गोरखपुर: जुलाई 2025। एम्स गोरखपुर ने एक असाधारण उपलब्धि हासिल करते हुए पिछले 15 वर्षों से चलने और खड़े होने में असमर्थ एक मरीज को सफल कूल्हा प्रत्यारोपण (Hip Replacement Surgery) के ज़रिए नई ज़िंदगी दी है। यह जटिल ऑपरेशन एम्स की कार्यकारी निदेशक मेजर जनरल (कार्यान्वित) डॉ. विभा दत्ता के कुशल नेतृत्व और हड्डी रोग विभाग के समर्पित प्रयासों से संभव हो पाया।
मामले का विवरण:
उत्तर प्रदेश के महाराजगंज निवासी 46 वर्षीय यह मरीज वर्ष 2002 में ऊँचाई से गिरकर ‘नेक ऑफ फीमर’ फ्रैक्चर (कूल्हे की हड्डी में गंभीर टूट) का शिकार हुआ था। स्थानीय निजी अस्पताल में प्राथमिक ऑपरेशन के बावजूद, अगले कुछ वर्षों में उसे दोबारा तेज़ दर्द और चलने-फिरने में असुविधा शुरू हो गई। होम्योपैथिक इलाज और अनेक डॉक्टरों से परामर्श लेने के बावजूद समस्या बनी रही। अंततः जब पिछले छह माह से पीड़ा असहनीय हो गई, तब वे एम्स गोरखपुर की हड्डी रोग ओपीडी में पहुँचे।
जांच में पता चला कि कूल्हे के जोड़ की दोनों सतहें पूरी तरह खराब हो चुकी थीं, मांसपेशियां सिकुड़ चुकी थीं, और उनका बायां पैर छोटा हो गया था — जिससे खड़ा होना और चलना लगभग असंभव हो गया था।
सफल सर्जरी:
हड्डी रोग विभागाध्यक्ष प्रो. डॉ. अजय भारती के नेतृत्व में, एनेस्थीसिया विभाग के सहयोग से जटिल कूल्हा प्रत्यारोपण सर्जरी की गई, जो करीब 3.5 घंटे तक चली। ऑपरेशन पूर्णतः सफल रहा और मरीज अब बेहतर रिकवरी की ओर अग्रसर है।
ऑपरेशन टीम में शामिल रहे
हड्डी विभाग से: प्रो. डॉ. अजय भारती, सह-प्रो. डॉ. विवेक कुमार, डॉ. आशुतोष, डॉ. दिलीप, डॉ. दीपक
एनेस्थीसिया विभाग से: विभागाध्यक्ष प्रो. डॉ. संतोष शर्मा, सह-प्रो. डॉ. गणेश निमजे
निदेशक की सराहना:
एम्स की कार्यकारी निदेशक मेजर जनरल डॉ. विभा दत्ता ने इस सराहनीय उपलब्धि पर दोनों विभागों को बधाई दी और कहा,
“इस तरह की जटिल सर्जरी एम्स गोरखपुर की चिकित्सकीय उत्कृष्टता और टीम भावना का प्रमाण है। हम निरंतर ऐसे ही कार्यों से पूर्वांचल के लोगों को जीवन की नई आशा देते रहेंगे।”
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