क्षणे क्षणे बदले तहरो मिजाज बबुनी, धोखेबाज बबुनी उड़नबाज बबुनी
काहे लउके ना अब तहरा बंगाल बबुनी ? उड़नबाज बबुनी चालबाज बबुनी ।
कतना सुविधा मिलल ?
कतना पईसवा ?
बंगला आ गाड़ी मिलल ,
आ कि जमीनवा ?
दीदीया का देहली तोहके ?
हमके बताव,
साची साची कह बहिना ,
कुछो ना छिपाव,
कईसे कईल जाई तहरो इलाज बबुनी? धोखेबाज बबुनी उड़नबाज बबुनी ।
सबे खराबी दिखे ,
तहरा ही देश में ।
बड़ तू गद्दार बाड़ू,
हिन्दू के भेष में ।
छाती रोज पिटतारू,
रोजगार चाही ।
एगो दूगो आऊर ,
औडी सौडी कार चाही।
केतना केतना घटिया तहरो मिजाज बबुनी ? धोखेबाज बबुनी उड़नबाज बबुनी ।
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