श्रीमद् भागवत कथा: भगवान की बाल लीलाओं का वर्णन

त्रिभुवन दास जी महाराज ने कहा – भगवान श्रीकृष्ण ने जिन असुरों का बाल लीलाओं के दौरान वध किया वे कहीं न कहीं सार्वजनिक बुराइयों के परिचायक रहे हैं*

  1. संतकबीरनगर के भिटहा स्थित “चतुर्वेदी विला” में चल रही नौ दिवसीय श्रीमद् भागवत कथा के छठे दिन कथा व्यास त्रिभुवन दास जी महाराज ने भगवान श्रीकृष्ण की बाल लीलाओं का वर्णन किया। उन्होंने कहा कि भगवान श्रीकृष्ण ने आंख बंद करके पूतना का वध किया क्योंकि वह योगी हैं और भगवान श्रीराम ने आंख खोलकर ताड़का का उद्धार किया क्योंकि वह मर्यादा पुरुषोत्तम हैं।

कथा के मुख्य बिंदु:*

– भगवान श्रीकृष्ण ने जिन असुरों का बाल लीलाओं के दौरान वध किया वे कहीं न कहीं सार्वजनिक बुराइयों के परिचायक रहे हैं।
– आध्यात्मिक रूप से पूतना अविद्या (माया) है, शकटासुर जड़वाद, वकासुर दंभ, अघासुर पाप, धेनुकासुर देहाध्यास, कालियानाग भोगशक्तिरूप विष है।
– भगवान श्रीकृष्ण की बाल लीलाओं से हमें जीवन के महत्वपूर्ण संदेश मिलते हैं।

 

 

*अभिनंदन और आशीर्वाद:*

कथा व्यास त्रिभुवन दास जी महाराज ने जनार्दन चतुर्वेदी, जय चौबे, डा उदय प्रताप चतुर्वेदी, राकेश चतुर्वेदी, रत्नेश चतुर्वेदी, डा सत्यम चतुर्वेदी, दिव्येश और रजत को ताज स्वरूप पगड़ी पहना कर उनके यशस्वी जीवन का आशीर्वाद दिया।

*कथा में उपस्थित लोग:

गोमती चतुर्वेदी, सविता चतुर्वेदी, शिखा चतुर्वेदी, शरद त्रिपाठी, मायाराम पाठक, अभयानंद सिंह, प्रमुख प्रतिनिधि मुमताज मुमताज अहमद, अजय पांडेय, निहाल चन्द पांडेय, प्रेम प्रकाश पांडेय, नितेश द्विवेदी, आशुतोष पांडेय, दिग्विजय यादव, बृजेश चौधरी, आनंद ओझा सहित सैकड़ों लोग मौजूद रहे।

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