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  • सीएमओ की पहल से जिले में शुरू हुआ ‘‘हर सुबह गुणवत्ता के नाम’’ नवाचार

    सीएमओ की पहल से जिले में शुरू हुआ ‘‘हर सुबह गुणवत्ता के नाम’’ नवाचार

    नवाचार : गोरखपुर की हर सुबह होगी स्वास्थ्य सेवाओं में गुणवत्ता के नाम

    सीएमओ की पहल से जिले में शुरू हुआ ‘‘हर सुबह गुणवत्ता के नाम’’ नवाचार

    स्वास्थ्य इकाई स्तर से लेकर जिला स्तर तक प्रतिदिन पंद्रह मिनट क्वालिटी चेकलिस्ट पर होगा काम

    गोरखपुर, 24 दिसम्बर 2024,

    भारत सरकार और प्रदेश सरकार का प्रयास है कि वर्ष 2026 के अंत तक सभी स्वास्थ्य इकाइयों का नेशनल क्वालिटी एश्योरेंस सर्टिफिकेशन (एनक्वास) हो जाए। जिले में सरकार का यह लक्ष्य पूरा करने के लिए सीएमओ डॉ आशुतोष कुमार दूबे की पहल पर ‘‘हर सुबह गुणवत्ता के नाम’’ नवाचार शुरू किया गया है। इस नवाचार के जरिये स्वास्थ्य इकाई से लेकर जिला स्तर तक की सभी इकाइयों पर प्रतिदिन पंद्रह मिनट क्वालिटी चेकलिस्ट पर कार्य करने को कहा गया है।

    मुख्य चिकित्सा अधिकारी डॉ आशुतोष कुमार दूबे ने बताया कि मंडलीय क्वालिटी एश्योरेंस कंसल्टेंट डॉ जसवंत कुमार मल्ल के सहयोग से यह पहल गोरखपुर जिले में हुई है । सभी ब्लॉकों से कहा गया है कि मरीजों व लाभार्थियों को गुणवत्तापूर्ण सुरक्षित चिकित्सकीय उपचार देना सुनिश्चित करें, क्योंकि यह उनका अधिकार है। उन्हें गुणवत्तायुक्त चिकित्सकीय सेवा पाने का भी अधिकार है। साथ ही सभी मरीजों व लाभार्थियों को गुणवत्तापूर्ण तरीके से आईईसी, वेलनेस एक्टिविटी, वीएचएनडी, छाया वीएचएसएनडी, एचबीएनसी आदि सेवाएं और चिकित्सकीय कार्यक्रमों की जानकारी और लाभ मिलना चाहिए। साथ ही प्रत्येक स्वास्थ्यकर्मी को संक्रमण मुक्त गुणवत्तायुक्त सुरक्षित वातावरण में कार्य करने का अधिकार है। यह तभी संभव है, जबकि शत प्रतिशत स्वास्थ्य इकाइयों का एनक्वास करा लिया जाए। इसके लिए प्रतिदिन प्रयास करना होगा ।

    सीएमओ डॉ दूबे ने बताया कि प्रमुख सचिव स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण पार्थ सारथी सेन शर्मा के स्तर से क्वालिटी कार्यक्रम को सुदृढ़ बना कर एनक्वास सर्टिफिकेशन के लक्ष्य को पूरा करने का निर्देश मिला है। उनके निर्देशों के क्रम में ही ‘‘हर सुबह गुणवत्ता के नाम’’ पहल की गई है।

    मंडलीय क्वालिटी एश्योरेंस कंसल्टेंट डॉ जसवंत कुमार मल्ल का कहना है कि इस नवाचार के जरिये चार माह में एनक्वास कराना संभव है। इसके तहत रोज अपने कार्यों की मॉनीटरिंग कर कमियों को डायरी में लिखना है और कार्ययोजना बना कर संबंधित अधिकारी और कर्मचारी से चर्चा करनी है। नियमित मॉनीटरिंग, चर्चा और गैप को दूर करके प्रत्येक सेवा को क्वालिटी के मानकों तक लाया जा सकता है। इसके लिए टीम भावना के साथ कार्य करना होगा। इस नवाचार में जिला स्तर पर डीपीएम व डीसीपीएम, ब्लॉक स्तर पर बीपीएम व बीसीपीएम और चिकित्सा इकाई स्तर पर विभागीय नोडल व सीएचओ की जिम्मेदारी तय की गई है ।

