गोला बाजार। गोला क्षेत्र के धौरहरा गांव में चल रही नव दिवसीय श्रीमद्भागवत कथा के सातवें दिन व्यासपीठ से कथा का रसपान कराते हुए आचार्य ब्रह्मानंद शास्त्री ने कहा कि भागवत कथा और राम कथा मानव चरित्र निर्माण का साधन है। जब मनुष्य अपनी मनुष्यता को भूल पशुवत जीवन जीने लगता है तो हमारे सनातन धर्म के पवित्र ग्रन्थों के कथानक उनके जीवन सुधार में सहायक होते हैं। जैसे अपने चेहरे को संवारने के लिए हम अपना मुख दर्पण में देखते हैं। हम ठीक वैसे ही मानव चरित्र सुधारने के लिए यह शास्त्र रुपी दर्पण सहायक होते हैं, आपका आपसे परिचय कराते हैं। हमारे जीवन ध्रुव, प्रहलाद की तरह या हिरण्यकशिपु, शिशुपाल की तरह है।
कथा के अंत में मुख्य यजमान सपत्नीक गुलाब तिवारी ने भागवत भगवान की आरती कर भागवत कथा श्रवण करने पधारे सभी कथा प्रेमियों का आभार प्रकट किया।
यहां पर उमाशंकर तिवारी, श्रीनारायण दुबे, दुर्गा दुबे, बबुना दुबे, हरिश्चंद्र दुबे, संतोष शुक्ला, रामकवल दुबे, गामा यादव, डा. विश्वनाथन यादव सहित सैकड़ों की संख्या में लोग कथा अमृत रसपान किया.
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