- दीपावली पर यूपी-112 की बढ़ेगी सक्रियता, संवेदनशील इलाकों में मुस्तैद रहेंगी पीआरवी
डीजी यूपी-112 बिनोद कुमार सिंह ने वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए की तैयारियों की समीक्षा, सभी पीआरवी को 100 प्रतिशत उपलब्ध रखने के निर्देश, जनशक्ति और तकनीकी खराबी के नाम पर वाहन बंद रहने पर जताई सख्त नाराजगी
लखनऊ।दीपावली के त्योहार को शांतिपूर्ण, सुरक्षित और व्यवस्थित ढंग से संपन्न कराने के लिए उत्तर प्रदेश पुलिस ने अपनी तैयारियां तेज कर दी हैं। त्योहार के दौरान प्रदेश के सभी जिलों में आपातकालीन पुलिस सहायता व्यवस्था को और अधिक प्रभावी बनाने के उद्देश्य से यूपी-112 की सक्रियता बढ़ाई जाएगी। विशेष रूप से संवेदनशील इलाकों, भीड़भाड़ वाले बाजारों, प्रमुख मार्गों, धार्मिक स्थलों और उन स्थानों पर अतिरिक्त सतर्कता बरती जाएगी, जहां पूर्व में किसी प्रकार की अप्रिय घटना सामने आई है। इसके लिए पुलिस रिस्पांस व्हीकल (पीआरवी) की तैनाती को व्यवस्थित करने के साथ ही उनकी शत-प्रतिशत उपलब्धता सुनिश्चित करने के निर्देश दिए गए हैं।
डीजी यूपी-112 बनोद कुमार सिंह ने वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से प्रदेश के सभी जिलों के अधिकारियों के साथ बैठक कर दीपावली की तैयारियों की विस्तृत समीक्षा की। बैठक में उन्होंने स्पष्ट किया कि त्योहार के दौरान आम नागरिकों को आपातकालीन पुलिस सहायता प्राप्त करने में किसी प्रकार की परेशानी नहीं होनी चाहिए। किसी भी सूचना पर पुलिस की प्रतिक्रिया त्वरित और प्रभावी होनी चाहिए। इसके लिए सभी जिलों को अपने-अपने क्षेत्र की परिस्थितियों के अनुसार सुरक्षा व्यवस्था की समीक्षा करने और पीआरवी की तैनाती का नया खाका तैयार करने को कहा गया है।
डीजी ने अधिकारियों को निर्देशित किया कि दीपावली के अवसर पर प्रदेश में यूपी-112 की सभी पीआरवी को 100 प्रतिशत उपलब्ध रखा जाए। किसी भी परिस्थिति में जनशक्ति की कमी अथवा तकनीकी खराबी का हवाला देकर किसी वाहन को बंद नहीं रखा जाना चाहिए। उन्होंने कहा कि आपातकालीन पुलिस सेवा का उद्देश्य नागरिकों को जरूरत के समय तत्काल सहायता उपलब्ध कराना है। ऐसे में पीआरवी की अनुपलब्धता या लापरवाही से आम जनता को परेशानी नहीं होनी चाहिए।
पूर्व की घटनाओं के आधार पर चिह्नित होंगे संवेदनशील क्षेत्र
दीपावली के दौरान सुरक्षा व्यवस्था को मजबूत बनाने के लिए प्रत्येक थाना क्षेत्र में संवेदनशील स्थानों की पहचान की जाएगी। इसके लिए पूर्व में घटित घटनाओं, आपातकालीन पुलिस सहायता के लिए प्राप्त सूचनाओं और स्थानीय परिस्थितियों का अध्ययन किया जाएगा। इन सभी तथ्यों के आधार पर थाना क्षेत्रवार हॉटस्पॉट चिह्नित किए जाएंगे।
हॉटस्पॉट की पहचान का उद्देश्य उन स्थानों पर पहले से पुलिस की मौजूदगी सुनिश्चित करना है, जहां त्योहार के दौरान किसी प्रकार की अव्यवस्था या आपातकालीन स्थिति उत्पन्न होने की आशंका हो सकती है। संबंधित थाना प्रभारी और जिला स्तर के अधिकारी अपने क्षेत्रों का आकलन कर ऐसे स्थानों की सूची तैयार करेंगे। इसमें बाजार, प्रमुख चौराहे, आवागमन के व्यस्त मार्ग, संवेदनशील बस्तियां और अन्य महत्वपूर्ण स्थान शामिल किए जा सकते हैं।
