Category: उत्तर प्रदेश

  • शिक्षक हितों के संकल्प के साथ ध्रुव कुमार त्रिपाठी ने दाखिल किया नामांकन

    शिक्षक हितों के संकल्प के साथ ध्रुव कुमार त्रिपाठी ने दाखिल किया नामांकन

    गोरखपुर ब्यूरो / निष्पक्ष टुडे

    गोरखपुर–फैज़ाबाद (अयोध्या) खंड शिक्षक निर्वाचन क्षेत्र से भाजपा प्रत्याशी के नामांकन में दिखा उत्साह, शिक्षक सम्मान और अधिकारों को बनाया अभियान का प्रमुख मुद्दा


    गोरखपुर। गोरखपुर–फैज़ाबाद (अयोध्या) खंड शिक्षक निर्वाचन क्षेत्र की चुनावी सरगर्मी के बीच आज भाजपा प्रत्याशी ध्रुव कुमार त्रिपाठी ने अपना नामांकन दाखिल किया।

    नामांकन के दौरान शिक्षक प्रतिनिधियों, जनप्रतिनिधियों, भाजपा पदाधिकारियों और कार्यकर्ताओं की मौजूदगी से माहौल में खासा उत्साह नजर आया।

    नामांकन के बाद ध्रुव कुमार त्रिपाठी ने शिक्षक समाज के प्रति अपने जुड़ाव और जिम्मेदारी को रेखांकित करते हुए कहा कि यह चुनाव उनके लिए महज एक राजनीतिक प्रक्रिया नहीं, बल्कि शिक्षकों के सम्मान, अधिकार, स्वाभिमान और हितों की आवाज को मजबूती देने का अवसर है।

    शिक्षक हित को बनाया अभियान का केंद्र –

    ध्रुव कुमार त्रिपाठी ने शिक्षक समाज की समस्याओं को प्रभावी ढंग से उठाने और उन्हें सदन तक पहुंचाने की प्रतिबद्धता जताई।

    उन्होंने कहा कि शिक्षक केवल शिक्षा देने वाला वर्ग नहीं, बल्कि समाज और राष्ट्र के निर्माण की महत्वपूर्ण आधारशिला है। इसलिए शिक्षकों से जुड़े सेवा संबंधी विषयों, अधिकारों, सम्मान और उनकी व्यावहारिक समस्याओं पर गंभीरता से काम किए जाने की आवश्यकता है।

    उनके संदेश का मूल भाव रहा—

    “शिक्षक हित सर्वोपरि—सेवा ही मेरा संकल्प।”

    17 जिलों के शिक्षक परिवारों का जताया आभार 

    नामांकन के अवसर पर ध्रुव कुमार त्रिपाठी ने गोरखपुर–फैज़ाबाद (अयोध्या) खंड शिक्षक निर्वाचन क्षेत्र के विभिन्न जनपदों के शिक्षक परिवारों से मिले स्नेह और समर्थन के लिए आभार व्यक्त किया।

    उन्होंने गोरखपुर, महराजगंज, देवरिया, कुशीनगर, बस्ती, संतकबीरनगर, सिद्धार्थनगर, आजमगढ़, मऊ, बलरामपुर, अमेठी, सुल्तानपुर, अंबेडकरनगर, अयोध्या, श्रावस्ती, गोंडा और बहराइच के शिक्षकों का विशेष रूप से उल्लेख किया।

    उन्होंने कहा कि इतने व्यापक भौगोलिक क्षेत्र में शिक्षक समाज से निरंतर संवाद और उनकी समस्याओं को समझना उनकी प्राथमिकता रही है।

    नामांकन में दिखी भाजपा की ताकत –

    नामांकन कार्यक्रम के दौरान आयोजित जनसभा में उत्तर प्रदेश सरकार के कैबिनेट मंत्री स्वतंत्र देव सिंह, कैबिनेट मंत्री ए.के. शर्मा, भाजपा प्रदेश उपाध्यक्ष डॉ. धर्मेंद्र सिंह सहित वरिष्ठ जनप्रतिनिधि, पार्टी पदाधिकारी और कार्यकर्ता मौजूद रहे।

    कार्यक्रम में शिक्षक समाज की भूमिका और शिक्षा से जुड़े विभिन्न विषयों पर चर्चा हुई। वक्ताओं ने शिक्षक हितों को प्राथमिकता देने की बात रखते हुए ध्रुव कुमार त्रिपाठी के समर्थन में मतदान की अपील की।

    “आपका विश्वास मेरी शक्ति है…”

    नामांकन के बाद ध्रुव कुमार त्रिपाठी ने शिक्षक समाज के विश्वास को अपनी सबसे बड़ी जिम्मेदारी बताते हुए कहा—

    “आपका विश्वास मेरी शक्ति है, आपका आशीर्वाद मेरी पूंजी है और शिक्षक समाज की सेवा मेरा संकल्प है।”

    उन्होंने नामांकन कार्यक्रम को सफल बनाने में सहयोग करने वाले शिक्षकों, जनप्रतिनिधियों, भाजपा पदाधिकारियों और कार्यकर्ताओं के प्रति आभार जताया।

    अब चुनावी मुकाबले की तस्वीर होगी और दिलचस्प –

    नामांकन के साथ ही गोरखपुर–फैज़ाबाद (अयोध्या) खंड शिक्षक निर्वाचन क्षेत्र में चुनावी गतिविधियां और तेज होने की संभावना है। आने वाले दिनों में प्रत्याशियों के शिक्षक मतदाताओं से संपर्क, क्षेत्रीय दौरे और शिक्षक हितों से जुड़े मुद्दों पर संवाद चुनावी अभियान के केंद्र में रहने की उम्मीद है।

    विस्तृत निर्वाचन क्षेत्र और बड़ी संख्या में जुड़े जनपदों के कारण यह मुकाबला केवल नामांकन तक सीमित नहीं रहेगा। अब असली चुनौती होगी—शिक्षक मतदाताओं के बीच अपनी प्राथमिकताओं और एजेंडे को प्रभावी ढंग से पहुंचाना।

    महत्वपूर्ण बिंदु –

    • ध्रुव कुमार त्रिपाठी ने भाजपा प्रत्याशी के रूप में नामांकन दाखिल किया।
    • नामांकन में शिक्षक प्रतिनिधियों और भाजपा कार्यकर्ताओं की मौजूदगी रही।
    • वरिष्ठ भाजपा नेता एवं प्रदेश सरकार के मंत्री कार्यक्रम में शामिल हुए।
    • शिक्षक सम्मान, अधिकार और हितों को प्रमुख मुद्दा बनाया गया।
    • 17 जनपदों के शिक्षक परिवारों के प्रति आभार जताया गया।
    • शिक्षक समाज की समस्याओं को सदन तक पहुंचाने का संकल्प दोहराया गया।

