विश्व ट्रॉमा दिवस पर एम्स गोरखपुर में सीएमई एवं जागरूकता कार्यक्रम का आयोजन

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गोरखपुर, 17 अक्टूबर 2025: एम्स गोरखपुर के ट्रॉमा एवं आकस्मिक चिकित्सा विभाग द्वारा विश्व ट्रॉमा दिवस के अवसर पर एक सतत् चिकित्सीय शिक्षा (CME) एवं जागरूकता कार्यक्रम का आयोजन किया गया। यह दिवस प्रतिवर्ष 17 अक्टूबर को पूरे विश्व में मनाया जाता है, जिसका उद्देश्य ट्रॉमा (आघात) की रोकथाम, शीघ्र उपचार तथा समय पर देखभाल के महत्व के प्रति जन-जागरूकता फैलाना है।

कार्यक्रम के मुख्य अतिथि के रूप में प्रो. (डॉ.) एम. सी. मिश्रा, पूर्व निदेशक, अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान (AIIMS) नई दिल्ली एवं पूर्व ट्रॉमा प्रमुख, जयप्रकाश नारायण एपेक्स ट्रॉमा सेंटर, नई दिल्ली उपस्थित रहे। उन्होंने “भारत में ट्रॉमा केयर सिस्टम का विकास और चुनौतियाँ” विषय पर व्याख्यान दिया। डॉ. मिश्रा ने अपने संबोधन में बताया कि किस प्रकार एक सुव्यवस्थित, बहु-विषयक दृष्टिकोण अपनाने से ट्रॉमा जनित मृत्यु दर और विकलांगता को काफी हद तक कम किया जा सकता है। उन्होंने इस दिशा में संस्थानों एवं चिकित्साकर्मियों की भूमिका पर भी प्रकाश डाला।

कार्यक्रम की अध्यक्षता एआईआईएमएस गोरखपुर की कार्यकारी निदेशक एवं मुख्य कार्यकारी अधिकारी मेजर जनरल (सेवानिवृत्त) विभा दत्ता ने की। उन्होंने अपने उद्बोधन में कहा कि सड़क दुर्घटनाओं की रोकथाम के लिए सामुदायिक जागरूकता एवं जिम्मेदार व्यवहार अत्यंत आवश्यक है। उन्होंने यह भी रेखांकित किया कि आघात के बाद प्रारंभिक क्षणों (गोल्डन ऑवर) में दी गई सही देखभाल जीवनरक्षक सिद्ध हो सकती है। मेजर जनरल दत्ता ने विभाग के इस प्रयास की सराहना की, जो शैक्षणिक गतिविधियों के साथ सामाजिक उत्तरदायित्व को भी जोड़ता है।

कार्यक्रम में संस्थान के संकाय सदस्य, स्नातकोत्तर एवं स्नातक छात्र, नर्सिंग अधिकारी एवं नर्सिंग छात्र-छात्राओं ने उत्साहपूर्वक भाग लिया। सत्रों में ट्रॉमा प्रबंधन, प्राथमिक जीवनरक्षक तकनीक (BLS) और गोल्डन ऑवर के महत्व पर चर्चा की गई।

कार्यक्रम का विशेष आकर्षण रहा नर्सिंग छात्रों एवं नर्सिंग अधिकारियों द्वारा प्रस्तुत नुक्कड़ नाटक, जो आपातकालीन प्रवेश द्वार के फोयर क्षेत्र में प्रस्तुत किया गया। इस नाटक में सड़क दुर्घटना की रोकथाम, आघातग्रस्त व्यक्ति की तत्काल सहायता, तथा सीपीआर (CPR) की विधियों को दर्शाया गया। यह नाटक न केवल शिक्षाप्रद रहा बल्कि आमजन में भी बड़ी रुचि का केंद्र बना। कई सामान्य नागरिकों ने भी इसमें स्वेच्छा से भाग लिया, जिससे यह कार्यक्रम एक सच्चा सामुदायिक जागरूकता अभियान बन गया।

कार्यक्रम ने शैक्षणिक ज्ञान एवं जन-जागरूकता को एक साथ जोड़ते हुए एआईआईएमएस गोरखपुर की सेवा, शिक्षा एवं समाज कल्याण की प्रतिबद्धता को पुनः पुष्ट किया।

ट्रॉमा एवं आकस्मिक चिकित्सा विभाग ने इस अवसर पर पुनः यह संदेश दिया कि —

“समय पर की गई सही कार्रवाई ही जीवन बचा सकती है।”

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