिल कुमार श्रीवास्तव व डीआईजी डीके मिश्रा भी मौजूद रहे।
गौरतलब है कि संयुक्त चिकित्सालय एसएसबी व राज आई हास्पिटल के तत्वाधान में मंगलवार को मानीराम के आर एस पब्लिक स्कूल में आयोजित निशुल्क मोतियाबिंद जांच शिविर में एसएसबी के डीआईजी मेडिकल डॉ डी के मिश्र ने के नेतृत्व में ग्रामीण क्षेत्र से आए मरीजों के नेत्र परीक्षण किया गया जिसमें से 25 लोग मोतियाबिंद की शिकायत मिली। जिनका निशुल्क ऑपरेशन राज आई हॉस्पिटल में आज बुधवार को राज आई हॉस्पिटल में मोतियाबिंद के मरीजों का निशुल्क ऑपरेशन कराया गया।
शिविर में कमाडेंट डॉ आइएच काजमी व आई सर्जन डॉ श्रीनिवास गौड़ा ने लोगों के सेहत व आंखों की जांच की। राज हास्पिटल डॉ अनिल कुमार श्रीवास्तव के डॉ सूरज गौड़, डॉ राजदीप, डीडी द्विवेदी व अंकित दुबे ने लोगों को परामर्श दिए। शिविर में 125 लोगों के आंखों की जांच की गई और 25 लोगों में मोतियाबिंद की समस्या मिली जिनका निशुल्क ऑपरेशन बुधवार को किया गया।
इस मौके पर इंस्पेक्टर मनीष कुमार, सब इंस्पेक्टर कुशम, हेड कांस्टेबल भीम सिंह बबीता कुंवर, एन पूजा एस, रजनीश कुमार डी के चौरसिया बीके यादव समेत अन्य लोग मौजूद रहे।
इंडियन डेंटल एसोसिएशन गोरखपुर ब्रांच द्वारा 22 मार्च दिन शनिवार दिन को , फुल डे सीडीई प्रोग्राम का आयोजन होटल सरोवर पोर्टिको विजय चौराहा गोरखपुर में किया गया।
इस कार्यक्रम का उद्घाटन , प्रेसिडेंट डॉ प्रशांत माथुर , स्पीकर डॉ मोनिका टंडन,सचिव डॉ ए एन शर्मा द्वारा के साथ सभी एग्जीक्यूटिव मेंबर द्वारा किया गया।
कार्यक्रम का संचालन डॉक्टर सीडीइ कन्वेयर डॉ तैयब सुल्तान खान व डॉक्टर अरुण प्रताप मल द्वारा द्वारा किया गया।
इस कार्यक्रम मे स्पीकर डॉ मोनिका टंडन ने बताया कि बहुत ज्यादा खराब हुए दांतो को हम रूट कैनाल ट्रीटमेंट द्वारा कैसे ठीक कर सकते हैं। साथ में इन्होंने यह भी बताया कि अगर किसी दांत में रूट कैनाल पहले से हुआ है और उसमें समस्या हो जा रही है दोबारा उसको दोबारा कैसे इलाज किया जा सके, बहुत सारे कंडिशनों में इस तरह के दांतों को निकाल दिया जाता है, लेकिन इन्होंने नई तकनीकी के द्वारा इस प्रकार के दांतों को कैसे सुरक्षित रखा जा सकता है और इसका कैसे रि- ट्रीटमेंट करके इन्हें बचाया जा सकता है। इसके बारे में विस्तृत जानकारी दी और साथ में कार्यशाला का आयोजन करके गोरखपुर के डॉक्टर को नई तकनीकी के बारे मे इस प्रक्रिया को करके दिखाया, जिससे गोरखपुर के बहुत सारे डॉक्टर जो लाभान्वित हुए।
कार्यक्रम में प्रेसिडेंट डॉक्टर प्रशांत माथुर, सेक्रेटरी डॉक्टर ए एन शर्मा , डॉ संजीव कुमार डॉ संजीव श्रीवास्तव , डॉ आशीष शाही,डॉक्टर तैयब सुल्तान खान , डॉ अरुण प्रताप मल डॉ शिवाशीष गुप्ता, डॉ शुभम श्रीवास्तव , डॉ विक्रांत सिन्हा, डॉ अतुल यादव , डॉ शिप्रा शाही, कुमार, डॉक्टर मुदित गुप्ता, डा प्रनव मनहोत्रा , डा शालिनी शर्मा , डॉ मिहिर कुमार, डॉ अंकित जायसवाल, डॉ अरविंद यादव, डा निशांत , डॉ अभिषेक मिश्रा, डॉ ममता आनंद, डाॅ संदर्भ सिंहा , डॉ सुगंध श्रीवास्तव, डॉ नीतीश वर्मा , डॉक्टर सूरज गुप्ता, अरुणिमा सिंह, डॉ रितिका, डॉ अहमद उमर , डॉ अभिषेक मिश्रा, डॉ प्रशांत चतुर्वेदी , डॉ सीमा सिंह तथा आई.डी.ए. के सभी सम्मानित मेंबर्स उपस्थित थे।
इस शानदार प्रोग्राम के सभी एक्सक्यूटिव मेम्बर व सीडीएच डॉक्टर तैयब सुल्तान खान और आईडीए गोरखपुर ब्रांच के सभी मेंबर को बहुत बहुत धन्यवाद्।
News courtesy: Dr A N SHARMA,
HON. SECRETARY IDA, GORAKHPUR BRANCH
प्रयागराज में अभी जल्द विश्व का सबसे बड़ा तीर्थ स्थल पर महाकुंभ का आयोजन हुआ था .महाकुंभ में नेत्र कुंभ विश्व का सबसे बड़ा अस्थाई स्वास्थ्य शिविर लगा था, जिसमें कुंभ वासियों ( तीर्थ यात्रियों) के नेत्र का निशुल्क परीक्षण हुआ, उनकी जांच हुई, दवा चश्मा सब कुछ निशुल्क दिया गया .अब पूरे भारतवर्ष में वहां से आए हुए श्रद्धालुओं को जिन्हें ऑपरेशन के लिए चिन्हित किया गया था, उनका ऑपरेशन चालू हो गया है. शाही ग्लोबल हॉस्पिटल में आज मुख्य चिकित्सा अधिकारी डॉक्टर आशुतोष कुमार दुबे तथा गोरखपुर के लोकप्रिय सरल हृदय वाले मृदभाषी डॉक्टर मंगलेश श्रीवास्तव ने इन कुंभ वासियों को शाल, आरती संग्रह देकर अभिवादन किया तथा इनका सर्जरी के बाद जल्द स्वस्थ होने की शुभकामना भी दी.