डीजी ने कहा कि सुरक्षा व्यवस्था केवल सामान्य तैनाती तक सीमित नहीं रहनी चाहिए, बल्कि स्थानीय जरूरतों के अनुसार पुलिस संसाधनों का उपयोग किया जाना चाहिए। जिस क्षेत्र में पूर्व में अधिक आपातकालीन सूचनाएं प्राप्त हुई हैं या जहां भीड़ अधिक रहती है, वहां पीआरवी की उपलब्धता को प्राथमिकता दी जाए। इससे किसी भी आपात स्थिति में पुलिस बल को मौके पर पहुंचने में अनावश्यक देरी नहीं होगी।
संवेदनशील स्थानों और प्रमुख मार्गों पर रहेगी पीआरवी की तैनाती
दीपावली के दौरान बाजारों और सार्वजनिक स्थानों पर लोगों की आवाजाही बढ़ जाती है। खरीदारी, पूजा-पाठ, दीपोत्सव और अन्य पारिवारिक गतिविधियों के कारण सड़कों पर सामान्य दिनों की अपेक्षा अधिक भीड़ रहती है। ऐसे में यातायात और कानून-व्यवस्था बनाए रखना पुलिस के लिए महत्वपूर्ण जिम्मेदारी होती है।
इसी को ध्यान में रखते हुए डीजी यूपी-112 ने सभी जिलों को निर्देश दिया कि संवेदनशील स्थानों और प्रमुख मार्गों पर पर्याप्त संख्या में पुलिस रिस्पांस व्हीकल तैनात रहें। पीआरवी की तैनाती इस प्रकार की जाए कि किसी भी क्षेत्र से आपातकालीन सूचना मिलने पर निकटतम उपलब्ध वाहन को तत्काल रवाना किया जा सके।
अधिकारियों को यह भी सुनिश्चित करने को कहा गया कि पीआरवी की तैनाती केवल कागजों तक सीमित न रहे। निर्धारित स्थानों पर वाहनों की वास्तविक उपलब्धता की नियमित जांच की जाए। ड्यूटी पर तैनात पुलिसकर्मियों को अपने क्षेत्र की भौगोलिक स्थिति, प्रमुख रास्तों और संवेदनशील स्थानों की जानकारी होनी चाहिए, ताकि आपातकालीन कॉल मिलने पर सही दिशा में शीघ्र पहुंचा जा सके।
गुरुवार तक मुख्यालय भेजना होगा संशोधित रूट चार्ट
यूपी-112 की कार्यप्रणाली को अधिक प्रभावी बनाने के लिए सभी जिलों को अपने-अपने क्षेत्र का संशोधित रूट चार्ट तैयार करने के निर्देश दिए गए हैं। डीजी ने स्पष्ट किया कि प्रत्येक जिले को अपने यहां की स्थानीय परिस्थितियों, संवेदनशील क्षेत्रों और प्रमुख मार्गों को ध्यान में रखते हुए पीआरवी की आवाजाही की योजना तैयार करनी होगी।
सभी जिलों को संशोधित रूट चार्ट गुरुवार तक यूपी-112 मुख्यालय भेजने का निर्देश दिया गया है। इस रूट चार्ट में पीआरवी की प्रस्तावित तैनाती और उनके निर्धारित क्षेत्रों का स्पष्ट उल्लेख होना चाहिए। इसका उद्देश्य यह है कि किसी भी आपातकालीन सूचना पर पुलिस रिस्पांस व्हीकल को सही दिशा में भेजा जा सके और सहायता पहुंचाने में समय की बर्बादी न हो।
रूट चार्ट तैयार करते समय संबंधित अधिकारियों को यह ध्यान रखना होगा कि त्योहार के दौरान बाजारों, प्रमुख चौराहों और भीड़भाड़ वाले मार्गों पर यातायात का दबाव बढ़ सकता है। इसलिए पीआरवी की तैनाती ऐसी होनी चाहिए, जिससे एक क्षेत्र में भीड़ बढ़ने की स्थिति में दूसरे क्षेत्रों की पुलिस सहायता व्यवस्था प्रभावित न हो।
जनशक्ति की कमी का बहाना नहीं चलेगा