    ऐसे हो रहा है काम,

    जिला क्वालिटी एश्योरेंस प्रोग्राम के गोरखपुर प्रभारी विजय कुमार श्रीवास्तव ने बताया कि सीएमओ से प्राप्त दिशा निर्देशों के अनुसार डीपीएम और डीसीपीएम को प्रतिदिन दो ब्लॉक का अनुश्रवण कर संबंधित अधिकारी और क्वालिटी कंसल्टेंट से चर्चा करनी है। ब्लॉक स्तर पर बीपीएम किसी भी एक चिकित्सा इकाई और बीसीपीएम दो सीएचओ के कार्यों का अनुश्रवण कर गैप्स दूर कराएंगे। चिकित्सा इकाई स्तर पर विभागीय नोडल और सीएचओ को कम से कम 20 चेकप्वाइंट पर काम करना है। उन्हें आउटकम इंडीकेटर या केआईपी डेटा भी एचएमआईएस से पूरा करना है । साथ ही गैप्स के बारे में संबंधित अधिकारियों और क्वालिटी कंसल्टेंट से चर्चा भी करनी है।

  • सांसद रवि किशन ने बच्चों से किया स्वास्थ्य संवाद, टीबी उपचाराधीन बच्चों को दी पोषण पोटली

    सांसद रवि किशन ने बच्चों से किया स्वास्थ्य संवाद, टीबी उपचाराधीन बच्चों को दी पोषण पोटली

    सांसद रवि किशन ने बच्चों से किया स्वास्थ्य संवाद, टीबी उपचाराधीन बच्चों को दी पोषण पोटली,

    राष्ट्रीय टीबी उन्मूलन कार्यक्रम के ब्रांड अम्बेस्डर के तौर पर उपचाराधीन बच्चों का मनोबल भी बढ़ाया

    चरगांवा में हुए बाल स्वास्थ्य मेले में मनोरंजक कार्यक्रमों के बीच बच्चों को मिला सेहत का वरदान

    गोरखपुर, 23 दिसम्बर 2024,

    चरगांवा के जनता इंटर कॉलेज में सोमवार को लगे बाल स्वास्थ्य मेले में बच्चों को मनोरंजक कार्यक्रमों के बीच सेहत का वरदान मिला । मेले का शुभारंभ सदर सांसद और फिल्म स्टार रवि किशन शुक्ल ने किया । उन्होंने मेले में आए बच्चों के साथ स्वास्थ्य संवाद किया और उन्हें सेहतमंद बने रहने की टिप्स दी । राष्ट्रीय टीबी उन्मूलन कार्यक्रम के ब्रांड अम्बेस्डर के तौर पर उन्होंने टीबी उपचाराधीन पांच बच्चों का मनोबल बढ़ाया और इन सभी बच्चों को स्वयंसेवी संस्था सेफ सोसाइटी की तरफ से पोषण पोटली दी। संस्था ने इन बच्चों को इसी वर्ष अक्टूबर माह में गोद लिया है ।

    सदर सांसद ने इस मौके पर कहा कि देश के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने वर्ष दो हजार पच्चीस में ही भारत को टीबी से मुक्त करवाने का संकल्प लिया है । इस मुहिम में निक्षय मित्रों की अहम भूमिका है। निक्षय मित्र टीबी मरीजों को गोद लेकर उन्हें पोषण सामग्री के साथ साथ यथासंभव हर प्रकार की मदद करते हैं। इससे मरीजों के ठीक होने में की राह और आसान हो जाती है । साथ ही समाज से मरीजों के प्रति भेदभाव समाप्त होता है। इस दिशा में संस्था द्वारा निक्षय मित्र बनने का प्रयास सराहनीय है।
    सांसद ने बच्चों से कहा कि उन्हें पढ़ाई लिखाई के साथ साथ स्वच्छता और व्यायाम का विशेष ध्यान रखना चाहिए। उन्होंने अपना उदाहरण देते हुए कहा कि नियमित व्यायाम के जरिये उनके जैसा ही फिट रह सकते हैं।

    उन्होंने मेले में लगे स्टॉल्स का निरीक्षण किया और बच्चों के सांस्कृतिक कार्यक्रम भी देखे। श्री शुक्ल ने खुद भी बच्चों के लिए प्रस्तुतियां दीं और उनके बीच जाकर संवाद किया। दर्जा प्राप्त राज्य मंत्री पुष्प दंत जैन, राष्ट्रीय महिला आयोग की उपाध्यक्ष चारू चौधरी, भाजपा के महानगर उपाध्यक्ष बृजेश मणि मिश्र, जिला क्षय उन्मूलन अधिकारी डॉ गणेश यादव, एसपी ट्रैफिक संजय कुमार और अन्तर्राष्ट्रीय गायक मनोज मिहिर ने भी बच्चों को संबोधित किया और उनका मनोबल बढ़ाया।

    इस मौके पर सेफ सोसाइटी संस्था के निदेशक विश्व वैभव शर्मा ने कहा कि संस्था के स्थापना दिवस पर टीबी उपचाराधीन बच्चों को गोद लिया गया था। स्वस्थ बचपन के संकल्प के साथ कार्य कर रही संस्था ने देसाई फाउंडेशन के सहयोग से इस मेले का आयोजन करवाया ताकि बच्चों को स्वास्थ्य लाभ और सेहतमंद रहने का ज्ञान मिल सके । बच्चों को टीबी बीमारी के बारे में जागरूक करने और इसके प्रति भेदभाव की भावना को समाप्त करने के लिए ही गोद लिये गये बच्चों को सभी के बीच पोषण पोटली दिलवाई गई।

