4 अगस्त 2026 की शाम पश्चिमी आकाश में शुक्र, स्पाइका और रेगुलस का सुंदर दृश्य संयोजन दिखेगा।

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खगोलीय घटना।

4 अगस्त 2026 की शाम पश्चिमी आकाश में शुक्र, स्पाइका और रेगुलस का सुंदर दृश्य संयोजन दिखेगा।

क्या है यह दृश्य संयोजन?

खगोलविद अमर पाल सिंह ने बताया कि चित्रा तारा और मघा तारा के बीच दिखाई देगा शुक्र ग्रह या कुछ यूं कहें कि 4 अगस्त, 2026 को शुक्र ग्रह की सीध में होंगे स्पाइका और रेगुलस तारे खगोलविद अमर पाल सिंह ने बताया कि सूर्यास्त के बाद पश्चिमी क्षितिज पर बनेगा मनमोहक खगोलीय दृश्य इसका नग्न आंखों से भी किया जा सकेगा अवलोकन ।

खगोलविद अमर पाल सिंह ने बताया कि स्पाइका तारा जिसे खगोल विज्ञान की भाषा में अल्फा वर्जिनिस भी कहा जाता है,यह कन्या तारामंडल का सबसे चमकीला तारा है जोकि पृथ्वी से लगभग 250 प्रकाश वर्ष की दूरी पर मौजूद है , स्पाइका एक अकेले नीले-सफेद तारे के रूप में दिखाई देता है। लेकिन स्पिका के रूप में हमें जो प्रकाश का एक बिंदु दिखाई देता है, वह वास्तव में कम से कम दो तारे हैं। इसका मतलब हुआ कि यह एक बाइनरी तारा है और इसकी चमक के मैग्नीट्यूड के कारण ही जो इसे कन्या तारामंडल का सबसे चमकीला तारा बनाती है। साथ ही यह पृथ्वी पर कहीं से भी दिखाई देने वाला 15वां सबसे चमकीला तारा माना जाता है। यह भी जानना आवश्यक है कि इसकी चमक वृश्चिक तारामंडल में स्थित एंटारेस तारे के लगभग बराबर है,इसलिए कभी-कभी प्राचीन खगोल विज्ञान में एंटारेस को 15वां और स्पिका को 16वां सबसे चमकीला तारा भी मान लिया गया है। यह मैग्नीट्यूड में परिवर्तन की प्रक्रिया के कारण होता है। अब हम बात करें रेगुलस तारे की तो पाते हैं कि रेगुलस तारा,सिंह तारामंडल का सबसे चमकीला तारा है, जिसको खगोल विज्ञान में अल्फा लियोनिस के नाम से भी जाना जाने वाला यह तारा हमारे आकाश के सबसे चमकीले तारों की सूची में 21वें स्थान पर है। इसको हिंदी भाषा में मघा तारा के नाम से भी जाना जाता है यह सूर्य के आकाशीय पथ, यानी क्रांतिवृत्त के निकट स्थित है। इसलिए पृथ्वी के उत्तरी और दक्षिणी दोनों गोलार्धों से रेगुलस तारामंडल समान रूप से स्पष्ट दिखाई देता है और रेगुलस पृथ्वी से लगभग 79 प्रकाश वर्ष की दूरी पर स्थित है।खगोलविद अमर पाल सिंह ने बताया कि उत्तरी गोलार्ध से रेगुलस वर्ष भर रात के किसी न किसी समय दिखाई देता है, सिवाय 22 अगस्त के आसपास के लगभग एक महीने को छोड़कर। साथ ही उत्तरी गोलार्ध में, रेगुलस को स्प्रिंग ट्रायंगल नामक तारामंडल बनाने वाले तीन चमकीले तारों में से एक के रूप में भी जाना जाता है एवं साथ ही उत्तरी या दक्षिणी गोलार्ध से देखने पर, रेगुलस लगभग सूर्य और चंद्रमा के पथ का अनुसरण करता है। इसलिए उत्तरी गोलार्ध में रहने वाले लोग आमतौर पर दक्षिण की ओर मुख करके रेगुलस को आकाश में अपना विस्तृत चाप बनाते हुए देखते हैं। लेकिन दक्षिणी गोलार्ध में रहने वाले लोग इसे देखने के लिए आमतौर पर उत्तर की ओर मुख करते हैं।