बैठक में डीजी यूपी-112 ने पीआरवी की उपलब्धता को लेकर विशेष सख्ती दिखाई। उन्होंने स्पष्ट किया कि जनशक्ति की कमी अथवा तकनीकी खराबी के कारण कोई भी पीआरवी बंद नहीं रहनी चाहिए। त्योहार के दौरान पुलिस सहायता की मांग बढ़ सकती है, इसलिए सभी वाहनों को पूरी तरह कार्यशील स्थिति में रखना आवश्यक है।
उन्होंने अधिकारियों को निर्देश दिया कि यदि किसी वाहन में तकनीकी खराबी आती है तो उसका तत्काल समाधान कराया जाए। वाहन की मरम्मत, आवश्यक उपकरणों की उपलब्धता और अन्य तकनीकी जरूरतों को समय रहते पूरा किया जाए। किसी भी स्तर पर ऐसी लापरवाही नहीं होनी चाहिए, जिसके कारण पीआरवी लंबे समय तक सेवा से बाहर रहे।
इसी तरह पुलिसकर्मियों की उपलब्धता सुनिश्चित करने के लिए भी प्रभावी व्यवस्था बनाने पर जोर दिया गया। ड्यूटी रोस्टर तैयार करते समय इस बात का ध्यान रखा जाए कि किसी भी पीआरवी पर निर्धारित पुलिसकर्मियों की कमी न हो। यदि किसी कारण से कर्मियों की अनुपलब्धता की स्थिति बनती है तो वैकल्पिक व्यवस्था तत्काल की जाए।
डीजी ने अधिकारियों को यह संदेश दिया कि यूपी-112 प्रदेश की महत्वपूर्ण आपातकालीन पुलिस सेवा है। इसकी कार्यक्षमता सीधे आम नागरिकों की सुरक्षा और भरोसे से जुड़ी हुई है। इसलिए दीपावली जैसे बड़े त्योहार पर इस सेवा में किसी भी प्रकार की शिथिलता स्वीकार नहीं की जाएगी।
आरओआईपी पर पुलिसकर्मियों की शत-प्रतिशत उपस्थिति अनिवार्य
वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के दौरान डीजी ने आरओआईपी पर तैनात पुलिसकर्मियों की शत-प्रतिशत उपस्थिति सुनिश्चित करने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि सभी संबंधित अधिकारी यह जांच करें कि निर्धारित ड्यूटी पर पुलिसकर्मी समय से उपस्थित हों और अपने दायित्वों का सही तरीके से निर्वहन करें।
ड्यूटी शुरू होने से पहले पुलिसकर्मियों की नियमित ब्रीफिंग कराई जाए। उन्हें त्योहार के दौरान संभावित चुनौतियों, संवेदनशील स्थानों, निर्धारित रूट और आपातकालीन परिस्थितियों में अपनाई जाने वाली प्रक्रिया की जानकारी दी जाए। ब्रीफिंग के दौरान यह भी स्पष्ट किया जाए कि आम नागरिकों के साथ व्यवहार संयमित, सहयोगात्मक और संवेदनशील होना चाहिए।
पुलिसकर्मियों को यह समझाया जाए कि किसी भी आपातकालीन सूचना को गंभीरता से लेना उनकी प्राथमिक जिम्मेदारी है। सूचना प्राप्त होने के बाद संबंधित पीआरवी को तत्काल रवाना करना और मौके पर पहुंचकर आवश्यक पुलिस सहायता उपलब्ध कराना सुनिश्चित किया जाए।
पीआरवी की नियमित चेकिंग के निर्देश
डीजी ने सभी जिलों में पीआरवी की नियमित चेकिंग कराने पर भी जोर दिया। उन्होंने कहा कि वाहनों की स्थिति, आवश्यक उपकरणों और ड्यूटी से संबंधित व्यवस्थाओं की समय-समय पर जांच होनी चाहिए।
पीआरवी के निरीक्षण के दौरान यह देखा जाए कि वाहन पूरी तरह चालू स्थिति में है या नहीं। इसके अलावा ड्यूटी पर तैनात पुलिसकर्मियों की उपस्थिति, वाहन के आवश्यक दस्तावेज और उपलब्ध संसाधनों की भी जांच की जाए। यदि किसी प्रकार की कमी सामने आती है तो उसे तत्काल दूर कराया जाए।
