पांचवीं और आठवीं की अनुमति पर दसवीं-बारहवीं तक कक्षाएं, जर्जर बसों में सफर—जिम्मेदार विभागों की चुप्पी पर उठे प्रश्न
गोला,गोरखपुर. जनपद के गोला तहसील के गोला, बड़हलगंज और उरुवा में निजी विद्यालयों की कार्यप्रणाली को लेकर गंभीर सवाल खड़े हो रहे हैं। स्थानीय अधिवक्ताओं और अभिभावकों का आरोप है कि क्षेत्र में बड़ी संख्या में विद्यालय या तो बिना मान्यता के संचालित हो रहे हैं या फिर निर्धारित मानकों का खुला उल्लंघन कर रहे हैं। इसके बावजूद संबंधित विभागों की ओर से प्रभावी कार्रवाई नहीं की जा रही है.
मान्यता पांचवीं और आठवीं तक, पढ़ाई दसवीं-बारहवीं तक
सूत्रों का दावा है कि कई विद्यालयों को बेसिक शिक्षा विभाग से केवल कक्षा पांच तक की मान्यता प्राप्त है, लेकिन वे आठवीं, दसवीं यहां तक कि बारहवीं तक की कक्षाएं संचालित कर रहे हैं। कुछ संस्थानों को आठवीं तक की अनुमति है, फिर भी वे हाईस्कूल और इंटरमीडिएट स्तर तक प्रवेश लेकर शिक्षण कार्य चला रहे हैं, सबसे गंभीर आरोप यह है कि कुछ संचालक एक ही मान्यता के आधार पर दो-दो स्थानों पर विद्यालय चला रहे हैं। यदि यह तथ्य सही है तो यह नियमों की खुली अवहेलना है। सवाल उठ रहा है कि आखिर इन विद्यालय संचालकों का मनोबल इतना बढ़ा कैसे कि वे प्रशासनिक नियमों को खुली चुनौती दे रहे हैं?
बच्चों की सुरक्षा से खिलवाड़ — फिटनेस खत्म, ड्राइवर अनुभवहीन
विद्यालयों में पढ़ने वाले बच्चों को लाने-ले जाने के लिए बस और मैजिक वाहन लगाए गए हैं, लेकिन कई वाहनों की फिटनेस अवधि समाप्त बताई जा रही है। कुछ वाहनों के चालकों के पास वैध लाइसेंस तक नहीं है और न ही उनका पुलिस सत्यापन हुआ है।
दिनभर सड़कों पर फर्राटा भरते ये वाहन कभी भी बड़े हादसे का कारण बन सकते हैं। अभिभावकों का कहना है कि बच्चों की सुरक्षा से जुड़े नियमों की खुलेआम अनदेखी हो रही है, पर परिवहन विभाग और पुलिस प्रशासन की ओर से कोई ठोस कार्रवाई नहीं दिख रही.
भारी फीस वसूली, सुविधाएं ‘जीरो’
इन विद्यालयों में सुविधाओं के नाम पर अभिभावकों से मोटी फीस ली जाती है, लेकिन जमीनी हकीकत अलग तस्वीर पेश करती है। कई स्कूलों में शौचालयों की साफ-सफाई दयनीय स्थिति में है। पीने के शुद्ध पानी की व्यवस्था नहीं है। गर्मी के मौसम में कक्षाओं में पंखे तक पर्याप्त नहीं मिलते, जिससे बच्चे और शिक्षक दोनों परेशान रहते हैं,शिक्षा के नाम पर लाखों की वसूली के बावजूद बुनियादी सुविधाओं का अभाव यह सवाल खड़ा करता है कि आखिर निरीक्षण और मानक निर्धारण की प्रक्रिया कागजों तक ही सीमित क्यों है.
विभागीय चुप्पी या मिलीभगत?
