Category: उत्तर प्रदेश
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श्रावण मास विशेष 166 वर्षों से जल रही आस्था की अखंड ज्योति, छह पीढ़ियों ने संजोई पशुपतेश्वर महादेव मंदिर की विरासत
अनुराग त्रिपाठी ब्यूरो सिद्धार्थनगर :-
ऐचनी गांव में पूर्वजों की धरोहर को नई पीढ़ी ने दिया नया जीवन, जीर्णोद्धार के साथ रुद्राभिषेक, लघु महामृत्युंजय जाप और विशाल भंडारे का हुआ भव्य आयोजन
03 अगस्त 2026 | सोमवार | श्रावण मास विशेष,
ऐचनी /बांसी /सिद्धार्थनगर श्रावण मास के पावन अवसर पर सिद्धार्थनगर जनपद के ग्राम ऐचनी स्थित लगभग 166 वर्ष पुराने ऐतिहासिक पशुपतेश्वर महादेव मंदिर में ऐसा धार्मिक आयोजन हुआ, जिसने केवल एक मंदिर का जीर्णोद्धार नहीं किया, बल्कि छह पीढ़ियों से चली आ रही आस्था, संस्कार और पारिवारिक एकता की विरासत को नई ऊर्जा प्रदान की।
जहाँ से शुरू हुई एक अमर विरासत :-
इस ऐतिहासिक मंदिर का निर्माण, प्रतिष्ठा एवं उद्घाटन संवत् 1917 (लगभग 1860 ईस्वी) में स्वर्गीय श्री पशुपतिनाथ त्रिपाठी ने कराया था। उनके पिता स्वर्गीय श्री शिवदत्त त्रिपाठी के पाँच पुत्र थे—
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स्वर्गीय श्री पशुपतिनाथ त्रिपाठी
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स्वर्गीय श्री तमेश्वर नाथ त्रिपाठी
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स्वर्गीय श्री निश्चय नाथ त्रिपाठी
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स्वर्गीय श्री रमेश्वर नाथ त्रिपाठी
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स्वर्गीय श्री परमेश्वर नाथ त्रिपाठी
इन्हीं में से स्वर्गीय श्री पशुपतिनाथ त्रिपाठी ने भगवान शिव के इस मंदिर की स्थापना कर एक ऐसी विरासत की नींव रखी, जो आज भी पूरे क्षेत्र की आस्था का केंद्र है।
छह पीढ़ियों का अटूट रिस्ता मंदिर से :-
स्वर्गीय श्री पशुपतिनाथ त्रिपाठी के पुत्र स्वर्गीय श्री बल्देव त्रिपाठी ने इस विरासत को आगे बढ़ाया।
इसके बाद परिवार की प्रत्येक पीढ़ी ने मंदिर से अपना संबंध बनाए रखा।स्वर्गीय श्री महावीर त्रिपाठी, स्वर्गीय श्री रामउग्रह त्रिपाठी, स्वर्गीय श्री मोहरनाथ त्रिपाठी और स्वर्गीय श्री असरफीनाथ त्रिपाठी ने इस परंपरा को आगे बढ़ाया।

स्वर्गीय श्री महावीर त्रिपाठी के पुत्र स्वर्गीय श्री रामलाल त्रिपाठी हुए, जिनके पुत्र श्री इंद्रजीत त्रिपाठी और श्री सभाजीत त्रिपाठी हैं।
स्वर्गीय श्री रामउग्रह त्रिपाठी की चार पुत्रियाँ थीं।
कौन थे स्व.पुजारी बाबा ..?
पुजारी बाबा’ के नाम से प्रसिद्ध थे स्वर्गीय श्री रामउग्रह त्रिपाठी
पशुपतेश्वर महादेव मंदिर के इतिहास में स्वर्गीय श्री रामउग्रह त्रिपाठी का नाम अत्यंत श्रद्धा और सम्मान के साथ लिया जाता है। वे भगवान भोलेनाथ के अनन्य उपासक एवं महान शिवभक्त थे। उनकी शिवभक्ति इतनी गहन थी कि आसपास के गांवों में लोग उन्हें स्नेह और आदर से “पुजारी बाबा” कहकर पुकारते थे।