आज शाही ग्लोबल हॉस्पिटल में सक्षम के दृष्टिबाधित प्रांत प्रमुख डॉक्टर अजय पति त्रिपाठी द्वारा 21 लोगों का सफल ऑपरेशन किया गया. मरीजों के ऑपरेशन के साथ दवा , निवास ,भोजन , डॉक्टर की फीस सब कुछ नि:शुल्क किया गया है.
आपको बता दें की सनातन धर्म के सबसे बड़े महाकुंभ, जिसमें 66 करोड़ से ज्यादा लोगों ने गंगा जमुना सरस्वती की त्रिवेणी में डुबकी लगाई तथा नेत्र कुम्भ में जाकर नेत्र परीक्षण कराया. इस अद्वितीय सेवा कार्य में 237 169 लोगों का नेत्र परीक्षण तथा जांच किया गया. 162 925 लोगों को निशुल्क चश्मा का वितरण किया गया. इस नेत्र कुंभ में चिन्हित 17038 लोगों का नेत्र सर्जरी होना है, जिसमें 1010 लोगों की सर्जरी गोरक्ष प्रांत में होना है .यह सारा ऑपरेशन निशुल्क और सेवा भाव से किया जाएगा .
शाही ग्लोबल के निदेशक डॉ शिव शंकर शाही जो सक्षम के प्रांत अध्यक्ष हैं, ने बताया की शहर के विभिन्न अस्पतालों में इन सभी लोगों का ऑपरेशन कराया जाएगा, जिसमें बाबा राघव दास मेडिकल कॉलेज तथा सुभाष चंद्र बोस जिला चिकित्सालय अपनी अहम भूमिका निभाएगा .प्राइवेट संगठन भी इस कार्य में बढ़ चढ़कर भाग ले रहे हैं तथा अपना सत प्रतिशत सहयोग दे रहे हैं .
आज के कार्यक्रम में मुख्य अतिथि महापौर डॉक्टर मंगलेश श्रीवास्तव गोरखपुर के अति प्रिय तथा डॉक्टरी पेशे में अहम भूमिका निभाने वाले मुख्य चिकित्सा अधिकारी डॉ आशुतोष कुमार दुबे के साथ;
प्रान्त अध्यक्ष, सक्षम डा० शिव शंकर शाही
प्रान्त सचिव, सक्षम रमाकान्त
प्रान्त कोषाध्यक्ष, सक्षम फिरंगी प्रसाद
प्रान्त कार्यकारिणी सदस्य, सक्षम रवि वर्मा
प्रान्त कार्यकारिणी सदस्य, सक्षम नरेंद्र सिंह
प्रान्त दृष्टि प्रकोष्ठ प्रमुख, सक्षम डा० अजय पति त्रिपाठी
प्रान्त धीमहि प्रकोष्ठ प्रमुख, सक्षम डा० मुकेश नारायन
महानगर अध्यक्ष, सक्षम डा० मुकेश शुक्ला
डा० सीमा शाही, सक्षम के प्रांत सचिव रमाकांत प्रांत कोषाध्यक्ष सिर्फ रंगीलाल, भारतीय मजदूर संघ के प्राण संगठन मंत्री श्री राकेश जी धर्म जागरण विभाग के श्री वीरेंद्र जी संघ के श्रीमद् मोहन सिंह अमरजीत छोटू गुड्डू सहित संघ तथा सामाजिक सेवा संगठनों के पदाधिकारी मौजूद थे.
News courtesy: डॉ शिव शंकर शाही,डॉ सीमा शाही,शाही ग्लोबल हॉस्पिटल, तारामंडल गोरखपुर.