निरीक्षण की व्यवस्था केवल औपचारिकता बनकर नहीं रहनी चाहिए। अधिकारियों को वास्तविक स्थिति का आकलन करना होगा। त्योहार के दौरान लगातार गश्त और त्वरित पुलिस सहायता की आवश्यकता को देखते हुए वाहनों का नियमित रखरखाव भी महत्वपूर्ण है।
डीजी ने अधिकारियों को निर्देश दिया कि वे स्वयं भी समय-समय पर व्यवस्था की समीक्षा करें और यह सुनिश्चित करें कि पीआरवी निर्धारित जिम्मेदारियों का पालन कर रही हैं।
16 अक्टूबर को जारी संशोधित एसओपी का कड़ाई से पालन
बैठक में 16 अक्टूबर को जारी संशोधित मानक संचालन प्रक्रिया (एसओपी) के अनुपालन पर भी विशेष जोर दिया गया। डीजी ने सभी संबंधित अधिकारियों को निर्देश दिया कि संशोधित एसओपी का कड़ाई से पालन कराया जाए।
एसओपी के तहत निर्धारित प्रक्रियाओं और जिम्मेदारियों के अनुसार ही पुलिसकर्मियों को काम करना होगा। अधिकारियों को यह सुनिश्चित करना होगा कि सभी संबंधित कर्मियों को संशोधित दिशा-निर्देशों की जानकारी हो और उनका पालन व्यवहार में भी दिखाई दे।
किसी भी आपातकालीन सूचना पर निर्धारित प्रक्रिया के अनुसार कार्रवाई की जाए। कॉल प्राप्त होने, संबंधित पीआरवी को सूचना देने, मौके पर पहुंचने और आवश्यक सहायता उपलब्ध कराने के बीच समन्वय बना रहना चाहिए। इस पूरी प्रक्रिया में किसी प्रकार की अनावश्यक देरी नहीं होनी चाहिए।
डीजी ने कहा कि त्योहार के दौरान पुलिस की जिम्मेदारी और अधिक बढ़ जाती है। इसलिए सभी अधिकारियों और कर्मचारियों को निर्धारित दिशा-निर्देशों के अनुसार अपनी ड्यूटी पूरी सतर्कता से करनी होगी।
आपातकालीन सहायता में देरी और लापरवाही पर सख्त रुख
दीपावली के अवसर पर यूपी-112 के माध्यम से मिलने वाली आपातकालीन सूचनाओं पर त्वरित कार्रवाई करना पुलिस की प्राथमिकता होगी। डीजी ने स्पष्ट किया कि किसी भी नागरिक को पुलिस सहायता प्राप्त करने के लिए अनावश्यक इंतजार नहीं करना पड़े। सूचना मिलने के बाद संबंधित अधिकारियों और पीआरवी कर्मियों को सक्रियता के साथ कार्रवाई करनी होगी।
उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि आपातकालीन पुलिस सहायता में देरी या लापरवाही की कोई गुंजाइश नहीं है। किसी भी सूचना को हल्के में नहीं लिया जाना चाहिए। चाहे मामला कानून-व्यवस्था से जुड़ा हो, सार्वजनिक स्थान पर विवाद हो अथवा किसी अन्य प्रकार की आपात स्थिति, पुलिस को निर्धारित प्रक्रिया के अनुसार तत्काल कार्रवाई करनी होगी।
यूपी-112 की प्रभावशीलता इस बात पर निर्भर करती है कि जरूरतमंद व्यक्ति को कितनी जल्दी सहायता मिलती है। इसलिए सभी जिलों को अपने स्तर पर ऐसी व्यवस्था बनाने के निर्देश दिए गए हैं, जिससे सूचना और पुलिस रिस्पांस के बीच बेहतर तालमेल बना रहे।
जिलों के अधिकारियों की होगी महत्वपूर्ण भूमिका
दीपावली की तैयारियों को सफल बनाने में जिला स्तर के अधिकारियों की भूमिका महत्वपूर्ण होगी। प्रत्येक जिले में स्थानीय परिस्थितियों के अनुसार सुरक्षा व्यवस्था की समीक्षा की जाएगी। संबंधित अधिकारियों को अपने-अपने क्षेत्रों की वास्तविक स्थिति का आकलन कर आवश्यक कदम उठाने होंगे।