उनका जीवन पूर्णतः भगवान शिव की आराधना, जप, तप, ध्यान और पूजा-पाठ को समर्पित था। सांसारिक विषयों, धन-संपत्ति और सामाजिक दिखावे से उनका कोई विशेष लगाव नहीं था।
उनका अधिकांश समय पशुपतेश्वर महादेव मंदिर में भगवान भोलेनाथ की सेवा और भक्ति में व्यतीत होता था। उनका सरल, सात्विक और तपस्वी जीवन आज भी परिवार एवं ग्रामवासियों के लिए प्रेरणा का स्रोत है।

स्वर्गीय श्री रामउग्रह त्रिपाठी की चार पुत्रियाँ थीं। उनके कोई पुत्र नहीं थे। परिवार की इस जिम्मेदारी को उनके छोटे भाई स्वर्गीय श्री मोहरनाथ त्रिपाठी ने बड़े आत्मीय भाव से निभाया। स्वर्गीय श्री मोहरनाथ त्रिपाठी ने अपनी चारों भतीजियों का विवाह स्वयं कराकर परिवार की मर्यादा, कर्तव्यनिष्ठा और भाईचारे का आदर्श उदाहरण प्रस्तुत किया। यह प्रसंग आज भी परिवार में सम्मान और गर्व के साथ स्मरण किया जाता है तथा दोनों भाइयों के त्याग, प्रेम और पारिवारिक एकता का प्रेरक प्रतीक माना जाता है।

स्वर्गीय श्री असरफीनाथ त्रिपाठी का विवाह के कुछ समय बाद ही असामयिक निधन हो गया था, जिससे उनकी कोई संतान नहीं हुई।
स्वर्गीय श्री मोहरनाथ त्रिपाठी के पुत्र स्वर्गीय श्री शिवप्रसाद त्रिपाठी एवं स्वर्गीय श्री शिव सहाय त्रिपाठी थे।

स्वर्गीय श्री शिवप्रसाद त्रिपाठी के पुत्र श्री शंभू प्रसाद त्रिपाठी, श्री जगदीश प्रसाद त्रिपाठी, श्री शत्रुधन प्रसाद त्रिपाठी एवं श्री सूर्यप्रकाश त्रिपाठी हैं।

जबकि स्वर्गीय श्री शिव सहाय त्रिपाठी के पुत्र श्री दामोदर प्रसाद त्रिपाठी एवं श्री बिश्वनाथ त्रिपाठी हैं।
जब पूर्वजों की धरोहर को मिला नया जीवन :-
लगभग 166 वर्ष बाद, श्रावण मास में इसी परिवार ने एक बार फिर इतिहास रचा। श्री शंभू प्रसाद त्रिपाठी एवं श्री जगदीश प्रसाद त्रिपाठी के नेतृत्व में पूरे परिवार ने मंदिर का भव्य जीर्णोद्धार कराया।
इस दौरान घड़ी घंट एवं बड़े घंटे की स्थापना, लघु महामृत्युंजय जाप, रुद्राभिषेक और वैदिक पूजा-अर्चना संपन्न हुई।

पूरा मंदिर परिसर “हर-हर महादेव” और “ॐ नमः शिवाय” के जयघोष से गुंजायमान हो उठा।
नई पीढ़ी बनी विरासत की नई पहचान
धार्मिक आयोजन को सफल बनाने में युवा पीढ़ी ने भी पूरे उत्साह से भागीदारी निभाई। श्री कृष्णमुरारी त्रिपाठी, श्री अनुराग त्रिपाठी, श्री करुड़ापति त्रिपाठी तथा श्री सरजू प्रसाद त्रिपाठी ने मंदिर की सजावट, श्रद्धालुओं के स्वागत, पूजा-अर्चना और भंडारे की व्यवस्थाओं की जिम्मेदारी संभालकर यह संदेश दिया कि संस्कृति तभी जीवित रहती है, जब नई पीढ़ी उसे अपनाती है।
भंडारे में उमड़ा श्रद्धा का सैलाब :-
धार्मिक अनुष्ठानों के समापन के बाद आयोजित विशाल भंडारे में ग्राम ऐचनी एवं आसपास के क्षेत्रों से आए सैकड़ों श्रद्धालुओं ने प्रसाद ग्रहण किया। आयोजन में सेवा, सहयोग, भाईचारा और सामाजिक समरसता की अनुपम मिसाल देखने को मिली।
समाज के लिए प्रेरणा :-
पशुपतेश्वर महादेव मंदिर का यह आयोजन केवल एक धार्मिक कार्यक्रम नहीं, बल्कि यह संदेश भी है कि पूर्वजों की धरोहर केवल इतिहास नहीं होती, बल्कि आने वाली पीढ़ियों की जिम्मेदारी भी होती है। जब परिवार अपनी सांस्कृतिक और धार्मिक विरासत के संरक्षण के लिए एकजुट होता है, तब वह पूरे समाज के लिए प्रेरणा बन जाता है।
मुख्य बातें :-

