एम्स पूर्वांचल: मेडिकल टूरिज्म का नया हब बनने की ओर

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गोरखपुर। एम्स पूर्वांचल अब मेडिकल टूरिज्म का केंद्र बनने की दिशा में कदम बढ़ा रहा है। अन्य बड़े शहरों के मुकाबले, यहां इलाज की लागत कम होगी, जिससे विदेशों से आने वाले मरीजों को बड़ी राहत मिलेगी। विशेष रूप से, शार्क देशों और गल्फ कंट्रीज से आने वाले मरीजों को प्राथमिकता दी जाएगी, हालांकि इन मरीजों के इलाज का खर्च सामान्य मरीजों से कुछ ज्यादा होगा। एम्स इस उद्देश्य के लिए जल्द ही मेडिकल टूरिज्म पॉलिसी तैयार करेगा।

भारत में इलाज की लागत विदेशों की तुलना में काफी कम होती है। बड़े ऑपरेशनों से लेकर सामान्य जांच तक, विदेशों में मरीजों को भारी खर्च करना पड़ता है। कनाडा में दांत और आंखों के इलाज की ऊंची कीमतें, वहीं अफगानिस्तान और अन्य गल्फ देशों में कैंसर और महिला संबंधित बीमारियों का इलाज महंगा है। इसके अलावा, कॉस्मेटिक प्रोसीजर में भारत अफ्रीका की तुलना में कम से कम 50 प्रतिशत सस्ता है।

एम्स के कार्यकारी निदेशक डॉ. अजय सिंह ने बताया कि गोरखपुर में एम्स को विश्व स्तर पर पहचान दिलाने के लिए मेडिकल टूरिज्म एक बेहतरीन विकल्प है। इसके तहत, विदेश से आने वाले मरीजों के लिए बेड रिजर्व किए जाएंगे और इलाज वरीयता के आधार पर किया जाएगा।

दिल्ली और मुंबई से गोरखपुर की सीधी फ्लाइट कनेक्टिविटी भी इस योजना के लिए लाभकारी साबित होगी। विदेश से आने वाले मरीज सीधे इन शहरों से गोरखपुर पहुंच सकते हैं, जिससे उन्हें यात्रा में परेशानी नहीं होगी।

एम्स ने सभी विभागों को निर्देश दिया है कि वे देशभर के प्रमुख संस्थानों में इलाज पर होने वाले खर्च का अध्ययन करें, ताकि यहां इलाज के रेट तय किए जा सकें। इसके अलावा, मेडिकल टूरिज्म पॉलिसी के तहत, एम्स को और अधिक मरीज आकर्षित करने के लिए आवश्यक कदम उठाए जाएंगे।

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