    इस मौके पर संस्था के वरिष्ठ कार्यकारी शैलेंद्र चतुर्वेदी, सोनिका खरवार, बृजेश चतुर्वेदी, वरिष्ठ उपचार पर्यवेक्षक मनीष तिवारी, जिला मलेरिया विभाग के प्रतिनिधियों समेत संस्था के कई पदाधिकारी और देसाई फाउंडेशन के प्रतिनिधिगण मौजूद रहे।

    स्वास्थ्य जांच के साथ जनजागरूकता,

    बाल स्वास्थ्य मेले में बच्चों को नेत्र जांच, दंत जांच, रक्त जांच और अन्य मौसमी बीमारियों के जांच की सुविधा दी गई । साथ ही उन्हें टीबी बीमारी के बारे में भी जागरूक किया गया। इस मौके पर मिशन शक्ति, दस अट्ठानबे, दस नब्बे, सेफ अंत्योदय, सेफ सोसाइटी और चरगांवा पीएचसी का स्टॉल लगाया गया। पीएचसी के स्टॉल के माध्यम से भी दवाइयां वितरित की गईं। स्टॉल पर प्रभारी चिकित्सा अधिकारी डॉ धनंजय कुशवाहा, चिकित्सा अधिकारी डॉ राजेश वैश्य और स्वास्थ्य शिक्षा एवं सूचना अधिकारी मनोज कुमार समेत उनकी टीम ने बच्चों के बीच स्वास्थ्य सेवाएं दीं।

     

  • टीबी से बचाव के लिए निकट सम्पर्की जरूर खाएं बचाव की दवा

    टीबी से बचाव के लिए निकट सम्पर्की जरूर खाएं बचाव की दवा

    ‘‘टीबी से बचाव के लिए निकट सम्पर्की जरूर खाएं बचाव की दवा’’

    जिले में 34011 छह वर्ष से अधिक आयु के लोग और 3593 छह वर्ष तक के बच्चे खा रहे हैं दवा,

    441 एचआईवी मरीजों को भी खिलाई जा रही है टीबी से बचाव की दवा,

    गोरखपुर, 21 दिसम्बर 2024: टीबी का उपचार शुरू होने के तीन से चार सप्ताह बाद उसके संक्रमण की आशंका समाप्त हो जाती है, लेकिन गैर उपचारित अवस्था में टीबी का संक्रमण निकट सम्पर्कियों में हो सकता है । यही वजह है कि जिन घरों में टीबी के मरीज निकल रहे हैं उनमें मरीजों को निकट सम्पर्कियों की भी जांच कराई जा रही है। जांच के बाद जिन निकट सम्पर्कियों में टीबी की बीमारी निकलती है उनकी दवा शुरू की जाती है। जिन निकट सम्पर्कियों में इस बीमारी की पुष्टि नहीं होती है उन्हें भी छह माह तक टीबी से बचाव की दवा खिलाई जाती है। जिला क्षय उन्मूलन अधिकारी (डीटीओ) डॉ गणेश यादव ने बताया कि जिले में छह वर्ष से अधिक आयु के 34011 लोगों और छह वर्ष तक के 3593 बच्चों को यह दवा खिलाई जा रही है। साथ ही 441 एचआईवी मरीजों को भी यह दवा खिलाई जा रही है।

    डीटीओ ने बताया कि जिले में ड्रग रेसिस्टेंट (डीआर) टीबी के 390 और ड्रग सेंसिटिव (डीएस) टीबी के 9827 मरीज उपचाराधीन हैं। टीबी का जब भी कोई नया मरीज मिलता है तो उसके निकट सम्पर्की की भी टीबी जांच अनिवार्य तौर पर कराई जाती है। जांच के बाद टीबी न निकलने पर भी बचाव की दवा आवश्यक तौर पर खिलाई जाती है। एचआईवी मरीज में टीबी की आशंका अधिक होती है इसलिए नया एचआईवी मरीज मिलने पर उसको भी छह माह तक टीबी से बचाव की दवा खाना अनिवार्य है।

    डॉ यादव ने बताया कि अगर दो सप्ताह तक लगातार खांसी आए, सीने में दर्द हो, सांस फूल रही हो, तेजी से वजन घट रहा हो, बलगम में खून आता हो और रात में पसीने के साथ बुखार होता हो तो यह टीबी भी हो सकती है। इन लक्षणों के दिखने पर टीबी की जांच जरूर कराई जानी चाहिए। समय से जांच और उपचार न होने पर एक टीबी मरीज दस से बारह लोगों को संक्रमित कर सकता है, जबकि उपचाराधीन मरीज से संक्रमण का खतरा कम हो जाता है।