🔱 166 वर्ष पुराने ऐतिहासिक पशुपतेश्वर महादेव मंदिर का भव्य जीर्णोद्धार।
🛕 मंदिर का निर्माण, प्रतिष्ठा एवं उद्घाटन संवत् 1917 (1860 ई.) में स्वर्गीय श्री पशुपतिनाथ त्रिपाठी ने कराया।
👨👩👦 छह पीढ़ियों ने मिलकर पूर्वजों की विरासत को जीवित रखा।
🔔 घड़ी घंट एवं बड़े घंटे की स्थापना के साथ रुद्राभिषेक और लघु महामृत्युंजय जाप का आयोजन।
🙏 श्री शंभू प्रसाद त्रिपाठी एवं श्री जगदीश प्रसाद त्रिपाठी के नेतृत्व में संपन्न हुआ जीर्णोद्धार।
🌿 नई पीढ़ी की सक्रिय भागीदारी ने आयोजन को यादगार बनाया।
🍛 विशाल भंडारे में सैकड़ों श्रद्धालुओं ने प्रसाद ग्रहण किया।
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कलेक्ट्रेट सभागार में विद्युत विभाग के लंबित विद्युत बिलों के बकाया भुगतान, विद्युत देयों की वसूली एवं विद्युत आपूर्ति से संबंधित समीक्षा बैठक सम्पन्न
कलेक्ट्रेट सभागार में विद्युत विभाग के लंबित विद्युत बिलों के बकाया भुगतान, विद्युत देयों की वसूली एवं विद्युत आपूर्ति से संबंधित समीक्षा बैठक सम्पन्न
ब्यूरो प्रभारी. अजीत कुमार
लोकेशन.कुशीनगर
आवश्यक होने पर मुख्यालय से तत्काल धनराशि की मांग करें: जिलाधिकारी
जिलाधिकारी महेंद्र सिंह तंवर की अध्यक्षता में आज कलेक्ट्रेट सभागार में विद्युत विभाग के लंबित विद्युत बिलों के बकाया भुगतान, विद्युत देयों की वसूली एवं विद्युत आपूर्ति से संबंधित समीक्षा बैठक आयोजित की गई। बैठक में विद्युत विभाग तथा विभिन्न विभागों के अधिकारियों के साथ विभागवार समीक्षा कर आवश्यक दिशा-निर्देश दिए गए।
बैठक के दौरान जिलाधिकारी ने शिक्षा विभाग, स्वास्थ्य विभाग, पुलिस विभाग, पंचायत विभाग, ग्रामीण पेयजल, आंगनवाड़ी केंद्रों, बाल विकास सेवा एवं पुष्टाहार विभाग सहित अन्य संबंधित विभागों के अधिकारियों को निर्देशित किया कि उपलब्ध बजट के सापेक्ष लंबित विद्युत बिलों का तत्काल भुगतान सुनिश्चित किया जाए। जिन विभागों के पास वर्तमान में धनराशि उपलब्ध नहीं है, वे बिना विलंब अपने-अपने मुख्यालय को आवश्यक धनराशि की मांग करते हुए पत्र प्रेषित करें तथा उसकी प्रति जिला प्रशासन को भी उपलब्ध कराएं।
उन्होंने निर्देश दिए कि विद्युत बिलों के भुगतान हेतु आवश्यक धनराशि की मांग के संबंध में संबंधित विभागों के मुख्यालय को जिलाधिकारी कार्यालय की ओर से भी आवश्यक पत्र प्रेषित किए जाएं, ताकि भुगतान की प्रक्रिया में किसी प्रकार की देरी न हो।
जिलाधिकारी ने कहा कि विद्युत बिलों की प्रभावी वसूली एवं निर्बाध विद्युत आपूर्ति सुनिश्चित करना सभी विभागों की सामूहिक जिम्मेदारी है। इस कार्य में यदि किसी प्रकार के प्रशासनिक सहयोग अथवा संसाधनों की आवश्यकता होगी तो जिला प्रशासन हर संभव सहायता उपलब्ध कराएगा।
बैठक में विद्युत आपूर्ति, विभागीय समन्वय तथा अन्य संबंधित विषयों की भी विस्तृत समीक्षा की गई तथा अधिकारियों को समयबद्ध एवं प्रभावी कार्रवाई सुनिश्चित करने के निर्देश दिए गए। बैठक में जॉइंट मजिस्ट्रेट ,अधीक्षण अभियंता विद्युत, अधिशासी अभियंता विद्युत, जिला बेसिक शिक्षा अधिकारी तथा संबंधित विभागों के जिला स्तरीय अधिकारी उपस्थित रहे।
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29 जुलाई को दिखेगा वर्ष का आकर्षक ‘बक मून’, गुरु पूर्णिमा पर बनेगा दुर्लभ खगोलीय-सांस्कृतिक संयोग
ज्योतिष डेस्क निष्पक्ष टुडे :-
रात 8:06 बजे पूर्णिमा होगी चरम पर, मकर तारामंडल में चमकेगा चंद्रमा; बिना दूरबीन के भी दिखेगा अद्भुत नज़ारा
29 जुलाई 2026 को दिखेगा वर्ष का आकर्षक ‘बक मून’,/ फुल मून
गुरु पूर्णिमा पर बनेगा दुर्लभ
खगोलीय-सांस्कृतिक संयोग।
खगोलविद अमर पाल सिंह ने बताया कि 29 जुलाई 2026 की शाम आकाश प्रेमियों और सामान्य जनमानस के लिए विशेष रहने वाली है क्योंकि इस दौरान भारतीय समयानुसार रात 8:06 बजे जुलाई की पूर्णिमा अपने चरम पर होगी। इस दौरान चंद्रमा, मकर (Capricornus) तारामंडल की दिशा में रहेगा तथा लगभग –12.7 मैग्नीट्यूड की चमक से दमकेगा एवं इसी पूर्णिमा को पारंपरिक रूप से ‘बक मून’ (Buck Moon) कहा जाता है। इसका विशेष महत्व इसलिए भी है क्योंकि यही दिन आषाढ़ पूर्णिमा अथवा गुरु पूर्णिमा का भी है। इस प्रकार एक ही दिन खगोलीय और सांस्कृतिक दृष्टि से अत्यंत महत्त्वपूर्ण संयोग देखने को मिलेगा।