    नामांकन के साथ ध्रुव कुमार त्रिपाठी ने अपने चुनावी अभियान का संदेश स्पष्ट कर दिया है—शिक्षक हित, सम्मान और सेवा। अब निगाहें इस बात पर रहेंगी कि आने वाले दिनों में वह शिक्षक मतदाताओं के बीच अपने इस संकल्प को किस तरह प्रभावी चुनावी अभियान में बदलते हैं और शिक्षक समाज के सामने उनकी प्राथमिकताएं किस रूप में सामने आती हैं।

  • सेस्टोबॉल राज्य चैंपियनशिप में गोरखपुर ने जीता रजत पदक

    सेस्टोबॉल राज्य चैंपियनशिप में गोरखपुर ने जीता रजत पदक

    गोरखपुर/मथुरा/स्पोर्ट डेस्क निष्पक्ष टुडे :-

    शानदार प्रदर्शन के साथ फाइनल तक पहुंची गोरखपुर की टीम, कप्तान शुभ्रांशु राय बने ‘बेस्ट डिफेंडर’


    मथुरा। मथुरा में 2 से 4 अक्टूबर तक आयोजित सेस्टोबॉल राज्य चैंपियनशिप में गोरखपुर की टीम ने शानदार प्रदर्शन करते हुए रजत पदक अपने नाम किया। प्रदेश की विभिन्न टीमों के बीच हुए इस मुकाबले में गोरखपुर के खिलाड़ियों ने खेल कौशल, अनुशासन और बेहतरीन टीमवर्क का प्रदर्शन किया।

     महत्वपूर्ण बिंदु

    • 🥈 गोरखपुर ने जीता रजत पदक
    • 🏆 टीम ने शानदार प्रदर्शन करते हुए फाइनल तक का सफर तय किया
    • ⭐ कप्तान शुभ्रांशु राय को ‘बेस्ट डिफेंडर’ का पुरस्कार
    • 👥 टीम में कुल 13 खिलाड़ियों ने हिस्सा लिया
    • 🎯 टीम का मार्गदर्शन कोच सोराब अहमद ने किया
    • 💪 टीम की सफलता में टीमवर्क, निरंतर अभ्यास और रणनीति की अहम भूमिका रही

    फाइनल तक दमदार प्रदर्शन –

    गोरखपुर की टीम ने प्रतियोगिता के दौरान लगातार बेहतर प्रदर्शन किया और अपनी मजबूत खेल रणनीति के दम पर फाइनल में जगह बनाई। खिलाड़ियों ने मैदान पर अनुशासन और टीम भावना का परिचय देते हुए मुकाबलों में प्रभावशाली प्रदर्शन किया।

    गोरखपुर टीम में शुभ्रांशु राय, श्रेय, शिवम, आदित्य, अतुल, अतुल शर्मा, आयुष्मान, अयान, वीर, नवोदित, ओजस, आयुष और शुभ शामिल रहे।

    शुभ्रांशु राय बने ‘बेस्ट डिफेंडर’-

    टीम के कप्तान शुभ्रांशु राय को उनके शानदार रक्षात्मक प्रदर्शन के लिए प्रतियोगिता में ‘बेस्ट डिफेंडर’ के पुरस्कार से सम्मानित किया गया। उनके प्रदर्शन ने गोरखपुर की टीम को मजबूती देने में अहम भूमिका निभाई।

    कोच सोराब अहमद के मार्गदर्शन में शानदार प्रदर्शन –

    गोरखपुर टीम का मार्गदर्शन कोच सोराब अहमद ने किया। उनके प्रशिक्षण, रणनीति और मार्गदर्शन में खिलाड़ियों ने पूरे टूर्नामेंट के दौरान अनुशासित और प्रभावशाली खेल का प्रदर्शन किया।

    गोरखपुर के खिलाड़ियों में खुशी –

    टीम के रजत पदक जीतने और शुभ्रांशु राय को सर्वश्रेष्ठ डिफेंडर का पुरस्कार मिलने से खिलाड़ियों, कोच और खेलप्रेमियों में खुशी का माहौल है। खिलाड़ियों ने अपनी सफलता का श्रेय टीमवर्क, लगातार अभ्यास और कोच के मार्गदर्शन को दिया।

    गोरखपुर की यह उपलब्धि न सिर्फ खिलाड़ियों के लिए गौरव का विषय है, बल्कि इससे जिले में सेस्टोबॉल खेल को बढ़ावा देने और युवा खिलाड़ियों को राज्य स्तर पर बेहतर प्रदर्शन के लिए प्रेरित करने की उम्मीद भी बढ़ी है।

    निष्पक्ष टुडे | खेल समाचार

  • भारतीय योग संस्थान का भव्य वार्षिक उत्सव, योग-संस्कृति के रंग में रंगा गोरखपुर

    भारतीय योग संस्थान का भव्य वार्षिक उत्सव, योग-संस्कृति के रंग में रंगा गोरखपुर

    गोरखपुर ब्यूरो निष्पक्ष टुडे :-

    9 वर्ष की गोरखपुर यात्रा और संस्थान के 60 वर्ष पूरे होने पर हुआ विशेष आयोजन, श्रीकृष्ण-सुदामा मिलन ने मोहा मन


    गोरखपुर। भारतीय योग संस्थान द्वारा गोरखपुर में 9 वर्ष पूर्ण होने और संस्थान के 60 वर्ष पूरे होने के उपलक्ष्य में भव्य वार्षिक उत्सव का आयोजन किया गया। रैम्पस स्कूल, साहपुर थाना के पास आयोजित कार्यक्रम में विभिन्न योग केंद्रों से आए साधक-साधिकाओं ने उत्साहपूर्वक सहभागिता की।

    कार्यक्रम में योग के साथ दिखी भारतीय संस्कृति की झलक

    वार्षिक उत्सव के दौरान विभिन्न केंद्रों के साधक-साधिकाओं ने योग प्रदर्शन, सांस्कृतिक प्रस्तुतियां और प्रेरणादायक नाट्य मंचन प्रस्तुत किए। कार्यक्रम में योग के माध्यम से स्वस्थ जीवनशैली के साथ भारतीय संस्कृति, संस्कार, अनुशासन और सामाजिक समरसता का संदेश दिया गया।

    श्रीकृष्ण-सुदामा मिलन बना विशेष आकर्षण

    कार्यक्रम का प्रमुख आकर्षण श्रीकृष्ण-सुदामा मिलन की भावपूर्ण प्रस्तुति रही। मित्रता, प्रेम, समानता और आत्मीयता का संदेश देने वाली इस प्रस्तुति ने उपस्थित लोगों को भाव-विभोर कर दिया।

     

    इनकी रही गरिमामयी उपस्थिति

    कार्यक्रम में भारतीय योग संस्थान गोरखपुर की जिला प्रमुख श्रीमती कविता भाटिया, क्षेत्रीय मंत्री, संगठन मंत्री एवं संस्थान के अन्य पदाधिकारियों की गरिमामयी उपस्थिति रही।

    वहीं मुख्य अतिथि डॉ. धर्मेंद्र कुमार राय एवं डॉ. भूपेंद्र कुमार भाटिया ने भी कार्यक्रम में सहभागिता की।

