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डांट से आहत बेटे ने फंदे से लटककर दी जान, बेटे की मौत के बाद मां-बहन ने भी खाया जहरीला पदार्थ
हरपुर-बुदहट कूचडेहरि के एक छोटे से घर में सन्नाटा पसरा है, जो किसी तूफान के गुजरने के बाद आता है। पति की मौत के बाद एक मां ने अपने इकलौते बेटे में जीने की वजह ढूंढ ली थी। बेटे ने भी कम उम्र में जिम्मेदारियों का बोझ उठाते हुए मुंबई जाकर कमाने लगा था। हर महीने पैसे भेजकर घर का खर्च संभालता, वहन से कहा था कि वह उसकी शादी धूमधाम से करेगा। लेकिन बुधवार को मां की एक डांट ने ऐसा तूफान ला दिया जिसकी किसी ने कल्पना तक नहीं की थी। बेटे ने खुद को कमरे में बंद कर फंदे से झूल गया। जब मां और बहन ने देखा, तो चीखें पड़ोस तक गूंज उठीं। मां और बहन का दिल इस मंजर को सह न सका और दोनों ने जहरीला पदार्थ खा लिया। अस्पताल आते-आते बेटी की भी मौत हो गई। अब अस्पताल के बेड पर जिंदगी और मौत के बीच जूझ रही बेसूघ मां की आंखों से बहते आंसू उस दर्द की गवाही दे रहे हैं, जिसे शब्दों में बयां नहीं किया जा
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वक्फ कानूनों में तत्काल सुधार की जरूरत का परिपेक्ष्य: सैयद इज़हार अहमद,प्रबंधक,मदरसा नुरिया खैरिया
गोरखपुर। महाराष्ट्र वक्फ बोर्ड में भ्रष्टाचार का अवलोकन करते हुए मुम्बई की ऐतिहासिक मीनारा मस्जिद के प्रबंधन में हाल ही में विवाद उत्पन्न हुआ है। महाराष्ट्र राज्य वक्फ बोर्ड ने मस्जिद के लिए नए ट्रस्टियों की नियुक्ति की है, जिसे लेकर मुस्लिम समुदाय के कुछ नेताओं ने आपत्ति जताई है। उनका दावा है कि यह नियुक्ति अवैध है और ट्रस्ट डीड का उल्लंघन करती है, रिपोर्टों के अनुसार, महाराष्ट्र वक्फ बोर्ड ने मीनारा मस्जिद के लिए नए ट्रस्टियों की नियुक्ति की, जबकि वक्फ संपत्तियों के अवैध हस्तांतरण के आरोप सामने आए। इस निर्णय ने इस बात को लेकर गंभीर चिंता जताई है कि धार्मिक, धर्मार्थ और सामुदायिक कल्याण उद्देश्यों के लिए दान की गई वक्फ संपत्तियों का प्रबंधन कैसे किया जाता है और अक्सर उनका दुरुपयोग कैसे किया जाता है। मीनारा मस्जिद का मामला कोई अकेली घटना नहीं है। देश भर में, कई वक्फ बोर्डों पर कुप्रबंधन, अनधिकृत भूमि बिक्री और वित्तीय पारदर्शिता की कमी के आरोप लगे हैं।
अवैध संपत्ति हस्तांतरण के आरोपों को संबोधित किए बिना नए ट्रस्टियों को नियुक्त करने का वक्फ बोर्ड का निर्णय गंभीर शासन विफलता को दर्शाता है। कई वक्फ बोर्ड न्यूनतम पारदर्शिता के साथ काम करते हैं, और वित्तीय रिकॉर्ड अक्सर जनता के लिए दुर्गम होते हैं। वक्फ संपत्तियों, जिनमें मस्जिदें, कब्रिस्तान, शैक्षणिक संस्थान और सामुदायिक कल्याण केंद्र शामिल हैं, पर अक्सर अतिक्रमण किया जाता है या उन्हें अवैध रूप से निजी संस्थाओं को बेच दिया जाता है। सख्त निगरानी तंत्र की अनुपस्थिति ऐसे अतिक्रमणों को अनियंत्रित रूप से जारी रखने की अनुमति देती है। वक्फ बोर्ड अक्सर राजनीतिक हितों से प्रभावित