क्या होती है पूर्णिमा ?
खगोलविद अमर पाल सिंह ने बताया कि पूर्णिमा वह खगोलीय अवस्था है जब सूर्य, पृथ्वी और चंद्रमा लगभग एक सीधी रेखा में होते हैं तथा पृथ्वी सूर्य और चंद्रमा के बीच स्थित होती है। इस स्थिति में चंद्रमा का सूर्य से प्रकाशित पूरा निकटवर्ती भाग पृथ्वी की ओर दिखाई देता है, इसलिए वह पूर्ण गोलाकार एवं अत्यधिक चमकीला दिखाई देता है। या कुछ यूं कहें कि पूर्णिमा वह समय होता है जब सूर्य और चंद्रमा पृथ्वी के विपरीत दिशाओं में एक सीध में होते हैं, जिसे खगोलविज्ञान की भाषा में’ सिज़ीगी’ कहते हैं।उस समय, चंद्रमा का प्रकाशित भाग पृथ्वी की ओर होता है जबकि दूसरा भाग अंधकार में होता है। अमावस्या के समय इसका ठीक विपरीत होता है।

कब होगा बक मून का चरम समय। ?
खगोलविद अमर पाल सिंह ने बताया कि बैसे तो सूर्यास्त के बाद से ही चंद्रमा, पूरब -दक्षिण पूर्वी आकाश में नज़र आने लगेगा लेकिन रात 8:06 बजे वह सटीक क्षण होगा जब पूर्णिमा अपनी चरम अवस्था में पहुँचेगी, लेकिन सामान्य दर्शकों को चंद्रमा एक दिन पहले एवं एक दिन बाद की रातों में भी लगभग पूर्ण जैसा ही दिखाई देगा, क्योंकि प्रकाशित भाग में परिवर्तन बहुत धीमी गति से होता है।

