यूपी सरकार का ‘जीरो टॉलरेंस’ प्लान—मिलावट मिली तो सिर्फ दूध नहीं, पूरी डेयरी पर कार्रवाई; स्टॉक जब्त, यूनिट बंद, लाइसेंस निलंबित और ब्रांड की बिक्री पर भी रोक
लखनऊ। जिस दूध को हम बच्चों की सेहत, चाय और परिवार के पोषण से जोड़ते हैं…
अगर उसी दूध में मिलावट हो जाए, तो मामला सिर्फ स्वाद और गुणवत्ता का नहीं रहता—मामला सीधे जनस्वास्थ्य का बन जाता है।
इसी चिंता को देखते हुए उत्तर प्रदेश सरकार ने दूध और दुग्ध उत्पादों में मिलावट के खिलाफ कार्रवाई का दायरा और सख्त करने के निर्देश दिए हैं,लेकिन निष्पक्ष टुडे आज आपको सिर्फ सरकार का फैसला नहीं बताएगा… बल्कि सरकारी आंकड़ों के जरिए बताएगा कि खाद्य मिलावट के खिलाफ सरकारी तंत्र के सामने चुनौती कितनी बड़ी है।
📊 EXCLUSIVE DATA: सरकारी रिकॉर्ड में दर्ज हुए इतने मुकदमे
उत्तर प्रदेश विधान परिषद में खाद्य सुरक्षा एवं औषधि प्रशासन विभाग की ओर से दिए गए सरकारी जवाब के मुताबिक, 2021-22, 2022-23 और 2023-24 के दौरान असुरक्षित पाए गए खाद्य पदार्थों के नमूनों के आधार पर कई जिलों में न्यायिक न्यायालयों में मुकदमे दर्ज किए गए।
🔴 बस्ती — 72 मुकदमे
2021-22 में 16,
2022-23 में 18,
2023-24 में 38।
यानी तीन साल में 72 मुकदमे।
🔴 बहराइच — 41 मुकदमे
तीन वर्षों में कुल 41 मुकदमे दर्ज हुए।
🔴 अयोध्या — 39 मुकदमे
2021-22 में 8, 2022-23 में 17 और 2023-24 में 14—कुल 39 मुकदमे।
🔴 संतकबीरनगर — 39 मुकदमे
तीन वर्षों में कुल 39 मुकदमे न्यायिक न्यायालय में योजित किए गए।
🔴 गोंडा — 28 मुकदमे
तीन साल में कुल 28 मुकदमे दर्ज हुए।
🔴 श्रावस्ती — 24 मुकदमे
सरकारी रिकॉर्ड में तीन वर्षों के दौरान 24 मुकदमे दर्ज होने की जानकारी है।
🔴 अमेठी — 21 मुकदमे
तीन वित्तीय वर्षों में कुल 21 मुकदमे दर्ज हुए।
🔴 अंबेडकरनगर — 20 मुकदमे
सरकारी जवाब के अनुसार कुल 20 मुकदमे न्यायिक न्यायालय में योजित किए गए।
🔴 देवरिया — 19 मुकदमे
तीन साल में कुल 19 मुकदमे दर्ज हुए।
यानी सिर्फ इन 9 जिलों में ही सरकारी रिकॉर्ड के मुताबिक 308 मुकदमे असुरक्षित पाए गए खाद्य नमूनों के आधार पर दर्ज हुए।
महत्वपूर्ण: ये 308 मामले केवल दूध या दुग्ध उत्पादों के नहीं हैं, बल्कि असुरक्षित पाए गए खाद्य पदार्थों से जुड़े हैं। इसलिए इन्हें “दूध में मिलावट के 308 मामले” कहना सही नहीं होगा।
🧪 अब सवाल—दूध और पनीर में मिलावट कैसी हो रही है?