गोरखपुर। 22 मार्च 2025, एम्स गोरखपुर के एनेस्थीसिया विभाग ने “क्रॉनिक पेन के लिए रेडियोफ्रीक्वेंसी एब्लेशन” विषय पर एक मेडिकल शिक्षा कार्यक्रम (CME) का आयोजन किया। इस कार्यक्रम में इंटरवेंशनल पेन मैनेजमेंट तकनीकों पर चर्चा की गई, जो पुराने और गंभीर दर्द से राहत देने में मदद करती हैं।
क्या है रेडियोफ्रीक्वेंसी एब्लेशन (RFA)?
रेडियोफ्रीक्वेंसी एब्लेशन (RFA) एक आधुनिक तकनीक है, जो न्यूनतम सर्जरी के जरिए मरीजों के दर्द को कम करने में मदद करती है। यह तकनीक खासतौर पर नसों से जुड़े दर्द, ट्राइजेमिनल न्यूराल्जिया, कैंसर दर्द और जोड़ों के दर्द के लिए उपयोगी होती है।
विशेषज्ञों ने दिए महत्वपूर्ण व्याख्यान
सीएमई में देशभर से आए विशेषज्ञों ने विभिन्न प्रकार के दर्द और उनके इलाज पर चर्चा की। इस दौरान कन्वेंशनल, पल्स्ड और कूल्ड आरएफए जैसी उन्नत तकनीकों के बारे में बताया गया। कार्यक्रम में मौजूद डॉक्टरों को ऑपरेशन थिएटर में लाइव केस डेमोंस्ट्रेशन देखने का भी अवसर मिला।
कार्यक्रम के मुख्य वक्ता:
प्रो. (डॉ.) विक्रम वर्धन (आयोजन अध्यक्ष, एम्स गोरखपुर) – “RFA तकनीक दर्द से राहत के लिए एक क्रांतिकारी बदलाव है। यह मरीजों को लंबे समय तक दवाइयों या बड़ी सर्जरी से बचने में मदद कर सकती है।”
प्रो. (डॉ.) अजीत कुमार (एम्स ऋषिकेश) – “यह तकनीक पीठ दर्द, घुटनों के ऑस्टियोआर्थराइटिस और कैंसर दर्द के लिए बहुत फायदेमंद है।”
अन्य विशेषज्ञों ने भी अपने अनुभव साझा किए:
प्रो. (डॉ.) संतोष कुमार शर्मा (एम्स गोरखपुर) – न्यूरोपैथिक पेन और गसेरियन गैंग्लियन आरएफए
डॉ. रोहित लाहौरी (जम्मू) – कैंसर पेन और हिप पेन के लिए कूल्ड आरएफए
डॉ. प्रतिभा सिंह – घुटने के दर्द के लिए कूल्ड आरएफए
डॉ. दलजीत सिंह – कमर दर्द के लिए आरएफए
डॉ. बैभव भंडारी (बरेली) – आरएफए के विभिन्न प्रकार (कन्वेंशनल, PRFA, कूल्ड)
प्रो. (डॉ.) अनुराग अग्रवाल (आरएमएलआईएमएस, लखनऊ) – ट्राइजेमिनल न्यूराल्जिया के लिए इंटरवेंशनल तकनीकें
एम्स गोरखपुर का बड़ा कदम
सीएमई में शामिल डॉक्टरों और विशेषज्ञों ने इस बात पर जोर दिया कि एम्स गोरखपुर उन्नत दर्द प्रबंधन सेवाओं को आम लोगों तक पहुंचाने के लिए प्रतिबद्ध है।
एम्स गोरखपुर के डॉ. रवि शंकर शर्मा ने बताया कि अस्पताल क्रॉनिक पेन मैनेजमेंट को नियमित चिकित्सा प्रक्रिया में शामिल कर रहा है, जिससे मरीजों को बेहतर और किफायती इलाज मिल सके।
क्या मिलेगा मरीजों को फायदा?
दर्द से दीर्घकालिक राहत
सर्जरी की जरूरत नहीं
न्यूनतम दवाई पर निर्भरता
कम खर्च में प्रभावी इलाज
*एम्स गोरखपुर के कार्यकारी निदेशक मेजर जनरल प्रो. (डॉ.) विभा दत्ता* ने इस सीएमई की सराहना करते हुए कहा, “यह कार्यक्रम इंटरवेंशनल पेन मैनेजमेंट तकनीकों के लिए एक महत्वपूर्ण पहल है। इस सीएमई के जरिए एम्स गोरखपुर ने दर्द से जूझ रहे मरीजों के लिए एक नई उम्मीद जगाई है। एम्स गोरखपुर उन्नत चिकित्सा तकनीकों को आमजन तक पहुंचाने में अग्रणी भूमिका निभा रहा है।”
यह संस्थान आधुनिक इंटरवेंशनल पेन मैनेजमेंट तकनीकों को सभी के लिए सुलभ बनाने की दिशा में लगातार काम कर रहा है।
“दस जिलों की राष्ट्रीय टीबी उन्मूलन कार्यक्रम इकाइयों को दिया गया प्रशिक्षण”
गोरखपुर। वर्ष दो हजार पचीस के अंत तक गोरखपुर और आसपास के जिलों में टीबी उन्मूलन की प्रभावी रणनीति को लागू करने के लिए शहर के एक निजी होटल में शुक्रवार को देर शाम तक मंथन किया गया। इस मौके पर दस जिलों की राष्ट्रीय टीबी उन्मूलन कार्यक्रम इकाइयों को प्रशिक्षित किया गया। इस दौरान टीबी उन्मूलन की आधुनिकतम प्रक्रियाओं, नवाचारों और रणनीतियों पर विस्तार से चर्चा हुई। कार्यक्रम का आयोजन आरटीपीएमयू गोरखपुर, बीआरडी मेडिकल कॉलेज, जिला क्षय रोग केंद्र (डीटीसी) और स्टेट टीबी एसोसिशएन के समन्वित प्रयासों से हुआ।