कहाँ और किस दिशा में दिखाई देगा बक मून ?
खगोलविद अमर पाल सिंह ने बताया कि भारत में 29 जुलाई को सूर्यास्त के तुरंत बाद चंद्रमा पूर्व–दक्षिण-पूर्व (East-Southeast) दिशा में उदित होगा। रात बढ़ने के साथ वह आकाश में ऊँचा उठेगा, लगभग मध्यरात्रि में सर्वोच्च ऊँचाई पर पहुँचेगा और सूर्योदय के आसपास पश्चिम दिशा में अस्त होगा।

किस तारामण्डल में दिखाई देगा बक मून।?
खगोलविद अमर पाल सिंह ने बताया कि पूर्णिमा के चरम के समय चंद्रमा, मकर (Capricornus) तारामंडल की दिशा में स्थित रहेगा, साथ ही पृथ्वी से उसकी औसत दूरी लगभग 3,99,600 किलोमीटर होगी तथा उसका प्रत्यक्ष कोणीय व्यास लगभग 0.5 डिग्री दिखाई देगा।

चंद्रमा कितना चमकीला/ कितने मैग्नीट्यूड पर होगा?
खगोलविद अमर पाल सिंह ने बताया कि इस पूर्णिमा के दौरान चंद्रमा का दृश्य मैग्नीट्यूड लगभग माइनस 12.7 रहेगा, जो इसे रात्रि आकाश की सबसे चमकीली प्राकृतिक वस्तुओं में शामिल करता है। खगोलविद अमर पाल सिंह ने बताया कि ऋणात्मक (Negative) मैग्नीट्यूड का अर्थ है कि वस्तु अत्यंत अधिक चमकीली है। पूर्णिमा के समय चंद्रमा का प्रकाश इतना प्रबल होता है कि अत्यंत हल्के बादलों के बीच भी दिखाई देता है।

‘ बक मून’ नाम कैसे पड़ा?
खगोलविद अमर पाल सिंह ने बताया कि जुलाई की पूर्णिमा को बक मून (Buck Moon) नाम उत्तरी अमेरिका की मूल निवासी (Native American) जनजातियों द्वारा दिया गया था, क्योंकि वर्ष के इसी समय नर हिरण (Buck) के नए सींग तेज़ी से विकसित होते हैं और मखमली आवरण से ढके दिखाई देते हैं। इसी मौसमी परिवर्तन के आधार पर जुलाई की पूर्णिमा को “बक मून” कहा जाने लगा साथ ही इसके अन्य पारंपरिक नाम भी प्रचलित हैं, जिनमें थंडर मून , हे मून,शैलमन मून, रस्पवेरी मून, हॉफ वे समर मून तथा कुछ क्षेत्रों में मियड मून भी शामिल हैं। ये नाम विभिन्न संस्कृतियों की कृषि, मौसम और प्राकृतिक चक्रों से जुड़े हैं।

बक मून/ पूर्णिमा का पृथ्वी पर क्या पर प्रभाव होगा।?
खगोलविद अमर पाल सिंह ने बताया कि पूर्णिमा और अमावस्या के समय सूर्य एवं चंद्रमा का संयुक्त गुरुत्वाकर्षण प्रभाव समुद्रों में स्प्रिंग टाइड (Spring Tide) अथवा उच्च ज्वार उत्पन्न करता है। इन दिनों उच्च और निम्न ज्वार के बीच का अंतर सामान्य दिनों की अपेक्षा अधिक होता है। हालांकि वैज्ञानिक अध्ययनों के अनुसार पूर्णिमा का मानव व्यवहार या मानसिक स्वास्थ्य पर कोई निर्णायक प्रत्यक्ष प्रभाव सिद्ध नहीं हुआ है। लेकिन फिर भी पुराने जमाने से ही कई देशों ख़ासकर प्राचीन यूरोप में प्रचलित मान्यताओं के अनुसार चंद्रमा को लूना भी कहा जाता है एवं उसी के आधार पर बना था *ल्यूनेटिक* शब्द जिसका मतलब ही होता है कि *चांदमारा* या पागल होना। लेकिन आधुनिक खगोल वैज्ञानिक अनुसंधानों में चंद्रमा का आपने शरीर के ऊपर कोई प्रत्यक्ष प्रभाव नहीं होता है। इसीलिए यहां घबराने की जरूरत बिल्कुल भी नहीं है, इसीलिए खगोलविद अमर पाल सिंह कहते हैं कि *पहले जानें उसके बाद ही मानें और सही ज्ञान सभी समस्याओं का समाधान और यही है विज्ञान।

