द्वापर युग की तस्वीर, कलयुग में फिर से जीवित हुई

यह कोई कंस की जेल में जन्मा देवकी-नंदन नहीं है…
यह प्रयागराज की गलियों में जन्मा एक आम शिशु है, जिसे उसके माता-पिता जलमग्न सड़कों से हाथों में उठाकर बचा रहे हैं।

बाढ़ की तबाही के बीच यह दृश्य किसी काल्पनिक कथा-सा नहीं, बल्कि हकीकत है। प्रयागराज की सड़कों पर पानी इस कदर भर चुका है कि घर, मंदिर, बाजार  सब पानी में डूबे हैं।
और इस सबके बीच, एक मजबूर माँ-बाप अपनी संतान को यूँ उठाए ले जा रहे हैं जैसे यमुना पार कराते वासुदेव — लेकिन ये नंदन किसी शाही वंश का नहीं, बल्कि आम इंसान की गोद में पल रहा है।

गंगा मैया का उफान मानो चेतावनी दे रहा हो “स्मार्ट सिटी के दावों से ऊपर, प्रकृति की शक्ति अब भी सर्वोच्च है।”

यह प्रयागराज है , वो धरती जो कभी संगम, साधना और संस्कृति की प्रतीक थी, आज जल-प्रलय का मैदान बन गई है। और द्वारका की तरह… यहाँ की ‘स्मार्ट सिटी’ योजनाएं, जल के नीचे कहीं खोती-सी महसूस हो रही हैं।

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