होते हैं, जिसके कारण नियुक्तियाँ और निर्णय ऐसे होते हैं जो सामुदायिक कल्याण पर व्यक्तिगत लाभ को प्राथमिकता देते हैं। स्वतंत्र नियामक तंत्र की कमी समस्या को और बढ़ा देती है। विशाल संपत्तियों के मालिक होने के बावजूद, वक्फ बोर्ड कुप्रबंधन और भ्रष्टाचार के कारण मुस्लिम समुदाय के सामाजिक-आर्थिक विकास के लिए पर्याप्त राजस्व उत्पन्न करने में विफल रहते हैं। शिक्षा, स्वास्थ्य सेवा और रोजगार कार्यक्रमों के लिए इन संसाधनों का उपयोग करने के बजाय, कई बोर्ड गलत तरीके से इस्तेमाल की गई भूमि को लेकर कानूनी विवादों में उलझे हुए हैं।
भारत में वक्फ को वक्फ अधिनियम, 1995 द्वारा विनियमित किया जाता है। संसद वक्फ बोर्ड के कामकाज में जवाबदेही और पारदर्शिता बढ़ाने के लक्ष्य के साथ वक्फ अधिनियम, 1995 में संशोधन करने के लिये वक्फ (संशोधन) विधेयक, 2024 पेश कर दिया है। ये संशोधन विधेयक वक्फ बोर्ड की अनियंत्रित शक्ति को कम करने के लिये वक्फ अधिनियम, 1995 के कुछ प्रावधानों को हटाने का प्रयास करता है, जो वर्तमान में उन्हें आवश्यक जाँच के बिना किसी भी संपत्ति को वक्फ घोषित करने की अनुमति देता है। वक्फ अधिनियम, 1995 के अस्तित्व के बावजूद, जिसका उद्देश्य वक्फ संपत्तियों को विनियमित और संरक्षित करना है, कानून में खामियां, प्रवर्तन की कमी और राजनीतिक हस्तक्षेप ने व्यापक भ्रष्टाचार को बढ़ावा दिया है। मीनारा मस्जिद मामले एवं हालिया कर्नाटक में वक्फ भूमि विवादों को लेकर उठे विवाद ने वक्फ अधिनियम के दायरे में वक्फ बोर्डों को सौंपी गई शक्तियों पर बहस को फिर से हवा दे दी है एवं सुधारों की तत्काल आवश्यकता को उजागर किया है ताकि यह सुनिश्चित किया जा सके कि वक्फ संपत्तियों की सुरक्षा की जाए और उनका उपयोग उनके इच्छित उद्देश्यों के लिए किया गए। हालाँकि, वक्फ (संशोधन) विधेयक चिंताओं को संबोधित करता है, लेकिन मुस्लिम समुदाय को अलग-थलग करने या सांप्रदायिक तनाव को बढ़ाने से बचने के लिए इसके कार्यान्वयन को संवेदनशीलता के साथ किया जाना चाहिए। वक्फ बोर्ड की गतिविधियों की निगरानी करने और पारदर्शिता सुनिश्चित करने के लिए स्वतंत्र लेखा परीक्षा निकायों को मजबूत करना और पेश करना पारदर्शिता को मजबूत करने की दिशा में एक प्रमुख कदम है। अगला कदम मुस्लिम नेताओं और समुदाय के प्रतिनिधियों के साथ सुधार उपायों पर आम सहमति बनाने के लिए जुड़ना हो सकता है जो वक्फ में पारदर्शिता को और बढ़ा सकते हैं।
उपरोक्त बयान सैयद इज़हार अहमद,प्रबंधक,मदरसा नुरियाखैरिया,ने मुस्लिम समुदाय को वक़्फ़ बोर्ड क़ानून के समर्थन से संबंधित एक जागरूकता बैठक गोरखपुर में कहीं , उन्होंने आगे कहा कि विवादों को कुशलतापूर्वक हल करने के लिए फास्ट ट्रैक अदालतें स्थापित की जानी चाहिए। वक्फ बोर्ड के निर्णयों में भाग लेने के लिए स्थानीय समुदायों, विद्वानों और स्वतंत्र लेखा परीक्षकों को सशक्त बनाना पारदर्शिता को बढ़ा सकता है और यह सुनिश्चित कर सकता है कि संपत्तियां अपने सही उद्देश्य की पूर्ति करें। वक्फ संपत्तियों का कुप्रबंधन या अवैध रूप से हस्तांतरित होने के बजाय स्कूलों, अस्पतालों, कौशल विकास केंद्रों और अन्य कल्याणकारी पहलों के निर्माण के लिए सक्रिय रूप से उपयोग किया जाना चाहिए।