    94 फीसदी लोग हुए स्वस्थ,

    डीटीओ ने बताया कि टीबी का सम्पूर्ण उपचार ले कर मरीज पूरी तरह से ठीक हो जाते हैं। जिले में पिछले वर्ष उपचार सफतला दर 94 फीसदी रही है। अगर मरीज नियमित दवा का सेवन करें तो वह जल्दी ठीक हो जाएंगे। बीच में दवा बंद करने से डीएस टीबी के डीआर टीबी में बदलने की आशंका बढ़ जाती है और ऐसे मरीजों का उपचार जटिल होता है।

     

  • सावधानियों से करें सर्दियों का सामना:डॉ अरुण कुमार वर्मा

    सावधानियों से करें सर्दियों का सामना:डॉ अरुण कुमार वर्मा

    सावधानियों से करें सर्दियों का सामना:डॉ अरुण कुमार वर्मा,

    तनाव,अवसाद,थकान हैं प्रमुख लक्षण,

    मूड स्विंग और सीजनल इफेक्टिव डिसऑर्डर हैं ज़िम्मेदार,

    डॉ. वर्मा ने दिए सर्दियों से बचने के टिप्स,

    गोरखपुर 10 दिसंबर,मंगलवार,

    प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र सिविल लाइन्स गोरखपुर प्रभारी चिकित्साधिकारी डॉ.अरुण कुमार वर्मा ने सर्दियों के दौरान होने वाली तकलीफें और उनसे बचने के उपायों पर चर्चा की।
    उन्होंने बताया कि सर्दियों के दिनों में थकान,तनाव,बेचैनी,उदासीनता,अवसाद,चिंता,मूड स्विंग आदि प्रमुखता से उभर कर आते हैं।जिन्हें थोड़े उपायों एवं सावधानियों को अपना कर दूर किया जा सकता है।
    उन्होंने बताया कि हाल ही में हुए सर्वे में पता चला है कि महिलाओं को सर्दियां आते ही डिप्रेशन महसूस होने लगता है।इस मौसमी डिप्रेशन को सिजनल इफेक्टिव डिसऑर्डर (S.A.D) कहते हैं।धूप और सूर्य की रोशनी के अभाव में यह समस्या उत्पन्न होती है।जबकि इस मौसम में थकान का कारण छोटे दिन और बड़ी रातों की वजह से दिनचर्या पर होने वाला दुष्प्रभाव है।सर्दियों में सूरज की रोशनी कम होने का अर्थ है कि मस्तिष्क ज्यादा मात्रा में मेलटोनिन हार्मोन्स बनाता है जिसके कारण व्यक्ति को ज्यादा नींद आती है, क्योंकि इसका सीधा संबंध स्लिप हार्मोन्स से होता है। जब सूरज जल्दी छुप जाता है तो हमारा मष्तिष्क उपरोक्त हार्मोन्स बनाने लगता है जिससे शाम होते ही हमारा मन सोने को करता है।शारीरिक सक्रियता कम होने के कारण विंटर डिप्रेशन भी हो सकता है। सर्दियों में मस्तिष्क में सेरोटोनिन केमिकल का निर्माण कम होने के कारण मूड स्विंग होना भी आम है।जिसका मुख्य कारण सूरज की पर्याप्त रोशनी ना मिलना है।यह केमिकल हमारे मूड पर सीधा प्रभाव छोड़ता है।
    डॉ. वर्मा ने बताया कि कुछ छोटे उपायों एवं सावधानियों को अपना कर इनसे बचा जा सकता है।इसके लिए हमें ज्यादा से ज्यादा धूप में रहना चाहिए।भोजन में न्यूट्रिशंस को शामिल करना चाहिए।मूड ठीक रखने के लिए संगीत सुनें,किताब पढ़े,सिनेमा देखें और व्यायाम करें।परिवार और दोस्तों के साथ समय बिताएं।एकांत में न रहे तथा नकारात्मक विचारों को मन मे जगह न बनाने दें।
    इसके अतिरिक्त आनंद के हर छोटे बड़े मौकों को तलाश कर भरपूर जिंदादिली के साथ जियें।
    उन्होंने कहा कि सकारात्मक विचारों के साथ आगे बढ़ना तमाम अवसादों की सबसे कारगर औषधि है।उपरोक्त उपाय कर के सर्दियों में होने वाली परेशानियों से बचा जा सकता है।

