संतान की लंबी आयु के लिए कल रखा जाएगा गणेश चतुर्थी, सकट चौथ का व्रत

        ब्यूरो प्रभारी —-विनय तिवारी
बडहलगंज गोरखपुर निष्पक्ष टुडे बडहलगंज हिंदू धर्म में माघ मास के कृष्ण पक्ष की चतुर्थी तिथि का विशेष महत्व है। इस दिन संतान के सुख, समृद्धि और लंबी आयु की कामना के लिए गणेश चतुर्थी, सकट चौथ का वत रखा जाता है। इसे तिलवा चौथ, तिल-कुटा चौथ, माघी चौथ और वक्रतुंडी चतुर्थी के नाम से भी जाना जाता है। इस वर्ष यह पावन पर्व 06 जनवरी 2026, मंगलवार को मनाया जाएगा।
पंचांग के अनुसार, चतुर्थी तिथि 06 जनवरी को प्रातः 8: 01 बजे प्रारंभ होगी और अगले दिन 07 जनवरी को प्रातः 6: 52 बजे समाप्त होगी। उदय तिथि के अनुसार वत 6 जनवरी को ही रखा जाएगा। इस दिन चंद्रोदय रात्रि 8 : 35 बजे होगा, जिसके बाद अर्धय देकर वत संपन्न किया जाएगा। श्रद्धालु इस दिन प्रातः कालीन के पश्चात भगवान श्री गणेश जी की विधि-विधान से पूजा करते हैं। पूजन में गणपति को दूर्वा, मोदक और तिल के लड्डू विशेष रूप से अर्पित किए जाते हैं। शाम को चंद्र देवता के दर्शन और पूजन का विधान है। मान्यता के अनुसार, महिलाएं तिल का प्रतीकात्मक पहाड़ बनाती हैं, जिसे चांदी के सिक्के से काटकर संतान के मंगल की कामना की जाती है। यह प्रक्रिया जीवन की बाधाओं को दूर करने का प्रतीक मानी जाती है। सकट चौथ पर दान-पुण्य का अक्षय फल मिलता है। इस दिन काले तिल, गुड़, शुद्ध घी, गर्म कपड़े और अन्न का दान सामथ्य अनुसार करना चाहिए। धार्मिक मान्यता है कि इस दिन वत और दान करने से सकट माता और विघहर्ता गणेश बच्चों पर आने वाली सभी विपदाओं को टाल देते हैं।प्राचीन कथा के अनुसार, एक बूढ़ी विधवा के इकलौते बेटे को राजा के आदेश पर बलि के लिए आंवा में बिठाया गया था। मां ने अपने बेटे को सुरक्षा के लिए सुपारी और दूर्वा देकर भगवान गणेश के स्मरण की सीख दी। सकट माता और गणपति की पा से वह धधकती आग शीतल हो गई और बालक सुरक्षित बाहर आ गया। साथ ही, पूर्व में बलि दिए गए अन्य बच्चे भी जीवित हो उठे। इसी विश्वास के साथ आज भी माताएं अपनी संतान की रक्षा के लिए यह कठिन वत रखती हैं।

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