    सफल आयोजन के लिए जताया आभार

    भारतीय योग संस्थान गोरखपुर की ओर से सभी अतिथियों, पदाधिकारियों, प्रशिक्षकों, विभिन्न केंद्रों से आए साधक-साधिकाओं और आयोजन में सहयोग करने वाले सभी लोगों के प्रति हार्दिक आभार एवं धन्यवाद व्यक्त किया गया।

    संस्थान की ओर से कहा गया कि सभी के सहयोग, अनुशासन और सक्रिय सहभागिता के कारण यह वार्षिक उत्सव सफल और यादगार बन सका।

    IMPORTANT POINTS

    • गोरखपुर में भारतीय योग संस्थान का 9वां वार्षिक उत्सव
    • भारतीय योग संस्थान के 60 वर्ष पूरे होने पर विशेष आयोजन
    • योग प्रदर्शन और सांस्कृतिक कार्यक्रमों ने बढ़ाई आयोजन की भव्यता
    • श्रीकृष्ण-सुदामा मिलन की प्रस्तुति रही मुख्य आकर्षण
    • योग के साथ भारतीय संस्कृति और सामाजिक समरसता का संदेश
    • जिला प्रमुख कविता भाटिया सहित पदाधिकारियों की मौजूदगी
    • मुख्य अतिथि डॉ. धर्मेंद्र कुमार राय और डॉ. भूपेंद्र कुमार भाटिया रहे मौजूद
    • सफल आयोजन के लिए सभी सहयोगियों के प्रति जताया आभार

    — भारतीय योग संस्थान, गोरखपुर

  • धनंजय सिंह के पक्ष में हाईकोर्ट के फैसले की उम्मीद, समर्थकों में खुशी की लहर

    धनंजय सिंह के पक्ष में हाईकोर्ट के फैसले की उम्मीद, समर्थकों में खुशी की लहर

    नेशनल डेस्क निष्पक्ष टुडे :-

    मल्हनी की सियासत में बढ़ी हलचल, हाईकोर्ट के आदेश और आगामी राजनीतिक समीकरणों पर टिकी नजर


    जौनपुर। पूर्व सांसद धनंजय सिंह से जुड़ी बड़ी राजनीतिक और कानूनी खबर सामने आ रही है। जौनपुर कोर्ट से मिली सजा के खिलाफ हाईकोर्ट में चल रही कानूनी प्रक्रिया को लेकर उनके पक्ष में फैसला आने की चर्चाएं तेज हो गई हैं।

    क्या है मामला ?

    जौनपुर कोर्ट के फैसले के खिलाफ हाईकोर्ट में कानूनी प्रक्रिया चल रही है।

    सूत्रों के हवाले से धनंजय सिंह के पक्ष में फैसला आने की उम्मीद जताई जा रही है।

    हालांकि, हाईकोर्ट का आधिकारिक आदेश आने तक इसे अंतिम फैसला नहीं माना जा सकता।

    समर्थकों में उत्साह –

    संभावित फैसले की चर्चाओं के बीच धनंजय सिंह के समर्थकों में खुशी और उत्साह का माहौल बताया जा रहा है। समर्थकों की नजर अब हाईकोर्ट के आधिकारिक आदेश पर टिकी है।

    मल्हनी चुनाव को लेकर बढ़ी चर्चा –

    इसी बीच मल्हनी विधानसभा सीट से धनंजय सिंह के चुनाव मैदान में उतरने की चर्चाएं भी तेज हो गई हैं। राजनीतिक गलियारों में इसे लेकर तरह-तरह के कयास लगाए जा रहे हैं।
    गठबंधन के नेताओं से संपर्क?

    सूत्रों के अनुसार, राजनीतिक स्तर पर भाजपा गठबंधन के विभिन्न दलों के नेताओं से मुलाकात और संपर्क का सिलसिला जारी होने की चर्चा है। हालांकि, इस संबंध में किसी औपचारिक राजनीतिक घोषणा की पुष्टि सामने नहीं आई है।

    अब नजर हाईकोर्ट के आदेश पर –

    फिलहाल जौनपुर की राजनीति में सबसे बड़ा सवाल यही है—क्या हाईकोर्ट का फैसला धनंजय सिंह के पक्ष में आता है? अगर ऐसा होता है तो मल्हनी की चुनावी राजनीति और राजनीतिक समीकरणों पर इसका क्या असर पड़ेगा?

    मल्हनी की सियासत में हलचल बढ़ चुकी है और अब सबकी नजर हाईकोर्ट के आधिकारिक फैसले तथा आने वाले राजनीतिक घटनाक्रम पर है।

  • गोरखपुर और देवरिया में फिर सजेगी डांडिया की महफिल, ‘डांडिया महोत्सव 2026’ का भव्य आयोजन

    गोरखपुर और देवरिया में फिर सजेगी डांडिया की महफिल, ‘डांडिया महोत्सव 2026’ का भव्य आयोजन

    गोरखपुर ब्यूरो निष्पक्ष टुडे :-

    ARG Events एवं Praloveshi के संयुक्त तत्वावधान में आयोजित होगा सीजन-4; देवरिया और गोरखपुर में 16 से 20 अक्टूबर तक रंगारंग कार्यक्रम, संगीत, डांस, पुरस्कार और मनोरंजन का होगा संगम।


    गोरखपुर/देवरिया नवरात्रि के पावन अवसर पर इस वर्ष भी पूर्वांचल के लोगों के लिए ‘डांडिया महोत्सव 2026’ का भव्य आयोजन किया जा रहा है। ARG Events एवं Praloveshi के संयुक्त तत्वावधान में आयोजित होने वाला यह महोत्सव अपने चौथे सीजन में प्रवेश कर रहा है।

    आयोजन का उद्देश्य लोगों को सांस्कृतिक विरासत, संगीत और उत्सव की परंपरा से जोड़ना है।

    आयोजकों के अनुसार, कार्यक्रम का शुभारंभ 16 और 17 अक्टूबर को महाराजा अग्रसेन कॉलेज ऑफ कॉमर्स, देवरिया में होगा। इसके बाद 18 अक्टूबर को नारायणी ब्लॉसम रिजॉर्ट, मेडिकल रोड, गुलरिहा, गोरखपुर में डांडिया नाइट आयोजित की जाएगी। वहीं, 19 और 20 अक्टूबर को न्यू गोल्डेन मैरिज लॉन, कैलाशपुरी कॉलोनी, सिंघड़िया, कुड़ाघाट, गोरखपुर में कार्यक्रम का आयोजन किया जाएगा।

    इस आयोजन में प्रतिभागियों के लिए लाइव म्यूजिक, डांस, फूड स्टॉल, पंजाबी ढोल, लकी ड्रॉ और आकर्षक पुरस्कारों की व्यवस्था की गई है। आयोजकों ने बताया कि कार्यक्रम में प्रवेश के लिए आधार कार्ड लाना अनिवार्य होगा।