अपर निदेशक चिकित्सा शिक्षा एवं परिवार कल्याण डॉ बीएम राव, संयुक्त निदेशक डॉ अरूण गर्ग, गोरखपुर के मुख्य चिकित्सा अधिकारी डॉ आशुतोष कुमार दूबे, अपर मुख्य चिकित्सा अधिकारी डॉ अरूण कुमार चौधरी, जिला क्षय उन्मूलन अधिकारी डॉ गणेश यादव और बीआरडी मेडिकल कॉलेज से आए विशेषज्ञ व उपाध्यक्ष स्टेट टीबी फोरम डॉ अश्विनी मिश्रा ने प्रमुख अतिथियों के तौर पर कार्यक्रम को संबोधित किया। कार्यक्रम में आरटीपीएमयू गोरखपुर के तहत आने वाले सभी दस जिलों के जिला क्षय उन्मूलन अधिकारियों और उप जिला क्षय उन्मूलन अधिकारियों समेत स्टॉफ ने प्रतिभाग किया।
गोरखपुर के मुख्य चिकित्सा अधिकारी और स्टेट टीबी एसोसिएशन के प्रतिनिधि डॉ आशुतोष कुमार दूबे ने बताया कि यह प्रशिक्षण टीबी के संक्रमण दर को कम करने में अहम भूमिका निभाएगा। इसका उद्देश्य नये टीबी रोगियों को खोजने और उनका समय से उपचार करने के आधुनिकतम तौर तरीकों से परिचित कराना था।
गोरखपुर के जिला क्षय उन्मूलन अधिकारी डॉ गणेश यादव ने बताया कि प्रशिक्षण में वरिष्ठ विषय विशेषज्ञ डॉ अमरेश कुमार सिंह, डॉ अनुराग शुक्ला, डॉ नेहा कपूर, डॉ हरीश तिवारी, डॉ एएन त्रिगुण, डॉ अजीत यादव, डॉ राहुल सरीन, डॉ शिवम पांडेय, डॉ नाबिल और डॉ एनके द्विवेदी ने कई महत्वपूर्ण जानकारियां दीं। यह आयोजन राज्य टीबी अधिकारी, महानिदेशक चिकित्सा शिक्षा और मिशन निदेशक के निर्देश पर किया गया। कार्यक्रम का संचालन एसटीडीसी गोरखपुर की चिकित्सा अधिकारी डॉ अभिलाषा श्रीवास्तव ने किया।
गोरखपुर के उप जिला क्षय उन्मूलन अधिकारी डॉ विराट स्वरूप श्रीवास्तव, मनीष गुप्ता, अभय नारायण मिश्रा, राकेश कुमार सिंह, डीपीसी गोरखपुर धर्मवीर प्रताप सिंह और श्वेता समेत गोरखपुर जिला क्षय रोग केंद्र के सभी स्टॉफ ने आयोजन में विशेष योगदान दिया।
“छिपाने से नहीं उपचार से ठीक होता है टीबी”
सीएमओ डॉ दूबे ने बताया कि भय और भ्रांति के कारण नये टीबी मरीज सामने नहीं आते हैं जिससे संक्रमण फैलने का खतरा बना रहता है। एक गैर उपचाराधीन टीबी मरीज एक वर्ष में दस से पंद्रह स्वस्थ लोगों को टीबी से संक्रमित कर देता है। वहीं, अगर समय से टीबी का उपचार शुरू हो जाए तो तीन से चार हफ्ते बाद उपचाराधीन मरीज से संक्रमण की आशंका नहीं रह जाती है। इन गतिविधियों का उद्देश्य लोगों तक सही संदेश पहुंचा कर भेदभाव और कलंक की दुर्भावना को समाप्त करना है ताकि टीबी का उन्मूलन किया जा सके।
“चल रहा है अभियान”
सीएमओ ने बताया कि ट्यूबरक्लोसिस एसोसिएशन ऑफ इंडिया, एक्शन अगेंस्ट स्टिगमा (आस) अभियान के जरिये टीबी उन्मूलन के लिए जनजागरूकता की मुहिम चला रहा है। इस अभियान का उद्देश्य बीमारी के प्रति लोगों की मानसिकता में बदलाव लाना है।
गोरखपुर। एम्स गोरखपुर के डॉक्टरों ने पहली बार एक जटिल सर्जरी “D2 Radical Esophagogastrectomy” को सफलतापूर्वक अंजाम दिया। यह ऑपरेशन एक 67 वर्षिय खजनी निवासी मरीज पर किया गया, जो लंबे समय से खाने में परेशानी झेल रहा था।
“मरीज की समस्या और बीमारी की पहचान”
मरीज को खाना निगलने में दिक्कत हो रही थी, जो धीरे-धीरे इतनी बढ़ गई कि वह सिर्फ दूध और पानी पी सकते थे। कई अस्पतालों में इलाज कराने के बावजूद बीमारी का सही कारण नहीं पता चल पा रहा था।
