पाली ब्लॉक के ग्राम मुजौली में आयोजित लक्ष्मी नारायण महायज्ञ के अष्टम दिवस एवं कथा के सप्तम दिवस पर कथा व्यास आचार्य प्रवर श्री आलोक पांडेय जी महाराज ने सुदामा चरित्र का अत्यंत मार्मिक और भावपूर्ण वर्णन किया। उनके प्रवचन से श्रद्धालु भक्ति रस में सराबोर हो उठे।
कथा के दौरान महाराज जी ने बताया कि निर्धन ब्राह्मण सुदामा अपने बालसखा भगवान श्रीकृष्ण से मिलने द्वारिका पहुंचे। वे अपने साथ प्रेमपूर्वक चिवड़ा (पोहे) की भेंट लेकर गए थे। श्रीकृष्ण ने सुदामा को देखते ही उन्हें गले लगा लिया और बड़े ही आदर-सम्मान के साथ उनका सत्कार किया। भगवान ने बिना कुछ मांगे ही अपने मित्र सुदामा की दरिद्रता दूर कर दी। इस प्रसंग को सुनकर उपस्थित श्रद्धालु भाव-विभोर हो उठे।
उन्होंने कहा कि सुदामा चरित्र हमें सच्ची मित्रता, निष्कपट प्रेम और भगवान के प्रति अटूट विश्वास की शिक्षा देता है। सच्चे मन से की गई भक्ति और समर्पण के आगे स्वयं भगवान भी द्रवित हो जाते हैं।
इस अवसर पर यज्ञाचार्य आचार्य श्री विजयराज तिवारी जी के साथ वैदिक आचार्य हेमू जी, करण दीक्षित जी और मोहन जी द्वारा विधि-विधान से पूजन एवं हवन संपन्न कराया गया। यज्ञ स्थल पर बड़ी संख्या में श्रद्धालु उपस्थित रहे और पूरा परिसर हरिनाम संकीर्तन, भक्ति और जयघोष से गुंजायमान हो उठा।
कार्यक्रम के अंत में श्रद्धालुओं से अपील की गई कि आगामी दिन होने वाली पूर्णाहुति में अधिक से अधिक संख्या में पहुंचकर प्रसाद ग्रहण करें और धर्म लाभ प्राप्त करें।
इस अवसर पर मुनि आगमन पाण्डेय, करुणानिधान पाण्डेय, दिवाकर पाण्डेय, शुभम चतुर्वेदी, हरिमंगल सिंह, भगवती पाण्डेय, धर्मेंद्र पाण्डेय, विजय प्रताप सिंह, हनुमान त्रिपाठी, राकेश सिंह, सुधाकर पाण्डेय, ओंकार यादव सहित अनेक भक्तजन उपस्थित रहे।
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