हर पूर्णिमा पर ग्रहण क्यों नहीं होता?
खगोलविद अमर पाल सिंह ने बताया कि बहुत से लोग मानते हैं कि हर पूर्णिमा पर चंद्र ग्रहण होना चाहिए, जबकि ऐसा नहीं है। इसका कारण यह है कि चंद्रमा की कक्षा पृथ्वी की सूर्य के चारों ओर की कक्षा (क्रांतिवृत्त) से लगभग 5.1° झुकी हुई है। इसलिए अधिकांश पूर्णिमाओं पर चंद्रमा पृथ्वी की छाया के ऊपर या नीचे से निकल जाता है। चंद्र ग्रहण केवल तभी होता है जब पूर्णिमा के समय चंद्रमा अपने कक्षीय नोड के निकट हो और सूर्य, पृथ्वी तथा चंद्रमा लगभग एक सीध में हों।

चंद्रमा हमेशा एक जैसा क्यों नहीं दिखता?
खगोलविद अमर पाल सिंह ने बताया कि चंद्रमा, पृथ्वी की परिक्रमा लगभग 27.32 दिनों में करता है, जबकि एक पूर्णिमा से अगली पूर्णिमा तक का औसत समय 29.53 दिन (सिनोडिक मास) होता है। यही कारण है कि चंद्रमा की कलाएँ लगातार बदलती रहती हैं। एक चंद्र चक्र में अमावस्या, बढ़ता अर्धचंद्र, प्रथम चतुर्थांश, बढ़ता गिबस मून, पूर्णिमा, घटता गिबस मून, तृतीय चतुर्थांश और घटता अर्धचंद्र जैसी आठ प्रमुख अवस्थाएँ आती हैं। इन्हीं समस्त चंद्रकलाओं के कारण चन्द्रमा, पृथ्वी से हमेशा एक ही आकर में नहीं दिखाई देता है और अपनी कलाएँ बदलता रहता है।
क्या वास्तव में हम चंद्रमा का केवल आधा भाग ही देखते हैं?
खगोलविद अमर पाल सिंह ने बताया कि यद्यपि किसी भी समय चंद्रमा का लगभग 50 प्रतिशत भाग ही पृथ्वी से दिखाई देता है, लेकिन चंद्र लिब्रेशन (Libration) नामक हल्के डगमगाने वाले प्रभाव के कारण समय के साथ हम उसकी सतह का लगभग 59 प्रतिशत भाग देख पाते हैं।
गुरु पूर्णिमा का वैज्ञानिक एवं पौराणिक महत्व क्या होता है।?
खगोलविद अमर पाल सिंह ने बताया कि 29 जुलाई 2026 की पूर्णिमा भारतीय परंपरा में गुरु पूर्णिमा के रूप में मनाई जाएगी। पौराणिक रूप में यह दिन महर्षि वेदव्यास की जयंती से जुड़ा माना जाता है और ज्ञान, शिक्षा तथा गुरु-शिष्य परंपरा के सम्मान का पर्व है। खगोलविद अमर पाल सिंह ने बताया कि खगोलीय दृष्टि से यह केवल पूर्णिमा का एक विशेष क्षण होता है, साथ ही इसे कई अन्य नामों से भी जाना जाता है जबकि सांस्कृतिक रूप से यह भारतीय ज्ञान परंपरा के प्रति हमेशा अपनी सच्ची श्रद्धा व्यक्त करने का अवसर प्रदान करता है। इसीलिए सभी को अपने गुरुओं के प्रति कृतज्ञ होना ही चाहिए क्योंकि बिन गुरु ज्ञान कहां।