एम्स गोरखपुर के डॉक्टरों ने एंडोस्कोपी की, जिससे पता चला कि मरीज को खाने की नली और पेट के जोड़ पर कैंसर है। बायोप्सी और सीटी स्कैन से इस बीमारी की पुष्टि हुई।
“सर्जरी का फैसला और प्रक्रिया”
सर्जरी से पहले इस केस पर पीजी मीटिंग में विस्तार से चर्चा की गई।
डॉ. गौरव गुप्ता के साथ डॉ. रवि गुप्ता, डॉ. धर्मेंद्र पीपल, डॉ. मुकुल सिंह, डॉ. हरिकेश यादव, डॉ. रजनीश, डॉ. शाहनवाज और डॉ. मनीष कुमार ने सर्जरी की योजना बनाई।
कैंसर को पूरी तरह हटाने के लिए डॉक्टरों ने D2 Radical Esophagogastrectomy नामक सर्जरी करने का फैसला किया। इस सर्जरी में –
*मरीज का पूरा पेट और खाने की नली का निचला हिस्सा हटा दिया गया।
*नई खाने की नली बनाई गई और आंत से जोड़ा गया ताकि मरीज फिर से भोजन कर सकें।
“5 घंटे चला ऑपरेशन, मरीज अब स्वस्थ”
– डॉ. गौरव गुप्ता (सर्जरी विभागाध्यक्ष) के नेतृत्व में डॉ. रजनीश, डॉ. रवि, डॉ. आदित्य, डॉ. तनुश्री, डॉ. राजेश और एनेस्थीसिया टीम के सहयोग से यह ऑपरेशन सफलतापूर्वक किया गया।
डॉ. विक्रम वर्धन, डॉ. संतोष कुमार और डॉ. गणेश निमजे (एनेस्थीसिया विभाग) ने मरीज को बेहोश करने में अहम भूमिका निभाई।
– सर्जरी में आधुनिक तकनीकों का इस्तेमाल हुआ, जिससे ऑपरेशन जल्दी और सुरक्षित हुआ।
– मरीज को **2 दिन आईसीयू में रखा गया**, अब वह स्वस्थ हैं और जल्द ही डिस्चार्ज किए जाएंगे।
अब मरीज पूरी तरह ठीक हैं और फिर से खाना खा सकते हैं, जिससे उनका और उनके परिवार का जीवन सामान्य हो गया है।
एम्स गोरखपुर की कार्यकारी निदेशक मेजर जनरल डॉ. विभा दत्ता ने सर्जरी विभाग की पूरी टीम को इस उपलब्धि के लिए बधाई दी और कहा कि यह संस्थान के लिए एक महत्वपूर्ण उपलब्धि है। उन्होंने एम्स गोरखपुर में इस तरह की जटिल सर्जरी की सफलता को मरीजों के लिए बड़ी राहत बताया। अब यहां कैंसर जैसी जटिल बीमारियों का इलाज भी कम खर्च में और सफलता के साथ किया जा सकता है।
विश्व स्वास्थ्य दिवस के उपलक्ष्य में, आरजी हॉस्पिटल्स लुधियाना के प्रसिद्ध पंजाब एग्रीकल्चरल यूनिवर्सिटी में 6 अप्रैल, 2025 को होने वाले बहुप्रतीक्षित आरजी मैराथन 6.0 की घोषणा करते हुए प्रसन्न है। पिछले साल आरजी मैराथन 4.0 की शुरुआत हुई थी, लेकिन इस आयोजन का चार साल का समृद्ध इतिहास है, जो आरजी हॉस्पिटल की संस्कृति में गहराई से समाया हुआ है। समय के साथ यह एकता, फिटनेस और सामुदायिक भावना का प्रतीक बन गया है, जो भारत और विदेशों से प्रतिभागियों को आकर्षित करता है।30,000 से अधिक पंजीकरणों के साथ, इस साल की मैराथन एक रोमांचक अनुभव होने जा रही है, जो सभी स्तरों के धावकों का स्वागत करेगी ताकि वे स्वास्थ्य और तंदुरुस्ती को अपनाएं। फिटनेस आइकन मिलिंद सोमन की मौजूदगी इस उत्साह को और बढ़ाती है, जो लोगों को सक्रिय जीवनशैली अपनाने और एकजुटता की भावना को बढ़ावा देने के लिए प्रेरित करते हैं।मैराथन का समर्थन करने वाले चिकित्सा विशेषज्ञ:
डॉ. राजिंदर के. बंसल, मेडिकल डायरेक्टर (आरजी हॉस्पिटल्स, फिरोजपुर रोड, लुधियाना), इस आयोजन को समग्र स्वास्थ्य और कल्याण को बढ़ावा देने वाली एक प्रमुख पहल के रूप में रेखांकित करते हैं।
डॉ. चान बीर सिंह, मेडिकल डायरेक्टर (आरजी हॉस्पिटल्स, मॉडल टाउन, लुधियाना), इसके महत्व को एक स्वस्थ और जुड़े हुए समुदाय के निर्माण में जोर देते हैं।
डॉ. प्रेरणा गोयल, वरिष्ठ सलाहकार – चिकित्सक और डिप्टी मेडिकल सुपरिंटेंडेंट, इस मैराथन को शहर की सार्वजनिक स्वास्थ्य के प्रति प्रतिबद्धता का प्रमाण बताती हैं।
श्री अभिजीत सिंह सिद्धू, यूनिट हेड, ने बताया कि सुबह 5:30 बजे शुरू होने वाली यह दौड़, आरजी मैराथन 6.0, प्रतिभागियों को दो रोमांचक मार्गों का विकल्प प्रदान करती है: 5 किलोमीटर की दौड़ और 10 किलोमीटर की दौड़।
