मदरसा नूरिया खरिया में संगोष्ठी आयोजित, युवाओं से राष्ट्रीय एकता, अखंडता और सांप्रदायिक सौहार्द को मजबूत करने की अपील
खरिया, 31 अक्टूबर 2026।
भारत के लौह पुरुष और देश के प्रथम उप-प्रधानमंत्री सरदार वल्लभभाई पटेल की जयंती एवं राष्ट्रीय एकता दिवस के अवसर पर मदरसा नूरिया खरिया के परिसर में एक विशेष संगोष्ठी का आयोजन किया गया। संगोष्ठी का विषय था— “स्वतंत्रता प्राप्ति में सरदार पटेल की भूमिका, देश की एकता-अखंडता के लिए उनका योगदान एवं समकालीन चुनौतियां।” इस अवसर पर सरदार पटेल के राष्ट्र निर्माण में दिए गए ऐतिहासिक योगदान को याद करते हुए विद्यार्थियों को राष्ट्रीय एकता और सामाजिक सद्भाव का संदेश दिया गया।
कार्यक्रम को संबोधित करते हुए मदरसा नूरिया खरिया के प्रबंधक सैयद इज़हार अहमद ने कहा कि ‘आयरन मैन ऑफ इंडिया’ सरदार वल्लभभाई पटेल ने देश की स्वतंत्रता प्राप्ति में अग्रणी भूमिका निभाई। स्वतंत्रता के बाद 562 देशी रियासतों का भारतीय संघ में एकीकरण कर उन्होंने भारत की एकता और अखंडता को मजबूत करने में ऐतिहासिक योगदान दिया। देश उनके इस राष्ट्रनिर्माण के कार्य को हमेशा याद रखेगा।
उन्होंने कहा कि सरदार पटेल एक सच्चे राष्ट्रवादी, कुशल राजनीतिज्ञ और महान देशभक्त थे। भारत के प्रथम उप-प्रधानमंत्री एवं गृह मंत्री के रूप में उन्होंने देश को एक मजबूत प्रशासनिक और राजनीतिक आधार प्रदान किया। भारतीय प्रशासनिक व्यवस्था को सुदृढ़ बनाने तथा प्रशासनिक सेवाओं के विकास में भी उनकी महत्वपूर्ण भूमिका रही।
प्रमुख हाईलाइट :-
राष्ट्रीय एकता दिवस: सरदार पटेल की जयंती पर विशेष संगोष्ठी।
562 रियासतों का एकीकरण: राष्ट्र निर्माण में सरदार पटेल की ऐतिहासिक भूमिका को किया याद।
खेड़ा सत्याग्रह: किसानों के अधिकारों के लिए उनके संघर्ष पर डाला प्रकाश।
युवाओं से अपील: राष्ट्रवाद, भाईचारे और सामाजिक समरसता को आगे बढ़ाने का संदेश।
मुस्लिम युवाओं और उलेमाओं से आह्वान: सरदार पटेल की विरासत को जन-जन तक पहुंचाने की अपील।
एकता ही सच्ची श्रद्धांजलि: सामुदायिक सौहार्द और देश की तरक्की के लिए मिलकर काम करने का संकल्प।
खेड़ा आंदोलन से स्वतंत्रता संग्राम तक रहा ऐतिहासिक योगदान :-
सैयद इज़हार अहमद ने कहा कि वर्ष 1918 का खेड़ा सत्याग्रह सरदार पटेल के सार्वजनिक जीवन की महत्वपूर्ण उपलब्धियों में से एक था। गुजरात के खेड़ा क्षेत्र में सूखे और आर्थिक संकट से जूझ रहे किसानों को लगान में राहत दिलाने के लिए उन्होंने महात्मा गांधी के साथ मिलकर आंदोलन का नेतृत्व किया। किसानों के अधिकारों के लिए उनका संघर्ष आगे चलकर स्वतंत्रता आंदोलन की एक मजबूत आवाज बना।
उन्होंने बताया कि सरदार पटेल ने अपना सफल बैरिस्टर का पेशा छोड़कर महात्मा गांधी के विचारों और सिद्धांतों से प्रेरित होकर स्वतंत्रता आंदोलन में सक्रिय भागीदारी की। भारत छोड़ो आंदोलन सहित विभिन्न आंदोलनों में उनकी भूमिका और त्याग देश के इतिहास में सदैव स्मरणीय रहेगा।
युवाओं और उलेमाओं से एकता का संदेश फैलाने की अपील
संगोष्ठी में सैयद इज़हार अहमद ने विशेष रूप से मुस्लिम युवाओं और धार्मिक उलेमाओं से अपील की कि वे सरदार पटेल के संघर्षपूर्ण जीवन, राष्ट्रवाद और देश के प्रति समर्पण से प्रेरणा लें। उनकी विरासत और विचारों को आम जनमानस तक पहुंचाएं तथा अपने समुदाय के साथ-साथ अन्य समुदायों में भी भाईचारे और आपसी सद्भाव को मजबूत करने का प्रयास करें।
उन्होंने कहा कि आज देश के सामने राष्ट्रीय एकता, सामाजिक समरसता और सामुदायिक सौहार्द को बनाए रखने की महत्वपूर्ण चुनौतियां हैं। ऐसे समय में युवाओं की जिम्मेदारी और भी बढ़ जाती है कि वे आपसी मतभेदों से ऊपर उठकर देश की तरक्की, शांति और एकता के लिए काम करें।
सच्ची श्रद्धांजलि राष्ट्र की एकता को मजबूत करना है
अपने संबोधन के अंत में उन्होंने कहा कि सरदार वल्लभभाई पटेल ने त्याग, तपस्या, राष्ट्रभक्ति और बलिदान की भावना से देश की सेवा की।
आज हमें उनके आदर्शों को केवल याद ही नहीं करना है, बल्कि उन्हें अपने जीवन में भी उतारना है। सभी समुदायों के बीच प्रेम, विश्वास और भाईचारा स्थापित करना तथा देश की उन्नति और अखंडता के लिए मिलकर काम करना ही लौह पुरुष सरदार पटेल के प्रति सच्ची श्रद्धांजलि होगी।
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