भागवत कथा में कंस वध का प्रसंग सुन श्रोता मंत्रमुग्ध हुए

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ब्यूरो प्रभारी- संतोष कुमार त्रिपाठी खजनी / गोरखपुर.

रुद्रपुर ग्राम सभा में चल रहे सातवें दिवसीय श्रीमद् भागवत कथा के समापन के दिन पहुंचे जगदगुरु शंकराचार्य स्वामी श्री अधोक्षजानंद देवतीर्थ जी महाराज गोवर्धनपीठ श्री आद्यशंकराचार्य धर्मस्थान संसद पहुंचे।

रूद्रपुर गांव में पूर्व प्रधान प्रेम शंकर मिश्रा के घर चल रही श्रीमद्भागवत कथा में हनुमान गढ़ी अयोध्या से पधारे कथा व्यास ब्रह्मांसदास ब्रह्मचारी ने कंस वध और वासुदेव एवं देवकी को कारागार मुक्त, कराने तथा महाराज उग्रसेन को पुन: राज सिंहासन पर बैठाने की कथा सुनाई।
कथा व्यास ने बताया कि कंस के अत्याचार से पृथ्वी त्राह त्राह जब करने लगी, तब लोग भगवान से गुहार लगाने लगे। तब कृष्ण अवतरित हुए। कंस को यह पता था कि उसका वध श्रीकृष्ण के हाथों ही होना निश्चित है। इसलिए उसने बाल्यावस्था में ही श्रीकृष्ण को अनेक बार मरवाने का प्रयास किया, लेकिन हर प्रयास भगवान के सामने असफल साबित होता रहा। कंस राज दरबार में अक्रूर को बुलाकर श्रीकृष्ण और बलराम को मथुरा लाने का निर्देश देता है। अक्रूर अपने साथ श्रीकृष्ण और बलराम जी को मथुरा ले आते हैं। कुवल्या पीठ नामक हांथी श्रीकृष्ण को मारने के लिए उन पर हमला करता है। श्रीकृष्ण हांथी को मार देते हैं। कंस के इशारे पर काम, क्रोध रूपी पहलवान मुष्टिक, चारूण एक साथ मिलकर कृष्ण भगवान को मारने की नीयत से आक्रामक होते ही श्रीकृष्ण-बलराम जी इन पहलवानों को मौत के घाट उतार देते हैं। कंस जैसे ही श्रीकृष्ण को मारने के लिए झपटता है तो वह उसे जमीन पर पटक कर उसका वध कर देते हैं। कंस के मरते ही मथुरावासी खुशी से झूम उठते हैं। श्रीकृष्ण जी वासुदेव और देवकी को कारागार से मुक्त करके उग्रसेन को पुन: राजगद्दी पर विराजमान कराते हैं। कथा के दौरान भारी संख्या में मौजूद श्रद्धालु प्रसंग सुन कर रोमांचित हो उठे। इस दौरान भगवान कृष्ण की मनमोहक झांकी सजाई गई।

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