“मनोकामनाओं की पूर्ति: भक्त यह मानते हैं कि माँ कोटही देवी सच्चे मन से की गई प्रार्थनाओं को सुनती हैं और उनकी इच्छाओं को पूरा करती हैं, हृदय से भक्तों का माता जी के प्रति अटूट विश्वास है”
ब्यूरो प्रभारी : संतोष कुमार त्रिपाठी, खजनी गोरखपुर।
खजनी। गोरखपुर देवी-देवताओं (विशेषकर मां दुर्गा) को समर्पित भक्तों की मनोकामनाएं पूर्ण करने की शक्ति रखती हैं कोटही माता तीन पिंडी के रूप में देवी मंदिर में स्थापित है, जहाँ भक्त माँ से अपनी इच्छाएँ पूरी करने के लिए प्रार्थना करते हैं। खासकर नवरात्रि जैसे त्योहारों के दौरान सबकी मुरादे पूर्ण करती है माता कोटही देवी। बंजारों के आराधना पर प्रकट हुई थीं माँ जगत की जननी।
रुद्रपुर खजनी में है प्राचीन माता कोटड़ी के मंदिर मे कुवार में नवरात्र के पर्व पर नवरात्रि के पहले दिन प्रथम शैलपुत्री के रूप में पूजा पाठ होता है सोमवार को रुद्रपुर स्थित मां कोटही मन्दिर में भक्तों का भोर के चार बजे से माता रानी के भक्तों का ताँता लगा रहा। मां के दर्शन व पूजन के लिए आस-पास के ही नहीं बल्कि दूर-दराज से भी श्रद्धालुओं का आगमन हो रहा है। ऐसी मान्यता है कि मां को यादकर जो भी मन्नतें मांगता है। उसकी मुरादें मां अवश्य पूर्ण करती है।
नवरात्रि के प्रथम दिन माता प्रथम दिन शैलपुत्री मां की पूजा आराधना करने में मां के भक्तों का तांता मंदिरों में देखने को मिला है, गोरखपुर से 18 किलोमीटर दूर खजनी रुद्रपुर गांव में स्थित माता कोटही देवी का सिद्ध पीठ मंदिर है इस मंदिर की महिमा अपरंपार है।
कोटही माता का महिमा अपरम्पार
माता जी का आशीर्वाद मिल जाने से कोई मुख्यमंत्री बना, तो कोई राज्यपाल बना, तो कोई मंत्री बना,तो कोई विधायक बना, कोई पहलवान बना । यही नहीं इस मंदिर पर पूजा अर्चना करने से इस क्षेत्र के आधा दर्जन लोग IAS PCS बन करके इस क्षेत्र के नाम को रोशन करने का काम किया है। सबसे बड़ी बात है कि वर्तमान के मुख्यमंत्री महंत योगी आदित्यनाथ ने भी इस मंदिर पर माथा टेका और आज उत्तर प्रदेश की कमान संभाले हुए हैं। कोटही मंदिर पर बहुत दूर-दूर से लोग आते हैं मां की पूजा अर्चना करते हैं और अपनी मुरादे को मां के सामने रखते हैं । साथ ही साथ आज तक इस मंदिर में सबको कुछ न कुछ तो दिया है।
कोटही माता के मंदिर का प्राचीन इतिहास
गोरखपुर शहर के दक्षिणांचल में 18 किमी के दूरी पर स्थित रुद्रपुर गांव से सटे पश्चिम व उत्तर दिशा के कोने पर मां कोटही का प्राचीन मन्दिर है। लोग बताते हैं कि यहां कभी बहुत बड़ा जंगल हुआ करता था। रात तो दूर दिन में भी भय के चलते लोगों का कभी इधर से आना-जाना नहीं होता था। इस घने जंगल में जानवरों एवं पंछियों के बीच केवल बंजारे ही रहते थे। उन्होंने ही अपने आराधना से मां कोटही को खुश किया और स्थापित मूर्ति के जगह ही मां ने प्रकट होकर उन्हें दर्शन दिया। बंजारे ही यहां मां कोटही की पिंडी स्थापित किए। उनके जाने के बाद जब धीरे-धीरे जंगल का कटान शुरू हुआ तो लोगों को एक पेड़ के नीचे पिंडी दिखाई दी। जहाँ बंजारों के होने के कई पहचान छुटे थे। इस पिंडी को शक्ति के रूप में पहचाना गया। उसी समय से लोगों ने पूजन-अर्चन शुरू कर दिया। बदलते समय के अनुसार रुद्रपुर के ही कुछ लोगों पिंडी के जगह मन्दिर का निर्माण करवाकर मूर्ति की स्थापना करवा दी। मां कोटही के दरबार में हर रोज सैकड़ों हाथ मन्नतों के लिए पसारे जाते हैं। भक्तगण कपूर, नारियल, अगरबत्ती लेकर पूजन-अर्चन करते हैं। चैत्र रामनवमी और दशहरा में यहाँ भव्य मेले का भी आयोजन रहता है।
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