गोरखपुर । दिग्विजयनाथ पी.जी. कॉलेज, गोरखपुर के हिन्दी विभाग एवं गोरखनाथ साहित्यिक केन्द्र के संयुक्त तत्वावधान में ‘रामचरित और भक्ति का स्वरूप’ विषय पर एक विशिष्ट व्याख्यान का आयोजन किया गया।
कार्यक्रम के मुख्य अतिथि, मास्को स्टेट यूनिवर्सिटी के एसोसिएट प्रोफेसर डॉ. मैक्सिम डेमचेन्को ने कहा कि, भारत केवल भारतवासियों की ही माता नहीं, बल्कि पूरे संसार की माता है, क्योंकि यहां अयोध्या धाम है, जो समस्त विश्व की आध्यात्मिक राजधानी है। डॉ. डेमचेन्को ने बताया कि हिन्दी भाषा शब्दकोष स्तर पर विश्व की सबसे समृद्ध भाषाओं में एक है और वैश्विक स्तर पर अपना महत्व बढ़ा रही है।
पूर्व वरिष्ठ रेल अधिकारी श्री रणविजय सिंह ने अध्यक्षीय संबोधन में कहा कि मर्यादा का स्वरूप विश्वव्यापी है, और रामचरित मानस भी इसी कारण सार्वभौमिक महत्व रखता है। उन्होंने कहा कि श्रीराम के जीवन के प्रत्येक प्रसंग में मर्यादा का अद्भुत उदाहरण मिलता है।
महाविद्यालय के प्राचार्य प्रो. ओम प्रकाश सिंह ने आभार ज्ञापन करते हुए कहा कि आज भी रामकथा की प्रासंगिकता विश्व के अनेक देशों में बनी हुई है।
कार्यक्रम का संचालन डॉ. विभा सिंह और अतिथि परिचय डॉ. अदिति दुबे ने किया।
इस अवसर पर प्रो. पृथ्वीराज सिंह, प्रो. नित्यानन्द श्रीवास्तव, प्रो. परीक्षित सिंह, प्रो. अर्चना सिंह, डॉ. रामप्रसाद यादव, डॉ. इन्द्रेश पाण्डेय, डॉ. अनिल भाष्कर, डॉ. धीरज सिंह, डॉ. पवन पाण्डेय, डॉ. सुनील सिंह, डॉ. शिव कुमार, डॉ. शुभ्रांशु शेखर सिंह, नवीन सिंह सहित महाविद्यालय के शिक्षक, कर्मचारी व विद्यार्थी उपस्थित रहे। कार्यक्रम की जानकारी महाविद्यालय के मीडिया प्रभारी डॉ. शैलेश कुमार सिंह ने दी।
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