ठेका तो बहुत बड़ा, लेकिन सिस्टम में फेल, गुरुजी लोग परेशान
“बैंक आफ बड़ौदा के शाखा उरुवा समेत जनपद भर में पी पी ए द्वारा पी एफ एम एस से भूगतान का हाल बेहाल”
गोरखपुर। प्रदेश से लगाय जनपदों में सरकारी स्कूलों में रंगाई पुताई एवं मरम्मत हेतू आने वाले कम्पोजिट ग्रान्ट के तहत बैंक आफ बड़ौदा में स्कूलों कर खाता खोलवा दिया गया। परिषदीय स्कूलों में आये कम्पोजिट गान्ट के भुगतान हेतु पी एफ एम एस जनरेटेड प्रिन्ट पेमेन्ट एडवाईस वीआरसी से कराकर सम्बन्धित बैंक आफ बड़ौदा के शाखाओं में जमा कर दिया, लेकिन सप्ताह भर बीत गये, फिर भी भूगतान नहीं हो पाया। जब कि पी एफ एम एस के जरिये भूगतान की अन्तिम तिथि 31 मार्च है। भूगतान आये या ना आये गुरु जी लोग तो इस लिए परेशान हैं कि अपने-अपने विद्यालयों की रंगाई पोताई एवं कुछ रिपेयरिंग कार्य कराना शुरू करा दिए । पेन्ट, रंगाई पुताई करने वाले मजदूरों की मजदूरों व पेंट समेत अन्य सामानों का भूगतान दुकानदार मांगना शुरू कर दिया है। ऐसे में गुरुजी लोग परेशान हैं।
इस बाबत बैंक आफ बड़ौदा शाखा उरुवा का हाल बेहाल है। बैंक कर्मी भी कुछ कर पाने में अक्षम है। पी एफ एम एस भुगतान के खातों को ठेका जैसे व्यवस्था के तहत सिर्फ एक ही बैंक में खोलवा कर बोझ बढ़ा दिया गया, लेकिन सिस्टम में सुधार नहीं हो पाने से 31 मार्च तक की भुगतान की कवायद में कही’ फेल’ ना हो जाय। यदि फेल हुआ तो सैकड़ों गुरुजी लोगों को अपने वेतन से रकम भरना पड़ेगा।
फिलहाल सरकारी तन्त्र भुगतान की इस जटिल प्रक्रिया को जनरेट करने की जुर्रत क्यों पड़ी। वह भी भूगतान हेतु धन मार्च माह में ही क्यों भेजा जाता। वैसे तमाम सवालों के बीच सरकारी तन्त्र का यह खेल व ठेका का रूप है। परिषदीय शिक्षकों को परेशान करने जैसे पी पी ए जनरेट कराने व उसको प्रति बैंक शाखा में जमा करने हेतु बैंक दौड़ाया जाता है।
मजे की बात तो यह है कि इस मनायोजक ठेका के खेल की परंपरा व प्रक्रिया ऐसे ही रही तो करोडो रुपया कम्पोजिट मद का 31 मार्च के बाद उन्ही बादशाहों के व्यवस्था तन्न तन्त्र में वापस चला जायेगा।
चूंकि पहले तो यह बजट सीधे स्कूलों के खुले एस एम सी खातों, जो विभिन्न बैंकों में होते थे, उसमे जाता रहा है। लेकिन बड़ा तालाब बडी मछली के बाजारू रणनीति के तहत ओहदेदार आधिकारियों ने बैटिंग कर सरकार को गुमराह किया और प्रदेश भर के परिषदीय स्कूलों का एस एम सी का खाता बैंक आफ बडौदा में खोलवा कर बड़ा खेल खेलते हुए शिक्षकों पर दबाव बनाने व स्कूल छोड़ कर वीआरसी बैंक का चक्कर लगाने की जुगत में दे डाला गया है, जिसके नाते स्कूल के बच्चों का पठन-पाठन भी डिस्टर्ब या कराने की सोच दिखाई देती है।
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