ब्यूरो चीफ (आजमगढ़ मण्डल) सतीश चंद्र शुक्ल सत्पथी की खास रिपोर्ट,
जौनपुर। जनपद के कोने-कोने से आए फरियादियों की समस्याओं का सुगमता पूर्वक निस्तारण करने में जिले के वर्तमान जिलाधिकारी एवं कप्तान अव्वल साबित हो रहे है। बता दें कि इसके पूर्व के जिलाधिकारी की कार्यशैली कितनी बेहतर थी, उससे जनपद वासी भिज्ञ है, लेकिन वर्तमान डीएम डॉक्टर दिनेश चन्द्र सिंह, जिनके नाम का पर्याय सूर्य होता है, वह सूर्य की भांति जरूरत मन्द एवं पीड़ित व्यक्तियों के साथ न्याय निस्तारण में निरंतर दिलचस्पी लेते देखे गए हैं।
कौस्तुभ शब्द का कोई पर्यायवाची शब्द बना ही नहीं है। कौस्तुभ एक दिव्य रत्न है, जिसे भगवान विष्णु अपने वक्ष पर पहनते हैं। कौस्तुभ को कौस्तुभ मणि भी कहा जाता है। यह विरल संयोग है कि दोनों वरिष्ठ प्रशासनिक अधिकारियों ने अपने नाम के आगे डॉक्टर लिखवाने की महान उपलब्धि हासिल किया है। दोनों वर्तमान समय में जनपद के लिए बहुत ही गंभीर आचार विचार से कल्याणकारी सिद्ध हो रहे हैं।
यह संयोग ही है कि डॉ0 कौस्तुभ, न्याय, निष्ठा व सादगी के साथ सख्ती के परिचायक है, तो डॉक्टर दिनेश कुमार फटाफट अंदाज में जनता की समस्याओं को सुनते और बारीकी से विश्लेषण कर उनका निस्तारण करते देखे जाते हैं।
इस संवाददाता ने प्राय: यहीं पाया की दोनों अधिकारियों में उच्च कोटि की प्रशासनिक क्षमता है, जिससे जनपद दिनानुदिन गतिमान होते दिख रहा है, चाहे जिले की सुरक्षा – संरक्षा का प्रश्न हो या अपराध एवं अपराधियों को चिन्हित और गिरफ्तार करने का सवाल हो, एस पी के महफूज तेवर से जनपद में इस समय अपराधों पर लगाम लगा हुआ है। थानेदारों की स्थिति निहायत भयावह बनी हुई है। लोग उच्च अधिकारी तक बात न बिखरे इस पीड़ा में पुलिस के अधिकारी निरंतर गतिमान बने हुए हैं। जिले में जिलाधिकारी के रूप में अपने प्रभावी आगमन से जनता की समस्याओं को गंभीरता से सुनने उसको निपटाने के अंदाज के लिए जिलाधिकारी डाॅ0 दिनेश चंद्र काफी दिनों से लंबित मामलों को चंद मिनट में निपटाते और उसपर प्रभावी अमल कराने का श्रेय लेते हैं। यह कोई जादुई आंकड़ा नहीं है, कार्य है तो दिखेगा भी वर्तमान के कंप्यूटरीकृत इस युग में जहां मीडिया और शासन सत्ता से जुड़े लोग उच्च प्रशासनिक अधिकारियों की कमियां खोजने में अपनी उर्जा लगाते रहते हैं, वहीं यह दोनों अधिकारी अंगुल – अंगुल इंच विशुद्ध पारदर्शी अंदाज में आम जनमानस की भलाई करते देखे गए।
यहां यह भी उल्लेख करना जरूरी है कि जिलाधिकारी की सुरक्षा में लगे सुरक्षा अधिकारी की कमान संभालने वाले की भूमिका और अनुभव का लाभ जिलाधिकारी को निरन्तर मिल रहा है, जिससे अब वह कलेक्ट्रेट कर्मचारियों के लिए भयावह परीक्षा का सबब बनता दिख रहा हैं, जिसकी समूचे कलेक्ट्रेट परिसर में चर्चाएं खास है। यह बात दीगर है कि पुलिस विभाग ने अपने जिम्मेदार पुलिस अधिकारी की खोज खबर लेना मुनासिब नहीं समझा है और वह अपने सफलतम क्रियाकलापों में निरंतर मशगूल रहकर कार्यालय एवं जिलाधिकारी आवास पर बेहतर सुरक्षात्मक सेवायें देता आ रहा है। सत्ताधारी नेताओं विपक्षी नेताओं एवं निजी स्वार्थों की प्रतिपूर्ति करने वाले तमाम समाज सुधारकों ,जो निरन्तर अपनी फर्जी धाक जमाने के लिए डी एम , एस पी कार्यालय की प्रतिदिन परिक्रमा करते देखे जाते हैं, उन्हें यह सब आखिर कब दिखेगा । लोकतंत्र में कलम को हथियार के रूप में प्रयोग करने वाले ही सच को सच लिखने का साहस करते हैं ।
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