FSDA के अनुसार कुछ दुग्ध उत्पाद निर्माण इकाइयों में रिफाइंड तेल एवं वसा, सोयाबीन और उसके उत्पादों के इस्तेमाल के मामले सामने आए हैं।
जांच के दौरान टेल्कम पाउडर, डिटर्जेंट और टाइटेनियम डाइऑक्साइड जैसे पदार्थों के इस्तेमाल की पुष्टि के मामले भी सामने आए हैं।
इसके अलावा लिक्विड ग्लूकोज, सेफोलाइट, रानीपॉल, टीनोपॉल और हाइड्रोजन परॉक्साइड जैसे पदार्थों के इस्तेमाल के मामले भी विभाग ने बताए हैं।
यानी मिलावट का खेल सिर्फ दूध में पानी मिलाने तक सीमित नहीं है।
⚠️ दूध को ‘मानक’ दिखाने की कोशिश भी जांच के घेरे में
सरकारी निर्देशों के मुताबिक कुछ मामलों में दूध की गुणवत्ता को निर्धारित मानकों के अनुरूप दिखाने के लिए BR मान और RM वैल्यू को प्रभावित करने वाले पदार्थों के इस्तेमाल के मामले सामने आए।
यही वजह है कि सरकार अब सिर्फ तैयार दूध या पनीर का नमूना लेने तक सीमित नहीं रहना चाहती, बल्कि निर्माण इकाई में इस्तेमाल होने वाली सामग्री और पूरी उत्पादन प्रक्रिया को भी कार्रवाई के दायरे में ला रही है।
🚨 सरकार का नया एक्शन प्लान क्या है?
अगर किसी डेयरी या दुग्ध उत्पाद निर्माण इकाई में हानिकारक रसायन या विजातीय वसा पाई जाती है तो—
🔴 मौजूद दुग्ध उत्पाद जब्त कर नष्ट कराए जा सकेंगे।
🔴 मिलावटी उत्पाद बनाने वाली इकाई तत्काल बंद कराई जा सकेगी।
🔴 प्रतिष्ठान का फूड लाइसेंस/रजिस्ट्रेशन निलंबित किया जा सकेगा।
🔴 गंभीर मामलों में FIR दर्ज होगी।
🔴 दोषियों पर BNS की सुसंगत धाराओं में मुकदमा चलाया जाएगा।
🔴 संबंधित ब्रांड के उत्पादों की पूरे उत्तर प्रदेश में बिक्री पर रोक लगाई जा सकती है।
और अगर उत्तर प्रदेश के बाहर निर्मित किसी दुग्ध उत्पाद में भी हानिकारक रसायन या विजातीय वसा मिलती है, तो यूपी में उसकी बिक्री रोकने की कार्रवाई की जा सकती है।
🇮🇳 सरकार की भूमिका—सिर्फ कार्रवाई या लगातार निगरानी?
यहां एक और महत्वपूर्ण बात सामने आती है। FSSAI के राष्ट्रीय Milk Product Survey-2020 में 2,801 दुग्ध उत्पाद नमूनों का विश्लेषण किया गया था। इनमें 509 नमूने यानी 18.2 प्रतिशत अधिक coliform count के कारण non-compliant पाए गए थे। उत्तर प्रदेश में इस आधार पर non-compliant नमूनों का अनुपात 5.1 प्रतिशत दर्ज किया गया था।
यह 2020 का राष्ट्रीय सर्वे है, इसलिए इसे 2026 की वर्तमान स्थिति का आंकड़ा नहीं माना जाना चाहिए।
FSSAI की वेबसाइट के मुताबिक देश में दूध की गुणवत्ता की निगरानी के लिए National Milk Quality Monitoring System भी संचालित किया जा रहा है।
🎯 निष्पक्ष टुडे का विश्लेषण :-
सरकारी आंकड़े एक बात साफ करते हैं—
खाद्य सुरक्षा विभाग के सामने चुनौती छोटी नहीं है।
लेकिन अब असली परीक्षा सरकार के नए ‘जीरो टॉलरेंस’ निर्देशों की है।
क्या सिर्फ नमूने लिए जाएंगे? या… मिलावटखोर की पूरी सप्लाई चेन तक कार्रवाई पहुंचेगी?
क्या लाइसेंस निलंबित होने के बाद वही कारोबारी किसी दूसरे नाम से कारोबार शुरू कर पाएगा ?
सबसे बड़ा सवाल—
क्या मिलावटखोरों के खिलाफ कार्रवाई इतनी प्रभावी होगी कि आम आदमी को दूध, पनीर और खोया खरीदते समय अपनी सेहत को लेकर डरना न पड़े?
सरकार ने सख्त निर्देश जारी कर दिए हैं।
अब निगाहें जमीनी कार्रवाई, जब्ती, लाइसेंस निलंबन, FIR और न्यायिक कार्रवाई के वास्तविक परिणामों पर रहेंगी।
निष्पक्ष टुडे एक्सक्लूसिव में हम सरकारी आंकड़ों के साथ इस पूरी कार्रवाई पर नजर बनाए रखेंगे।
निष्पक्ष टुडे — आंकड़ों के साथ खबर, सवालों के साथ पड़ताल।
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