दान करना है तो सदैव गुप्त दान करना चाहिए – कात्यायनी दीदी

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ब्यूरो प्रभारी —-विनय तिवारी

बड़हलगंज/ गोरखपुर (निष्पक्ष टुडे) क़स्बे के जलेश्वर नाथ मन्दिर में चल रहे श्रीमद्भागवत कथा के सातवें दिन शुक्रवार को वृन्दावन धाम की प्रख्यात कथा वाचक कात्यायनी दीदी ने कहा कि भगवान कृष्ण ने अपनी मित्र सुदामा को बिना बताए धन धान्य से परिपूर्ण कर उनकी दरिद्रता दूर कर दिया ।कृष्ण एवं सुदामा की कथा हमें सिखाती है कि बिना किसी दिखावा किये मित्र के प्रति त्याग व समर्पण ही सच्ची मित्रता है। भगवान कृष्ण अपने भक्तों की पीड़ा को समझते हैं और उनका आशीर्वाद उन पर सदैव बना रहता हैं।

कथा वाचक कात्यायनी दीदी ने भगवान कृष्ण के मृत्यु के वृत्तांत के बारे में बताया कि एक शिकारी जारा ने कृष्ण को एक हिरण समझकर उन पर तीर चलाया। कृष्ण को पता था कि उनका समय समाप्त हो गया है, इसलिए उन्होंने जारा को कोई नुकसान नहीं पहुंचाया। जारा का तीर कृष्ण के पैर में लगा और उनकी मृत्यु हो गई। मृत्यु के बाद भगवान कृष्ण का शरीर भागवत में समा गया। कृष्ण के मृत्यु की कथा हमें सिखाती है कि जीवन और मृत्यु दोनों भगवान की इच्छा के अनुसार होते हैं। कथा वाचक कात्यायनी दीदी ने भागवत कथा की समाप्ति के पश्चात गुरु दक्षिणा में श्रद्धालुओं से अपने अपने बच्चों को संस्कारी बनाने का संकल्प दिलवाया।

कथा में सातवें दिन बड़ी संख्या में महिला-पुरूष कथा सुनने आए। व्यास पीठ की आरती पूर्व ब्लांक प्रमुख बिजय यादव ने किया। डॉ रजनीश ने कथा वाचक कात्यायनी दीदी को पुष्प गुच्छ भेंट देकर आशीर्वाद प्राप्त किया।

इस अवसर पर कथा के मुख्य आयोजक पंकज चौरसिया, अध्यक्ष धर्मेन्द्र मौर्या, लालजी वर्मा, विनोद वर्मा, डॉ रजनीश चौरसिया, संजय मौर्या, मनोज गुप्ता, सुनिल गुप्ता, रामप्यारे, डॉ पी. डी. राव , प्रमोद जायसवाल, राजेश उमर, सुरेन्द्र मोदनवाल, महेन्द्र जायसवाल, कृष्ण कुमार , हिमांशु शर्मा, ओमप्रकाश भुज, अनुराग निगम एवं दिलीप निगम सहित भारी संख्या में श्रद्धालु भागवत कथा का रसपान के लिए उपस्थित रहे।

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