    Special Media Partner

    मीडिया पार्टनर निष्पक्ष टुडे पर हर प्रोग्राम की जानकारी मिलती रहेगी ।


    बुकिंग पार्टनर के रूप में BookMyShow जुड़ा हुआ है, जबकि विभिन्न संस्थान और मीडिया साझेदार भी आयोजन में सहयोग कर रहे हैं। आयोजकों का दावा है कि यह डांडिया महोत्सव पूर्वांचल के सबसे बड़े सांस्कृतिक आयोजनों में से एक होगा।

    महत्वपूर्ण बिंदु:

    🔹 16-17 अक्टूबर: महाराजा अग्रसेन कॉलेज ऑफ कॉमर्स, देवरिया
    🔹 18 अक्टूबर: नारायणी ब्लॉसम रिजॉर्ट, मेडिकल रोड, गुलरिहा, गोरखपुर
    🔹 19-20 अक्टूबर: न्यू गोल्डेन मैरिज लॉन, कैलाशपुरी कॉलोनी, सिंघड़िया, कुड़ाघाट, गोरखपुर
    🔹 आकर्षण: डांडिया, लाइव म्यूजिक, पंजाबी ढोल, फूड स्टॉल, लकी ड्रॉ व पुरस्कार
    🔹 प्रवेश हेतु: आधार कार्ड अनिवार्य
    🔹 बुकिंग: BookMyShow के माध्यम से उपलब्ध।

  • राम नगीना साहनी प्रकरण पर निषाद पार्टी की प्रतिक्रिया राम नगीना साहनी प्रकरण पर निषाद पार्टी ने जताई नाराजगी

    राम नगीना साहनी प्रकरण पर निषाद पार्टी की प्रतिक्रिया राम नगीना साहनी प्रकरण पर निषाद पार्टी ने जताई नाराजगी

    गोरखपुर ब्यूरो निष्पक्ष टुडे :-

    घटना को बताया दुर्भाग्यपूर्ण, दोषियों पर कार्रवाई की मांग; कार्रवाई न होने पर लखनऊ में लोकतांत्रिक घेराव की चेतावनी


    राम नगीना साहनी जी के साथ हुई घटना को लेकर निषाद समाज और निषाद पार्टी की ओर से कड़ी प्रतिक्रिया सामने आई है। निषाद पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष एवं कैबिनेट मंत्री डॉ. संजय कुमार निषाद के कथन का समर्थन करते हुए कहा गया है कि उनके साथ हुई घटना अत्यंत दुर्भाग्यपूर्ण और निंदनीय है।

    क्या कहा गया?

    बयान में आरोप लगाया गया है कि इस घटना में समाजवादी पार्टी से जुड़े लोग शामिल थे। इसे लेकर समाजवादी पार्टी के राजनीतिक व्यवहार और सोच पर सवाल उठाए गए हैं।

    बयान में यह भी कहा गया है कि इस घटना से यह चिंता पैदा होती है कि यदि समाजवादी पार्टी सत्ता में आती है, तो निषाद समाज के साथ उसका व्यवहार कैसा होगा।

    अखिलेश यादव से स्पष्ट रुख की मांग

    निषाद पार्टी की ओर से समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव से इस मामले पर स्पष्ट और आधिकारिक रुख सामने रखने की मांग की गई है।

    साथ ही, घटना के लिए जिम्मेदार बताए जा रहे लोगों के खिलाफ कार्रवाई की मांग की गई है।
    लखनऊ कार्यालय के घेराव की चेतावनी
    बयान में कहा गया है कि यदि मामले में स्पष्ट कार्रवाई नहीं होती है, तो निषाद पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष डॉ. संजय कुमार निषाद के नेतृत्व में लोकतांत्रिक तरीके से समाजवादी पार्टी के लखनऊ स्थित कार्यालय का घेराव किया जाएगा।

    निषाद समाज के सम्मान का मुद्दा –

    बयान में स्पष्ट किया गया है कि निषाद समाज के सम्मान और अधिकारों के साथ किसी भी प्रकार के अन्याय को स्वीकार नहीं किया जाएगा।
    अब सवाल यह है कि राम नगीना साहनी प्रकरण पर समाजवादी पार्टी नेतृत्व की ओर से क्या आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने आती है और मामले में क्या कार्रवाई होती है?

  • गोरखपुर अग्निकांड: तारपीन तेल गोदाम की आग में जिंदा जला मजदूर, मलबे से मिला कंकाल बना शव

    गोरखपुर अग्निकांड: तारपीन तेल गोदाम की आग में जिंदा जला मजदूर, मलबे से मिला कंकाल बना शव

    सूर्य प्रकाश ओझा/गोरखपुर /निष्पक्ष टुडे :-

    मोहनलालपुर में सोमवार को लगी थी भीषण आग, मंगलवार को गोदाम खोलने पर हुआ दर्दनाक खुलासा; जांच में जुटी पुलिस


    गोरखपुर।तिवारीपुर थाना क्षेत्र के मोहनलालपुर में सोमवार शाम फिनायल और तारपीन तेल के गोदाम में लगी भीषण आग ने एक बेकसूर मजदूर की जान ले ली। सोमवार की रात जिस आग को बुझा हुआ मान लिया गया था, मंगलवार सुबह जब उस जले हुए गोदाम को दोबारा खोला गया, तो अंदर का खौफनाक मंजर देखकर हर कोई दहल उठा। गोदाम के भीतर एक मजदूर का पूरी तरह से जला हुआ शव बरामद हुआ है। मृतक की पहचान भोला उर्फ रामबदन (27 वर्ष) के रूप में हुई है, जो घटना के बाद से ही लापता था। पुलिस ने शव को कब्जे में लेकर पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया है।

    सोमवार शाम को भड़की थी भीषण आग मची थीअफरा-तफरी –

    जानकारी के अनुसार-
    मोहनलालपुर निवासी कृष्णा गुप्ता (पुत्र स्व. रामेश्वर प्रसाद) के फिनायल और तारपीन तेल के गोदाम में सोमवार (28 सितंबर) की शाम अचानक संदिग्ध परिस्थितियों में आग लग गई थी। गोदाम के अंदर अत्यधिक ज्वलनशील केमिकल और तेल होने के कारण आग ने चंद मिनटों में ही विकराल रूप धारण कर लिया था। आसमान में उठतीं आग की ऊंची लपटें और काले धुएं के गुबार को देखकर पूरे इलाके में हड़कंप मच गया था। सूचना पर पहुंची तिवारीपुर पुलिस और दमकल विभाग की कई गाड़ियों ने भारी मशक्कत के बाद आसपास के घरों को खाली कराया और आग पर काबू पाया था।

    परिजनों की सूचना पर मंगलवार को खुला गोदाम, तो सामने आई सच्चाई

    सोमवार की रात राहत कार्य खत्म होने के बाद गोदाम को बंद कर सुरक्षित कर दिया गया था। मंगलवार सुबह महराजगंज जिले के सिंदुरिया थाना अंतर्गत ग्राम मुजहना बुजुर्ग से आए परिजनों ने पुलिस को सूचना दी कि उनका 27 वर्षीय बेटा भोला उर्फ रामबदन, जो इस गोदाम में मजदूरी करता था, सोमवार शाम से ही लापता है और उसका मोबाइल भी बंद आ रहा है। अनहोनी की आशंका होने पर पुलिस ने आनन-फानन में जले हुए गोदाम को दोबारा खुलवाया। मलबे के बीच तलाशी के दौरान अंदर एक व्यक्ति का पूरी तरह कोयला बन चुका शव बरामद हुआ।