स्थानीय लोगों का आरोप है कि अधिकारियों को इन विद्यालयों की पूरी जानकारी है, बावजूद इसके कार्रवाई नहीं की जा रही। यदि समय रहते उच्चस्तरीय जांच कराई जाए तो कई चौंकाने वाले तथ्य सामने आ सकते हैं,शिक्षा जैसे संवेदनशील विषय में लापरवाही सीधे बच्चों के भविष्य से जुड़ी है। ऐसे में विभागीय निष्क्रियता पर सवाल उठना स्वाभाविक है।
अभिभावकों की उम्मीद और हकीकत का टकराव
अभिभावक इस उम्मीद में अपने बच्चों को निजी विद्यालयों में भेजते हैं कि वे बेहतर शिक्षा और सुविधाएं पाएंगे उसी संदर्भ में अभिभावक कहते है कि “मेरा बच्चा पढ़ेगा-लिखेगा, नवाब बनेगा।” लेकिन यदि विद्यालय ही अवैध, मानक विहीन और सुविधाहीन हों, तो यह सपना टूटने में देर नहीं लगती, स्थानीय चर्चाओं में एक कड़वी टिप्पणी सुनने को मिल रही है “अगर बच्चा ऐसे अवैध और मानक विहीन स्कूल में पढ़ेगा, तो नवाब नहीं, पर खराब जरूर बनेगा।”.
छह माह पूर्व ही थी जांच, मिली थी अनियमितता
करीब छह माह पूर्व गोला क्षेत्र के गोपालपुर में खंड शिक्षा अधिकारी गोला, उदय शंकर राय द्वारा की गई जांच में दो विद्यालयों में कुछ कमियां पाए जाने का मामला प्रकाश में आया था। जांच के दौरान स्पष्ट अनियमितता मिलने के बावजूद संबंधित विद्यालयों को केवल चेतावनी देकर छोड़ दिया गया। इसके पश्चात न तो किसी प्रकार की कठोर कार्रवाई की गई और न ही अन्य विद्यालयों पर कोई आगे की जांच या दंडात्मक कदम उठाया गया, जिससे विभागीय कार्यप्रणाली पर प्रश्नचिह्न खड़े हो रहे है.
विद्यालयों की सुरक्षा पर उठे सवाल, प्रशासन से जांच की मांग
गोला तहसील के वरिष्ठ अधिवक्ताओं ने क्षेत्र के विद्यालयों में व्याप्त समस्याओं को गंभीर बताते हुए प्रशासन से तत्काल जांच की मांग की है। वरिष्ठ अधिवक्ता भारतेंदु दुबे, राम लखन राय, गिरिजेश शाही, आमोद गौड़ सहित अन्य अधिवक्ताओं ने कहा कि यह मामला किसी एक विद्यालय तक सीमित नहीं है, बल्कि क्षेत्र में ऐसी अनेक समस्याएं मौजूद हैं, जिन पर गंभीरता से ध्यान देने की आवश्यकता है।
अधिवक्ताओं ने प्रशासन से आग्रह किया कि संबंधित अधिकारियों को मौके पर भेजकर निष्पक्ष जांच कराई जाए, ताकि भविष्य में किसी भी प्रकार की अप्रिय घटना की संभावना को रोका जा सके। उन्होंने कहा कि अभिभावक अपने बच्चों को विद्यालयों में पूर्ण विश्वास के साथ भेजते हैं, ऐसे में विद्यालय प्रबंधन की यह जिम्मेदारी बनती है कि वे सुरक्षा एवं व्यवस्था के सभी मानकों का पालन सुनिश्चित करें।
उन्होंने स्पष्ट किया कि यदि समय रहते आवश्यक कदम नहीं उठाए गए, तो स्थिति गंभीर रूप ले सकती है। अतः प्रशासन को चाहिए कि वह इस विषय को प्राथमिकता देते हुए आवश्यक कार्रवाई सुनिश्चित करे.
इस संबंध में जिला बेसिक शिक्षा अधिकारी, गोरखपुर धीरेन्द्र त्रिपाठी ने बताया कि उन्हें फिलहाल उक्त मामले की कोई आधिकारिक जानकारी प्राप्त नहीं हुई है। आपके माध्यम से प्रकरण संज्ञान में आया है संबंधित अधिकारी को मौके पर भेजकर इसकी विधिवत जांच कराई जाएगी। जांच में तथ्य सही पाए जाने पर दोषियों के विरुद्ध नियमानुसार कठोर कार्रवाई की जाएगी.
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