    https://youtube.com/shorts/_KNU_2bgtHc?si=0A0nBZL-fkQxvhov

  • निक्षय मित्र बन मनाया पिता की पुण्यतिथि

    निक्षय मित्र बन मनाया पिता की पुण्यतिथि

    निक्षय मित्र बन मनाया पिता की पुण्यतिथि,

    एसटीएस के प्रयासों से स्वस्थ हो चुके हैं चार टीबी मरीज,

    हर साल माता और पिता की स्मृति में दो-दो टीबी मरीजों को गोद लेने का संकल्प

    गोरखपुर, 10 दिसम्बर 2024,

    पिता की चौथी पुण्यतिथि के मौके पर दो टीबी मरीजों को गोद लेकर बीआरडी मेडिकल कॉलेज में वरिष्ठ उपचार पर्यवेक्षक (एसटीएस) अमित नारायण मिश्र पुनः निक्षय मित्र बन गये हैं। उन्होंने संकल्प लिया है कि वह प्रति वर्ष माता पिता की पुण्यतिथि पर दो दो टीबी मरीजों को गोद लेकर स्वस्थ होने में उनके मददगार बनेंगे। अमित ने इसी वर्ष फरवरी माह में मां की पुण्यतिथि पर दो टीबी मरीजों को गोद लिया था, जो पूरी तरह से स्वस्थ हो चुके हैं। उनके द्वारा गोद लिये गये कुल चार टीबी मरीज अब तक टीबी मुक्त हो चुके हैं।

    मुख्य चिकित्सा अधिकारी डॉ आशुतोष कुमार दूबे ने बताया कि कोई भी व्यक्ति या संस्था स्वेच्छा से निक्षय मित्र बन सकते हैं। निक्षय मित्र बनने के बाद गोद लिये गये टीबी मरीज को यथा सामर्थ्य पोषक सामग्री देनी होती है। समय समय पर मरीज का फॉलो अप करना होता है ताकि बीच में दवा बंद न हो। टीबी मरीज की दवा बंद होने से जटिलताएं बढ़ जाती हैं और वह ड्रग रेसिस्टेंट (डीआर) टीबी मरीज बन सकता है, जिसका इलाज कठिन है। अगर निक्षय मित्र नियमित हालचाल लेते हैं तो टीबी मरीज का मनोबल बढ़ता है और समाज से उसके प्रति भेदभाव का भाव भी खत्म होता है। बेहतर कार्य करने वाले निक्षय मित्रों को स्वास्थ्य विभाग सम्मानित करता है।

    निक्षय मित्र अमित नारायण मिश्र (36) ने बताया कि एक 72 वर्षीय टीबी मरीज उनके टीबी यूनिट से ही इलाज करवा रहे थे जिनकी आर्थिक स्थिति काफी खराब है। मरीज का परिवार उनके इलाज में बीआरडी मेडिकल कॉलेज आने से पहले ही लाखों रुपये कर्ज लेकर खर्च कर चुका था । मां की पुण्यतिथि पर उस मरीज को गोद लेकर उन्होंने खुद तो सहयोग किया ही,उसे सरकार की तरफ उपलब्ध कराई जाने वाली सभी सुविधाएं दिलवाईं। अब वह स्वस्थ हो चुका है। इससे काफी आत्म संतोष मिला और पिता की पुण्यतिथि पर भी मरीज गोद लेने का निर्णय लिया। उनके पिता स्वर्गीय दिग्विजय नारायण मिश्र समाज के प्रति समर्पित थे और अमित का निक्षय मित्र बनना उनके पिता के लिए सबसे श्रेष्ठ श्रद्धांजलि है।

    *पोषक सामग्री के साथ दी सलाह*

    गोद लिये गये पचास वर्षीय मरीज रामउग्रह (काल्पनिक नाम) चरगांवा ब्लॉक के एक गांव के रहने वाले हैं। उनका इलाज चार दिसम्बर को शुरू हुआ है। उन्होंने बताया कि एसटीएस ने उन्हें मूंगफली, गुड़., भुना चना, केला और सेब की पोटली बना कर दिया और सलाह दी है कि इलाज के दौरान हरसंभव मदद करेंगे। ठंड से बचने के लिए कंबल भी दिया है। गुलरिहा बाजार की चालीस वर्षीय टीबी मरीज रुबी (काल्पनिक नाम) ने बताया कि कंबल और पोषक सामग्री देते हुए एसटीएस ने बताया है कि बीमारी का इलाज चलने तक प्रति माह 1000 रुपये की दर से पोषण के लिए सरकारी सहायता भी प्राप्त होगी।

    *लक्षण दिखें तो कराएं जांच*

    सीएमओ ने बताया कि अगर लगातार दो सप्ताह तक खांसी आए, शाम को पसीने के साथ बुखार हो, सांस फूल रही हो, सीने में दर्द हो या बलगम में खून आए तो टीबी की जांच अवश्य करवानी चाहिए। अगर समय से फेफड़े की टीबी (पल्मनरी टीबी) की पहचान कर इलाज शुरू कर दिया जाए तो उपचाराधीन मरीज से दूसरे लोगों के संक्रमित होने की आशंका भी कम हो जाती है। जिले में इस समय करीब दस हजार टीबी मरीजों का उपचार चल रहा है।

  • बुजुर्गों की स्वास्थ्य रक्षा को डबल इंजन सरकार ने बढ़ाए हाथ

    बुजुर्गों की स्वास्थ्य रक्षा को डबल इंजन सरकार ने बढ़ाए हाथ

    बुजुर्गों की स्वास्थ्य रक्षा को डबल इंजन सरकार ने बढ़ाए हाथ,

    गोरखपुर में 70 वर्ष से अधिक उम्र के 8325 लाभार्थियों के बने हैं वय वंदन आयुष्मान कार्ड,