    पोस्टमार्टम रिपोर्ट से साफ होगी मौत की असली वजह –

    शव इस कदर जल चुका था कि मौके पर शिनाख्त करना भी बेहद मुश्किल था, लेकिन कपड़ों और अन्य परिस्थितियों के आधार पर उसकी पहचान भोला के रूप में की गई। पुलिस अधिकारियों के मुताबिक, प्रथम दृष्टया मामला आग में फंसकर दम घुटने और जिंदा जलने का लग रहा है। हालांकि, मौत की सही वजह और समय का पता लगाने के लिए शव को पोस्टमार्टम के लिए भेजा गया है।

    पुलिस फॉरेंसिक टीम की मदद से घटनास्थल से साक्ष्य जुटा रही है और यह भी जांच की जा रही है कि गोदाम में सुरक्षा मानकों का पालन किया जा रहा था या नहीं।

  • BIG NEWS | पूर्व IAS दिव्या मित्तल का बड़ा ऐलान: उत्तर प्रदेश से करेंगी राजनीति की शुरुआत, किसी पार्टी का नहीं लेंगी सहारा!

    BIG NEWS | पूर्व IAS दिव्या मित्तल का बड़ा ऐलान: उत्तर प्रदेश से करेंगी राजनीति की शुरुआत, किसी पार्टी का नहीं लेंगी सहारा!

    नई दिल्ली/लखनऊ /अनुराग त्रिपाठी | निष्पक्ष टुडे :-

     13 साल की प्रशासनिक सेवा छोड़कर राजनीति की राह पर दिव्या मित्तल! सोशल मीडिया पर वीडियो जारी कर किया भविष्य का खुलासा, बोलीं—किसी दल के साथ नहीं, अकेले चलूंगी।


    उत्तर प्रदेश की पूर्व आईएएस अधिकारी दिव्या मित्तल ने अपने राजनीतिक भविष्य को लेकर चल रही अटकलों पर विराम लगा दिया है। मंगलवार सुबह सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर करीब 10 मिनट का वीडियो जारी कर उन्होंने राजनीति में कदम रखने की घोषणा की।

    दिव्या मित्तल ने स्पष्ट किया कि वह उत्तर प्रदेश से अपनी राजनीतिक यात्रा शुरू करेंगी और फिलहाल किसी भी राजनीतिक दल का हिस्सा नहीं बनेंगी।

    करीब 13 वर्षों तक प्रशासनिक सेवा में महत्वपूर्ण जिम्मेदारियां निभाने के बाद अब वह राजनीति के जरिए जनता के बीच अपनी नई पारी शुरू करने जा रही हैं।

    खबर की 5  बड़ी बातें –

    1. जनीति में एंट्री का ऐलान

      पूर्व आईएएस दिव्या मित्तल ने वीडियो जारी कर अपने राजनीतिक भविष्य का खुलासा किया।

    2. उत्तर प्रदेश से शुरू होगा राजनीतिक सफर

    उन्होंने यूपी से अपनी राजनीतिक यात्रा शुरू करने की घोषणा की है।

    3.किसी राजनीतिक दल का साथ नहीं

    दिव्या मित्तल ने स्वतंत्र रूप से राजनीति में आगे बढ़ने का फैसला किया है।

    4.जनता से सीधे जुड़ने की पहल

    अपने शुभचिंतकों और समर्थकों से व्हाट्सऐप के जरिए संपर्क करने की अपील की।

    5-13 वर्षों की प्रशासनिक सेवा को अलविदा

    30 अगस्त को इस्तीफे की घोषणा की थी, जिसे 15 सितंबर 2026 को स्वीकार कर लिया गया।

    किसी पार्टी के साथ नहीं, अकेले चलूंगी!-

    दिव्या मित्तल ने अपने वीडियो संदेश में साफ कर दिया है कि वह किसी राजनीतिक पार्टी में शामिल होकर अपने राजनीतिक सफर की शुरुआत नहीं करेंगी।
    उन्होंने कहा, “किसी भी पार्टी या फिर दल के साथ नहीं, बल्कि अकेले चलूंगी।”
    उनकी इस घोषणा के बाद उत्तर प्रदेश की राजनीति में उनकी संभावित भूमिका को लेकर चर्चाएं शुरू हो गई हैं।

    जनता से सीधे संवाद की तैयारी
    दिव्या मित्तल ने अपने वीडियो के माध्यम से शुभचिंतकों और आम नागरिकों से जुड़ने की अपील भी की है। उन्होंने कहा कि अगर लोगों को लगता है कि उनकी यह पहल उनके विचारों से मेल खाती है, तो वे व्हाट्सऐप के माध्यम से उनसे संपर्क कर सकते हैं।

    इस पहल के जरिए वह अपनी राजनीतिक यात्रा में लोगों की भागीदारी चाहती हैं।

    30 अगस्त को दिया था इस्तीफा, अब राजनीति में नई पारी

    2013 बैच की आईएएस अधिकारी दिव्या मित्तल ने 30 अगस्त 2026 को भारतीय प्रशासनिक सेवा से इस्तीफा देने की घोषणा की थी। उनका इस्तीफा 15 सितंबर 2026 को स्वीकार कर लिया गया।

    उनके इस फैसले के बाद से ही भविष्य की योजनाओं को लेकर कई तरह की अटकलें लगाई जा रही थीं। अब उन्होंने राजनीति में आने की घोषणा कर इन अटकलों पर विराम लगा दिया है।

    कई जिलों में संभाल चुकी हैं महत्वपूर्ण जिम्मेदारियां –

    अपने लगभग 13 वर्षों के प्रशासनिक करियर के दौरान दिव्या मित्तल उत्तर प्रदेश में कई महत्वपूर्ण पदों पर कार्यरत रहीं।

    -मेरठ में संयुक्त मजिस्ट्रेट।
    -गौतमबुद्ध नगर में मुख्य विकास अधिकारी (CDO)।

    कानपुर नगर में यूपीसीडा की संयुक्त प्रबंध निदेशक।

    बरेली विकास प्राधिकरण की उपाध्यक्ष।

    संतकबीरनगर और मिर्जापुर में जिलाधिकारी।

    इन पदों पर रहते हुए उन्हें प्रशासनिक व्यवस्था और जनता से जुड़े विभिन्न मुद्दों पर काम करने का अनुभव मिला।

    अब सबसे बड़ा सवाल—क्या होगा दिव्या मित्तल का अगला कदम?