कैसे देखें बक मून और तस्वीर कैसे लें?
खगोलविद अमर पाल सिंह ने बताया कि इस बक मून/पूर्णिमा को देखने के लिए किसी दूरबीन / टेलीस्कोप या विनॉकुलर आदि की आवश्यकता नहीं होती है सूर्यास्त के तुरंत बाद पूर्वी क्षितिज का खुला स्थान चुनें। यदि आपके पास कोई टेलीस्कोप/दूरबीन या विनोकुलर एवं कैमरा आदि उपकरण मौजूद हैं और आप फोटोग्राफी करना चाहें तो ट्राइपॉड का उपयोग करें तथा कैमरे या मोबाइल में एक्सपोज़र कम रखें, जिससे चंद्रमा की सतह के गड्ढे और पर्वतीय संरचनाएँ स्पष्ट दिखाई दें।
खगोलविद अमर पाल सिंह ने बताया कि 29 जुलाई 2026 का बक मून केवल एक सुंदर पूर्णिमा नहीं, बल्कि खगोल विज्ञान, प्रकृति, संस्कृति और भारतीय परंपरा का अद्भुत संगम है। यह अवसर हमें चंद्रमा की वैज्ञानिक समझ के साथ-साथ प्रकृति के उन मौसमी संकेतों की भी याद दिलाता है जिनके आधार पर विभिन्न सभ्यताओं ने सदियों तक समय और ऋतुओं का निर्धारण किया था। इसीलिए मौसम साफ़ होने पर आप इस बक मून/ गुरु पूर्णिमा की चाँदनी रात्रि का लुत्फ़ जरुर उठाएं साथ ही बच्चों को इसके वैज्ञानिक, सांस्कृतिक एवं प्राकृतिक कारणों से भी अवगत ज़रूर करवाएं,जिस से समाज में व्यापक रूप से वैज्ञानिक दृष्टिकोण पुष्ट होता है।
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हर-हर महादेव के जयघोष के साथ संपन्न हुआ श्री श्री प्राचीन शिव मंदिर का वार्षिक उत्सव, सामूहिक रुद्राभिषेक और विशाल भंडारे में उमड़ा आस्था का सैलाब
गोरखपुर ब्यूरो निष्पक्ष टुडे :-
जनप्रिय विहार कॉलोनी में हजारों श्रद्धालुओं ने लिया भगवान शिव का आशीर्वाद, धार्मिक आयोजन ने दिया सामाजिक एकता और सेवा का संदेश।
गोरखपुर।जनप्रिय विहार कॉलोनी स्थित श्री श्री प्राचीन शिव मंदिर में आयोजित तीन दिवसीय वार्षिक उत्सव का मंगलवार को सामूहिक रुद्राभिषेक और विशाल भंडारे के साथ भव्य एवं श्रद्धापूर्ण समापन हो गया। पूरे दिन मंदिर परिसर हर-हर महादेव और ॐ नमः शिवाय के जयघोष से गूंजता रहा।
सुबह आयोजित सामूहिक रुद्राभिषेक में बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं ने वैदिक मंत्रोच्चार के बीच भगवान भोलेनाथ का जलाभिषेक, दुग्धाभिषेक एवं पूजन-अर्चन कर परिवार की सुख-समृद्धि, स्वास्थ्य और विश्व कल्याण की कामना की।