मीनारा मस्जिद मामले में महाराष्ट्र वक्फ बोर्ड के खिलाफ भ्रष्टाचार के आरोप सिर्फ एक संस्थान के बारे में नहीं हैं – वें पूरे भारत में वक्फ प्रबंधन में व्यापक संकट को दर्शाते हैं। तत्काल कानूनी और प्रशासनिक सुधारों के बिना, वक्फ संपत्तियों का दुरुपयोग जारी रहेगा, जिससे मुस्लिम समुदाय शिक्षा और सामाजिक-आर्थिक विकास के लिए आवश्यक संसाधनों से वंचित हो जाएगा। वक्फ कानूनों को मजबूत करना न केवल एक आवश्यकता है, बल्कि इन धार्मिक बंदोबस्तों की पवित्रता को बनाए रखने के लिए एक नैतिक और कानूनी अनिवार्यता भी है। मिनारा मस्जिद मामले को वक्फ सुधार की तत्काल आवश्यकता के दायरे में देखा जा सकता है जो धार्मिक स्वायत्तता का सम्मान करते हुए जवाबदेही को संतुलित करता है। संतुलित और समावेशी तरीके से मुद्दों को संबोधित करके, नीति निर्माता यह सुनिश्चित कर सकते हैं कि वक्फ संपत्तियां अपने इच्छित उद्देश्य को पूरा करें और साथ ही सभी समुदायों के अधिकारों और हितों की रक्षा करें।
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राज गौरव सिंह ने जेईई-मेंस में हासिल की ऐतिहासिक उपलब्धि
देश के प्रतिष्ठित इंजीनियरिंग कॉलेजों जैसे एनआईटी, आईआईआईटी आदि में प्रवेश के लिए होने वाली जेईई-मेंस के दूसरे सेशन का परीक्षा परिणाम आज रात 12:00 बजे की आसपास एनटीए द्वारा जारी किया गया, जिसमें गोरखपुर के छात्र राज गौरव सिंह 99. 979 परसेंटाइल तथा सामान्य वर्ग में 397 रैंक के साथ ऐतिहासिक उपलब्धि हासिल की है। ज्ञात हो कि जेईई मेंस के प्रथम सेशन के परीक्षा में भी राज गौरव सिंह 99.95 परसेंटाइल प्राप्त करके पूर्वांचल में प्रथम स्थान प्राप्त किया था। राज गौरव सिंह के परिवार से वार्ता करने पर पता चला की इनकी सारी पढ़ाई लिखाई गोरखपुर जनपद की है, तथा इन्होंने इसी वर्ष 12वीं की भी परीक्षा सीबीएसई बोर्ड से दे रखी है।
राज गौरव सिंह के पिता डॉ. सत्यपाल सिंह गोरखपुर विश्वविद्यालय में प्रोफेसर है तथा इनकी माता रेनू सिंह प्राथमिक विद्यालय में शिक्षिका थी, इन्होंने बच्चों की पढ़ाई लिखाई के लिए अपनी नौकरी छोड़ दी।
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खबरदार : आप भी हो सकते हैं इस बहरूपिये का शिकार
खबरदार : आप भी हो सकते हैं इस बहरूपिये का शिकार,
“पार्ट 2 बहुत जल्द…”