    गोरखपुर में 9 दिसंबर को सीएम योगी के हाथों होगा आयुष्मान वय वंदन कार्ड का वितरण,

    आयुष्मान योजना के तहत जिले में दो लाख से अधिक लाभार्थी करा चुके हैं इलाज,

    गोरखपुर, 7 दिसंबर। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की सरकार जन स्वास्थ्य की रक्षा के लिए हेल्थ इंफ्रास्ट्रक्चर डेवलपमेंट से लेकर निशुल्क इलाज की व्यवस्था करने तक अभियान चलाकर सतत काम कर रही है। इसी क्रम में पीएम मोदी की घोषणा के मुताबिक आयुष्मान स्वास्थ्य योजना के तहत 70 वर्ष से सभी नागरिकों को पांच लाख रुपये की मुफ्त इलाज की सुविधा देने की शुरुआत डबल इंजन की सरकार कर चुकी है। इसके लिए बुजुर्गों के आयुष्मान वय वंदन कार्ड बनाए जा रहे हैं। गोरखपुर में 9 दिसंबर को आयुष्मान वय वंदन कार्ड के वितरण का शुभारंभ मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ करेंगे।

    आयुष्मान वय वंदन कार्ड, बुजुर्गों की स्वास्थ्य सेवा के लिए एक नई सौगात है। इसके तहत 70 वर्ष और उससे अधिक आयु के प्रत्येक वरिष्ठ नागरिक को अस्पतालों में मुफ्त इलाज मिलेगा। वय वंदना कार्ड, आयुष्मान भारत-प्रधानमंत्री जन आरोग्य योजना का एक महत्वपूर्ण पहलू है। आयुष्मान वय वंदन कार्ड बनवाने के लिए आय सीमा की भी कोई बाध्यता नहीं है। 70 वर्ष से अधिक उम्र के नागरिक सिर्फ अपने आधार कार्ड के जरिये योजना से लाभान्वित होने के लिए नामांकन करा सकते हैं।

    इस समय पूरे प्रदेश में बुजुर्गों के आयुष्मान वय वंदन कार्ड बनाए जा रहे हैं। गोरखपुर के मुख्य चिकित्सा अधिकारी डॉ. आशुतोष दूबे बताते हैं कि जिले में अब तक 8325 बुजुर्गों के वय वंदन कार्ड बनाए जा चुके हैं। गोरखपुर में सीएम योगी 9 दिसंबर को अपराह्न चंपा देवी पार्क मैदान में वय वंदन कार्ड के वितरण का शुभारंभ करेंगे। कुछ लाभार्थियों को यह कार्ड मुख्यमंत्री के हाथों प्राप्त होगा।

    *आयुष्मान योजना पर गोरखपुर में 320 करोड़ रुपये खर्च कर चुकी है सरकार*
    सीएमओ ने बताया कि समग्र रूप से देखें तो आयुष्मान योजना मुफ्त इलाज की व्यवस्था कराने में बड़ी कारगर साबित हुई है। अभी तक जिले में 432894 लाभार्थी परिवारों के 1120347 लोगों के आयुष्मान कार्ड बनाए जा चुके हैं। इस योजना में मुफ्त इलाज की व्यवस्था करने के लिए जनपद में 91 राजकीय और 189 निजी चिकित्सालयों (कुल 280) को संबद्ध किया गया है। अब तक आयुष्मान योजना से आच्छादित 209666 लाभार्थियों ने मुफ्त चिकित्सा सुविधा का लाभ प्राप्त किया है। इसके लिए सरकार द्वारा करीब 320 करोड़ रुपये का खर्च उठाया गया है।

  • ज्वाइंट मजिस्ट्रेट ने भटहट पीएचसी का किया औचक निरीक्षण

    ज्वाइंट मजिस्ट्रेट ने भटहट पीएचसी का किया औचक निरीक्षण

     