आरजी मैराथन 6.0 केवल एक दौड़ से कहीं अधिक है; यह लुधियाना की फिटनेस और कल्याण के प्रति प्रतिबद्धता का प्रतीक है। विभिन्न पेशों और आयु वर्गों के प्रतिभागी पंजाब एग्रीकल्चरल यूनिवर्सिटी में एकत्र होंगे ताकि स्वास्थ्य और सहनशक्ति का उत्सव मनाया जा सके। मिलिंद सोमन की उपस्थिति इस आयोजन की ऊर्जा को और बढ़ाती है, जो प्रेरणा और उत्साह प्रदान करते हैं। फिटनेस और स्वस्थ जीवन के समर्पित समर्थक के रूप में, वह इस मैराथन के मूल मिशन – लोगों को सक्रिय जीवनशैली अपनाने के लिए प्रोत्साहित करना – का सही प्रतिनिधित्व करते हैं। जैसे-जैसे लुधियाना अपने सबसे बड़े दौड़ आयोजन के लिए तैयार हो रहा है, आरजी हॉस्पिटल्स सभी को इस परिवर्तनकारी अनुभव का हिस्सा बनने के लिए आमंत्रित करता है।आरजी हॉस्पिटल्स के बारे में आरजी स्टोन यूरोलॉजी और लेप्रोस्कोपी हॉस्पिटल्स के नाम से भी जाना जाने वाला आरजी हॉस्पिटल्स, यूरोलॉजी और न्यूनतम इनवेसिव सर्जरी में विशेषज्ञता रखने वाला एक अग्रणी स्वास्थ्य संस्थान है। 38 से अधिक वर्षों की विरासत के साथ, इसने इस क्षेत्र में अग्रणी के रूप में खुद को स्थापित किया है, जो अत्याधुनिक उपचार प्रदान करता है और सर्जिकल उत्कृष्टता में मानक स्थापित करता है। नवाचार और रोगी-केंद्रित देखभाल के प्रति प्रतिबद्ध, आरजी हॉस्पिटल्स उन्नत चिकित्सा प्रौद्योगिकी और विशेषज्ञता के माध्यम से सामुदायिक कल्याण को बढ़ाने और स्वास्थ्य परिणामों को बेहतर करने के लिए प्रयासरत है।
“डुमरी खास में स्वास्थ्य जागरूकता सत्र का आयोजन, ओआरएस के महत्व पर दी गई जानकारी”
गोरखपुर। मार्च 2025: गर्मी के मौसम में शरीर में पानी की कमी होने से लोग अक्सर निर्जलीकरण (डिहाइड्रेशन) का शिकार हो जाते हैं, जो गंभीर स्वास्थ्य समस्याओं का कारण बन सकता है। इस समस्या से बचाव के लिए ओआरएस (ओरल रिहाइड्रेशन सॉल्यूशन) का सेवन एक प्रभावी उपाय है। इसी उद्देश्य से आज प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र, डुमरी खास में एक स्वास्थ्य जागरूकता सत्र का आयोजन किया गया।
कार्यक्रम के दौरान सभी लाभार्थियों को निर्जलीकरण से बचाव और ओआरएस के महत्व के बारे में जानकारी दी गई। इस अवसर पर सामुदायिक एवं पारिवारिक चिकित्सा विभागाध्यक्ष, डॉ. आनंद मोहन दीक्षित ने अपने संदेश में कहा, “ओआरएस को जीवन रक्षक घोल कहा जाता है। यह केवल बच्चों के लिए ही नहीं, बल्कि सभी उम्र के लोगों के लिए फायदेमंद है। दस्त, उल्टी या अत्यधिक पसीना आने की स्थिति में ओआरएस का सेवन शरीर में तरल पदार्थ और इलेक्ट्रोलाइट्स की कमी को पूरा करने में मदद करता है। गर्मी के मौसम में इसका विशेष रूप से ध्यान रखना आवश्यक है।”
निर्जलीकरण के प्रमुख लक्षण:
1. मुंह और गला सूखना
2. आंखों का धंस जाना
3. शरीर में कमजोरी महसूस होना
4. त्वचा ठंडी और निस्तेज लगना
5. पेशाब कम होना या गहरा पीला रंग होना
“बच्चों के लिए विशेष रूप से जरूरी है ओआरएस: डॉ. प्रदीप खरया”
सामुदायिक चिकित्सा और पारिवारिक चिकित्सा विभाग के डॉ. प्रदीप खरया ने बताया कि, बच्चों में दस्त और उल्टी के कारण निर्जलीकरण का खतरा अधिक होता है। कई बार खानपान में गड़बड़ी या संक्रमण के कारण **बच्चों को पतले दस्त होने लगते हैं, जो अगर एक-दो दिन से अधिक जारी रहे तो यह चिंता का विषय बन सकता है। उन्होंने कहा,”अगर बच्चे को बार-बार दस्त आ रहे हैं, तो तुरंत ओआरएस देना शुरू कर देना चाहिए। यदि इसके बावजूद सुधार नहीं होता है, तो बिना देर किए डॉक्टर से संपर्क करें।”