गोरखपुर/ टेलीविजन का दौर शुरू होने से पहले मदारी और बहुरूपिये मनोरंजन का प्रमुख साधन हुआ करते थे। मदारी और बहुरूपिये की जोड़ी जब खेल समाप्त करती थी तो मदारी आवाज़ लगाता की बच्चा लोग घर जाओ और चार आना, आठ आना अपने घर से लेकर आओ और जम्हूरे के बर्तन में डाल दो और जो बच्चा पैसा लेकर नही आएगा उसका बुरा होगा। बच्चे डर जाते और घरों से कुछ न कुछ लेकर आते । मदारी का ऐसा डर होता कि कोई पैसा लाता तो कोई पैसे के बजाए चावल या आटा लाकर देता।डर और वसूली का पूरा खेल मदारी और बहुरूपिया जम्हूरा मिलकर खेलते और जमकर धनउगाही करते। कभी कभी तो मदारी और जम्हूरे दिन में जिस इलाके में खेल दिखाते उसी जगह रात में किसी चिन्हित घर में चोरी की घटना को भी अंजाम दे देते थे।इस कहानी को सुनाने का मक़सद यह है कि ऐसे ही एक मदारी और बहुरूपिये की जोड़ी आजकल शहर में धन उगाही की फ़िराक़ में है।बस शहर की कहानी में इतना फर्क है कि बहुरूपिये ने इस बार नकली पत्रकार का भी रूप धारण करने की कोशिश की है। हांलाकि इस कोशिश में बहुरूपिया एक थाने पर थानेदार के हाथों पिट चुका है।
सिलसिलेवार अगर बयान किया जाए तो बहुरूपिया कभी दांत का डॉक्टर बना तो कभी नीले झंडे वाली पार्टी का नेता, कभी खुद को स्पेशल पुलिस अफसर बता कर लोगों से ठगी किया ।
बाद में अपने एक दोस्त का एटीएम चुराकर उसमें से पैसा निकाल लिया । इस एटीएम चोरी में बहुरूपिये को जेल भी जाना पड़ा। जेल से बाहर आने पर उसको लगा कि भाई पत्रकार बनने में फायदा है। इस बीच भौकाल दिखाने के चक्कर में बेचारा बहुरूपिया थानेदार के हाथों पीटा गया।मामला उलटा पड़ा तो बहुरूपिया जमीनों मकानों और ईंटो भट्ठों की दलाली में हाथ आजमाने उतर पड़ा। यही से उसको ये ख्याल आया कि अगर सरकारी गनर मिल जाये तो दलाली का धंधा तो चटक जाएगा। फिर क्या था उसने पुलिस कप्तान के यहां अर्ज़ी लगा दी की जान जाने का खतरा है। बहरहाल बहरूपिया भले ही भूल गया हो और उसका मदारी भी इससे अनजान हो कि चोर, पुलिस, डॉक्टर, नेता, दलाल का भेष बदल कर अब नकली पत्रकार का रूप धरने का नाटक करने वाले बहुरूपिये को शहर आज भी जेल जा चुके एटीएम चोर और एक अपराधी की तरह जानता और पहचानता है। -

गणतंत्र दिवस की पूर्व संध्या पर गोरखपुर रेलवे स्टेशन पर जीआरपी ने चलाया विशेष चेकिंग अभियान
गणतंत्र दिवस की पूर्व संध्या पर गोरखपुर रेलवे स्टेशन पर जीआरपी ने चलाया विशेष चेकिंग अभियान, यात्रियों से लिया गया फीडबैक

गोरखपुर। गणतंत्र दिवस की पूर्व संध्या पर सुरक्षा व्यवस्था को पुख्ता करने के उद्देश्य से गोरखपुर रेलवे स्टेशन पर विशेष चेकिंग अभियान चलाया गया। पुलिस अधीक्षक, राजकीय रेलवे पुलिस (जीआरपी) गोरखपुर संदीप कुमार मीणा के निर्देशन में इस अभियान को अंजाम दिया गया।
इस दौरान रेलवे स्टेशन के प्लेटफार्म, सर्कुलेटिंग एरिया और टिकटिंग एरिया की बारीकी से जांच की गई। अभियान में जीआरपी और आरपीएफ की टीमों के साथ-साथ बम निरोधक दस्ते और डॉग स्क्वायड की भी तैनाती की गई थी। अधिकारियों ने सुरक्षा व्यवस्था के मद्देनजर सभी संदिग्ध व्यक्तियों और सामानों की जांच की।
यात्रियों की सुरक्षा प्राथमिकता
पुलिस अधीक्षक संदीप कुमार मीणा ने कहा कि यह अभियान यात्रियों की सुरक्षा को सुनिश्चित करने और गणतंत्र दिवस के अवसर पर किसी भी अप्रिय घटना से बचने के लिए किया गया। अभियान के दौरान सुरक्षा उपकरणों और तैनात बलों ने रेलवे स्टेशन के हर कोने की गहन जांच की।यात्रियों से मिला सकारात्मक फीडबैक
