रेल कोच फैक्ट्री में फर्जी नियुक्ति घोटाला: सेंट्रल विजिलेंस ने जांच तेज की

गोरखपुर में माडर्न कोच फैक्ट्री, रायबरेली में फर्जी नियुक्ति के मामले ने तूल पकड़ लिया है। इस प्रकरण की गंभीरता को देखते हुए सेंट्रल विजिलेंस ने जांच शुरू कर दी है। सोमवार को सेंट्रल विजिलेंस की तीन सदस्यीय टीम ने रेलवे भर्ती बोर्ड (आरआरबी) गोरखपुर के कार्यालय पर छापेमारी कर नियुक्तियों से संबंधित सभी दस्तावेज अपने कब्जे में ले लिए। इस कार्रवाई से कार्यालय में हड़कंप मच गया।

क्या है मामला?
कुछ दिनों पहले माडर्न कोच फैक्ट्री में दो अभ्यर्थियों की फर्जी नियुक्ति का मामला सामने आया था। जांच में पता चला कि ये दोनों अभ्यर्थी न तो आवेदनकर्ताओं की सूची में थे और न ही उन्होंने कोई परीक्षा दी थी। फर्जी डोजियर तैयार कर इन्हें नियुक्त किया गया था। मामले के उजागर होने के बाद दोनों की सेवाएं तत्काल बर्खास्त कर दी गईं।

रेलवे बोर्ड ने सख्त कदम उठाए
इस प्रकरण को गंभीरता से लेते हुए रेलवे बोर्ड ने गोरखपुर आरआरबी के चेयरमैन नुरुद्दीन अंसारी को तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया। साथ ही, सेंट्रल विजिलेंस द्वारा जांच का आदेश दिया गया। अब इस मामले में भर्ती प्रक्रिया में शामिल अन्य कर्मचारियों की भूमिका की भी जांच की जा रही है। यदि कोई कर्मचारी दोषी पाया गया, तो उस पर भी कड़ी कार्रवाई की जाएगी।

कैसे हुआ फर्जीवाड़ा?
26 अप्रैल 2024* को कोच फैक्ट्री के लिए एक पैनल जारी किया गया था, जिसमें सात अभ्यर्थियों के नाम शामिल थे।
स्थानीय स्तर पर इसमें दो और नाम जोड़ दिए गए।
यह नाम भर्ती बोर्ड में तैनात दो कर्मचारियों के पुत्रों के थे, जिन्होंने न तो आवेदन किया था और न ही परीक्षा दी थी।
फर्जी डोजियर तैयार कर इन नामों को पैनल में शामिल कर दिया गया।
ट्रेनिंग भी पूरी करा दी गई।

जांच जारी, दोषियों पर होगी कड़ी कार्रवाई
विजिलेंस टीम अब यह जांच कर रही है कि इन फर्जी नियुक्तियों में कौन-कौन शामिल थे। मामले में दोषी पाए जाने वाले सभी कर्मचारियों पर सख्त कार्रवाई की जाएगी। सेंट्रल विजिलेंस की छानबीन से रेलवे भर्ती प्रक्रिया की पारदर्शिता पर भी सवाल खड़े हो गए हैं।

इस घोटाले ने रेलवे की विश्वसनीयता पर गहरा असर डाला है, और अब सभी की निगाहें विजिलेंस टीम की जांच रिपोर्ट पर टिकी हैं।

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