गोरखपुर, जुलाई 2025। एम्स गोरखपुर में एक दिन के नवजात शिशु की दुर्लभ जन्मजात विकृति की सफल सर्जरी की गई, जो संस्थान के लिए एक उल्लेखनीय उपलब्धि है। यह शिशु एक निजी अस्पताल में जन्मा था, परंतु जन्म से ही उसे मल त्याग का प्राकृतिक छिद्र नहीं था , जिसे चिकित्सकीय भाषा में इम्परफोरेट एनस (Imperforate Anus) कहा जाता है। साथ ही, उसका मूत्रमार्ग अंडकोष के मध्य खुल रहा था और शिश्न छोटा व नीचे की ओर मुड़ा हुआ था, जिसे स्क्रोटल हाइपोस्पेडियस (Scrotal Hypospadias) कहा जाता है।
शिशु की स्थिति गंभीर हो रही थी क्योंकि वह मल विसर्जन नहीं कर पा रहा था और पेट फूल रहा था। बच्चे को रात 11 बजे एम्स की आपातकालीन सेवाओं में लाया गया। आर्थिक रूप से कमजोर परिजनों की सहायता हेतु एम्स ने तत्परता से कार्रवाई की। सर्जरी विभागाध्यक्ष डॉ. गौरव गुप्ता के निर्देशन में शिशु को भर्ती किया गया। नियोनेटल आईसीयू की प्रभारी डॉ. अंचला भारद्वाज ने बाल रोग विभाग की प्रमुख से समन्वय कर नवजात को एनआईसीयू में भर्ती कराया।
12 घंटे के भीतर ही आवश्यक जाँचें और प्रारंभिक चिकित्सा के पश्चात शिशु को ऑपरेशन थिएटर में ले जाया गया। 1500 ग्राम के इस नाजुक शिशु को सुरक्षित रूप से बेहोश करना अत्यंत चुनौतीपूर्ण था, जिसे एनेस्थीसिया विभाग की एसोसिएट प्रोफेसर डॉ. प्रियंका द्विवेदी की अगुवाई में विभागाध्यक्ष डॉ. संतोष कुमार शर्मा, डॉ. भूपेंद्र कुमार, डॉ. विजेता बाजपेयी और डॉ. रविशंकर की टीम ने सफलता से अंजाम दिया।
सर्जरी डॉ. गौरव गुप्ता ने अपनी टीम डॉ. धर्मेंद्र पीपल, डॉ. रजनीश कुमार, डॉ. संदीप कुमार, डॉ. ऐश्वर्या और डॉ. रज़ा के साथ मिलकर की। शिशु के पेट में एक नया मार्ग बनाते हुए कोलोस्टॉमी की गई, ताकि मल निष्कासन संभव हो सके। आगे चलकर, जब शिशु 3–4 महीने का होगा, तब इस स्थिति के लिए दूसरी चरण की सर्जरी की जाएगी।
यह सर्जरी एम्स गोरखपुर में इस प्रकार की जन्मजात विकृति की पहली सर्जरी है, जो संस्थान की नवजात देखभाल एवं सर्जिकल विशेषज्ञता का प्रमाण है।
एम्स गोरखपुर की कार्यकारी निदेशक मेजर जनरल (सेवानिवृत्त) डॉ. विभा दत्ता ने इस सफल सर्जरी के लिए डॉ. गौरव गुप्ता एवं उनकी टीम को हार्दिक बधाई दी है। साथ ही, एनेस्थीसिया एवं पीडियाट्रिक विभाग को भी नवजात की देखभाल व प्रबंधन के लिए सराहना प्रदान की है।
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