खगोलविद अमर पाल सिंह ने बताया कि सिंह राशि का सबसे चमकीला तारा रेगुलस जिसे सिंह का हृदय भी कहा जाता है और सिंह तारामंडल को देखने पर रेगुलस उल्टे प्रश्न चिह्न के निचले भाग में स्थित चमकीले बिंदु को दर्शाता है, जो सिंह के सिर और कंधों का आकार बनाता है। इस आकृति को हंसिया कहा जाता है साथ ही एक आसानी से पहचाने जाने वाला त्रिभुज सिंह के पिछले हिस्से और पूंछ को दर्शाता है, और डेनेबोला तारा सिंह की पूंछ को चिह्नित करता है खगोलविद अमर पाल सिंह ने बताया कि एक ख़ास बात यह भी है कि जब भी ग्रह और चंद्रमा इसके पास से गुजरते हुए प्रतीत होते हैं तो इसका मतलब हुआ कि रेगुलस एकमात्र प्रथम परिमाण का तारा है जो लगभग पूरी तरह से क्रांतिवृत्त पर स्थित है,या कुछ यूं कहें कि रेगुलस तारा ,हमारे आकाश में सूर्य, चंद्रमा और ग्रहों के पथ पर स्थित है। इसीलिए जब रेगुलस तारा दिखाई देता है, तब चंद्रमा महीने में एक बार उसके सामने से गुजरता है। कुछ वर्षों में, पृथ्वी से देखने पर चंद्रमा रेगुलस को ढक भी लेता है ,यानी उसके सामने से गुजरता है। और अभी हम रेगुलस के 20 चंद्र ग्रहणों की एक श्रृंखला में हैं, जो जुलाई 2025 से दिसंबर 2026 तक चलेगी। दिसंबर 2026 के ग्रहण के दौरान, मंगल और बृहस्पति ग्रह इसके पास में होंगे।

 

खगोलविद अमर पाल सिंह ने बताया कि ग्रह भी कभी-कभी रेगुलस के सामने से गुजरते हैं और ग्रह कभी-कभी इस तारे को ढक भी लेते हैं ,या कुछ यूं कहें कि इसके सामने से गुजर जाते हैं साथ ही रेगुलस को ढकने वाला आखिरी ग्रह शुक्र था, जिसने 7 जुलाई 1959 को यह दृश्य प्रदर्शित किया था। फिर 1 अक्टूबर 2044 को शुक्र एक बार फिर रेगुलस को ढक लेगा।

 

खगोलविद अमर पाल सिंह ने बताया कि आकाश प्रेमियों के लिए 4 अगस्त, 2026 की शाम एक आकर्षक खगोलीय दृश्य लेकर आएगी। इस दिन सूर्यास्त के बाद पश्चिमी क्षितिज पर सौर मंडल का सबसे चमकीला ग्रह शुक्र, दो प्रसिद्ध चमकदार तारों स्पाइका और रेगुलस के बीच एक सुंदर स्थिति में दिखाई देगा। यह दुर्लभ दृश्य न केवल खगोल विज्ञान के विद्यार्थियों और शोधकर्ताओं के लिए रोचक होगा, बल्कि सामान्य लोग भी इसे बिना किसी विशेष उपकरण के नग्न आंखों से ही देख सकेंगे। यदि दूरबीन या बाइनोकुलर का उपयोग किया जाए तो यह खगोलीय संयोजन और भी अधिक स्पष्ट तथा आकर्षक दिखाई देगा।

खगोलविद अमर पाल सिंह ने बताया कि इस अवसर पर सिंह तारामंडल का सबसे चमकीला तारा रेगुलस तथा कन्या तारामंडल का सबसे चमकीला तारा स्पाइका, शुक्र ग्रह के आसपास एक सुंदर ज्यामितीय दृश्य संयोजन युक्त विन्यास बनाते हुए नजर आएंगे। अपनी असाधारण चमक के कारण शुक्र ग्रह पहले ही पश्चिमी आकाश में आसानी से पहचाना जा सकेगा, जबकि उसके दृश्य संयोजन स्थित दोनों प्रमुख तारे इस दृश्य को और अधिक मनोहारी बना देंगे।

 

वीर बहादुर सिंह नक्षत्रशाला, गोरखपुर के खगोलविद अमर पाल सिंह के अनुसार, 4 अगस्त 2026 की शाम सूर्यास्त के बाद पश्चिमी क्षितिज पर यह विशेष खगोलीय संयोजन देखा जा सकेगा। उन्होंने बताया कि इस समय शुक्र ग्रह, स्पाइका और रेगुलस लगभग एक ही दिशा में दिखाई देंगे और आकाश में एक आकर्षक पैटर्न का निर्माण करेंगे। मौसम साफ रहने पर यह दृश्य काफी देर तक आसानी से देखा जा सकेगा।

 

खगोलविद अमर पाल सिंह ने बताया कि शुक्र ग्रह को पृथ्वी का जुड़वा ग्रह भी कहा जाता है। आकार और संरचना की कुछ समानताओं के कारण इसे पृथ्वी का जुड़वां माना जाता है। यही कारण है कि इसे “पृथ्वी की बहन” भी कहा जाता है। अपनी अत्यधिक चमक के कारण शुक्र ग्रह को संध्या तारा तथा भोर का तारा के नाम से भी जाना जाता है, हालांकि यह वास्तव में तारा नहीं बल्कि एक ग्रह है। वर्तमान समय में यह सूर्यास्त के बाद पश्चिमी आकाश में अत्यंत चमकीला दिखाई दे रहा है और 4 अगस्त की शाम इसकी स्थिति स्पाइका तथा रेगुलस के साथ एक विशेष दृश्य प्रस्तुत करेगी।

