भारत ने भविष्य के युद्धपोतों के लिए इलेक्ट्रिक प्रपोल्शन  प्रणाली पर सहयोग करने के लिए यू.के. के साथ एक समझौते पर हस्ताक्षर किए हैं

भारत ने भविष्य के युद्धपोतों के लिए इलेक्ट्रिक प्रपोल्शन  प्रणाली पर सहयोग करने के लिए यू.के. के साथ एक समझौते पर हस्ताक्षर किए हैं,

इस समझौते को स्टेटमेंट ऑफ इंटेंट (एसओएल) के नाम से जाना जाता है, जिस पर 28 नवंबर, 2024 को पोर्ट्समाउथ, यू.के. में इलेक्ट्रिक प्रणोदन क्षमता भागीदारी पर संयुक्त कार्य समूह की तीसरी बैठक के दौरान हस्ताक्षर किए गए थे।

इस समझौते पर भारत के रक्षा मंत्रालय के संयुक्त सचिव (नौसेना प्रणाली) राजीव प्रकाश और यू.के. रक्षा मंत्रालय के जहाज संचालन और क्षमता एकीकरण के निदेशक रियर एडमिरल स्टीव मैकार्थी ने हस्ताक्षर किए।

इस समझौते के तहत, दोनों देश भारत के आगामी नौसैनिक जहाजों के लिए इलेक्ट्रिक प्रणोदन प्रणाली के डिजाइन, निर्माण और उत्पादन पर मिलकर काम करेंगे। इस सौदे के तहत पहली परियोजना भारतीय शिपयार्ड में बनाए जाने वाले लैंडिंग प्लेटफॉर्म डॉक्स (एलपीडी) का विकास है।

ये जहाज भारतीय नौसेना के पहले जहाजों में से होंगे जिनमें पूर्ण इलेक्ट्रिक प्रणोदन प्रणाली होगी। इस तकनीक से नौसेना संचालन की दक्षता में सुधार और पर्यावरणीय प्रभाव को कम करने की उम्मीद है।

यह सौदा भारतीय युद्धपोतों में रोल्स-रॉयस MT-30 गैस टर्बाइन के इस्तेमाल का रास्ता भी खोल सकता है।

ये टर्बाइन, जो पहले से ही यू.के. के एच.एम.एस. क्वीन एलिजाबेथ और एच.एम.एस. प्रिंस ऑफ वेल्स द्वारा इस्तेमाल किए जा रहे हैं, अपनी शक्ति और दक्षता के लिए जाने जाते हैं और संभावित रूप से भारत के भविष्य के विध्वंसक, फ्रिगेट और अन्य नौसैनिक जहाजों को शक्ति प्रदान कर सकते हैं।

इस सहयोग को विदेशी निर्मित इंजनों पर भारत की निर्भरता को कम करने के तरीके के रूप में भी देखा जा रहा है। वर्तमान में, भारतीय नौसेना अपने कई जहाजों में अमेरिका, रूस और यूक्रेन की प्रणोदन प्रणाली का उपयोग करती है।

यू.के. की उन्नत प्रणोदन तकनीक जल्द ही इनकी जगह ले सकती है, जिससे भारतीय नौसेना को स्थानीय रूप से प्राप्त और अत्याधुनिक समाधान मिल सकेंगे।

यह समझौता ब्रिटिश इंडो-पैसिफिक मंत्री कैथरीन वेस्ट के भारत दौरे के कुछ ही दिनों बाद हुआ है, जिससे दोनों देशों के बीच रक्षा संबंध और मजबूत हुए हैं।

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