जिला अस्पताल में डीएम का छापा, अव्यवस्थाओं पर कड़ी चेतावनी

Written by

in

जिला अस्पताल में डीएम का छापा, अव्यवस्थाओं पर कड़ी चेतावनी

अगली जांच में गड़बड़ी मिली तो कार्रवाई तय”—सफाई, दवा व्यवस्था और ऑनलाइन सिस्टम पर सख्त निर्देश

गोरखपुर। जिला चिकित्सालय के औचक निरीक्षण के दौरान जिलाधिकारी दीपक मीणा का सख्त तेवर देखने को मिला। अस्पताल की व्यवस्थाओं को लेकर उन्होंने न सिर्फ कई खामियां पकड़ीं, बल्कि अधिकारियों और कर्मचारियों को स्पष्ट चेतावनी देते हुए कहा कि “अगले एक महीने बाद जब दोबारा निरीक्षण होगा, तब कोई भी कमी नहीं मिलनी चाहिए।” डीएम ने साफ शब्दों में कहा कि अस्पताल में हर व्यवस्था पारदर्शी, व्यवस्थित और ऑनलाइन होनी चाहिए, लापरवाही किसी भी स्तर पर बर्दाश्त नहीं की जाएगी।

निरीक्षण के दौरान डीएम ने जिला चिकित्सालय परिसर में संचालित दिव्यांग आयुष्मान प्रशिक्षण एवं निवारण केंद्र, डॉ ओपी सिंह ने बताया कि डिस्टिक ड्रग हाउस खोराबार मंडलीय पिपराइच में है डीएम ने आईएलआर (ILR) सिस्टम सहित विभिन्न व्यवस्थाओं की बारीकी से जांच की। उन्होंने दवा भंडारण व्यवस्था को लेकर विशेष नाराजगी जताई। निर्देश देते हुए कहा कि हर अलमारी के ऊपर स्पष्ट रूप से लिखा होना चाहिए कि उसमें कौन-कौन सी दवाएं रखी गई हैं और उनका स्थान क्या है। बिना लेबल और अव्यवस्थित तरीके से रखी दवाओं पर उन्होंने कड़ी आपत्ति जताई।

डीएम ने कहा कि अस्पताल में कौन कर्मचारी कहां बैठता है, इसकी स्पष्ट जानकारी बोर्ड पर अंकित होनी चाहिए, ताकि मरीजों और तीमारदारों को भटकना न पड़े। उन्होंने यह भी निर्देश दिया कि पूरे अस्पताल परिसर में कहीं भी कचरा दिखाई नहीं देना चाहिए। साफ-सफाई व्यवस्था को लेकर उन्होंने जिम्मेदार अधिकारियों को फटकार लगाते हुए कहा कि यह सिर्फ दिखावे के लिए नहीं, बल्कि नियमित और प्रभावी तरीके से लागू होनी चाहिए।

बायोमीट्रिक अटेंडेंस सिस्टम की भी डीएम ने मौके पर जांच की। कई स्थानों पर उपस्थिति को लेकर ढिलाई सामने आने पर उन्होंने सख्त नाराजगी जाहिर की और निर्देश दिया कि सभी कर्मचारी समय से उपस्थित रहें और बायोमीट्रिक प्रणाली का अनिवार्य रूप से पालन करें। उन्होंने कहा कि अनुपस्थित रहने या नियमों की अनदेखी करने वालों पर कड़ी कार्रवाई की जाएगी।

डीएम दीपक मीणा ने स्पष्ट किया कि अस्पताल की हर गतिविधि ऑनलाइन होनी चाहिए, ताकि पारदर्शिता बनी रहे और किसी भी प्रकार की अनियमितता की गुंजाइश न हो। उन्होंने सीएमओ कार्यालय, औषधि नियंत्रण कक्ष, इमरजेंसी वार्ड, न्यू बिल्डिंग और ओपीडी का भी गहन निरीक्षण किया। इस दौरान मरीजों से बातचीत कर उन्होंने उपचार और सुविधाओं की वास्तविक स्थिति का फीडबैक भी लिया।

निरीक्षण के दौरान कई स्थानों पर व्यवस्थाएं संतोषजनक नहीं मिलने पर डीएम ने मौके पर ही जिम्मेदार अधिकारियों को सुधार के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि अस्पताल जैसी संवेदनशील जगह पर लापरवाही किसी भी सूरत में स्वीकार नहीं की जाएगी। “यहां आने वाला हर व्यक्ति बेहतर इलाज और सम्मान की उम्मीद लेकर आता है, ऐसे में प्रशासन की जिम्मेदारी और बढ़ जाती है जिलचिकित्सालय में चल रहे निर्माण कार्यों का भी निरीक्षण कर आवश्य दिशा निर्देश दिये।

डीएम ने यह भी निर्देश दिया कि दवाओं की उपलब्धता, वितरण और स्टॉक की पूरी जानकारी ऑनलाइन अपडेट रहे। किसी भी मरीज को दवा के लिए भटकना न पड़े, यह सुनिश्चित करना अस्पताल प्रशासन की प्राथमिक जिम्मेदारी है। साथ ही, उन्होंने कहा कि आपातकालीन सेवाएं पूरी तरह सक्रिय और व्यवस्थित रहें, ताकि किसी भी आपदा या आकस्मिक स्थिति में तुरंत प्रभावी कार्रवाई की जा सके।

निरीक्षण के दौरान ज्वाइंट मजिस्ट्रेट मुकुल खंडेलवाल, मुख्य चिकित्सा अधिकारी डॉ. राजेश झा, प्रमुख चिकित्सा अधीक्षक डॉ. ओ.पी. सिंह सहित अन्य चिकित्सक और अधिकारी मौजूद रहे। डीएम के सख्त रुख के बाद अस्पताल प्रशासन में हड़कंप की स्थिति रही और तत्काल सुधार के प्रयास शुरू कर दिए गए।

कुल मिलाकर, डीएम दीपक मीणा का यह औचक निरीक्षण जिला चिकित्सालय की व्यवस्थाओं को दुरुस्त करने की दिशा में एक कड़ा संदेश माना जा रहा है। अब देखने वाली बात होगी कि एक महीने बाद होने वाले अगले निरीक्षण में अस्पताल प्रशासन इन निर्देशों पर कितना खरा उतरता है।

Comments

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

More posts