“ओआरएस का वितरण और जागरूकता अभियान”
कार्यक्रम के अंत में स्वास्थ्य केंद्र के फार्मासिस्ट, जय शंकर मिश्र ने सभी लाभार्थियों को ओआरएस के पैकेट वितरित किए और इसके सही उपयोग के बारे में जानकारी दी।
“गर्मी में स्वस्थ रहने के लिए जरूरी सावधानियां”
– पर्याप्त मात्रा में पानी और तरल पदार्थों का सेवन करें।
– बिना जरूरत के धूप में निकलने से बचें।
– हल्के और सूती कपड़े पहनें।
– बच्चों और बुजुर्गों का विशेष ध्यान रखें।
“एम्स निदेशक एवं ED डॉ. विभा दत्ता ने की सराहना”
एम्स गोरखपुर की कार्यकारी निदेशक एवं सीईओ मेजर जनरल (प्रो.) डॉ. विभा दत्ता ने ओआरएस जागरूकता अभियान की सराहना करते हुए कहा कि “गर्मी के मौसम में ओआरएस के महत्व को समझाना और इसे आम जनता तक पहुंचाना एक महत्वपूर्ण पहल है। यह जागरूकता अभियान हजारों लोगों की जान बचाने में सहायक होगा। एम्स गोरखपुर का यह प्रयास न केवल संस्थान के चिकित्सा सेवा क्षेत्र में योगदान को दर्शाता है, बल्कि जनस्वास्थ्य को सशक्त बनाने की दिशा में भी एक महत्वपूर्ण कदम है।”
“20 मार्च को जागरूकता अभियान और नि:शुल्क परामर्श शिविर का आयोजन”
एम्स गोरखपुर का दंत रोग विभाग २० मार्च को विश्व मौखिक स्वास्थ्य दिवस पूरे उत्साह के साथ मनाने के लिए तैयार है, जिसकी वैश्विक थीम ” एक खुशहाल मुंह एक खुशहाल मन है।” इस पहल का उद्देश्य मौखिक स्वास्थ्य के महत्व और इसके समग्र स्वास्थ्य पर प्रभाव के बारे में जागरूकता फैलाना है l मौखिक स्वच्छता अक्सर नजरअंदाज किया जाता है, लेकिन यह न केवल एक आकर्षक मुस्कान बनाए रखने में बल्कि सामाजिक, मानसिक और सामान्य स्वास्थ्य में भी महत्पूर्ण भूमिका निभाता है l मौखिक अस्वच्छता विभिन्न दंत समस्याओं जैसे कि मसूड़ों की सूजन, पायरिया और दांतों की सड़न का कारण बन सकता है l मौखिक स्वच्छता के महत्व को समझना और इसकी सही तकनीकों का पालन करना इन समस्याओं को रोकने और समग्र स्वास्थ्य को बढ़ावा देने में मदद कर सकता है।
मौखिक स्वच्छता का महत्व
मुंह में रह गए भोजन के कणों में बैक्टीरिया पनपने का खतरा रहता है और यह बैक्टीरिया एक चिपचिपी परत के माध्यम से दांतों पर जमती है, जिसे प्लाक कहा जाता है l यदि इसे न हटाया जाए तो यह टार्टर में बदल जाती है, जिससे दांतों में सड़न का खतरा बढ़ जाता है l मौखिक अस्वच्छता से मसूड़ों में सूजन भी आ सकती है, जो आगे चलकर पायरिया में बदल सकती है, जिससे दांत कमजोर होकर गिर भी सकते है l मुंह की दुर्गंध अक्सर बैक्टीरिया के जमा होने के कारण हो सकती है। अध्ययनों से पता चलता है कि मौखिक बैक्टीरिया का संबंध मधुमेह, हृदय रोग और श्वसन संक्रमण जैसी बीमारियों से भी हो सकता है l कमजोर प्रतिरक्षा प्रणाली या जीर्ण रोग से पीड़ित लोगों को मौखिक संक्रमण का अधिक खतरा होता है l
ब्रशिंग क्यों है जरूरी
अपने दांतों को ब्रश करना मौखिक स्वच्छता बनाए रखने के लिए सबसे पहला और महत्वपूर्ण कदम है l यह मदद करता है:-
१. प्लाक और बैक्टीरिया को हटाने में
२. मसूड़ों के रोगों को रोकने में
३. दांतों की सड़न रोकने में
४. सासों को ताजा रखने में
५. प्रणालीगत बीमारियों के जोखिम को कम करने में
मुंह को सही तरीके से कैसे साफ करें
अच्छी मौखिक स्वच्छता केवल ब्रश करने तक सीमित नहीं होती, बल्कि इसमें सम्पूर्ण मुख की देखभाल भी शामिल होती है।
आपके दांतों और मसूड़ों को स्वस्थ्य रखने की मार्गदर्शिका: –
ब्रशिंग
* दिन में कम से कम दो बार ब्रश करें