थाना स्तर पर संवेदनशील क्षेत्रों की पहचान, पीआरवी की तैनाती, रूट चार्ट का निर्धारण और पुलिसकर्मियों की उपलब्धता जैसे विषयों पर विशेष ध्यान दिया जाएगा। इसके साथ ही मुख्यालय को भेजे जाने वाले संशोधित रूट चार्ट में सभी आवश्यक जानकारियां शामिल करनी होंगी।
अधिकारियों को यह भी ध्यान रखना होगा कि किसी एक क्षेत्र में अधिक पुलिस संसाधन लगाने से दूसरे क्षेत्र की व्यवस्था कमजोर न हो। इसलिए संसाधनों का संतुलित उपयोग और आपसी समन्वय आवश्यक होगा।
त्योहार पर आम नागरिकों की सुरक्षा सर्वोच्च प्राथमिकता
दीपावली खुशियों, रोशनी और आपसी सौहार्द का पर्व है। इस दौरान बड़ी संख्या में लोग बाजारों में खरीदारी करने निकलते हैं। परिवारों में पूजा-पाठ और सामाजिक कार्यक्रम आयोजित होते हैं। ऐसे में सार्वजनिक स्थानों पर सुरक्षा व्यवस्था बनाए रखना प्रशासन और पुलिस के लिए महत्वपूर्ण जिम्मेदारी होती है।
यूपी-112 की सक्रियता बढ़ने से आम नागरिकों को आपातकालीन परिस्थितियों में समय पर पुलिस सहायता मिलने की उम्मीद है। संवेदनशील इलाकों में पीआरवी की मौजूदगी से पुलिस की पहुंच और प्रतिक्रिया व्यवस्था को मजबूत किया जा सकेगा।
पुलिस अधिकारियों का प्रयास रहेगा कि दीपावली के दौरान प्रदेश में शांति और कानून-व्यवस्था बनी रहे। इसके लिए यूपी-112 के साथ-साथ स्थानीय पुलिस की सक्रियता और समन्वय भी महत्वपूर्ण होगा।
मुख्यालय स्तर से तैयारियों की निगरानी
डीजी यूपी-112 की ओर से वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से की गई समीक्षा का उद्देश्य केवल निर्देश जारी करना नहीं, बल्कि प्रदेश के सभी जिलों में उनकी प्रभावी अनुपालना सुनिश्चित करना भी है। संशोधित रूट चार्ट मुख्यालय भेजे जाने के बाद संबंधित व्यवस्थाओं का आकलन किया जा सकेगा। आरओआईपी पर पुलिसकर्मियों की उपस्थिति, नियमित ब्रीफिंग और वाहनों की चेकिंग जैसे बिंदुओं पर अधिकारियों को विशेष ध्यान देना होगा। साथ ही 16 अक्टूबर को जारी संशोधित एसओपी के अनुपालन की जिम्मेदारी भी संबंधित अधिकारियों की होगी।
डीजी ने साफ संदेश दिया कि दीपावली के दौरान यूपी-112 की कार्यप्रणाली में किसी भी प्रकार की लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी। सभी पीआरवी को पूरी क्षमता के साथ उपलब्ध रखना और जरूरतमंद नागरिकों को समय पर सहायता पहुंचाना अनिवार्य है।
कुल मिलाकर, दीपावली को सुरक्षित और शांतिपूर्ण बनाने के लिए उत्तर प्रदेश पुलिस ने यूपी-112 की आपातकालीन व्यवस्था को मजबूत करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम उठाए हैं। संवेदनशील स्थानों की पहचान, पीआरवी की शत-प्रतिशत उपलब्धता, संशोधित रूट चार्ट, पुलिसकर्मियों की नियमित ब्रीफिंग और एसओपी के कड़ाई से पालन के माध्यम से पुलिस रिस्पांस व्यवस्था को अधिक प्रभावी बनाने का प्रयास किया जा रहा है। अब जिलों के अधिकारियों की जिम्मेदारी होगी कि वे इन निर्देशों को धरातल पर लागू करें, ताकि त्योहार के दौरान प्रदेश के नागरिकों को जरूरत पड़ने पर तत्काल और प्रभावी पुलिस सहायता मिल सके

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