    गोरखपुर। जनपद के सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र पर हर आम जनमानस को सुचारू रूप से स्वास्थ्य सेवाएं मिल रहा है कि नहीं जिलाधिकारी कृष्ण करुणेश के निर्देश पर ज्वाइंट मजिस्ट्रेट /एसडीएम सदर मृणालीअविनाश जोशी भटहट पीएचसी का औचक निरीक्षण करने पहुंची। ज्वाइंट मजिस्ट्रेट/ एसडीएम सदर औषधि भण्डार कक्ष में पहुंच कर रिकार्डों को देखा और दवाओं की उपलब्धता की जानकारी ली। इसके बाद एसडीएम ने पैदल भ्रमण करके ओपीडी कक्ष, पर्ची काउण्टर पर मरीजों का हाल चाल जाना। बृहस्पतिवार को ज्वाइंट मजिस्ट्रेट/ एसडीएम सदर ने निकट भटहट सामुदायिक स्वास्थ केंद्र का निरीक्षण करने के लिए पहुंची वहां उन्होंने अस्पताल में तैनात अधिकारियों कर्मचारियों की उपस्थिति के लिए रजिस्टर चेक किया। पर्चा पंजीकरण कक्ष से चौकीदार उपस्थिति मिले। इसके बाद उन्होंने आपातकालीन वार्ड में तैनात स्टाफ नर्सों से बात की। मरीजों के हाल चाल को जाना। अधिकारियों को सुविधाएं बढ़ाने के निर्देश दिए। इसके बाद अस्पताल में सफाई व्यवस्था, शौचालय, पेयजल सप्लाई का जायजा लिया। औषधि स्टोर में एसडीएम ने रजिस्टर से दवाईयों को मिलान किया तो वह ठीक पाया गया। अस्पताल स्टाफ को एसडीएम ने ड्रेस में आने के निर्देश दिए। उपजिलाधिकारी ने बताया कि सामुदायिक स्वास्थ केंद्र में कोई खामी नहीं पाई गई। व्यवस्था में और सुधार लाने के लिए आदेश दिए।

  • रतौंधी, अंधेपन व कुपोषण से बचाव के लिए शुरू हुआ विटामिन ‘ए’ सम्पूरण कार्यक्रम

    रतौंधी, अंधेपन व कुपोषण से बचाव के लिए शुरू हुआ विटामिन ‘ए’ सम्पूरण कार्यक्रम

    रतौंधी, अंधेपन व कुपोषण से बचाव के लिए शुरू हुआ विटामिन ‘ए’ सम्पूरण कार्यक्रम,

    एक माह तक टीकाकरण सत्र स्थलों पर पिलाई जाएगी विटामिन ‘ए’ की खुराक,

    चरगांवा पीएचसी से ब्लॉक प्रमुख और एडी हेल्थ ने किया जिला स्तरीय अभियान का शुभारंभ,

    रोगों से बचाव के साथ प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाती है विटामिन ‘ए’ की खुराक,

    गोरखपुर, 04 दिसम्बर 2024,

    रतौंधी, अंधेपन व कुपोषण से बचाव और शरीर में रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाने व उनकी वृद्धि के लिए जिले में बुधवार से विटामिन ‘ए’ सम्पूरण कार्यक्रम शुरू किया गया। इसके तहत एक माह तक नियमित टीकाकरण के सभी सत्र स्थलों पर नौ माह से पांच साल तक के बच्चों को विटामिन ‘ए’ की खुराक पिलाई जाएगी । इस अभियान का जिला स्तरीय शुभारंभ चरगांवा प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र (पीएचसी) से ब्लॉक प्रमुख वंदना सिंह और एडी हेल्थ डॉ एनपी गुप्ता ने किया। संयुक्त निदेशक स्वास्थ्य डॉ बीएम राव, जिला प्रतिरक्षण अधिकारी डॉ नंदलाल कुशवाहा, प्रभारी चिकित्सा अधिकारी डॉ धनंजय कुशवाहा और स्वास्थ्य शिक्षा एवं सूचना अधिकारी मनोज कुमार ने भी उद्घाटन कार्यक्रम में बच्चों को दवा पिलाया।

    मुख्य चिकित्सा अधिकारी डॉ आशुतोष कुमार दूबे ने बताया कि जिले के सभी ब्लॉक स्तरीय अस्पतालों से इस अभियान का शुभारंभ स्थानीय जनप्रतिनिधियों की मौजूदगी में किया गया। विटामिन ‘ए’ की पहली खुराक आधा चम्मच (एक एमएल) नौ माह पर दी जाती है, जबकि दूसरी खुराक एक चम्मच (दो एमएल) एक वर्ष की आयु के बाद दी जाती है। नौ माह से पांच वर्ष की उम्र तक कुल नौ बार बच्चे को विटामिन ‘ए’ की खुराक पिलाई जानी अनिवार्य है। सभी पात्र बच्चों को यह दवा पिलाई जा सके, इसके लिए तीन जनवरी तक यह अभियान चलेगा। क्षेत्र की आशा कार्यकर्ता की मदद से नजदीकी टीकाकरण सत्र स्थल पर अपने पाल्य को ले जाकर यह दवा एएनएम की मदद से पिलाई जा सकती है। इस दवा से निमोनिया और डायरिया से भी बचाव होता है। साथ में यह मीजिल्स होने की स्थिति में मृत्यु दर और जटिलता को कम करती है।