    दिव्या मित्तल ने राजनीति में प्रवेश की घोषणा तो कर दी है, लेकिन अभी कई सवालों के जवाब सामने आने बाकी हैं।

    क्या वह अपना स्वतंत्र राजनीतिक संगठन बनाएंगी? क्या आगामी उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव में उम्मीदवार के तौर पर मैदान में उतरेंगी या पहले प्रदेशभर में जनसंपर्क अभियान शुरू करेंगी?

    फिलहाल उनके अगले कदम और विस्तृत राजनीतिक कार्यक्रम की घोषणा का इंतजार है।

    निष्पक्ष टुडे | जनता से सवाल

    क्या प्रशासनिक सेवा का लंबा अनुभव राजनीति में जनता की समस्याओं को समझने और उनका समाधान करने में मददगार साबित हो सकता है?
    पूर्व आईएएस दिव्या मित्तल के स्वतंत्र राजनीति में आने के फैसले को आप किस नजरिए से देखते हैं? अपनी राय जरूर दें।

  • अधिशासी अधिकारी के सामने सरकारी काम में बाधा, युवक पर हमला करने का आरोप

    अधिशासी अधिकारी के सामने सरकारी काम में बाधा, युवक पर हमला करने का आरोप

    गोरखपुर /गोला ब्यूरो निष्पक्ष टुडे :-

    जर्जर बिजली पोल के सर्वे के दौरान विवाद, ईंट से हमला करने के प्रयास का भी आरोप; युवक ने अब तक थाने में नहीं दी लिखित शिकायत


    गोरखपुर/गोला। गोला उपनगर के वार्ड संख्या-14 में जर्जर बिजली पोल और तारों को बदलने व स्थानांतरित करने के लिए किए जा रहे सर्वे के दौरान विवाद का मामला सामने आया है। आरोप है कि 22 सितंबर को अधिकारियों की मौजूदगी में आवेदनकर्ता शिवम तिवारी के साथ मारपीट की गई और ईंट से हमला करने का प्रयास किया गया। घटना के दौरान बिजली विभाग के अधिकारी और जूनियर इंजीनियर भी मौके पर मौजूद बताए जा रहे हैं।

    अधिकारियों के सामने हमला करने का आरोप

    जानकारी के मुताबिक, सार्वजनिक सुविधा को देखते हुए क्षतिग्रस्त बिजली पोल को बदलने और स्थानांतरित करने के संबंध में सर्वे किया जा रहा था। इसी दौरान शिवम तिवारी पर अचानक हमला किए जाने का आरोप है। आरोप यह भी है कि उनके साथ मौजूद अधिकारियों के सामने ईंट से हमला करने का प्रयास किया गया।

    छह महीने में जान से मरवाने की धमकी का आरोप

    शिवम तिवारी की ओर से लगाए गए आरोपों के अनुसार, विवाद के दौरान उन्हें कथित तौर पर धमकी दी गई कि “छह महीने के अंदर जैसे तुम्हारे बाप को मरवाया है, वैसे तुम्हें भी मरवा दूंगा।” इसके अलावा सर्वेश तिवारी की ओर से युवक के आवागमन को बाधित करने की धमकी दिए जाने का भी आरोप है।

    हालांकि, इन आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है और इस संबंध में पुलिस में अभी तक कोई लिखित शिकायत दिए जाने की जानकारी सामने नहीं आई है।

    मौके पर मौजूद थे बिजली विभाग के अधिकारी

    बताया जा रहा है कि जिस समय विवाद हुआ, उस समय गोला के जूनियर इंजीनियर सहित विभागीय अधिकारी मौके पर मौजूद थे। ऐसे में सवाल यह भी उठ रहा है कि सरकारी कार्य के लिए किए जा रहे सर्वे के दौरान अधिकारियों की मौजूदगी में विवाद और कथित हमले की स्थिति कैसे बनी।

    जर्जर पोल और खुले तार बने खतरा-

    मामले का दूसरा महत्वपूर्ण पहलू क्षतिग्रस्त बिजली पोल और भारी-भरकम तारों से जुड़ा है। आरोप है कि तारों की स्थिति ऐसी है कि तेज हवा या आंधी के दौरान इनके मकान पर गिरने का खतरा बना रहता है।

    यही वजह है कि आवेदनकर्ता की ओर से पोल को बदलने अथवा स्थानांतरित करने के लिए विभाग से कार्रवाई की मांग की गई थी।

    अब कार्रवाई पर टिकी नजर –

    फिलहाल सबसे बड़ा सवाल यह है कि क्या बिजली विभाग जर्जर पोल और ढीले/खुले तारों को समय रहते ठीक कराएगा? साथ ही, अधिकारियों की मौजूदगी में सरकारी कार्य में कथित बाधा और युवक पर हमले के आरोपों को लेकर विभाग और पुलिस स्तर पर क्या कार्रवाई होती है, यह भी देखना होगा।

    महत्वपूर्ण बिंदु:

    • 22 सितंबर को गोला वार्ड-14 में घटना का आरोप।
    • जर्जर बिजली पोल के सर्वे के दौरान विवाद।
    • अधिकारियों के सामने युवक से मारपीट का आरोप।
    • ईंट से हमला करने के प्रयास का भी आरोप।
    • जान से मरवाने और आवागमन बाधित करने की धमकी का आरोप।
    • मौके पर जूनियर इंजीनियर समेत अधिकारी मौजूद बताए गए।
    • आवेदनकर्ता ने अभी तक थाने में लिखित शिकायत नहीं दी है।
    • जर्जर पोल और तारों से दुर्घटना की आशंका का दावा।
  • सितंबर विषुव 2026: ऋतु परिवर्तन और खगोलीय गणित सितंबर विषुव 2026: ऋतु परिवर्तन और खगोलीय गणित को समझने का सटीक अवसर

    सितंबर विषुव 2026: ऋतु परिवर्तन और खगोलीय गणित सितंबर विषुव 2026: ऋतु परिवर्तन और खगोलीय गणित को समझने का सटीक अवसर

    गोरखपुर ब्यूरो निष्पक्ष टुडे :-

    23 सितंबर की सुबह 5:35 बजे होगा सितंबर विषुव, जानिए क्यों दिन-रात की लंबाई, ऋतु परिवर्तन और पृथ्वी की धुरी से जुड़ी है यह महत्वपूर्ण खगोलीय घटना


    गोरखपुर। आसमान में होने वाली कुछ घटनाएं ऐसी होती हैं, जो सिर्फ देखने भर की नहीं बल्कि पृथ्वी की गति, उसकी धुरी के झुकाव और ऋतु परिवर्तन के वैज्ञानिक गणित को समझने का अवसर देती हैं। ऐसी ही महत्वपूर्ण घटना है।

    सितंबर विषुव (September Equinox) 2026, जो 23 सितंबर 2026 को भारतीय समयानुसार सुबह 5:35 बजे घटित होगा।

    खगोलविद अमर पाल सिंह, वीर बहादुर सिंह नक्षत्रशाला (तारामंडल), गोरखपुर के अनुसार, इस क्षण सूर्य पृथ्वी की आकाशीय विषुवत् रेखा को उत्तर से दक्षिण की ओर पार करता हुआ दिखाई देगा। इसके साथ ही उत्तरी गोलार्ध में खगोलीय शरद ऋतु और दक्षिणी गोलार्ध में खगोलीय वसंत ऋतु की शुरुआत मानी जाती है।

     सितंबर विषुव क्या है?