धार्मिक अनुष्ठान के दौरान मंदिर परिसर भक्तिमय वातावरण में डूबा रहा।
शाम 6 बजे से प्रारंभ हुए विशाल भंडारे में श्रद्धालुओं की लंबी कतारें देखने को मिलीं। महिलाओं, बुजुर्गों, युवाओं और बच्चों सहित बड़ी संख्या में लोगों ने प्रसाद ग्रहण कर आयोजन की गरिमा को बढ़ाया। मंदिर समिति एवं स्थानीय स्वयंसेवकों ने पूरे कार्यक्रम की व्यवस्थाओं को सुव्यवस्थित ढंग से संभाला, जिसकी श्रद्धालुओं ने सराहना की।
इससे पहले वार्षिक उत्सव के अंतर्गत संगीतमय सुंदरकांड पाठ, महिला मंडल द्वारा शिव चर्चा तथा प्रसाद वितरण जैसे धार्मिक कार्यक्रम भी सफलतापूर्वक आयोजित किए गए, जिनमें क्षेत्र के लोगों की उल्लेखनीय भागीदारी रही।
मंदिर समिति ने आयोजन को सफल बनाने में सहयोग देने वाले सभी श्रद्धालुओं, दानदाताओं, स्वयंसेवकों एवं क्षेत्रवासियों के प्रति आभार व्यक्त करते हुए कहा कि ऐसे धार्मिक आयोजन समाज में आस्था, सेवा, भाईचारे और सामाजिक समरसता को सुदृढ़ करने का कार्य करते हैं।
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कारगिल शहीद प्रदीप थापा के स्मारक पर भाजपा नेताओं ने दी श्रद्धांजलि
कारगिल शहीद प्रदीप थापा के स्मारक पर भाजपा नेताओं ने दी श्रद्धांजलि
– माल्यार्पण कर लगाए भारत माता के जयघोष, वीर जवानों के बलिदान को किया नमन
– कारगिल विजय को बताया भारतीय सेना के शौर्य और पराक्रम का प्रतीकअरविंद कुमार (ब्यूरो चीफ नौतनवा)
नौतनवा : कारगिल विजय दिवस पर रविवार को नौतनवा स्थित कारगिल शहीद प्रदीप कुमार थापा के स्मारक पर श्रद्धांजलि सभा का आयोजन किया गया। भाजपा नेता जितेंद्र जायसवाल ने शहीद की प्रतिमा पर माल्यार्पण कर श्रद्धासुमन अर्पित किए और भारत माता के जयघोष लगाए।
उन्होंने कहा कि कारगिल की दुर्गम चोटियों पर भारतीय सेना ने अदम्य साहस, वीरता और पराक्रम का परिचय देते हुए दुश्मनों को परास्त कर देश की सीमाओं की रक्षा की थी। शहीदों का सर्वोच्च बलिदान सदैव देशवासियों को राष्ट्रभक्ति और मातृभूमि की सेवा के लिए प्रेरित करता रहेगा। उन्होंने कहा कि कारगिल के अमर वीरों का त्याग कभी भुलाया नहीं जा सकता।
इस अवसर पर बाबूलाल मद्धेशिया, पिंटू वर्मा, विंध्याचल मद्धेशिया, राधेश्याम गुप्ता, उमेश गौतम, सुनील गुप्ता सहित अन्य लोग उपस्थित रहे। -

शानदार पेंटिंग और मेहनत के दम पर कासिनी रस्तोगी ने परीक्षा में हासिल किया प्रथम स्थान
गोरखपुर ब्यूरो निष्पक्ष टुडे :-
लिटिल फ्लावर स्कूल, चारगांवा की कक्षा प्रथम की छात्रा ने उत्कृष्ट प्रतिभा का किया प्रदर्शन, विद्यालय और परिवार में खुशी का माहौल
गोरखपुर। लिटिल फ्लावर स्कूल, चारगांवा की कक्षा प्रथम की छात्रा कासिनी रस्तोगी ने अपनी शानदार प्रतिभा, मेहनत और उत्कृष्ट प्रदर्शन के बल पर परीक्षा में प्रथम स्थान प्राप्त कर विद्यालय एवं अपने परिवार का नाम रोशन किया है।

माया बाजार पश्चिम, गोरखपुर निवासी 6 वर्षीय कासिनी रस्तोगी, पुत्री ऋषभ रस्तोगी एवं शिवन्या रस्तोगी, ने शानदार पेंटिंग बनाकर अपनी रचनात्मक प्रतिभा का भी प्रभावशाली प्रदर्शन किया। पढ़ाई के साथ-साथ कला के क्षेत्र में कासिनी की प्रतिभा ने सभी को प्रभावित किया है।

कासिनी की इस शानदार उपलब्धि पर विद्यालय के प्रधानाचार्य, शिक्षकों और अभिभावकों ने उन्हें हार्दिक बधाई दी तथा उनके उज्ज्वल भविष्य की कामना की। विद्यालय परिवार ने विश्वास जताया कि कासिनी भविष्य में भी शिक्षा और रचनात्मकता के क्षेत्र में नए कीर्तिमान स्थापित करेंगी।
कासिनी रस्तोगी की सफलता से विद्यालय में हर्ष का माहौल है। उनकी उपलब्धि ने अन्य विद्यार्थियों को भी मेहनत, लगन और उत्कृष्ट प्रदर्शन के लिए प्रेरित किया है।
विद्यालय परिवार और परिजनों ने कासिनी के उज्ज्वल भविष्य की कामना करते हुए कहा कि उनकी यह सफलता आगे आने वाली बड़ी उपलब्धियों की मजबूत नींव है।



