    सीएमओ डॉ दूबे ने बताया कि जिले के 594 उपकेंद्रों, तेईस शहरी प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों, एम्स, बीआरडी मेडिकल कॉलेज, रेलवे एवं जिला महिला अस्पताल में नियमित टीकाकरण स्थल पर अभियान के दौरान दवा पिलाई जाएगी। जिले में नौ माह से पांच वर्ष तक के करीब 5.76 लाख बच्चों को दवा पिलाई जानी है। इनमें नौ से बारह माह के करीब 65000 बच्चे, एक से दो वर्ष तक के करीब 1.23 लाख बच्चे और और दो से पांच वर्ष तक के 3.88 लाख बच्चे शामिल हैं। यह दवा सभी पात्र बच्चों को निर्धारित मात्रा में सरकारी खर्चे पर पिलाई जाती है।

    उद्घाटन के मौके पर चिकित्सा अधिकारी डॉ प्रफुल्ल कुमार राय, डब्ल्यूएचओ के एसएमओ डॉ विनय, डॉ अमरनाथ, डॉ वीके सिंह, डॉ पवन कुमार, डॉ श्वाति, बीपीएम गगन, लोकेंद्र, रुदल, यूनिसेफ संस्था के प्रतिनिधि चिरंजीव आदि प्रमुख तौर पर मौजूद रहे।

    *5.53 लाख बच्चों ने पी थी दवा*

    जिला प्रतिरक्षण अधिकारी डॉ नंदलाल कुशवाहा ने बताया कि यह अभियान वर्ष में दो बार चलता है। पिछले वर्ष जून में चले अभियान के दौरान 5.53 लाख बच्चों को विटामिन ए की खुराक पिलाई गई थी। दवा पूरी तरह से सुरक्षित और असरदार है।

    टीकाकरण और दवा सेवन सुरक्षित,

    चरगांवा पीएचसी पर सबसे पहले विटामिन ‘ए’ की दवा का सेवन करने वाली 16 माह की बच्ची ऋषिका की मां अल्का (30) ने बताया कि नियमित टीकाकरण व इस दवा का सेवन बच्चों के लिए पूरी तरह से सुरक्षित है। उनकी बच्ची इससे पहले भी यह दवा पी चुकी है। उनका मायका गोरखपुर के गंगानगर मोहल्ले में है। वह पीएचसी पर बच्ची के टीकाकरण के लिए ही आई थीं। इसी दौरान उनकी बच्ची को अधिकारियों द्वारा इस दवा का सेवन कराया गया।

  • एम्स पूर्वांचल: मेडिकल टूरिज्म का नया हब बनने की ओर

    एम्स पूर्वांचल: मेडिकल टूरिज्म का नया हब बनने की ओर

     

    गोरखपुर। एम्स पूर्वांचल अब मेडिकल टूरिज्म का केंद्र बनने की दिशा में कदम बढ़ा रहा है। अन्य बड़े शहरों के मुकाबले, यहां इलाज की लागत कम होगी, जिससे विदेशों से आने वाले मरीजों को बड़ी राहत मिलेगी। विशेष रूप से, शार्क देशों और गल्फ कंट्रीज से आने वाले मरीजों को प्राथमिकता दी जाएगी, हालांकि इन मरीजों के इलाज का खर्च सामान्य मरीजों से कुछ ज्यादा होगा। एम्स इस उद्देश्य के लिए जल्द ही मेडिकल टूरिज्म पॉलिसी तैयार करेगा।

    भारत में इलाज की लागत विदेशों की तुलना में काफी कम होती है। बड़े ऑपरेशनों से लेकर सामान्य जांच तक, विदेशों में मरीजों को भारी खर्च करना पड़ता है। कनाडा में दांत और आंखों के इलाज की ऊंची कीमतें, वहीं अफगानिस्तान और अन्य गल्फ देशों में कैंसर और महिला संबंधित बीमारियों का इलाज महंगा है। इसके अलावा, कॉस्मेटिक प्रोसीजर में भारत अफ्रीका की तुलना में कम से कम 50 प्रतिशत सस्ता है।

    एम्स के कार्यकारी निदेशक डॉ. अजय सिंह ने बताया कि गोरखपुर में एम्स को विश्व स्तर पर पहचान दिलाने के लिए मेडिकल टूरिज्म एक बेहतरीन विकल्प है। इसके तहत, विदेश से आने वाले मरीजों के लिए बेड रिजर्व किए जाएंगे और इलाज वरीयता के आधार पर किया जाएगा।

    दिल्ली और मुंबई से गोरखपुर की सीधी फ्लाइट कनेक्टिविटी भी इस योजना के लिए लाभकारी साबित होगी। विदेश से आने वाले मरीज सीधे इन शहरों से गोरखपुर पहुंच सकते हैं, जिससे उन्हें यात्रा में परेशानी नहीं होगी।

    एम्स ने सभी विभागों को निर्देश दिया है कि वे देशभर के प्रमुख संस्थानों में इलाज पर होने वाले खर्च का अध्ययन करें, ताकि यहां इलाज के रेट तय किए जा सकें। इसके अलावा, मेडिकल टूरिज्म पॉलिसी के तहत, एम्स को और अधिक मरीज आकर्षित करने के लिए आवश्यक कदम उठाए जाएंगे।