चेकिंग अभियान के दौरान यात्रियों से उनकी यात्रा संबंधी अनुभव और सुरक्षा व्यवस्था को लेकर फीडबैक भी लिया गया। यात्रियों ने सुरक्षा प्रबंधों की सराहना की और इस तरह के अभियानों को नियमित रूप से आयोजित करने का सुझाव दिया।चेकिंग के दौरान एसपी जीआरपी संदीप कुमार मीणा के साथ इंस्पेक्टर जीआरपी विजय प्रताप सिंह वी रेलवे सुरक्षा बल प्रभारी दशरथ मौजूद रहे।
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गोरखपुर जीएसटी की टीम ने फ्लोटिंग रेस्टोरेंट पर मारा छापा
गोरखपुर जीएसटी की टीम ने कर चोरी की जांच के लिए रामगढ़ताल स्थित फ्लोटिंग रेस्टोरेंट पर छापा मारा, जीएसटी की तीन टीमों ने रेस्टोरेंट से संबंधित तीन अलग-अलग परिसरों पर एक साथ छापा मारा है। यह छापा डिप्टी कमिश्नर जीएसटी की अगुवाई में 6 सदस्यीय टीम के द्वारा कर चोरी की आशंका के चलते मारा गया है। इसके अतिरिक्त फॉरेस्ट क्लब में संचालित एक रेस्टोरेंट पर भी एक टीम जांच करने गई है।
सूत्रों के द्वारा ज्ञात हुआ है कि इनकी एक टीम फ्लोट रेस्टोरेंट के निदेशक के दूसरे दफ्तरों पर भी जांच के लिए गई है।
दरअसल फ्लोट के निदेशक के परिसर पर पिछले पांच दिनों से आयकर विभाग का छापा चल रहा है और आयकर विभाग उनके सभी सम्बंधित जरूरी दस्तावेजों की जांच कर रही है। इसी बीच जीएसटी की टीम ने भी यह छापा मार दिया। -

भारतीय रेलवे ने तैयार की स्वदेशी स्वचालित ट्रेन संरक्षण प्रणाली, एमएमएमयूटी के साथ समझौता
गोरखपुर। भारतीय रेलवे सिग्नल इंजीनियरिंग और दूरसंचार संस्थान (इरिसेट) ने स्वदेशी स्वचालित ट्रेन संरक्षण प्रणाली ‘कवच’ को विकसित किया है। इस प्रणाली को रेलवे नेटवर्क की सुरक्षा को और बेहतर बनाने के लिए तैयार किया गया है।
इरिसेट और मदन मोहन मालवीय प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय (एमएमएमयूटी) के बीच शैक्षणिक-उद्योग सहयोग बढ़ाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण समझौता हुआ है। इस करार के अंतर्गत, अब एमएमएमयूटी के छात्र भी रेलवे की कवच प्रणाली को पढ़ सकेंगे और इससे जुड़े प्रशिक्षण प्राप्त करेंगे।
कवच प्रणाली ट्रेन दुर्घटनाओं को रोकने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है, जिससे रेलवे सुरक्षा में एक नया अध्याय जुड़ने की उम्मीद है। इस पहल से शैक्षणिक और तकनीकी क्षेत्र में नए अवसर भी उत्पन्न होंगे। इस सहयोग से रेलवे में तकनीकी दक्षता को बढ़ावा मिलेगा और भविष्य में भारतीय रेलवे को और अधिक सुरक्षित और आधुनिक बनाने की दिशा में कदम बढ़ाए जाएंगे।
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15 साल बाद पाकिस्तानी नागरिक मसरूफ की रिहाई संभव, 27 फरवरी को होगी वतन वापसी
गोरखपुर जिला जेल में 15 साल से बंद पाकिस्तानी नागरिक मोहम्मद मसरूफ उर्फ मंसूर अहमद उर्फ गुड्डू (56) की रिहाई 27 फरवरी को हो सकती है। गृह मंत्रालय से रिहाई का पत्र जारी हो चुका है, और अटारी बॉर्डर से उसे पाकिस्तान भेजने की तैयारी शुरू कर दी गई है। इसी दिन गुजरात और राजस्थान की जेलों में बंद पाकिस्तानी बंदियों को भी रिहा किया जाएगा।