    विषुव वह खगोलीय क्षण है, जब सूर्य का आभासी वार्षिक मार्ग यानी क्रांतिवृत्त (Ecliptic), आकाशीय विषुवत् रेखा को पार करता है।

    आकाशीय विषुवत् रेखा पृथ्वी की भूमध्य रेखा का आकाश में किया गया काल्पनिक विस्तार है।

    सितंबर विषुव के दौरान पृथ्वी से देखने पर सूर्य उत्तर से दक्षिण की ओर जाते हुए आकाशीय विषुवत् रेखा को पार करता दिखाई देता है।

    यही कारण है कि उत्तरी गोलार्ध में खगोलीय शरद ऋतु और दक्षिणी गोलार्ध में खगोलीय वसंत ऋतु शुरू होती है।

    23 सितंबर 2026 को होगा विषुव

    सितंबर विषुव 2026 का सटीक क्षण 00:05 UTC है, जो भारतीय समयानुसार 23 सितंबर की सुबह 5:35 बजे होगा।
    यह समझना जरूरी है कि विषुव कोई पूरे दिन चलने वाली घटना नहीं है, बल्कि पृथ्वी-सूर्य प्रणाली में घटित होने वाला एक निश्चित खगोलीय क्षण है।

    आमतौर पर सितंबर विषुव 22 या 23 सितंबर को आता है। पृथ्वी की कक्षीय अवधि और कैलेंडर वर्ष के अंतर के कारण कुछ वर्षों में इसकी तारीख 21 या 24 सितंबर भी हो सकती है।

    2026 में मार्च विषुव 20 मार्च को हुआ था, जबकि सितंबर विषुव 23 सितंबर को होगा।

    क्या विषुव के दिन सच में 12 घंटे दिन और 12 घंटे रात होती है?

    विषुव का अर्थ ही लगभग समान दिन और रात से जुड़ा है, लेकिन हर स्थान पर इस दिन ठीक 12 घंटे दिन और 12 घंटे रात होना जरूरी नहीं है।

    इसके पीछे दो प्रमुख वैज्ञानिक कारण हैं—

    1. सूर्य एक बिंदु नहीं, बल्कि लगभग आधा डिग्री कोणीय व्यास वाला डिस्क है।

    2. पृथ्वी का वायुमंडल सूर्य के प्रकाश को मोड़ता है, जिसे वायुमंडलीय अपवर्तन कहते हैं।

    इस कारण सूर्य वास्तव में ज्यामितीय रूप से क्षितिज के नीचे होने के बावजूद कुछ समय तक दिखाई देता है।

    नतीजा यह होता है कि अधिकांश स्थानों पर विषुव के दिन दिन की अवधि रात से कुछ मिनट अधिक हो सकती है।

    जिस दिन किसी विशेष स्थान पर दिन और रात की अवधि वास्तव में लगभग बराबर होती है, उसे इक्विलक्स (Equilux) कहा जाता है। इसकी तारीख अक्षांश और स्थानीय परिस्थितियों के अनुसार विषुव से कुछ दिन पहले या बाद में हो सकती है।

     सूर्य लगभग ठीक पूर्व में उगेगा और पश्चिम में अस्त होगा –

    सितंबर विषुव की एक खास विशेषता यह है कि इस समय सूर्य लगभग ठीक पूर्व दिशा में उदय और पश्चिम दिशा में अस्त होता दिखाई देता है ।

    इसका कारण यह है कि विषुव के समय सूर्य आकाशीय विषुवत् रेखा पर होता है।

    हालांकि स्थानीय पहाड़, इमारतें, पेड़ और क्षितिज की स्थिति के कारण वास्तविक अवलोकन में कुछ अंतर दिखाई दे सकता है।

    विद्यार्थी और खगोल प्रेमी खुले स्थान से सूर्योदय और सूर्यास्त की दिशा को चिह्नित करके इस घटना का सरल अवलोकन कर सकते हैं।

     ऋतुएं क्यों बदलती हैं?

    ऋतु परिवर्तन का सबसे महत्वपूर्ण वैज्ञानिक कारण पृथ्वी की धुरी का लगभग 23.5 डिग्री झुकाव है।

    पृथ्वी सूर्य की परिक्रमा करते समय अपनी झुकी हुई धुरी के साथ आगे बढ़ती है। इसी कारण वर्ष के अलग-अलग समय में कभी उत्तरी गोलार्ध सूर्य की ओर अधिक झुका होता है और कभी दक्षिणी गोलार्ध।

    सितंबर विषुव के समय दोनों गोलार्धों को मिलने वाला सौर प्रकाश अपेक्षाकृत संतुलित होता है।

    इसके बाद—

    🔹 उत्तरी गोलार्ध में दिन छोटे और रातें लंबी होने लगती हैं।
    🔹 दक्षिणी गोलार्ध में दिन लंबे और रातें छोटी होने लगती हैं।
    यानी ऋतुओं का मूल कारण पृथ्वी और सूर्य के बीच दूरी में बदलाव नहीं, बल्कि पृथ्वी की धुरी का झुकाव और सूर्य के चारों ओर उसकी परिक्रमा है।

     खगोलीय शरद ऋतु और मौसम-विज्ञान की शरद ऋतु में अंतर –

    शरद ऋतु को दो अलग-अलग तरीकों से परिभाषित किया जाता है।

    खगोलीय परिभाषा –

    उत्तरी गोलार्ध में सितंबर विषुव से दिसंबर संक्रांति तक का समय खगोलीय शरद ऋतु माना जाता है।

    मौसम-विज्ञानी परिभाषा –

    मौसम विज्ञान में वर्ष को तीन-तीन महीनों की ऋतुओं में बांटा जाता है। इस प्रणाली के अनुसार 1 सितंबर से 30 नवंबर तक का समय शरद ऋतु माना जाता है।

    इसलिए 1 सितंबर से शुरू होने वाली शरद ऋतु मौसम-विज्ञान पर आधारित है, जबकि 23 सितंबर से शुरू होने वाली शरद ऋतु खगोलीय गणना पर आधारित है।

     वर्ष के चार प्रमुख खगोलीय पड़ाव –

    एक वर्ष में चार प्रमुख मौसमी खगोलीय पड़ाव होते हैं—
    1. मार्च विषुव
    2. जून संक्रांति
    3. सितंबर विषुव
    4. दिसंबर संक्रांति
    विषुव के समय सूर्य आकाशीय विषुवत् रेखा पर होता है, जबकि संक्रांति के समय सूर्य इस रेखा के उत्तर या दक्षिण में अपनी अधिकतम आभासी स्थिति पर पहुंचता है।
    जून संक्रांति उत्तरी गोलार्ध में खगोलीय ग्रीष्म ऋतु और दिसंबर संक्रांति खगोलीय शीत ऋतु की शुरुआत से जुड़ी है।

     विषुव का अवलोकन कैसे करें?