* नरम ब्रिस्टल वाले टूथब्रश का उपयोग करें ताकि मसूड़ों को नुकसान न पहुंचे एवं अपने ब्रश को हर ३-४ महीने में बदले
* हल्के गोलाकार धीमी गति में ब्रश करें
* बैक्टरी को हटाने और सासों को ताजा रखने के लिए जीभ को भी साफ करे l
* दांतुन का प्रयोग न करें क्योंकि इससे दांतों की सफाई अच्छी तरीके से नहीं हो पाती एवं इसके इस्तेमाल से दांतों को नुकसान भी हो सकता है
फ्लॉसिंग
* दिन में एक बार फ़्लॉस करे जिससे दांतों के बीच में फंसे भोजन के कण और प्लाक को हटाया जा सके l
माउथवॉश
* हर बार भोजन के बाद पानी से कुल्ला करें जिससे भोजन के कण निकल जाए l
* माउथवॉश का उपयोग करें ताकि प्लाक कम बने एवं मुंह में कीटाणुओं को कम करा जा सके l
संतुलित आहार
* चिप्स, बर्गर, पिज्जा, कोल्ड ड्रिंक्स, चॉकलेट्स एवं मीठे खाद्य पदार्थों का सेवन कम से कम करे क्योंकि यह दांतों की सड़न को बढ़ावा देते है l
* भोजन के कणों और बैक्टीरिया को हटाने के लिए पर्याप्त मात्रा में पानी पीए l
* कैल्शियम और विटामिन से भरपूर संतुलित आहार ले जिससे दांत और मसूड़े मजबूत बने रहे ।
नियमित रूप से डेंटल चेकअप कराएं
* हर ६ महीने में अपने दंत चिकित्सक से परामर्श ले ।
* प्रारंभिक चरण में दंत समस्याओं की पहचान से गंभीर बीमारियों को रोका जा सकता है ।
अच्छी मौखिक स्वच्छता न केवल एक स्वास्थ्य मुंह के लिए आवश्यक है बल्कि संपूर्ण स्वास्थ्य के लिए भी महत्पूर्ण है । नियमित ब्रशिंग, फ्लॉसिंग, संतुलित आहार का सेवन और नियमित डेंटल चेकअप से दंत समस्याओं को रोका जा सकता है और प्रणालीगत रोगों के जोखिम को कम किया जा सकता है।
“आगामी चौबीस मार्च को मनाया जाएगा विश्व टीबी दिवस”
“ट्यूबरक्लोसिस एसोसिएशन ऑफ इंडिया 12 मार्च से कर रहा है विविध गतिविधियों का आयोजन”
गोरखपुर। मुख्य चिकित्सा अधिकारी डॉ आशुतोष कुमार दूबे ने कहा है कि ट्यूबरक्लोसिस एसोसिएशन ऑफ इंडिया, एक्शन अगेंस्ट स्टिगमा (आस) अभियान के जरिये टीबी उन्मूलन के लिए जनजागरूकता की मुहिम चला रहा है। इसी क्रम में 12 मार्च से ही निर्धारित कलेंडर के अनुसार विविध गतिविधियों का आयोजन किया जा रहा है। यह गतिविधियां आगामी चौबीस मार्च तक आयोजित की जाएंगी। चौबीस मार्च को विश्व टीबी दिवस मनाया जाएगा।
डॉ दूबे ने बताया कि उन्नीस मार्च को वर्चुअल बैठक के जरिये टीबी उन्मूलन संबंधित गतिविधियों और अनुभवों का साझा किया जाएगा। बीस मार्च को उच्च जोखिम आबादी के साथ बैठके होंगी और संभावित टीबी रोगियों की खोज के लिए स्क्रीनिंग की जाएगी। इक्कीस मार्च को सोशल मीडिया एन्फ्लुएंशर्स के जरिये अपील और प्रचार प्रसार की गतिविधियां होंगी। बाईस मार्च को नुक्कड़ नाटक और ड्रामा के जरिये टीबी के प्रति व्याप्त भ्रांतियों और मिथकों का खंडन किया जाएगा। तेईस मार्च को पुनः वर्चुअल बैठक के जरिये चर्चा होगी।
मुख्य चिकित्सा अधिकारी ने बताया कि विश्व टीबी दिवस पर पूरे देश समेत गोरखपुर में भी बृहद आयोजन किया जाएगा। इस दिन टीबी उन्मूलन के लिए उत्कृष्ट कार्य करने वाले लोगों और टीबी चैम्पियन को सम्मानित भी किया जाएगा।
डॉ दूबे ने बताया कि भय और भ्रांति के कारण नये टीबी मरीज सामने नहीं आते हैं जिससे संक्रमण फैलने का खतरा बना रहता है। एक गैर उपचाराधीन टीबी मरीज एक वर्ष में दस से पंद्रह स्वस्थ लोगों को टीबी से संक्रमित कर देता है। वहीं, अगर समय से टीबी का उपचार शुरू हो जाए तो तीन से चार हफ्ते बाद उपचाराधीन मरीज से संक्रमण की आशंका नहीं रह जाती है। लोगों तक सही संदेश पहुंचा कर भेदभाव और कलंक की दुर्भावना को समाप्त करना है ताकि टीबी का उन्मूलन किया जा सके।