 

खगोलविद अमर पाल सिंह ने बताया कि स्पाइका कन्या तारामंडल का सबसे चमकीला तारा है तथा यह आकाश का 15वां सबसे चमकीला तारा माना जाता है। दूसरी ओर, सिंह तारामंडल का प्रमुख तारा रेगुलस अपने नीले-सफेद रंग और अत्यधिक तापमान के कारण विशेष पहचान रखता है। दोनों तारों की उपस्थिति के बीच चमकता हुआ शुक्र ग्रह आकाश में एक आकर्षक स्थिति युक्त विन्यास जैसा दृश्य प्रस्तुत करेगा, जो आकाश प्रेमियों के लिए विशेष आकर्षण का केंद्र बनेगा।

 

इस दौरान कितना होगा शुक्र ग्रह और चित्रा तारा एवं मघा तारा का मैग्नीट्यूड?

 

खगोलविद अमर पाल सिंह ने बताया कि बताया कि इस खगोलीय संयोजन के दौरान शुक्र ग्रह का मैग्नीट्यूड लगभग माइनस 4.14 रहेगा। वहीं स्पाइका का मैग्नीट्यूड लगभग प्लस 0.97 होगा, जबकि रेगुलस लगभग प्लस 1.40 मैग्नीट्यूड के साथ अपनी चमक बिखेरता दिखाई देगा। चमक के इन अंतर के कारण शुक्र, दोनों तारों की तुलना में कहीं अधिक तेजस्वी नजर आएगा और पश्चिमी आकाश में सबसे पहले ध्यान आकर्षित करेगा।

 

कितने बजे से कितने बजे तक और किस दिशा में नज़र आयेगा यह “दृश्य संयोजन ?

 

खगोलविद अमर पाल सिंह ने अवलोकन के समय के बारे में जानकारी देते हुए बताया कि वैसे तो यह तीनों खगोलीय पिण्ड सूर्यास्त के बाद से ही आकाश के पश्चिमी दिशा में दिखना शुरू हो जाएंगे लेकिन अगर बात करें इनके अस्त होने की तो पाते हैं कि रेगुलस तारा लगभग शाम 7:30 बजे पश्चिमी क्षितिज के नीचे चला जाएगा। इसके बाद शुक्र ग्रह लगभग रात 8:45 बजे पश्चिमी क्षितिज के नीचे अस्त हो जाएगा। वहीं स्पाइका तारा लगभग रात 10 बजे तक पश्चिमी क्षितिज पर दिखाई देता रहेगा इसके बाद पश्चिमी क्षितिज पर नीचे चला जायेगा।इसलिए इस खगोलीय घटना का सर्वोत्तम अवलोकन सूर्यास्त के तुरंत बाद से लेकर शुरुआती शाम के समय तक किया जा सकता है।

 

खगोलविद अमर पाल सिंह ने आकाश प्रेमियों से अपील की है कि यदि मौसम साफ रहे तो शहर की तेज रोशनी और प्रकाश प्रदूषण से दूर किसी खुले स्थान का चयन करें। खुले क्षितिज वाले स्थान से पश्चिम दिशा में देखने पर यह सुंदर खगोलीय दृश्य अधिक स्पष्ट रूप से दिखाई देगा। दूरबीन अथवा बाइनोकुलर की सहायता लेने पर शुक्र ग्रह और उसके आसपास स्थित दोनों चमकीले तारों का दृश्य और भी मनमोहक तथा प्रभावशाली प्रतीत होगा।

 

खगोल विज्ञान के दृष्टिकोण से ऐसे दृश्य संयोजन क्यों महत्वपूर्ण होते हैं ?

 

खगोलविद अमर पाल सिंह ने बताया कि खगोल विज्ञान के दृष्टिकोण से यह संयोजन आकाश में ग्रहों और तारों की प्रत्यक्ष स्थिति को समझने का भी एक उत्कृष्ट अवसर है। यद्यपि शुक्र, स्पाइका और रेगुलस वास्तविक अंतरिक्ष में एक-दूसरे से अत्यधिक दूर स्थित हैं, लेकिन कभी कभी पृथ्वी से देखने पर वे एक ही दिशा में दिखाई देते हैं, जिससे यह आकर्षक दृश्य बनता है। ऐसे विशेष खगोलीय संयोजन विद्यार्थियों एवं आमलोगों में अंतरिक्ष विज्ञान के प्रति रुचि बढ़ाने के साथ-साथ रात के आकाश के वैज्ञानिक अध्ययन के लिए भी प्रेरित करते हैं।

 

 

 

 

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©खगोलविद अमर पाल सिंह।

एस्ट्रोनॉमी एजुकेटर वीर बहादुर सिंह नक्षत्रशाला, (तारामण्डल) गोरखपुर, उत्तर प्रदेश, भारत।

मोबाईल नंबर:+917355546489

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