    सितंबर विषुव देखने के लिए किसी विशेष दूरबीन की आवश्यकता नहीं है।

    खगोलविद अमर पाल सिंह के अनुसार, लोग—

    सूर्योदय की दिशा का अवलोकन कर सकते हैं।
    सूर्यास्त की दिशा को चिह्नित कर सकते हैं।
    खुले स्थान पर छड़ी या डंडे की छाया को दिनभर अलग-अलग समय पर चिह्नित कर सकते हैं।
    इससे सूर्य की आभासी गति और पृथ्वी के घूर्णन को समझने में मदद मिलती है।

     सूर्य को सीधे न देखें –

    नंगी आंखों से सीधे सूर्य को देखना आंखों की रेटिना को स्थायी नुकसान पहुंचा सकता है।

    सूर्य का अवलोकन केवल प्रमाणित सौर फिल्टर, सुरक्षित सोलर व्यूअर या पिनहोल प्रोजेक्टर के माध्यम से किया जाना चाहिए।

    सामान्य धूप का चश्मा, एक्स-रे फिल्म, काली कांच की प्लेट या बिना प्रमाणित फिल्टर वाली दूरबीन सुरक्षित विकल्प नहीं हैं।

     क्रांतिवृत्त, राशिचक्र और विषुव बिंदु –

    सूर्य तारों की पृष्ठभूमि के सामने वर्षभर जिस आभासी मार्ग पर चलता दिखाई देता है, उसे क्रांतिवृत्त या रविपथ कहा जाता है।

    पृथ्वी की धुरी के झुकाव के कारण क्रांतिवृत्त और आकाशीय विषुवत् रेखा के बीच लगभग 23.5 डिग्री का कोण होता है।

    सूर्य, चंद्रमा और अधिकांश ग्रह क्रांतिवृत्त के आसपास के एक क्षेत्र में दिखाई देते हैं, जिसे राशिचक्र (Zodiac) कहा जाता है।

    हालांकि सभी खगोलीय पिंड बिल्कुल इसी रेखा पर नहीं चलते। उदाहरण के लिए प्लूटो की कक्षा का झुकाव काफी अधिक है।

    करीब 26 हजार साल का खगोलीय चक्र –

    विषुव बिंदु स्थायी रूप से एक ही स्थान पर नहीं रहते।
    पृथ्वी की घूर्णन धुरी की दीर्घकालिक डगमगाहट को अयन-चलन या विषुवों का पूर्वगमन (Precession of the Equinoxes) कहा जाता है।

    इस प्रक्रिया के कारण तारों की पृष्ठभूमि के सापेक्ष विषुव बिंदु धीरे-धीरे पश्चिम की ओर खिसकते हैं।

    पृथ्वी की धुरी को इस चक्र को पूरा करने में लगभग 26,000 वर्ष लगते हैं।

    इसी दीर्घकालिक गति के कारण हजारों वर्षों में आकाश में ध्रुव की दिशा और विषुव बिंदुओं की तारों के सापेक्ष स्थिति बदलती रहती है।

    🇮🇳 भारतीय खगोल परंपरा में विषुव का महत्व –

    प्राचीन भारतीय खगोल-विज्ञान में सूर्य की गति, अयन, नक्षत्र और ऋतु-चक्र का विस्तृत अध्ययन किया गया।

    भारतीय परंपरा में नक्षत्र शब्द का उपयोग तारों या तारक-समूहों के लिए तथा चंद्रमा के आकाशीय मार्ग के 27 भागों के संदर्भ में भी किया जाता है।

    चंद्रमा तारों की पृष्ठभूमि के सापेक्ष लगभग 27.3 दिनों में एक चक्र पूरा करता है। इसी आधार पर प्राचीन भारतीय ज्ञान परंपरा में चंद्र-पथ को 27 नक्षत्रों में विभाजित किया गया।

    अयन-चलन के कारण विषुव बिंदुओं और नक्षत्रों की आपसी स्थिति लंबे समय में बदलती रहती है। इसलिए विभिन्न ऐतिहासिक कालों में अलग-अलग नक्षत्रों को वर्ष अथवा नक्षत्र-क्रम की शुरुआत से जोड़े जाने के संदर्भ मिलते हैं।

    आकाशीय घटनाओं का अध्ययन प्राचीन समय में कृषि, ऋतु परिवर्तन और पंचांग निर्माण के लिए भी महत्वपूर्ण रहा।

    दुनिया की सभ्यताओं में भी विषुव का महत्व –

    विषुव केवल भारतीय खगोलीय परंपरा तक सीमित नहीं रहा। विभिन्न सभ्यताओं ने सूर्य की गति और ऋतु परिवर्तन को अपनी-अपनी सांस्कृतिक परंपराओं में स्थान दिया।

    मेक्सिको के चिचेन इत्ज़ा स्थित कुकुलकान पिरामिड पर विषुव के आसपास बनने वाली प्रकाश-छाया की आकृति विशेष रूप से चर्चित है, जिसे सांप जैसी आकृति से जोड़ा जाता है। हालांकि इसके मूल उद्देश्य और व्याख्या को लेकर पुरातत्वविदों में पूर्ण सहमति नहीं है।

    सितंबर विषुव 2026 क्यों खास है?

    23 सितंबर 2026 का सितंबर विषुव सिर्फ दिन और रात के लगभग बराबर होने की घटना नहीं है।

    यह एक ऐसा खगोलीय पड़ाव है, जो एक साथ—
    पृथ्वी की 23.5° झुकी धुरी,
    सूर्य की आभासी गति,
    ऋतु परिवर्तन,
    दिन-रात की अवधि,
    क्रांतिवृत्त,
    नक्षत्र-पद्धति,
    अयन-चलन और
    मानव सभ्यता की आकाश-अवलोकन परंपरा
    को समझने का अवसर देता है।
    खगोलविद अमर पाल सिंह के अनुसार, 23 सितंबर की सुबह होने वाला यह विषुव हमें यह समझने का अवसर देता है कि पृथ्वी की गति और उसका अक्षीय झुकाव हमारे मौसम, दिन के उजाले, कृषि और जीवन की प्राकृतिक लय को लगातार प्रभावित करते हैं

    महत्वपूर्ण तथ्य एक नजर में –

    तारीख: 23 सितंबर 2026
    भारतीय समय: सुबह 5:35 बजे
    UTC: 00:05
    घटना: सूर्य का आकाशीय विषुवत् रेखा को उत्तर से दक्षिण पार करना
    उत्तरी गोलार्ध: खगोलीय शरद ऋतु की शुरुआत
    दक्षिणी गोलार्ध: खगोलीय वसंत ऋतु की शुरुआत
    दिन-रात: अधिकांश स्थानों पर लगभग बराबर, लेकिन जरूरी नहीं कि ठीक 12-12 घंटे
    पृथ्वी की धुरी का झुकाव: लगभग 23.5°
    अयन-चलन का चक्र: लगभग 26,000 वर्ष