एनओसी जारी, रिमाइंडर भेजता रहा जेल प्रशासन,
सजा पूरी कर चुके मसरूफ के लिए विदेश मंत्रालय ने पहले ही नो ऑब्जेक्शन सर्टिफिकेट (एनओसी) जारी कर दिया था। इसके बाद गोरखपुर जिला जेल प्रशासन हर माह मुख्यालय को रिमाइंडर भेज रहा था। अब बहराइच एलआईयू जल्द ही मसरूफ को गोरखपुर से दिल्ली लेकर जाएगी, जहां से उसे पाकिस्तान भेजा जाएगा।
जासूसी के आरोप में हुआ था गिरफ्तार,
साल 2008 में मसरूफ को बहराइच के रुपईडीहा के पास नेपाल सीमा से घुसने पर जासूसी के आरोप में गिरफ्तार किया गया था। हालांकि, हाईकोर्ट ने साक्ष्यों के आधार पर उसे जासूसी सहित अन्य मामलों में दोषमुक्त कर दिया है।अन्य बंदियों की रिहाई भी तय,
गुजरात और राजस्थान की जेलों में बंद पाकिस्तानी बंदियों को भी इसी दिन रिहा किया जाएगा। इस प्रक्रिया से भारत-पाक संबंधों में नरमी की उम्मीद जताई जा रही है। -

यूको बैंक के हेड कैशियर मोहम्मद कलीम के खिलाफ पांचवां मामला दर्ज
गोरखपुर: शाहपुर स्थित यूको बैंक के हेड कैशियर मोहम्मद कलीम के खिलाफ शनिवार को बेलघाट थाने में पांचवां केस दर्ज किया गया है। यह केस शाहपुर की निवासी गुड्डी देवी की तहरीर पर दर्ज किया गया है, जिसमें उन्होंने आरोप लगाया कि 13 नवंबर को उन्होंने बैंक में रुपये जमा करने के लिए कलीम को 85 हजार रुपये दिए थे। इसके बाद कलीम ने उन्हें जमा रसीद भी दी, लेकिन पासबुक प्रिंट करवाने पर पता चला कि रुपये उनके खाते में जमा ही नहीं हुए। बैंक जाकर रसीद की जांच की गई तो वह फर्जी निकली।
गुड्डी देवी ने यह भी आरोप लगाया कि इससे पहले मोहम्मद कलीम पर कई अन्य लोगों के खातों से भी पैसे हड़पने का आरोप लगा है। इनमें शाहपुर निवासी अलीमुद्दीन और उनकी पत्नी के खाते से 1.80 लाख, कुरावल निवासी रामाशंकर के खाते से 3.50 लाख, शाहपुर की अफसाना के खाते से तीन लाख और मीरपुर के दयानंद का 3.48 लाख रुपये हड़पने की शिकायत दर्ज कराई गई है।
केस दर्ज होने के बाद से आरोपी हेड कैशियर मोहम्मद कलीम और उनका भाई फरार हैं। पुलिस मामले की जांच कर रही है और आरोपी की गिरफ्तारी के प्रयास जारी हैं।
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आज 37 परीक्षा केंद्रों पर पीसीएस परीक्षा हुई शुरू
गोरखपुर जिले में आज 37 परीक्षा केंद्रों पर पीसीएस परीक्षा हुई शुरू
सभी परीक्षार्थी अपने परीक्षा केंद्रों पर पहुंच चुके हैं। गहन तलाशी और दस्तावेज़ सत्यापन के बाद ही उन्हें परीक्षा केंद्रों में प्रवेश दिया गया। अब से कुछ देर में पीसीएस परीक्षा शुरू होगी।
परीक्षा के मद्देनजर सभी केंद्रों पर सुरक्षा के कड़े इंतजाम किए गए हैं। बताते चलें कि गोरखपुर जिले में 37 परीक्षा केंद्र बनाए गए हैं, जहां परीक्षा दो पालियों में आयोजित की जाएगी। पहली पाली सुबह 9:30 से 11:30 बजे तक और दूसरी पाली दोपहर 2:30 से 4:30 बजे तक होगी।










